प्रमुख खबरें

दिल्ली की हवा आज खराब स्तर पर, AQI 211 पहुंचा; sensitive लोगों को outdoor exposure कम रखने की सलाह

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की हवा मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को खराब स्तर पर पहुंच गई। ताजा उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली का Air Quality Index (AQI) 211 दर्ज किया गया, जो “Poor” श्रेणी में आता है। बच्चों, बुजुर्गों, अस्थमा और अन्य श्वसन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को लंबे समय तक बाहर रहने और strenuous outdoor activities से बचने की सलाह दी गई है। एक दिन में और बिगड़ी दिल्ली की हवा 26 अक्टूबर को नई दिल्ली का AQI करीब 184 दर्ज किया गया था, जबकि 27 अक्टूबर को यह बढ़कर 211 तक पहुंच गया। यानी एक दिन के भीतर प्रदूषण के स्तर में स्पष्ट बढ़ोतरी दर्ज हुई है। PM2.5 और PM10 बने चिंता का कारण दिल्ली की हवा में fine particulate matter यानी PM2.5 और PM10 प्रदूषण के प्रमुख कारकों में शामिल हैं। 26 अक्टूबर की शाम उपलब्ध आंकड़ों में PM2.5 करीब 80 µg/m³ और PM10 करीब 190 µg/m³ दर्ज किया गया था। ऐसे महीन कण लंबे समय तक सांस के जरिए शरीर में जाने पर स्वास्थ्य पर असर डाल सकते हैं। किन लोगों को सबसे ज्यादा सावधानी की जरूरत? बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और अस्थमा, COPD या अन्य respiratory conditions वाले लोगों को खराब AQI के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। 27 अक्टूबर के AQI update में बच्चों, active adults और respiratory ailments वाले लोगों को outdoor exertion से बचने को कहा गया है। बाहर निकलें तो मास्क पहनने की सलाह खराब हवा की स्थिति में लंबे समय तक outdoor activity कम रखने के साथ बाहर निकलते समय अच्छी फिटिंग वाला mask इस्तेमाल करना मददगार हो सकता है। खासकर busy roads, construction zones और ज्यादा traffic वाले इलाकों में exposure सीमित रखना बेहतर माना जाता है। साफ आसमान के बावजूद प्रदूषण बना समस्या दिल्ली में मंगलवार को आसमान साफ रहा और अधिकतम तापमान करीब 30°C दर्ज किया गया, लेकिन कम हवा की गति के कारण प्रदूषक वातावरण में जमा रह सकते हैं। उपलब्ध weather data में अधिकतम wind speed करीब 3.2 km/h दर्ज की गई। आने वाले दिनों में नजर AQI पर दिल्ली-NCR में अक्टूबर के आखिर से हवा की गुणवत्ता अक्सर मौसम, कम wind speed, स्थानीय emissions और आसपास के pollution sources के कारण प्रभावित होती है। ऐसे में आने वाले दिनों में AQI में और बदलाव हो सकता है और लोगों को official air-quality updates देखते रहने की सलाह दी जाती है। स्रोत – Hindustan Times Weather, Times of India AQI Data जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

J&K सरकार ने MBBS-BDS interns का stipend ₹12,300 से बढ़ाकर ₹25,000 किया, strike वापस

