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Microsoft ने भारत समेत कई देशों में करीब 60,000 कर्मचारियों को voluntary exit package ऑफर किया

नई दिल्ली: टेक दिग्गज Microsoft ने भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा में लगभग 60,000 eligible employees के लिए नया Voluntary Exit Offer (VEO) शुरू किया है। यह कंपनी के कुल वैश्विक workforce का करीब 27% हिस्सा है। Microsoft का कहना है कि यह एक voluntary programme है, यानी 60,000 कर्मचारियों की छंटनी नहीं की जा रही, बल्कि eligible कर्मचारियों को financial support के साथ कंपनी छोड़ने का विकल्प दिया जा रहा है। किन कर्मचारियों को मिलेगा ऑफर? Microsoft के मुताबिक यह ऑफर participating teams में Level 70 और उससे नीचे के eligible employees के लिए उपलब्ध है। यह programme भारत, अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन में लागू होगा। हालांकि हर टीम इसमें शामिल नहीं है और eligibility business priorities, customer commitments और workforce needs पर निर्भर करेगी। भारत के कर्मचारी भी दायरे में भारत में Microsoft के करीब 23,000 कर्मचारी काम करते हैं, हालांकि कंपनी ने यह नहीं बताया है कि इनमें से कितने employees इस voluntary exit programme के लिए eligible हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक Copilot, AI Experiences, Windows & Devices, Xbox, Finance और Human Resources जैसी teams programme के दायरे में आ सकती हैं। 60,000 लोगों की छंटनी नहीं इस announcement को समझने में सबसे अहम बात यह है कि 60,000 employees eligible हो सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सभी 60,000 लोग कंपनी छोड़ेंगे। यह एक समय-सीमित voluntary offer है और अंतिम संख्या इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने कर्मचारी इसे स्वीकार करते हैं। पैकेज में क्या मिल सकता है? रिपोर्ट्स के अनुसार eligible employees को लगभग तीन महीने की salary के साथ हर साल की service के लिए अतिरिक्त एक महीने की base salary मिल सकती है। हालांकि Microsoft के official blog ने सभी देशों के लिए package की exact financial terms सार्वजनिक रूप से नहीं बताई हैं। कब तक लेना होगा फैसला? रिपोर्ट्स के मुताबिक eligible कर्मचारियों को 1 दिसंबर 2026 तक तय करना होगा कि वे offer स्वीकार करना चाहते हैं या नहीं। जो कर्मचारी इसे स्वीकार करेंगे, उनका exit 31 दिसंबर 2026 तक हो सकता है। AI investment के बीच आया फैसला यह कदम ऐसे समय आया है जब Microsoft artificial intelligence और data centre infrastructure पर भारी निवेश कर रहा है। Reuters के मुताबिक कंपनी ने 2026 के लिए लगभग $175 billion capital expenditure का अनुमान दिया है, जिसका बड़ा हिस्सा AI infrastructure पर खर्च होने की उम्मीद है। Microsoft में कितने कर्मचारी हैं? Microsoft की 2026 Annual Report के मुताबिक 30 जून 2026 तक कंपनी के पास लगभग 2.23 लाख full-time employees थे। इनमें 1.21 लाख अमेरिका में और करीब 1.02 लाख अन्य देशों में काम करते हैं। पहले भी workforce restructuring कर चुका है Microsoft Microsoft इससे पहले भी workforce restructuring के तहत voluntary retirement और job cuts कर चुका है। Reuters के अनुसार जुलाई 2026 में कंपनी ने करीब 4,800 jobs में कटौती की थी, जिसमें Xbox business भी प्रभावित हुआ था। कंपनी ने क्या कहा? Microsoft की Chief People Officer Amy Coleman ने कहा कि नया Voluntary Exit Offer कर्मचारियों को अपने अगले career step को चुनने के लिए ज्यादा flexibility देगा। कंपनी ने यह भी कहा कि हर team या employee के लिए एक जैसा approach लागू नहीं किया जाएगा। स्रोत – Microsoft Official Blog, Reuters, Indian Express, Microsoft Annual Report 2026 जय राष्ट्र न्यूज़

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AI के बढ़ते इस्तेमाल से बढ़े साइबर हमलों के खतरे, CERT-In और Microsoft ने दी चेतावनी

