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उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच तनाव बढ़ा, सीमा के पास North Korean howitzers देखे गए

सियोल: उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। दक्षिण कोरिया की सीमा के पास उत्तर कोरिया के तीन self-propelled 122-mm howitzers देखे गए हैं, जिनकी बंदूकें दक्षिण की ओर थीं। Reuters के मुताबिक यह तैनाती Demilitarised Zone (DMZ) के पास स्पष्ट रूप से दिखाई दी और इसे उत्तर कोरिया की ओर से एक खुली सैन्य चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है। सीमा के पास दिखाई दिए तीन howitzers दक्षिण कोरिया के Gimpo स्थित एक observatory से सीमा की ओर देखने पर तीन North Korean armoured vehicles दिखाई दिए। दक्षिण कोरियाई मीडिया ने इन्हें M-1981 122-mm self-propelled howitzers के रूप में पहचाना है। इनकी अनुमानित मारक क्षमता करीब 24 किलोमीटर बताई जा रही है। बंदूकों का रुख दक्षिण कोरिया की ओर Reuters के प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार तीनों artillery vehicles की gun barrels दक्षिण दिशा की ओर थीं। इसी दौरान करीब 20 से 30 North Korean soldiers DMZ के अंदर fencing का काम करते हुए भी दिखाई दिए। इतनी खुली तैनाती क्यों है महत्वपूर्ण? विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर कोरिया आमतौर पर अपनी artillery को इस तरह खुले तौर पर प्रदर्शित नहीं करता। इसलिए सीमा के इतने पास इन हथियारों को साफ दिखाई देने वाली जगह पर रखना एक show of force या राजनीतिक-सैन्य संदेश माना जा रहा है। हालांकि दक्षिण कोरियाई सेना ने कहा है कि ये हथियार कोई नई प्रणाली नहीं हैं। सितंबर की landmine घटना के बाद बढ़ा तनाव दोनों देशों के बीच मौजूदा तनाव की बड़ी वजह 21 सितंबर की landmine explosion भी है, जिसमें तीन दक्षिण कोरियाई सैनिक घायल हुए थे। दक्षिण कोरिया का कहना है कि बारूदी सुरंग उत्तर कोरिया ने लगाई थी, जबकि Pyongyang इस आरोप को खारिज करता है। मामला UN Security Council तक पहुंचा उत्तर कोरिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि दक्षिण कोरिया landmine घटना को गलत तरीके से पेश कर रहा है और उसके सीमा निर्माण कार्यों को सैन्य घुसपैठ के रूप में दिखाने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर दक्षिण कोरिया का कहना है कि North Korean troops ने Armistice Agreement का उल्लंघन किया। दक्षिण कोरिया ने बातचीत का प्रस्ताव दिया तनाव कम करने के लिए दक्षिण कोरिया ने हाल ही में उत्तर कोरिया को military talks का प्रस्ताव दिया था। इसका उद्देश्य सीमा रेखा से जुड़े विवादों को स्पष्ट करना, military communication channels बहाल करना और किसी accidental clash को रोकना है। फिलहाल उत्तर कोरिया ने बातचीत के लिए सकारात्मक संकेत नहीं दिए हैं। प्रचार लाउडस्पीकर फिर शुरू करने की धमकी उत्तर कोरिया ने सीमा पर anti-South propaganda loudspeakers को दोबारा सक्रिय करने की भी धमकी दी है। इसके साथ ही उसने unspecified countermeasures को alert पर रखने की बात कही है, जिससे दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव और बढ़ गया है। क्या युद्ध का खतरा बढ़ गया है? फिलहाल उपलब्ध जानकारी से किसी तुरंत बड़े सैन्य संघर्ष की पुष्टि नहीं होती। विशेषज्ञों के अनुसार howitzers की तैनाती मुख्य रूप से शक्ति प्रदर्शन हो सकती है, लेकिन 1953 से technically युद्ध की स्थिति पूरी तरह खत्म न होने और सीमा पर लगातार सैन्य गतिविधियों के कारण किसी गलत अनुमान या accidental clash का जोखिम बना हुआ है। स्रोत – Reuters, Associated Press, Yonhap, Hindustan Times जय राष्ट्र न्यूज़

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ब्राजील में लूला दा सिल्वा ने राष्ट्रपति चुनाव जीता, चौथी बार संभालेंगे सत्ता

