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16 Billion Apple & Google Passwords Leaked by Hackers: हैकरों का आतंक, 16 अरब लोगों के एपल और गूगल अकाउंट पासवर्ड किये लीक

आज के डिजिटल युग में ऑनलाइन सुरक्षा बेहद जरूरी है अन्यथा पलक झपकते ही आप अपना सारा का सारा डेटा गंवा सकते हैं। आप अपनी सभी ख़ुफ़िया और निजी जानकारियों से हाथ धो सकते हैं। और यदि हम सतर्क रहते हुए सही समय पर सही कदम उठाएं, तो साइबर हमलों से खुद को बचा सकते हैं। खैर, आपको बता दें कि एक बहुत ही बड़े डेटा लीक की खबर आ रही है। यदि आप भी एप्पल, गूगल और फेसबुक जैसे अकाउंट्स का इस्तेमाल करते हैं, तो ये खबर खास आपके काम की हो सकती है। दरअसल, हालिया रिपोर्ट में एक खुलासा हुआ है कि 16 अरब लोगों का पासवर्ड और लॉग-इन क्रेडेंशियल लीक हो गए (16 Billion Apple & Google Passwords Leaked by Hackers) हैं। चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक न सिर्फ डेटा लीक हो गए हैं बल्कि यह ऑनलाइन सेल के लिए उपलब्ध भी हैं। इसमें गूगल, टेलीग्राम, गिटहब, एपल, फेसबुक और अन्य सरकारी एजेंसियों के पासवर्ड और लॉग-इन क्रेंडिशियल शामिल हैं। ये अब तक की सबसे बड़ी चोरी मानी जा रही है। ऐसे में इस खबर ने लोगों को सोचने के लिए मजबूर कर दिया है कि क्या गूगल, फेसबुक और एपल जैसी कंपनियों के पास अकाउंट वाकई सुरक्षित हैं भी या नहीं? यह अब तक के सबसे बड़े साइबर सुरक्षा उल्लंघनों में से एक माना जा रहा (16 Billion Apple & Google Passwords Leaked by Hackers) है साइबर सिक्योरिटी रिसचर्स ने पाया कि 16 अरब से ज्यादा क्रेडेंशियल डार्क वेब पर ऑनलाइन सेल के लिए उपलब्ध हैं। यह अब तक के सबसे बड़े साइबर सुरक्षा उल्लंघनों में से एक माना जा रहा (16 Billion Apple & Google Passwords Leaked by Hackers) है। कहने की जरूरत नहीं इस लीक से करोड़ों यूजर्स की निजी और गोपनीय जानकारी मसलन, ईमेल, सोशल मीडिया और बैंक अकाउंट्स तक खतरे में पड़ सकते हैं।  इससे जुड़े एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर वक्त रहते इससे निपटा नहीं गया तो लोगों को फिशिंग अटैक, आईडी थेफ्ट और यहां तक कि अकाउंट का कंट्रोल तक खोना पड़ सकता है। फोर्ब्स की रिपोर्ट की माने तो वर्ष 2025 की शुरुआत में शुरू हुई जांच में शामिल शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि बड़े पैमाने पर पासवर्ड लीक के लिए कई इन्फोस्टेलर मैलवेयर जिम्मेदार हैं। पासवर्ड का चोरी होना छोटी बात नहीं है, क्योंकि इससे कई बड़े खतरे हो सकते हैं। वजह यही जो गूगल ने अरबों यूजर्स को तुरंत अकाउंट का पासवर्ड चेंज करने और पासकी का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। साथ ही एफबीआई ने चेतावनी दी है कि कोई भी अजनबी लिंक या ईमेल पर क्लिक न करें, खासकर वे जो लॉगिन डिटेल मांगते हैं।   इसे एक खास किस्म के मैलवेयर इन्फोस्टीलर्स की मदद से चुराया गया (16 Billion Apple & Google Passwords Leaked by Hackers) है साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह सिर्फ पुराना डेटा ही नहीं, बल्कि नई और अच्छी तरह से व्यवस्थित जानकारी है, जिसे एक खास किस्म के मैलवेयर इन्फोस्टीलर्स की मदद से चुराया गया (16 Billion Apple & Google Passwords Leaked by Hackers) है। ये मैलवेयर चुपचाप आपके डिवाइस से यूजरनेम और पासवर्ड चुरा लेते हैं और हैकर तक पहुंचा देते हैं। इसके बाद या तो हैकर खुद इस्तेमाल करता है या डार्क वेब पर बेच देता है। और तो और लीक हुई जानकारी को इस तरह रखी गई है कि वेबसाइट लिंक के साथ यूजरनेम और पासवर्ड भी दिया गया है। कारण यही जो हैकर्स के लिए इसका इस्तेमाल करना बेहद आसान हो गया है। ध्यान देने वाली बात यह कि ये पासवर्ड अब डार्क वेब पर बेहद सस्ते दाम पर मिल मिल रहे हैं। यानी कोई भी सामान्य व्यक्ति भी इन्हें खरीदकर गलत इस्तेमाल कर सकता है। बेशक बात  इंकार नहीं किया जा सकता कि इससे आम यूजर ही नहीं, कंपनियां और सरकारी संस्थान भी खतरे में हैं। ऐसे में  बड़ा सवाल यह कि इससे बचने के लिए करें क्या? इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इससे खुद को बचाने के लिए आपको तुरंत निम्नलिखित ये कदम (16 Billion Apple & Google Passwords Leaked by Hackers) उठाने चाहिए Latest News in Hindi Today Hindi 16 Billion Apple & Google Passwords Leaked by Hackers #AppleHack #GooglePasswordLeak #DataBreach2025 #Cybersecurity #Hackers #16BAccountsLeaked #TechNews #PrivacyAlert

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Netanyahu Threatens Khamenei, Russia Enters Iran War: ट्रंप के बाद नेतन्याहू ने दी खामेनेई को धमकी, अमेरिका के बाद ईरान-इजरायल युद्ध में रूस की भी हुई इंट्री

