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रेलवे ट्रैक पर पापड़ सुखाने का दावा, खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता पर उठे सवाल; वीडियो की पुष्टि बाकी

भागलपुर: रेलवे ट्रैक पर पापड़ सुखाए जाने के दावे ने खाद्य पदार्थों की स्वच्छता और सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि संबंधित वीडियो के भागलपुर का होने और घटना की तारीख की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। खाद्य सुरक्षा पर क्यों चिंता? रेलवे पटरियों के आसपास धूल, गंदगी और अन्य दूषित पदार्थ मौजूद हो सकते हैं। ऐसे स्थानों पर खाद्य सामग्री सुखाना स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। रेलवे की प्रतिक्रिया का इंतजार इस मामले में रेलवे प्रशासन या खाद्य सुरक्षा विभाग की किसी कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है। वीडियो के स्थान और प्रामाणिकता की जांच के बाद ही घटना का पूरा विवरण स्पष्ट हो सकेगा। जय राष्ट्र न्यूज़

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मधुबनी में पुलिस फायरिंग से एक की मौत, तीन घायल; सड़क पर हंगामा, डीएम का कॉलर पकड़ने का वीडियो वायरल

मधुबनी, बिहार: मधुबनी जिले के बाबूबरही थाना क्षेत्र के बलिराजगढ़ गांव में एक सहायक पुलिस अवर निरीक्षक (एएसआई) की कथित गोलीबारी से अशोक यादव की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग घायल हो गए। घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। क्या है पूरा मामला? रिपोर्टों के अनुसार घटना 2 और 3 नवंबर की दरम्यानी रात हुई। बलिराजगढ़ में तैनात एएसआई चंद्रमोहन सिंह पर एक महिला के घर में गलत नीयत से घुसने का आरोप लगा। ग्रामीणों ने पुलिसकर्मी को घेर लिया। इसी दौरान एएसआई ने कथित तौर पर अपनी सर्विस पिस्तौल से गोलियां चला दीं। गोली लगने से अशोक यादव की मौत हो गई और तीन लोग घायल हो गए। शव सड़क पर रखकर किया प्रदर्शन घटना से नाराज ग्रामीणों ने खोजपुर के पास मुख्य सड़क पर शव रखकर जाम लगा दिया। प्रदर्शनकारियों ने आरोपी पुलिसकर्मी की गिरफ्तारी, पीड़ित परिवार को मुआवजा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। सड़क जाम के कारण आसपास के कई क्षेत्रों में यातायात प्रभावित हुआ। डीएम आनंद शर्मा के सामने फूटा गुस्सा स्थिति संभालने के लिए जिलाधिकारी आनंद शर्मा और पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार मौके पर पहुंचे। डीएम ने पीड़ित परिवार से बातचीत कर उन्हें शांत करने का प्रयास किया। इसी दौरान कुछ महिलाओं ने नाराजगी जताते हुए उनका कॉलर पकड़ लिया और धक्का-मुक्की की। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। आरोपी एएसआई पर ₹25 हजार का इनाम पुलिस के अनुसार आरोपी एएसआई चंद्रमोहन सिंह को निलंबित करने की कार्रवाई शुरू की गई और उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें गठित की गई हैं। उसकी जानकारी देने वाले के लिए ₹25 हजार का इनाम भी घोषित किया गया है। प्रशासन ने दिया कार्रवाई का आश्वासन जिलाधिकारी ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और नियमानुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। फिलहाल पुलिस गोलीबारी की परिस्थितियों की जांच कर रही है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगी। स्रोत: दैनिक जागरण, एनडीटीवी, जनसत्ता, हिंदुस्तान। जय राष्ट्र न्यूज़

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‘विकसित भारत 2047’ के लिए हर नागरिक में जागें भगवान राम के आदर्श: पीएम मोदी