ब्रासीलिया: ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने 2026 का राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया है। ब्राजील के सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट (TSE) ने उनकी जीत की आधिकारिक पुष्टि की। लूला ने रनऑफ मुकाबले में दक्षिणपंथी उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो को हराकर अपना ऐतिहासिक चौथा गैर-लगातार राष्ट्रपति कार्यकाल सुनिश्चित किया। कितने वोट मिले लूला को? ब्राजील के चुनाव आयोग के मुताबिक लूला दा सिल्वा को 6,42,56,232 वोट मिले, जो कुल वैध मतों का 51.79% है। बेहद करीबी मुकाबले में उन्होंने फ्लावियो बोल्सोनारो को पीछे छोड़ा। दूसरे चरण में हुआ कड़ा मुकाबला राष्ट्रपति चुनाव के पहले चरण में लूला उम्मीद के मुताबिक बढ़त नहीं बना पाए थे। इसके बाद 25 अक्टूबर को हुए रनऑफ में मुकाबला बेहद करीबी रहा। मतगणना के दौरान दोनों उम्मीदवारों के बीच बढ़त कई बार बदली, लेकिन अंत में लूला ने जीत दर्ज की। कौन हैं फ्लावियो बोल्सोनारो? लूला के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले फ्लावियो बोल्सोनारो दक्षिणपंथी सीनेटर और ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं। चुनाव को ब्राजील में वामपंथ और दक्षिणपंथ के बीच बड़े राजनीतिक मुकाबले के तौर पर देखा जा रहा था। लूला के लिए ऐतिहासिक चौथा कार्यकाल 80 वर्षीय लूला इससे पहले भी ब्राजील के राष्ट्रपति रह चुके हैं। इस जीत के साथ वह चौथी बार देश की कमान संभालने जा रहे हैं। नया कार्यकाल जनवरी 2027 से शुरू होगा। दुनिया भर के नेताओं ने दी बधाई चुनाव परिणाम सामने आने के बाद कई वैश्विक नेताओं ने लूला को उनकी जीत पर बधाई दी। ब्राजील लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, इसलिए इस चुनाव के नतीजों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर बनी हुई थी। अर्थव्यवस्था होगी बड़ी चुनौती लूला के नए कार्यकाल में बढ़ता सरकारी कर्ज, राजकोषीय दबाव और आर्थिक सुधार प्रमुख चुनौतियां मानी जा रही हैं। चुनाव के बाद वित्तीय बाजारों की प्रतिक्रिया पर भी निवेशकों की नजर है। स्रोत – Brazil Superior Electoral Court (TSE), Reuters, Agência Brasil, AP जय राष्ट्र न्यूज़

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अमेरिकी खुफिया मेमो का दावा: ईरान ने अमेरिकी नागरिकों और कर्मियों को निशाना बनाने की कोशिशें तेज कीं, कुछ साजिशें ‘उन्नत चरण’ में

वॉशिंगटन, 25 अक्टूबर 2026: अमेरिका की एक खुफिया चेतावनी में दावा किया गया है कि ईरान ने अमेरिकी नागरिकों और सरकारी कर्मियों को विदेशों में निशाना बनाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया निदेशक जे क्लेटन ने 23 अक्टूबर को विदेश मंत्री मार्को रुबियो को भेजे एक मेमो में कहा कि कुछ कथित घातक साजिशें मध्य पूर्व और अन्य देशों में “advanced stages” यानी उन्नत चरण तक पहुंच चुकी हैं। मेमो में क्या कहा गया? मेमो के मुताबिक अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को अलग-अलग माध्यमों से ऐसी सूचनाएं मिली हैं कि ईरान ने अमेरिकी कर्मियों को निशाना बनाने के प्रयास बढ़ाए हैं। हालांकि दस्तावेज में किसी खास व्यक्ति, शहर या देश का नाम नहीं बताया गया, न ही यह स्पष्ट किया गया कि कोई हमला तुरंत होने वाला है। अमेरिकी दूतावासों में सुरक्षा बढ़ी खतरे की आशंका के बीच अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपने कुछ राजनयिक मिशनों में कर्मचारियों की संख्या कम की है। सऊदी अरब में गैर-जरूरी अमेरिकी कर्मचारियों और उनके परिवारों को बाहर जाने का आदेश दिया गया, जबकि यूएई, लेबनान, कतर और जॉर्डन में भी दूतावासों ने सीमित संचालन शुरू किया। हूती हमलों ने भी बढ़ाई चिंता अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि खतरा केवल ईरान से जुड़ी कथित साजिशों तक सीमित नहीं है। यमन के ईरान समर्थित हूती समूह के हमलों और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने भी सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ाई हैं। अमेरिकी कर्मियों तक जानकारी पहुंचाने की तैयारी मेमो में कहा गया है कि संवेदनशील खुफिया जानकारी का कुछ हिस्सा कम वर्गीकृत किया जा सकता है, ताकि खतरे से जुड़े जरूरी विवरण उन अमेरिकी विदेश सेवा अधिकारियों और कर्मचारियों तक पहुंचाए जा सकें जो संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों में तैनात हैं। क्या किसी हमले की पुष्टि हुई है? फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी में किसी विशेष हमले की तारीख, स्थान या लक्ष्य की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए इसे अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की चेतावनी और आकलन के रूप में देखना जरूरी है, न कि किसी निश्चित हमले की पुष्टि के रूप में। ईरान-अमेरिका तनाव के बीच आया अलर्ट यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि अगर बातचीत आगे नहीं बढ़ती है तो अमेरिका ईरान के खिलाफ फिर से सैन्य कार्रवाई पर विचार कर सकता है। जय राष्ट्र न्यूज़

