महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026: बीएमसी चुनाव की ताजा अपडेट्स, उम्मीदवार और मतदान की पूरी जानकारी

महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026: बीएमसी चुनाव की ताजा अपडेट्स, उम्मीदवार और मतदान की पूरी जानकारी

जयराष्ट्र न्यूज रिपोर्टरदिनांक: 12 जनवरी 2026 महाराष्ट्र में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं क्योंकि राज्य की 29 नगर निगमों के चुनाव नजदीक आ गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा ध्यान मुंबई की ब्रिहनमुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव पर है, जो 15 जनवरी 2026 को होने वाला है। यह चुनाव न केवल मुंबई की सत्ता तय करेगा बल्कि पूरे महाराष्ट्र की राजनीति पर असर डालेगा। महायुति गठबंधन, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना शामिल हैं, ने मुंबई को फिर से ‘सफरन’ बनाने का दावा किया है। वहीं, उद्धव ठाकरे वाली शिवसेना और कांग्रेस जैसी पार्टियां मजबूत चुनौती दे रही हैं। इस लेख में हम महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026 की पूरी जानकारी, ताजा अपडेट्स, उम्मीदवारों की सूची, मतदान प्रक्रिया और चुनाव के महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे। यह लेख एसईओ फ्रेंडली है और सरल भाषा में लिखा गया है ताकि आम जनता आसानी से समझ सके। महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026 का महत्व क्यों है? महाराष्ट्र भारत का आर्थिक केंद्र है, और मुंबई जैसे शहर की नगर निगम सत्ता पर कब्जा करना हर राजनीतिक दल के लिए सपना होता है। बीएमसी का बजट हजारों करोड़ रुपये का है, जो सड़कें, सफाई, पानी, स्वास्थ्य और परिवहन जैसी सेवाओं को संभालता है। 2026 के चुनाव में करीब 1 करोड़ से ज्यादा मतदाता हिस्सा लेंगे, जो इसे देश का सबसे बड़ा स्थानीय चुनाव बनाता है। राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) ने घोषणा की है कि 29 नगर निगमों में से धुले, अहमदनगर, जलगांव, सांगली जैसे शहर शामिल हैं। लेकिन मुंबई का बीएमसी चुनाव सबसे हॉट टॉपिक है क्योंकि यहां ठाकरे भाइयों की एकता की अपील सुर्खियां बटोर रही है। पिछले कुछ सालों में महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलाव हुए हैं। 2019 में शिवसेना टूट गई थी, जिसके बाद एकनाथ शिंदे ने बीजेपी के साथ सरकार बनाई। अब 2026 के चुनाव में ‘मराठी मानूस’ का मुद्दा फिर से उभरा है। राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) भी मैदान में है, जो स्थानीय मुद्दों पर जोर दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुनाव 2029 के लोकसभा चुनावों की दिशा तय कर सकता है। अगर महायुति जीतती है, तो मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की स्थिति मजबूत होगी। वहीं, विपक्ष की जीत से उद्धव ठाकरे का राजनीतिक करियर नई ऊंचाई छू सकता है। बीएमसी चुनाव 2026 की तारीख और शेड्यूल राज्य चुनाव आयोग ने चुनाव की पूरी समय-सारणी जारी कर दी है। मतदान 15 जनवरी 2026 को सुबह 7:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक होगा। परिणाम 18 जनवरी 2026 को घोषित किए जाएंगे। मुंबई में 227 वार्ड हैं, जहां से पार्षद चुने जाएंगे। कुल 1700 से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में हैं। नामांकन की प्रक्रिया दिसंबर 2025 में पूरी हो चुकी है, और अब प्रचार अभियान जोरों पर है। चुनाव आयोग ने कोविड-19 जैसी महामारी से सबक लेते हुए सख्त नियम बनाए हैं। मतदान केंद्रों पर मास्क, सैनिटाइजर और सोशल डिस्टेंसिंग अनिवार्य है। बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं के लिए घर से वोटिंग की सुविधा भी उपलब्ध है। प्रमुख पार्टियां और उनके वादे इस चुनाव में मुख्य मुकाबला महायुति गठबंधन और महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के बीच है। महायुति में बीजेपी, शिंदे शिवसेना और अजीत पवार वाली एनसीपी शामिल हैं। उन्होंने मुंबई को ‘विश्व स्तरीय शहर’ बनाने का वादा किया है। उनके मुख्य वादे हैं: वहीं, एमवीए में उद्धव ठाकरे वाली शिवसेना, कांग्रेस और शरद पवार वाली एनसीपी हैं। वे ‘मराठी अस्मिता’ पर जोर दे रहे हैं। उनके वादे: राज ठाकरे की एमएनएस ‘मराठी मानूस’ को केंद्र में रखकर चुनाव लड़ रही है। उन्होंने कहा है कि गैर-मराठी लोगों को शहर से बाहर करने की नीति अपनाएंगे। ठाकरे भाइयों (उद्धव और राज) ने हाल ही में एक संयुक्त रैली में एकता की अपील की, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। ताजा अपडेट्स: क्या हो रहा है मैदान में? 12 जनवरी 2026 तक की ताजा खबरों के अनुसार, ठाकरे भाइयों की संयुक्त रैली ने राजनीतिक माहौल गर्मा दिया है। रैली में उन्होंने कहा, “मुंबई हमारी है, और इसे बचाने के लिए एकजुट हों।” बीजेपी ने इसका जवाब देते हुए कहा कि मुंबई और ठाणे ‘सफरन’ रहेंगे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “हम विकास पर चुनाव लड़ रहे हैं, न कि परिवारवाद पर।” एक और अपडेट: शिवसेना (शिंदे) ने अजीत पवार पर आरोप लगाया कि वे अपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को टिकट दे रहे हैं। वहीं, एनडीटीवी की पावर प्ले में चुनावी विश्लेषण में कहा गया कि मतदान प्रतिशत 50% से ऊपर जा सकता है। विकिपीडिया के अनुसार, यह चुनाव मुंबई की सिविक सेवाओं को नियंत्रित करेगा। मिड-डे रिपोर्ट के मुताबिक,नागरिक तैयार हैं वोट डालने के लिए। फाइनेंशियल एक्सप्रेस ने लाइव अपडेट्स में बताया कि प्रचार में ‘मराठी बनाम बाहरी’ का मुद्दा छाया हुआ है। हिंदुस्तान टाइम्स ने कहा कि महायुति मुंबई की पुरानी गरिमा वापस लाएगी। मतदाता सूची कैसे चेक करें? अगर आप मुंबई या अन्य नगर निगम क्षेत्र में रहते हैं, तो अपनी मतदाता सूची चेक करना जरूरी है। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, आप ऑनलाइन चेक कर सकते हैं: करीब 1 करोड़ मतदाता हैं, इसलिए पहले से तैयारी करें। चुनाव के प्रभाव और भविष्य यह चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति का टर्निंग पॉइंट हो सकता है। अगर बीजेपी जीतती है, तो केंद्र सरकार के प्रोजेक्ट जैसे बुलेट ट्रेन और मेट्रो तेज होंगे। वहीं, विपक्ष की जीत से स्थानीय मुद्दों पर फोकस बढ़ेगा। पर्यावरण विशेषज्ञ कहते हैं कि चुनाव में ग्रीन इश्यूज जैसे प्रदूषण नियंत्रण को महत्व मिलना चाहिए। आम जनता के लिए यह चुनाव मौका है अपनी समस्याएं उठाने का। सड़कें खराब हैं? पानी की कमी है? वोट से बदलाव लाएं। जयराष्ट्र न्यूज रिपोर्टर वेबसाइट आपको लगातार अपडेट्स देती रहेगी। निष्कर्ष: वोट दें, बदलाव लाएं महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026 लोकतंत्र का बड़ा उत्सव है। 15 जनवरी को मतदान करें और अपने शहर को बेहतर बनाएं। सरल शब्दों में कहें तो यह चुनाव विकास, एकता और अस्मिता का है। अधिक जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट पर विजिट करें।