अयोध्या: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के ध्वजारोहण समारोह में भगवान राम के आदर्शों को विकसित भारत के निर्माण से जोड़ते हुए देशवासियों को महत्वपूर्ण संदेश दिया था। उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए नागरिकों को भगवान राम के जीवन मूल्यों से प्रेरणा लेनी होगी। भगवान राम के आदर्शों पर दिया जोर प्रधानमंत्री ने 25 नवंबर 2025 को अयोध्या में आयोजित समारोह में भगवान श्रीराम को सत्य, मर्यादा, धर्म, विनम्रता और कर्तव्य का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि भगवान राम का जीवन समाज को न्याय, सद्भाव और जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा देता है। विकसित भारत 2047 से जोड़ा संदेश पीएम मोदी ने कहा कि भगवान राम केवल आस्था के प्रतीक नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों और आदर्शों के मार्गदर्शक भी हैं। उन्होंने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित और समाज को सामर्थ्यवान बनाने के लिए प्रत्येक नागरिक को इन आदर्शों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। धर्म ध्वजारोहण समारोह में दिया संदेश अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में आयोजित समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने धर्म ध्वजा फहराई थी। उन्होंने इस आयोजन को भारतीय सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय एकता से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर बताया। हर नागरिक की भागीदारी जरूरी प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल सरकार के प्रयासों से पूरा नहीं होगा। इसके लिए समाज के सभी वर्गों को अपने कर्तव्यों का पालन करना होगा। उन्होंने देशवासियों से सत्य, अनुशासन, सेवा और सामाजिक सद्भाव जैसे मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया। स्रोत: प्रधानमंत्री कार्यालय, प्रेस सूचना ब्यूरो, 25 नवंबर 2025 का आधिकारिक संबोधन। जय राष्ट्र न्यूज़

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धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर विवाद तेज, पप्पू यादव FIR दर्ज कराने पहुंचे थाने; भगवान कृष्ण पर टिप्पणी को लेकर नाराजगी

नई दिल्ली, 4 नवंबर 2026: बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की भगवान श्रीकृष्ण पर की गई टिप्पणी को लेकर विवाद बढ़ गया है। बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने 3 नवंबर को दिल्ली के संसद मार्ग पुलिस थाने पहुंचकर उनके खिलाफ लिखित शिकायत दी और कानूनी कार्रवाई की मांग की। क्या है पूरा विवाद? मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में 29 अक्टूबर को आयोजित श्रीराम कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान राम और श्रीकृष्ण की मुद्राओं की तुलना की थी। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की त्रिभंग मुद्रा, बांसुरी और वृंदावन का उल्लेख करते हुए कुछ टिप्पणियां की थीं। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कई धार्मिक और राजनीतिक नेताओं ने आपत्ति जताई। पप्पू यादव ने दर्ज कराई शिकायत सांसद पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी से श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने संसद मार्ग थाने में शिकायत देकर भारतीय न्याय संहिता की धारा 299 के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की। हालांकि शिकायत दिए जाने और औपचारिक प्राथमिकी दर्ज होने में अंतर है। पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज करने की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। अखिलेश और तेजस्वी ने भी जताई नाराजगी समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल नेता तेजस्वी यादव और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भी धीरेंद्र शास्त्री के बयान की आलोचना की है। मथुरा और वृंदावन के कुछ संतों ने भी टिप्पणी पर नाराजगी जताते हुए धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने की अपील की। धीरेंद्र शास्त्री ने मांगी माफी विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने वीडियो जारी कर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी प्रेम और विनोद के भाव में की गई थी तथा भगवान श्रीकृष्ण का अपमान करने का उनका कोई उद्देश्य नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनकी बातों से किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुंची है, तो वह क्षमा मांगते हैं। अब पुलिस कार्रवाई पर नजर पप्पू यादव की शिकायत के बाद मामला पुलिस तक पहुंच गया है। आगे की कार्रवाई शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच पर निर्भर करेगी। स्रोत: आज तक, एबीपी न्यूज़, हिंदुस्तान, टीवी9 भारतवर्ष। जय राष्ट्र न्यूज़

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रिलायंस जियो की अमेरिकी कंपनियों से बातचीत, वायरलेस ब्रॉडबैंड तकनीक के बदले हिस्सेदारी लेने की तैयारी