बीतते समय के साथ-साथ ईरान-इजरायल तनाव लगातार जारी है। आठवें दिन भी लगातार तनाव बना हुआ है। जारी तनाव के बीच गुरुवार को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा, इजरायली हमलों से कोई भी सुरक्षित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई भी निशाने पर हो सकते हैं। नेतन्याहू ने कहा कि युद्ध के दौरान शब्दों का चयन सावधानी से करना (Netanyahu Threatens Khamenei, Russia Enters Iran War) चाहिए। दरअसल, नेतन्याहू ने यह टिप्पणी दक्षिणी इजरायली शहर बीरशेबा में सोरोका मेडिकल सेंटर के दौरे के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस में की। गौरतलब हो कि गुरुवार सुबह ईरान ने मिसाइल हमला किया था। ईरानी हमले से तिलमिलाए नेतन्याहू ने कहा, मैंने निर्देश दिए हैं कि कोई भी इससे अछूता नहीं है। इस दौरान उन्होंने कहा कि वह कुछ बोलने में नहीं, बल्कि कार्रवाई करके दिखाने में भरोसा करते हैं।  युद्ध के दौरान शब्दों का चयन सावधानी से किया (Netanyahu Threatens Khamenei, Russia Enters Iran War) चाहिए- प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू हालाँकि इस बीच नेतन्याहू ने यह भी कहा कि युद्ध के दौरान शब्दों का चयन सावधानी से किया चाहिए और कार्रवाई में सटीकता होनी चाहिए। सभी विकल्प खुले हैं। उन्होंने बात को वहीं खत्म करते हुए कहा कि प्रेस में इस बारे में बात न करना ही बेहतर है। इस दौरान प्रधानमंत्री ने यह भी दोहराया कि ईरान में इजरायल की कार्रवाई उसके परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल भंडार के खिलाफ थी, न कि ईरान की तरह निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाने के (Netanyahu Threatens Khamenei, Russia Enters Iran War) लिए। अस्पतालों पर बमबारी हुई बमबारी पर नेतन्याहू ने कहा कि वे उन अस्पतालों पर बमबारी करते हैं, जहां लोग खतरे से बच नहीं सकते। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसे कार्यशील लोकतंत्र और इन हत्यारों के बीच का अंतर है, जो कानून का पालन करता है। ट्रंप ने गुरुवार को ईरान के खिलाफ हमले को दी (Netanyahu Threatens Khamenei, Russia Enters Iran War) थी मंजूरी  बता दें कि ईरान और इजरायल युद्ध पर अमेरिका भी अपनी नजर बनाए हुए है। जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को बंद और बिना शर्त आत्मसमर्पण करने हेतु कहा था। इसके अलावा लगातार ईरान पर दबाव बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रंप ने गुरुवार को ईरान के खिलाफ हमले को मंजूरी दे दी (Netanyahu Threatens Khamenei, Russia Enters Iran War) थी। खैर, उन्होंने अधिकारियों को अंतिम फैसले के लिए रुकने के लिए कहा था। इस पूरे मामले पर बोलते हुए व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि ट्रंप अगले दो हफ्ते में ईरान को लेकर फैसला कर सकते हैं। इसे भी पइसे भी पढ़ें:- ट्रंप ने पाकिस्तान को बताया क्षेत्रीय शांति में अहम प्लेयर, मुनीर संग ईरान-इजरायल संघर्ष पर की चर्चा! ईरानी जनता कभी घुटने नहीं टेकेगी- ईरानी सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई ध्यान देने वाली बात यह कि ट्रंप के आत्मसमर्पण के प्रस्ताव को ईरानी सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई ने यह कहते हुए ठुकरा था कि जो लोग ईरान के इतिहास और उसकी संघर्षशीलता से वाकिफ हैं, वे हमें कभी धमकाने की कोशिश नहीं करेंगे। ईरानी जनता कभी घुटने नहीं टेकेगी। समर्पण करना तो दूर उन्होंने ट्रंप को सीधे चेतावनी दी कि अगर अमेरिका इजरायल की मदद करने की कोशिश करता है या सैन्य हस्तक्षेप करता है, तो उसे ऐसे नुकसान उठाने पड़ेंगे जो पूरी तरह से कभी भर नहीं पाएंगे।  अमेरिका इस संघर्ष से (Netanyahu Threatens Khamenei, Russia Enters Iran War) ही रहे दूर- रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन महत्वपूर्ण बात यह कि अमेरिका के बाद इजरायल-ईरान युद्ध में रूस की भी एंट्री हो (Netanyahu Threatens Khamenei, Russia Enters Iran War) चुकी है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने डोनाल्ड ट्रंप को खुली चेतावनी देते हुए कहा, अमेरिका इस संघर्ष से दूर ही रहे। पुतिन ने ईरान पर अमेरिकी हमले की अटकलों को लेकर कहा कि हम वाशिंगटन को ऐसे काल्पनिक विकल्पों के खिलाफ भी आगाह करते हैं। ऐसा कोई भी कदम पूरे हालात को गंभीर रूप से अस्थिर कर सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Netanyahu Threatens Khamenei, Russia Enters Iran War #Netanyahu #Khamenei #Russia #IranIsraelWar #Trump #MiddleEastConflict #GlobalTension #WW3Alert

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‘भारत के हमले से नूर खान और शोरकोट एयरबेस तबाह…’ पाकिस्तान के डिप्टी पीएम ने कबूला सच्चाई, खोली अपने ही झूठ की पोल