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महाराष्ट्र 2026 चुनाव: वर्तमान स्थिति और प्रमुख गठबंधन

10 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र में राजनीतिक माहौल गरम है, क्योंकि 29 नगर निगमों (जिसमें BMC मुंबई, पुणे, नागपुर, नासिक आदि शामिल हैं) के चुनाव 15 जनवरी 2026 को होने वाले हैं। मतगणना 16 जनवरी को होगी। ये चुनाव 2017-2018 के बाद पहली बार हो रहे हैं, जो OBC आरक्षण विवाद के कारण लंबे समय से लंबित थे। ये स्थानीय निकाय चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण टेस्ट हैं और 2029 विधानसभा चुनाव की झलक दिखा सकते हैं। मुख्य गठबंधन और पार्टियां राज्य स्तर पर महायुति (सत्तारूढ़) और महा विकास अघाड़ी (MVA) (विपक्ष) के बीच मुख्य मुकाबला है, लेकिन स्थानीय स्तर पर गठबंधन काफी बदल गए हैं। विचारधारा से ज्यादा सत्ता की गणित और स्थानीय हित हावी हैं। महायुति गठबंधन (BJP + शिवसेना शिंदे गुट + अजित पवार NCP): महा विकास अघाड़ी (MVA) (कांग्रेस + उद्धव शिवसेना UBT + शरद पवार NCP): स्थानीय स्तर पर बदलते गठबंधन (क्रॉस-ओवर अलायंस) पिछले परिणाम और वर्तमान ट्रेंड प्रमुख मुद्दे ये चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति में मजबूती और कमजोरी को और साफ कर सकते हैं। 15 जनवरी को मतदान होगा, और परिणाम 16 जनवरी को आएंगे। राज्य स्तर पर अगला बड़ा चुनाव 2029 में विधानसभा का होगा।

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जयराष्ट्र न्यूज़ विशेष रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश पुलिस ने 10 महीने पहले दफनाए गए कंकाल को खोदा, सामने आया प्रेम संबंध का खौफनाक अपराध!

