प्रमुख खबरें

जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस को झटका, श्रीनगर सांसद आगा रूहुल्लाह मेहदी ने पार्टी छोड़ी; लोकसभा से भी इस्तीफा

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस को राजनीतिक झटका लगा है। श्रीनगर से लोकसभा सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने 3 नवंबर 2026 को पार्टी से इस्तीफा देने के साथ अपनी संसदीय सीट छोड़ने की घोषणा की। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पार्टी नेतृत्व पर जनता से किए गए चुनावी वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया। 24 साल बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस से अलग हुए रूहुल्लाह मेहदी ने बडगाम में आयोजित एक जनसभा के दौरान इस्तीफे की घोषणा की। यह सभा उनके पिता आगा सैयद मेहदी की 26वीं पुण्यतिथि पर आयोजित की गई थी। उन्होंने अपना इस्तीफा नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला तक पहुंचाने के लिए सौंपा। इसके साथ ही पार्टी से उनका लगभग 24 साल पुराना संबंध समाप्त हो गया। अनुच्छेद 370 को लेकर जताई नाराजगी मेहदी ने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 2024 के विधानसभा चुनाव में जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली और जनता के अधिकारों की रक्षा का वादा किया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद इस दिशा में पर्याप्त प्रयास नहीं किए। उन्होंने रोजगार, आरक्षण नीति और राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दों पर भी पार्टी नेतृत्व की आलोचना की। लोकसभा अध्यक्ष को भेजा इस्तीफा रूहुल्लाह मेहदी ने बताया कि उन्होंने श्रीनगर लोकसभा सीट से अपना इस्तीफा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भेज दिया है। हालांकि संसदीय सीट औपचारिक रूप से तभी खाली होगी, जब लोकसभा अध्यक्ष उनका इस्तीफा स्वीकार करेंगे। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने आरोपों को किया खारिज नेशनल कॉन्फ्रेंस ने मेहदी के आरोपों का विरोध किया है। पार्टी ने सवाल उठाया कि उन्होंने संसद में जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली के लिए क्या ठोस संसदीय पहल की थी। वहीं भाजपा नेता राम माधव ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के अंदर मतभेद होने की बात कही, लेकिन इस विवाद में भाजपा की भूमिका से इनकार किया। नई राजनीतिक मुहिम शुरू करने के संकेत मेहदी ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के युवाओं से नई राजनीतिक मुहिम से जुड़ने की अपील की है। हालांकि उन्होंने अभी किसी नई राजनीतिक पार्टी के गठन की औपचारिक घोषणा नहीं की है। उनके इस्तीफे से जम्मू-कश्मीर में सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर मतभेद सार्वजनिक हो गए हैं। स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस, हिंदुस्तान टाइम्स, इंडिया टुडे, पीटीआई। जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

अपनी ही पार्टी की केंद्र सरकार के दौरान सड़क पर उतरे गृह मंत्री अमित शाह, हैदराबाद में निकाली पदयात्रा

हैदराबाद, 2 नवंबर 2026: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा का नेतृत्व किया। इस दौरान उन्होंने हाथ में तिरंगा लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मार्च किया। गृह मंत्री की पदयात्रा को लेकर सोशल मीडिया पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। क्यों निकाली गई पदयात्रा? भाजपा ने यह पदयात्रा विपक्षी INDIA गठबंधन के ‘वोट चोरी’ अभियान और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर लगाए जा रहे आरोपों के जवाब में आयोजित की थी। भाजपा का कहना है कि विपक्ष मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया के बारे में भ्रामक जानकारी फैला रहा है। वहीं कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने इस प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। अमित शाह के साथ कई बड़े नेता मौजूद हैदराबाद में आयोजित मार्च में केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी, गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार और तेलंगाना भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए। पदयात्रा बाबू जगजीवन राम की प्रतिमा से शुरू होकर मोजमजाही मार्केट तक पहुंची। अपनी सरकार में प्रदर्शन करने पर चर्चा केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार होने के बावजूद गृह मंत्री के सड़क पर मार्च करने को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए गए। हालांकि यह प्रदर्शन केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नहीं था। भाजपा ने इसे विपक्ष के आरोपों का राजनीतिक जवाब बताया। एसआईआर और ईवीएम पर बढ़ा राजनीतिक विवाद अमित शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को एसआईआर और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से जुड़े मुद्दों पर संसद में बहस की चुनौती भी दी। इस घटनाक्रम के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। स्रोत – पीटीआई, टाइम्स ऑफ इंडिया, द टेलीग्राफ, न्यू इंडियन एक्सप्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

दीया मिर्जा का डिलीट किया गया वीडियो दोबारा अपलोड करें, बॉम्बे हाईकोर्ट का मुंबई महानगरपालिका को आदेश

मुंबई, 3 नवंबर 2026: बॉम्बे हाईकोर्ट ने अभिनेत्री दीया मिर्जा के दिवाली जागरूकता वीडियो को सोशल मीडिया से हटाए जाने पर नाराजगी जताई है। अदालत ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) को निर्देश दिया है कि वह वीडियो दोबारा प्रकाशित करे। यह वीडियो दिवाली के दौरान वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से बनाया गया था। क्या था पूरा विवाद? बीएमसी ने दिवाली पर पर्यावरण संरक्षण के लिए एक जागरूकता अभियान शुरू किया था। इसके तहत दीया मिर्जा ने लोगों से सार्वजनिक सड़कों और फुटपाथों पर पटाखे नहीं फोड़ने की अपील की थी। लेकिन मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम और महापौर रितु तावड़े सहित कुछ नेताओं ने वीडियो पर आपत्ति जताई। इसके बाद बीएमसी ने वीडियो अपने सोशल मीडिया खाते से हटा दिया। हाईकोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और नीला गोखले की पीठ ने कहा कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे को राजनीतिक या धार्मिक विवाद का रूप नहीं दिया जाना चाहिए। अदालत ने याद दिलाया कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और प्रदूषण का असर सभी नागरिकों पर पड़ता है, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो। बीएमसी को वीडियो दोबारा अपलोड करने का निर्देश हाईकोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक जागरूकता अभियान के लिए प्रसिद्ध हस्तियों को शामिल करने का बीएमसी आयुक्त का निर्णय उचित था। अदालत ने महानगरपालिका को हटाया गया वीडियो दोबारा प्रकाशित करने का निर्देश दिया और कहा कि राजनीतिक आपत्तियों के बाद जल्दबाजी में ऐसा निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए था। दीया मिर्जा ने क्या अपील की थी? वीडियो में दीया मिर्जा ने लोगों से दिवाली मनाते समय पर्यावरण और स्वास्थ्य का ध्यान रखने की अपील की थी। उनका संदेश सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे फोड़ने से बचने और वायु तथा ध्वनि प्रदूषण कम करने से संबंधित था। पर्यावरण संरक्षण पर फिर शुरू हुई चर्चा इस विवाद के बाद पर्यावरण जागरूकता अभियानों और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जनस्वास्थ्य और प्रदूषण जैसे विषयों पर अनावश्यक विवाद से बचना चाहिए। स्रोत – बॉम्बे हाईकोर्ट की कार्यवाही, पीटीआई, लाइव लॉ, एनडीटीवी, इंडियन एक्सप्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