नई दिल्ली, 4 नवंबर 2026: मुकेश अंबानी की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना कारोबार बढ़ाने की तैयारी कर रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार जियो ने अमेरिकी कंपनियों Comcast और Charter Communications के साथ अपनी वायरलेस ब्रॉडबैंड तकनीक उपलब्ध कराने के बदले संभावित इक्विटी हिस्सेदारी लेने पर बातचीत की है। क्या है जियो की नई योजना? रिपोर्ट के मुताबिक जियो अपनी विकसित की गई ब्रॉडबैंड तकनीक को विदेशी कंपनियों को लाइसेंस पर देना चाहती है। इसके बदले कंपनी संबंधित कारोबार में हिस्सेदारी हासिल करने की संभावनाएं तलाश रही है। हालांकि अभी बातचीत शुरुआती चरण में है और किसी अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं हुई है। बिना केबल कैसे मिलेगा इंटरनेट? जियो की इस तकनीक को अनलाइसेंस्ड बैंड रेडियो (यूबीआर) कहा जाता है। इसके जरिए मोबाइल टावरों या इमारतों की छतों पर लगे उपकरणों से वाई-फाई आवृत्तियों का उपयोग कर घरों तक तेज इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है। कंपनी का दावा है कि इस तकनीक से पारंपरिक केबल नेटवर्क की तुलना में कम लागत पर ब्रॉडबैंड सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। 10 से 15 वैश्विक साझेदार बनाने का लक्ष्य जियो ने अपनी तकनीक को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचाने के लिए 10 से 15 वैश्विक साझेदार बनाने का लक्ष्य रखा है। अमेरिका में Comcast और Charter जैसी बड़ी कंपनियों के साथ संभावित साझेदारी जियो को नए बाजार में प्रवेश करने का अवसर दे सकती है। दक्षिण अफ्रीका की कंपनी से बातचीत विफल रिपोर्ट के अनुसार जियो ने दक्षिण अफ्रीका की MTN Group के साथ भी बातचीत की थी। लेकिन कंपनी के मूल्यांकन और तकनीक लाइसेंस की शर्तों पर सहमति नहीं बनने के कारण यह बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी। क्या समझौता तय हो गया है? अभी तक जियो, Comcast या Charter ने किसी समझौते की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। रॉयटर्स के सवालों पर जियो ने प्रतिक्रिया नहीं दी, जबकि दोनों अमेरिकी कंपनियों के प्रवक्ताओं ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। फिलहाल समझौते की रकम, संभावित हिस्सेदारी और समयसीमा स्पष्ट नहीं हैं। स्रोत: रॉयटर्स, इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस टुडे। जय राष्ट्र न्यूज़

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ल्यूपिन का दूसरी तिमाही मुनाफा 22.19% गिरकर ₹1,155.3 करोड़, कंपनी की आय में 11% से ज्यादा बढ़ोतरी

मुंबई, 4 नवंबर 2026: देश की प्रमुख दवा निर्माता कंपनी ल्यूपिन लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026–27 की जुलाई-सितंबर तिमाही के वित्तीय नतीजे घोषित कर दिए हैं। कंपनी का एकीकृत शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 22.19 प्रतिशत घटकर ₹1,155.30 करोड़ रह गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी ने ₹1,484.83 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया था। राजस्व में 11.1% की बढ़ोतरी मुनाफे में गिरावट के बावजूद कंपनी की परिचालन आय बढ़ी है। सितंबर तिमाही में ल्यूपिन का परिचालन राजस्व ₹7,827.26 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान अवधि में ₹7,047.51 करोड़ था। कंपनी की बिक्री में वृद्धि मुख्य रूप से भारतीय और अमेरिकी दवा कारोबार के बेहतर प्रदर्शन से हुई। खर्च बढ़ने से मुनाफे पर दबाव कंपनी का कुल खर्च बढ़कर ₹6,374.46 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹5,130.54 करोड़ था। इसके अलावा परिचालन मार्जिन में गिरावट और कुछ लागत संबंधी दबावों का असर भी मुनाफे पर पड़ा। कंपनी का परिचालन लाभ यानी एबिट्डा सालाना आधार पर 10.7 प्रतिशत घटकर लगभग ₹2,171 करोड़ रह गया। भारत और अमेरिका में बिक्री बढ़ी ल्यूपिन के अनुसार अमेरिकी कारोबार की बिक्री 9.3 प्रतिशत बढ़कर ₹3,020 करोड़ रही। वहीं भारतीय कारोबार की बिक्री 14.7 प्रतिशत बढ़कर ₹2,384 करोड़ पहुंच गई। कंपनी ने तिमाही के दौरान भारतीय बाजार में पांच नए दवा ब्रांड भी पेश किए। छह महीने के नतीजों में भी गिरावट अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान कंपनी का कुल शुद्ध मुनाफा 4.95 प्रतिशत घटकर ₹2,572.28 करोड़ रहा। पिछले वित्त वर्ष की पहली छमाही में यह आंकड़ा ₹2,706.29 करोड़ था। कंपनी ने जताया भविष्य पर भरोसा ल्यूपिन के प्रबंध निदेशक नीलेश गुप्ता ने कहा कि कंपनी ने वित्त वर्ष की पहली छमाही में प्रमुख बाजारों में मजबूत वृद्धि दर्ज की है। उन्होंने कहा कि कंपनी अनुसंधान, नए उत्पादों और कारोबार विस्तार पर निवेश जारी रखेगी। मुनाफे में गिरावट के बावजूद कंपनी को अपने दीर्घकालिक विकास की संभावनाओं पर भरोसा है। स्रोत: ल्यूपिन लिमिटेड की आधिकारिक वित्तीय रिपोर्ट, पीटीआई, लाइवमिंट। जय राष्ट्र न्यूज़