श्रीनगर, 22 अक्टूबर 2026: Jammu & Kashmir सरकार ने MBBS और BDS interns, including Foreign Medical Graduates (FMGs), का monthly stipend ₹12,300 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया है। नया stipend 1 अक्टूबर 2026 से retrospectively लागू होगा। Formal government order जारी होने के बाद All India Medical Students’ Association (AIMSA) ने ongoing strike वापस लेने की घोषणा की। कितना बढ़ा stipend? नई दर के तहत interns को हर महीने ₹12,700 ज्यादा मिलेंगे। Government Order No. 747-JK(HME) of 2026 Health and Medical Education Department ने जारी किया है। Strike क्यों हुई थी? J&K के करीब 1,600 medical interns लंबे समय से stipend enhancement का formal order मांग रहे थे। सरकार से assurances मिलने के बावजूद order जारी होने में देरी के बाद interns ने 20 अक्टूबर को indefinite strike दोबारा शुरू कर दी थी। Government order कब आया? Finance Department की approval 20 अक्टूबर को मिलने के बाद Health and Medical Education Department ने 21 अक्टूबर को formal order जारी किया। Revised stipend 1 अक्टूबर से effective माना जाएगा। AIMSA ने strike वापस ली Order जारी होने के बाद AIMSA ने आंदोलन समाप्त करने का फैसला किया। Intern representatives ने इसे collective efforts और लंबे समय से चली आ रही मांग की जीत बताया। किन interns को मिलेगा फायदा? यह hike J&K के Government Medical Colleges और Dental Colleges में काम कर रहे MBBS, BDS और FMG interns पर लागू होगी। इसमें Srinagar, Jammu, Baramulla, Handwara, Kupwara समेत UT के अन्य medical institutions शामिल हैं। सरकार के फैसले का असर Stipend लगभग दोगुना होने से medical interns को financial relief मिलेगा। लंबे समय से interns workload और relatively low stipend को लेकर नाराजगी जता रहे थे। Formal notification के साथ अब इस विवाद पर फिलहाल विराम लग गया है। Source – Daily Excelsior, Greater Kashmir, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

NMC की नई एडवाइजरी: डिजिटल मेडिकल रिकॉर्ड प्रमाणित करने से पहले डॉक्टरों को सभी संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा जरूरी

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026: नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर के जरिए मेडिकल रिकॉर्ड प्रमाणित करने वाले डॉक्टरों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। इसके तहत किसी मेडिकल रिपोर्ट, डिस्चार्ज समरी, पैथोलॉजी रिजल्ट या अन्य क्लिनिकल दस्तावेज को डिजिटल रूप से प्रमाणित करने से पहले डॉक्टरों को सभी संबंधित क्लिनिकल जानकारियों, जांच रिपोर्टों और मेडिकल रिकॉर्ड की समीक्षा करनी होगी। इस कदम का उद्देश्य मरीजों की सुरक्षा और डॉक्टरों की पेशेवर जवाबदेही सुनिश्चित करना है। केवल डिजिटल हस्ताक्षर करना पर्याप्त नहीं NMC ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल हस्ताक्षर मेडिकल रिकॉर्ड के प्रमाणीकरण का माध्यम है, लेकिन इससे डॉक्टर की पेशेवर, नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी कम नहीं होती। किसी दस्तावेज को प्रमाणित करने से पहले डॉक्टर को उपलब्ध जानकारी का आकलन करना और अपने स्वतंत्र चिकित्सकीय विवेक का इस्तेमाल करना होगा। अधूरी जानकारी होने पर रिकॉर्ड प्रमाणित करने से बचना होगा एडवाइजरी के मुताबिक, यदि उपलब्ध क्लिनिकल जानकारी किसी पेशेवर चिकित्सकीय राय तक पहुंचने के लिए पर्याप्त नहीं है, तो डॉक्टर को रिकॉर्ड प्रमाणित नहीं करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त दस्तावेज, जांच या सत्यापन कराया जाना चाहिए। पर्याप्त जानकारी मिलने के बाद ही प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए। डिजिटल हस्ताक्षर और लॉगिन क्रेडेंशियल डॉक्टर के नियंत्रण में रहेंगे NMC ने डिजिटल हस्ताक्षर, इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर, एक्सेस टोकन और अन्य प्रमाणीकरण संबंधी क्रेडेंशियल की सुरक्षा पर भी जोर दिया है। ये केवल संबंधित डॉक्टर के नियंत्रण में रहने चाहिए। इन्हें किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा करना, सौंपना या हस्तांतरित करना स्वीकार्य नहीं होगा। केवल संबंधित स्वास्थ्य संस्थान के रिकॉर्ड प्रमाणित कर सकेंगे डॉक्टर एडवाइजरी के अनुसार, पंजीकृत चिकित्सक दूरस्थ रूप से उन्हीं स्वास्थ्य संस्थानों में तैयार मेडिकल रिकॉर्ड प्रमाणित कर सकेंगे, जिनसे वे नियुक्ति, पैनल में शामिल होने, अनुबंध या अन्य पेशेवर संबंध के जरिए जुड़े हुए हैं। इस प्रावधान का उद्देश्य प्रमाणीकरण की जिम्मेदारी और डॉक्टर के संबंधित संस्थान से जुड़ाव को स्पष्ट करना है। अस्पतालों को सुरक्षा व्यवस्था और ऑडिट ट्रेल बनाए रखना होगा स्वास्थ्य संस्थानों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रमाणित मेडिकल रिकॉर्ड के लिए उचित सुरक्षा उपाय, ऑडिट ट्रेल, प्रमाणीकरण लॉग, तारीख और समय की जानकारी तथा मरीजों की निजता की सुरक्षा से जुड़े प्रावधान बनाए रखने होंगे। इससे रिकॉर्ड में किए गए बदलावों और प्रमाणीकरण की प्रक्रिया का पता लगाया जा सकेगा तथा दस्तावेजों की विश्वसनीयता बनाए रखने में मदद मिलेगी। डिजिटल हेल्थकेयर के विस्तार के बीच आया फैसला टेलीमेडिसिन और डिजिटल हेल्थकेयर सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ मेडिकल रिकॉर्ड को दूरस्थ रूप से प्रमाणित करने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण हो गई है। NMC की नई एडवाइजरी का उद्देश्य इस प्रक्रिया में एकरूपता लाना, मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और डॉक्टरों की पेशेवर जवाबदेही स्पष्ट करना है। स्रोत: नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC), द इंडियन एक्सप्रेस, मेडिकल डायलॉग्स जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

