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22 साल बाद Shaurya Chakra लौटाने को तैयार शहीद की मां, सरकार पर वादे पूरे न करने का आरोप

लखनऊ, 7 सितंबर 2026: मणिपुर में आतंकवादियों से मुकाबला करते हुए शहीद हुए Shaurya Chakra विजेता पूर्व Assistant Commandant Vivek Saxena की 80 वर्षीय मां सावित्री सक्सेना ने बेटे को मिले पदक और सम्मान राशि सरकार को वापस करने की पेशकश की है। परिवार का आरोप है कि शहादत के 22 साल बाद भी जमीन और memorial park से जुड़े सरकारी आश्वासन पूरे नहीं हुए हैं। 2003 में मणिपुर में शहीद हुए थे Vivek Saxena विवेक सक्सेना 8 जनवरी 2003 को मणिपुर में आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हुए थे। उनकी वीरता के लिए उन्हें बाद में Shaurya Chakra और President’s Police Medal से सम्मानित किया गया। परिवार का दावा—जमीन और Memorial Park का था वादा विवेक के बड़े भाई रंजीत सक्सेना के मुताबिक शहादत के बाद सरकार ने परिवार को rural quota के तहत जमीन देने और विवेक की स्मृति में memorial park विकसित करने का आश्वासन दिया था। परिवार का कहना है कि दो दशक से ज्यादा समय बीतने के बावजूद ये वादे पूरे नहीं हुए। 2016 में शुरू हुई थी कार्रवाई परिवार के अनुसार 2016 में तत्कालीन Lucknow District Magistrate Raj Shekhar ने मामले का संज्ञान लिया था। उन्होंने संबंधित विभागों को आवेदन पर कार्रवाई करने और Additional District Magistrate को जांच कर जमीन आवंटन तथा memorial की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे। Domicile को लेकर अटक गया मामला रंजीत सक्सेना का आरोप है कि जमीन आवंटन की प्रक्रिया के दौरान परिवार से Uttar Pradesh का domicile साबित करने को कहा गया। परिवार ने जरूरी affidavit और documents जमा किए, लेकिन इसके बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। परिवार ने सवाल उठाया कि जब राज्य सरकार पहले उसी Lucknow address पर आर्थिक सहायता दे चुकी थी, तो बाद में domicile पर आपत्ति क्यों उठाई गई। Shaurya Chakra की सम्मान राशि के लिए भी लंबा इंतजार परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि Shaurya Chakra से जुड़ी monetary award राशि पाने के लिए उन्हें 2024 तक इंतजार करना पड़ा। रंजीत का कहना है कि file लंबे समय तक अलग-अलग सरकारी offices और desks के बीच घूमती रही। 80 वर्षीय मां बोलीं—अब दफ्तरों के चक्कर लगाने की ताकत नहीं सावित्री सक्सेना ने कहा कि 80 वर्ष की उम्र में अब उनमें बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की ताकत नहीं बची है। उन्होंने कहा कि यदि बेटे की शहादत के इतने वर्षों बाद भी परिवार को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़े, तो सरकार Shaurya Chakra, दूसरे medals और सम्मान राशि वापस ले सकती है। President और मुख्यमंत्री से मांगा मिलने का समय शहीद की मां ने अब President और Uttar Pradesh Chief Minister से मिलने का समय मांगा है। परिवार चाहता है कि लंबित जमीन और memorial से जुड़े मामलों पर अंतिम निर्णय लिया जाए। SDM ने एक सप्ताह में समाधान के दिए निर्देश मामला grievance redressal programme में उठाए जाने के बाद Sub-Divisional Magistrate ने संबंधित अधिकारियों को शिकायतों की जांच करने और एक सप्ताह के भीतर समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल परिवार की मांगों पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार है। source – India Today / ANIजय राष्ट्र न्यूज़

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18,600 फीट पर Indian Army का साहसिक Rescue; Nun Kun की खड़ी ढलान पर One-Skid Landing कर बचाई मरीज की जान