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मणिपुर के सभी 16 जिलों में शांति समितियों का गठन, राज्य में शांति बहाली के लिए सरकार की नई पहल

इंफाल, 4 नवंबर 2026: मणिपुर सरकार ने राज्य में शांति और सामुदायिक सद्भाव मजबूत करने के लिए सभी 16 जिलों में जिला स्तरीय शांति समितियों के गठन का आदेश जारी किया है। इन समितियों का उद्देश्य विभिन्न समुदायों के बीच बातचीत बढ़ाना, आपसी विश्वास बहाल करना और तनावपूर्ण परिस्थितियों का शांतिपूर्ण समाधान निकालना है। जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में काम करेंगी समितियां राज्य के गृह विभाग द्वारा 30 अक्टूबर को जारी आदेश के अनुसार प्रत्येक जिले की शांति समिति की अध्यक्षता संबंधित जिलाधिकारी करेंगे। समिति में पुलिस अधीक्षक, प्रशासनिक अधिकारी, विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधि, सामाजिक संगठन, गैर-सरकारी संस्थाएं, पत्रकार, शिक्षक, चिकित्सक और सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी शामिल होंगे। हर 15 दिन में होगी बैठक सरकारी आदेश के अनुसार शांति समितियां कम से कम प्रत्येक पखवाड़े में एक बार बैठक करेंगी। इन बैठकों में स्थानीय समस्याओं, सामुदायिक तनाव, अफवाहों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर चर्चा की जाएगी। जरूरत पड़ने पर समितियां अधिक बैठकें भी आयोजित कर सकेंगी। समुदायों के बीच संवाद बढ़ाने पर जोर समितियों को पड़ोसी जिलों और अलग-अलग समुदायों के बीच बातचीत को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा विस्थापित लोगों की सुरक्षित आवाजाही, आवश्यक सेवाओं की बहाली और सामान्य आर्थिक गतिविधियां शुरू कराने के उपाय भी सुझाए जा सकेंगे। 2023 से जातीय हिंसा से प्रभावित है मणिपुर मणिपुर में मई 2023 से मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय संघर्ष के कारण लंबे समय तक तनाव की स्थिति बनी रही है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े और कई क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। सरकार का कहना है कि नई समितियां समुदायों के बीच विश्वास बहाल करने में सहयोग करेंगी। क्या शांति समितियों को विशेष अधिकार मिलेंगे? सरकारी आदेश के अनुसार ये समितियां केवल परामर्श और समन्वय का काम करेंगी। इन्हें पुलिस या जिला प्रशासन के कानूनी अधिकार नहीं दिए गए हैं। समितियां अपनी सिफारिशें जिलाधिकारी के माध्यम से राज्य के गृह विभाग को भेजेंगी। सरकार की इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि विभिन्न समुदाय बातचीत में कितनी भागीदारी करते हैं और उनकी समस्याओं का समाधान किस तरह किया जाता है। स्रोत: मणिपुर गृह विभाग, पीटीआई, द प्रिंट, द संगाई एक्सप्रेस। जय राष्ट्र न्यूज़

