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SIR पर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा—तीनों आदेश सर्वसम्मति से लिए गए, CEC पर एकतरफा फैसले का आरोप गलत

नई दिल्ली: मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि SIR से जुड़े तीनों प्रमुख आदेश सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने यह आरोप खारिज किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इन मामलों में अकेले या एकतरफा फैसले लिए। आयोग ने अदालत में संयुक्त हलफनामा दाखिल कर अपनी निर्णय प्रक्रिया का बचाव किया। किन तीन SIR आदेशों की बात कर रहा है चुनाव आयोग? चुनाव आयोग ने कहा कि 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 को जारी SIR संबंधी आदेश तीन सदस्यीय आयोग की सामूहिक सहमति से लिए गए थे। आयोग के अनुसार इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी शामिल थी। CEC पर क्या था आरोप? सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि CEC ज्ञानेश कुमार ने कुछ चुनावी और मतदाता सूची से जुड़े फैसले बाकी दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए। याचिकाकर्ताओं ने इसे आयोग की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया के खिलाफ बताया था और अदालत से रिकॉर्ड की जांच की मांग की थी। चुनाव आयोग ने आरोपों को बताया भ्रामक आयोग ने अपने 15-बिंदु वाले जवाब में कहा कि फाइल पर किसी सदस्य द्वारा पूछे गए सवाल, सुझाव या टिप्पणियां अंतिम निर्णय नहीं मानी जा सकतीं। आयोग के मुताबिक अंतिम आदेश वही होता है जिसे आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के तहत मंजूरी मिलती है। दो चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव को लिखी थीं चिट्ठियां हलफनामे में चुनाव आयोग ने यह भी स्वीकार किया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने जुलाई 2026 में एक internal work allocation order को लेकर कैबिनेट सचिव को अलग-अलग पत्र लिखे थे। हालांकि आयोग ने कहा कि संबंधित आदेश बाद में लागू ही नहीं किया गया और दोनों चुनाव आयुक्तों के संयुक्त निर्देश के बाद उसे रोक दिया गया। Form 6 में बदलाव के आरोप पर भी जवाब चुनाव आयोग ने यह दावा भी खारिज किया कि SIR आदेशों के जरिए Form 6 को अवैध तरीके से बदला गया। आयोग का कहना है कि Form 6 में संशोधन नहीं किया गया था, बल्कि SIR प्रक्रिया के तहत एक अतिरिक्त declaration की आवश्यकता जोड़ी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई टाली मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई आगे के लिए टाल दी और याचिकाकर्ता को चुनाव आयोग के counter-affidavit पर जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया। इसके बाद अदालत इस विवाद पर आगे सुनवाई करेगी। मामला क्यों महत्वपूर्ण है? यह विवाद केवल SIR तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग के भीतर फैसले किस तरह लिए जाते हैं, इस पर भी सवाल उठाता है। सुप्रीम कोर्ट पहले यह स्पष्ट कर चुका है कि बहु-सदस्यीय आयोग में निर्णय पहले सर्वसम्मति से और सहमति न बनने पर बहुमत से लिए जाने चाहिए। स्रोत – Supreme Court proceedings, Election Commission affidavit, Indian Express, Times of India, Hindustan Times जय राष्ट्र न्यूज़

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खरगे के “मोदी का बाप भी जाएगा” बयान पर BJP का देशव्यापी विरोध, कांग्रेस से माफी की मांग