लद्दाख: Indian Army Aviation के pilots ने Nun Kun massif के पास 18,600 फीट की ऊंचाई पर बेहद कठिन high-altitude rescue operation को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। तेज पहाड़ी हवाओं, खड़ी ढलान और landing के लिए जगह नहीं होने के बावजूद pilots ने helicopter को सिर्फ एक skid के सहारे slope पर स्थिर रखा और casualty को सुरक्षित निकाल लिया। यह operation शनिवार, 29 अगस्त 2026 को किया गया, जिसकी जानकारी Army की Fire and Fury Corps ने साझा की। Landing के लिए नहीं थी कोई जगह Rescue site बेहद steep mountain slope पर थी, जहां helicopter को सामान्य तरीके से उतारने के लिए कोई flat landing area मौजूद नहीं था। ऊपर से strong mountain winds और तेजी से खत्म होती daylight ने operation को और मुश्किल बना दिया। Pilots ने helicopter को low hover में लाकर उसका एक skid slope से touch कराया, जिससे aircraft कुछ समय के लिए stable रह सके। इसी दौरान patient को तेजी से helicopter में secure किया गया और crew सुरक्षित तरीके से वहां से निकल गया। Helicopter का वजन कम करना पड़ा 18,600 फीट की ऊंचाई पर हवा काफी पतली होती है। इससे helicopter engine की performance और rotor lift दोनों कम हो जाते हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए crew ने aircraft से सभी non-essential equipment हटा दिए और केवल उतना ही fuel रखा जितना rescue mission पूरा करने और वापस लौटने के लिए जरूरी था। इससे helicopter का वजन कम हुआ और extreme altitude पर जरूरी lift हासिल की जा सकी। आखिरी Available Landing Window में हुआ Mission Army के मुताबिक यह rescue दिन के “last available landing window” में किया गया। यानी pilots के पास daylight खत्म होने से पहले operation पूरा करने के लिए बहुत कम समय था। Strong winds, fading light और steep terrain के बीच mission में किसी भी गलती की गुंजाइश बेहद कम थी। Fire and Fury Corps ने की Pilots की सराहना Indian Army की Fire and Fury Corps ने operation की जानकारी देते हुए pilots के skill, courage और compassion की सराहना की। Army ने कहा कि इस high-altitude casualty evacuation में aviators ने exceptional precision और determination दिखाई और mission Army Aviation की operational capability का उदाहरण है। Nun Kun क्यों इतना Challenging है? Nun Kun massif Ladakh के Kargil region के बेहद ऊंचे और कठिन Himalayan terrain में स्थित है। यहां मौसम तेजी से बदल सकता है और extreme altitude पर helicopter operations technical रूप से काफी demanding होते हैं। Thin air, strong winds और landing zones की कमी के कारण casualty evacuation missions में aircraft performance और pilot skill दोनों की सीमाओं की परीक्षा होती है। इस operation में helicopter को एक skid पर stabilise करना इसी चुनौती का सबसे critical हिस्सा था। Casualty की पहचान नहीं की गई सार्वजनिक Army और उपलब्ध media reports ने बचाए गए व्यक्ति को “casualty” या “patient” के रूप में describe किया है। उसकी identity, injury की nature या वह soldier था या civilian—इस बारे में official details सार्वजनिक नहीं की गई हैं। इसलिए बिना official confirmation उसे soldier, mountaineer या tourist बताना सही नहीं होगा। 30 August की Latest Situation 30 अगस्त 2026 तक verified जानकारी यह है: इसलिए सबसे accurate headline होगी: 18,600 फीट पर Indian Army का साहसिक Rescue; Nun Kun की खड़ी ढलान पर One-Skid Landing कर बचाई मरीज की जान स्रोत – Indian Army Fire and Fury Corps, ANI, The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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Indian Army ने बनाया पहला ‘Baaz Battalion’, drones से surveillance से लेकर deep strike तक बढ़ेगी ताकत