Indian clinical trial में Hepatitis C के 8-week treatment से करीब 99% cure rate, इलाज की लागत घटने की उम्मीद

नई दिल्ली, 13 अक्टूबर 2026: भारत में हुए एक बड़े clinical trial में Hepatitis C के मरीजों के लिए 8 सप्ताह के antiviral treatment ने लगभग 98.8% cure rate हासिल की है। यह परिणाम standard 12-week treatment के 99% cure rate के लगभग बराबर रहा। Study के मुताबिक, shorter treatment से प्रति मरीज करीब ₹5,000 तक की लागत कम हो सकती है। 880 patients पर हुआ RESOLVE trial RESOLVE trial में भारत के पांच publicly funded hospitals के कुल 880 treatment-naive adult patients शामिल किए गए। सभी participants को chronic Hepatitis C था, लेकिन उनमें liver cirrhosis नहीं था। मरीजों को 8-week और 12-week treatment groups में बांटा गया। 8-week treatment में 98.8% cure rate Trial में 8 सप्ताह तक sofosbuvir और velpatasvir लेने वाले patients में 98.8% sustained virological response दर्ज किया गया, जबकि standard 12-week group में यह आंकड़ा 99% था। Researchers ने shorter regimen को standard treatment के मुकाबले non-inferior पाया। इलाज चार सप्ताह छोटा, खर्च भी कम मौजूदा standard regimen की तुलना में treatment चार सप्ताह कम होने से दवाओं पर होने वाला खर्च भी घट सकता है। ICMR study के मुताबिक, इससे प्रति patient करीब ₹5,000 की बचत हो सकती है और public health programmes उपलब्ध budget में ज्यादा patients का इलाज कर सकेंगे। किन मरीजों के लिए लागू हैं findings? Researchers ने स्पष्ट किया है कि trial ऐसे adults पर किया गया था जिन्हें पहले Hepatitis C treatment नहीं मिला था और जिन्हें cirrhosis नहीं था। इसलिए 8-week regimen को सभी Hepatitis C patients पर अपने-आप लागू नहीं माना जाना चाहिए। Treatment duration का फैसला clinical assessment के आधार पर होना जरूरी है। गंभीर drug-related side effects नहीं मिले Study में किसी participant में drug से जुड़ा serious adverse event नहीं पाया गया और side effects की वजह से किसी मरीज को treatment बंद नहीं करना पड़ा। Trial के findings September 2026 के अंत में medical journal The Lancet में प्रकाशित हुए। Hepatitis C elimination programme को मिल सकता है फायदा Researchers का मानना है कि shorter treatment duration से cost, adherence और accessibility में सुधार हो सकता है। खास तौर पर बड़े public-health programmes में चार सप्ताह कम treatment देने से resources का ज्यादा प्रभावी इस्तेमाल संभव हो सकता है। source – The Lancet, ICMR जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