राम मंदिर चढ़ावा हेराफेरी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच की याचिकाएं निपटाईं, 8 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

नई दिल्ली/अयोध्या, 2 नवंबर 2026: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान की रकम में कथित हेराफेरी से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई से स्वतंत्र जांच कराने की मांग वाली याचिकाओं का निपटारा कर दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत को बताया कि विशेष जांच टीम (एसआईटी) इस मामले में आठ आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की आगे की न्यायिक कार्यवाही अयोध्या की संबंधित मजिस्ट्रेट अदालत को सौंप दी है। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार की स्थिति रिपोर्ट पर विचार किया। अदालत ने कहा कि चूंकि मामले में आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है, इसलिए सीबीआई जांच की मांग वाली याचिकाओं का निपटारा किया जाता है। साथ ही संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया गया कि आगे की कार्यवाही कानून के अनुसार की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने आरोपों की सत्यता या मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय व्यक्त नहीं की है। आठ आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुआ आरोपपत्र उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष जांच टीम ने 23 सितंबर 2026 को अयोध्या की अदालत में आठ आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। इससे पहले 21 सितंबर को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि जांच काफी हद तक पूरी हो चुकी है और जल्द आरोपपत्र दाखिल कर दिया जाएगा। अब इस आरोपपत्र के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया चलेगी। चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित हेराफेरी सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि जांच में दान की रकम की गिनती के दौरान कथित हेराफेरी सामने आई है। उनके अनुसार, कुछ लोगों पर गिनती के समय नकदी निकालने और बाद में उसका निजी उपयोग करने का आरोप है। जांच एजेंसी का दावा है कि कथित रूप से निकाली गई रकम का इस्तेमाल बैंक खातों में जमा करने तथा संपत्ति खरीदने में किया गया। SIT को मिलीं कथित अनियमितताओं की 105 घटनाएं विशेष जांच टीम की स्थिति रिपोर्ट के अनुसार मंदिर परिसर के तीर्थयात्री सुविधा केंद्र में स्थित दान-गणना कक्ष से नकदी बिना अनुमति निकालने या छिपाने की 105 संदिग्ध घटनाओं की पहचान हुई। जांच में सीसीटीवी फुटेज, बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन, संपत्ति संबंधी दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल की गई। इन घटनाओं की कानूनी जिम्मेदारी तय करने का काम अब संबंधित अदालत में साक्ष्यों के आधार पर होगा। बैंक खातों और संपत्ति निवेश की जांच सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जांच के दौरान आरोपियों के बैंक खातों और संपत्ति खरीद से संबंधित रिकॉर्ड खंगाले गए। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि किसी संपत्ति के बिक्री विलेख में कीमत ₹15 लाख दिखाई गई, जबकि उसकी अनुमानित कीमत करीब ₹50 लाख थी। जांच एजेंसी को संदेह है कि शेष रकम का भुगतान नकद किया गया होगा। हालांकि यह जांच पक्ष की दलील है और इसकी अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होगी। मंदिर की मूर्तियां और अन्य चढ़ावे सुरक्षित बताए गए सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि मामले में लेखापरीक्षा भी कराई गई थी। सॉलिसिटर जनरल के अनुसार मंदिर की मूर्तियां, धार्मिक वस्तुएं और अन्य चढ़ावे सुरक्षित पाए गए हैं। इस जानकारी के आधार पर जांच का मुख्य केंद्र दान में प्राप्त नकदी की गिनती और कथित अनधिकृत निकासी रही। CBI जांच की मांग क्यों उठी थी? इस मामले में कई याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उनकी मांग थी कि श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र और अदालत की निगरानी में जांच कराई जाए। याचिकाओं में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड की व्यापक लेखापरीक्षा कराने की मांग भी शामिल थी। याचिकाकर्ताओं में अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी, अजय कुमार राय, राष्ट्रीय जनता दल के सांसद सुधाकर सिंह और हिंदू धर्म परिषद शामिल थे। 25 जून को दर्ज हुआ था मामला अदालत के सामने रखी गई जांच संबंधी जानकारी के अनुसार 25 जून 2026 को अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में आठ व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। शुरुआती जांच अयोध्या पुलिस ने की। इस दौरान सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान, तलाशी से प्राप्त सामग्री, बैंक रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाए गए। बाद में मामले की जांच विशेष जांच टीम को सौंपी गई। सुप्रीम कोर्ट ने फोरेंसिक लेखापरीक्षक जोड़ने को कहा था 27 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने विशेष जांच टीम के साथ एक फोरेंसिक लेखापरीक्षक को जोड़ने का निर्देश दिया था। इसका उद्देश्य वित्तीय रिकॉर्ड, नकदी के लेनदेन और कथित हेराफेरी से जुड़े साक्ष्यों की अधिक विस्तृत जांच सुनिश्चित करना था। सितंबर में जांच की स्थिति रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद अदालत ने आरोपपत्र दाखिल होने की प्रक्रिया पर भी ध्यान दिया। याचिकाकर्ता भी कर सकेंगे मुकदमे में सहयोग सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में जनहित का पहलू शामिल है। इसी कारण याचिकाकर्ताओं को संबंधित मजिस्ट्रेट अदालत में कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्यवाही में सहयोग करने की अनुमति दी गई है। इसका अर्थ है कि वे कानून द्वारा निर्धारित सीमाओं के भीतर अपना पक्ष रख सकते हैं और आवश्यक सहायता दे सकते हैं। क्या सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों को दोषी माना? नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उसने इस मामले में आरोपों की सत्यता पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है। आरोपपत्र दाखिल होना दोष सिद्ध होना नहीं है। आगे अदालत में साक्ष्यों और कानूनी दलीलों के आधार पर तय होगा कि आरोप साबित होते हैं या नहीं। भविष्य में चोरी रोकने के उपायों पर सवाल सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाया। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि संबंधित अधिकारियों ने सुरक्षा और निगरानी से जुड़े कुछ अतिरिक्त उपाय किए हैं। हालांकि इन उपायों का पूरा विवरण सुनवाई की उपलब्ध रिपोर्टों में सामने नहीं आया है। क्या अब CBI जांच होगी? फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच कराने का आदेश नहीं दिया है। एसआईटी द्वारा आरोपपत्र दाखिल किए जाने के बाद अदालत…