नई दिल्ली: भारतीय सेना ने आधुनिक युद्ध की बदलती जरूरतों को देखते हुए अपना पहला विशेष ‘Baaz Battalion’ operationalise कर दिया है। यह dedicated drone unit पंजाब में सेना की 11 Corps यानी Vajra Corps के तहत बनाई गई है। इसका उद्देश्य सीमा पर लगातार निगरानी, battlefield intelligence और जरूरत पड़ने पर लंबी दूरी के drone operations की क्षमता को मजबूत करना है। ‘Baaz’ का अर्थ बाज यानी hawk है। सेना की यह नई पहल unmanned aerial systems को एक dedicated formation के तहत लाकर surveillance से लेकर future battlefield operations तक उनकी भूमिका को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। Punjab में बनी पहली Baaz Battalion 22 अगस्त 2026 को सामने आई जानकारी के मुताबिक भारतीय सेना की Vajra Corps या 11 Corps पहली formation बन गई है जिसने Baaz Battalion को operationalise किया है। 11 Corps का मुख्यालय जालंधर में है और इसकी operational responsibility पश्चिमी मोर्चे से जुड़ी हुई है। आकाशवाणी की रिपोर्ट के अनुसार नई battalion का उद्देश्य भारतीय सेना की aerial agility, responsiveness और battlefield reach बढ़ाना है। सेना इसे भविष्य के battlefield में ‘eyes in the sky’ की भूमिका देने की तैयारी कर रही है, जहां drones वास्तविक समय में दुश्मन की गतिविधियों, terrain और battlefield developments की जानकारी दे सकेंगे। Surveillance से Deep Strike तक क्या होगी भूमिका? Baaz Battalions को केवल सीमित दूरी की निगरानी के लिए नहीं बनाया गया है। इस योजना की घोषणा जून 2026 में करते हुए भारतीय सेना ने संकेत दिया था कि ये specialised units long-range surveillance, intelligence gathering, reconnaissance, targeting और strike-related drone missions को संभालने में सक्षम होंगी। ऐसी units का उद्देश्य frontline commanders को battlefield की ज्यादा स्पष्ट और लगातार जानकारी उपलब्ध कराना है। लंबी दूरी वाले unmanned systems की मदद से सेना सीमा के पार गहराई तक surveillance कर सकती है और operational requirement के अनुसार targets की पहचान तथा अन्य battlefield systems के साथ coordination बेहतर हो सकता है। Operation Sindoor के बाद तेज हुआ बदलाव Baaz Battalion की योजना भारतीय सेना के व्यापक transformation programme का हिस्सा है। रिपोर्ट्स के अनुसार इसके पीछे हाल के सैन्य अनुभवों, चीन के साथ Line of Actual Control पर लंबे गतिरोध और Operation Sindoor के दौरान drone और loitering-munition systems से मिले lessons की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आधुनिक युद्ध में drones का इस्तेमाल केवल निगरानी तक सीमित नहीं है। Russia-Ukraine war से लेकर कई हालिया संघर्षों में surveillance drones, kamikaze drones और loitering munitions ने battlefield tactics को तेजी से बदला है। भारतीय सेना भी इसी बदलाव को देखते हुए unmanned systems को अपने operational structure में ज्यादा गहराई से शामिल कर रही है। Army Aviation Corps के तहत होंगी specialised units जून में Baaz Battalions की योजना सामने आने के समय बताया गया था कि ये units Army Aviation Corps के तहत काम करेंगी। इनमें drone systems को operate करने, maintain करने और उनसे आने वाले बड़े पैमाने के intelligence data को analyse करने के लिए specialised personnel का pool तैयार किया जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि अलग-अलग drone platforms के training, maintenance, deployment और battlefield integration को एक dedicated structure में manage किया जा सकेगा। Ashini Drone Platoons से कैसे अलग है Baaz Battalion? भारतीय सेना में अलग-अलग स्तर पर drones के इस्तेमाल के लिए अलग formations तैयार की जा रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार infantry battalions में Ashini drone platoons tactical और नजदीकी surveillance के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। इनके विपरीत Baaz Battalion का focus अधिक दूरी और बड़े operational area में surveillance तथा drone operations पर होगा। इसके अलावा Artillery की Divyastra batteries loitering ammunition और one-way attack drones से जुड़ी भूमिका निभाती हैं। इस प्रकार Baaz Battalion को सेना के long-range drone ecosystem के एक centralized operational hub के रूप में देखा जा रहा है। किन drones का हो सकता है इस्तेमाल? Baaz Battalion में इस्तेमाल होने वाले exact platforms की पूरी operational जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। हालांकि पहले सामने आई रिपोर्ट्स में संकेत दिया गया था कि future Baaz formations long-range UAV fleets के साथ काम कर सकती हैं। भारतीय सेना के पास पहले से Israeli-origin Heron जैसे UAV platforms मौजूद हैं और देश अपनी indigenous drone capabilities भी तेजी से बढ़ा रहा है। भारत अमेरिका से MQ-9B remotely piloted aircraft भी हासिल करने की प्रक्रिया में है, जबकि Indian private sector में कई कंपनियां surveillance और combat drone technologies पर काम कर रही हैं। Drone और Counter-Drone Systems पर भी बढ़ रहा निवेश भारतीय सेना केवल offensive और surveillance drones पर ही नहीं बल्कि counter-drone capabilities पर भी निवेश बढ़ा रही है। जुलाई 2026 में Defence Acquisition Council ने करीब ₹52,000 करोड़ के विभिन्न defence procurement proposals को Acceptance of Necessity प्रदान किया था। इनमें भारतीय सेना के लिए AKASH TARANG Anti-UAV Electronic Warfare System और Jet Based Kamikaze Drone System जैसे प्रस्ताव भी शामिल थे। यह बताता है कि भविष्य के युद्ध में drone और counter-drone warfare दोनों सेना की modernisation strategy का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। भविष्य के युद्ध के लिए Army की नई तैयारी Baaz Battalion का गठन भारतीय सेना की उस रणनीति को दर्शाता है जिसमें manpower और traditional weapons के साथ-साथ technology-driven warfare पर तेजी से जोर दिया जा रहा है। Vajra Corps के General Officer Commanding ने battalion के raising day पर Baaz aviators और personnel से बातचीत करते हुए technology, innovation और operational excellence को भविष्य के battlefield के लिए महत्वपूर्ण बताया। पहली Baaz Battalion के operational होने के बाद अब आने वाले समय में सेना अन्य formations में भी ऐसी dedicated drone units का विस्तार कर सकती है। नई unit के साथ भारतीय सेना का लक्ष्य साफ है—सीमा पर ज्यादा बेहतर निगरानी, तेजी से intelligence जुटाना और जरूरत पड़ने पर drone-based long-range operations के जरिए battlefield पर technological edge हासिल करना। स्रोत – आकाशवाणी न्यूज़, टाइम्स ऑफ इंडिया, द ट्रिब्यून, बिजनेस स्टैंडर्ड जय राष्ट्र न्यूज़