पाकिस्तान ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) से हुए भारी नुकसान को छुपाने की लाख कोशिश कर ले, लेकिन उनके नेताओं के मुंह से सच निकल ही जाता है। अब एक बार फिर पाकिस्तान ने भारत के सफलता का खुलासा कर दिया है। इस बार पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री इशाक डार (Ishaq Dar) ने सच को स्वीकार्य किया है। डार ने पाकिस्तान के GEO न्यूज को इंटरव्यू देते हुए भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) की सफलता का खुलासा किया। उन्होंने माना कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान के दो सबसे अहम एयरबेस- नूर खान और शोरकोट को भारी नुकसान हुआ है। भारत के इस विध्वंसक हमले के कारण पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई की योजना पूरी तरह से ध्वस्त हो गई। इशाक डार (Ishaq Dar) का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान इस सैन्य संघर्ष को अपनी जीत के रूप में पेश कर रहा है और अभी तक अपने नुकसान को सार्वजनिक रूप से स्वीकार्य नहीं किया है।  Pakistani deputy PM Ishaq Dar claims India hit Nur Khan and Shorkot airbases. He says Saudi Prince Faisal bin Salman asked if he could tell Jaishankar that Pakistan is ready to stop— revealing that it wasn't just the US that Pakistan went to at that the time to convince India… pic.twitter.com/uV3wU7av13 — Shubhangi Sharma (@ItsShubhangi) June 19, 2025 हम पलटवार की तैयारी में थे, लेकिन उससे पहले भारत ने कर दिया हमला- डार इशाक डार (Ishaq Dar) ने इस इंटरव्यू में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि भारत ने जब ब्रह्मोस मिसाइलों से उसके ऐयरबेस पर हमला किया, तब पाकिस्तान खुद भारत पर एक जवाबी सैन्य कार्रवाई की योजना बना रहा था। लेकिन भारत ने जिस तरह से सटीक हमला किया उससे पाकिस्तान (Shehbaz Sharif) की रणनीति निष्प्रभावी हो गई। क्योंकि भारत के हमले में दोनों एयरबेस को काफी नुकसान पहुंचा और वे किसी भी सैन्य ऑपरेशन लायक नहीं रह गए। इशाक डार ने यह भी स्वीकार्य किया कि भारत का यह हमला पाकिस्तान के लिए “सामरिक रूप से बेहद चौंकाने वाला” था।  सऊदी अरब से की थी मध्यस्थता की अपील  इशाक डार ने इस दौरान यह भी खुलासा किया कि भारत के इस हमले से हालात इतने तनावपूर्ण हो चुके थे कि हमें तुरंत अमेरिका और सऊदी अरब से मदद मांगनी पड़ी। उन्होंने कहा कि कुछ समय बाद सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का उनके पास फोन आया और उन्होंने पूछा कि क्या मैं इस संघर्ष को रोकने के लिए व्यक्तिगत रूप से भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बात करूं और उनसे कहूं कि पाकिस्तान सीजफायर के लिए तैयार है? इशाक डार ने बताया कि क्राउन प्रिंस की बात पर उन्होंने तुरंत सहमति व्यक्ति कर दी और कहा कि हां प्लीज आप एस. जयशंकर से बात करके बताईए कि पाकिस्तान सीजफायर चाहता है।  इसे भी पढ़ें:- ट्रंप ने पाकिस्तान को बताया क्षेत्रीय शांति में अहम प्लेयर, मुनीर संग ईरान-इजरायल संघर्ष पर की चर्चा! एयर डिफेंस तबाह हुआ तो घुटनों पर आया पाक इशाक डार द्वारा यह सच्चाई स्वीकार्य करने से एक बात साफ हो गई है कि भारत के हमले से पाकिस्तान बेहद डर गया था और समझ गया था कि अगर सीजफायर नहीं होता तो भारत उसका नामो निशान मिटा देगा। भारत पहले ही पाकिस्तान के एयर डिफेंस को तबाह कर चुका था। इसलिए  वह भारत के हमले को रोकने में सक्षम ही नहीं था। इशाक डार को पाकिस्तान के बरबोले नेताओं में गिना जाता है। उन्होंने कहा कि सऊदी प्रिंस ने खुद उन्हें फोन किया था, लेकिन जिस तरह के हालात थे, उससे ऐसा लगता नहीं है। पाकिस्तान उस समय जिस तरह घुटनों पर बैठा हुआ था, उससे तो यही लगता है कि पाकिस्तान ने खुद ही सऊदी अरब को फोन लगाकर सीजफायर की गुहार लगाई होगी। भारत के इस हमले से पाकिस्तान का नूर खान एयरबेस अभी भी आईसीयू में है। यह एयरबेस अभी भी पूरी तरह से बंद पड़ा है और यहां पर मरम्मत का कार्य चल रहा है। बता दें कि इससे पहले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) ने भी स्वीकार किया था कि भारत के हमले में उनके कई एयरबेस को भारी नुकसान हुआ है। वहीं पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर (Asim Munir) भी हाल ही में वॉशिंगटन में बयान दे चुके हैं कि भारत अब “न्यू नॉमर्ल” सैन्य सिद्धांत स्थापित करना चाहता है, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक गंभीर चुनौती है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Shehbaz Sharif #IndiaPakistanConflict #AirstrikeTruth #NoorKhanAirbase #ShorkotAirbase #PakistanNews #BreakingNews

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RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise: इस बार आरजेडी 130 से 135 सीटों पर लड़ सकती है चुनाव, कांग्रेस को करना पड़ सकता है समझौता

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर सुगबुगाहट तेज हो चुकी है। समय नजदीक आता देख दोनों गठबंधन चुनाव की तैयारियों में में जुट गए हैं। जेडीयू की अगुवाई वाली एनडीए सरकार अपने कार्यों के प्रमोशन में व्यस्त है तो वहीं तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन में बैठकों का लम्बा सिलसिला जारी है। इस बीच खबर यह है कि 4 बैठकों के बाद सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तकरीबन फाइनल हो गया (RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise) है। खबर के मुताबिक तेजस्वी यादव ने सहनी और पशुपति पारस के लिए कांग्रेस और वामदलों के बीच लगभग सहमति बना ली है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक जो फॉर्मूले सेट हुआ है उसके मुताबिक 2020 की तुलना में कांग्रेस और आरजेडी इस बार कम सीटों पर चुनाव लड़ेंगी तो वहीं सीपीआई माले को पिछली बार की तुलना में इस बार अधिक सीटें मिलेंगी।  पिछले चुनाव में कांग्रेस 70 सीटों पर (RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise) लड़ी थी चुनाव  गौरतलब हो कि 12 जून को तेजस्वी यादव के घर इंडिया गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर चौथी बैठक हुई (RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise) थी। जिसमें तेजस्वी ने सभी पार्टियों से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के नाम और सीटों का ब्योरा मांगा था। इस दौरान कांग्रेस ने अपनी सीटों की लिस्ट आरजेडी को दे दी है। कांग्रेस ने 2020 में जीती हुई 19 सीटों के अलावा 39 उन सीटों के नाम भी दिए हैं जिस पर वह पिछले साल दूसरे नंबर पर रही। इसके अलावा वामदलों की कुछ सीटों पर भी कांग्रेस ने चुनाव लड़ने की इच्छा व्यक्त की है। बता दें कि पिछले चुनाव में कांग्रेस 70 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। इस बार उसकी रणनीति इतनी ही सीटों पर चुनाव लड़ने की है। पिछली बार की हार की सफाई देते हुए कांग्रेस ने कहा कि वह इसलिए चुनाव हारे थे क्योंकि उन्हें अपनी परंपरागत सीटें सहयोगी दलों को देनी पड़ी थी। ऐसे में उम्मीद यह कि संभवतः इस बार वामदल कांग्रेस के लिए वे सीटें छोड़ दें। कांग्रेस को 55-60 सीटें दे सकते (RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise) हैं तेजस्वी यादव कांग्रेस के अलावा मुकेश सहनी 60 सीटों की मांग कर रहे हैं तो वहीं सीपीआई माले ने 40 सीटों की डिमांड रखी है। बड़ी बात यह कि सीपीआई और सीपीएम अभी लिस्ट नहीं सौंपी है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि पशुपति पारस, सीपीआई माले और सहनी को किसके हिस्से की सीटें दी जाएँगी? पार्टी के करीबी सूत्रों के मुताबिक तेजस्वी कांग्रेस को इस बार मनपसंद सीटें दे सकते हैं। सहनी और माले को अधिक सीटें दी जा सके इसलिए तेजस्वी 70 सींटे तो नहीं लेकिन कांग्रेस को 55-60 सीटें दे सकते (RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise) हैं। रही बात आरजेडी की तो आरजेडी 130 से 135 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। बता दें कि पिछली बार आरजेडी 144 सीटों पर चुनाव लड़ी थी।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र सरकार का तुगलकी फरमान, स्कूलों में हिन्दी की अनिवार्यता की खत्म, अब होगी तीसरी भाषा सीटों का बंटवारा जीत के आधार पर करने का फैसला किया (RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise) है तेजस्वी यादव ने  इसके अलावा महत्वपूर्ण बात यह कि तेजस्वी यादव ने इस बार सीटों का बंटवारा जीत के आधार पर करने का फैसला किया (RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise) है। सभी दल जीत की संभावना के आधार पर साथ बैठेंगे और फिर सीटों का बंटवारा करेंगे। तेजस्वी यादव की नई रणनीति के मुताबिक अधिक मार्जिन से हार वाली सीटों पर उम्मीदवार बदला जा सकता है। फ़िलहाल अभी सींटों के बंटवारे को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। उम्मीद है जल्द ही पार्टी सीटों के बंटवारे की घोषणा करेगी और सहयोगी दलों को सम्मानजनक सीटें देगी।  Latest News in Hindi Today Hindi RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise #RJD #Congress #BiharElections2025 #SeatSharing #TejashwiYadav #Mahagathbandhan #PoliticsNews