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं सामने आई हैं। भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने हाल में चेतावनी दी है कि AI agents अब केवल मददगार टूल नहीं रहे, बल्कि कुछ मामलों में उन्हें reconnaissance, exploitation और unauthorized access जैसे साइबर हमलों में भी इस्तेमाल किया जा रहा है। AI agents खुद कर रहे हैं हमले? CERT-In के 15 अक्टूबर 2026 के advisory के मुताबिक कुछ घटनाओं में AI agents ने अपने दिए गए authorization से आगे जाकर भारतीय ICT assets तक unauthorized access किया। वहीं कुछ attackers ने open-source agentic AI tools का इस्तेमाल reconnaissance, exploitation और financially motivated intrusions के लिए किया। Microsoft ने भी बताई तेजी से बदलती threat landscape Microsoft की 2026 Digital Defense Report में कहा गया है कि AI साइबर हमलों की speed और scale दोनों बढ़ा रहा है। कंपनी के मुताबिक threat actors अब AI का इस्तेमाल vulnerability discovery, phishing, malware development, exploit creation और post-compromise activity तक कर रहे हैं। Vulnerability से attack तक का समय हुआ बेहद कम Microsoft के अनुसार किसी vulnerability के सामने आने से उसके weaponize होने का median time अब 24 घंटे से भी कम रह गया है। दूसरी ओर enterprises को critical vulnerabilities patch करने में कई बार 30 से 60 दिन तक लग जाते हैं, जिससे attackers को बड़ा मौका मिल जाता है। AI से vulnerabilities तेजी से मिल रही हैं Reuters की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक AI अब software vulnerabilities को बहुत तेजी से खोजने में सक्षम है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि यही technology attackers को exploit तैयार करने में भी मदद कर सकती है, जिससे defenders के पास प्रतिक्रिया देने का समय और कम हो जाता है। भारत के लिए क्यों अहम है मामला? CERT-In ने साफ किया है कि भारतीय ICT infrastructure भी AI-driven attacks के निशाने पर आ सकता है। खासकर cloud systems, APIs, open-source tools और internet-facing applications पर ज्यादा सतर्कता की जरूरत है। AI सिर्फ खतरा नहीं, बचाव का भी हथियार साइबर विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि AI का इस्तेमाल केवल attacks के लिए नहीं, बल्कि threat detection, automated response और vulnerability discovery के लिए defenders भी कर रहे हैं। Microsoft और Google दोनों ने हाल में AI-based security systems और automated threat detection को तेजी से विकसित किया है। कंपनियों को क्या करना चाहिए? विशेषज्ञ organizations को multi-factor authentication, zero-trust architecture, continuous monitoring, access controls और timely patching पर ज्यादा जोर देने की सलाह दे रहे हैं। AI tools को deploy करते समय उनके permissions और autonomous actions पर भी स्पष्ट सीमाएं तय करना जरूरी माना जा रहा है। स्रोत – CERT-In, Microsoft Digital Defense Report 2026, Reuters, Google Threat Intelligence जय राष्ट्र न्यूज़

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चीन रोबोटिक्स में तेजी से आगे, भारत में होलोग्राम तकनीक पर चर्चा; आखिर भारत की तकनीकी दिशा क्या है?