नई दिल्ली/पटना: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिए गए “मोदी का बाप भी जाएगा” बयान पर राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को देशभर में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। BJP ने इस टिप्पणी को “अपमानजनक, अशोभनीय और आपत्तिजनक” बताते हुए खरगे से बिना शर्त माफी की मांग की है। पटना के कार्यक्रम में क्या हुआ था? विवाद की शुरुआत 25 अक्टूबर को पटना के बापू सभागार में आयोजित बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती समारोह से हुई। खरगे के भाषण के दौरान दर्शकों में मौजूद एक व्यक्ति ने कहा कि “मोदी कहीं नहीं जाएंगे।” इसके जवाब में खरगे ने कहा, “मोदी का बाप भी जाएगा।” इसके बाद बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। BJP ने देशभर में प्रदर्शन का किया ऐलान BJP ने अपने सभी राज्य मुख्यालयों पर प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की है। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं। BJP का कहना है कि राजनीतिक मतभेद नीतियों और शासन तक सीमित रहने चाहिए और किसी नेता के दिवंगत परिजनों को बहस में नहीं घसीटा जाना चाहिए। पटना में BJP कार्यकर्ताओं ने निकाला विरोध मार्च बिहार BJP की पटना महानगर इकाई ने भी खरगे के बयान के खिलाफ विरोध मार्च निकाला। बिहार BJP नेताओं ने बयान की निंदा करते हुए इसे प्रधानमंत्री के परिवार के प्रति अपमानजनक बताया। पार्टी ने कहा कि अलग-अलग राज्यों में भी इसी तरह के विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अमित शाह ने भी कांग्रेस पर साधा निशाना केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खरगे की टिप्पणी पर कांग्रेस की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं की ओर से प्रधानमंत्री मोदी और उनके परिवार पर पहले भी व्यक्तिगत टिप्पणियां की गई हैं। BJP नेताओं का कहना है कि खरगे ने राजनीतिक संवाद की मर्यादा का उल्लंघन किया है। खरगे के खिलाफ पुलिस शिकायत भी दर्ज विवाद के बीच बिहार में एक BJP कार्यकर्ता ने खरगे के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी है। शिकायतकर्ता ने कांग्रेस अध्यक्ष से 24 घंटे के भीतर माफी मांगने की मांग की है। मामला पटना में दिए गए बयान से जुड़ा है। कांग्रेस ने खरगे का किया बचाव कांग्रेस ने अपने अध्यक्ष का बचाव करते हुए कहा कि टिप्पणी को पूरे संदर्भ में देखा जाना चाहिए। पार्टी की ओर से यह तर्क दिया गया कि खरगे ने मंच से की गई टोका-टाकी का जवाब बोलचाल की भाषा में दिया था और उनका उद्देश्य प्रधानमंत्री के परिवार का अपमान करना नहीं था। टिप्पणी करने वाला व्यक्ति भी आया सामने कार्यक्रम में “मोदी नहीं जाएंगे” कहने वाले व्यक्ति की पहचान संतोष कुमार के रूप में हुई है। उसने खुद को कांग्रेस कार्यकर्ता बताया और बाद में कहा कि उसका आशय यह था कि जब तक देश में बड़ा राजनीतिक बदलाव नहीं होगा, तब तक नरेंद्र मोदी सत्ता से नहीं जाएंगे। बयान से तेज हुई BJP-कांग्रेस की सियासी लड़ाई खरगे की टिप्पणी के बाद BJP और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है। BJP इसे प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता का अपमान बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक बयान के संदर्भ से अलग करके पेश किए जाने का आरोप लगा रही है। देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के चलते यह मुद्दा सोमवार को राष्ट्रीय राजनीति के प्रमुख विवादों में बना हुआ है। स्रोत – Times of India, India Today, Indian Express, Economic Times, Moneycontrol जय राष्ट्र न्यूज़

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“मोदी का बाप भी जाएगा!” खरगे के बयान पर बिहार में सियासी बवाल, BJP ने दर्ज कराई शिकायत