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अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप ने कनाडा के कुछ उत्पादों पर 50% शुल्क हटाया, कई जरूरी वस्तुओं को मिली राहत

वॉशिंगटन, 24 अक्टूबर 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आयात होने वाले कुछ चुनिंदा उत्पादों पर लगाए गए 50% शुल्क को हटाने का आदेश दिया है। यह फैसला 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले आया है और इसका असर खासतौर पर उन अमेरिकी राज्यों पर पड़ सकता है जो कनाडाई आपूर्ति पर काफी निर्भर हैं। राहत 30 अक्टूबर से प्रभावी होगी। किन उत्पादों को मिली राहत? व्हाइट हाउस के अनुसार शुल्क में राहत प्लाईवुड शीट, कुछ कागज उत्पाद, चुनिंदा मशीनरी, रेफ्रिजरेशन उपकरण, पैकेजिंग सामग्री और कुछ कृषि-संबंधित वस्तुओं पर लागू होगी। ताजा कदम से खासकर मेन राज्य के कारोबारियों और किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है। मेन की सीनेटर सुसान कॉलिन्स ने किया था दबाव रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कॉलिन्स ने दावा किया कि उन्होंने इन छूटों के लिए ट्रंप प्रशासन से लगातार बातचीत की थी। उनका कहना है कि कनाडा से आने वाले कई उत्पाद मेन की ब्लूबेरी, आलू, सेब और समुद्री शैवाल उद्योगों के लिए जरूरी हैं और उन पर ऊंचा शुल्क स्थानीय लागत बढ़ा रहा था। चुनावी राजनीति से भी जुड़ा फैसला सुसान कॉलिन्स इस बार कड़े चुनावी मुकाबले का सामना कर रही हैं। इसी वजह से विपक्षी डेमोक्रेट्स ने आरोप लगाया है कि शुल्क में राहत का फैसला आर्थिक से ज्यादा चुनावी दबाव से प्रभावित है। हालांकि व्हाइट हाउस ने कहा कि बदलाव अमेरिकी व्यापार पर दबाव कम करने और सार्वजनिक हित में किया गया है। सभी शुल्क नहीं हटे, कुछ नए भी लगाए गए यह राहत सीमित उत्पादों तक ही है। ट्रंप प्रशासन ने उसी समय कारपेट, कुछ वाल्व, पेंट, शैम्पू और एयर-कंडीशनिंग उपकरणों समेत कुछ अन्य कनाडाई वस्तुओं पर नए शुल्क भी जोड़े हैं। इसलिए अमेरिका-कनाडा व्यापार तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अगस्त से बढ़ा था अमेरिका-कनाडा व्यापार विवाद अमेरिका और कनाडा के बीच अगस्त में व्यापार वार्ता विफल होने के बाद ट्रंप प्रशासन ने करीब 20 अरब डॉलर मूल्य के कनाडाई उत्पादों पर 50% शुल्क लगाया था। जवाब में कनाडा ने भी अमेरिकी उत्पादों पर प्रतिशोधात्मक शुल्क लगाए थे। ट्रंप बोले—कनाडा समझौते के लिए मेहनत कर रहा ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि कनाडा अमेरिका के साथ व्यापार समझौता करने के लिए “बहुत मेहनत” कर रहा है और दावा किया कि बातचीत में अमेरिका के पास मजबूत स्थिति है। हालांकि दोनों देशों के बीच अभी किसी व्यापक नए समझौते की घोषणा नहीं हुई है। कनाडा अभी बदलावों का कर रहा आकलन कनाडाई सरकार ने कहा है कि वह अमेरिकी शुल्क नीति में किए गए नए बदलावों की समीक्षा कर रही है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि ओटावा इस सीमित राहत के बाद अपनी जवाबी शुल्क नीति में कोई बदलाव करेगा या नहीं। जय राष्ट्र न्यूज़