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देवास थाना प्रभारी हत्याकांड: दो आरोपी पुलिस मुठभेड़ में घायल, अवैध शराब की तस्करी रोकने के दौरान गई थी जान

देवास, 4 नवंबर 2026: मध्य प्रदेश के देवास जिले में खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी की मौत के मामले में गिरफ्तार दो आरोपी पुलिस के साथ अलग-अलग मुठभेड़ों में घायल हो गए। पुलिस के अनुसार दोनों आरोपियों ने हिरासत से भागने की कोशिश की और पुलिसकर्मियों पर गोली चलाई। जवाबी कार्रवाई में दोनों के पैर में गोली लगी। क्या है पूरा मामला? सोमवार, 2 नवंबर को थाना प्रभारी दिलीप पुरी अपनी टीम के साथ इंदौर-बैतूल राजमार्ग पर अवैध शराब की तस्करी रोकने पहुंचे थे। पुलिस को गुजरात भेजी जा रही 1,800 लीटर से अधिक अवैध शराब की सूचना मिली थी। इसी दौरान एक ट्रक को रोककर चालक से पूछताछ करने की कोशिश की गई। पुलिस के मुताबिक चालक ने भागने के प्रयास में ट्रक को डिवाइडर पर चढ़ा दिया। इस दौरान ट्रक का पिछला पहिया थाना प्रभारी के ऊपर से गुजर गया, जिससे उनकी मौत हो गई। मुख्य आरोपी गजेंद्र रावत को लगी गोली पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा के अनुसार मुख्य आरोपी गजेंद्र उर्फ अक्कू रावत (28) को आलीराजपुर जिले से पकड़ा गया। उसे देवास लाते समय बरोठा थाना क्षेत्र में उसने कथित तौर पर पुलिसकर्मी की रिवॉल्वर छीनकर भागने की कोशिश की। पुलिस का दावा है कि आरोपी ने गोलीबारी की, जिसके जवाब में पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई। घायल गजेंद्र को बेहतर इलाज के लिए इंदौर भेजा गया। दूसरा आरोपी धीरज भी घायल इस मामले में गिरफ्तार दूसरे आरोपी धीरज ने भी कथित तौर पर देवास के बैंक नोट प्रेस थाना क्षेत्र में हिरासत से भागने का प्रयास किया। पुलिस के मुताबिक उसने पुलिसकर्मी का हथियार छीनकर गोली चलाई। जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी। धीरज को देवास जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस जांच जारी देवास पुलिस मामले में अवैध शराब की तस्करी से जुड़े नेटवर्क और थाना प्रभारी की मौत की परिस्थितियों की जांच कर रही है। पुलिस मुठभेड़ के बारे में दी गई जानकारी अधिकारियों के बयान पर आधारित है। दोनों आरोपियों की आपराधिक जिम्मेदारी अदालत में साक्ष्यों के आधार पर तय होगी। स्रोत: पीटीआई, देवास पुलिस, एनडीटीवी, द प्रिंट, एबीपी न्यूज़। जय राष्ट्र न्यूज़

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अमेरिकी मध्यावधि चुनाव 2026: भारतीय मूल के सुहास सुब्रमण्यम ने वर्जीनिया से दोबारा जीत दर्ज की