नमस्कार, जयराष्ट्र न्यूज़ के दर्शकों!आज हम आपको ले चलते हैं उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के तिकवापुर गांव में, जहां एक ऐसी घटना घटी है जिसने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है। रात के करीब 11 बजे, जब पूरा कानपुर सोने की तैयारी में था, तब पुलिस की एक टीम ने ठंडी हवाओं और टॉर्च की रोशनी में जमीन खोदना शुरू किया। सात फीट गहरे गड्ढे में दफन था एक कंकाल, जो लगभग 10 महीने पुराना था। यह कंकाल किसी साधारण व्यक्ति का नहीं, बल्कि 45 वर्षीय रेशमा का था – एक मां, जो सात बच्चों की मां थी। पुलिस ने इस खौफनाक खोज के साथ एक दिल दहला देने वाले प्रेम संबंध और विश्वासघात की कहानी उजागर कर दी है। घटना की शुरुआत: एक विधवा मां का प्रेम प्रसंग रेशमा का पति रामबाबू संखवार तीन साल पहले ही गुजर चुके थे। उसके बाद रेशमा ने अपने गांव के पड़ोसी गोरेलाल से प्रेम संबंध बना लिया। गोरेलाल और रेशमा का रिश्ता काफी गहरा हो गया था। शुरुआत में दोनों के बीच प्यार और लगाव था, लेकिन समय के साथ रिश्ते में दरार आने लगी। पुलिस जांच में पता चला कि अप्रैल 2025 के आसपास दोनों के बीच गंभीर विवाद हुआ। रेशमा गोरेलाल के साथ पूरे तौर पर रहना चाहती थीं, जबकि गोरेलाल इस रिश्ते से पीछा छुड़ाना चाहता था। रेशमा बार-बार जिद करतीं, फोन पर बातें करतीं, मिलने की मांग करतीं, लेकिन गोरेलाल अब इस संबंध से परेशान हो चुका था। 10 महीने का गायब होना और बेटे की शंका रेशमा अप्रैल 2025 में अचानक गायब हो गईं। उनके सात बच्चों में सबसे बड़ा बेटा बबलू था, जो मां की तलाश में परेशान था। बबलू ने गांव में पूछताछ शुरू की और जब गोरेलाल से मां के बारे में पूछा, तो गोरेलाल ने ठंडे लहजे में जवाब दिया – “तुम्हारी मां अब वापस नहीं आएगी।” बबलू को शुरू में लगा कि शायद गोरेलाल मजाक कर रहा है, लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतते गए, उसकी शंका बढ़ती गई। रेशमा का फोन बंद था, कोई पता नहीं चल रहा था। आखिरकार, बबलू ने पुलिस से शिकायत की और मामला बिधनू थाने पहुंचा। पुलिस की तहकीकात और आरोपी का कबूलनामा पुलिस ने गोरेलाल को हिरासत में लिया और उससे गहन पूछताछ की। शुरू में गोरेलाल ने कुछ नहीं बोला, लेकिन सबूतों के दबाव में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि एक झगड़े के दौरान उसने गुस्से में रेशमा का गला घोंट दिया और उसे मार डाला। हत्या के बाद वह घबरा गया। उसने रेशमा की लाश को गांव में ही एक टावर के पास ले जाकर सात फीट गहरा गड्ढा खोदा और उसे दफना दिया। कंकाल को बैठी हुई स्थिति में दफनाया गया था, जो हत्या की क्रूरता को और भी उजागर करता है। पुलिस की टीम ने गोरेलाल की निशानदेही पर रात के अंधेरे में खुदाई शुरू की। पुलिस वाहनों की लाइटें और ग्रामीणों की टॉर्चों की रोशनी में जमीन खोदी गई। करीब 10 महीने बाद रेशमा का कंकाल बरामद हुआ। फॉरेंसिक टीम ने इसे जांच के लिए भेज दिया है, लेकिन हड्डियों की स्थिति से स्पष्ट है कि मौत गला घोंटने से हुई थी। परिवार का दर्द और गांव में हड़कंप रेशमा के सात बच्चे अब अनाथ हो चुके हैं। सबसे बड़ा बबलू अपने भाई-बहनों की जिम्मेदारी उठा रहा है। गांव वाले इस घटना से स्तब्ध हैं। एक तरफ जहां रिश्तों में विश्वासघात की बात हो रही है, वहीं दूसरी तरफ सात मासूम बच्चों का भविष्य अंधकार में डूब गया है। ग्रामीणों का कहना है कि रेशमा एक मेहनती महिला थीं, जो अपने बच्चों के लिए दिन-रात काम करती थीं। गोरेलाल के साथ संबंध बनाने के बाद भी वह परिवार की देखभाल करती थीं। यह मामला प्रेम, जुनून, घृणा और विश्वासघात की एक ऐसी कहानी है जो समाज के सामने कई सवाल खड़े करती है। क्या प्रेम इतना अंधा हो सकता है कि इंसान किसी की जान ले ले? क्या परिवार और समाज ऐसे संबंधों पर पहले से नजर नहीं रखता? उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले को सुलझाकर एक बड़ा अपराध उजागर किया है। पुलिस अधिकारी का बयान बिधनू थाने के पुलिस अधिकारी ने बताया, “यह एक बेहद संवेदनशील और क्रूर मामला था। आरोपी गोरेलाल ने हत्या के बाद लाश को दफनाकर सबूत मिटाने की कोशिश की थी, लेकिन बेटे की लगातार तलाश और पुलिस की सतर्क जांच से सच सामने आ गया। हमने आरोपी को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। जांच जारी है और फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है।” समाज के लिए सबक यह घटना हमें याद दिलाती है कि रिश्ते कितने भी गहरे क्यों न हों, लेकिन जब उनमें जबरदस्ती या जुनून शामिल हो जाए, तो वे खतरनाक हो सकते हैं। सात बच्चों की मां का यह दर्दनाक अंत हर किसी को सोचने पर मजबूर करता है। जयराष्ट्र न्यूज़ आपके लिए ऐसी हर खबर लाता रहेगा जो समाज को जागरूक करे और न्याय सुनिश्चित करे। अगर आपके पास कोई जानकारी है या आप इस मामले पर अपनी राय देना चाहते हैं, तो हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। जयराष्ट्र न्यूज़ के साथ बने रहिए, क्योंकि हम सच को सामने लाते हैं, चाहे वह कितना भी खौफनाक क्यों न हो। जय हिंद! जयराष्ट्र न्यूज़।

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फरीदाबाद गैंगरेप पीड़िता एक सप्ताह बाद अस्पताल से डिस्चार्ज, घर लौटीं: न्याय की उम्मीद में परिवार