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तिब्बत में 7.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, कम से कम 16 लोगों की मौत; सैकड़ों घर ढहे

बीजिंग/तिब्बत, 23 अक्टूबर 2026: चीन के Tibet Autonomous Region में गुरुवार रात 7.0 magnitude का शक्तिशाली earthquake आया, जिसमें कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई। ताज़ा आधिकारिक रिपोर्ट्स में घायलों की संख्या अलग-अलग अपडेट में 46 से 54 के बीच बताई गई है। सबसे ज्यादा नुकसान northern Tibet के Nagqu क्षेत्र में हुआ है। कब और कहां आया भूकंप? भूकंप स्थानीय समय के अनुसार 22 अक्टूबर रात 10:33 बजे आया। US Geological Survey के मुताबिक epicentre Nagqu से करीब 191 km east-northeast में था और इसकी depth लगभग 18 km थी। 339 से ज्यादा घर ढहे Nagqu authorities के अनुसार कम से कम 339 घर और 20 livestock sheds collapse हुए हैं। कई इलाकों में communication services भी बाधित हुई हैं। 1,600 से ज्यादा rescue personnel तैनात बचाव अभियान में 1,600 से अधिक personnel लगाए गए हैं। प्रभावित लोगों के लिए prefabricated shelters, करीब 3,000 tents, folding beds, flashlights और winter clothing भेजी गई है। aftershocks भी महसूस किए गए Main earthquake के बाद कई aftershocks दर्ज किए गए। AP के मुताबिक इनमें कुछ tremors magnitude 4.3 से 5.2 तक के रहे, जिससे damaged structures को लेकर खतरा बढ़ गया है। Highway और rail services प्रभावित Rockfalls के कारण National Highway 317 का एक हिस्सा बंद करना पड़ा और वहां केवल emergency तथा rescue vehicles को जाने दिया जा रहा है। Railway authorities ने भी प्रभावित इलाके से गुजरने वाली trains को temporarily halt किया है। बर्फबारी से rescue operation मुश्किल Earthquake-hit region में अगले कुछ दिनों तक intermittent snowfall की संभावना है। High-altitude terrain और ठंड rescue teams के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। मौत का आंकड़ा बढ़ सकता है अभी search-and-rescue operations जारी हैं और remote villages में damage assessment पूरा नहीं हुआ है। इसलिए casualty figures में आगे बदलाव संभव है। कुछ बाद की reports ने death toll 18 तक पहुंचने की बात कही है, लेकिन व्यापक रूप से पुष्टि किए गए शुरुआती official आंकड़ों में कम से कम 16 मौतें दर्ज हैं। जय राष्ट्र न्यूज़

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Asian stocks 3-month low पर, tech worries और Gulf tensions से global markets पर दबाव