पटना: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिए गए विवादित बयान ने बिहार की राजनीति में नया घमासान खड़ा कर दिया है। पटना में 25 अक्टूबर 2026 को बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान खरगे ने मंच से कहा, “मोदी का बाप भी जाएगा।” इसके बाद BJP और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई। आखिर मंच पर क्या हुआ था? कार्यक्रम के दौरान खरगे प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार पर निशाना साध रहे थे। इसी बीच दर्शकों में मौजूद एक व्यक्ति ने कहा कि “मोदी कहीं नहीं जाएंगे।” इसके जवाब में खरगे ने विवादित टिप्पणी कर दी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद और तेज हो गया। BJP ने पटना में दर्ज कराई शिकायत बयान के बाद BJP कार्यकर्ता कृष्ण कुमार सिंह ने पटना पुलिस में खरगे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। रिपोर्ट के मुताबिक शिकायत पहले कोतवाली थाने में दी गई, लेकिन मामला गांधी मैदान थाना क्षेत्र से संबंधित होने के कारण इसे वहां स्थानांतरित किए जाने की बात कही गई। शिकायतकर्ता ने खरगे से 24 घंटे के भीतर माफी की मांग भी की। अमित शाह ने साधा खरगे और कांग्रेस पर निशाना केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी खरगे के बयान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे राजनीतिक मर्यादा की सीमा पार करने वाला बयान बताया और आरोप लगाया कि कांग्रेस लगातार प्रधानमंत्री मोदी और उनके परिवार पर व्यक्तिगत हमले कर रही है। बिहार NDA नेताओं ने भी मांगी माफी बिहार में NDA नेताओं ने खरगे के बयान को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, बिहार BJP अध्यक्ष संजय सरावगी और JD(U) प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा समेत कई नेताओं ने इसे प्रधानमंत्री के परिवार पर व्यक्तिगत टिप्पणी बताया और खरगे तथा राहुल गांधी से माफी की मांग की। कांग्रेस ने लगाया ‘डबल स्टैंडर्ड’ का आरोप विवाद बढ़ने के बाद कांग्रेस नेताओं ने खरगे का बचाव करते हुए BJP पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया। कांग्रेस की ओर से तर्क दिया गया कि राजनीतिक बहस में BJP नेताओं की ओर से भी पहले कई व्यक्तिगत और तीखी टिप्पणियां की जा चुकी हैं। बयान के वक्त मौजूद व्यक्ति ने भी रखी अपनी बात जिस व्यक्ति की टिप्पणी के बाद खरगे ने जवाब दिया था, उसकी पहचान संतोष कुमार के रूप में सामने आई। उसने खुद को कांग्रेस कार्यकर्ता बताया और आरोप लगाया कि विवाद के बाद उसके साथ मारपीट हुई। उसने यह भी कहा कि पूरे घटनाक्रम को संदर्भ से अलग करके पेश किया जा रहा है। खरगे के पुराने बयानों पर भी फिर शुरू हुई चर्चा नए विवाद के बाद खरगे के पुराने विवादित बयानों की भी चर्चा तेज हो गई है। इससे पहले वह BJP और RSS की तुलना “जहरीले सांप” से करने तथा प्रधानमंत्री मोदी को लेकर अन्य तीखी टिप्पणियों के कारण विवादों में रह चुके हैं। स्रोत – India Today, NDTV, Times of India, Indian Express, Aaj Tak जय राष्ट्र न्यूज़

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30 अक्टूबर को CEC ज्ञानेश कुमार का ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’, 1 नवंबर को INDIA ब्लॉक का ‘दिल्ली चलो’ मार्च

नई दिल्ली, 25 अक्टूबर 2026: विपक्षी दलों के INDIA ब्लॉक ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना आंदोलन तेज करने का फैसला किया है। गठबंधन ने घोषणा की है कि 30 अक्टूबर को दिल्ली में ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ की प्रतीकात्मक कार्यवाही आयोजित की जाएगी और इसके बाद 1 नवंबर को ‘दिल्ली चलो’ मार्च निकाला जाएगा, जो रामलीला मैदान में बड़ी रैली के साथ समाप्त होगा। क्या है ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’? यह कोई संवैधानिक या कानूनी महाभियोग प्रक्रिया नहीं है। विपक्ष इसे ‘मॉक पार्लियामेंट’ या प्रतीकात्मक जन-कार्यवाही के रूप में आयोजित करेगा। रिपोर्टों के मुताबिक कार्यक्रम दिल्ली के होटल अशोक में होगा, जहां विपक्षी सांसदों और वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की योजना है। विपक्ष क्यों कर रहा है यह कार्यक्रम? कांग्रेस और INDIA ब्लॉक चुनाव आयोग पर मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। विपक्ष ने इन मुद्दों को ‘वोट चोरी’ से जोड़ते हुए CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। ये विपक्ष के आरोप हैं; चुनाव आयोग ऐसे आरोपों को पहले खारिज कर चुका है। केसी वेणुगोपाल ने किया ऐलान कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि 30 अक्टूबर को होने वाली इस प्रतीकात्मक कार्यवाही में जनता का कथित फैसला CEC को हटाने की मांग के रूप में सामने रखा जाएगा। उन्होंने इसे संविधान और चुनावी प्रक्रिया की रक्षा के लिए विपक्ष के अभियान का हिस्सा बताया। 1 नवंबर को ‘दिल्ली चलो’ मार्च ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ के बाद INDIA ब्लॉक 1 नवंबर को दिल्ली चलो मार्च आयोजित करेगा। यह मार्च दिल्ली के रामलीला मैदान में समाप्त होगा। कांग्रेस का दावा है कि इस रैली में बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे और पार्टी ने करीब 10 लाख लोगों की भागीदारी का लक्ष्य रखा है। यह विपक्ष का अनुमान है, वास्तविक उपस्थिति कार्यक्रम के दिन ही स्पष्ट होगी। खड़गे ने सहयोगी दलों से की अपील कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने INDIA ब्लॉक के सहयोगी दलों से 30 अक्टूबर और 1 नवंबर को दिल्ली में अपनी मजबूत मौजूदगी सुनिश्चित करने की अपील की है। कांग्रेस अपने राज्य संगठनों और फ्रंटल संगठनों को भी रैली के लिए सक्रिय कर रही है। दिल्ली में सुरक्षा भी बढ़ाई गई 1 नवंबर की प्रस्तावित रैली और हाल के विरोध प्रदर्शनों के बीच दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उच्च स्तर पर समीक्षा की गई है। रिपोर्टों के मुताबिक गृह मंत्री अमित शाह ने भी दिल्ली पुलिस मुख्यालय में सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की। संवैधानिक महाभियोग से अलग है यह कार्रवाई यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 30 अक्टूबर का ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ संवैधानिक रूप से CEC को पद से हटाने की वैधानिक प्रक्रिया नहीं है। यह विपक्ष द्वारा आयोजित एक राजनीतिक और प्रतीकात्मक कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य चुनाव आयोग पर सार्वजनिक और राजनीतिक दबाव बढ़ाना है। जय राष्ट्र न्यूज़