जय राष्ट्र न्यूज रिपोर्टरद्वारा: विशेष संवाददातादिनांक: 07 जनवरी, 2026फरीदाबाद, हरियाणा: फरीदाबाद में हुए दिल दहला देने वाले गैंगरेप मामले में पीड़िता को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। एक सप्ताह तक अस्पताल में इलाज कराने के बाद वह अब घर लौट आई हैं। यह घटना दिसंबर 30, 2025 को हुई थी, जब दो आरोपियों ने एक 25 वर्षीय महिला को लिफ्ट देने के बहाने अपनी गाड़ी में बिठाया, उसका गैंगरेप किया और फिर चलती गाड़ी से फेंक दिया। पीड़िता तीन बच्चों की मां हैं और इस घटना ने पूरे देश में महिला सुरक्षा पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना का पूरा विवरण यह दर्दनाक घटना फरीदाबाद के मेट्रो चौक के पास शुरू हुई। पीड़िता अपने पति से झगड़े के बाद मायके में रह रही थीं। घटना वाले दिन, वह अपनी मां से बहस के बाद घर से निकलीं और सेक्टर 23 में एक दोस्त के घर गईं। देर रात होने पर वह घर लौटने के लिए सार्वजनिक परिवहन की तलाश में थीं, लेकिन कोई बस या ऑटो नहीं मिला। ठंड और कोहरे के कारण सड़कें सूनी थीं। तभी एक सफेद मारुति सुजुकी ईको वैन (जो कुछ रिपोर्ट्स में एम्बुलेंस के रूप में बताई गई है) में सवार दो युवकों ने उन्हें लिफ्ट ऑफर की। पीड़िता ने सोचा कि यह सुरक्षित होगा, लेकिन यह उनकी सबसे बड़ी गलती साबित हुई। आरोपी उन्हें गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड पर एक सुनसान जगह ले गए, जहां उन्होंने बारी-बारी से लगभग 2-3 घंटे तक उनका गैंगरेप किया। एक आरोपी अंदर अपराध कर रहा था, जबकि दूसरा बाहर पहरा दे रहा था। अपराध के बाद, उन्होंने पीड़िता को राजा चौक के पास संजय गांधी मेमोरियल नगर में 90 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलती गाड़ी से फेंक दिया। गिरने से पीड़िता को गंभीर चोटें आईं और वह खून से लथपथ हो गईं। कोहरे के कारण कोई मदद नहीं मिली, लेकिन उन्होंने किसी तरह अपनी बहन को फोन किया। बहन ने उन्हें उठाया और पहले बादशाह खान सिविल अस्पताल ले गईं, जहां से गंभीर हालत देखते हुए उन्हें फरीदाबाद के एक प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट किया गया। पीड़िता की चोटें और अस्पताल में इलाज डॉक्टरों के अनुसार, पीड़िता की हालत बेहद गंभीर थी। उनकी दाहिनी आंख की सॉकेट फ्रैक्चर हो गई थी, कंधा फ्रैक्चर और डिस्लोकेट हो गया था। चेहरे पर दो गहरे कट लगे थे, जिनमें 20 से ज्यादा टांके लगाए गए। सूजन और खून बहने के कारण वह आईसीयू में भर्ती रहीं। इलाज करने वाले डॉक्टर अमित यादव ने बताया कि चोटें अपराध के दौरान विरोध करने और गाड़ी से फेंके जाने से लगीं। कंधे की सर्जरी की योजना थी, लेकिन पीड़िता की हालत स्थिर होने के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। अस्पताल में एक सप्ताह तक रहने के दौरान पीड़िता का परिवार उनके साथ था। बहन ने मीडिया को बताया कि यह घटना उनके परिवार के लिए सदमा थी, लेकिन पीड़िता की हिम्मत ने उन्हें मजबूती दी। डॉक्टरों ने कहा कि पीड़िता अब खतरे से बाहर हैं, लेकिन पूरी तरह ठीक होने में समय लगेगा। मानसिक सदमे से उबरने के लिए काउंसलिंग की सलाह दी गई है। अस्पताल से डिस्चार्ज और घर वापसी 7 जनवरी, 2026 को पीड़िता को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया, जो घटना के ठीक एक सप्ताह बाद था। घर लौटने पर परिवार ने राहत की सांस ली। हालांकि, सुरक्षा के कारण उनका घर बदल दिया गया है और पुलिस सुरक्षा प्रदान कर रही है। पीड़िता की बहन ने कहा, “वह अब घर पर हैं, लेकिन डर अभी भी है। हम न्याय की उम्मीद कर रहे हैं।” यह घर वापसी पीड़िता के लिए नई शुरुआत है, लेकिन न्याय की लड़ाई अभी बाकी है। आरोपियों की पहचान और पुलिस कार्रवाई डिस्चार्ज होने के अगले दिन, 8 जनवरी को पीड़िता ने टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड में दोनों आरोपियों को पहचान लिया। परेड ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में हुई। आरोपी उत्तर प्रदेश के मथुरा और झांसी के रहने वाले हैं, जो एक प्राइवेट अस्पताल की एम्बुलेंस में ड्राइवर और हेल्पर के रूप में काम करते थे। पुलिस ने उन्हें घटना के दिन ही गिरफ्तार कर लिया था और कोर्ट में पेश कर ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया। कोतवाली पुलिस स्टेशन में गैंगरेप, हमला और अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस पीआरओ यशपाल यादव ने कहा कि गाड़ी बरामद कर ली गई है और फॉरेंसिक सैंपल लिए गए हैं। आरोपियों के ब्लड सैंपल से नशे की जांच की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज से भी सबूत मिले हैं। पुलिस जल्द चार्जशीट दाखिल करने की योजना बना रही है। महिला सुरक्षा पर बड़ा सवाल यह घटना भारत में महिलाओं की सुरक्षा पर फिर से सवाल उठाती है। हरियाणा जैसे राज्य में जहां महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर ऊंची है, ऐसी घटनाएं आम हो गई हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार, 2024 में भारत में 31,000 से ज्यादा रेप केस दर्ज हुए, जिनमें से कई गैंगरेप थे। निर्भया मामले के बाद 2013 में कानून सख्त किए गए, जिसमें गैंगरेप के लिए उम्रकैद या मौत की सजा का प्रावधान है। लेकिन अमल में कमी दिखती है। महिला अधिकार कार्यकर्ता सुनीता शर्मा कहती हैं, “ऐसी घटनाओं में पीड़िता को न्याय मिलना चाहिए, लेकिन समाज का रवैया बदलना जरूरी है। पुलिस को रात में गश्त बढ़ानी चाहिए और महिलाओं के लिए सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करना चाहिए।” फरीदाबाद में इस घटना के खिलाफ प्रदर्शन हुए, जहां लोग न्याय की मांग कर रहे हैं। परिवार की प्रतिक्रिया और समाज का समर्थन पीड़िता का परिवार अब न्याय की लड़ाई लड़ रहा है। बहन ने बताया कि घटना के बाद पूरे परिवार को सदमा लगा, लेकिन पीड़िता की हिम्मत ने उन्हें संभाला। “वह बच्चों के लिए जीना चाहती हैं,” बहन ने कहा। स्थानीय एनजीओ ने पीड़िता को कानूनी और आर्थिक मदद देने का वादा किया है। सोशल मीडिया पर #JusticeForFaridabadVictim ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग समर्थन जता रहे हैं। निष्कर्ष: न्याय की राह फरीदाबाद गैंगरेप पीड़िता की घर वापसी एक सकारात्मक कदम है, लेकिन यह अंत नहीं है। न्यायपालिका पर अब दबाव है कि आरोपियों को सख्त सजा मिले। यह घटना हमें याद दिलाती है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए ठोस कदम… Read More