गुजरात में बच्चों को Paracetamol की जगह Diabetes की दवा देने का मामला, Medication Safety पर उठे सवाल

सूरत: गुजरात के सूरत जिले में टीकाकरण के बाद पांच बच्चों को गलती से Paracetamol की जगह Glimepiride 2 mg देने का मामला सामने आया है। Glimepiride डायबिटीज के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा है, जो रक्त में शुगर का स्तर कम करती है। गलत दवा लेने के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें ICU/PICU में भर्ती कराना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित महिला स्वास्थ्यकर्मी को निलंबित कर जांच शुरू कर दी है। Mamta Diwas के दौरान हुई गलती घटना सूरत जिले की पलसाणा तहसील के कणाव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत आने वाले Palsana-01 Sub Centre की है। 23 सितंबर को यहां ‘Mamta Diwas’ के तहत बच्चों का नियमित टीकाकरण किया जा रहा था। इस दौरान कुल सात बच्चों को वैक्सीन लगाई गई थी। पांच बच्चों को मिली गलत दवा टीकाकरण के बाद बुखार या दर्द की स्थिति में बच्चों को Paracetamol देने की व्यवस्था थी। लेकिन पांच बच्चों को Paracetamol Kid Tablet की जगह गलती से Glimepiride 2 mg दे दी गई। यह दवा आमतौर पर Type-2 Diabetes के मरीजों में blood sugar कम करने के लिए इस्तेमाल होती है। तबीयत बिगड़ने पर ICU में भर्ती दवा लेने के बाद पांचों बच्चों में adverse reactions दिखाई देने लगे। स्थिति बिगड़ने पर उन्हें 24 सितंबर को अलग-अलग अस्पतालों के ICU और PICU में भर्ती कराया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल पहुंचकर बच्चों के इलाज की निगरानी की। 3.5 महीने से एक साल तक के बच्चे प्रभावित स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रभावित बच्चों में करीब साढ़े तीन महीने से लेकर एक साल तक की उम्र के बच्चे शामिल थे। इतनी कम उम्र के बच्चों को blood sugar कम करने वाली दवा मिलना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है, इसलिए उन्हें तत्काल अस्पताल में निगरानी में रखा गया। चार बच्चों को मिली अस्पताल से छुट्टी ताजा जानकारी के मुताबिक इलाज के बाद चार बच्चों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि एक बच्चा अभी इलाज के तहत है। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि उसकी हालत भी स्थिर है और डॉक्टर लगातार उसकी निगरानी कर रहे हैं। महिला Health Worker निलंबित प्रारंभिक जांच के बाद संबंधित महिला स्वास्थ्यकर्मी इंदुबेन रतिलाल चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। विभाग ने मामले में आगे की disciplinary action के लिए विस्तृत जांच शुरू की है। दो डॉक्टरों को भी Show-Cause Notice गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानसेरिया ने घटना को गंभीर लापरवाही बताया। मामले में संबंधित स्वास्थ्यकर्मी को निलंबित करने के साथ दो डॉक्टरों को भी show-cause notice जारी किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने कर्मचारियों के साथ बैठक कर भविष्य में ऐसी गलती रोकने के लिए निर्देश भी दिए हैं। Glimepiride बच्चों के लिए क्यों हो सकती है खतरनाक? Glimepiride शरीर में insulin release बढ़ाकर blood sugar को कम करती है। अगर यह दवा किसी ऐसे बच्चे को दे दी जाए जिसे diabetes नहीं है, तो blood sugar तेजी से गिर सकती है। इस स्थिति को Hypoglycaemia कहा जाता है। दिखाई दे सकते हैं गंभीर Symptoms Blood sugar बहुत कम होने पर बच्चे में पसीना आना, कांपना, कमजोरी, असामान्य नींद, चिड़चिड़ापन, चक्कर या उल्टी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गंभीर स्थिति में seizures या बेहोशी जैसी जटिलताएं भी हो सकती हैं। इसी वजह से ऐसी medication error होने पर तत्काल medical evaluation जरूरी माना जाता है। Medication Safety पर उठे सवाल घटना के बाद सरकारी vaccination centres पर medicines की storage, labelling और dispensing system को लेकर सवाल उठे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चों को कोई भी दवा देने से पहले medicine name, dosage और prescription का दोबारा verification जैसी प्रक्रिया medication errors को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच स्वास्थ्य विभाग अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि Paracetamol की जगह Glimepiride बच्चों तक कैसे पहुंची और medicine dispensing के दौरान निर्धारित safety checks का पालन हुआ या नहीं। जांच के आधार पर जिम्मेदार कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी। बच्चों की सुरक्षा के लिए Protocol मजबूत करने पर जोर यह मामला pediatric healthcare और vaccination programmes में medication safety की अहमियत को एक बार फिर सामने लाता है। स्वास्थ्य विभाग ने कर्मचारियों को medicines की पहचान, storage और distribution के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं, ताकि ऐसी गंभीर गलती दोबारा न हो। source – Gujarat Health Department / ANI / The Indian Express / Aaj Tak / Gujarat Samachar The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

