Pakistan Army resignations

Pakistan Army resignations: बलूचिस्तान लिब्रेशन आर्मी के हमलों से पाक आर्मी में दहशत का माहौल, 2500 सैनिकों ने दिया इस्तीफा

खुद को ऐटमी पावर बताने वाले पड़ोसी मुल्क पाकिस्‍तान में ट्रेन हाइजैक की घटना के बाद से लगातार हालात बिगड़ते जा रहे हैं। विद्रोही संगठन बलूचिस्‍तान लिब्रेशन आर्मी (बीएलए) आए दिन पाकिस्‍तान आर्मी के काफिले पर हमले कर रही है। एक तरफ बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के हमले तेज होते जा रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तानी सेना के जवान बड़ी संख्या में सेना छोड़कर भाग रहे हैं। दरअसल, पाकिस्‍तान आर्मी के जवानों में इस वक्‍त दहशत का माहौल है। दहशत के इस माहौल में पाक आर्मी को एकजुट रख पाना पाक आर्मी के प्रमुख आसिफ मुनीर के लिए मुश्किल लगने लगा है। काबुल फ्रंटलाइन की रिपोर्ट की माने तो पिछले कुछ दिनों में पाकिस्‍तान की सेना पर हुए हमलों के बाद तकरीबन 2,500 जवानों ने सेना की नौकरी से इस्तीफा (Pakistan Army resignations) दे दिया है। बता दें कि सेना के भीतर बढ़ती असुरक्षा और लगातार होती सैनिकों की मौत के चलते पाकिस्तानी सेना के जवान घबराए हुए हैं। वो इस कदर डरे हुए हैं कि पाकिस्तान में अपनी जान जोखिम में डालने के बजाय सऊदी कतर, कुवैत, अरब और यूएई जैसे देशों में काम करने का विकल्प तलाश रहे हैं। उनके इस कदम के पीछे की बड़ी वजह यह कि पाक सैनिक लगातार जारी हिंसा और असुरक्षा का सामना ही नहीं करना चाहते। कहने की जरूरत नहीं कि बलूचिस्तान में बढ़ता विद्रोह यह दर्शाता है कि इलाके की स्थिरता चरमरा चुकी है।  सेना ने आधिकारिक तौर पर इस्तीफों (Pakistan Army resignations) को नहीं किया है स्वीकार  हाल की घटनाओं जैसे कि बलूचिस्तान में ट्रेन हाइजैक और नोशकी में सैन्य काफिले पर हमला ने हर किसी की चिंता को इस कदर बढ़ा दिया है कि वो विदेश में वैकल्पिक रोजगार की तलाश करने पर मजबूर हैं। हालांकि न तो पाकिस्तानी मीडिया और न ही सेना ने आधिकारिक तौर पर इस्तीफों (Pakistan Army resignations) को स्वीकार किया है। बता दें कि कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान नेशनल पार्टी के सांसद फुलैन बलोच ने यह दावा किया था कि बीएलए ने इतनी तदाद में आत्मघाती हमलावरों की भर्ती कर ली है कि उसने फिलहाल के लिए अस्थायी रूप से इन भर्तियों को दिया दी है। इन दिनों  बलूचिस्तान ने पाकिस्तान की चिंता बढ़ा दी है। 11 मार्च के बाद से कई पाक सैनिकों को मौत के घाट उतारा गया है। बलूच विद्रोही पाकिस्तानी सेना के खिलाफ लगातार हमले कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें:- योगी सरकार के आठ साल में सुधरी यूपी की कानून व्यवस्था, 222 अपराधी ढेर, 130 आतंकी गिरफ्तार इतनी बड़ी तादाद में सेना छोड़ने (Pakistan Army resignations) का मामला किसी बड़े संकट का है संकेत  ऐसे में जाफर एक्सप्रेस ट्रेन पर सहसी हमले को अंजाम देकर बीएलए ने हाल के समय में अपनी गतिविधियों को तेज कर दिया है। विद्रोहियों ने रेलवे ट्रैक पर विस्फोटक लगाए, ट्रेन पर हमला किया और लगभग 450 यात्रियों को बंधक बना लिया था। काबुल फ्रंटलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक सेना देश में जारी हिंसा और असुरक्षा के बीच लड़ाई को जारी रखना नहीं चाहती है। इतनी बड़ी तादाद में सेना छोड़ने (Pakistan Army resignations) का मामला किसी बड़े संकट का संकेत है। क्योंकि यह स्थिति न सिर्फ सुरक्षा के मुद्दे से नहीं, बल्कि देश के आंतरिक हालातों का परिणाम भी हो सकती है। अगर हालात इसी तरह बिगड़ते गए तो पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Pakistan Army resignations #PakistanArmy #BalochistanLiberationArmy #BLAAttacks #PakistanCrisis #MilitaryResignations #BalochistanConflict #PakArmyRetreat #BLAInsurgency #PakistanUnrest #BalochRebellion