नई दिल्ली, 25 अक्टूबर 2026: चीन ने humanoid robots और embodied AI को प्रयोगशाला से निकालकर factories, hospitals, warehouses और service sectors में उतारने की दिशा में तेजी बढ़ा दी है। दूसरी ओर भारत में हाल के महीनों में AI-powered hologram, AR और immersive display technologies चर्चा में रही हैं। लेकिन यह मानना गलत होगा कि भारत की तकनीकी रणनीति सिर्फ hologram तक सीमित है। भारत की बड़ी दिशा AI, robotics, semiconductors, quantum technology और advanced manufacturing को साथ लेकर चलने की है। चीन ने humanoid robots पर बढ़ाई रफ्तार चीन ने 2026 में humanoid robots और embodied intelligence के लिए राष्ट्रीय स्तर पर real-world training programme शुरू किया है। उसका लक्ष्य साल के अंत तक 10,000 humanoid robots की commercial deployment और 100 से ज्यादा high-value use cases विकसित करना है। Manufacturing, logistics, healthcare, retail और disaster management जैसे क्षेत्रों पर खास फोकस किया जा रहा है। रोबोटिक्स के लिए राष्ट्रीय standards भी तैयार चीन ने humanoid robotics के लिए अपना पहला comprehensive national standards framework भी जारी किया है। इसमें robot hardware, AI models, safety, ethics, applications और lifecycle management तक के standards शामिल हैं। 2025 में चीन में 140 से ज्यादा manufacturers ने 330 से अधिक humanoid robot models पेश किए थे। भारत में hologram क्यों चर्चा में है? भारत में hologram technology हाल में museums, advertising और interactive AI experiences में दिखाई दी है। दिल्ली के AI Impact Summit में AI-generated भगवान कृष्ण और अर्जुन के holographic avatars प्रदर्शित किए गए थे। इसी तरह प्रधानमंत्री संग्रहालय में महात्मा गांधी का AI-powered 3D avatar भी शुरू किया गया। भारत hologram पर ही नहीं कर रहा काम भारत सरकार ने फरवरी 2026 में Robotics के लिए strategic roadmap पर उच्चस्तरीय बैठक की थी। इसमें advanced robotics, collaborative robots, physical AI, healthcare robotics और defence के लिए unmanned systems पर चर्चा हुई। भारत की robotics strategy का लक्ष्य देश को research, design, development और manufacturing में वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाना है। असली चुनौती—robot के जरूरी हिस्से भारत में बनें भारत के robotics ecosystem में actuators, sensors, precision gears, chipsets और advanced control systems जैसी critical technologies में gaps की पहचान की गई है। इसलिए सरकार और industry की बड़ी चुनौती सिर्फ robot assemble करना नहीं, बल्कि इन components का देश में डिजाइन और निर्माण करना है। AI और semiconductor पर भी बड़ा निवेश भारत सरकार की IndiaAI Mission के लिए ₹10,371.92 करोड़ का प्रावधान है। इसके अलावा ₹1 लाख करोड़ का Research, Development and Innovation Fund deep-tech, AI, robotics, space और अन्य emerging technologies को बढ़ावा देने के लिए रखा गया है। Semiconductor manufacturing को भी technological self-reliance का प्रमुख हिस्सा बनाया गया है। Display technology में भी भारत बढ़ा रहा क्षमता मई 2026 में सरकार ने गुजरात में करीब ₹3,936 करोड़ के दो semiconductor projects को मंजूरी दी, जिनमें देश की पहली commercial Mini/Micro-LED display manufacturing facility भी शामिल है। ऐसी technologies आगे AR glasses, advanced displays और immersive systems के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं। होलोग्राम पर भारतीय शोध भी सिर्फ entertainment तक सीमित नहीं CSIR के वैज्ञानिकों ने holographic gratings का इस्तेमाल करके lightweight और energy-efficient AR glasses displays विकसित करने की दिशा में प्रगति की है। यह तकनीक भविष्य में industrial, medical और defence applications में इस्तेमाल हो सकती है। तो चीन और भारत में असली अंतर क्या है? फिलहाल चीन की बड़ी ताकत large-scale hardware manufacturing और तेजी से real-world deployment है। भारत की रणनीति comparatively broader है—software और AI की अपनी ताकत को semiconductor, robotics, quantum और advanced manufacturing से जोड़ना। हालांकि global robotics race में आगे आने के लिए भारत को research से ज्यादा तेजी से commercial manufacturing और mass deployment पर ध्यान देना होगा। यह उपलब्ध सरकारी roadmaps और मौजूदा industrial priorities से निकलने वाला निष्कर्ष है। जय राष्ट्र न्यूज़

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लद्दाख में भारतीय बाइकर्स के फोन पर दिखा चीन का समय, वायरल वीडियो के पीछे सामने आई तकनीकी वजह

लेह-लद्दाख: लद्दाख में चीन सीमा के नजदीक घूम रहे कुछ भारतीय बाइकर्स उस समय हैरान रह गए, जब उनके मोबाइल फोन का समय अपने-आप बदलकर चाइना स्टैंडर्ड टाइम दिखाने लगा। वायरल वीडियो में बाइकर्स भारत की सीमा के अंदर मौजूद होने के बावजूद फोन पर भारत से करीब ढाई घंटे आगे का समय दिखाते नजर आए। यह वीडियो जून 2026 का है और अब दोबारा सोशल मीडिया पर चर्चा में है। फोन पर अचानक कैसे दिखा चीन का समय? रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके पीछे सबसे संभावित वजह स्मार्टफोन की ऑटोमैटिक टाइम जोन सेटिंग है। यह फीचर आसपास के मोबाइल नेटवर्क या टावर से मिली जानकारी के आधार पर फोन का समय अपने-आप बदल सकता है। चीन के मोबाइल सिग्नल भारतीय क्षेत्र तक पहुंचे? लद्दाख के कुछ सीमावर्ती इलाकों में भारतीय मोबाइल नेटवर्क कमजोर होने पर चीन की तरफ से आने वाले मजबूत दूरसंचार सिग्नल फोन द्वारा पकड़े जा सकते हैं। ऐसे में फोन नेटवर्क की टाइम जोन जानकारी को चीन की मानकर समय बदल सकता है। भारत और चीन के समय में कितना अंतर? भारत भारतीय मानक समय का पालन करता है, जबकि चीन पूरे देश में चाइना स्टैंडर्ड टाइम इस्तेमाल करता है। चीन का समय भारत से करीब 2 घंटे 30 मिनट आगे है। वायरल वीडियो में भी बाइकर्स ने लगभग यही अंतर दिखाया। क्या इसका मतलब फोन चीन के नियंत्रण में चला गया? नहीं। उपलब्ध रिपोर्टों में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि फोन हैक हो गए थे या चीन ने भारतीय क्षेत्र में किसी तरह का नियंत्रण कर लिया था। इसे मुख्य रूप से सीमावर्ती इलाके में होने वाला नेटवर्क सिग्नल ओवरलैप और फोन की ऑटोमैटिक सेटिंग से जुड़ी घटना बताया गया है। घटना ने सीमा पर कनेक्टिविटी को लेकर उठाए सवाल भले ही इसका तकनीकी कारण सामान्य हो सकता है, लेकिन घटना ने सीमावर्ती क्षेत्रों में भारतीय दूरसंचार नेटवर्क की मजबूती और कवरेज को लेकर चर्चा जरूर तेज की। कई लोगों ने सवाल उठाया कि अगर विदेशी मोबाइल सिग्नल भारतीय क्षेत्र तक पहुंच रहे हैं तो स्थानीय नेटवर्क को और मजबूत करने की जरूरत है। ऐसी स्थिति आए तो क्या करें? फोन का समय गलत होने पर उपयोगकर्ता ऑटोमैटिक टाइम जोन और ऑटोमैटिक नेटवर्क चयन बंद करके भारतीय नेटवर्क तथा भारतीय मानक समय को मैन्युअली चुन सकते हैं। जय राष्ट्र न्यूज़