वॉशिंगटन, 4 नवंबर 2026: अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में भारतीय मूल के नेता सुहास सुब्रमण्यम ने बड़ी जीत हासिल की है। डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार सुब्रमण्यम ने वर्जीनिया के 10वें कांग्रेस निर्वाचन क्षेत्र से दोबारा चुनाव जीतकर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में अपनी सीट बरकरार रखी है। रिपब्लिकन उम्मीदवार को हराया 40 वर्षीय सुहास सुब्रमण्यम ने रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डेव बेकविथ को हराया। उपलब्ध चुनावी नतीजों के अनुसार सुब्रमण्यम को लगभग 61.5 प्रतिशत वोट, जबकि बेकविथ को करीब 36.4 प्रतिशत वोट मिले। इस जीत के साथ सुब्रमण्यम अमेरिकी संसद के निचले सदन में लगातार दूसरा दो वर्षीय कार्यकाल पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ गए हैं। 2024 में पहली बार बने थे सांसद सुहास सुब्रमण्यम ने 2024 के अमेरिकी चुनाव में पहली बार प्रतिनिधि सभा की सीट जीती थी। उस समय वह वर्जीनिया से अमेरिकी कांग्रेस के लिए निर्वाचित होने वाले पहले भारतीय मूल के नेता बने थे। इससे पहले वह वर्जीनिया की विधानसभा और राज्य सीनेट के सदस्य रह चुके हैं। बराक ओबामा के सलाहकार भी रह चुके हैं सुहास सुब्रमण्यम का जन्म अमेरिका के ह्यूस्टन शहर में भारतीय मूल के माता-पिता के परिवार में हुआ था। उन्होंने नॉर्थवेस्टर्न विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में व्हाइट हाउस में तकनीकी नीति सलाहकार के रूप में काम किया। वह स्वास्थ्य सेवाओं, रोजगार, प्रवासन नीति और छोटे कारोबारों से जुड़े मुद्दों पर भी काम कर चुके हैं। भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए महत्वपूर्ण जीत सुहास सुब्रमण्यम की दोबारा जीत अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के नेताओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है। वर्जीनिया की इस सीट पर जीत के साथ वह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में अपना दूसरा कार्यकाल शुरू करेंगे। स्रोत: एसोसिएटेड प्रेस, पीटीआई, बिजनेस स्टैंडर्ड, एनडीटीवी। जय राष्ट्र न्यूज़

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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: विदेश में विवाह टूटने के आधार पर दिया गया तलाक भारत में मान्य नहीं, दूसरी शादी पर हो सकती है कार्रवाई

नई दिल्ली, 4 नवंबर 2026: सुप्रीम कोर्ट ने विदेशी अदालतों द्वारा दिए जाने वाले तलाक के फैसलों की वैधता पर महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने कहा कि यदि किसी भारतीय हिंदू विवाह को विदेशी अदालत केवल विवाह के पूरी तरह टूट जाने के आधार पर समाप्त करती है, तो ऐसा तलाक भारत में स्वतः मान्य नहीं होगा। क्या है पूरा मामला? यह मामला डॉ. एन. श्रीधर रेड्डी और उनकी पहली पत्नी से जुड़ा है। पति ने भारत में विवाह समाप्त करने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने ब्रिटेन की नागरिकता प्राप्त की और वहां की अदालत से तलाक का आदेश हासिल किया। उस आदेश के आधार पर उन्होंने दूसरी शादी कर ली। पहली पत्नी ने दूसरी शादी को लेकर आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर की पीठ ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 में विवाह का पूरी तरह टूट जाना सामान्य वैधानिक तलाक का स्वतंत्र आधार नहीं है। अदालत के अनुसार विदेशी तलाक का आदेश भारत में मान्य होने के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 13 की शर्तों पर खरा उतरना जरूरी है। इस मामले में पहली पत्नी ने विदेशी अदालत के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं किया था। दूसरी शादी के मामले में कार्रवाई जारी रहेगी सुप्रीम कोर्ट ने पति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 494 के तहत चल रही द्विविवाह संबंधी आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से इनकार कर दिया। हालांकि अदालत ने पति के माता-पिता और दूसरी पत्नी के खिलाफ कार्यवाही रद्द कर दी, क्योंकि उनके विरुद्ध कथित साजिश में सक्रिय भागीदारी के पर्याप्त आधार नहीं मिले। विदेश में तलाक लेने वालों के लिए क्या मायने? इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि विदेश में दिए गए सभी तलाक भारत में अमान्य हैं। विदेशी तलाक की वैधता विवाह पर लागू भारतीय कानून, तलाक के आधार, संबंधित अदालत के अधिकार क्षेत्र और दोनों पक्षों की भागीदारी पर निर्भर करेगी। यह फैसला उन भारतीय दंपतियों के लिए महत्वपूर्ण है जो विदेश में रहकर तलाक लेते हैं या दूसरी शादी करने की योजना बनाते हैं। स्रोत: सुप्रीम कोर्ट का फैसला, पीटीआई, लाइव लॉ, इंडिया टुडे। जय राष्ट्र न्यूज़

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