Know the harmful effects of Giloy juice

गिलोय के जूस के हो सकते हैं बहुत से नुकसान, जानिए किन लोगों को नहीं करना चाहिए इसका सेवन

आयुर्वेद में ऐसी कई हर्ब्स हैं जिन्हें हेल्थ के लिए लाभदायक माना जाता है। उन्हीं में से एक है गिलोय (Giloy)। इसे अमृता या गुडुची के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा माना गया है कि यह हर्ब डायजेशन के लिए अच्छी है और इसके साथ ही इम्युनिटी को भी बढ़ाती है। यही नहीं, इस हर्ब में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। इसके सेवन से बुखार कम करने में मदद मिलती है और शरीर को कई तरह के इंफेक्शंस से बचाव में भी मदद मिलती है। यही कारण है कि आजकल गिलोय का जूस (Giloy juice) बड़ी सख्या में लोगों द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि इसके बहुत से फायदे हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं? आइए जानें कि किन लोगों को गिलोय के जूस का सेवन नहीं करना चाहिए (Who should not consume Giloy juice)? किन लोगों को गिलोय के जूस का सेवन नहीं करना चाहिए (Who should not consume Giloy juice)? हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार गिलोय (Giloy) सीजनल एलर्जीज में फायदेमंद होती है। इससे स्किन रैशेज कम हो सकते हैं। इसके साथ ही डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल आदि को मैनेज करने में भी यह मदद कर सकती है। लेकिन, कुछ लोगों को इनका सेवन करने से बचना चाहिए। जानें किन लोगों को गिलोय के जूस का सेवन नहीं करना चाहिए (Who should not consume Giloy juice)? ऑटोइम्यून डिजीज के रोगी:  गिलोय का जूस (Giloy juice) इम्यून सिस्टम को स्टिमुलेट करता है जिससे ल्यूपस, रुमेटीइड गठिया या क्रोहन रोग  से पीड़ित लोगों के लिए इसका सेवन उनकी स्थिति को और बदतर बना सकता है। गर्भवती महिलाएं गर्भवती महिलाओं को इस स्थिति में गिलोय का जूस (Giloy juice) पीने की सलाह नहीं दी जाती है। यही नहीं उन्हें इस दौरान कुछ भी खाने या पीने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। इसका सेवन करना गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। ब्लड प्रेशर कम करने वाली दवाईयां लेने वाले लोग  गिलोय का जूस (Giloy juice) उन लोगों को भी नहीं पीना चाहिए, जो ब्लड प्रेशर लो करने वाली दवाईयां ले रहे हैं। क्योंकि गिलोय (Giloy) भी ब्लड प्रेशर को कम कर सकता है। ऐसे में इन दोनों के कॉम्बिनेशन से रोगी का ब्लड प्रेशर लेवल बहुत अधिक कम हो सकता है। इससे उनकी समस्या बढ़ सकती है। इसे भी पढ़ें:- भारत में जल्द ही लांच होगी वजन कम करने की यह दवा  लिवर की समस्या से पीड़ित रोगी ऐसा पाया गया है कि गिलोय (Giloy) लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए जिन लोगों को लिवर संबंधी समस्याएं हैं या जिन्हें पीलिया के के लक्षणों का अनुभव हो रहा हो, उन्हें इनका सेवन करने से बचना चाहिए। यह तो आप जान ही गए होंगे कि किन लोगों को गिलोय के जूस का सेवन नहीं करना चाहिए (Who should not consume Giloy juice)। यह भी सलाह दी जाती है कि गिलोय (Giloy) या गिलोय का जूस (Giloy juice) पीने से पहले किसी एक्सपर्ट या डॉक्टर कि सलाह लें खासतौर पर अगर आप किसी अंडरलाइंग हेल्थ कंडीशन से गुजर रहे हों या कोई दवा ले रहे हैं।  गिलोय (Giloy) के कई साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं। कुछ लोग इसके सेवन के बाद पेट में परेशानी या जी मिचलाना जैसी समस्याओं का अनुभव करते हैं। ऐसा आमतौर पर इसकी अधिक मात्रा लेने से होता है। इस बात का खास ध्यान रखें कि गिलोय या गिलोय का जूस (Giloy juice) किसी भी बीमारी का मेडिकल ट्रीटमेंट का विकल्प नहीं है। इसलिए, कोई भी समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi  Giloy #giloyjuice #sideeffects #ayurvedichealth #immunitybooster #healthalert #naturalremedies #giloywarning

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Vivo T4 Lite 5G

Vivo ने लॉन्च किया 10,000 रुपये में दमदार 5G स्मार्टफोन: जानिए फीचर्स, कीमत और खासियत 