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SIR में इस्तेमाल सॉफ्टवेयर का नाम-वर्जन बताने से चुनाव आयोग का इनकार, RTI में ‘ट्रेड सीक्रेट’ और बौद्धिक संपदा का दिया हवाला

नई दिल्ली, 25 अक्टूबर 2026: चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियां और असंगतियां पहचानने के लिए इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर का नाम और वर्जन सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है। आयोग ने RTI कानून की धारा 8(1)(d) का हवाला देते हुए कहा कि यह जानकारी “commercial confidence, trade secrets और intellectual property” से जुड़ी है और इसके खुलासे से किसी तीसरे पक्ष की प्रतिस्पर्धी स्थिति प्रभावित हो सकती है। किसने मांगी थी जानकारी? तेलंगाना के करीमनगर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता एम.ए. मुजीब अय्यूब ने RTI आवेदन के जरिए चुनाव आयोग से पूछा था कि SIR में मतदाता डेटा की गलतियां पकड़ने के लिए कौन-सा software, application या AI platform इस्तेमाल किया गया। उन्होंने उसका नाम, version और काम करने के तरीके की जानकारी भी मांगी थी। चुनाव आयोग ने क्या जवाब दिया? 16 अक्टूबर को दिए जवाब में आयोग ने कहा कि software का नाम और version बताना RTI Act की धारा 8(1)(d) के तहत exempt है। यह धारा commercial confidence, trade secrets और intellectual property से जुड़ी कुछ जानकारियों को सार्वजनिक करने से छूट देती है। क्या SIR के लिए नया software बनाया गया था? चुनाव आयोग ने साफ किया कि SIR के लिए कोई नया software विकसित या खरीदा नहीं गया था। हालांकि आयोग ने यह नहीं बताया कि पहले से मौजूद किस system या platform का इस्तेमाल किया गया। AI और Machine Learning के इस्तेमाल पर भी स्पष्ट जवाब नहीं RTI में यह भी पूछा गया था कि क्या voter records को flag करने में AI, machine learning, predictive analytics या automated decision-support tools का इस्तेमाल हुआ। आयोग ने इन सवालों को “clarification” बताते हुए कहा कि ये RTI Act की धारा 2(f) के तहत “information” की परिभाषा में नहीं आते। इसलिए यह स्पष्ट नहीं हुआ कि automated tools या AI का इस्तेमाल हुआ था या नहीं। गलत तरीके से नाम flag होने से बचाने के क्या safeguards हैं? RTI आवेदक ने पूछा था कि genuine voters को गलती से flag या delete होने से बचाने के लिए कौन-से safeguards हैं। इस सवाल पर भी आयोग ने विस्तृत तकनीकी जानकारी नहीं दी। यही वजह है कि SIR के software और verification process की transparency को लेकर अब नई बहस शुरू हो गई है। अंतिम फैसला ERO का होता है चुनाव आयोग ने कहा कि मतदाता का नाम शामिल या बाहर करने का अंतिम निर्णय software नहीं, बल्कि संबंधित विधानसभा क्षेत्र के Electoral Registration Officer (ERO) द्वारा तथ्य और रिकॉर्ड देखने के बाद लिया जाता है। आयोग ने Representation of the People Act, 1950 की धाराओं 13B(1) और 13B(2) का हवाला दिया। समीक्षा कौन करता है, इस पर भी सीमित जानकारी जब पूछा गया कि software द्वारा flag किए गए records की समीक्षा कौन करता है, आयोग ने RTI Act की धारा 8(1)(g) का हवाला दिया। यह प्रावधान ऐसी जानकारी को रोकने की अनुमति देता है जिससे किसी व्यक्ति की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है या confidential source की पहचान उजागर हो सकती है। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपील की सलाह दी पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओ.पी. रावत ने कहा कि RTI आवेदक को इस जवाब के खिलाफ सक्षम प्राधिकारी के सामने अपील करनी चाहिए। उनके मुताबिक मामला कानूनी व्याख्या से जुड़ा है और अपील के जरिए अधिक जानकारी मांगी जा सकती है। SIR पर पहले से जारी है विवाद SIR प्रक्रिया पहले से ही मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नाम हटने और data verification को लेकर राजनीतिक विवाद के केंद्र में है। ऐसे में software की technical details सार्वजनिक न किए जाने से पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े हुए हैं। हालांकि चुनाव आयोग का कहना है कि अंतिम निर्णय statutory अधिकारियों द्वारा ही लिया जाता है और SIR के लिए कोई अलग नया software तैयार नहीं किया गया। जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली की वोटर लिस्ट से 47.6 लाख नाम हटे, दोबारा जुड़वाने के लिए सिर्फ 2.5 लाख आवेदन; SIR पर नए सवाल