हांगकांग/सिंगापुर, 22 अक्टूबर 2026: Asian stock markets गुरुवार को करीब तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंच गए। Technology shares में बिकवाली, AI valuations को लेकर बढ़ती चिंता और Gulf region में जारी geopolitical tensions ने investors की risk appetite कमजोर कर दी। Tech stocks पर सबसे ज्यादा दबाव Global technology और semiconductor stocks में कमजोरी Asian markets तक फैल गई। Investors high valuations, भारी AI spending और कंपनियों की future profitability को लेकर ज्यादा cautious दिखाई दिए। इसका असर Japan, South Korea और Greater China के technology-heavy indices पर पड़ा। Gulf tensions ने बढ़ाई चिंता Middle East में बढ़ते तनाव के कारण crude oil prices ऊंचे बने हुए हैं। महंगा तेल Asia की बड़ी importing economies के लिए inflation बढ़ा सकता है और central banks के लिए monetary policy आसान करना मुश्किल कर सकता है। इसी risk ने equities पर अतिरिक्त दबाव बनाया। MSCI Asia index 3-month low पर Japan को छोड़कर Asia-Pacific shares को track करने वाला MSCI index लगभग तीन महीने के lowest level तक गिरा। यह investors में बढ़ते risk-off sentiment को दिखाता है। Japan और Korea के markets भी कमजोर Japan के Nikkei और South Korean equities पर chip तथा technology shares की weakness का असर दिखा। AI-related companies में हाल की तेज rally के बाद profit booking भी market decline की एक वजह रही। Dollar और safe-haven assets पर नजर Market uncertainty बढ़ने के साथ traders US dollar, government bonds और gold जैसे safe-haven assets की ओर भी नजर रख रहे हैं। आने वाले sessions में crude prices, Gulf developments और major tech companies की earnings global market direction तय करने में अहम रहेंगी। जय राष्ट्र न्यूज़

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Jaishankar ने UAE के विदेश मंत्री से की मुलाकात, West Asia संकट और शांति प्रयासों पर चर्चा

मुंबई, 21 अक्टूबर 2026: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) ने मुंबई में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान (Sheikh Abdullah bin Zayed Al Nahyan) से मुलाकात की। बैठक में पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी संकट, क्षेत्रीय स्थिरता और शांति प्रयासों पर चर्चा हुई। इसके अलावा भारत और UAE के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर भी विचार-विमर्श किया गया। West Asia संकट पर हुई चर्चा बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्षों से जुड़े मुद्दों पर विचार साझा किए। चर्चा में कूटनीतिक प्रयासों, तनाव कम करने और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की जरूरत पर जोर दिया गया। भारत लगातार संवाद और कूटनीति के माध्यम से संघर्षों का समाधान निकालने की वकालत करता रहा है। क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर पश्चिम एशिया में अस्थिरता का असर केवल क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री परिवहन मार्गों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक समन्वय और सहयोग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। India-UAE संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा बैठक में क्षेत्रीय परिस्थितियों के साथ-साथ भारत और UAE के बीच ऊर्जा, व्यापार और निवेश सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। दोनों देश आर्थिक और रणनीतिक क्षेत्रों में अपने संबंधों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। शांति प्रयासों को समर्थन दोनों विदेश मंत्रियों की बातचीत में क्षेत्र में तनाव कम करने और स्थायी शांति की दिशा में कूटनीतिक पहलों के महत्व पर भी जोर रहा। भारत पश्चिम एशिया से जुड़े मुद्दों पर संवाद, मानवीय सहायता और संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता रहा है। Energy security भी अहम मुद्दा पश्चिम एशिया में तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों पर पड़ सकता है। Reuters की 21 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, आपूर्ति संबंधी चिंताओं के बीच Brent crude की कीमत लगभग 1.5% बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई। भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए ऐसे हालात में क्षेत्रीय स्थिरता और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा महत्वपूर्ण बनी हुई है। Source: The Indian Express, Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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मार्को रुबियो भारत पहुंचे, जयशंकर से ट्रेड डील, रूसी तेल और रक्षा सहयोग पर अहम बातचीत