भारतीय स्मार्टफोन बाजार में 5G तकनीक की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए चीनी स्मार्टफोन निर्माता Vivo ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अपनी T-सीरीज में एक नया और किफायती 5G फोन लॉन्च कर दिया है। Vivo का यह नया मॉडल Vivo T4 Lite 5G है, जिसे कंपनी ने उन यूज़र्स को ध्यान में रखकर तैयार किया है जो कम बजट में दमदार फीचर्स वाले 5G फोन (5G Phone) की तलाश कर रहे हैं। Vivo T4 Lite 5G: कीमत और वेरिएंट Vivo T4 Lite 5G को तीन स्टोरेज वेरिएंट्स में पेश किया गया है: Vivo T4 Lite 5G फोन की पहली सेल 2 जुलाई को दोपहर 12 बजे से Flipkart, Vivo के ऑफिशियल ई-स्टोर और अन्य रिटेल स्टोर्स पर शुरू होगी। Vivo ने इसे दो आकर्षक रंगों में पेश किया है प्रिज्म ब्लू और टाइटेनियम गोल्ड, जो इसे एक प्रीमियम लुक प्रदान करते हैं। Vivo T4 Lite 5G: डिस्प्ले और डिजाइन Vivo T4 Lite 5G में 6.74 इंच का LCD डिस्प्ले है, जो HD+ (720×1600 पिक्सल) रेजोलूशन और 90Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। इस डिस्प्ले की 1000 निट्स पीक ब्राइटनेस इसे तेज धूप में भी पढ़ने लायक बनाती है, जो कि इस प्राइस रेंज में कम ही देखने को मिलता है। इसका स्लीक डिजाइन और बड़ी स्क्रीन इसे मल्टीमीडिया और गेमिंग के लिए आदर्श बनाता है। प्रोसेसर और सॉफ्टवेयर फोन में MediaTek Dimensity 6300 चिपसेट दिया गया है, जो कि एक किफायती लेकिन शक्तिशाली 5G प्रोसेसर है। इसके साथ 8GB तक की RAM और 256GB तक की इंटरनल स्टोरेज मिलती है, जिसे microSD कार्ड के जरिए 2TB तक बढ़ाया जा सकता है। यह फोन Android 15 पर आधारित FuntouchOS 15 पर चलता है, जो कि एक क्लीन और यूज़र फ्रेंडली इंटरफेस के लिए जाना जाता है। Vivo T4 Lite 5G: कैमरा फीचर्स कैमरा की बात करें तो Vivo T4 Lite 5G में डुअल रियर कैमरा सेटअप है, जिसमें 50MP का प्राइमरी सेंसर और 2MP का सेकेंडरी सेंसर दिया गया है। फ्रंट में 5MP का सेल्फी कैमरा मौजूद है जो बेसिक वीडियो कॉलिंग (Basic Video Calling) और सोशल मीडिया (Social Media) के लिए पर्याप्त है। यह कैमरा (Camera) सेटअप इस प्राइस रेंज में अच्छी डिटेल और कलर रिप्रोडक्शन प्रदान करता है। Vivo T4 Lite 5G: बैटरी और चार्जिंग फोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 6000mAh की विशाल बैटरी है। कंपनी का दावा है कि यह इस सेगमेंट का सबसे सस्ता फोन है जिसमें इतनी बड़ी बैटरी दी गई है। फोन 15W USB Type-C फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करता है, जिससे लंबी बैटरी लाइफ के साथ चार्जिंग भी सुविधाजनक हो जाती है। Vivo T4 Lite 5G: कनेक्टिविटी और सेफ़्टी  फोन में डुअल 5G, डुअल-बैंड Wi-Fi, और Bluetooth जैसे कनेक्टिविटी फीचर्स मौजूद हैं। सिक्योरिटी के लिए इसमें साइड माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर दिया गया है जो तेज और सटीक है। यह फोन IP64 रेटेड है यानी यह धूल और हल्के पानी की बूंदों से सुरक्षित रहेगा। इसके अलावा इसमें SGS 5 स्टार एंटी फॉल प्रोटेक्शन और MIL-STD-810H मिलिट्री ग्रेड शॉक रेसिस्टेंस सर्टिफिकेशन भी है, जिससे यह हल्की गिरावट में भी सुरक्षित रह सकता है। इसे भी पढ़ें:- Govt Warns Online Shoppers: सरकार की यह सलाह नहीं मानने पर अपना सबकुछ गँवा सकते हैं ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले Vivo T4 Lite 5G: किसके लिए है यह फोन? Vivo T4 Lite 5G खासतौर पर उन यूज़र्स के लिए है जो बजट में रहते हुए भी लेटेस्ट तकनीक और मजबूत फीचर्स चाहते हैं। छात्र, नौकरीपेशा और पहली बार स्मार्टफोन (Smartphone) खरीदने वाले यूज़र्स के लिए यह एक आदर्श विकल्प हो सकता है। 10,000 रुपये से कम की कीमत में 5G, बड़ी बैटरी, 90Hz डिस्प्ले, और मजबूत डिज़ाइन जैसी खूबियों के साथ Vivo T4 Lite 5G इस सेगमेंट में एक शानदार विकल्प बनकर उभरा है। Vivo का यह कदम निश्चित ही बाजार में बजट 5G स्मार्टफोन्स की प्रतिस्पर्धा को और तेज करेगा। अगर आप कम बजट में एक भरोसेमंद और भविष्य-प्रूफ फोन की तलाश में हैं, तो Vivo T4 Lite 5G पर नज़र डालना फायदेमंद हो सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi Vivo T4 Lite 5G #VivoT4Lite5G #5Gsmartphone #BudgetPhone #Vivo #SmartPhone