India को 2027 के अंत तक Indigenous Dengue Vaccine मिल सकती है—ICMR DG

कोलकाता, 14 सितंबर 2026: India की पहली indigenous single-dose dengue vaccine DengiAll 2027 के अंत तक उपलब्ध हो सकती है। Indian Council of Medical Research (ICMR) के Director General Dr Rajiv Bahl ने कहा है कि vaccine का Phase-3 trial जारी है और अगर follow-up तथा efficacy results अनुकूल रहे, तो अगले साल के अंत तक इसके rollout की दिशा साफ हो सकती है। Phase-3 Trial का Follow-up जारी DengiAll को Panacea Biotec ने ICMR के सहयोग से विकसित किया है। इसका Phase-3 trial देश के कई centres पर चल रहा है और 10,335 participants का enrolment पूरा हो चुका है। Trial participants को vaccine या placebo दिए जाने के बाद दो साल तक monitor किया जा रहा है, ताकि vaccine की efficacy, safety और immune response का assessment किया जा सके। 2027 के अंत तक खुल सकते हैं Trial Results Dr Rajiv Bahl ने Kolkata में कहा कि researchers लगभग एक साल का follow-up पूरा कर चुके हैं और उन्हें उम्मीद है कि 2027 के अंत तक trial data unblind किया जा सकेगा। हालांकि dengue cases इस साल अपेक्षाकृत कम रहने के कारण efficacy assessment के लिए पर्याप्त confirmed infections जुटाने में ज्यादा समय लग सकता है। इसलिए 2027 की timeline अभी संभावित है, final approval पर निर्भर करेगी। Single Dose में चारों Dengue Serotypes को Target DengiAll एक tetravalent, single-dose vaccine candidate है, जिसे dengue virus के चारों प्रमुख serotypes—DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4—के खिलाफ protection देने के लिए develop किया गया है। ICMR के annual report में भी इसे India के सबसे advanced indigenous dengue vaccine programmes में शामिल किया गया है। India में एक Dengue Vaccine पहले ही Approved यह ध्यान रखना जरूरी है कि India में Takeda की Qdenga vaccine को July 2026 में CDSCO approval मिल चुका है। यह imported vaccine है और 4 से 60 वर्ष की उम्र के लोगों के लिए authorised है। DengiAll इससे अलग भारत में विकसित indigenous vaccine candidate है, जो अभी Phase-3 evaluation में है। Regulatory Approval के बाद ही होगा Rollout Phase-3 trial के positive results आने के बाद vaccine को regulatory review और approval से गुजरना होगा। उसके बाद ही इसे commercial या public-health use के लिए उपलब्ध कराया जा सकेगा। इसलिए ICMR DG का 2027 वाला बयान एक expected timeline है, guaranteed launch date नहीं। source – ICMR / Panacea Biotec / Times of India / PIB जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