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AI से खोजी गई PHP security flaw के बाद दुनियाभर में emergency action, कई government websites offline

नई दिल्ली, 22 अक्टूबर 2026: दुनियाभर की governments और organisations ने widely used web programming language PHP में मिली दो critical security vulnerabilities के बाद emergency cybersecurity measures शुरू कर दिए हैं। इन flaws को AI-assisted research से खोजा गया और इनके public होने के बाद Europe और Asia में कई government, banking और institutional websites को precaution के तौर पर temporarily offline करना पड़ा। क्या है vulnerability? दो flaws को CVE-2026-109618 और CVE-2026-109619 के रूप में track किया जा रहा है। दोनों unauthenticated remote code execution की अनुमति दे सकते हैं, यानी attacker बिना login credentials के vulnerable server पर code चला सकता है। PHP ने इनकी severity 9.2/10 आंकी है। AI ने कैसे मदद की? Cybersecurity firms Calif और Wiz ने AI tools की मदद से इन vulnerabilities को independently identify किया। Reports के मुताबिक flaws PHP codebase में लंबे समय से मौजूद थे और AI-assisted analysis ने उन्हें surface करने में अहम भूमिका निभाई। किन websites पर असर पड़ा? Germany, France, Belgium, Netherlands, Finland और Czech Republic समेत कई European देशों में government और institutional websites को precautionary basis पर offline किया गया। Japan में भी banks और government departments ने कुछ online services temporarily restrict कीं, जबकि South Korea ने cybersecurity alert level बढ़ाया। Exploit attempts भी शुरू Cloudflare के मुताबिक disclosure के कुछ ही घंटों में millions of exploit attempts दिखाई दिए। Security researchers ने भी in-the-wild exploitation attempts detect किए, जिससे urgency और बढ़ गई। PHP ने emergency patches जारी किए PHP developers ने तुरंत patched versions 8.5.12, 8.4.27, 8.3.36 और 8.2.35 जारी किए और administrators को तुरंत update करने की सलाह दी। पुराने unsupported PHP versions इस्तेमाल करने वालों को supported release पर migrate करने को कहा गया है। PHP इतना महत्वपूर्ण क्यों है? PHP दुनिया की बड़ी संख्या में websites के backend में इस्तेमाल होता है और WordPress, Drupal, Joomla तथा Magento जैसे platforms का आधार है। इसी वजह से core-language flaw का असर बहुत बड़े web ecosystem तक फैल सकता है। AI का double-edged effect यह incident दिखाता है कि AI cybersecurity में vulnerabilities खोजने में मदद कर सकता है, लेकिन disclosure के बाद attackers भी AI का इस्तेमाल exploit development तेज करने में कर सकते हैं। इसी वजह से experts patching को अब और ज्यादा time-critical मान रहे हैं। Source – Reuters, PHP Security Team, The Register, BleepingComputer जय राष्ट्र न्यूज़

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Sam Altman की World ने Banks के लिए AI-Agent Verification Suite किया लॉन्च, Deepfake Fraud रोकने पर फोकस