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Human Coronavirus HKU1

कोलकाता में कोरोनावायरस HKU1 के मामले की पुष्टि: यहां जानें इसके लक्षण और बचाव के उपाय

हाल ही में कोलकोता में एक महिला में ह्यूमन कोरोनावायरस एचकेयू1 (Human Coronavirus HKU1) या एचसीओवी-एचकेयू1 (HCoV-HKU1) का निदान हुआ है। यह एक सांस संबंधी वायरस है, जिसके लक्षणों में सर्दी-जुकाम आदि शामिल है। गंभीर मामलों में यह निमोनिया (Pneumonia) का कारण भी बन सकता है। हालांकि, डॉक्टर्स और एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस वायरस से किसी को डरने की जरूरत नहीं है लेकिन इसे लेकर सावधानी बरतना बहुत जरूरी है। डॉक्टर्स की मानें, तो मरीज महिला में सर्दी-जुकाम और खांसी की समस्या पिछले लगभग 15 दिनों से थी लेकिन अभी उसकी कंडीशन ठीक है। बहुत से लोगों को इस वायरस के बारे में जानकारी नहीं है, लेकिन इसके बारे में जानकारी होना आवश्यक है। जानिए ह्यूमन कोरोनावायरस एचकेयू1 (Human Coronavirus HKU1) या एचसीओवी-एचकेयू1 (HCoV-HKU1) के बारे में विस्तार से।  ह्यूमन कोरोनावायरस एचकेयू1 (Human Coronavirus HKU1) क्या है? अल्बामा पब्लिक हेल्थ (Alabama Public Health) के अनुसार सामान्य ह्यूमन कोरोना वायरसिस में टाइप्स 229इ, एनएल63, ओसी43 और एचकेयू1 शामिल हैं। इनके कारण रोगी को माइल्ड से लेकर गंभीर अपर.रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इलनेस बीमारियां महसूस हो सकती हैं जैसे सामान्य सर्दी-जुकाम। अधिकतर लोग अपने जीवन में कभी न कभी इन वायरसिस से संक्रमित हो सकते हैं। यह बीमारियां आमतौर भी कम समय तक ही रहती हैं। अन्य हयूमन कोरोनावायरसिस की तरह ह्यूमन कोरोनावायरस एचकेयू1 (Human Coronavirus HKU1) भी लो रेस्पिरेटरी ट्रेक्ट बीमारियों का कारण बन सकता है जैसे निमोनिया (Pneumonia) और ब्रोंकाइटिस आदि। कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों, छोटे बच्चों, बूढ़ों और कार्डियोपल्मोनरी डिजीज से पीड़ित लोगों में यह रोग अधिक सामान्य है। ह्यूमन कोरोनावायरस एचकेयू1 के लक्षण क्या हैं?  ह्यूमन कोरोनावायरस एचकेयू1 (Human Coronavirus HKU1) के सामान्य लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं: इन लक्षणों के अलावा रोगी को अन्य लक्षण भी नजर आ सकते हैं। जैसा की पहले ही बताया गया है कि गंभीर स्थितियों में यह समस्या निमोनिया (Pneumonia) और ब्रोंकाइटिस की वजह बन सकती हैं। यह लक्षण नजर आने पर सावधानी बरते और जरूरत पड़ने पर मेडिकल हेल्प लेना भी आवश्यक है। ह्यूमन कोरोनावायरस एचकेयू 1 का उपचार  ह्यूमन कोरोनावायरस एचकेयू1 या एचसीओवी-एचकेयू1 (HCoV-HKU1) के उपचार या सुरक्षा के लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है और न ही इसके कारण होने वाली बीमारियों का कोई उपचार है। इससे पीड़ित अधिकतर लोग खुद ही ठीक हो जाते हैं। लेकिन, इसके लक्षणों से राहत पाने के लिए डॉक्टर निम्नलिखित चीजों की सलाह दे सकते हैं: इसे भी पढ़ें: तुलसी का पानी: जानें क्या हैं रोजाना सुबह इसे पीने के 6 आश्चर्यकारी फायदे ह्यूमन कोरोनावायरस एचकेयू1 से बचाव यह वायरस (Virus) संक्रमित व्यक्ति से दूसरे तक फैल सकता है। यह उनकी खांसी और छींक के माध्यम से फैलता है या क्लोज कांटेक्ट जैसे संक्रमित व्यक्ति को छूने या हाथ मिलाने से भी फैल सकता है। इस वायरस के कारण साल के किसी भी समय लोग संक्रमित हो सकते हैं, लेकिन पतछड़ और सर्दी के मौसम में इसकी संभावना बढ़ जाती है। छोटे बच्च्चों में भी इसकी संभावना अधिक रहती है। आप इन चीजों का ध्यान रख कर ह्यूमन कोरोनावायरस एचकेयू1 (Human Coronavirus HKU1) से बच सकते हैं:  अगर आपके मन में इस बीमारी के बारे में कोई भी सवाल या चिंता है, तो डॉक्टर की सलाह लेना न भूलें। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi  Human Corona virus HKU1 #HumanCoronavirusHKU1 #HCoV-HKU1 #Pneumonia #coronavirus