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नागालैंड के नन्हे रॉकस्टार ‘याटो’ ने जीता देशवासियों का दिल, राष्ट्रगान की आवाज ने मचाई धूम

नई दिल्ली: नागालैंड के महज 5 साल के याटो वांगनाओ इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोर रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उनका ‘जन गण मन’ गाने का वीडियो वायरल हुआ, जिसे सुनकर देशभर के लोग उनकी मासूमियत, आत्मविश्वास और देशभक्ति की जमकर तारीफ कर रहे हैं। याटो के राष्ट्रगान ने मचाई धूम याटो का राष्ट्रगान गाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। छोटी सी उम्र में जिस आत्मविश्वास और भावनात्मक अंदाज में उन्होंने ‘जन गण मन’ प्रस्तुत किया, उसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। खास तौर पर राष्ट्रगान के अंतिम हिस्से ‘जय हे’ को जिस अंदाज में याटो ने गाया, उसकी सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हुई। कई लोगों ने वीडियो को बार-बार देखने और सुनने की बात कही। आनंद महिंद्रा भी हुए प्रभावित याटो की प्रतिभा से प्रभावित होकर उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने भी उनका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया। उन्होंने याटो की प्रस्तुति की तारीफ करते हुए नागालैंड की खूबसूरती और सांस्कृतिक पहचान को भी सामने रखा। महिंद्रा ने याटो के वीडियो को नागालैंड के लिए एक तरह का अनौपचारिक टूरिज्म प्रमोशन बताते हुए कहा कि इस छोटे बच्चे ने जिस तरह लोगों का ध्यान नागालैंड की ओर खींचा, वह बेहद खास है। छोटी उम्र, बड़ा आत्मविश्वास याटो की सबसे खास बात उनकी उम्र के मुकाबले उनका आत्मविश्वास है। महज पांच साल की उम्र में राष्ट्रगान को इस तरह पूरे जोश और भाव के साथ प्रस्तुत करना सोशल मीडिया यूजर्स को काफी पसंद आया। उनके वीडियो ने एक बार फिर दिखाया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में छिपी प्रतिभाएं किस तरह सोशल मीडिया के जरिए पूरे भारत तक पहुंच सकती हैं। नागालैंड की संस्कृति भी चर्चा में याटो की वायरल प्रस्तुति के साथ नागालैंड भी चर्चा में आ गया है। पूर्वोत्तर भारत की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विविधता को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। आनंद महिंद्रा की पोस्ट के बाद कई यूजर्स ने नागालैंड को अपनी Travel Bucket List में शामिल करने की बात कही। सोशल मीडिया पर मिल रहा प्यार याटो के वीडियो पर देशभर से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। लोग उनकी आवाज, मासूमियत और देशभक्ति की भावना की तारीफ कर रहे हैं। कई यूजर्स ने याटो को भविष्य का बड़ा कलाकार बताते हुए उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करने की अपील भी की है। निष्कर्ष नागालैंड के 5 वर्षीय याटो वांगनाओ ने अपनी प्यारी आवाज और जोशीले अंदाज में राष्ट्रगान गाकर देशवासियों का दिल जीत लिया है। उनका वायरल वीडियो न सिर्फ उनकी प्रतिभा को सामने ला रहा है, बल्कि नागालैंड की खूबसूरती और पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक पहचान को भी देशभर में चर्चा में ला रहा है। Source: Times of India, Navbharat Times जय राष्ट्र न्यूज़