आगे और पढ़ें

वाढवण बंदर के विरोध में पालघर में आंदोलन तेज, समुद्र में उतरकर ग्रामीणों का जलसमाधि प्रदर्शन; प्रशासन के आश्वासन पर आंदोलन वापस

पालघर, महाराष्ट्र: महाराष्ट्र के पालघर जिले में प्रस्तावित वाढवण बंदरगाह परियोजना के खिलाफ स्थानीय ग्रामीणों और मछुआरा समुदाय का विरोध तेज हो गया है। सोमवार, 2 नवंबर 2026 को सैकड़ों ग्रामीणों ने समुद्र में उतरकर जलसमाधि आंदोलन किया। इस प्रदर्शन में महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने भी भाग लिया। आंदोलनकारियों ने सरकार और बंदरगाह प्रशासन से निर्माण कार्य तत्काल बंद करने तथा परियोजना रद्द करने की मांग की। समुद्र में उतरकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन पालघर के वाढवण समुद्र तट पर बड़ी संख्या में ग्रामीण पानी में उतर गए। प्रदर्शनकारियों ने समुद्र में मानव शृंखला बनाकर बंदरगाह परियोजना के खिलाफ नारे लगाए। कुछ प्रदर्शनकारी छाती तक पानी में खड़े दिखाई दिए। महिलाओं और बच्चों की मौजूदगी के कारण स्थिति संवेदनशील हो गई। आंदोलनकारियों का कहना था कि स्थानीय लोगों के विरोध के बावजूद परियोजना से संबंधित निर्माण कार्य जारी रखा जा रहा है। निर्माण कार्य दोबारा शुरू होने से बढ़ा आक्रोश रिपोर्टों के अनुसार वाढवण बंदरगाह से जुड़े सड़क और तटीय निर्माण कार्यों को रोकने की मांग पहले से की जा रही थी। 30 अक्टूबर को वरोर क्षेत्र में आयोजित जनआक्रोश सभा में स्थानीय संगठनों ने प्रशासन को निर्माण गतिविधियां बंद करने की चेतावनी दी थी। इसके बाद कुछ समय तक काम बंद रहा, लेकिन 2 नवंबर को पुलिस सुरक्षा के बीच सड़क निर्माण कार्य दोबारा शुरू होने की खबर से ग्रामीण नाराज हो गए। प्रदर्शनकारियों ने निर्माण सामग्री लेकर पहुंचे ट्रकों को भी रोकने का प्रयास किया। पुलिस कार्रवाई को लेकर लगाए आरोप आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य का विरोध करने पर पुलिस ने कुछ ग्रामीणों को हिरासत में लिया और उनके खिलाफ मामले दर्ज करने की कोशिश की। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन स्थानीय लोगों की आपत्तियों को पर्याप्त महत्व दिए बिना निर्माण कार्य आगे बढ़ा रहा है। हालांकि इन आरोपों पर पुलिस और प्रशासन का विस्तृत आधिकारिक पक्ष उपलब्ध रिपोर्टों में स्पष्ट नहीं है। महिलाओं और बच्चों ने भी लिया हिस्सा जलसमाधि आंदोलन में स्थानीय मछुआरा परिवारों की महिलाएं, युवतियां और बच्चे बड़ी संख्या में शामिल हुए। ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित बंदरगाह से केवल उनकी वर्तमान आजीविका ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी प्रभावित हो सकता है। प्रदर्शनकारियों ने समुद्र में खड़े होकर परियोजना वापस लेने और स्थानीय समुदायों की मांगें सुनने की अपील की। विधायक विनोद निकोले पहुंचे प्रदर्शन स्थल डहाणू विधानसभा क्षेत्र के विधायक विनोद निकोले भी आंदोलन स्थल पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और प्रशासन के साथ निर्माण कार्य रोकने को लेकर चर्चा की। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार प्रशासन की ओर से काम बंद करने का आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शनकारियों से समुद्र से बाहर आने की अपील की गई। आश्वासन मिलने पर जलसमाधि आंदोलन वापस 2 नवंबर की रात सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक प्रशासन द्वारा निर्माण कार्य रोकने का आश्वासन दिए जाने के बाद ग्रामीणों ने जलसमाधि आंदोलन वापस ले लिया। हालांकि यह केवल तत्काल प्रदर्शन की समाप्ति थी। स्थानीय संगठनों ने बंदरगाह परियोजना का विरोध जारी रखने की बात कही है। परियोजना को स्थायी रूप से रद्द करने का कोई सरकारी फैसला सामने नहीं आया है। वाढवण बंदरगाह परियोजना क्या है? वाढवण बंदरगाह महाराष्ट्र के पालघर जिले के डहाणू क्षेत्र में विकसित की जा रही एक प्रमुख समुद्री बंदरगाह परियोजना है। केंद्र सरकार ने 19 जून 2024 को इस परियोजना को मंजूरी दी थी। परियोजना की अनुमानित लागत लगभग ₹76,220 करोड़ है। इसे जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह प्राधिकरण और महाराष्ट्र समुद्री बोर्ड की संयुक्त कंपनी के माध्यम से विकसित किया जा रहा है। इसमें जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह प्राधिकरण की 74 प्रतिशत और महाराष्ट्र समुद्री बोर्ड की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी है। सरकार क्यों बनाना चाहती है यह बंदरगाह? केंद्र सरकार के अनुसार वाढवण बंदरगाह का उद्देश्य भारत की समुद्री माल ढुलाई क्षमता बढ़ाना और बड़े अंतरराष्ट्रीय मालवाहक जहाजों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित करना है। सरकार का दावा है कि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार, औद्योगिक विकास, परिवहन संपर्क और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। परियोजना में सड़क और रेलवे संपर्क विकसित करने की भी योजना शामिल है। स्थानीय मछुआरे क्यों कर रहे विरोध? स्थानीय मछुआरा समुदाय और ग्रामीण संगठनों का आरोप है कि बंदरगाह निर्माण के कारण पारंपरिक मछली पकड़ने के क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है। उनकी प्रमुख चिंताएं हैं: ये आंदोलनकारियों की आशंकाएं हैं। वास्तविक पर्यावरणीय और आर्थिक प्रभाव का आकलन संबंधित अध्ययनों तथा परियोजना के क्रियान्वयन के आधार पर किया जाना होगा। 30 अक्टूबर को हुई थी बड़ी जनआक्रोश सभा वाढवण बंदरगाह विरोधी संघर्ष समिति और अन्य संगठनों ने 30 अक्टूबर को वरोर में जनआक्रोश सभा आयोजित की थी। सभा में मछुआरों, किसानों, आदिवासी समुदायों और विभिन्न सामाजिक तथा राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। आयोजकों ने परियोजना से संबंधित निर्माण कार्य बंद करने और स्थानीय समुदायों की मांगों पर विचार करने की अपील की थी। पर्यावरण और विकास को लेकर दो अलग-अलग पक्ष वाढवण बंदरगाह परियोजना को लेकर सरकार और स्थानीय आंदोलनकारियों के दृष्टिकोण अलग हैं। सरकार इसे समुद्री व्यापार और परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना मानती है। दूसरी ओर, आंदोलनकारी समुद्री पर्यावरण, पारंपरिक मछली पकड़ने के अधिकार, जमीन और आजीविका को लेकर चिंता जता रहे हैं। आगे क्या होगा? जलसमाधि आंदोलन वापस लिए जाने के बाद भी वाढवण बंदरगाह परियोजना का विवाद समाप्त नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन निर्माण गतिविधियों को लेकर क्या निर्णय लेता है, स्थानीय संगठनों के साथ बातचीत कितनी आगे बढ़ती है और परियोजना से प्रभावित समुदायों की मांगों पर क्या कार्रवाई होती है। फिलहाल ग्रामीणों का कहना है कि बंदरगाह परियोजना के खिलाफ उनका आंदोलन जारी रहेगा। स्रोत – आज तक, लोकसत्ता, एबीपी माझा, फ्री प्रेस जर्नल, जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह प्राधिकरण, भारत सरकार। जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