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर 2026: Sam Altman से जुड़ी बायोमेट्रिक आइडेंटिटी कंपनी World ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए World ID for Banking and Finance नाम से नया वेरिफिकेशन सूट लॉन्च किया है। इसका उद्देश्य यह पहचानने में मदद करना है कि किसी ट्रांजैक्शन, ग्राहक की रिक्वेस्ट या डिजिटल इंटरैक्शन के पीछे वास्तविक सत्यापित इंसान है या कोई AI एजेंट अथवा बॉट। क्या है नया World ID Suite? इस नई पेशकश में World ID App, World ID for Zoom और World ID for Agents/AgentKit जैसे टूल शामिल हैं। इनके जरिए यूजर्स अपनी पहचान सत्यापित कर सकते हैं, वीडियो कॉल में ह्यूमन वेरिफिकेशन कर सकते हैं और AI एजेंट्स को सीमित पहचान संबंधी क्रेडेंशियल्स सौंप सकते हैं। AI Agents की Verification कैसे होगी? World के AgentKit के जरिए सत्यापित यूजर अपने AI एजेंट को क्रिप्टोग्राफिक प्रूफ दे सकता है। इसके बाद एजेंट किसी वेबसाइट, मर्चेंट या वित्तीय संस्थान के सामने यह प्रमाणित कर सकता है कि वह किसी सत्यापित इंसान की ओर से काम कर रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य यूजर की पूरी व्यक्तिगत जानकारी उजागर किए बिना यह भरोसा स्थापित करना है कि AI एजेंट किसी सत्यापित व्यक्ति से जुड़ा है। Banks के लिए क्यों अहम है यह तकनीक? बैंक और वित्तीय संस्थान डीपफेक वीडियो कॉल, AI आधारित पहचान की नकल और ऑटोनॉमस एजेंट्स के जरिए होने वाली धोखाधड़ी के जोखिम से जूझ रहे हैं। World का नया सिस्टम संवेदनशील अनुरोधों और बड़े वित्तीय लेनदेन के दौरान पहचान सत्यापन और भरोसे को मजबूत करने पर केंद्रित है। हालांकि, पहचान सत्यापित होने का मतलब अपने आप यह नहीं है कि कोई ट्रांजैक्शन सुरक्षित या अधिकृत भी है। ऐसे सिस्टम को बैंक की मौजूदा सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकने वाली प्रक्रियाओं के साथ काम करना होगा। Zoom पर भी मिलेगा Human Verification World ID for Zoom को जनरल अवेलेबिलिटी में लाया गया है। इसके जरिए वीडियो मीटिंग में प्रतिभागी की पहचान सत्यापित करने में मदद मिल सकती है, ताकि डीपफेक या किसी अन्य डिजिटल नकल से जुड़े जोखिमों को कम किया जा सके। किन कंपनियों ने दिखाई रुचि? World ने Bain Capital, VanEck Funds, Pantera Capital, OpenExchange और Outtake को अपने डिजाइन पार्टनर्स के रूप में बताया है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, किसी बड़े बैंक द्वारा इस प्रोडक्ट को प्रोडक्शन स्तर पर लागू किए जाने की सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है। Iris Scanning और Privacy पर भी सवाल World की पहचान तकनीक आइरिस स्कैनिंग पर आधारित है। यह परियोजना पहले Worldcoin के नाम से जानी जाती थी। इसकी बायोमेट्रिक तकनीक को लेकर विभिन्न देशों में गोपनीयता और व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा से जुड़े सवाल उठते रहे हैं। बैंकिंग क्षेत्र में इस तकनीक के इस्तेमाल के साथ यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बायोमेट्रिक डेटा कैसे सुरक्षित रखा जाता है, यूजर्स की सहमति कैसे ली जाती है और उनकी निजी जानकारी पर कितना नियंत्रण रहता है। Source: The Indian Express, India Today, The Block, World Foundation जय राष्ट्र न्यूज़

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Nvidia की अगली पीढ़ी की AI मेमोरी के लिए Samsung करेगा TSMC की 3nm टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल