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rashtriya janata dal bihar

Rashtriya Janata Dal: इन 5 नेताओं ने बनाई पार्टी की पहचान

बिहार की राजनीति (Bihar Politics) में राष्ट्रीय जनता दल (Rashtriya Janata Dal {RJD}) लंबे समय से एक मजबूत और प्रभावशाली राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित है। इस पार्टी की नींव सामाजिक न्याय, पिछड़े वर्गों और वंचित समुदायों की आवाज़ उठाने के उद्देश्य से रखी गई थी। पार्टी के संस्थापक और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव (Former Chief Minister Lalu Prasad Yadav)ने जिस राजनीतिक विचारधारा और रणनीति से इस दल को खड़ा किया, वह आज भी राज्य की सियासत में अहम भूमिका निभा रही है। RJD सुप्रीमों और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव  लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) का नाम बिहार की राजनीति में एक विचारधारा, एक आंदोलन और एक साहसिक नेतृत्व का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने 1990 के दशक में बिहार की राजनीति को पूरी तरह बदलकर रख दिया। पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यकों को सत्ता की मुख्यधारा में लाकर उन्होंने एक नया राजनीतिक समीकरण तैयार किया। भले ही लालू प्रसाद यादव कानूनी मामलों के चलते सक्रिय राजनीति से कुछ दूर हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक पकड़ और विचारधारा आज भी RJD की रीढ़ बनी हुई है। तेजस्वी यादव: युवा नेतृत्व की नई पहचान लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (Former Deputy Chief Minister Tejaswi Yadav)ने अब पार्टी की कमान संभाल रखी है। 2020 के बिहार विधानसभा चुनावों (Bihar Assembly Election) में तेजस्वी ने आरजेडी (RJD) को सबसे बड़ी पार्टी बनाकर यह साबित कर दिया कि वे राज्य की जनता, खासकर युवाओं और वंचित वर्गों के बीच लोकप्रिय हैं। आगामी 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) के लिए भी पार्टी ने तेजस्वी को अपना चेहरा घोषित कर दिया है। उनका फोकस रोजगार (Employment), शिक्षा (Education) और स्वास्थ्य (Health) जैसे मुद्दों पर है, जो युवाओं को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। पांच प्रमुख नेता जो बना रहे हैं RJD की रणनीति मजबूत RJD की मजबूती सिर्फ लालू या तेजस्वी तक सीमित नहीं है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता हैं जो नीति निर्माण, संगठन संचालन और चुनावी रणनीति में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इनमें से पांच प्रमुख नेता निम्नलिखित हैं: स्व. रघुवंश प्रसाद सिंह – भले ही वे अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उन्होंने पार्टी की नीतिगत संरचना में जो योगदान दिया, उसके लिए उन्होंने हमेशा याद किया जाएगा। उनके विचार आज भी पार्टी की रणनीति में झलकते हैं। अब्दुल बारी सिद्दीकी – RJD के वरिष्ठ मुस्लिम चेहरे के रूप में सिद्दीकी न केवल पार्टी के अंदरूनी निर्णयों में शामिल रहते हैं, बल्कि राज्य में मुस्लिम वोट बैंक (Muslim Vote Bank) को भी पार्टी के पक्ष में संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिवानंद तिवारी – लंबे समय तक लालू यादव के करीबी रहे शिवानंद तिवारी ने पार्टी को वैचारिक मजबूती दी है। वे मीडिया और सार्वजनिक बहसों में पार्टी का मुखर पक्ष रखते हैं। जगदानंद सिंह – वर्तमान में RJD के प्रदेश अध्यक्ष, जगदानंद सिंह संगठन को ज़मीनी स्तर पर मज़बूत करने का कार्य कर रहे हैं। उनका प्रशासनिक अनुभव पार्टी के लिए एक बड़ी ताकत है। मनोज झा – राज्यसभा सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में मनोज झा ने RJD की छवि को राष्ट्रीय स्तर पर प्रखर और विचारशील पार्टी के रूप में प्रस्तुत किया है। उनकी वक्तृत्व शैली और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर पकड़ उन्हें पार्टी का प्रमुख चेहरा बनाती है। सामाजिक समीकरणों में RJD की पकड़ बिहार में जातीय और सामाजिक समीकरण राजनीति को काफी हद तक प्रभावित करते हैं। RJD का परंपरागत समर्थन यादव, मुस्लिम और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के बीच रहा है। पार्टी ने समय के साथ महादलित और अति पिछड़ा वर्गों को भी अपने पाले में लाने की कोशिश की है। इसके अलावा महिलाओं और युवाओं को लेकर भी पार्टी नई रणनीतियाँ बना रही है, जिसमें डिजिटल माध्यम, युवाओं के लिए रोजगार योजनाएँ और शिक्षा पर ज़ोर शामिल हैं। इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? 2025 विधानसभा चुनाव: तैयारी ज़ोरों पर 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) को लेकर RJD ने पहले से ही अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पार्टी ने हाल ही में अपना कैंपेन सॉन्ग भी लॉन्च किया है, जिसमें तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) को मुख्य चेहरा बताया गया है। यह सॉन्ग रोजगार, बदलाव और न्याय के मुद्दों को प्रमुखता देता है। पार्टी की जमीनी पकड़, मजबूत संगठन और नेतृत्व के अनुभव ने उसे एक बार फिर से सत्ता के करीब ला दिया है। गठबंधन की संभावनाओं को लेकर भी बातचीत चल रही है, जिसमें कांग्रेस और वाम दलों के साथ तालमेल की कोशिशें हो रही हैं। RJD न सिर्फ बिहार की एक प्रमुख राजनीतिक पार्टी है, बल्कि यह राज्य की सामाजिक और राजनीतिक चेतना को प्रभावित करने वाली विचारधारा भी है। लालू यादव से लेकर तेजस्वी यादव तक, और अब्दुल बारी सिद्दीकी से लेकर मनोज झा तक, पार्टी एक संतुलित मिश्रण है अनुभव और युवा ऊर्जा का। 2025 के चुनाव में RJD का प्रदर्शन यह तय करेगा कि बिहार की राजनीति में सामाजिक न्याय की यह धारा कितनी प्रभावी बनी रहती है। Latest News in Hindi Today Hindi news Tejaswi Yadav #RJD #RashtriyaJanataDal #BiharPolitics #IndianPolitics #RJDLoyalists

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Artificial Intelligence Specialist

Artificial Intelligence Specialists: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशलिस्ट कैसे बनें?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) आज के वक्त में सबसे ज्यादा डिमांडिंग फिल्ड है क्योंकि हर क्षेत्र में इसकी जरूरत है अब चाहे वह स्वास्थ्य सेवा हो, शिक्षा, व्यापार या फिर परिवहन। जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) का प्रभाव बढ़ रहा है, वैसे-वैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशलिस्ट (Artificial Intelligence Specialists) की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। यदि आप इस क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, तो आपको एक योजनाबद्ध तरीके से शिक्षा, कौशल और अनुभव हासिल करना होगा। आज इस आर्टिकल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशलिस्ट (Artificial Intelligence Specialists) बनने के लिए क्या-क्या जरूरी है ये समझेंगे।  कैसे बन सकते हैं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशलिस्ट?  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशलिस्ट (AI Specialists) बनने के लिए निन्मलिखित बातों को ध्यान रखें –  1. शैक्षणिक योग्यता (Educational Qualifications) AI विशेषज्ञ बनने के लिए सबसे पहले एक मजबूत शैक्षणिक आधार होना आवश्यक है। आप कंप्यूटर साइंस, डेटा साइंस, गणित, सांख्यिकी या सूचना प्रौद्योगिकी जैसे विषयों में स्नातक (Bachelor’s) की डिग्री प्राप्त करें। यह डिग्री आपके लिए AI की मूलभूत अवधारणाओं को समझने का आधार तैयार करती है। अधिकांश कंपनियाँ ऐसे उम्मीदवारों को वरीयता देती हैं जिन्होंने-  2. तकनीकी कौशल (Technical Skills) AI विशेषज्ञ बनने के लिए कुछ खास टेक्निकल स्किल का होना अत्यंत आवश्यक है: 3. ऑनलाइन कोर्स और सर्टिफिकेशन AI सीखने के लिए कई फ्री और पेड ऑनलाइन कोर्स आसानी से मिल जाते हैं, जो आपको इस क्षेत्र से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी को शेयर करते हैं-  4. प्रोजेक्ट्स और प्रैक्टिकल अनुभव सिर्फ किताबी पढ़ाई से AI स्पेशियलिस्ट (AI Specialists) नहीं बना जा सकता। इसके लिए प्रैक्टिकल नॉलेज भी जरूरी है। इसलिए-  5. इंटर्नशिप और इंडस्ट्री अनुभव इंटर्नशिप करने से आपको उद्योग की वास्तविक समस्याओं को समझने और हल करने का अनुभव मिलता है। कॉलेज के दौरान या उसके बाद किसी कंपनी में AI से जुड़ी इंटर्नशिप करना लाभकारी होगा। इससे न केवल आपके स्किल्स में सुधार होगा, बल्कि नेटवर्किंग और करियर अवसर भी मिलेंगे। 6. नवीनतम तकनीकों से अपडेट रहना AI एक तेजी से बदलता हुआ क्षेत्र है। नई-नई तकनीकों, शोध पत्रों और टूल्स के बारे में जानकारी रखना जरूरी है। इसके लिए आप निम्न संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं: इसे भी पढ़ें:- रैंक नंबर 1, उत्कृष्टता की पहचान, जानिए आईआईएम अहमदाबाद के बारे में कुछ रोचक बातें 7. सॉफ्ट स्किल (Soft Skills) AI विशेषज्ञ  (AI Expert) को तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ अच्छे संप्रेषण कौशल (Communication skills), समस्या सुलझाने की क्षमता, टीमवर्क और विश्लेषणात्मक सोच भी होनी चाहिए। AI का उपयोग अक्सर अन्य टीमों के साथ मिलकर समस्याओं के समाधान में होता है, इसलिए इंटरडिसिप्लिनरी सहयोग जरूरी होता है। AI विशेषज्ञ (AI Expert) बनना कठिन हो सकता है, लेकिन सीखने पर आसानी से समझा जा सकता है और ये एक बेहतर करियर ऑप्शन भी है। इसके लिए आपको तकनीकी तौर से मजबूत, निरंतर सीखने की इच्छा और व्यावहारिक अनुभव की आवश्यकता होती है। यदि आप सही दिशा में मेहनत करते हैं और लगातार सीखते रहते हैं, तो आप इस तेजी से बढ़ते क्षेत्र में एक सफल करियर बना सकते हैं। Latest News in Hindi Today Hindi AI Expert #artificialintelligence #aispecialist #aicareer #techjobs #futureofwork