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स्वतंत्रता दिवस और आगामी सांस्कृतिक आयोजनों की तैयारियाँ तेज़, देशभर में विशेष कार्यक्रमों की घोषणा

नई दिल्ली: आगामी 79वें स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) और उससे पहले आयोजित होने वाले विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों को लेकर देशभर में तैयारियाँ तेज़ हो गई हैं। केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, जिला प्रशासन, शैक्षणिक संस्थान और सांस्कृतिक संगठन राष्ट्रीय उत्सव को भव्य बनाने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। कई राज्यों में देशभक्ति सांस्कृतिक संध्या, तिरंगा यात्राएँ, कला एवं शिल्प प्रदर्शनियाँ, विद्यालयी कार्यक्रम, लोकनृत्य प्रस्तुतियाँ और युवा महोत्सव आयोजित किए जाने की घोषणा की गई है। लाल किले से होगा मुख्य समारोह नई दिल्ली के लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और विभिन्न एजेंसियाँ आयोजन की व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रही हैं। प्रधानमंत्री के संबोधन, ध्वजारोहण समारोह और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियाँ चल रही हैं। राज्यों में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम और अन्य राज्यों में स्थानीय प्रशासन द्वारा स्वतंत्रता दिवस सप्ताह के दौरान विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें लोक कलाकारों की प्रस्तुतियाँ, देशभक्ति गीत, नाटक, चित्रकला प्रतियोगिताएँ, हस्तशिल्प मेले और पारंपरिक कला प्रदर्शन शामिल होंगे। युवाओं और छात्रों की भागीदारी विद्यालयों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में देशभक्ति पर आधारित प्रतियोगिताएँ, भाषण, वाद-विवाद, निबंध लेखन, वृक्षारोपण अभियान और तिरंगा रैलियों की तैयारी की जा रही है। शिक्षा विभाग ने संस्थानों से अधिकाधिक छात्र भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की है। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को मिलेगा बढ़ावा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत नागरिकों से अपने घरों, कार्यालयों और संस्थानों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने की अपील की जा रही है। प्रशासन विभिन्न स्थानों पर तिरंगा वितरण और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित करेगा ताकि अधिक से अधिक लोग अभियान से जुड़ सकें। पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ स्वतंत्रता दिवस और उससे जुड़े आयोजनों के कारण पर्यटन स्थलों, संग्रहालयों, सांस्कृतिक केंद्रों और स्थानीय बाजारों में गतिविधियाँ बढ़ने की संभावना है। इससे होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और छोटे व्यापारियों को भी आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। निष्कर्ष स्वतंत्रता दिवस केवल राष्ट्रीय उत्सव नहीं, बल्कि देश की संस्कृति, एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है। देशभर में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम नागरिकों, विशेषकर युवाओं में राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करने और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेंगे। Source: Ministry of Culture | Ministry of Home Affairs जय राष्ट्र न्यूज़

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स्वदेशी रक्षा तकनीक और AI आधारित सैन्य प्रणालियों पर रक्षा प्रतिष्ठानों में समीक्षा तेज़, आधुनिकीकरण पर सरकार का फोकस