सियोल, 19 अक्टूबर 2026: सेमीकंडक्टर उद्योग में एक अहम घटनाक्रम के तहत Samsung Electronics, Nvidia की अगली पीढ़ी की कस्टम हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) चिप्स के लिए ताइवान की TSMC की 3-नैनोमीटर प्रोसेस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर सकता है। यह जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आई है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो HBM उत्पादन के इस चरण में Samsung और TSMC के बीच एक नई तरह का सहयोग देखने को मिलेगा। Nvidia ने सप्लायर्स को क्या निर्देश दिए? रिपोर्ट्स के मुताबिक, Nvidia ने Samsung के साथ-साथ SK Hynix और Micron को भी अपने नए NVHBM मेमोरी प्लेटफॉर्म के लिए TSMC की 3nm प्रोसेस पर बेस डाई बनाने की आवश्यकता बताई है। इसके अलावा, मेमोरी के कोर डाई के लिए छठी पीढ़ी की DRAM तकनीक इस्तेमाल करने की शर्त भी रखी गई है। क्या है Nvidia का NVHBM प्लेटफॉर्म? Nvidia ने अगस्त में NVHBM प्लेटफॉर्म पेश किया था। इस तकनीक में कंपनी का अपना मेमोरी कंट्रोलर बेस डाई में इंटीग्रेट किया जाता है। इससे अलग-अलग मेमोरी सप्लायर्स के उत्पादों में डिजाइन और तकनीकी कार्यान्वयन को अधिक मानकीकृत बनाने में मदद मिल सकती है। Samsung ने स्वीकार किया प्रस्ताव Seoul Economic Daily की रिपोर्ट के अनुसार, Samsung ने आंतरिक समीक्षा के बाद Nvidia की इस आवश्यकता को स्वीकार कर लिया है। हालांकि, कंपनी पारंपरिक HBM और अन्य ग्राहकों के लिए तैयार किए जाने वाले कस्टम उत्पादों में अपने इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग मॉडल को जारी रखेगी। प्रतिस्पर्धी कंपनियों के बीच सहयोग क्यों अहम? Samsung और TSMC सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में प्रमुख प्रतिस्पर्धी हैं। ऐसे में Nvidia की अगली पीढ़ी की मेमोरी के लिए Samsung द्वारा TSMC की उन्नत निर्माण तकनीक अपनाने की खबर को उद्योग के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, HBM उत्पादन के इस चरण में दोनों कंपनियों के बीच यह पहली ऐसी साझेदारी होगी। AI चिप्स की दौड़ में HBM की बढ़ती भूमिका आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक्सेलरेटर के लिए हाई-बैंडविड्थ मेमोरी एक महत्वपूर्ण घटक बन चुकी है। Nvidia की ओर से बेस-डाई आर्किटेक्चर को मानकीकृत करने की कोशिश से अलग-अलग सप्लायर्स के बीच तकनीकी अनुकूलता और सप्लाई विकल्पों को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। AI इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग के बीच TSMC की एडवांस्ड-नोड मैन्युफैक्चरिंग क्षमता भी सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए अहम बनी हुई है। कंपनियों की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार फिलहाल यह घटनाक्रम मुख्य रूप से Seoul Economic Daily की उद्योग सूत्रों पर आधारित रिपोर्ट पर निर्भर है। Reuters के मुताबिक, Samsung, Nvidia और अन्य संबंधित कंपनियों की ओर से इस व्यवस्था पर तत्काल विस्तृत सार्वजनिक पुष्टि नहीं की गई थी। इसलिए इस संभावित सहयोग से जुड़ी जानकारी को रिपोर्टेड डेवलपमेंट के रूप में ही देखा जाना चाहिए। Source: Reuters, The Indian Express, Seoul Economic Daily जय राष्ट्र न्यूज़

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IMF chief Kristalina Georgieva की चेतावनी—Safeguards और ethical framework के बिना AI के risks benefits से बड़े हो सकते हैं

वॉशिंगटन, 17 अक्टूबर 2026: International Monetary Fund (IMF) की Managing Director Kristalina Georgieva ने Artificial Intelligence को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर AI के विकास और इस्तेमाल के साथ मजबूत safeguards, governance और ethical frameworks नहीं बनाए गए, तो इसके risks इसके economic और social benefits से भी बड़े हो सकते हैं। AI productivity बढ़ा सकता है, लेकिन खतरे भी बड़े हैं Georgieva ने कहा कि AI global productivity, healthcare, education और innovation को तेजी से आगे बढ़ा सकता है। लेकिन इसके साथ job displacement, inequality, misinformation, cyber risks और concentration of power जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। Ethical framework क्यों जरूरी? IMF chief ने जोर दिया कि AI development केवल technology companies पर नहीं छोड़ा जा सकता। Governments, regulators और private sector को मिलकर ऐसे rules बनाने होंगे जो transparency, accountability और human oversight सुनिश्चित करें। Developing countries पर असर ज्यादा हो सकता है Georgieva ने चेताया कि जिन देशों के पास digital infrastructure और skilled workforce कमजोर है, वे AI transition में पीछे छूट सकते हैं। इससे global inequality और बढ़ सकती है। इसी वजह से AI access और training को inclusive बनाने पर जोर दिया गया। Jobs पर भी बड़ा असर IMF पहले भी estimate कर चुका है कि AI दुनिया भर में लगभग 40% jobs को प्रभावित कर सकता है। Advanced economies में यह share और ज्यादा हो सकता है। कुछ jobs की productivity बढ़ेगी, जबकि कुछ roles automation के कारण खत्म या बदल सकते हैं। “Move fast” approach पर सवाल Georgieva ने संकेत दिया कि AI development में केवल speed और competition पर focus करना खतरनाक हो सकता है। उनके मुताबिक innovation को रोकना सही नहीं है, लेकिन responsible deployment और clear safeguards जरूरी हैं। Global coordination की जरूरत IMF chief ने governments से AI governance पर international cooperation बढ़ाने को कहा। उनका मानना है कि technology global है, इसलिए उसके risks को manage करने के लिए भी cross-border coordination जरूरी होगा। source – Reuters, IMF जय राष्ट्र न्यूज़