NMC ने 13,186 Additional MBBS Seats Approve कीं, Total Intake 1.40 लाख के पार

नई दिल्ली, 12 सितंबर 2026: National Medical Commission (NMC) ने academic year 2026-27 के लिए 13,186 additional MBBS seats approve की हैं। इसके साथ India में approved undergraduate medical seats की कुल संख्या बढ़कर 1,40,214 हो गई है। ये seats देश के 836 medical colleges में उपलब्ध होंगी। Institutes of National Importance (INIs) की seats इस आंकड़े में शामिल नहीं हैं। Private Colleges में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी 13,186 नई seats में से करीब 10,400 seats private medical colleges में जोड़ी गई हैं, जो कुल increase का लगभग 79% है। वहीं government medical colleges में 2,786 additional MBBS seats बढ़ाई गई हैं। Karnataka में सबसे ज्यादा नई Seats State-wise increase में Karnataka सबसे आगे रहा, जहां 1,650 MBBS seats बढ़ाई गई हैं। इसके बाद: का addition हुआ है। Total Intake 1,27,028 से बढ़कर 1,40,214 Updated seat matrix के मुताबिक MBBS intake 1,27,028 seats से बढ़कर 1,40,214 हो गया है, यानी करीब 10.4% का increase दर्ज किया गया है। NMC की updated seat matrix 1 September 2026 की स्थिति को reflect करती है और इसमें नए medical colleges को permission तथा existing colleges की intake capacity बढ़ाने के approvals शामिल हैं। NEET UG Counselling में Students को मिलेगा फायदा Additional seats का सीधा फायदा ongoing NEET UG 2026 counselling में शामिल candidates को मिल सकता है, क्योंकि counselling के आगे के rounds में available MBBS seats का pool बढ़ेगा। हालांकि actual allotment counselling process और category-wise seat matrix के अनुसार होगा। Approved Intake से ज्यादा Admission पर Action NMC ने साफ किया है कि medical colleges केवल approved seat matrix के मुताबिक ही admissions कर सकते हैं। Approved intake से ज्यादा admission देने पर regulatory action लिया जा सकता है। source – National Medical Commission (NMC) / Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

Packaged Food Warning Labels पर Supreme Court सख्त, सरकार से 10 दिन में Implementation Timeline मांगी

नई दिल्ली, 11 सितंबर 2026: Supreme Court ने packaged food products पर front-of-pack warning labels लागू करने में हो रही देरी पर सख्त रुख अपनाया है। Court ने Centre और Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) से 10 दिनों के भीतर स्पष्ट implementation timeline पेश करने को कहा है। Sugar, Salt और Fat पर होंगे Warning Labels FSSAI ने ऐसे packaged food products पर red hexagonal warning labels लगाने का प्रस्ताव दिया है जिनमें added sugar, salt या saturated fat तय सीमा से ज्यादा हो। इसका उद्देश्य consumers को packet के front पर ही यह जानकारी देना है कि product में unhealthy nutrients की मात्रा ज्यादा है। Two-Phase Plan पर Court ने जताई चिंता FSSAI ने warning labels को दो phases में लागू करने का proposal दिया था। शुरुआती phase में दो या उससे अधिक specified nutrients की अधिक मात्रा वाले products पर warning लगाने की योजना थी। Supreme Court ने चिंता जताई कि अगर implementation की निश्चित timeline नहीं दी गई तो दूसरा phase अनिश्चित समय तक टल सकता है। Industry की आपत्तियों से Court सहमत नहीं Food industry ने नए labels लागू करने के लिए additional transition time और products reformulate करने का मौका देने की मांग की है। हालांकि Court ने consumer acceptability और reformulation से जुड़ी चिंताओं को public health measure में लंबी देरी का पर्याप्त आधार नहीं माना। बच्चों की Health को लेकर Court चिंतित Bench ने कहा कि इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा लोगों और खासकर growing children की health है। Court ने इसे national interest से जुड़ा विषय बताते हुए regulators से प्रभावी और समयबद्ध व्यवस्था तैयार करने को कहा है। 28 September को अगली सुनवाई मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को तय की गई है। इससे पहले सरकार और FSSAI को warning label system लागू करने की timeline और आगे की प्रक्रिया Court के सामने रखनी होगी। source – Reuters / Supreme Court Proceedings / FSSAI जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

National Poshan Maah 2026 का Varanasi से आगाज, Women और Child Nutrition पर Month-Long National Campaign शुरू