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WhatsApp Introduces AI Summarize Feature for Chats

WhatsApp Launches AI Summarize Feature for Chats: वाट्सऐप ने पेश किया नया AI फीचर, अब कोई मैसेज नहीं होगा अनरीड

जीवन की आपाधापी में अक्सर हम कई वाट्सऐप मैसेज को अनदेखा कर देते हैं या फिर उन्हें पढ़ ही नहीं पाते। लेकिन अब आप एक भी मैसेज को अनदेखा नहीं कर सकेंगे। क्योंकि वाट्सऐप में एक ऐसा फीचर आ गया है, जो यूजर्स को अपने सभी बिना पढ़े मैसेज को मिस नहीं करने देगा। दरअसल, यूजर्स इसके जरिए अपने सभी मैसेज को एक ही जगह देख (WhatsApp Launches AI Summarize Feature for Chats) पाएंगे। वाट्सऐप ने एक नया एआई फीचर लॉन्च किया है। इस फीचर का नाम है एआई समराइज। यह फीचर सभी अनरीड मैसेज को शार्ट में ब्रीफ कर देगा। इससे यूजर्स बिना हर मैसेज खोले जरूरी जानकारी जान सकेंगे, वो भी पूरी प्राइवेसी के साथ। इस नए फीचर की एक और खास बात ये है कि ये न सिर्फ मैसेज का सारांश देगा, बल्कि आपको यह भी सुझाव देगा कि कौन से मैसेज जरूरी हैं और किसे पढ़ने की तुरंत जरूरत नहीं। कहने की जरूरत नहीं वाट्सऐप का यह नया एआई समराइज फीचर उन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा  जो रोजाना सैकड़ों मैसेज से परेशान रहते हैं या समय की कमी के चलते सब कुछ पढ़ नहीं पाते।  यह ग्रुप चैट्स और पर्सनल दोनों तरह के मैसेज के लिए काम (WhatsApp Launches AI Summarize Feature for Chats) करेगा वाट्सऐप का यह नया एआई फीचर ग्रुप चैट्स और पर्सनल दोनों तरह के मैसेज के लिए काम (WhatsApp Launches AI Summarize Feature for Chats) करेगा। बेशक यदि आप आप भी उन लोगों में से हैं, जो कई बार जरूरी मैसेज पढ़ना भूल जाते हैं या ढेर सारे मैसेज देखकर बोर हो जाते हैं तो यह आपके लिए किसी खुशखबर से कम नहीं है। फिलहाल यह फीचर अमेरिका में कुछ यूजर्स के लिए उपलब्ध है और अभी सिर्फ अंग्रेजी भाषा को सपोर्ट करता है। लेकिन कंपनी की योजना के मुताबिक आने वाले समय में इसे दूसरी भाषाओं में भी लाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इस टेक्नोलॉजी का लाभ उठा सकें। कुल-मिलाकर वाट्सऐप के लिए इस फीचर को एआई समराइज के नाम से जोड़ा गया है। यह फीचर मेटा एआई पर बेस्ड है। यह यूजर्स को उन सभी अनरीड मैसेज का ओवरव्यू देगा, जो उन्होंने मिस कर दिए हैं या फिर उन्हें ओपन नहीं करना चाहते हैं। मेटा ने अपने ब्लॉग के जरिए बताया कि “इस फीचर के लिए नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है, जिसका नाम प्राइवेट प्रोसेसिंग है। यह फीचर यूजर्स के मैसेज को प्राइवेट और सिक्योर रखेगा, ताकि कोई और मैसेज को एक्सेस न कर सके। इसे भी पढ़ें:-  इस ऐप पर आपकी प्राइवेसी की कीमत सिर्फ 99 रूपये है, मोबाइल नंबर से डिटेल्स हो रही हैं लीक यह एआई फीचर ग्रुप और पर्सनल दोनों तरह के मैसेज पर काम (WhatsApp Launches AI Summarize Feature for Chats) करेगा वाट्सऐप के ब्लॉग पोस्ट के मुताबिक,”यह एआई फीचर ग्रुप और पर्सनल दोनों तरह के मैसेज पर काम (WhatsApp Launches AI Summarize Feature for Chats) करेगा। इसमें यूजर्स को जितने भी अनरीड मैसेज मिलेंगे, उनको यह समराइज करके दिखाएगा, ताकि कोई भी जरूरी अपडेट मिस न हो सके।” गौर करने अच्छी बात यह कि वाट्सऐप ने अपने ब्लॉग पोस्ट में  इस बात पर जोर दिया है कि “मेटा एआई यूजर के निजी मैसेज को प्राइवेट ही रखेगा। यह कंडेंस्ड विंडो केवल यूजर को ही नजर आएगी।” इसकी सुरक्षा को लेकर ब्लॉग पोस्ट में कहा गया है कि “यूजर के निजी मैसेज को प्राइवेट प्रोसेसिंग के जरिए प्रोटेक्ट किया जाएगा।” इस बीच कंपनी ने दावा किया है कि “एआई इन मैसेज को बिना पढ़े रिप्लाई करने का भी सजेशन देगा। इस फीचर को फिलहाल कंपनी ने अमेरिकी यूजर्स के लिए रोल आउट किया है। यह सिर्फ अंग्रेजी भाषा में आए मैसेज को समराइज कर पाएगा।” बता दें कि कंपनी ने यह भी दावा किया है कि यह प्राइवेट प्रोसेसिंग एक तरह का कम्प्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर है, जिसे ट्रस्टेड एग्जीक्यूशन एन्वॉयरोमेंट (टीईई) के तर्ज पर डेवलप किया गया है। वाट्सऐप ने दावा किया है कि यह पूरी तरह से सेफ है। इस फीचर को एक्सेस करने के लिए यूजर को अपने वाट्सऐप के चैट सेक्शन में जाना होगा। यहां अनरीड मैसेज वाले टैब में जितने भी मैसेज होंगे उनको बुलेट्स या फिर लिस्ट व्यू में दिखाएगा, ताकि यूजर को अपने सभी मैसेज को खोलने करने की जरूरत न पड़े और उनका कोई जरूरी मैसेज मिस भी न हो। है न कमाल का फीचर।  Latest News in Hindi Today Hindi WhatsApp Launches AI Summarize Feature for Chats #whatsapp #aifeature #chatsummarize #whatsappupdate #whatsappnews #technologynews #aitech