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Aurangzeb’s Tomb Sparks Rift in Mahayuti Alliance

औरंगजेब की कब्र को लेकर महायुति में बढ़ता मतभेद

महाराष्ट्र में मुग़ल शासक औरंगजेब (Mughal ruler Aurangzeb) की कब्र को लेकर विवाद कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है, जिसमें महायुति के विभिन्न दलों के बीच मतभेद और तनाव देखने को मिल रहे हैं। यह विवाद खासतौर पर एनसीपी और हिंदू संगठनों जैसे वीएचपी और बजरंग दल के बीच बढ़ रहा है। एनसीपी के विधायक अमोल मिटकरी ने इस मुद्दे पर अपनी पार्टी का पक्ष रखा और इस कब्र को बचाने के पक्ष में बोलते हुए हिंदू संगठनों को कड़ी फटकार लगाई। उनका मानना है कि यह कब्र शिवाजी महाराज के संघर्ष का प्रतीक है और इसे हटाना ऐतिहासिक दृष्टिकोण से गलत होगा। एनसीपी विधायक अमोल मिटकरी का बयान एनसीपी के विधायक अमोल मिटकरी (Amol Mitkari) ने इस विवाद पर अपना स्पष्ट रुख पेश करते हुए कहा कि यह कब्र हमारी शौर्य की प्रतीक है और हमें इसे बचाना चाहिए। उन्होंने कहा, “यह कब्र उस संघर्ष की याद दिलाती है, जो शिवाजी महाराज और औरंगजेब के बीच हुआ था। इसे हटाना हमारी ऐतिहासिक धरोहर को मिटाने जैसा होगा।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों ने कब्र को हटाने का अल्टीमेटम दिया है, वे इसका कोई हल नहीं निकाल सकते। मुख्यमंत्री ने पहले ही कह दिया था कि कब्र का निर्णय ASI (आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) के पास है, न कि किसी राजनीतिक दल के पास। मिटकरी ने कहा, “यदि कोई यह कहता है कि हम इसे तोड़ देंगे, तो ऐसा नहीं होगा। हम थोड़ा धैर्य रखें और अपने वास्तविक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करें।” अमोल मिटकरी (Amol Mitkari) ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में इस समय किसानों की समस्याएं गंभीर हैं, लेकिन हिंदू संगठन इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। वे इस तरह के विवादित मुद्दों को उठाकर राज्य के असली मुद्दों से ध्यान हटा रहे हैं। “किसानों की सेवा करो, कार सेवा करने की बजाय किसानों के लिए प्रदर्शन करो, तभी लोगों से आशीर्वाद मिलेगा,” उन्होंने कहा। मिटकरी ने जोर दिया कि कब्र को रहने दिया जाए, लेकिन औरंगजेब का महिमामंडन न हो, क्योंकि यह इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने जैसा होगा। एनसीपी और एसपी का रुख महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र पर विवाद बढ़ने के बाद, NCP और SP ने इस मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। NCP-SP के उपाध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने सांगली में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि पार्टी ने अपने सभी कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया है कि वे अब बातचीत की शुरुआत ‘जय शिवराय’ से करें, न कि ‘हेलो’ से। शिंदे ने यह भी कहा, “हम सभी शिवाजी महाराज के मावले हैं, और यही हमारी पहचान है।” इस आदेश से यह स्पष्ट है कि NCP और SP अपने कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं और हिंदू समुदाय के सम्मान को बनाए रखने के लिए शिवाजी महाराज के नाम