मध्य प्रदेश में 19 महीने के चीता शावक को गोली मारने का आरोप, दो भाई गिरफ्तार; जंगल से बंदूक भी बरामद

श्योपुर/मुरैना: मध्य प्रदेश में 19 महीने के भारतीय मूल के चीते KNG-22 की गोली लगने से मौत के मामले में विशेष जांच दल ने दो भाइयों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान भगवान सिंह और प्रीतम सिंह के रूप में हुई है। दोनों मुरैना जिले के रहने वाले हैं। जांच एजेंसी ने वह लाइसेंसी दो नाली बंदूक भी बरामद करने का दावा किया है, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर चीते पर गोली चलाने में किया गया था। 24 अक्टूबर को शिकार के लिए जंगल जाने का आरोप विशेष जांच दल के अनुसार दोनों आरोपी 24 अक्टूबर को विजयपुर क्षेत्र के नितनवास गांव के पास जंगल में शिकार के लिए गए थे। पूछताछ में भगवान सिंह ने कथित तौर पर बताया कि जंगल में एक चीता दिखाई देने पर उसने अपनी लाइसेंसी दो नाली बंदूक से गोली चला दी और इसके बाद दोनों मौके से भाग गए। यह जांच एजेंसी का दावा है और आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में होगी। 25 अक्टूबर को घायल मिला था KNG-22 KNG-22 को 25 अक्टूबर को श्योपुर वन मंडल के कम्पार्टमेंट नंबर 748 में गंभीर रूप से घायल हालत में पाया गया था। निगरानी दल ने उसे बचाकर पहले कूनो राष्ट्रीय उद्यान पहुंचाया। हालत गंभीर होने पर उसे आगे के उपचार के लिए जबलपुर स्थित पशु चिकित्सा संस्थान ले जाया गया। शरीर से निकले पांच छर्रे इलाज के दौरान डॉक्टरों को उसके शरीर में गोली के छर्रे मिले। आपातकालीन सर्जरी के दौरान पांच छर्रे निकाले गए। सीटी स्कैन में उसके आंतरिक अंगों, मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र को गंभीर नुकसान होने की जानकारी सामने आई। 27 अक्टूबर को हुई मौत दो दिन तक इलाज चलने के बावजूद KNG-22 को बचाया नहीं जा सका और 27 अक्टूबर की सुबह उसकी मौत हो गई। केंद्र सरकार ने घटना को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो के अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय टीम जांच के लिए मध्य प्रदेश भेजी थी। कौन था KNG-22? KNG-22 एक 19 महीने का नर चीता था, जिसका जन्म भारत में हुआ था। वह मादा चीता निर्वा की दूसरी संतति का दूसरा शावक था। निर्वा को फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लाया गया था, जबकि उसके पिता गौरव को नामीबिया से भारत लाया गया था। पहले आरोपी को 31 अक्टूबर को पकड़ा गया जांच के दौरान पुलिस और वन विभाग ने आसपास के इलाकों में कई लोगों से पूछताछ की। इसके बाद भगवान सिंह को 31 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के बाद उसके भाई प्रीतम सिंह को भी हिरासत में लिया गया। जंगल से बरामद हुई बंदूक जांच दल दोनों आरोपियों को कथित घटनास्थल पर लेकर गया। इसके बाद मुरैना वन क्षेत्र से लाइसेंसी दो नाली मजल-लोडिंग बंदूक बरामद की गई, जिसके बारे में जांच एजेंसी का दावा है कि इसी हथियार से चीते पर गोली चलाई गई थी। अब हथियार की बैलिस्टिक जांच भी महत्वपूर्ण होगी। वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत मामला दोनों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 9 और 51 के तहत मामला दर्ज किया गया है। धारा 9 संरक्षित वन्यजीवों के शिकार पर रोक से जुड़ी है, जबकि धारा 51 उल्लंघन के लिए दंड का प्रावधान करती है। क्या चीते को तेंदुआ समझकर मारी गई गोली? कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि आरोपियों ने चीते को तेंदुआ समझ लिया था। हालांकि जांच एजेंसी की आधिकारिक जानकारी में फिलहाल यह स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं हुआ है कि पहचान की गलती ही गोली चलाने की वजह थी। इसलिए इस दावे को अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता। जंगली सूअर का शिकार करने निकले थे आरोपी? एक अन्य रिपोर्ट में जांच अधिकारी के हवाले से कहा गया कि दोनों आरोपी कथित तौर पर जंगली सूअर का शिकार करने जंगल गए थे। इसी दौरान उनका सामना KNG-22 से हुआ और गोली चलाई गई। यह भी जांच एजेंसी के सामने दिया गया कथित बयान है। संगठित वन्यजीव तस्करी का सबूत नहीं विशेष जांच दल ने कहा है कि अभी तक की जांच में इस घटना का किसी संगठित वन्यजीव तस्करी गिरोह या अवैध वन्यजीव व्यापार नेटवर्क से संबंध नहीं मिला है। इससे फिलहाल मामला व्यक्तिगत अवैध शिकार की घटना के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि जांच जारी है। कूनो से बाहर निकले चीतों की सुरक्षा पर सवाल KNG-22 की मौत ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान की सीमाओं से बाहर निकलने वाले चीतों की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। प्रोजेक्ट चीता के तहत कई जानवर खुले जंगलों में लंबी दूरी तय करते हैं। ऐसे में संरक्षित क्षेत्र से बाहर शिकार, मानव-वन्यजीव संघर्ष और निगरानी व्यवस्था बड़े मुद्दे बन सकते हैं। केंद्र ने भी बनाई उच्चस्तरीय जांच टीम केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने इस घटना के बाद तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय टीम भेजी। इसमें राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। टीम को घटना की परिस्थितियों, उपलब्ध साक्ष्यों और कूनो से बाहर घूमने वाले चीतों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने का काम दिया गया है। भारत में चीता पुनर्वास कार्यक्रम के लिए गंभीर घटना भारत में चीतों को फिर से बसाने की परियोजना के तहत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीतों को लाया गया था। KNG-22 की कथित गोलीबारी से हुई मौत इस परियोजना के लिए गंभीर सुरक्षा चुनौती मानी जा रही है, क्योंकि यह भारत में जन्मे चीते से जुड़ी पहली ऐसी हत्या बताई जा रही है। आगे बैलिस्टिक और फॉरेंसिक जांच अहम अब जांच एजेंसी बरामद बंदूक, चीते के शरीर से निकले छर्रों और अन्य फॉरेंसिक साक्ष्यों का मिलान करेगी। इन साक्ष्यों के आधार पर ही अदालत में यह तय होगा कि कथित गोलीबारी में बरामद हथियार और गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका किस हद तक साबित होती है। स्रोत – मध्य प्रदेश वन विभाग, विशेष जांच दल, पर्यावरण मंत्रालय, पीटीआई, इंडियन एक्सप्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