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Pakistan suicide bombing, 13 soldiers killed

13 Soldiers Killed in Pakistan Suicide Bombing Attack: पाकिस्तान में हुए आत्मघाती हमले में सेना के 13 जवानों की मौत, 10 घायल

आतंकियों को पनाह देने वाला पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान अब खुद ही आतंवाद का शिकार होने लगा है। वहाँ आये दिन बम धमाके में लोगों की जान जाती रहती है। ताजा मामला है पाकिस्तान के उत्तर पश्चिमी हिस्से खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के उत्तरी वजीरिस्तान जिले का जहाँ एक आत्मघाती हमले में 13 सैनिकों की मौत हो (13 Soldiers Killed in Pakistan Suicide Bombing Attack) गई। जानकारी के मुताबिक आत्मघाती हमलावर विस्फोटक से भरे वाहन में सवार था। और उसने सेना के काफिले को सीधी टक्कर मार दी। इस टक्कर के बाद हुए धमाके में पाकिस्तानी सेना के 13 जवानों की मौत हो गई। इस हमले में 10 गंभीर रुप से घायल हुए हैं और 19 आम नागरिक भी चोटिल हुए हैं।  धमाके में 13 सैनिक मारे गए, 10 सैन्यकर्मी और 19 नागरिक घायल हो (13 Soldiers Killed in Pakistan Suicide Bombing Attack) गए इस पूरे मामले पर स्थानीय सरकारी अधिकारी ने बताया कि एक “आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से भरे वाहन को सैन्य काफिले में घुसा दिया। इसके बाद हुए धमाके में 13 सैनिक मारे गए, 10 सैन्यकर्मी और 19 नागरिक घायल हो (13 Soldiers Killed in Pakistan Suicide Bombing Attack) गए। इस हमले में आस-पास के घरों को भी नुकसान पहुंचा है।” पुलिस अधिकारी के मुताबिक, “विस्फोट के कारण दो घरों की छतें भी गिर गईं, जिससे छह बच्चे घायल हो गए।” अब तक किसी भी समूह ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। पीटीआई की माने तो घटना के समय सैन्य आवाजाही के कारण इलाके में कर्फ्यू लगाया गया था। सुरक्षा एजेंसियों ने विस्फोट के बाद राहत अभियान शुरू किया है। गौरतलब हो कि खैबर पख्तूनख्वा प्रांत पाकिस्तान के सबसे तनावपूर्ण इलाकों में से एक है। यहां अक्सर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के हमले होते रहे हैं। यही नहीं, पाकिस्तान में पिछले कुछ समय में आतंकी हमलों में बढ़ोतरी हुई है।  यह हमला अफगानिस्तान सीमा के पास (13 Soldiers Killed in Pakistan Suicide Bombing Attack) हुआ यहाँ गौर करने वाली बात यह कि पिछले एक साल में पाकिस्तानी सेना पर कई आतंकी हमले हुए हैं। दिसंबर 2024 में एक हमले में 16 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे और 8 घायल हुए थे। यह हमला अफगानिस्तान सीमा के पास (13 Soldiers Killed in Pakistan Suicide Bombing Attack) हुआ। इस हमले की जिम्मेदारी टीटीपी ने ली। फिर जनवरी में बलूच लिबरेशन आर्मी ने केच में 35 हमले किए।  इन हमलों में 94 सैनिकों की मौत का दावा किया गया। इसके बाद जून में ग्वादर के सयाबद में बलोच आर्मी ने हमला किया था, जिसमें 16 सैनिकों के मारे जाने की खबर सामने आई थी। खासकर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में आतंकी हमले बड़ी तेजी से बढ़े हैं। कहने की जरूरत नहीं, ऐसे में एक और बड़ा हमला पाकिस्तान की चिंता बढ़ाने वाला है। बेशक यह दिखाती है कि पिछले एक वर्ष में पाकिस्तानी सेना को कई आतंकवादी हमलों का सामना करना पड़ा है। इसे भी पढ़ें:- अमेरिका ने कनाडा से तोड़े व्यापारिक रिश्ते, डिजिटल सर्विस टैक्स बना विवाद की जड़ पाकिस्तानी सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए आतंकवादियों को मार गिराया (13 Soldiers Killed in Pakistan Suicide Bombing Attack) था जियो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल मार्च में पाकिस्तानी सेना ने बड़ा दावा करते हुए कहा था कि उसने टीटीपी से संबंध रखने वाले 10 संदिग्ध आतंकवादियों को मार गिराया (13 Soldiers Killed in Pakistan Suicide Bombing Attack) है। दरअसल दक्षिणी वजीरिस्तान स्थित जंडोला चेकपोस्ट के पास फ्रंटियर कोर के शिविर पर एक आत्मघाती हमला हुआ था। इसके बाद पाकिस्तानी सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए आतंकवादियों को मार गिराया था। एएफपी के मुताबिक साल की शुरुआत से खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान दोनों में सरकार से लड़ने वाले सशस्त्र समूहों द्वारा अब तक लगभग 290 लोग, जिनमें ज्यादातर सुरक्षा अधिकारी हैं, मारे गए हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news 13 Soldiers Killed in Pakistan Suicide Bombing Attack #pakistan #suicidebombing #soldierskilled #terrorattack #breakingnews #pakistanarmy #worldnews

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Illegal arms factory

Illegal Arms Factory Busted in Lucknow: लखनऊ से धरे गए कालीन भैया, 72 वर्षीय हकीम के यहाँ से पुलिस ने बरामद असलहों की फैक्ट्री