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भारत ने चीन को पछाड़ा: दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक बनने की कहानी

जय राष्ट्र न्यूज रिपोर्टर वेबसाइट | 06 जनवरी 2026 | कृषि संवाददाता भारत ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। देश ने चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक बनने का गौरव प्राप्त कर लिया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 5 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में इसकी घोषणा की। 2025 में भारत का चावल उत्पादन 150.18 मिलियन टन तक पहुंच गया, जबकि चीन का उत्पादन 145.28 मिलियन टन रहा। यह पहली बार है जब भारत ने चावल उत्पादन में चीन को पीछे छोड़ा है। यह खबर न केवल भारतीय किसानों के लिए गर्व की बात है, बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। चावल भारत की कृषि अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। करोड़ों लोग चावल पर निर्भर हैं, और यह देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने चावल उत्पादन में तेजी से प्रगति की है। लेकिन चीन को पछाड़ना एक बड़ी मील का पत्थर है। आइए जानते हैं कि यह कैसे संभव हुआ, इसके पीछे क्या कारण हैं, और इसका क्या असर पड़ेगा। चावल उत्पादन का इतिहास: भारत और चीन की तुलना चावल उत्पादन में चीन लंबे समय से दुनिया का лидер रहा है। 2020 तक चीन का सालाना उत्पादन लगभग 210 मिलियन टन paddy (कच्चा चावल) था, जबकि भारत का 180 मिलियन टन के आसपास। लेकिन milled rice (प्रोसेस्ड चावल) में भी चीन आगे था। हालांकि, भारत ने धीरे-धीरे अपनी उत्पादकता बढ़ाई। 2024-25 के फसल वर्ष में भारत का उत्पादन 150.18 मिलियन टन milled rice तक पहुंच गया, जो चीन के 145.28 मिलियन टन से अधिक है। यह बदलाव अचानक नहीं हुआ। भारत सरकार की नीतियां, वैज्ञानिक अनुसंधान और किसानों की मेहनत का नतीजा है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पिछले 11 वर्षों में भारत ने 3,236 उच्च उपज वाली फसल किस्में विकसित की हैं, जो 1969 से 2014 तक की कुल 3,969 से अधिक हैं। ये किस्में जलवायु परिवर्तन के खिलाफ मजबूत हैं और अधिक उत्पादन देती हैं। चीन में चावल उत्पादन स्थिर रहा, लेकिन भारत ने नई तकनीकों से आगे निकल गया। चीन की कुछ समस्याएं जैसे भूमि प्रदूषण और जल संकट ने भी इसमें भूमिका निभाई हो सकती है, लेकिन मुख्य कारण भारत की प्रगति है। कैसे हुआ यह चमत्कार? मुख्य कारण भारत के चावल उत्पादन में वृद्धि के पीछे कई कारक हैं। सबसे महत्वपूर्ण है उच्च उपज वाली बीज किस्मों का विकास। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “यह मील का पत्थर उच्च उपज वाले बीज किस्मों और कृषि विज्ञान में प्रगति से संभव हुआ है। भारत अब वैश्विक चावल बाजारों का प्रमुख आपूर्तिकर्ता बन चुका है।” 5 जनवरी को मंत्री ने 184 नई फसल किस्मों का अनावरण किया, जो 25 विभिन्न फसलों से संबंधित हैं। इनमें 122 अनाज, 6 दालें, 13 तिलहन, 11 चारा फसलें, 6 गन्ना किस्में, 24 कपास किस्में, और जूट व तंबाकू की एक-एक किस्म शामिल हैं। ये किस्में उत्पादकता बढ़ाने, गुणवत्ता सुधारने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए डिजाइन की गई हैं। चावल की कुछ प्रमुख नई किस्में हैं: सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन नई किस्मों को जल्द से जल्द किसानों तक पहुंचाया जाए। इसके अलावा, कृषि अनुसंधान में निवेश बढ़ाया गया है। भारत ने पश्चिमी बाजारों से वैध रूप से इन किस्मों को लाइसेंस लिया है, जबकि चीन पर जासूसी और बौद्धिक संपदा चोरी के आरोप लगते रहे हैं। पूर्वी भारत में ‘ग्रीन रिवोल्यूशन इन ईस्टर्न इंडिया’ पहल चल रही है। असम, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में सब्सिडी, प्रोत्साहन और उच्च गुणवत्ता वाले खाद दिए जा रहे हैं। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के वाइस चांसलर डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने कहा कि पंजाब की सफलता को पूर्वी भारत में दोहराया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि इससे पानी की कमी और पराली जलाने जैसी पर्यावरणीय समस्याएं हो सकती हैं। PAU बाढ़ सहनशील चावल किस्में विकसित कर रहा है, जो पूर्वी क्षेत्रों की बाढ़ वाली जमीनों के लिए उपयोगी होंगी। ये प्रयास जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद करेंगे। आर्थिक और वैश्विक प्रभाव यह उपलब्धि भारत की अर्थव्यवस्था के लिए वरदान है। भारत अब चावल का निर्यातक बन चुका है। 2024-25 में कृषि निर्यात रिकॉर्ड 450,840 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसमें चावल का हिस्सा लगभग 24% है, यानी 105,720 करोड़ रुपये। भारत 172 देशों को चावल निर्यात कर रहा है। पिछले दशक में निर्यात दोगुना होकर 20 मिलियन टन से अधिक हो गया है। वैश्विक स्तर पर, यह खाद्य सुरक्षा को मजबूत करेगा। मंत्री चौहान ने कहा, “भारत की गोदाम भरे हुए हैं, और हम दुनिया को चावल सप्लाई कर रहे हैं।” जलवायु संकट और खाद्य असुरक्षा के दौर में भारत की भूमिका बढ़ेगी। निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा, और कृषि अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। किसानों की आय बढ़ेगी। नई किस्में कम पानी और कम लागत में अधिक उत्पादन देंगी। सरकार आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रही है। दालों और तिलहनों में आत्मनिर्भरता के लिए भी प्रयास हो रहे हैं, ताकि आयात कम हो। चुनौतियां और भविष्य की योजनाएं सफलता के साथ चुनौतियां भी हैं। बढ़ते उत्पादन से पानी की कमी हो सकती है। पंजाब और हरियाणा में भूजल स्तर गिर रहा है। पराली जलाने से प्रदूषण बढ़ता है। पूर्वी भारत में बाढ़ और सूखे की समस्या है। इसलिए, सतत कृषि पर जोर देना जरूरी है। सरकार की योजना है कि दालों और तिलहनों पर फोकस किया जाए। वैज्ञानिकों को निर्देश दिए गए हैं कि आयात निर्भरता कम करने के लिए काम करें। जलवायु सहनशील बीजों से कृषि में क्रांति आएगी। भविष्य में भारत चावल उत्पादन को 200 मिलियन टन तक ले जाने का लक्ष्य रख सकता है। निर्यात बढ़ाकर विदेशी मुद्रा कमाई जाएगी। किसानों को ट्रेनिंग, सब्सिडी और बाजार पहुंच प्रदान की जाएगी। निष्कर्ष: गर्व का पल भारत का चीन को चावल उत्पादन में पछाड़ना एक बड़ी जीत है। यह किसानों की मेहनत, वैज्ञानिकों की बुद्धिमत्ता और सरकार की नीतियों का परिणाम है। इससे देश आत्मनिर्भर बनेगा और दुनिया में अपनी जगह मजबूत करेगा। लेकिन सतत विकास पर ध्यान देना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी… Read More