नई दिल्ली, 24 अक्टूबर 2026: दिल्ली में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 47.6 लाख नाम हटाए गए, लेकिन इसके बाद 22 अक्टूबर तक वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए सिर्फ 2,50,754 फॉर्म-6 आवेदन मिले। यह आंकड़ा दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने जारी किया है। 1.45 करोड़ से घटकर 97.5 लाख रह गए मतदाता SIR शुरू होने से पहले दिल्ली में करीब 1.45 करोड़ मतदाता दर्ज थे। 31 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट सूची में यह संख्या घटकर लगभग 97.5 लाख रह गई। करीब 47.5 से 47.6 लाख मतदाताओं को अनुपस्थित, दूसरी जगह शिफ्ट, मृत या डुप्लीकेट जैसी श्रेणियों में रखा गया। सिर्फ 2,50,754 लोगों ने भरा फॉर्म-6 CEO कार्यालय के अनुसार, 31 अगस्त से 22 अक्टूबर के बीच कुल 2,50,754 फॉर्म-6 आवेदन प्राप्त हुए। इसमें पहली बार वोटर बनने वाले लोग भी शामिल हैं और ऐसे लोग भी जिनका नाम SIR के दौरान हट गया था। इसलिए यह नहीं माना जा सकता कि सभी 2.5 लाख आवेदन सिर्फ हटाए गए मतदाताओं के हैं। इतनी बड़ी संख्या में नाम हटे, आवेदन इतने कम क्यों? यही अंतर अब सबसे बड़ा सवाल बन गया है। अधिकारियों का कहना है कि हटाए गए मतदाताओं में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी हो सकती है जो दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जिनके नाम दो जगह दर्ज थे। वहीं आलोचकों का सवाल है कि क्या सभी योग्य मतदाताओं तक दोबारा नाम जुड़वाने की जानकारी ठीक से पहुंची है। 33 लाख रिकॉर्ड में मिली थीं गड़बड़ियां SIR के दौरान करीब 33 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में अलग-अलग तरह की विसंगतियां पाई गई थीं। इनमें लगभग 13.79 लाख ऐसे मतदाता थे जिनका रिकॉर्ड 2002 की पिछली SIR सूची से लिंक नहीं हो पाया, जबकि करीब 19.33 लाख मामलों में तार्किक गड़बड़ियां सामने आईं। CEO कार्यालय के अनुसार करीब 29.5 लाख मामलों का समाधान कर लिया गया है या उन्हें अंतिम सूची के लिए विचाराधीन रखा गया है। पश्चिमी दिल्ली से सबसे ज्यादा आवेदन 31 अगस्त से 22 अक्टूबर के बीच पश्चिमी दिल्ली से 30,361 फॉर्म-6 आवेदन आए, जो सभी जिलों में सबसे ज्यादा हैं। वहीं नई दिल्ली जिले से सिर्फ 4,341 आवेदन मिले, जो सबसे कम हैं। 30 अक्टूबर तक दर्ज करा सकते हैं दावा दिल्ली में SIR के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2026 है। चुनाव अधिकारियों ने 25 अक्टूबर को राजधानी के सभी 14,947 मतदान केंद्रों पर विशेष नामांकन शिविर लगाने की भी घोषणा की है। अंतिम मतदाता सूची 4 दिसंबर 2026 को प्रकाशित किए जाने की योजना है। विपक्ष ने उठाए सवाल 47.6 लाख नाम हटने और उसके मुकाबले बेहद कम फॉर्म-6 आवेदन आने को लेकर राजनीतिक सवाल भी उठने लगे हैं। विपक्षी नेताओं और सामाजिक संगठनों ने SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता तथा पात्र मतदाताओं के नाम सूची से बाहर होने की आशंका जताई है। हालांकि चुनाव अधिकारियों का कहना है कि दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया अभी जारी है और पात्र मतदाताओं को नाम जुड़वाने का अवसर दिया जा रहा है। जय राष्ट्र न्यूज़