का प्रचार कर रहे हैं। यह कदम भी औरंगजेब की कब्र के विवाद से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है, क्योंकि शिवाजी महाराज और औरंगजेब के बीच का संघर्ष महाराष्ट्र के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह बयान इस ओर इशारा करता है कि पार्टी इस मुद्दे को लेकर विशेष रूप से संवेदनशील है और अपने कार्यकर्ताओं के बीच एकता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। शिवसेना और उद्धव ठाकरे गुट का बयान महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र को लेकर शिवसेना और उद्धव ठाकरे गुट के नेताओं के बीच भी जुबानी जंग हुई। महाराष्ट्र विधान परिषद के नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे ने कहा कि कब्र की मौजूदगी महाराष्ट्र के इतिहास को दर्शाती है। उन्होंने कहा, “हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों को यह बताना चाहिए कि औरंगजेब यहां आए थे और इसी भूमि पर उन्हें दफनाया गया।” दानवे ने जोर देते हुए कहा कि यह कब्र हमारी संस्कृति और इतिहास का हिस्सा है, और इसे हटाने की मांग एक साजिश है, जो इतिहास को मिटाने की कोशिश कर रही है। “अगर किसी को हिम्मत है तो वे जाकर इसे हटाकर दिखाएं,” उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा। इसे भी पढ़ें:- योगी सरकार के आठ साल में सुधरी यूपी की कानून व्यवस्था, 222 अपराधी ढेर, 130 आतंकी गिरफ्तार राजनीतिक दृष्टिकोण और ऐतिहासिक महत्व औरंगजेब की कब्र (Aurangzeb’s Tomb) पर विवाद ने राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ ले लिया है। जहां एक ओर हिंदू संगठनों का मानना है कि औरंगजेब की कब्र को हटाकर इस भूमि को ‘स्वतंत्रता’ का प्रतीक बनाना चाहिए, वहीं दूसरी ओर कुछ राजनीतिक दल इस कब्र को ऐतिहासिक धरोहर के रूप में देखते हैं। उनका कहना है कि यह कब्र उन संघर्षों और पराजयों का प्रतीक है, जो शिवाजी महाराज और औरंगजेब के बीच हुए थे, और हमें इसे एक ऐतिहासिक संदर्भ में समझने की जरूरत है। यह विवाद सिर्फ एक कब्र का नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का भी मुद्दा बन गया है। यह सवाल उठता है कि क्या हमें अपनी ऐतिहासिक धरोहर को सही संदर्भ में स्वीकार करना चाहिए, या इसे अपने वर्तमान राजनीतिक और सांस्कृतिक रुख के अनुसार बदलने की कोशिश करनी चाहिए। यह निश्चित रूप से एक जटिल सवाल है, जो भविष्य में और भी राजनीतिक चर्चाओं और विवादों को जन्म दे सकता है। औरंगजेब की कब्र (Aurangzeb’s Tomb) को लेकर चल रहे इस विवाद ने महायुति की राजनीति में उथल-पुथल मचा दी है। जहां एक ओर कुछ नेता इसे महाराष्ट्र के इतिहास और संस्कृति का अहम हिस्सा मानते हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ राजनीतिक दल इसे हटाने की कोशिश कर रहे हैं। इस मुद्दे से राज्य के सामाजिक और सांस्कृतिक परिदृश्य पर प्रभाव पड़ेगा, और यह निश्चित रूप से आगामी चुनावों में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Mughal ruler Aurangzeb #AurangzebTombDispute #MahayutiPolitics #ShivSenaVsBJP #MaharashtraPolitics #HinduSentiments #HistoryDebate #AurangzebGrave #PoliticalConflict #MarathaPride #HindutvaAgenda