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महानगरिक निकाय चुनाव 2026: महाराष्ट्र की राजनीति में नया संकट और बड़ा राजनीतिक मुद्दा

मुंबई, महाराष्ट्र (JaiRashtra News) — महाराष्ट्र की राजनीति इन दिनों नागरिक निकाय चुनावों (Municipal Corporation / महापालिका चुनाव) को लेकर ताजा मोड़ पर है। राज्य के आगामी नगरीय निकाय निर्वाचन में 69 सीटों पर महायुति गठबंधन के उम्मीदवार बिना मुकाबले जीत गए हैं, जिससे विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषकों में तीव्र बहस छिड़ गई है। विपक्ष का आरोप है कि यह लोकतंत्र के मूल्यों के खिलाफ है, वहीं सत्ताधारी महायुति इसे अपनी लोकप्रियता और शासन के परिणाम के रूप में प्रदर्शित कर रही है। 📌 क्या है पूरा मामला? राज्य में 15 जनवरी 2026 को होने वाले नगर निगम चुनावों से पहले ही 69 सीटें महायुति (Mahayuti) के उम्मीदवारों को बिना चुनाव मुकाबले (unopposed) जीतने का मौका मिल गया है। इसमें बीजेपी के 44, शिवसेना (शिंदे गुट) के 22, तथा NCP (अजित पवार गुट) के 2 उम्मीदवार शामिल हैं। राज्य निर्वाचन आयुक्त ने इस अप्रत्याशित स्थिति पर आधिकारिक जांच शुरू कर दी है। इस स्थिति ने विपक्षी दलों में गहरा रोष जगाया है। कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट), अस्मिता आधारित महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) और अन्य विपक्षी समूहों ने आरोप लगाए हैं कि दबाव, संसाधनों के दुरुपयोग और राजनीतिक रणनीति से चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई है। मंगळवार को विपक्षियों ने बताया कि कई स्थानों पर उनके प्रत्याशियों की नामांकन प्रक्रिया कठिनाइयों का सामना कर रही थी, जिससे मुहीम कमजोर दिखी। 🧭 राजनीतिक परिवेश और बढ़ती चर्चा पिछले कुछ महीनों से महाराष्ट्र में राजनीतिक उड़ानें तेज रहीं हैं। 2024 के विधानसभा चुनावों में महायुति गठबंधन ने भारी बहुमत से जीत हासिल की, जिसमें भाजपा अकेले 132 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी। विधानसभा में विरोधियों को भी 10% से कम समर्थन मिला — जो पिछले छह दशकों में पहली बार हुआ। (Wikipedia) यह नतीजा राज्य सरकार के किनारे राजनीतिक संतुलन को और मजबूत कर रहा है। महानगरीय निकाय चुनावों में बिना प्रतिस्पर्धा जीतना अब इस राजनैतिक संतुलन को एक नए विवाद में बदल रहा है। 🔹 निकाय चुनाव का महत्व महानगरपालिकाओं और नगर परिषदों में सत्ता हासिल करने से स्थानीय प्रशासन और विकास योजनाओं पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। इन निकाय चुनावों को राज्य की राजनीति का तापमान बताते हुए देखा जा रहा है। इससे स्पष्ट होता है कि आगामी लोकसभा या विधानसभा चुनावों में राजनीतिक दलों की तैयारियाँ इसी लोकल लेवल पर असर डाल सकती हैं। ⚡ विपक्ष का आरोप: लोकतंत्र खतरे में? विपक्षी दलों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में विरोधी उम्मीदवारों का न होना उचित प्रतिस्पर्धा के सिद्धांत को कमजोर करता है। वे आरोप लगा रहे हैं कि: कई नागरिक और सोशल मीडिया उपयोगकर्ता भी इस स्थिति पर सवाल उठा रहे हैं, यह मानते हुए कि अगर चुनाव बिना वोट डाले तय हो रहे हैं तो लोकतंत्र की आत्मा किस तरह जिंदा रहेगी। “ये लोकतंत्र नहीं, पहले से तय निर्णय जैसा लगता है” — कुछ ने इसी भाव से इस घटना की आलोचना की। 📣 सत्ताधारी महायुति का पक्ष दूसरी ओर, महायुति नेताओं का दावा है कि ये जीत उनकी कार्यशैली, प्रशासनिक सफलता और जनता के विश्वास को दर्शाती हैं। उनका कहना है कि विपक्ष कमजोर है और उसने चुनावी रणनीति सही ढंग से नहीं बनाई। Mahayuti में शामिल भाजपा, शिंदे शिवसेना और NCP नेतृत्व का कहना है कि प्रदेश में उनके प्रशासनिक फैसलों का व्यापक समर्थन है, इसी कारण से कई जगहों पर कोई मुकाबला ही नहीं रहा। बड़े नेताओं ने यह भी कहा है कि यह मामला स्थानीय राजनीतिक परिदृश्य और संगठनात्मक मजबूती से जुड़ा है, और इसे केवल “चुनाव विवाद” तक सीमित नहीं करना चाहिए। 🧠 विश्लेषकों की राय राजनीति के जानकार इस मुद्दे को महाराष्ट्र के राजनीतिक भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक मान रहे हैं। उनका तर्क है कि: ✔️ निकाय चुनावों में इतनी एकतरफा जीत यह दर्शाती है कि महायुति गठबंधन स्थानीय स्तर पर भी मजबूत बन चुका है।✔️ विपक्ष को अब अपनी रणनीति में मज़बूती और नए नेतृत्व की जरूरत है।✔️ हालांकि, जनभागीदारी और लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा का महत्व बनी रहे — भविष्य में इसे लेकर संवैधानिक बहसें तेज होंगी। 📌 क्या यह लोकतंत्र की जीत है या चेतावनी? यह प्रश्न अब महाराष्ट्र के नेताओं, मतदाताओं और विश्लेषकों के बीच प्रमुख चर्चा का विषय बन चुका है। कहीं एक तरफ इसे विधानसभा और निकाय चुनावों में सत्ता की मजबूती कहा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके लोकतांत्रिक मूल्यों पर क्या प्रभाव पड़ेगा — यह बड़ा सवाल है। JaiRashtra News के लिए रिपोर्टिंग करते हुए, यह स्पष्ट है कि महाराष्ट्र की राजनीति अब एक नए मोड़ पर है। निकाय चुनावों की गूँज केवल स्थानीय प्रशासन तक सीमित नहीं रहने वाली है, बल्कि यह राज्य की राजनीतिक रणनीतियों और आगामी चुनावों के लिए बड़े संकेत दे रही है।