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यूपी वोटर लिस्ट में अजीबोगरीब नामों की वजह आई सामने, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की तकनीकी गलती बनी कारण

लखनऊ, 24 अक्टूबर 2026: उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव की मतदाता सूची में “राम ने यादव को मारा”, “राम ने शर्मा को मारा” और पिता के नाम की जगह “B.Com” जैसी अजीब प्रविष्टियां सामने आने के बाद चुनाव अधिकारियों ने इसकी वजह स्पष्ट की है। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा के मुताबिक पहली बार शुरू किए गए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सिस्टम में अंग्रेजी नामों को हिंदी में लिप्यंतरित करने के बजाय कुछ मामलों में उनका अर्थानुवाद हो गया, जिससे ये गलतियां पैदा हुईं। ‘Ramhit Yadav’ कैसे बना ‘राम ने यादव को मारा’? अधिकारियों ने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि Ramhit Yadav को गलती से “Ram hit Yadav” टाइप किया गया, तो सॉफ्टवेयर ने “hit” शब्द को नाम का हिस्सा मानने के बजाय उसका अर्थ निकाल लिया। नतीजतन हिंदी में प्रविष्टि “राम ने यादव को मारा” बन गई। 14.81 लाख में 158 प्रविष्टियों में गड़बड़ी मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के मुताबिक विधान परिषद की पांच स्नातक और छह शिक्षक सीटों की मतदाता सूची में कुल 14,81,310 प्रविष्टियां थीं। इनमें 158 entries में मतदाता या उनके रिश्तेदारों के नाम असामान्य या गलत पाए गए। ‘B.Com’ पिता का नाम कैसे बन गया? कुछ मामलों को सिर्फ software translation की गलती नहीं माना गया। उदाहरण के लिए एक मतदाता के पिता के नाम की जगह “B.Com” लिखा मिला। CEO ने इसे मानव लापरवाही बताते हुए कहा कि verification के दौरान ऐसी प्रविष्टि ठीक की जानी चाहिए थी। सुधार का विकल्प था, फिर भी रह गई गलतियां ऑनलाइन सिस्टम में entries को edit और correct करने की सुविधा मौजूद थी। इसके बावजूद संबंधित स्तर पर entries को ठीक से verify नहीं किए जाने के कारण कुछ गलतियां final voter list में बनी रहीं। अब Jhansi और Prayagraj के divisional commissioners से स्पष्टीकरण और रिपोर्ट मांगी गई है। वोट डालने से नहीं रोके जाएंगे मतदाता Election authorities ने district officials को निर्देश दिया है कि पिता के नाम या अन्य clerical errors की वजह से किसी eligible voter को मतदान से वंचित न किया जाए। मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जा सकती है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं प्रविष्टियां अजीब नामों वाली voter-list entries सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई थीं। इसके बाद election administration को सार्वजनिक clarification देना पड़ा। मामला electoral-roll verification में technology के साथ human checking की जरूरत पर भी सवाल खड़े करता है। जय राष्ट्र न्यूज़