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Father-Son Kills Mother-Daughter

Father-Son Kills Mother-Daughter: सिर्फ इस एक छोटी सी वजह के चलते बाप-बेटे ने मिलकर की मां-बेटी की हत्या

देश भले ही इक्कीसवीं सदी में विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर है लेकिन आज भी देश के लोग जात-पात के कुचक्र से निकल नहीं पाए हैं। देश में ऐसे कई सैकड़ों मामले हुए हैं जहाँ परिवार की प्रतिष्ठा और झूठी शान के नाम पर अपनों ने ही अपनों को मौत के घाट उतार दिया। इसी तरह का ताजा मामला है बिहार के रोहतास जिले का, जहाँ पत्नी और बेटी की हत्या करने के आरोप में एक व्यक्ति और उसके बेटे को गिरफ्तार किया गया है। दरअसल, रोहतास जिले के चुटिया थाना क्षेत्र अंतर्गत पियाराकला गांव में रहने वाले पिता रामनाथ ने अपने पुत्र छोटू के साथ मिलकर अपनी ही बेटी व पत्नी की गला दबाकर कर निर्मम हत्या (Father-Son Kills Mother-Daughter) कर दी। उन्होंने ने सिर्फ हत्या की बल्कि इस पर पर्दा डालने की भी कोशिश की। पहले तो उन्होंने इसे बिजली के करंट से हुई मौत का मामला बता कर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। लेकिन पुलिस के सामने उनकी चालाकी ज्यादा देर नहीं चल सकी और पुलिसिया डर से उन्होंने अपना अपराध काबूल कर लिया। गुनाह कबूल करने के बाद पुलिस ने बाप-बेटे को गिरफ्तार किया है।  सिर्फ अपनी झूठी शान (Father-Son Kills Mother-Daughter) के लिए हत्याकांड को दिया गया अंजाम  पुलिस के मुताबिक इस हत्याकांड को सिर्फ अपनी झूठी शान (Father-Son Kills Mother-Daughter) के लिए अंजाम दिया गया। दरअसल, बेटी अपने पिता द्वारा चुने गए व्यक्ति के बजाय अपनी पसंद के लड़के से शादी करना चाहती थी। हालांकि माँ शुरू में इस शादी के खिलाफ थी लेकिन बेटी की ख़ुशी के खातिर माँ ने भी हामी भर दी थी। भले ही माँ की सहमति थी लेकिन बाप और भाई इस शादी के सख्त खिलाफ थे। दरअसल, पिता-पुत्र मृतक प्रतिमा की शादी झारखंड में करना चाहते थे। लेकिन वो वहां शादी के लिए तैयार नहीं थी। इस बीच पिता ने बेटी को काफी समझाने की कोशिश की। लेकिन लाख समझाने के बाद भी वो पिता द्वारा तय किए गए जगह पर शादी नहीं करना चाहती थी। पुलिस के मुताबिक उसके बाद दोनों बाप बेटे ने मिलकर प्रतिमा कुमारी की हत्या करने की योजना बनाई।  बाप-बेटे ने मिलकर पार्वती देवी का भी गला घोंटकर हत्या कर (Father-Son Kills Mother-Daughter) दी जानकारी के मुताबिक 15 मार्च को लगभग सुबह 5 बजे प्रतिमा कुमारी अपनी मां पार्वती देवी के साथ कमरे में सो रही थी। योजना के तहत उस समय मौका देखकर रामनाथ राम एवं छोटू कुमार प्रतीमा कुमारी की दुपट्टे से ही गला घोंटने लगे। इस बीच आवाज सुनकर बगल में सो रही मां पार्वती देवी की नींद खुल