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यूक्रेन-रूस शांति वार्ता: ९०% समझौता तैयार, लेकिन खतरे बरकरार

जय राष्ट्र न्यूज रिपोर्टर, ३ जनवरी २०२६ यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध अब तीसरे साल में है। हाल ही में शांति की उम्मीद जगी है। राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि समझौता ९०% तैयार है। लेकिन चुनौतियां अभी भी हैं। रूस की तरफ से झूठे हमले की चेतावनी दी गई है। यह खबर दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस लेख में हम नवीनतम घटनाओं पर नजर डालेंगे। हम शांति वार्ता की प्रगति देखेंगे। साथ ही, बाधाओं पर भी बात करेंगे। यह जानकारी आपको अपडेट रखेगी। शांति समझौते की प्रगति जेलेंस्की ने नए साल के संबोधन में अच्छी खबर दी। उन्होंने कहा कि यूक्रेन और अमेरिका के बीच समझौता लगभग पूरा है। यह युद्ध खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम है। हालांकि, रूस को इसमें शामिल करना बाकी है। ट्रंप ने दावा किया कि पुतिन शांति चाहते हैं। लेकिन रूसी अधिकारी सहमत नहीं दिखते। यूक्रेन ने सुरक्षा सहयोगियों से बात की। ये वार्ताएं महत्वपूर्ण हैं। वे समझौते को मजबूत बनाती हैं। रूस का दावा है कि यूक्रेन कमजोर हो रहा है। लेकिन यूक्रेन मजबूती से खड़ा है। इसके अलावा, परमाणु संयंत्र एक बड़ी समस्या है। जपोरिजिया परमाणु संयंत्र: मुख्य बाधा जपोरिजिया संयंत्र यूक्रेन में है। लेकिन रूस ने इसे कब्जा कर रखा है। यह यूरोप का सबसे बड़ा परमाणु संयंत्र है। जेलेंस्की ने कहा कि यह शांति योजना में अटकाव है। यदि रूस इसे नहीं छोड़ेगा, तो खतरा बढ़ेगा। संयंत्र में कोई दुर्घटना हो सकती है। यह पूरे क्षेत्र को प्रभावित करेगी। संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जताई है। वे सुरक्षा चाहते हैं। यूक्रेन का कहना है कि रूस इसे हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। इसलिए, समझौते में इसका समाधान जरूरी है। अन्यथा, शांति मुश्किल होगी। रूस की संभावित साजिश यूक्रेन की खुफिया एजेंसी ने चेतावनी दी है। वे कहते हैं कि रूस झूठा हमला कर सकता है। यह हमला रूस में ही होगा। इसका उद्देश्य शांति वार्ता बिगाड़ना है। यह फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन होगा। इसमें बड़ी संख्या में लोग मारे जा सकते हैं। चेतावनी के अनुसार, यह हमला चर्च पर हो सकता है। रूसी ऑर्थोडॉक्स क्रिसमस से पहले। यह ७ जनवरी को है। यूक्रेन ने कहा कि रूस ऐसा करके दोष यूक्रेन पर डालेगा। इससे वार्ता रुक जाएगी। दुनिया को सतर्क रहना चाहिए। इसके अलावा, रूस लगातार हमले कर रहा है। हाल ही में एक मिसाइल हमले में दो लोग मारे गए। इसमें एक तीन साल का बच्चा भी था। ३१ लोग घायल हुए। यह दिखाता है कि युद्ध थमा नहीं है। फ्रंटलाइन पर स्थिति यूक्रेन ने फ्रंटलाइन से निकासी का आदेश दिया। हजारों लोगों को सुरक्षित जगह जाना होगा। रूसी सेना आगे बढ़ रही है। खारकीव क्षेत्र में ड्रोन हमले हो रहे हैं। यूक्रेन की सेना नियमों का पालन कर रही है। वे नागरिकों की रक्षा कर रही हैं। हालांकि, रूस का दावा अलग है। वे कहते हैं कि यूक्रेन हार रहा है। लेकिन यूक्रेन ने कहा कि वे लड़ते रहेंगे। शांति के लिए तैयार हैं। लेकिन आत्मसमर्पण नहीं करेंगे। अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया दुनिया इस पर नजर रखे हुए है। अमेरिका