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तिहाड़ से रिहाई के बाद CJP प्रवक्ता सौरव दास का ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला, बोले—“Gyanu must go”

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026: तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद CJP प्रवक्ता सौरव दास ने Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar के खिलाफ अपना विरोध फिर तेज कर दिया है। रिहाई के कुछ घंटों बाद सोशल मीडिया पर अपने पहले पोस्ट में दास ने लिखा—“Gyanu must go”, यानी उन्होंने CEC के इस्तीफे की मांग दोहराई। रिहाई के बाद पहला पोस्ट सौरव दास और आशुतोष रांका को 21 अक्टूबर को तिहाड़ जेल से रिहा किया गया था। इसके बाद देर रात दास ने X पर संक्षिप्त पोस्ट करते हुए Gyanesh Kumar को लेकर अपना रुख साफ किया। CJP लंबे समय से SIR और electoral-roll revisions को लेकर CEC के खिलाफ campaign चला रही है। CJP ने फिर मांगा इस्तीफा CJP का आरोप है कि SIR प्रक्रिया में voter deletions और electoral transparency को लेकर गंभीर irregularities हुई हैं। Party इसी आधार पर Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग करती रही है। हालांकि Election Commission इन आरोपों को खारिज करता रहा है और उसका कहना है कि voter-roll revision नियमों के तहत किया जा रहा है। Abhijeet Dipke ने भी किया समर्थन CJP founder Abhijeet Dipke ने सौरव दास और आशुतोष रांका की release के बाद पोस्ट किया—“Boys have a message, Gyanu must go!” इससे साफ है कि party ने जेल से रिहाई के बाद भी CEC के खिलाफ अपना political campaign खत्म नहीं किया है। पहले भी Gyanesh Kumar पर तीखे आरोप लगा चुके हैं Das सौरव दास इससे पहले Gyanesh Kumar को लेकर और भी कड़ी भाषा इस्तेमाल कर चुके हैं। सितंबर में उन्होंने CEC को “Enemy Number 1” और “original anti-national” तक कहा था तथा BJP को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाए थे। ये CJP के आरोप हैं और इन्हें साबित तथ्य नहीं माना जा सकता। जेल से क्यों रिहा हुए? Das और Ranka को Jantar Mantar protest के बाद detention में भेजा गया था। 21 अक्टूबर को Special Executive Magistrate ने personal और surety bonds स्वीकार करने के बाद उनकी release का आदेश दिया। दोनों ने undertaking दी कि वे law and order बनाए रखेंगे और Jantar Mantar को officially protest site बनाए जाने तक वहां प्रदर्शन का call नहीं देंगे। राजनीतिक टकराव अभी खत्म नहीं Release के बावजूद CJP और Election Commission के बीच टकराव खत्म होता नहीं दिख रहा। SIR, voter deletions और CEC के resignation की मांग आने वाले दिनों में opposition politics और protest strategy का बड़ा मुद्दा बनी रह सकती है। जय राष्ट्र न्यूज़

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INDIA bloc की आज virtual meeting, CEC Gyanesh Kumar और SIR विवाद पर बनेगी आगे की रणनीति