ऑस्ट्रेलिया के Glenn Maxwell ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से लिया संन्यास, 14 साल के करियर का अंत

मेलबर्न: ऑस्ट्रेलिया के विस्फोटक ऑलराउंडर Glenn Maxwell ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया है। 38 वर्षीय Maxwell ने 3 नवंबर 2026 को T20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की। वह जून 2025 में ODI क्रिकेट छोड़ चुके थे, इसलिए इस फैसले के साथ ऑस्ट्रेलिया के लिए उनका करीब 14 साल लंबा अंतरराष्ट्रीय करियर समाप्त हो गया। T20I से संन्यास के साथ अंतरराष्ट्रीय करियर खत्म Maxwell ने साफ किया कि अब वह ऑस्ट्रेलिया के लिए T20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेलेंगे। उन्होंने ODI क्रिकेट से पिछले साल जून में संन्यास ले लिया था, जबकि टेस्ट क्रिकेट में वह लंबे समय से टीम का हिस्सा नहीं थे। ऐसे में T20I से संन्यास के बाद अब उनका अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट अध्याय पूरी तरह समाप्त हो गया है। 149 ODI, 130 T20I और 7 Test खेले Glenn Maxwell ने ऑस्ट्रेलिया के लिए: मैच खेले। उन्होंने ODI क्रिकेट में 3,990 रन और T20I में 2,897 रन बनाए। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनके नाम कुल 10 शतक और 136 विकेट दर्ज हैं। तीन विश्व कप विजेता टीमों का रहे हिस्सा Maxwell ऑस्ट्रेलिया की कई बड़ी ICC जीतों का हिस्सा रहे। उन्होंने 2015 और 2023 ODI विश्व कप जीतने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा वह 2021 T20 विश्व कप जीतने वाली टीम का भी हिस्सा थे। 2023 विश्व कप की दोहरी शतकीय पारी बनी इतिहास Maxwell के करियर की सबसे यादगार पारियों में 2023 ODI विश्व कप में अफगानिस्तान के खिलाफ खेली गई उनकी नाबाद दोहरी शतकीय पारी शामिल है। मुंबई में खेली गई उस पारी में Maxwell ने चोट और ऐंठन से जूझते हुए ऑस्ट्रेलिया को लगभग हारी हुई स्थिति से जीत दिलाई थी। यह पारी वनडे विश्व कप इतिहास की सबसे यादगार पारियों में गिनी जाती है। T20I में पांच शतक लगाने वाले चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल Maxwell ने T20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पांच शतक लगाए। वह भारत के Rohit Sharma के साथ उन चुनिंदा बल्लेबाजों में शामिल रहे जिन्होंने T20I में पांच शतक बनाए हैं। अपने अपरंपरागत शॉट, रिवर्स स्वीप और तेज बल्लेबाजी के कारण उन्हें दुनिया के सबसे खतरनाक सफेद गेंद बल्लेबाजों में गिना गया। ऑस्ट्रेलिया के तीसरे सबसे ज्यादा T20I रन बनाने वाले बल्लेबाज Maxwell ने 130 T20I मुकाबलों में 2,897 रन बनाए और ऑस्ट्रेलिया के तीसरे सबसे ज्यादा T20I रन बनाने वाले बल्लेबाज के रूप में अपना अंतरराष्ट्रीय करियर समाप्त किया। इस सूची में उनसे आगे David Warner और Aaron Finch हैं। आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच T20 विश्व कप 2026 में Maxwell का आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 2026 T20 विश्व कप में ओमान के खिलाफ था। ऑस्ट्रेलिया का विश्व कप अभियान उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा और टीम सेमीफाइनल तक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद टीम प्रबंधन ने युवा खिलाड़ियों को ज्यादा अवसर देने शुरू किए। टीम प्रबंधन से कई दौर की हुई बातचीत Maxwell ने बताया कि T20 विश्व कप से पहले और बाद में ऑस्ट्रेलियाई टीम प्रबंधन के साथ उनके भविष्य को लेकर कई बार बातचीत हुई। उनके मुताबिक उन पर संन्यास का कोई दबाव नहीं था, लेकिन आगामी श्रृंखलाओं में टीम युवा खिलाड़ियों को मौका देना चाहती थी। इसी के बाद उन्होंने अपने भविष्य को लेकर अंतिम फैसला लिया। MCG में विदाई मैच की थी उम्मीद रॉयटर्स के मुताबिक Maxwell चाहते थे कि उन्हें मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर इंग्लैंड के खिलाफ संभावित विदाई मुकाबला खेलने का मौका मिले। लेकिन ऑस्ट्रेलिया की चयन नीति अब युवा खिलाड़ियों की ओर बढ़ रही है, जिससे यह संभावना समाप्त हो गई। Victoria क्रिकेट से भी पीछे हटे Maxwell ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के साथ-साथ Victoria के लिए List A और प्रथम श्रेणी क्रिकेट से भी हटने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि अब वह अपने शरीर और खासकर घुटने की देखभाल पर ज्यादा ध्यान देना चाहते हैं, ताकि बाकी फ्रेंचाइजी टूर्नामेंट खेल सकें। BBL खेलना जारी रखेंगे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के बावजूद Maxwell का क्रिकेट करियर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। वह Melbourne Stars के लिए Big Bash League में खेलना जारी रखेंगे। उनका अनुबंध 2027-28 सत्र के अंत तक है। ‘Big Show’ नाम से मशहूर रहे Maxwell Maxwell को क्रिकेट जगत में ‘The Big Show’ के नाम से जाना जाता है। अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी, 360 डिग्री शॉट, शानदार फील्डिंग और उपयोगी ऑफ स्पिन गेंदबाजी के कारण उन्होंने आधुनिक सीमित ओवर क्रिकेट पर अलग छाप छोड़ी। 14 साल का यादगार सफर Maxwell ने 2012 में ऑस्ट्रेलिया के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था। करीब 14 साल के करियर में उन्होंने तीन विश्व कप जीते, कई रिकॉर्ड बनाए और ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े मैच विजेताओं में अपनी जगह बनाई। अब फ्रेंचाइजी क्रिकेट पर रहेगा फोकस Maxwell का अगला फोकस फ्रेंचाइजी क्रिकेट और अपने शरीर को लंबे समय तक खेलने लायक बनाए रखने पर होगा। उन्होंने संकेत दिया है कि अब वह चुनिंदा टूर्नामेंट खेलेंगे और व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम से दूर रहेंगे। स्रोत – ICC, Cricket Australia, Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