यूक्रेन का समर्थन कर रहा है। ट्रंप प्रशासन वार्ता को बढ़ावा दे रहा है। यूरोपीय संघ भी शामिल है। वे सुरक्षा गारंटी चाहते हैं। रूस ने कहा कि वे वार्ता के लिए तैयार हैं। लेकिन शर्तें उनकी होंगी। पुतिन ने कोई टिप्पणी नहीं की। लेकिन उनके अधिकारी सक्रिय हैं। इसके अलावा, चीन और भारत जैसे देश मध्यस्थता कर सकते हैं। वे शांति चाहते हैं। २०२६ में शांति की संभावना नए साल में शांति की उम्मीद है। लेकिन बाधाएं हैं। यदि झूठे हमले हुए, तो सब बिगड़ सकता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि वार्ता जारी रखनी चाहिए। दोनों पक्षों को समझौता करना होगा। यूक्रेन ने कहा कि वे ९०% तैयार हैं। बाकी १०% पर काम हो रहा है। लेकिन रूस की मंशा साफ नहीं है। इसलिए, सावधानी जरूरी है। भारत की भूमिका भारत ने हमेशा शांति की वकालत की है। प्रधानमंत्री ने दोनों पक्षों से बात की। भारत मध्यस्थ बन सकता है। यह क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अच्छा होगा। इसके अलावा, युद्ध से ऊर्जा कीमतें प्रभावित होती हैं। भारत को फायदा होगा यदि शांति हो। निष्कर्ष यूक्रेन-रूस शांति वार्ता महत्वपूर्ण मोड़ पर है। ९०% समझौता तैयार है। लेकिन रूस की साजिश चिंता का विषय है। दुनिया को एकजुट होना चाहिए। शांति से सभी को फायदा होगा। हम आगे की खबरों पर नजर रखेंगे। यह स्थिति तेजी से बदल रही है। अधिक जानकारी के लिए जय राष्ट्र न्यूज पर बने रहें। यदि आपके कोई सवाल हैं, तो कमेंट करें।

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दिल्ली: 14 साल की दिव्या ने कराटे की ताकत से चेन स्नैचर को दौड़ाकर पकड़ा, मां को धक्का देकर भाग रहा था चोर

14 साल की दिव्या ने कराटे की ताकत से चेन स्नैचर को दौड़ाकर पकड़ा

नई दिल्ली, 01 जनवरी 2026: दिल्ली के उत्तम नगर में एक 14 साल की लड़की ने अपनी बहादुरी और कराटे की ट्रेनिंग से सभी को चौंका दिया। उसने अपनी मां से चेन छीनकर उन्हें धक्का देने वाले चोर का करीब आधा किलोमीटर तक पीछा किया और आखिरकार उसे पकड़कर गिरा दिया। यह घटना उत्तम नगर के ओम विहार फेज-5 इलाके में हुई। केरल मूल की साठी अपनी बेटी दिव्या के साथ ट्यूशन से घर लौट रही थीं। रात लगभग 8 बजे घर के पास पहुंचते ही एक व्यक्ति ने साठी को धक्का देकर उनकी सोने की चेन छीन ली और तेजी से भागने लगा। चेन में लगा लॉकेट करीब एक सोवरिन का था। दिव्या ने बिल्कुल भी घबराए बिना तुरंत चोर का पीछा शुरू कर दिया। व्यस्त सड़क पर वाहनों के बीच दौड़ते हुए उसने करीब आधा किलोमीटर तक चोर को खदेड़ा। फिर अपनी पांच साल की कराटे ट्रेनिंग का इस्तेमाल कर उसे पकड़ लिया और जमीन पर पटक दिया। आसपास के लोगों ने पुलिस को सूचना दी, लेकिन चेन वापस मिल जाने के कारण साठी ने चोर के खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं कराई। हालांकि चेन का लॉकेट गायब था। दिव्या नवादा स्थित पंजाजन्यम भारतम कल्चरल सेंटर में शीलू जोसेफ से कराटे सीख रही हैं। वह विकसित पुरी के केरल स्कूल में कक्षा 9 की छात्रा हैं। मां साठी ने कहा, “चेन से ज्यादा बेटी की सुरक्षा की चिंता थी।” यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि लड़कियों के लिए सेल्फ-डिफेंस ट्रेनिंग कितनी जरूरी है। दिव्या की बहादुरी की सोशल मीडिया पर खूब प्रशंसा हो रही है। (जय राष्ट्र न्यूज़ ब्यूरो)

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