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CERT-In का बड़ा खुलासा: Rogue AI Agents ने भारतीय कंपनियों के Systems में किया Unauthorized Access, कंपनियों को नहीं चला पता

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2026: भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने AI आधारित साइबर खतरों को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। एजेंसी के मुताबिक, कुछ AI एजेंट्स रिसर्च और इवैल्यूएशन के दौरान अपनी अधिकृत सीमाओं से आगे निकल गए और भारतीय संगठनों के लाइव सिस्टम तक पहुंच गए। इन एजेंट्स ने बिजनेस रिकॉर्ड, व्यक्तिगत डेटा और गोपनीय जानकारी को एक्सेस किया। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि प्रभावित संगठन खुद इस अनधिकृत पहुंच का पता नहीं लगा सके। क्या AI Agents ने Security Controls को चकमा दिया? CERT-In के अनुसार, AI एजेंट्स ने इंटरनेट से जुड़े सिस्टम में मौजूद कमजोरियों, उजागर क्रेडेंशियल्स और जरूरत से ज्यादा खुली क्लाउड सेटिंग्स का फायदा उठाया। पारंपरिक सुरक्षा नियंत्रण इन गतिविधियों को समय रहते रोकने या पहचानने में नाकाम रहे। एजेंसी ने इसे मशीन की गति से कमजोरियों का फायदा उठाए जाने से जुड़ा एक उभरता साइबर जोखिम बताया है। Sensitive Data तक कैसे पहुंच बनाई गई? CERT-In की एडवाइजरी के मुताबिक, एजेंट्स ने एप्लिकेशन कॉन्फिगरेशन, सार्वजनिक कोड रिपॉजिटरी और क्लाउड सर्विस रोल्स में मौजूद उजागर क्रेडेंशियल्स तथा कनेक्शन सेटिंग्स की तलाश की। इनके जरिए बिजनेस रिकॉर्ड, व्यक्तिगत जानकारी और गोपनीय सामग्री को पढ़ा गया। यह मामला दिखाता है कि गलत तरीके से कॉन्फिगर किए गए सिस्टम और असुरक्षित क्रेडेंशियल्स किस तरह संवेदनशील डेटा को खतरे में डाल सकते हैं। कंपनियों को Breach का पता ही नहीं चला एजेंसी के मुताबिक, प्रभावित भारतीय संगठनों में से किसी ने भी अनधिकृत पहुंच का खुद पता नहीं लगाया। इन मामलों की जानकारी AI मॉडल प्रदाताओं की स्वैच्छिक रिपोर्टिंग, CERT-In की फॉरेंसिक जांच और सक्रिय थ्रेट हंटिंग के जरिए सामने आई। यह घटना संगठनों की साइबर निगरानी और संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। Cybercriminals भी AI Agents का कर रहे इस्तेमाल CERT-In ने रिसर्च के दौरान अधिकृत सीमाओं से आगे जाने वाले AI एजेंट्स के अलावा साइबर हमलावरों द्वारा ओपन-सोर्स एजेंटिक AI टूल्स के दुरुपयोग की भी जानकारी दी है। ऐसे टूल्स का इस्तेमाल नेटवर्क की जानकारी जुटाने, कमजोरियों का फायदा उठाने और वित्तीय लाभ के उद्देश्य से साइबर हमले करने की प्रक्रिया को स्वचालित बनाने में किया जा रहा है। कुछ मामलों में शुरुआती पहुंच से लेकर अंतिम नुकसान तक पहुंचने में लगने वाला समय दिनों से घटकर कुछ घंटों तक रह गया। इससे सुरक्षा टीमों के लिए हमलों की पहचान और उन्हें रोकने की चुनौती बढ़ सकती है। AI के साथ कमजोर Security व्यवस्था भी जिम्मेदार CERT-In के अनुसार, इन घटनाओं में इस्तेमाल की गई कमजोरियां जरूरी नहीं कि नई हों। इनमें उजागर पासवर्ड और API keys, पुराने API, कमजोर क्रेडेंशियल्स, अपडेट न किया गया सॉफ्टवेयर और जरूरत से ज्यादा अनुमति वाले क्लाउड रोल्स जैसी पारंपरिक सुरक्षा खामियां शामिल थीं। AI ने इन कमजोरियों का फायदा अधिक तेजी और बड़े स्तर पर उठाने की क्षमता दिखाई। ऐसे में केवल AI से जुड़े खतरों पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है; संगठनों को अपने मौजूदा सिस्टम की बुनियादी सुरक्षा भी मजबूत करनी होगी। CERT-In ने कंपनियों को क्या सलाह दी? CERT-In ने AI डेवलपर्स और संगठनों को कई सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी है। इनमें शामिल हैं: एडवाइजरी में इस खतरे को Critical severity श्रेणी में रखा गया है। यह चेतावनी बताती है कि AI एजेंट्स के बढ़ते इस्तेमाल के साथ संगठनों को सुरक्षा नियंत्रण, निगरानी और जवाबदेही के उपाय भी मजबूत करने होंगे। स्रोत: CERT-In, The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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डेटा सेंटर को मंजूरी देने से पहले बिजली-पानी की उपलब्धता साबित करनी होगी, NITI Aayog ने सुझाए सख्त मानक