मिर्जापुर के कालीन भइया का किरदार तो काल्पनिक था लेकिन छापामारी में पुलिस ने असली कालीन भइया को धर लिया है। दरअसल, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मिर्जागंज में पुलिस ने हकीम के घर छापे मारी कर भारी मात्रा में हथियारों का जखीरा बरामद किया है। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि सलाउद्दीन के घर में अवैध हथियारों का भंडारण हो (Illegal Arms Factory Busted in Lucknow) रहा है। मिर्जागंज निवासी सलाउद्दीन के घर पर कई थानों की पुलिस फोर्स ने संयुक्त रूप से छापेमारी की।   पुलिस को 312 और 315 बोर की सैकड़ों बंदूकें, डीबीबीएल रायफल, पिस्टल और भारी मात्रा में कारतूस बरामद (Illegal Arms Factory Busted in Lucknow) हुए जानकारी के मुताबिक हकीम के घर सैंकड़ों अवैध असलाह और कारतूस बरामद किया है। छापे के दौरान पुलिस को 312 और 315 बोर की सैकड़ों बंदूकें, डीबीबीएल रायफल, पिस्टल और भारी मात्रा में कारतूस बरामद (Illegal Arms Factory Busted in Lucknow) हुए। यही नहीं, उसके घर से हथियार बनाने के उपकरण भी मिले हैंकहने की जरूरत नहीं, इतनी भारी मात्रा में हथियार देखकर पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए। असलहे और कारतू इतने थे कि पुलिस को 20 बोरों में भरकर ले जाना पड़ा। इस मामले में पुलिस ने 72 वर्षीय हकीम सलाउद्दीन उर्फ लाला को हिरासत में लिया है।  इस कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में सनसनी मच गई है। हैरानी की बात यह कि जिस जगह से यह हथियार बनाने वाली फैक्ट्री बरामद हुई है, वह जगह मलिहाबाद थाने से मुश्किल से 100 मीटर की दूरी पर है। फिलहाल हकीम के घर और उसके आसपास तथा गांव में फोर्स तैनात कर दी गई है। मामले की गंभीरता को देख एटीएस भी अब एक्टिव हो गई है।  अवैध रूप से असलहे बनाकर उनकी सप्लाई की जा रही (Illegal Arms Factory Busted in Lucknow) थी छापेमारी के दौरान पुलिस को सलाउद्दीन के घर से हथियार ही नहीं बल्कि हथियार बनाने के उपकरण भी मिले। इससे पुलिस का शक गहरा गया कि हकीम का घर न सिर्फ हथियारों के भंडारण का अड्डा था, बल्कि यहां से अवैध रूप से असलहे बनाकर उनकी सप्लाई भी की जा रही (Illegal Arms Factory Busted in Lucknow) थी। पुलिस ने सलाउद्दीन, उनकी पत्नी, बेटी और एक अन्य युवक से पूछताछ की। लेकन शुरुआती जांच में सिर्फ सलाउद्दीन को ही हिरासत में लिया गया है। बात करें 72 वर्षीय सलाउद्दीन उर्फ लाला की तो उनका परिवार मिर्जागंज में बेहद साधारण जीवन जीता था। परिवार में पत्नी और दो बेटियां हैं। एक बेटी नॉर्वे में रहती है, तो दूसरी लखनऊ के इंटीग्रल विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रही है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक सलाउद्दीन पहले मिर्जागंज में डाकघर के पास दवाखाना चलाता था। लेकिन उसके इस काले बाजार ने सभी को चौंका दिया।  इसे भी पढ़ें:- मध्य प्रदेश में कर्ज चुकाने के लिए पत्नी को किया दोस्त के हवाले, दोस्त ने लूटी इज्जत  अवैध हथियारों का नेटवर्क काफी बड़ा हो (Illegal Arms Factory Busted in Lucknow) सकता है इस पूरे मामले पर एडीसीपी जितेंद्र दुबे ने बताया कि “सलाउद्दीन के घर से बरामद असलहे, कारतूस और उपकरणों की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ये हथियार कहां से आए और इन्हें कहां सप्लाई किया जा रहा था? फ़िलहाल सलाउद्दीन से पूछताछ में कई अहम खुलासे होने की उम्मीद है। आशंका ये भी है कि यह अवैध हथियारों का नेटवर्क काफी बड़ा हो (Illegal Arms Factory Busted in Lucknow) सकता है।” बेशक इलाके में इतने बड़े पैमाने पर अवैध हथियारों की बरामदगी ने स्थानीय लोगों को स्तब्ध कर दिया है। लोग ये सोचकर हैरान हैं कि एक हकीम, जो इलाज के लिए जाना जाता था। कैसे इस खतरनाक कारोबार में शामिल हो गया? फ़िलहाल पुलिस ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है। और मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही आगे चलकर पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ होगा सकेगा।  Latest News in Hindi Today Hindi  Illegal Arms Factory Busted in Lucknow #lucknowcrime #illegalarms #kaleenbhaiya #weaponfactory #uppews #lucknownews #hakeemarrest

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US Cuts Trade Ties with Canada Over Digital Tax