वाराणसी, 9 सितंबर 2026: महिलाओं और बच्चों में बेहतर पोषण को बढ़ावा देने के लिए 9th Rashtriya Poshan Maah 2026 का आज Varanasi से राष्ट्रीय स्तर पर आगाज हुआ। इस महीनेभर चलने वाले अभियान का focus pregnant women, lactating mothers, children, adolescents और उनके परिवारों में nutrition, health और caregiving practices को मजबूत करना है। ‘Hamari Anganwadi, Hamari Jimmedari’ है इस साल की Theme Rashtriya Poshan Maah 2026 की central theme “Hamari Anganwadi, Hamari Jimmedari” रखी गई है। इसका उद्देश्य Anganwadi Centres को केवल सरकारी service centres के बजाय community-owned nutrition, childcare और early-learning hubs के रूप में मजबूत करना है। Varanasi के Rudraksh Centre में National Launch इस साल अभियान का national launch Rudraksh International Cooperation and Convention Centre, Varanasi में आयोजित किया गया। Union Women and Child Development Minister Annpurna Devi launch programme का नेतृत्व कर रही हैं, जबकि Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath सहित अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधियों की भागीदारी भी कार्यक्रम में निर्धारित है। पांच प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा Focus Poshan Maah 2026 को पांच major priorities के आसपास तैयार किया गया है: इन activities को पूरे सितंबर देशभर में चलाया जाएगा। Protein-Rich Diet पर विशेष जोर इस बार अभियान में pregnant और lactating women के लिए balanced और protein-rich nutrition को विशेष प्राथमिकता दी गई है। Communities को pulses, millets, milk products, nuts, seeds, fruits, vegetables और locally available nutritious foods को daily diet में शामिल करने के लिए जागरूक किया जाएगा। Anganwadi में Fresh Hot-Cooked Meals सरकार Anganwadi Centres में दिए जाने वाले hot-cooked meals की quality और diversity को भी मजबूत करना चाहती है। Weekly menu rotation, hygiene, locally available ingredients और food quality testing के जरिए supplementary nutrition services को बेहतर बनाने पर जोर रहेगा। Anganwadi Management Committees की बढ़ेगी भूमिका इस साल community participation अभियान का बड़ा हिस्सा है। Newly constituted Anganwadi Management Committees (AMCs) के जरिए parents, communities और local representatives को nutrition services की monitoring में ज्यादा भूमिका देने की योजना है। Anganwadi Centres में daily/weekly food menus दिखाने के लिए SNP Menu Boards पर भी जोर दिया जाएगा। Nutrition के साथ Brain Development पर भी Focus Campaign इस बात पर भी जोर देगा कि शुरुआती वर्षों में सही nutrition बच्चों के physical growth के साथ brain और cognitive development के लिए भी बेहद जरूरी है। Early Childhood Care and Education यानी ECCE के तहत nutrition और early stimulation को साथ लेकर चलने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। PM Matru Vandana Yojana के 10 साल Rashtriya Poshan Maah 2026 के दौरान Pradhan Mantri Matru Vandana Yojana (PMMVY) के 10 वर्ष भी पूरे होने का उल्लेख किया जाएगा। इस scheme के तहत eligible pregnant और lactating women को maternity benefits और income support उपलब्ध कराया जाता है। इस महीने enrolment और awareness drives पर भी जोर रहेगा। करीब 14 लाख Anganwadi Centres का Network 31 July 2026 तक देश में करीब 13.99 लाख Anganwadi Centres और लगभग 13.30 लाख Anganwadi workers का network मौजूद था। इन services के जरिए करीब 8.94 करोड़ beneficiaries तक nutrition और childcare support पहुंच रहा है, जिनमें 7.2 करोड़ से ज्यादा छह महीने से छह साल तक के बच्चे शामिल हैं। Nutrition को Jan Andolan बनाने का लक्ष्य Rashtriya Poshan Maah का उद्देश्य nutrition को केवल government programme तक सीमित न रखकर Jan Andolan बनाना है। पूरे सितंबर Anganwadi Centres, local communities, families और विभिन्न government departments के जरिए nutrition awareness और behavioural change activities आयोजित की जाएंगी। source – Ministry of Women and Child Development / PIB / DD India जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