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Woman cheats on husband with two married men: पति को धोखा देकर किया दो शादीशुदा मर्दों से प्रेम, एक को दूसरे से मरवाया, बच्चे की गवाही ने बिगाड़ा खेल

हवस चाहे मर्द की हो या औरत की, कहीं का नहीं छोड़ती। अधिकतर मर्डर अनैतिक प्रेम संबंधों की वजह से ही होते हैं। खैर, इंदौर के राजा और सोनम रघुवंशी की कहानी सामने आने के बाद से देश भर में कोने-कोने से एक-एक कर सोनम निकल कर आ रही हैं। ताजा मामला राजस्थान के अलवर का है। जहाँ, एक महिला पति को छोड़कर बॉयफ्रेंड के साथ रहने लगती है। फिर उसे धोखा देकर किसी और से प्यार करने (Woman cheats on husband with two married men) लगी। और फिर एक से दूसरे बॉयफ्रेंड का कत्ल करवा देती है। वो तो एक बच्चे ने मर्डर होते देख लिया और उसकी गवाही से मामले का पर्दाफाश हो गया वर्ना किसी तीसरे का मर्डर होना फिक्स था। इस हत्या की गुत्थी ऐसी उलझी हुई थी कि उसे सुलझाने के लिए पुलिस को तकरीबन 100 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगालने पड़े। जिसके बाद महिला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इसे अजब प्रेम की गजब कहानी कहेंगे तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।  ससुराल वालों को सबक सिखाने के लिए उसने उन पर प्रताड़ित करने का मामला दर्ज (Woman cheats on husband with two married men) कराया ये घटना है 7 जून की रात की। घटना है राजस्थान के अलवर के खेरली इलाके की। घटना पर आऊं इससे पहले पूरी कहानी को समझते हैं। कहानी की शुरुआत होती है अनीता राज से, जिसकी शादी साल 2010 में भुसावर थाना क्षेत्र के एक गांव में पढ़े लिखे शख्स इंद्रमोहन जाटव से होती है। इंद्रमोहन फल बेचने का काम करता था। शादी हिंदू रीति-रिवाज और परिवार की सहमति से हुई थी। सबकुछ ठीक रहा था। इस बीच एक लड़का भी हुआ। कुछ साल बाद पति, सास ससुर ने खेरली रेल में मकान बनवाया, जहां अनिता राज अपने ससुराल वालों के साथ रहने लगी। इस तरह समय बीतता गया। और फिर कुछ समय बाद अनीता का ससुराल वालों से झगड़ा होने लगा। ससुराल वालों को सबक सिखाने के लिए उसने उन पर प्रताड़ित करने का मामला दर्ज (Woman cheats on husband with two married men) कराया। इस काम में पति इंद्रमोहन अपनी पत्नी अनीता राज का बखूबी साथ देता रहा। परिवार से न बनती देख इंद्रमोहन ने बाईपास पर एक मकान किराए पर ले लिया और पत्नी, बच्चे के साथ रहने लगा। अब पत्नी, बच्चे सब खुश थे।  अनीता पति इंद्रमोहन को छोड़कर वीरू जाटव के साथ लिव-इन रिलेशन में रहने (Woman cheats on husband with two married men) लगी इसी बीच अनीता राज का वीरू जाटव से इश्क हो गया। वीरू जाटव से इश्क होने के बाद अनीता का पति इंद्रमोहन से झगड़ा होने लगा। इसी बीच एक दिन अनीता ने पति इंद्रमोहन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी और अब अनीता इंद्रमोहन को छोड़कर वीरू जाटव के साथ लिव-इन रिलेशन में रहने (Woman cheats on husband with two married men) लगी। दोनों से एक पुत्र हुआ, जिसका नाम विशाल रखा। इसके बाद उसे एक और शख़्स से इश्क हुआ और उससे भी उसे एक लड़का हुआ। इस तरह उसे दो लोगों से दो लड़के हुए। चूँकि वीरू जाटव पहले से ही शादीशुदा था और उसकी पहली पत्नी से दो लड़के एक लड़की थी। बड़ी लड़की सविता ने इसी साल बारहवीं कक्षा पास की। एक महीने पहले वीरू ने बड़े बेटे की भी शादी की। वीरू जाटव दोनों पत्नियों और बच्चों की पूरी देखभाल करता था और दोनों का ख़र्चा उठाया करता था। लेकिन वह अपनी नयी पत्नी अनीता राज और उसके बच्चे के साथ ही रहता था। खैर, पहली पत्नी सपना ने अपने बच्चों के भविष्य तथा अपने जीवन जीने के लिए पति की दूसरी शादी को स्वीकार कर लिया था। ये तो रही बात पहले प्रेमी वीरू जाटव की। वीरू जाटव नहीं चाहता था कि अनीता काशी से मिले या फिर उससे शादी (Woman cheats on husband with two married men) करे  इस कहानी का तीसरा और महत्वपूर्ण शख्स भी है, जिसका नाम है काशी प्रजापत। काशी प्रजापत का घर वीरू जाटव की कालोनी में ही है। वो कचौरी का ठेला लगाता है। बड़ी बात यह कि काशी प्रजापत भी शादीशुदा है और उसका एक लड़का है। कमाल की बात यह कि इंद्रमोहन, वीरू जाटव के बाद अनीता राज ने चोरी छिपे काशी से भी प्रेम संबंध बना लिया। संबंध तो बना लिया लेकिन वीरू जाटव नहीं चाहता था कि अनीता उससे मिले या फिर उससे शादी (Woman cheats on husband with two married men) करे। कुल-मिलाकर उसके इस नए प्रेम संबंध में दूसरा पति वीरू जाटव अड़ंगा लड़ा रहा। अब अनीता और काशी दोनों ने मिलकर वीरू को ठिकाने लगाने की योजना बनाई। अनीता और काशी ने वीरू को मारने के लिए आठ जून को चार लोगों को दो लाख रुपये की सुपारी देकर उसकी हत्या करवा दी। उसकी हत्या तो करवा दी लेकिन इस हत्याकांड को अनीता और वीरू के बेटे ने देख लिया। लेकिन वह डर के मारे वो शांत रहा। और हत्या के वक्त सोने का नाटक करता रहा।  इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक आधी रात को चार लोग घर में आए और उसके पिता वीरू की सोते वक्त दम घोंटकर मार (Woman cheats on husband with two married men) दिया खैर, हत्या के बाद अनीता ने शुरूआत में परिवार को बताया कि वीरू बीमार था और बीमारी की वजह से उसकी मौत हो गई। लेकिन वीरू के टूटे दांत और दम घुटने के निशान देखकर लोगों का शक गहराता गया। इस बीच वीरू के भाई ने शिकायत दर्ज करवा दी। शिकायत दर्ज कर पुलिस मामले की छानबीन करने लगी। पुलिस की पूछताछ में बच्चे ने गवाही दी कि उसकी मां ने रात में घर का मेन गेट जानबुझकर खुला छोड़ दिया था। करीब आधी रात को चार लोग घर में आए और उसके पिता वीरू की सोते वक्त दम घोंटकर मार (Woman cheats on husband with two married men) दिया। बच्चे ने यह बताया की वह उन चार लोगों में एक आदमी को जानता है। उस आदमी का नाम काशीराम प्रजापत है। बाद में पुलिस जांच में पता चला है कि काशीराम अनीता का प्रेमी है। पुलिस… Read More