अमेरिका ने कनाडा से तोड़े व्यापारिक रिश्ते, डिजिटल सर्विस टैक्स बना विवाद की जड़

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) ने एक बड़ा और चौंकाने वाला कदम उठाते हुए कनाडा के साथ सभी व्यापारिक संबंध तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिए हैं। ट्रंप प्रशासन ने कनाडा को व्यापार के लिए कठिन देश करार देते हुए यह फैसला लिया है। इस निर्णय के पीछे कनाडा की ओर से लगाए गए डिजिटल सर्विस टैक्स (Digital Service Tax) और अत्यधिक टैरिफ को जिम्मेदार ठहराया गया है, जिससे अमेरिकी कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। ट्रंप ने सोहल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल (Truth Social) पर पोस्ट कर लिखा है कि जब कनाडा अमेरिकी डेयरी उत्पादों पर 400 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकता है और अब डिजिटल सेवाओं पर कर थोप रहा है, तो अमेरिका ऐसे देश के साथ व्यापारिक रिश्ता क्यों बनाए रखे? इस फैसले से अमेरिका-कनाडा (America-Canada) के लंबे समय से चले आ रहे व्यापारिक संबंधों को तगड़ा झटका लगा है। कनाडा पर संभावित असर कनाडा की अर्थव्यवस्था (Canada’s Economy) में अमेरिका की हिस्सेदारी अत्यधिक है। साल 2024 में कनाडा ने कुल निर्यात का लगभग 75% और आयात का 50% हिस्सा अमेरिका के साथ किया था। अमेरिका-कनाडा (America-Canada) का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा है। ऐसे में अमेरिका के साथ व्यापार का टूटना कनाडा के लिए बहुआयामी संकट खड़ा कर सकता है। समस्या खासकर ऊर्जा, ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्र इस निर्णय से सीधे प्रभावित होंगे। कनाडा की GDP में 10 से 15 प्रतिशत तक की गिरावट आने की संभावना जताई जा रही है। यह गिरावट बेरोजगारी और आर्थिक अस्थिरता को जन्म दे सकती है। ओंटारियो, क्यूबेक जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में लाखों नौकरियों पर संकट मंडरा सकता है। तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता वस्तुओं पर संकट अमेरिका द्वारा रोजाना लगभग 4 मिलियन बैरल तेल कनाडा से आयात किया जाता था। इस आयात के रुकते ही कनाडा की ऑयल और एनर्जी कंपनियों को भारी नुकसान हो सकता है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका से इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और उपभोक्ता वस्तुओं का निर्यात भी बंद हो जाएगा, जिससे कनाडा में उत्पादन लागत और महंगाई में इजाफा होगा। कनाडा को विकल्प के रूप में चीन, भारत या यूरोप जैसे देशों के साथ नए व्यापार समझौते करने होंगे, जो न केवल समय लेगा बल्कि जियोपॉलिटिकल के अनुसार भी चुनौतीपूर्ण भी होगा। ऑटोमोबाइल सेक्टर को बड़ा झटका कनाडा का ऑटो सेक्टर (Canada’s Auto Sector) भी इस फैसले से खासा प्रभावित होगा। अमेरिका से व्यापार रुकने के कारण फोर्ड, जनरल मोटर्स (GM), स्टेलेंटिस जैसी बड़ी कंपनियों के संचालन पर असर पड़ेगा। संभावनाएं हैं कि इन कंपनियों को या तो उत्पादन कम करना पड़े या फिर ऑफिस बंद करने पड़ें। इससे न केवल रोजगार पर असर पड़ेगा, बल्कि तकनीकी निवेश पर भी ब्रेक लग जाएगा। कमजोर होता कनाडाई डॉलर और निवेश में गिरावट इस निर्णय के चलते कनाडाई डॉलर पर दबाव बढ़ेगा और उसकी वैल्यू में गिरावट हो सकती है। इसका सीधा असर आयातित वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे आम जनता को महंगाई का सामना करना पड़ेगा। अमेरिका से निवेश बंद होने के कारण कनाडा के इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट्स भी रुक सकते हैं। इसे भी पढ़ें:-  ‘जरूरत पड़ने पर बिना सवाल ईरान पर फिर से बरसाएंगे बम’, सीनेट में समर्थन मिलने के बाद बोले ट्रंप रणनीतिक साझेदारियों पर भी खतरा अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको के बीच हुआ USMCA (पूर्व NAFTA) समझौता भी इस निर्णय से टूट सकता है। इससे न केवल व्यापारिक बल्कि सामरिक सहयोग पर भी असर पड़ेगा। NORAD और NATO जैसे रक्षा संगठनों में साझेदारी कमजोर हो सकती है, जिससे उत्तर अमेरिका की क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) का यह फैसला केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से भी बड़े प्रभाव वाला है। कनाडा के लिए अमेरिका के बिना व्यापार चलाना एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य होगा। जहां एक ओर अमेरिका कनाडा पर कर नीति को लेकर सख्ती बरत रहा है, वहीं कनाडा को अपने व्यापारिक रिश्तों को नए सिरे से परिभाषित करना होगा। निकट भविष्य में दोनों देशों के बीच रिश्तों में तनाव और गहराने की संभावना है, जिसका असर वैश्विक स्तर पर भी देखा जा सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Truth Social #uscanadadispute #digitalservicestax #ustraderelations #canadataxrow #tradeconflict

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Trump Warns of Bombing Iran Again if Needed

‘जरूरत पड़ने पर बिना सवाल ईरान पर फिर से बरसाएंगे बम’, सीनेट में समर्थन मिलने के बाद बोले ट्रंप

इजरायल और ईरान युद्ध (Israel–Iran War) के दौरान अमेरिका ने भी ईरान पर बम गिराए थे। अमेरिका ने यह बम ईरान के तीन प्रमुख न्यूक्लियर साइट पर गिराए थे और दावा किया था कि इस हमले में ईरान के परमाणु ठिकाने पूरी तरह से नष्ट हो गए, वहीं ईरान का दावा है कि उसके परमाणु ठिकानों को सिर्फ मामूली नुकसान हुआ है। हालांकि अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) इस हमले को लेकर अपने ही देश में अपने विरोधियों के निशाने पर हैं। अमेरिका के कांग्रेस का ऊपरी सदन में अमेरिकी हमले को लेकर बहस भी हुई और डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को ईरान पर आगे हमला करने से रोकने का प्रयास भी हुआ। लेकिन विपक्षी पार्टी डेमोक्रेटिक पार्टी का यह प्रयास विफल हो गया। डेमोक्रेटिक पार्टी सीनेट में अमेरिकी राष्ट्रपति के युद्ध शक्तियों को फिर से स्थापित करने का प्रयास लेकर आई थी। डेमोक्रेटिक पार्टी का दावा था कि राष्ट्रपति ट्रंप ने बिना कांग्रेस से अनुमति लिए ईरान पर हमला (Israel–Iran War) किया था, लेकिन डेमोक्रेटिक सांसदों के इस प्रस्ताव को रिपब्लिकन पार्टी ने विफल कर दिया। इस प्रस्ताव को वर्जीनिया के डेमोक्रेिटक सीनेटर टिम कैन ने रखा था। इसमें टिम कैन ने लिखित में प्रस्ताव दिया था कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर राष्ट्रपति ट्रंप ने नियम का उल्लंघन किया है। अगर आगे इस तरह की सैन्य कार्रवाई शुरू की जाए तो पहले ट्रंप को कांग्रेस से अनुमति लेनी होगी।  ईरान पर फिर हमला कर सकते हैं- ट्रंप सीनेट में प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भी अपनी बात रखी। इस दौरान जब उनसे पूछे गया कि क्या वह आवश्यक समझे जाने पर फिर से ईरान के न्यूक्लियर साइट पर बमबारी करने पर विचार कर सकते हैं, तो इस पर ट्रंप ने कहा, ‘हां, जरूर बिना किसी सवाल के। अगर जरूरत पड़ी तो वह बगैर सोचे ईरान पर दोबारा सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं।’ वहीं, सीनेट में इस प्रस्ताव को रखने को विपक्ष की ट्रंप को घेरने की एक लंबी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।  सीनेट में ट्रंप को मिला पूरा समर्थन  बता दें कि सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के पास 53-47 का बहुमत हैं। जब इस प्रस्ताव को रखा गया तो वे राष्ट्रपति के समर्थन में खड़े हो गए। इन सीनेटर का कहना था कि ईरान न सिर्फ इजरायल के लिए एक बड़ा खतरा है, बल्कि अमेरिका समेत पूरी दुनिया के लिए खतरा है। इसलिए ईरान तक कठोर कार्रवाई जरूरी था। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान पर हमला करने का जो निर्णाय लिया वह ठीक था, इस कार्रवाई के कारण ही ईरान का परमाणु कार्यक्रम कई साल पीछे चला गया है। इस दौरान रिपब्लिकन सीनेटर एकमत होकर कांग्रेस की मंजूरी लिए बिना ईरान के तीन न्यूक्लियर साइट पर अमेरिकी बमबारी करने के फैसले का समर्थन किया।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? ट्रंप अगर डील करना चाहते हैं तो सम्मान करें- ईरान  डोनाल्ड ट्रंप एक तरफ जहां अपने ही देश में घेरे जा रहे हैं, वहीं बड़बोलेपन की वजह से ईरान भी उन पर पलटवार कर रहा है। ईरानी विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने कहा है कि अगर ट्रंप ईरान के साथ वास्तव में कोई समझौता करना चाहते हैं तो उन्हें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के प्रति सम्मानजनक भाषा का उपयोग करा होगा। दरअसल, ट्रंप ने कहा था कि अयातुल्ला खामेनेई को अपमानजनक मौत मिलने वाली थी, लेकिन हमने बचा लिया। इसी के जवाब में ईरानी विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ‘ईरानी लोगों का आत्मसम्मान और दृढ़ता खून में है। हमारी राष्ट्रीय भावना बेहद सीधी और स्पष्ट है। हम अपनी स्वतंत्रता को समझते और पहचानते हैं। हम किसी को अपने भाग्य का निर्धारण करने की इजाजत नहीं देते। इसके लिए हम अपनी आखिरी सांस तक लड़ते हैं। अगर ट्रंप को ईरान के साथ कोई समझौता करना है, तो उन्हें सम्मानपूर्वक बात करनी होगी।  Latest News in Hindi Today Hindi news Donald Trump #trump #iran #bombing #senate #usnews #worldnews #middleeast