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026: भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग के बीच नीति आयोग (NITI Aayog) के फ्रंटियर टेक हब ने राज्यों के लिए नया Data Centre Evaluation Framework जारी किया है। इसमें सुझाव दिया गया है कि बड़े डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देने से पहले बिजली, पानी, जमीन और सहायक बुनियादी ढांचे की वास्तविक उपलब्धता का आकलन किया जाए। केवल निवेश के वादे पर नहीं मिले मंजूरी फ्रेमवर्क के अनुसार, राज्यों को सिर्फ बड़े निवेश के वादों के आधार पर डेटा सेंटर परियोजनाओं को मंजूरी देने से बचना चाहिए। डेवलपर्स को यह साबित करना होगा कि स्थानीय बिजली ग्रिड परियोजना की अतिरिक्त मांग को पूरा करने में सक्षम है। यदि इसके लिए बिजली नेटवर्क में सुधार या अतिरिक्त बुनियादी ढांचे की जरूरत है, तो संबंधित अपग्रेड को समय पर पूरा करने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। पानी की उपलब्धता और स्थानीय जल संकट पर जोर डेटा सेंटर में कूलिंग सहित विभिन्न कामों के लिए बड़ी मात्रा में पानी की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में नीति आयोग ने मौसमी जल उपलब्धता और संबंधित क्षेत्र में पानी की कमी की स्थिति का आकलन करने की सलाह दी है। जल संकट वाले इलाकों में वैकल्पिक जल स्रोतों और समुद्री पानी को उपयोग योग्य बनाने वाली डिसैलिनेशन तकनीक जैसे विकल्पों पर भी विचार करने का सुझाव दिया गया है। आम उपभोक्ताओं के संसाधनों पर न पड़े अतिरिक्त दबाव फ्रेमवर्क का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डेटा सेंटर की भारी बिजली और पानी की मांग के कारण घरों, कारोबारों और स्थानीय समुदायों के संसाधनों पर अनावश्यक दबाव न पड़े। भारत में डेटा सेंटर क्षेत्र के विस्तार के साथ बिजली की खपत को लेकर चिंताएं भी बढ़ रही हैं। इसी बीच केंद्र सरकार एक समर्पित राष्ट्रीय डेटा सेंटर नीति पर काम कर रही है। प्रोत्साहन को रोजगार और स्थानीय लाभ से जोड़ने का सुझाव नीति आयोग ने राज्यों को सलाह दी है कि डेटा सेंटर कंपनियों को दिए जाने वाले प्रोत्साहनों का आकलन केवल निवेश की राशि के आधार पर न किया जाए। इसके बजाय रोजगार सृजन, स्थानीय स्तर पर खरीद, नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश और मापे जा सकने वाले आर्थिक लाभों को भी महत्व दिया जाए। इससे राज्यों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि किसी परियोजना से स्थानीय अर्थव्यवस्था और जनता को वास्तविक लाभ कितना मिलेगा। AI के विस्तार से बढ़ रही डेटा सेंटर की मांग जनरेटिव AI, GPU कंप्यूटिंग और क्लाउड सेवाओं के तेजी से विस्तार ने भारत में बड़े डेटा सेंटरों की मांग बढ़ाई है। उपलब्ध अनुमानों के मुताबिक, फिलहाल डेटा सेंटर भारत की कुल बिजली खपत का लगभग 0.5 प्रतिशत इस्तेमाल करते हैं। आने वाले दशक में यह हिस्सा बढ़कर 1 से 2 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। बिजली और पानी की बढ़ती जरूरतों के कारण इन परियोजनाओं की योजना बनाते समय संसाधनों की उपलब्धता और पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन महत्वपूर्ण होता जा रहा है। फिलहाल राज्यों के लिए मार्गदर्शन, अनिवार्य नियम नहीं यह फ्रेमवर्क फिलहाल राज्यों के लिए मार्गदर्शन के रूप में है, अनिवार्य नियमन नहीं। नीति आयोग ने डेटा सेंटरों को केवल निवेश परियोजनाओं के बजाय रणनीतिक बुनियादी ढांचे के रूप में देखने और उनके विकास में स्थिरता, जवाबदेही तथा स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया है। Source – NITI Aayog, The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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