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Trump cryptic statement

Trump’s Cryptic Statement Sparks Global Stir: आखिर ट्रंप ने क्यों कहा, कोई नहीं जानता कि मैं क्या करूंगा, मचा हड़कंप

बीते सप्ताह भर से इजरायल और ईरान के बीच आत्मघाती हमले जारी हैं। एक तरफ जहां इजरायल तेहरान के अलग-अलग हिस्सों में एयर स्ट्राइक कर रहा है और उसके न्यूक्लियर ठिकानों को नुकसान पहुंचा रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ ईरान इजरायल पर लॉन्ग रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें दाग रहा है। यही नहीं, ईरान-इजरायल युद्ध में अब अमेरिका भी कूद पड़ा है। बढ़ते तनाव को देखते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान पर हमले को मंजूरी दे दी है। फिलहाल उन्होंने अंतिम आदेश के लिए रुकने को कहा है। उनके मुताबिक फाइनल आदेश के बाद हमला किया (Trump’s Cryptic Statement Sparks Global Stir) जाएगा। दरअसल, वो यह देख रहे हैं कि ईरान अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम की हठ छोड़ता है या नहीं। खैर, इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान-इजरायल युद्ध के बीच एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान बातचीत के लिए व्हाइट हाउस आने को तैयार था, लेकिन उन्होंने प्रस्ताव ठुकरा दिया।  आज की स्थिति और एक हफ्ते पहले की स्थिति में काफी आ (Trump’s Cryptic Statement Sparks Global Stir) चुका है फर्क  डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा कि अब बातचीत का समय बीत चुका है। ट्रंप ने कहा कि आज की स्थिति और एक हफ्ते पहले की स्थिति में काफी फर्क आ (Trump’s Cryptic Statement Sparks Global Stir) चुका है। अब किसी को नहीं पता कि मेरा अगला कदम क्या होगा, क्योंकि मेरा धैर्य अब खत्म हो गया है। उन्होंने आगे कहा, “ईरान की ओर से व्हाइट हाउस आने का सुझाव भी दिया गया था। यह एक साहसिक कदम था, लेकिन उनके लिए ऐसा करना आसान नहीं होता।” दरअसल, ट्रंप से उस बयान पर पूछा गया था, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता खामनेई ने आत्मसमर्पण से इनकार कर दिया था। इस पर जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा, मैं उन्हें सिर्फ शुभकामनाएं दूंगा। अब हमारा सब्र जवाब दे चुका है। उनका देश बर्बादी के कगार पर है। कई लोगों की जान जा चुकी है। जो कि बेहद दुखद है। इस दौरान  जब ट्रंप से यह जानने की कोशिश की गई कि क्या अमेरिका ईरान पर हमला करेगा? तो उन्होंने शांत शब्दों में कहा कि अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी कि हमला होगा या नहीं।  ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका को (Trump’s Cryptic Statement Sparks Global Stir) दिया करारा जवाब गौरतलब हो कि राष्ट्रपति ट्रंप (Donald Trump) के बयान से पहले ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका को करारा जवाब (Trump’s Cryptic Statement Sparks Global Stir) दिया है। खामेनेई ने साफ और स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान कभी भी घुटने नहीं टेकेगा और अपने सिद्धांतों पर अडिग रहेगा। साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि ईरान अपने शहीदों के खून की अनदेखी नहीं करेगा और उसे हमेशा याद रखेगा। विदित हो कि मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने खामेनेई को सख्त संदेश देते हुए कहा था कि ईरान को बिना किसी शर्त के आत्मसमर्पण कर देना चाहिए। इसके जवाब में खामेनेई ने अमेरिका को तीखा संदेश भेजा।  इसे भी पढ़ें:- ट्रंप ने पाकिस्तान को बताया क्षेत्रीय शांति में अहम प्लेयर, मुनीर संग ईरान-इजरायल संघर्ष पर की चर्चा! यदि अमेरिका ने हमला किया (Trump’s Cryptic Statement Sparks Global Stir) तो उसे ऐसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान कभी भी आत्मसमर्पण नहीं करेगा, और यदि अमेरिका ने हमला किया (Trump’s Cryptic Statement Sparks Global Stir) तो उसे ऐसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे जिनकी भरपाई संभव नहीं होगी। इस दौरान खामेनेई ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान विदेशी शक्तियों की किसी भी धमकी या दबाव के सामने झुकेगा नहीं। खामेनेई ने बेबाकी अंदाज में दो टूक कहा, हम न तो किसी जबरन थोपे गए युद्ध को स्वीकार करेंगे और न ही किसी थोपी गई शांति को हम हर परिस्थिति में डटकर मुकाबला करेंगे। Latest News in Hindi Today Hindi news Trump’s Cryptic Statement Sparks Global Stir #Trump #DonaldTrump #USPolitics #CrypticStatement #GlobalNews #2025Elections #TrumpNews