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Pakistan approached Court of Arbitration on Indus Water Treaty

सिंधु जल समझौते पर कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन पहुंचा पाकिस्तान तो भारत ने दे दिया करारा झटका

सिंधु जल समझौते (Indus Water Treaty) को भारत द्वारा स्थगित करने के बाद से ही पाकिस्तान कभी युद्ध की धमकी दे रहा है तो कभी बातचीत की भीख मांग रहा है। लेकिन इससे भी दाल नहीं गली तो वह सिंधु जल समझौते (Indus Water Treaty) को लेकर नया ड्रामा शुरू कर दिया था, लेकिन यहां भी भारत को तगड़ा झटका दिया। दरअसल, जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा और रतले जलविद्युत परियोजनाओं (Hydroelectric Projects) को लेकर पाकिस्तान ने कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (Court of Arbitration) में भारत की शिकायत की थी। जिसे भारत ने गैरकानूनी और अवैध बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया। भारत ने कहा है कि इस कोर्ट की न तो कानूनी मान्यता है और न ही यह मुद्दा इसके अधिकार क्षेत्र में आता है।  बता दें कि, साल 1960 में भारत और पाकिस्तान ने वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में सिंधु जल समझौता (Indus Water Treaty) किया था। इस संधि के तहत सिंधु नदी बेसिन की 6 नदियों में से 3 पूर्वी नदियों (ब्यास, रावी और सतलुज) का पानी भारत को और 3 पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम और चिनाब) का पानी पाकिस्तान को मिला था। किशनगंगा नदी झेलम की एक उपनदी है और इस पर भारत का अधिकार है, लेकिन पाकिस्तान लंबे समय से भारत के किशनगंगा (330 मेगावाट) और रतले (850 मेगावाट) परियोजना पर रोक लगाने की मांग कर रहा है। पाकिस्तान का दावा है कि भारत की यह परियोजनाएं सिंधु जल समझौते का उल्लंघन कर रही है। इसकी वजह से झेलम में आने वाला पानी प्रभावित हो रहा है। वहीं भारत का कहना है कि यह दोनों प्रोजेक्ट ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ (पानी नहीं रोका जाता) तकनीक पर आधारित है, जो समझौते के किसी भी नियम को नहीं तोड़ता।  पाकिस्तान के कोर्ट ड्रामे पर भारत का करारा जवाब भारत के इस प्रोजेक्ट पर रोक लगाने के लिए ही पाकिस्तान कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (Court of Arbitration) पहुंचा था। पाकिस्तान ने कोर्ट से इन प्रोजेक्ट पर ‘सप्लीमेंटल अवॉर्ड’ (पूरक फैसला) की मांगा की थी, लेकिन भारत ने इस कोर्ट को ही अवैध बता दिया। भारतीय विदेश मंत्रालय (Indian Foreign Ministry) ने बयान जारी कर कहा, ‘यह कोर्ट गैरकानूनी रूप से बनाया गया है और इसके किसी भी फैसले का न तो कानूनी आधार है और न ही बाध्यता। इस अवैध कोर्ट के फैसले हमेशा से शून्य और अमान्य रहे हैं।’ इस दौरान विदेश मंत्रालय Indian Foreign Ministry ने यह भी बताया कि विश्व बैंक द्वारा नियुक्त तटस्थ विशेषज्ञ मिशेल लिनो को भारत ने पत्र लिखकर मौजूदा विवाद समाधान प्रक्रिया को स्थगित करने की मांग की है। भारत अब न तो पाकिस्तान को इन नदियों से जुड़ा कोई लिखित दस्तावेज या जानकारी देगा और न ही संयुक्त बैठक करेगा।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? भारत ने क्या दिया है पाकिस्तान को संदेश? भारत ने पाकिस्तान को यह साफ कर दिया है कि सिंधु जल समझौता पूरी तरह से स्थगित कर दिया गया है। भारत अब पूर्वी नदियों के साथ पश्चिमी नदियों के पानी को भी पूरा इस्तेमाल करने का हक रखता है। खासकर तब, जब पाकिस्तान लगातार भारत में आतंकी घटनाओं को अंजाम देने की कोशिश कर रहा है। भारत अब न सिर्फ पाकिस्तान की हर चाल को नाकाम कर रहा है, बल्कि यह भी दिखा दिया कि वह अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के लिए किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत पश्चिमी नदियों के पानी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करके पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में पानी की कमी को पूरा कर सकता है। भारत ने इसके लिए प्रयास भी शुरू कर दिए हैं। इन राज्यों में पश्चिमी नदियों का पानी पहुंचाने के लिए भारत नए नहर बनाने पर विचार कर रहा है। पाकिस्तान को मिर्ची लगी हुई है और वहां के नेता युद्ध की धमकी दे रहे हैं। जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा है कि, ‘पाकिस्तान की ये सारी कोशिशें महज गीदड़भभकी हैं। भारत पहले की तरह अपने रुख पर अडिग है।’ Latest News in Hindi Today Hindi news Hydroelectric Projects Indian Foreign Ministry #induswatertreaty #pakistannews #indiaresponse #courtofarbitration #sindhuwaterdispute

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