नई UNEP Report: Air-Quality Norms पूरे हुए तो Delhi का PM2.5 Exposure Burden 2040 तक 20% घट सकता है

नई दिल्ली, 8 सितंबर 2026: दिल्ली में वायु प्रदूषण से जूझ रहे लोगों के लिए नई UNEP report में महत्वपूर्ण संभावना सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक अगर Delhi मौजूदा national air-quality standards को 2026 से तय समय पर हासिल और लागू करता है, तो 2040 तक PM2.5 exposure burden करीब 20% कम किया जा सकता है। वहीं implementation में लगभग आठ साल की देरी होने पर यह फायदा घटकर करीब 10% रह सकता है। क्या है नई UNEP Report? United Nations Environment Programme (UNEP) और Climate and Clean Air Coalition (CCAC) ने “Hidden Assets: The Economic and Health Case for Climate and Clean Air Action” नाम से नया global assessment जारी किया है। UNEP इसे climate change और air pollution पर integrated action के economic benefits का अब तक का सबसे comprehensive global assessment बताता है। Delhi के लिए 20% Reduction का अनुमान Report के Delhi-specific assessment के मुताबिक अगर मौजूदा national air-quality standards को समय पर लागू किया जाता है, तो 2040 तक लोगों का PM2.5 exposure burden करीब 20% कम हो सकता है। लेकिन अगर implementation में global average के मुताबिक लगभग 7.5 से 8 साल की देरी होती है, तो reduction सिर्फ करीब 10% रह सकता है। देरी से आधा हो सकता है फायदा UNEP assessment में कहा गया है कि institutional, economic, technological और social barriers की वजह से clean-air solutions लागू करने में औसतन कई साल की देरी हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक करीब आठ साल की delay 2035 तक हासिल की जा सकने वाली emissions reduction को लगभग आधा कर सकती है। 25 Solutions सुझाए गए Report ने climate change और air pollution दोनों से एक साथ निपटने के लिए 25 solutions चिन्हित किए हैं। इनमें प्रमुख रूप से: जैसे उपाय शामिल हैं। Air Pollution का Health Burden बेहद बड़ा UNEP के मुताबिक 2025 में human-caused outdoor air pollution यानी PM2.5 और ozone exposure से दुनिया भर में अनुमानित 6.4 million premature deaths जुड़ी थीं। Household air pollution से अलग से करीब 2 million premature deaths जुड़ी थीं, जिनमें लगभग 300,000 बच्चे शामिल थे। Integrated Action से 60–70% Health Burden घट सकता है Global level पर UNEP का अनुमान है कि सभी 25 clean-air और climate solutions पूरी तरह लागू किए जाएं तो air pollution के annual health burden में 60 से 70% तक कमी लाई जा सकती है। इसके साथ 2050 तक carbon dioxide emissions लगभग आधी और methane emissions करीब 60% तक कम हो सकती हैं। हर $1 Investment पर $15 Benefit UNEP assessment का बड़ा economic finding यह है कि climate और clean-air action में लगाया गया हर $1 लगभग $15 तक economic benefit दे सकता है। इसमें healthcare costs में कमी, बेहतर labour productivity, कम premature deaths और healthier population जैसे benefits शामिल हैं। हर साल की देरी से $1.5 Trillion का नुकसान Report में चेतावनी दी गई है कि clean-air और climate measures लागू करने में हर साल की देरी से दुनिया $1.5 trillion से अधिक के संभावित annual benefits गंवा सकती है। 2035 तक इन measures से मिलने वाला annual economic benefit global GDP के करीब 2.8% के बराबर हो सकता है। Delhi के लिए क्यों महत्वपूर्ण है Report? Delhi लंबे समय से PM2.5 pollution की गंभीर समस्या का सामना कर रहा है। नई UNEP analysis यह दिखाती है कि केवल नए pollution targets घोषित करना पर्याप्त नहीं होगा—implementation की speed भी health benefits तय करने में बेहद महत्वपूर्ण होगी। अगर existing standards समय पर हासिल किए गए तो 2040 तक exposure burden में संभावित 20% reduction लाखों residents के लिए बेहतर air quality और health outcomes की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है। source – UNEP / Climate and Clean Air Coalition / India Todayजय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें
Translate »