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Delhi Water Crisis

दिल्ली में पानी का संकट: आम आदमी पार्टी का बीजेपी सरकार पर तीखा हमला

देश की राजधानी दिल्ली इस समय एक गंभीर जल संकट (Water crisis in Delhi) से जूझ रही है। गर्मी के चरम पर पहुंचते ही राजधानी में पानी की भारी किल्लत ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को मुश्किल बना दिया है। इस संकट को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की दिल्ली सरकार पर कड़ा हमला बोला है। आप नेता सौरभ भारद्वाज (AAP Politician Saurabh Bharadwaj) ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि “चार इंजन वाली सरकार” के बावजूद दिल्ली के नागरिक बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में बीजेपी सरकार (BJP Government) बने चार महीने हो चुके हैं, लेकिन जनता की सबसे बुनियादी ज़रूरत यानी पीने के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने में यह सरकार पूरी तरह नाकाम रही है। राजधानी के कई इलाकों में जनता परेशान  आप नेता सौरभ भारद्वाज (AAP Politician Saurabh Bharadwaj) ने बताया कि अंबेडकर नगर, देवली, तुगलकाबाद, छतरपुर, मेहरौली, पालम, हरिनगर, रजौरी गार्डन, ग्रेटर कैलाश और जनकपुरी जैसे कई इलाकों में लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। खास बात यह है कि ग्रेटर कैलाश जैसे क्षेत्रों में पहले कभी पानी की कमी नहीं थी, लेकिन अब वहां भी टंकियों में पानी नहीं आ रहा है। इस संकट के चलते जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं। लोग सड़कों पर उतर आए हैं, पानी की टंकी और मटके लेकर विरोध कर रहे हैं, और दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के दफ्तरों का घेराव कर रहे हैं। बुधवार को दक्षिणी दिल्ली में महिलाओं ने मटके फोड़कर अपना गुस्सा जताया और “भाजपा हाय-हाय” के नारे लगाए। NGT की फटकार ने खोली पोल नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (NGT) ने भी दिल्ली जल बोर्ड को गंभीर फटकार लगाई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक NGT ने राजधानी में दूषित पानी की आपूर्ति को लेकर सख्त टिप्पणी करते हुए इसे नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि पीने के पानी में पाए जाने वाले प्रदूषक तत्व, जैसे की ई. कोलाई, लेड और आर्सेनिक, गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकते हैं। वहीँ ICMR की रिपोर्ट के अनुसार गर्मियों में दूषित जल के सेवन से होने वाले संक्रमणों, जैसे कि डायरिया, टायफाइड और हेपेटाइटिस-A, के मामलों में 25–30% की वृद्धि दर्ज की जाती है। जल संकट के पीछे क्या कारण है? जानकारों के अनुसार दिल्ली की जल समस्या (Water crisis in Delhi) के पीछे कई वजहें हैं:-  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र सरकार का तुगलकी फरमान, स्कूलों में हिन्दी की अनिवार्यता की खत्म, अब होगी तीसरी भाषा क्या कर रही है सरकार? दिल्ली में बीजेपी (BJP) की तरफ से कोई ठोस योजना सामने नहीं आई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (CM Rekha Gupta) ने अब तक स्थिति पर कोई विस्तृत बयान नहीं दिया है, जिससे जनता में नाराजगी और बढ़ गई है। हालांकि सरकार का कहना है कि जल बोर्ड की कार्यप्रणाली में सुधार किया जा रहा है और जल्द ही अतिरिक्त टैंकरों की व्यवस्था की जाएगी। लेकिन ये प्रयास तब तक अधूरे लगते हैं जब तक ज़मीन पर बदलाव दिखाई न दे। दिल्ली का जल संकट (Water crisis in Delhi) एक चेतावनी है कि यदि अब भी सरकारें सचेत नहीं हुईं तो भविष्य में ये परेशानी और ज्यादा बढ़ सकती है। आम आदमी पार्टी की तरफ से उठाए गए सवाल जायज हैं और यह सरकार की जवाबदेही तय करने का समय है। इस पूरे मसले में यह स्पष्ट होता जा रहा है कि पानी सिर्फ एक संसाधन नहीं, बल्कि राजनीति का भी केंद्र बन चुका है। लेकिन इस राजनीति के बीच आम दिल्लीवासी की प्यास कौन बुझाएगा, यह सबसे बड़ा सवाल है। Latest News in Hindi Today Hindi Water crisis in Delhi #DelhiWaterCrisis #AAPvsBJP #WaterShortageDelhi #Kejriwal #BJP #DelhiPolitics #WaterCrisis2025

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Rahul Gandhi birthday 2025

Rahul Gandhi’s Entry Into Politics: जन्मदिन विशेष: इस तरह हुई थी राहुल गाँधी की सियासत में इंट्री