नई दिल्ली: भारतीय सशस्त्र बलों को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप अधिक सक्षम बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय, तीनों सेनाओं और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के बीच उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकों का दौर जारी है। इन बैठकों में स्वदेशी रक्षा तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित सैन्य प्रणालियाँ, ड्रोन, साइबर सुरक्षा, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता और आधुनिक हथियार प्रणालियों के विकास की प्रगति की समीक्षा की जा रही है। सरकार का उद्देश्य ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन और तकनीकी आत्मनिर्भरता को और मजबूत करना है। AI और आधुनिक युद्ध तकनीक पर विशेष जोर रक्षा अधिकारियों के अनुसार भविष्य के युद्धों में AI आधारित निगरानी प्रणाली, स्वायत्त ड्रोन, स्मार्ट सेंसर, रियल-टाइम डेटा विश्लेषण और नेटवर्क-केंद्रित युद्ध प्रणाली (Network-Centric Warfare) महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी। इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेनाएँ नई तकनीकों को चरणबद्ध तरीके से अपने परिचालन ढाँचे में शामिल करने की दिशा में काम कर रही हैं। स्वदेशी रक्षा परियोजनाओं की समीक्षा समीक्षा बैठकों में DRDO द्वारा विकसित विभिन्न स्वदेशी परियोजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा हुई। इनमें मिसाइल प्रणालियाँ, एयर डिफेंस सिस्टम, काउंटर-ड्रोन तकनीक, उन्नत संचार प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरण शामिल हैं। सरकार चाहती है कि भारतीय उद्योग और रक्षा स्टार्टअप्स की भागीदारी बढ़ाकर घरेलू रक्षा निर्माण को और गति दी जाए। तीनों सेनाओं के संयुक्त संचालन पर फोकस थल सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए संयुक्त कमान, साझा डिजिटल नेटवर्क और एकीकृत रक्षा प्रणाली (Integrated Defence Architecture) पर भी काम किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि आधुनिक तकनीक के बेहतर उपयोग से निर्णय लेने की गति और सैन्य दक्षता दोनों में सुधार होगा। निजी उद्योग और स्टार्टअप्स की बढ़ती भूमिका रक्षा मंत्रालय ने निजी कंपनियों, MSME और रक्षा स्टार्टअप्स के साथ सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया है। AI, रोबोटिक्स, ड्रोन, साइबर सुरक्षा और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों को नई परियोजनाओं से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है, जिससे स्वदेशी रक्षा उत्पादन को मजबूती मिलेगी। निष्कर्ष भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा तकनीकों के विकास को लेकर चल रही समीक्षा बैठकें देश की दीर्घकालिक रक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। AI आधारित प्रणालियों, आधुनिक हथियारों और स्वदेशी अनुसंधान पर बढ़ते फोकस से भारत की रक्षा क्षमता को आने वाले वर्षों में नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। Source: Ministry of Defence | DRDO | Indian Armed Forces जय राष्ट्र न्यूज़

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भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों पर जोर, रक्षा प्रतिष्ठानों में समीक्षा बैठकों का दौर जारी

नई दिल्ली: भारतीय सशस्त्र बलों की युद्ध क्षमता बढ़ाने और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से रक्षा प्रतिष्ठानों में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकों का दौर जारी है। इन बैठकों में आधुनिक युद्ध तकनीकों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ड्रोन, एयर डिफेंस, स्वदेशी हथियार प्रणालियों और संयुक्त सैन्य संचालन (Joint Operations) की तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू रक्षा उद्योग को नई गति देना है। स्वदेशी रक्षा प्रणालियों को मिल रहा बढ़ावा रक्षा मंत्रालय और DRDO लगातार नई स्वदेशी तकनीकों के विकास पर काम कर रहे हैं। हाल ही में DRDO और भारतीय वायुसेना ने Tactical Advanced Range Augmentation (TARA) नामक स्वदेशी ग्लाइड हथियार प्रणाली का सफल परीक्षण किया, जो सामान्य बमों को सटीक निर्देशित हथियारों में बदलने की क्षमता रखती है। रक्षा विशेषज्ञ इसे भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक में महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहे हैं। ड्रोन और एयर डिफेंस पर विशेष फोकस हाल के सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए भारतीय सेना और वायुसेना ड्रोन रोधी (Counter-Drone) प्रणालियों, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम (AEW&C) और आधुनिक सेंसर नेटवर्क को मजबूत करने पर विशेष जोर दे रही हैं। हाल ही में भारतीय सेना ने स्वदेशी ‘भार्गवास्त्र’ (Bhargavastra) काउंटर-ड्रोन प्रणाली का प्रदर्शन देखा, जिसे ड्रोन झुंड (Drone Swarm) जैसे खतरों से निपटने के लिए विकसित किया गया है। संयुक्त सैन्य क्षमता पर जोर रक्षा प्रतिष्ठानों में चल रही समीक्षा बैठकों में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय, संयुक्त कमान प्रणाली, डिजिटल युद्ध क्षमता और भविष्य के युद्धों के लिए तकनीकी तैयारियों पर भी चर्चा हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध में नेटवर्क आधारित संचालन, साइबर सुरक्षा और AI आधारित निर्णय प्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। रक्षा उद्योग और निजी क्षेत्र की भागीदारी सरकार रक्षा उत्पादन में निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दे रही है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार स्वदेशी अनुसंधान, निर्माण और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए उद्योगों के साथ सहयोग लगातार बढ़ाया जा रहा है, जिससे भारत वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। निष्कर्ष भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण, स्वदेशी हथियार प्रणालियों के विकास और नई तकनीकों को अपनाने की दिशा में चल रही समीक्षा बैठकें भारत की दीर्घकालिक रक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। सरकार का उद्देश्य भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तकनीकी रूप से सक्षम, आत्मनिर्भर और आधुनिक सैन्य शक्ति तैयार करना है। Source: Ministry of Defence | DRDO | Indian Armed Forces जय राष्ट्र न्यूज़