नई दिल्ली, 22 अक्टूबर 2026: INDIA bloc के नेताओं की आज शाम virtual meeting होने जा रही है, जिसकी अध्यक्षता Congress president Mallikarjun Kharge करेंगे। बैठक में Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar, Special Intensive Revision (SIR) से जुड़ी कथित irregularities और 1 नवंबर को दिल्ली में होने वाली बड़ी rally की रणनीति पर चर्चा होगी। CEC Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग Opposition alliance पिछले कई हफ्तों से CEC Gyanesh Kumar के खिलाफ campaign चला रहा है। INDIA bloc का आरोप है कि SIR process में voter deletions और electoral transparency को लेकर गंभीर सवाल हैं। Bloc के नेता meeting में CEC के इस्तीफे की मांग को आगे कैसे बढ़ाया जाए, इस पर roadmap तय करेंगे। 1 नवंबर की rally पर focus आज की meeting में 1 November Delhi rally की preparations भी review की जाएंगी। Opposition इस rally को अपने “vote chori” campaign का अगला बड़ा चरण मान रहा है और इसे national-level mobilisation में बदलने की तैयारी कर रहा है। SIR पर क्या है विपक्ष की आपत्ति? INDIA bloc का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में voters के नाम electoral rolls से हटे और process में पर्याप्त transparency नहीं रही। हालांकि Election Commission इन आरोपों को खारिज करता रहा है और उसका कहना है कि revision का उद्देश्य voter rolls को accurate और updated बनाना है। Jantar Mantar और recent protests भी agenda में Reports के मुताबिक हाल के Jantar Mantar protests और opposition नेताओं तथा activists के खिलाफ police action भी meeting में चर्चा का विषय बन सकते हैं। Bloc आगे protests को coordinated तरीके से चलाने की रणनीति पर विचार करेगा। Delimitation और women’s reservation भी background में Meeting ऐसे समय हो रही है जब delimitation और Women’s Reservation Act को लेकर भी political discussion तेज है। Opposition इन मुद्दों को electoral reforms और representation की wider debate से जोड़कर देख रहा है। Meeting के बाद हो सकती है बड़ी घोषणा आज की virtual meeting के बाद INDIA bloc protest calendar, 1 November rally और Election Commission के खिलाफ आगे की political/legal strategy पर कोई joint announcement कर सकता है। Source – PTI, The Tribune, The New Indian Express, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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तिहाड़ जेल से बाहर आते ही आशुतोष रांका ने लगाया ‘इंकलाब जिंदाबाद’ का नारा, सौरव दास भी हुए रिहा

नई दिल्ली, 22 अक्टूबर 2026: CJP नेता आशुतोष रांका और सौरव दास सात दिन की न्यायिक हिरासत के बाद तिहाड़ जेल से बाहर आ गए। रिहाई के दौरान आशुतोष रांका ने गाड़ी में बैठते समय “इंकलाब जिंदाबाद” का नारा लगाया, जबकि सौरव दास ने मीडिया के सामने मुट्ठी उठाकर प्रतिक्रिया दी। दोनों की रिहाई Special Executive Magistrate (SEM) Court के आदेश के बाद हुई। किस शर्त पर मिली रिहाई? SEM Court ने दोनों नेताओं के ₹50,000 के personal और surety bonds स्वीकार किए। साथ ही उन्होंने लिखित undertaking दी कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखेंगे और जब तक Jantar Mantar को protest site के रूप में दोबारा notified नहीं किया जाता, वहां प्रदर्शन का call नहीं देंगे। 7 दिन से थे हिरासत में रांका और दास को Jantar Mantar से जुड़े protest के बाद custody में लिया गया था। पुलिस का आरोप था कि दोनों ने barricades पार किए और पहले दिए गए peace bond की conditions का उल्लंघन किया। दोनों इस कार्रवाई को political dissent से जुड़ा मामला बताते रहे हैं। बाहर आते ही क्या बोले? रिहाई के बाद Ashutosh Ranka ने “Inquilab Zindabad” का नारा लगाया। Saurav Das ने इससे पहले संक्षिप्त प्रतिक्रिया में कहा था कि “सच्चाई की जीत हुई।” Abhijeet Dipke ने जताई खुशी CJP founder Abhijeet Dipke ने दोनों की release के बाद social media पर प्रतिक्रिया दी और उन्हें आंदोलन के बड़े नेताओं में बताया। समर्थकों ने भी जेल के बाहर उनकी रिहाई का स्वागत किया। रिहाई के बाद फिर आया पुलिस का summons मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। रिहाई के कुछ ही घंटों बाद Delhi Police Crime Branch ने Saurav Das, Ashutosh Ranka और Ajinkya Shinde को Jantar Mantar trespassing case में पूछताछ के लिए summon किया है। यानी legal proceedings अभी जारी हैं। Source – Times of India, India Today, The Indian Express, The New Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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