मुंबई, 20 अक्टूबर 2026: अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो दो दिवसीय भारत दौरे पर मुंबई पहुंचे हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ उनकी बैठक में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, रूसी कच्चे तेल के आयात, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और महत्वपूर्ण तकनीकों जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देश व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं। ट्रेड डील पर बड़ी प्रगति भारत और अमेरिका के बीच व्यापक व्यापार समझौते को लेकर बातचीत तेज हो गई है। भारत पहुंचने से पहले रुबियो ने कहा कि दोनों देश समझौते को अंतिम रूप देने के काफी करीब हैं। वार्ता में टैरिफ, बाजार तक पहुंच और ऊर्जा खरीद जैसे मुद्दे अहम बने हुए हैं। हालांकि, समझौते की अंतिम शर्तों और औपचारिक घोषणा को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। रूसी तेल का आयात रहेगा अहम मुद्दा भारत के रूसी कच्चे तेल के आयात का मुद्दा भी इस दौरे के प्रमुख एजेंडे में शामिल है। रूस से तेल खरीद, अमेरिकी प्रतिबंधों और संभावित अतिरिक्त टैरिफ को लेकर दोनों देशों के बीच चर्चा होती रही है। रुबियो ने संकेत दिया है कि भारत जैसे देशों के लिए ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में बदलाव करना आसान नहीं है। भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और किफायती आयात महत्वपूर्ण हैं, जबकि अमेरिका रूस से होने वाली ऊर्जा खरीद को लेकर अपनी चिंताएं जताता रहा है। रक्षा और रणनीतिक सहयोग पर भी चर्चा विदेश मंत्रालय के अनुसार, बातचीत में रक्षा, ऊर्जा, निवेश, महत्वपूर्ण एवं उभरती तकनीकों और क्षेत्रीय तथा वैश्विक घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श शामिल है। भारत और अमेरिका अपनी व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए भी काम कर रहे हैं। रक्षा सहयोग और तकनीकी साझेदारी दोनों देशों के संबंधों के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। ऐसे में इस बैठक से इन क्षेत्रों में आगे सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा होने की उम्मीद है। मुंबई में ही क्यों हो रही है मुलाकात? रुबियो के दौरे में नई दिल्ली के बजाय मुंबई को बैठक के प्रमुख स्थल के रूप में चुना गया है। इस फैसले को लेकर विपक्ष की ओर से सवाल उठाए गए थे। हालांकि, विदेश मंत्रालय ने कहा कि विदेशी प्रतिनिधियों के साथ बैठकें पहले भी देश के अलग-अलग शहरों में आयोजित होती रही हैं। जामनगर भी जाएंगे रुबियो Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, रुबियो के कार्यक्रम में मुंबई के साथ गुजरात का जामनगर भी शामिल है। जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज का बड़ा रिफाइनरी परिसर स्थित है। ऐसे में दौरे के दौरान ऊर्जा क्षेत्र और औद्योगिक सहयोग से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान रहने की संभावना है। भारत-अमेरिका संबंधों के लिए अहम दौरा रुबियो का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता, टैरिफ और रूसी तेल की खरीद जैसे मुद्दे चर्चा में हैं। व्यापार समझौते पर सहमति बनने से निवेश, ऊर्जा और अन्य आर्थिक क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा मिल सकती है। हालांकि, किसी संभावित समझौते के प्रभाव का आकलन उसकी अंतिम शर्तों और आधिकारिक घोषणा के बाद ही किया जा सकेगा। स्रोत: Reuters, India Today और विदेश मंत्रालय (MEA) जय राष्ट्र न्यूज़

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Putin ने भारत को बताया दुनिया की प्रमुख शक्तियों में शामिल, Multipolar World में India की बढ़ती भूमिका पर जोर

मॉस्को/नई दिल्ली, 19 अक्टूबर 2026: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत को दुनिया की प्रमुख शक्तियों में शामिल बताते हुए बदलती वैश्विक व्यवस्था में उसकी बढ़ती भूमिका पर जोर दिया है। भारत की आर्थिक ताकत, रणनीतिक स्थिति और स्वतंत्र विदेश नीति उसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाती है। रूस लंबे समय से भारत, चीन और अन्य उभरती शक्तियों की भागीदारी वाले बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था (Multipolar World Order) की वकालत करता रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य वैश्विक निर्णयों में किसी एक शक्ति या पश्चिमी देशों के समूह के बजाय कई प्रमुख देशों की भूमिका को महत्व देना है। भारत को प्रमुख वैश्विक शक्ति क्यों माना जाता है? भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, विशाल आबादी, रक्षा क्षमताएं, रणनीतिक स्थिति और स्वतंत्र विदेश नीति उसकी वैश्विक अहमियत को मजबूत करती हैं। रूस ने विभिन्न अवसरों पर भारत की स्वतंत्र कूटनीतिक स्थिति और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी भूमिका की सराहना की है। मोदी-पुतिन संबंधों का भी जिक्र भारत और रूस के संबंधों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच संवाद महत्वपूर्ण रहा है। रूस-यूक्रेन संघर्ष के संदर्भ में पुतिन ने पहले भी कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी इस मुद्दे को लगातार उठाते रहे हैं और उनके पास समाधान की दिशा में अच्छे विचार हैं। BRICS में भारत की अहम भूमिका भारत, रूस, चीन और ब्राजील मूल BRIC समूह के संस्थापक सदस्य रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद यह समूह BRICS बना और बाद में इसका विस्तार भी हुआ। आज BRICS वैश्विक अर्थव्यवस्था और जनसंख्या के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। भारत इस समूह में एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है। भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा, परमाणु सहयोग और व्यापार सहित कई क्षेत्रों में लंबे समय से साझेदारी रही है। दोनों देश विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी संवाद और समन्वय करते हैं। रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की आकांक्षा का भी समर्थन किया है। ‘चार प्रमुख शक्तियों’ वाले दावे पर सावधानी सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में पुतिन के बयान को इस तरह पेश किया जा रहा है कि भारत दुनिया की “चार सबसे बड़ी शक्तियों” में शामिल है। हालांकि, इस सटीक शब्दावली की आधिकारिक पुष्टि स्पष्ट नहीं है। इसलिए “चार प्रमुख शक्तियों” वाले कथन को पुतिन का प्रत्यक्ष और सत्यापित उद्धरण मानने से पहले आधिकारिक बयान या विश्वसनीय रिपोर्ट से इसकी पुष्टि करना जरूरी है। Source – The Indian Express, India Today, Carnegie Endowment, BRICS coverage जय राष्ट्र न्यूज़