आज यानी 19 जून को,कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) अपना 55वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस मौके पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ साथ अन्य दलों के लोग भी उन्हें जन्मदिन की बधाइयाँ दे रहे (Rahul Gandhi’s Entry Into Politics) हैं। खैर, रायबरेली से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को यूपी में इंडिया गठबंधन के सहयोगी और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने खास अंदाज में जन्मदिन की बधाई दी है। अखिलेश ने उन्हें समावेशी राजनीतिक सक्रियता के लिए शुभकामनाएं दी हैं। दरअसल, अखिलेश ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई दी और कहा श्री राहुल गांधी जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई व सौहार्दपूर्ण, समावेशी, समायोजनकारी समग्र सामाजिक-राजनीतिक सक्रियता के लिए शुभकामनाएँ!  नई दिल्ली के होली फैमिली अस्पताल में हुआ (Rahul Gandhi’s Entry Into Politics) था राहुल गांधी का जन्म  राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का जन्म 19 जून 1970 को नई दिल्ली के होली फैमिली अस्पताल में हुआ (Rahul Gandhi’s Entry Into Politics) था। भारत के कद्दावर राजनीतिक परिवार में जन्में राहुल गाँधी के परिवार की बात करें तो उनके परदादा यानी पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत के पहले और सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे हैं, तो वहीं उनकी दादी इंदिरा गांधी, भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं। इतना ही नहीं उनके पिता राजीव गांधी भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री रह चुके हैं। बात करें राहुल गांधी की शिक्षा की तो उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली के सेंट कोलंबस स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद देहरादून के प्रतिष्ठित द दून स्कूल से शिक्षा ली। यही नहीं, राहुल गांधी ने प्रतिष्ठित हार्वर्ड विश्वविद्यालय के फ्लोरिडा के रोलिंस कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद कांग्रेस नेता ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के ट्रिनिटी कॉलेज से एम.फिल की डिग्री हासिल की। सुरक्षा कारणों से राहुल गांधी को अपना नाम बदलकर उच्च शिक्षा करनी (Rahul Gandhi’s Entry Into Politics) पड़ी पूरी  राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का जन्म भले ही सबसे कद्दावर राजनीतिक परिवार में हुआ हो लेकिन उन्होंने छोटी उम्र में ही अपनी दादी की मौत (Rahul Gandhi’s Entry Into Politics) देखी। बात साल 1983 की है। जब पूर्व पीएम इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई थी। इस दौरान सुरक्षा के मद्देनजर राहुल को घर पर ही रहकर पढ़ाई करनी पड़ी। इसके बाद प्रधानमंत्री बने राहुल के पिता राजीव गांधी की भी हत्या कर दी गई। इसलिए सुरक्षा कारणों से राहुल गांधी को अपना नाम बदलकर उच्च शिक्षा पूरी करनी पड़ी। बता दें कि ग्रेजुएशन के बाद राहुल ने तकरीबन तीन साल तक लंदन के मॉनिटर ग्रुप में काम किया। यह कंपनी मैनेजमेंट गुरु माइकल पोर्टर की कंसल्टिंग फर्म थी। गौर करने वाली बात यह कि यही वो समय था, जब राहुल गांधी की जान को भी खतरा माना जा रहा था। वजह यही जो यहाँ उन्हें राउल विंसी के नाम से काम करना पड़ा। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र सरकार का तुगलकी फरमान, स्कूलों में हिन्दी की अनिवार्यता की खत्म, अब होगी तीसरी भाषा साल 2004 में राहुल गांधी ने भारतीय राजनीति में (Rahul Gandhi’s Entry Into Politics) रखा कदम  खैर, इस बीच साल 2004 में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने भारतीय राजनीति में कदम (Rahul Gandhi’s Entry Into Politics) रखा। उन्होंने अपने पिता राजीव गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी से चुनाव लड़ा। और शानदार जीत हासिल की। ​​इस चुनाव में राहुल एक लाख से ज्यादा वोटों से जीते थे। इसके बाद साल 2017 में उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें बीजेपी की स्मृति ईरानी से करारी हार का सामना करना पड़ा। यह हार सिर्फ राहुल गांधी की नहीं थी बल्कि उनके नेतृत्व में पूरे देश में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। कांग्रेस के ख़राब प्रदर्शन से दुखी राहुल गांधी ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। Latest News in Hindi Today Hindi news Rahul Gandhi #RahulGandhi #BirthdaySpecial #IndianPolitics #CongressParty #PoliticalJourney

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PM Modi Canada Visit,

क्या लैपटॉप गोद में रखकर काम करना महिलाओं की फर्टिलिटी के लिए हो सकता है खतरनाक?

बदलते समय के साथ कई चीजों में बदलाव आ चुका है। अब लोग 9 से 5 बजे तक काम नहीं करते हैं बल्कि अब फ्लेक्सिबल आर्स में आराम से घर बैठ कर काम किया जाता है। आज लाखों लोग वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं। जहां घर से काम करने के कई फायदे हैं वहीं इसके कई नुकसान भी हो सकते हैं। लगातार लैपटॉप या कंप्यूटर के सामने बैठ कर काम करना आसान नहीं होता और सेहत के लिए भी हानिकारक है। कई बार ऐसा भी होता है कि हम लैपटॉप को गोद में रखकर काम करते हैं। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि लैपटॉप और फर्टिलिटी (Fertility) के बीच में संबंध है? ऐसा पाया गया है कि गोद में लैपटॉप रखकर काम करने से महिलाओं की फर्टिलिटी (Women’s fertility) पर असर हो सकता है। आइए जानें लैपटॉप और महिलाओं की फर्टिलिटी (Laptops and women’s fertility) के बारे में विस्तार से। लैपटॉप और महिलाओं की फर्टिलिटी (Laptops and women’s fertility) के बारे में जानें पुरुष जो लैपटॉप को अपनी गोद में रख कर काम करते हैं, उन्हें सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। क्योंकि ऐसा पाया गया है कि इससे पुरुषों की फर्टिलिटी (Fertility) पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इससे उनके स्पर्म की क्वालिटी पर असर होता है। लेकिन, स्टडी के अनुसार इससे लैपटॉप और महिलाओं की फर्टिलिटी (Laptops and women’s fertility) के बीच में भी संबंध है। इससे उनकी एग की गुणवत्ता भी खराब हो सकती हैं। यानी लैपटॉप से महिलाओं की फर्टिलिटी (Women’s fertility) प्रभावित होती है और यह इनफर्टिलिटी का कारण बन सकता है। यही नहीं, लम्बे समय तक लॅपटॉप को गोद में रख कर काम करने से एग रिलीज में भी समस्या हो सकती है। जिससे महिलाओं को कंसीव करने में मुश्किल हो सकता है। दरअसल लैपटॉप से हीट और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड रेडिएशन जनरेट होती हैं, जिससे हॉर्मोन्स का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे पीरियड्स में भी समस्या आ सकती है।  इसका अर्थ यह यह है कि लैपटॉप का अधिक समय तक गोद में रख कर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। आप उचित दूरी पर इसे रख कर इसका प्रयोग करें और इसका प्रयोग सही तरीके से करें। महिलाओं की फर्टिलिटी (Women’s fertility) पर इसके प्रभाव के अलावा भी लैपटॉप के इस्तेमाल के कई अन्य नुकसान भी हो सकते हैं। जानिए इनके बारे में। इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक लैपटॉप के इस्तेमाल के कई अन्य नुकसान यह नहीं हो सकता कि हम लैपटॉप का कम या बिलकुल भी इस्तेमाल न करें। अगर आप कंसीव करना चाहती हैं तो आपको यह सलाह दी जाती है कि गोद में लैपटॉप को रख कर इसके इस्तेमाल से बचें। इसके अन्य नुकसान इस प्रकार हैं: लैपटॉप और महिलाओं की फर्टिलिटी (Laptops and women’s Fertility) के संबंध के बारे में तो आप जान ही गए होंगे। इसलिए गोद की जगह टेबल या किसी स्टैंड का इस्तेमाल करें। आपकी आंखों और शरीर से यह उचित दूरी पर होना चाहिए। इसके अलावा कूलिंग पैड का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। ताकि लैपटॉप से निकलने वाली हीट और रेडिएशन्स से बचने में मदद मिल सके। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Fertility #FemaleFertility #LaptopUse #ReproductiveHealth #RadiationRisks #WomenHealthTips