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केंद्र सरकार ने विस्तारित Khelo India Scheme को मंजूरी दी, खेल ढाँचे को मजबूत करने के लिए ₹36,441 करोड़ का बड़ा प्रावधान

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश में खेलों को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के उद्देश्य से विस्तारित Khelo India Scheme को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना के लिए ₹36,441 करोड़ के बड़े वित्तीय प्रावधान को स्वीकृति दी है। सरकार का कहना है कि इस निवेश का उद्देश्य ग्रासरूट स्तर से लेकर एलीट खिलाड़ियों तक एक मजबूत खेल पारिस्थितिकी तंत्र (Sports Ecosystem) तैयार करना और भारत को वैश्विक खेल महाशक्ति बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाना है। नई Khelo India Scheme के तहत खेल अवसंरचना (Sports Infrastructure), प्रतिभा खोज (Talent Identification), उच्च स्तरीय प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, महिला खिलाड़ियों, पैरा स्पोर्ट्स, स्वदेशी खेलों और कोचिंग व्यवस्था को व्यापक रूप से मजबूत किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य देशभर में आधुनिक खेल सुविधाओं का विस्तार करना और युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी उपलब्ध कराना है। खेल अवसंरचना पर विशेष फोकस योजना के अंतर्गत नए खेल केंद्र, प्रशिक्षण अकादमियाँ, हाई-परफॉर्मेंस सेंटर और आधुनिक खेल सुविधाओं के विकास को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही राज्यों के साथ मिलकर जिला और ब्लॉक स्तर तक खेल सुविधाएँ विकसित करने की योजना बनाई गई है, जिससे ग्रामीण और छोटे शहरों के खिलाड़ियों को भी बेहतर अवसर मिल सकें। खिलाड़ियों को मिलेगा बेहतर समर्थन सरकार का कहना है कि विस्तारित योजना के माध्यम से खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, पोषण, खेल उपकरण, प्रतियोगिताओं में भागीदारी और खेल विज्ञान से जुड़ी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी। विशेष ध्यान महिला खिलाड़ियों, दिव्यांग खिलाड़ियों और उभरती प्रतिभाओं पर रहेगा ताकि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रदर्शन और बेहतर हो सके। 2036 ओलंपिक दृष्टि को मिलेगा बल विशेषज्ञों का मानना है कि Khelo India Scheme का विस्तार भारत की दीर्घकालिक खेल रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह पहल भविष्य में ओलंपिक, एशियाई खेलों और अन्य वैश्विक प्रतियोगिताओं में भारत की पदक संभावनाओं को मजबूत करने के साथ-साथ खेलों को रोजगार और करियर के रूप में भी बढ़ावा देगी। निष्कर्ष ₹36,441 करोड़ के प्रावधान के साथ विस्तारित Khelo India Scheme भारत के खेल क्षेत्र में अब तक के सबसे बड़े निवेशों में से एक है। सरकार का मानना है कि इस योजना से खेल प्रतिभाओं को बेहतर अवसर, आधुनिक सुविधाएँ और विश्वस्तरीय प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे भारत का खेल भविष्य और मजबूत होगा। Source: Ministry of Youth Affairs & Sports | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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कारगिल विजय दिवस पर देशभर में वीर शहीदों को श्रद्धांजलि, सेना ने शौर्य और बलिदान को किया नमन