LTCG टैक्स की समीक्षा पर सरकार तैयार, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बोलीं—निवेशकों की मांग पर करेंगे विचार

मुंबई/नई दिल्ली: शेयर बाजार के निवेशकों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि सरकार शेयर बाजार में लगने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स यानी LTCG टैक्स की समीक्षा की मांग पर विचार करेगी। खास तौर पर विदेशी निवेशकों की ओर से इस टैक्स व्यवस्था को लेकर उठाई गई चिंताओं को सरकार ने गंभीरता से लिया है। वित्त मंत्री ने क्या कहा? निर्मला सीतारमण ने एक मीडिया कार्यक्रम में कहा कि परिस्थितियां बदल गई हैं और अब निवेशकों की चिंताएं पहले से ज्यादा स्पष्ट रूप से सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इन मांगों को समझती है और उन पर विचार करेगी, लेकिन अभी किसी तत्काल टैक्स बदलाव की घोषणा करना उचित नहीं होगा। अभी LTCG टैक्स कितना है? मौजूदा व्यवस्था में सूचीबद्ध शेयरों को 12 महीने से ज्यादा समय तक रखने के बाद होने वाले लाभ पर LTCG टैक्स लगाया जाता है। वर्तमान में ऐसे दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर 12.5% टैक्स लगता है। वहीं 12 महीने या उससे कम समय में शेयर बेचने पर होने वाले शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर 20% टैक्स लागू है। विदेशी निवेशकों ने उठाई है टैक्स में बदलाव की मांग विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का कहना है कि भारत उन चुनिंदा बड़े बाजारों में शामिल है जहां विदेशी निवेशकों पर पूंजीगत लाभ कर लगाया जाता है। उनका तर्क है कि LTCG टैक्स और अन्य लेनदेन लागत भारतीय बाजार को कुछ अन्य उभरते बाजारों की तुलना में कम आकर्षक बना सकती हैं। SEBI ने भी हटाने की सिफारिश की रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी SEBI ने सरकार को विदेशी इक्विटी निवेशकों के लिए LTCG टैक्स हटाने की सिफारिश की है। यह सिफारिश बाध्यकारी नहीं है और अंतिम फैसला केंद्र सरकार तथा वित्त मंत्रालय को करना है। घरेलू म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए भी प्रस्ताव SEBI ने घरेलू म्यूचुअल फंड निवेशकों को भी कुछ राहत देने का सुझाव दिया है। प्रस्ताव के अनुसार अगर निवेशक एक साल से ज्यादा समय तक फंड में बने रहते हैं और बाद में एक योजना से दूसरी योजना में स्विच करते हैं, तो ऐसे स्विच पर टैक्स राहत देने पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल यह केवल प्रस्ताव है। विदेशी निवेशकों की बड़ी बिकवाली से बढ़ी चिंता इस साल विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से बड़े पैमाने पर पैसा निकाला है। रॉयटर्स के मुताबिक 2026 में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की शुद्ध बिकवाली करीब 31 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है। इससे सरकार और बाजार नियामक दोनों के स्तर पर विदेशी निवेश आकर्षित करने के उपायों पर चर्चा तेज हुई है। वित्त मंत्री ने माना—परिस्थितियां बदल गई हैं सीतारमण ने कहा कि टैक्स संरचना में बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियां बदल गई हैं। अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल बढ़ने और डॉलर की मजबूती के कारण उभरते बाजारों से पूंजी बाहर जा रही है। ऐसे में भारत को निवेश के लिए प्रतिस्पर्धी बनाए रखना महत्वपूर्ण हो गया है। सिर्फ विदेशी निवेशकों को राहत देना आसान नहीं वित्त मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि सरकार को कोई फैसला करते समय घरेलू निवेशकों के हितों को भी ध्यान में रखना होगा। उन्होंने कहा कि यदि केवल विदेशी निवेशकों को राहत दी जाती है तो घरेलू निवेशक भी समान व्यवहार की मांग कर सकते हैं। इसलिए किसी भी टैक्स बदलाव को संतुलित तरीके से देखना होगा। Budget 2027 से पहले बढ़ी चर्चा सरकार पहले से ही केंद्रीय बजट 2027-28 की तैयारी शुरू कर चुकी है। अक्टूबर में वित्त मंत्री ने कहा था कि सरकार LTCG टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी STT पर निवेशकों और विशेषज्ञों के सुझाव सुनने के लिए तैयार है। SBI Research भी दे चुका है टैक्स हटाने का सुझाव इससे पहले SBI Research ने भी इक्विटी पर LTCG टैक्स हटाने का सुझाव दिया था। उसका तर्क था कि इससे लंबी अवधि के निवेश को बढ़ावा मिल सकता है और विदेशी पूंजी आकर्षित करने में मदद हो सकती है। हालांकि यह भी केवल एक सुझाव है और अभी सरकारी नीति नहीं है। निवेशकों को अभी पुराने नियम ही मानने होंगे फिलहाल निवेशकों के लिए मौजूदा टैक्स नियमों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसलिए शेयर, इक्विटी म्यूचुअल फंड और संबंधित निवेश बेचते समय अभी भी वर्तमान LTCG और STCG दरें ही लागू होंगी। क्या LTCG टैक्स खत्म हो जाएगा? अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि सरकार LTCG टैक्स पूरी तरह खत्म कर देगी। वित्त मंत्री ने केवल समीक्षा की मांग पर विचार करने की बात कही है। अंतिम फैसला बजट प्रक्रिया, राजस्व प्रभाव, घरेलू निवेशकों के हित और विदेशी पूंजी प्रवाह जैसे कई पहलुओं के आधार पर लिया जाएगा। शेयर बाजार के लिए क्यों अहम है यह फैसला? अगर सरकार LTCG टैक्स में कटौती या राहत देती है तो इससे भारतीय शेयर बाजार में निवेश के बाद मिलने वाला वास्तविक रिटर्न बढ़ सकता है। इससे विदेशी निवेश को आकर्षित करने और लंबी अवधि के निवेश को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। हालांकि सरकार के लिए टैक्स राजस्व और निवेश प्रोत्साहन के बीच संतुलन बनाना भी जरूरी होगा। स्रोत – वित्त मंत्रालय, इकोनॉमिक टाइम्स, रॉयटर्स, बिजनेस स्टैंडर्ड, मनीकंट्रोल जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