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लंदन के Parliament Square में ध्रुव राठी का भाषण, ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

लंदन, 19 अक्टूबर 2026: यूट्यूबर और एक्टिविस्ट ध्रुव राठी ने लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास आयोजित विरोध प्रदर्शन को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भारत में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision–SIR) को लेकर उठ रहे कथित ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। ध्रुव राठी ने भाषण में क्या कहा? ध्रुव राठी ने कहा कि प्रदर्शन का उद्देश्य किसी विदेशी सरकार से भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप की मांग करना नहीं, बल्कि भारतीय प्रवासी समुदाय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चुनावी पारदर्शिता से जुड़े सवालों की ओर ध्यान आकर्षित करना है। उन्होंने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर अपनी चिंताएं भी सामने रखीं। CEC के इस्तीफे और नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव की मांग रिपोर्टों के मुताबिक, राठी ने कहा कि विरोध प्रदर्शन तब समाप्त हो सकता है, जब ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और नए चुनाव आयुक्त की नियुक्ति ऐसी प्रक्रिया के तहत हो, जिसमें प्रधानमंत्री के साथ विपक्ष के नेता की भी भूमिका हो। यह मांग निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को लेकर चल रही व्यापक बहस से जुड़ी है। पार्लियामेंट स्क्वायर पर जुटे सैकड़ों लोग प्रदर्शन में बड़ी संख्या में भारतीय छात्रों और प्रवासी भारतीयों ने हिस्सा लिया। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI)-UK, Save Democracy और अन्य संगठनों ने भी प्रदर्शन का समर्थन किया। प्रदर्शनकारियों ने ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ सहित कई नारे लगाए और मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए चुनावी पारदर्शिता की मांग की। मोदी समर्थकों ने किया जवाबी प्रदर्शन इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थकों का एक समूह भी वहां पहुंचा। उन्होंने ‘वंदे मातरम’, ‘भारत माता की जय’ और ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाए। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए लंदन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने दोनों समूहों को अलग रखा। इस तरह एक ही स्थान पर भारत की चुनावी प्रक्रिया को लेकर विरोध और उसके समर्थन में प्रदर्शन देखने को मिले। चुनावी मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश लंदन पहुंचने से पहले ध्रुव राठी ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की बात कही थी। पार्लियामेंट स्क्वायर पर आयोजित प्रदर्शन को इसी प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके जरिए SIR और निर्वाचन आयोग से जुड़े आरोपों पर वैश्विक ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की गई। ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर स्वतंत्र पुष्टि जरूरी ‘वोट चोरी’ और SIR में कथित अनियमितताओं से जुड़े आरोप प्रदर्शनकारियों और विपक्षी समूहों के दावे हैं। निर्वाचन आयोग इन आरोपों को खारिज करता रहा है। इसलिए इन दावों को स्थापित तथ्य मानने के बजाय उपलब्ध साक्ष्यों, आधिकारिक जवाबों और संबंधित जांच के आधार पर उनका आकलन करना जरूरी है। स्रोत: Times of India, The Economic Times, Eastern Eye जय राष्ट्र न्यूज़

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