नई दिल्ली/द्रास: 27वाँ कारगिल विजय दिवस पूरे देश में श्रद्धा, गर्व और सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री, तीनों सेनाओं के प्रमुखों तथा देशभर के नागरिकों ने 1999 के कारगिल युद्ध में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। लद्दाख के द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक सहित देश के विभिन्न युद्ध स्मारकों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहाँ शहीदों की याद में पुष्पचक्र अर्पित किए गए और दो मिनट का मौन रखा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि कारगिल के वीरों का साहस, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने कहा कि भारत अपने सैनिकों के बलिदान को कभी नहीं भूलेगा और राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी। द्रास युद्ध स्मारक पर विशेष समारोह कारगिल युद्ध स्मारक पर भारतीय सेना द्वारा आयोजित मुख्य समारोह में सेना के वरिष्ठ अधिकारियों, शहीदों के परिजनों, पूर्व सैनिकों और बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लिया। इस दौरान— 1999 के कारगिल युद्ध की याद कारगिल युद्ध मई से जुलाई 1999 के बीच लड़ा गया था, जब भारतीय सेना ने कठिन परिस्थितियों में दुश्मन के कब्जे वाले रणनीतिक इलाकों को वापस हासिल किया था। 26 जुलाई 1999 को भारत ने ऑपरेशन विजय की सफलता की आधिकारिक घोषणा की थी। इस युद्ध में भारतीय सेना के 527 से अधिक वीर जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था। देशभर में आयोजित हुए कार्यक्रम कारगिल विजय दिवस के अवसर पर— युवाओं के लिए प्रेरणा रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कारगिल विजय दिवस केवल एक ऐतिहासिक जीत का स्मरण नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, साहस और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक भी है। यह दिवस युवाओं को देश सेवा और राष्ट्रीय एकता के प्रति प्रेरित करता है। निष्कर्ष कारगिल विजय दिवस भारत के वीर सैनिकों के अदम्य साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति का अमर प्रतीक है। देश आज भी उन वीर शहीदों का ऋणी है जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। Source: Ministry of Defence | Indian Army | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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कारगिल विजय दिवस: राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य आधुनिकीकरण और नई चुनौतियों पर नए भारत की रणनीति

कारगिल विजय दिवस केवल 1999 के युद्ध में भारत की ऐतिहासिक जीत का स्मरण नहीं है, बल्कि यह देश की राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य तैयारी और भविष्य की रक्षा रणनीति पर गंभीर चिंतन का भी अवसर है। कारगिल युद्ध ने यह स्पष्ट कर दिया था कि बदलती युद्ध परिस्थितियों में केवल सैनिकों का साहस ही नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक, सटीक खुफिया तंत्र और तेज़ निर्णय क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। आज, 26 जुलाई को जब पूरा देश कारगिल के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है, तब यह भी आवश्यक है कि भारत भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप अपनी रक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत बनाए। कारगिल युद्ध से मिले महत्वपूर्ण सबक कारगिल संघर्ष ने भारतीय सुरक्षा तंत्र को कई महत्वपूर्ण सीख दी— इन्हीं अनुभवों के आधार पर पिछले वर्षों में भारत ने रक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। सैन्य आधुनिकीकरण की दिशा में तेज़ कदम आज भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दे रहा है। सरकार का फोकस निम्न क्षेत्रों पर है— इन पहलों का उद्देश्य भारतीय सेनाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए अधिक सक्षम बनाना है। नई सुरक्षा चुनौतियां आज की सुरक्षा चुनौतियां 1999 से कहीं अधिक जटिल हैं। पारंपरिक युद्ध के साथ-साथ अब— जैसी नई चुनौतियां भी सामने हैं। इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा का दायरा केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं रह गया है। आत्मनिर्भर भारत और रक्षा क्षेत्र ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा उत्पादन में स्वदेशी तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना और भारतीय उद्योगों तथा स्टार्टअप्स को रक्षा क्षेत्र में नई भूमिका देना है। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होने के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलती है। कारगिल के वीरों से प्रेरणा कारगिल के सैनिकों ने कठिन परिस्थितियों में अदम्य साहस, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का परिचय दिया। उनका बलिदान आज भी भारतीय सशस्त्र बलों और देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सैनिकों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भी साझा जिम्मेदारी है। निष्कर्ष कारगिल विजय दिवस हमें अतीत की वीरता को याद करने के साथ-साथ भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के प्रति सजग रहने का संदेश देता है। आधुनिक तकनीक, आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन, मजबूत सुरक्षा ढांचा और प्रशिक्षित सेनाएं ही भारत को बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में अधिक सक्षम बनाएंगी। कारगिल के वीरों का सर्वोच्च बलिदान हमें हमेशा यह याद दिलाता रहेगा कि राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोपरि है। Source: Ministry of Defence | Indian Army | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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