SIR और EVM पर अमित शाह की राहुल गांधी को खुली चुनौती, विशेष संसद सत्र में बहस की मांग

हैदराबाद/नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM और कथित ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2 नवंबर 2026 को हैदराबाद में राहुल गांधी को संसद में इन मुद्दों पर बहस की खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय पर विशेष संसद सत्र बुलाने के लिए भी तैयार है। हैदराबाद से राहुल गांधी को सीधी चुनौती अमित शाह भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने राहुल गांधी पर संसद नहीं चलने देने का आरोप लगाया और कहा कि अगर विपक्ष को SIR, EVM या मतदाता सूची पर सवाल हैं तो वह संसद में बहस करे। ‘विशेष सत्र बुलाने को तैयार’ शाह ने कहा कि सरकार इन मुद्दों पर चर्चा से पीछे नहीं हटेगी और जरूरत पड़ी तो संसद का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है। उन्होंने राहुल गांधी को चुनौती देते हुए कहा कि वह सदन में आएं और SIR, EVM तथा मतदाता सूची से जुड़े अपने आरोपों पर बहस करें। SIR को लेकर क्या है विवाद? SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूचियों की गहन जांच और संशोधन की प्रक्रिया है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। कांग्रेस और INDIA गठबंधन इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रहे हैं। वहीं भाजपा और सरकार का कहना है कि मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए मृत, स्थानांतरित, दोहरे और अपात्र नाम हटाना जरूरी है। राहुल गांधी ने लगाए हैं 13 करोड़ नाम हटाने के आरोप राहुल गांधी ने हाल के दिनों में आरोप लगाया है कि देशभर में करोड़ों मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से हटाए गए हैं। अमित शाह ने इस दावे का विरोध करते हुए कहा कि हटाए गए नामों में स्थान बदल चुके लोग, मृत व्यक्ति और डुप्लीकेट प्रविष्टियां भी शामिल हैं। उन्होंने शेष नामों को लेकर घुसपैठियों का दावा किया। यह भाजपा का राजनीतिक दावा है और इन संख्याओं तथा वर्गीकरण पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। ‘तीन करोड़ घुसपैठिए’ वाला दावा शाह ने कहा कि SIR के दौरान सामने आए करीब तीन करोड़ नाम ऐसे हैं जिन्हें उन्होंने कथित घुसपैठियों से जोड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस इन नामों को मतदाता सूची में बनाए रखना चाहती है। हालांकि विपक्ष ने इन आरोपों को खारिज किया है और पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। INDIA गठबंधन की रैली पर भी हमला शाह ने दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई INDIA गठबंधन की ‘वोट बचाओ’ रैली पर भी निशाना साधा। उन्होंने इसे ‘घुसपैठिया बचाओ’ रैली बताते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष SIR के विरोध के जरिए अपात्र मतदाताओं को बचाना चाहता है। यह भाजपा का राजनीतिक आरोप है। EVM पर भी कांग्रेस से पूछा सवाल अमित शाह ने EVM पर कांग्रेस की आपत्तियों को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने सवाल किया कि अगर EVM में गड़बड़ी है तो कांग्रेस या उसके सहयोगी दल तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में चुनाव कैसे जीतते हैं। शाह ने आरोप लगाया कि विपक्ष चुनाव हारने पर EVM पर सवाल उठाता है लेकिन जीतने पर इन्हीं नतीजों को स्वीकार कर लेता है। राहुल गांधी ने भी PM मोदी को दी बहस की चुनौती राजनीतिक टकराव यहीं नहीं रुका। 2 नवंबर की रात राहुल गांधी ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली बहस की चुनौती दी। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर विदेशी समर्थन से जुड़े आरोप लगाए और कहा कि वह किसी भी समय और किसी भी मंच पर बहस के लिए तैयार हैं। चुनाव आयोग भी विपक्ष के निशाने पर SIR विवाद के बीच कांग्रेस और INDIA गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। चुनाव आयोग इन आरोपों से लगातार इनकार करता रहा है और कहता है कि प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत की जा रही है। क्या सच में बुलाया जाएगा विशेष सत्र? अमित शाह ने विशेष सत्र बुलाने की तत्परता जताई है, लेकिन फिलहाल संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की कोई औपचारिक अधिसूचना जारी होने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे सरकार की राजनीतिक पेशकश या चुनौती के रूप में देखना चाहिए, न कि तय हो चुके संसद सत्र के रूप में। आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है सियासत SIR और EVM का मुद्दा आने वाले चुनावों से पहले भाजपा और कांग्रेस के बीच प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल हो गया है। एक ओर विपक्ष मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ रहा है, वहीं भाजपा इसे मतदाता सूची की शुद्धता और अवैध प्रविष्टियां हटाने की प्रक्रिया बता रही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि क्या वास्तव में संसद का विशेष सत्र बुलाया जाता है और राहुल गांधी इस बहस की चुनौती को किस तरह आगे बढ़ाते हैं। स्रोत – इकोनॉमिक टाइम्स, इंडियन एक्सप्रेस, हिंदुस्तान टाइम्स, इंडिया टुडे जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