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Khalistan Supporters in Canada

‘भारत विरोधी खालिस्तानियों को हम पनाह देते हैं’; पीएम मोदी के दौरे के बाद कनाडा ने मानी अपनी गलती 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) के दौरे के बाद कनाडा ने पहली बार स्वीकार किया है कि खालिस्तानी चरमपंथी उसके जमीन का इस्तेमाल भारत में हिंसा-आतंकवाद फैलाने के लिए कर रहे हैं। कनाडा की खुफिया एजेंसी कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस (CSIS) द्वारा जारी किए गए रिपोर्ट में बताया गया है कि खालिस्तानी चरमपंथी (Khalistani Extremists) कनाडा का इस्तेमाल भारत में हिंसा फैलाने, धन जुटाने और अलगावाद को बढ़ावा देने का प्लान बनाने के रूप में कर रहे हैं। सीएसआईएस (CSIS) ने अपनी यह वार्षिक रिपोर्ट बुधवार को जारी की। इसमें कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर प्रमुख खतरों और चिंताओं के बारे में बताया गया है।  खालिस्तानी आतंकवादियों का पनहगाह बन चुका है कनाडा  सीएसआईएस ने अपने इस रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा है कि, ‘खालिस्तानी चरमपंथी (Khalistani Extremists) कनाडा में मौजूद हैं और ये यहां के जमीन का इस्तेमाल मुख्य रूप से भारत में हिंसा को बढ़ावा देने, गैर कानूनी गतिविधियों के लिए धन जुटाने या अलगावाद को योजना बनाने के लिए लंबे समय से कर रहे हैं। सीएसआईएस की रिपोर्ट पुष्टि करती है कि कनाडा अब भारत विरोधी तत्वों के लिए एक सुरक्षित देश बन चुका है। इस रिपोर्ट ने भारत द्वारा सालों से उठाई जा रही चिंताएं पुष्ट की है। भारत दशकों से कनाडा को चेतावनी देता रहा है कि उसका देश खालिस्तानी आतंकवादियों  का पनहगाह बन चुका है, लेकिन कनाडा इस सच्चाई को स्वीकार्य करने को तैयार नहीं था। हालांकि अब उसकी खुद की खुफिया एजेंसी द्वारा यह खुलासा होने के बाद उम्मीद की जा रही है कि कनाडा सरकार जल्द ही भारत विरोधी इन तत्वों पर कार्रवाई शुरू करेगा।  खालिस्तानी चरमपंथ को रोकने के लिए भारत कर रहा कनाडा में कार्रवाई  सीएसआईएस के रिपोर्ट में कहा गया है कि 1980 के दशक के मध्य से ही कनाडा में भारत विरोधी कुछ छोटे संगठन मौजूद हैं। जिन्हें खालिस्तानी चरमपंथी (Khalistani Extremists) माना जाता है, क्योंकि ये कनाडा का इस्तेमाल मुख्य रूप से भारत में हिंसा को बढ़ावा देने के लिए कर रहे हैं। कनाडा से उभरने वाला ये खालिस्तानी चरमपंथ कनाडा में भारतीय विदेशी हस्तक्षेप गतिविधियों को बढ़ावा देने का कारण है। इनको रोकने के लिए ही भारत हमारी धरती पर गैर अधिकृति कार्रवाई कर रहा है।   कनाडा ने खालिस्तानियों के लिए पहली बार किया उग्रवाद शब्द का इस्तेमाल सीएसआईएस के इस रिपोर्ट की सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात ये है कि कनाडा ने पहली बार खालिस्तानियों के लिए आधिकारिक तौर पर ‘उग्रवाद’ शब्द का इस्तेमाल किया है। यह भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि इससे पहले कनाडा की सरकार इन खालिस्तानियों (Khalistani Extremists) को हल्के में लेती थीं और इनके कार्रवाई को ‘सामुदायिक गतिविधियों’ की तरह देखती थी। लेकिन सीएसआईएस ने जिस तरह से अब इन्हें उग्रवादी कहकर संबोधित किया उससे यही लगता है कि, खालिस्तानी उग्रवादी अब न केवल भारत के लिए खतरा हैं, बल्कि कनाडा के लिए भी खतरा बन चुके हैं। इसीलिए सीएसआईएस ने खालिस्तान पर चिंता व्यक्ति करते हुए इन पर कार्रवाई की मांग की है।   इसे भी पढ़ें:- ट्रंप ने पाकिस्तान को बताया क्षेत्रीय शांति में अहम प्लेयर, मुनीर संग ईरान-इजरायल संघर्ष पर की चर्चा! ट्रूडो सरकार में बेहद खराब स्तर पर पहुंच गए थे दोनों देशों के रिश्ते  बता दें कि कनाडा में जब पीएम जस्टिन ट्रूडो (Justin Trudeau) की सरकार थी, तब दोनों देशों के रिश्ते बेहद खराब हो गए थे। साल 2023 में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद पीएम ट्रूडो इसका आरोप भारत पर लगाया था और दावा किया था कि उनके पास इस हत्याकांड में भारत की संलिप्तता के सबूत हैं। भारत ने इन आरोपों का खंडन करते हुए इसे “बेतुका” और “बेबुनियाद” बताया था। साथ ही कनाडा पर भारत विरोधी तत्वों को पनाह देने का आरोप लगाया था। इस घटना के बाद भारत ने कनाडा के छह राजनायिकों को देश से निकालने के साथ अपने राजनायिकों को भी वापस बुला लिया था। लेकिन कनाडा में सत्ता परिवर्तन होने के बाद दोनों देशों के संबंधों में सुधार होता नजर आ रहा है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Mark Carney) ने हाल ही में संपन्न जी-7 शिखर सम्मेलन में पीएम नरेंद्र मोदी (PM Modi) को भी आमंत्रित किया था। इस दौरान दोनों देशों ने फिर से राजनायिक रिश्ते को पहले की तरह बहाल करने पर सहमति जताई।  Latest News in Hindi Today Hindi news Khalistani Extremists #PMModiVisit #CanadaKhalistanRow #IndiaCanadaTensions #ModiTrudeau #CanadaAdmitsMistake

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