चक्रवात ‘मुरासु’ ने आंध्र तट पर किया लैंडफॉल, 100–110 किमी/घंटा की रफ्तार से चली हवाएं; हजारों लोग सुरक्षित स्थानों पर भेजे गए

अमरावती/ओंगोल: बंगाल की खाड़ी में बना गंभीर चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ मंगलवार, 3 नवंबर 2026 की सुबह आंध्र प्रदेश के तट से टकरा गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार चक्रवात ने दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट को ओंगोल के पास पार किया। लैंडफॉल के दौरान हवाओं की लगातार रफ्तार करीब 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा रही, जबकि झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचे। तड़के 3:30 से 5:30 बजे के बीच हुआ लैंडफॉल रॉयटर्स के मुताबिक मुरासु का लैंडफॉल मंगलवार तड़के करीब 3:30 बजे से 5:30 बजे के बीच हुआ। चक्रवात के तट से टकराने के साथ ही आंध्र प्रदेश के कई तटीय जिलों में भारी बारिश, तेज हवाएं और समुद्र में ऊंची लहरें देखने को मिलीं। ओंगोल के पास तट से टकराया चक्रवात IMD ने पहले ही अनुमान लगाया था कि मुरासु नेल्लोर और नरसापुर के बीच, ओंगोल के आसपास आंध्र तट को पार करेगा। 2 नवंबर की शाम तक तूफान ओंगोल से करीब 110 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में था और तेजी से उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ रहा था। 100–110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाएं लैंडफॉल के दौरान चक्रवात की अधिकतम लगातार हवा की गति 100–110 किमी प्रति घंटा दर्ज की गई। कुछ स्थानों पर तेज झोंकों की रफ्तार 120 किमी प्रति घंटा तक पहुंची। इतनी तेज हवाओं के कारण कई जगह पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ने की खबरें सामने आई हैं। करीब 30 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की तैयारी चक्रवात के खतरे को देखते हुए आंध्र प्रदेश प्रशासन ने सोमवार से ही निचले और तटीय इलाकों से लोगों को निकालना शुरू कर दिया था। राज्य में करीब 30,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की योजना बनाई गई थी। हजारों लोगों को राहत शिविरों और सुरक्षित भवनों में स्थानांतरित किया गया। स्कूल बंद, ट्रेन और उड़ान सेवाएं प्रभावित मुरासु के कारण प्रभावित क्षेत्रों में स्कूलों को बंद किया गया और कई रेल सेवाओं को निलंबित या परिवर्तित किया गया। कुछ उड़ानों पर भी असर पड़ा। प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और तटीय इलाकों से दूर रहने की अपील की। निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा IMD और स्थानीय प्रशासन ने तटीय और निचले इलाकों में जलभराव तथा अचानक बाढ़ की आशंका जताई है। चक्रवात के साथ लगातार भारी बारिश होने के कारण सड़क और रेल संपर्क प्रभावित होने की संभावना बनी हुई है। समुद्र में 1.5 मीटर तक ऊंची लहरों की चेतावनी एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार कुछ तटीय हिस्सों में चक्रवाती तूफान के कारण समुद्र का स्तर सामान्य से करीब 1.5 मीटर तक ऊपर उठने का खतरा जताया गया था। इससे निचले तटीय क्षेत्रों में समुद्री पानी घुसने और बाढ़ का जोखिम बढ़ सकता है। पेड़ और बिजली के खंभे उखड़े तेज हवाओं की वजह से आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में पेड़ और बिजली के खंभे गिरने की जानकारी सामने आई है। राज्य आपदा प्रबंधन टीमें सड़कों को साफ करने और बिजली आपूर्ति बहाल करने में जुटी हैं। फिलहाल मौत या घायल होने की पुष्टि नहीं चक्रवात के लैंडफॉल के बाद शुरुआती आधिकारिक जानकारी में किसी मौत या घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि प्रभावित क्षेत्रों से नुकसान का पूरा आकलन अभी जारी है और स्थिति बदलने पर प्रशासन नए आंकड़े जारी कर सकता है। तमिलनाडु में भी भारी बारिश मुरासु का असर केवल आंध्र प्रदेश तक सीमित नहीं रहा। पड़ोसी तमिलनाडु के उत्तरी हिस्सों में भी भारी बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिला। IMD ने पहले ही आंध्र प्रदेश और उससे सटे उत्तरी तमिलनाडु के तट के लिए चक्रवात चेतावनी जारी की थी। एक सप्ताह में दूसरा बड़ा चक्रवात मुरासु आंध्र प्रदेश के तट पर एक सप्ताह के भीतर आने वाला दूसरा चक्रवाती तूफान है। इससे पहले चक्रवात ‘अरनब’ ने पिछले सप्ताह राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश और नुकसान पहुंचाया था। उस तूफान के कारण लोगों की मौत, मकानों और फसलों को नुकसान तथा बड़े पैमाने पर जलभराव की स्थिति बनी थी। कमजोर पड़ने की संभावना तट पार करने के बाद मुरासु के धीरे-धीरे कमजोर पड़ने की संभावना है। हालांकि इसके अवशेषों के कारण आंध्र प्रदेश और आसपास के राज्यों में अगले कई घंटों तक भारी बारिश जारी रह सकती है। प्रशासन हाई अलर्ट पर राज्य सरकार ने तटीय जिलों में आपदा प्रबंधन, पुलिस, स्वास्थ्य और बिजली विभाग की टीमों को हाई अलर्ट पर रखा है। लोगों से प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने, समुद्र के पास न जाने और बारिश के दौरान निचले इलाकों से दूरी बनाए रखने की अपील की गई है। स्रोत – भारत मौसम विज्ञान विभाग, रॉयटर्स, एसोसिएटेड प्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें
Translate »