गई। जब तक पार्वती  कुछ समझ पाती तबतक प्रतिमा की सांसे उखड़ चुकी थी। अपनी मृत बेटी को देखकर माँ पार्वती चिल्लाने लगी। उसे इस तरह चिल्लाता देख पकड़े जाने के भय से दोनों बाप-बेटे ने मिलकर पार्वती देवी का भी गला घोंटकर हत्या कर (Father-Son Kills Mother-Daughter) दी। दोनों इतने शातिर थे कि दोनों ने साड़ी के पल्लू से ही गला घोंट कर मौत के नींद सुला दिया। हत्या के बाद आरोपियों ने शवों को बिजली उपकेंद्र के नजदीक सुनसान जगह पर फेंक दिया ताकि इस हत्या को करंट लगने से हुई मौत बताया जा सके। चुटिया थाने के एसआई लक्ष्मी पासवान ने बताया कि “पुलिस को सूचना मिली की पियाराकला गांव में मां और बेटी की करंट लगने से मौत हो गई है। लेकिन जब पुलिस ने घटनास्थल पर जाकर देखा तो दोनों मृतक के गर्दन पर गहरे निशान थे।” इसे भी पढ़ें:- बिहार के अररिया में गांजा तस्कर को पकड़ने गए दारोगा की इस वजह से हुई मौत पुलिसिया अंदाज में हुई पूछताछ में दोनों ने कबूला अपना गुनाह (Father-Son Kills Mother-Daughter)  पुलिस के मुताबिक शरीर और कपड़ों पर जगह-जगह खून के धब्बे थे और आसपास चूड़ियां भी टूटी हुई थी। जिससे प्रतीत होता है कि मौत से पहले दोनों ने खुद को बचाने का पूरा प्रयास किया है। घटना को लेकर विवाहिता के ससुर बिगन राम ने कहा कि “बहु बिजली के तार में उलझ गई थी और जब नातिन उसे बचाने के लिए गई तो, वह भी करंट की चपेट में आ गई। जिससे दोनों की मौत हो गई।” हालांकि दोनों शव के शरीर पर पड़े जख्म के निशान और खून के धब्बे साफ तौर से हत्या की ओर इशारा कर रहे थे। इस हत्याकांड पर खुलासा करते हुए रोहतास के एसपी रौशन कुमार ने बताया कि “शुरू में पार्वती के पति और उनके छोटे बेटे ने दावा किया था कि घर के बाहर मोटर पंप चलाते समय करंट लगने से दोनों की मौत हो गई थी। लेकिन मृतका के शरीर पर गहरे घाव, खून के धब्बे और टूटी हुई चूड़ियां पुलिस को चौंकाने के लिए काफी थे। परिवार ने लोग घटना को दुर्घटना बताने की कोशिश कर रहे थे। पूछताछ के दौरान रामनाथ और छोटू के बयान आपस में मेल नहीं खाए। जिससे पुलिस को शक हुआ। चूँकि शव पर बाहरी चोट के निशान थे, सो पुलिस बाप-बेटे की थ्योरी पर भरोसा नहीं कर पा रही थी। खैर, शुरूआती पूछताछ में दोनों ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। लेकिन पुलिस ने जब पुलिसिया अंदाज में तबियत से पूछताछ की तो दोनों टूट गए और अपना गुनाह कबूल (Father-Son Kills Mother-Daughter) कर लिया। गुनाह कबूल करने के बाद पार्वती के पति रामनाथ राम और उसके छोटे बेटे छोटू कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवा दिया गया है। पुलिस की टीम मामले की जांच में जुटी हुई है।  Latest News in Hindi Today Hindi News Father-Son Kills Mother-Daughter #CrimeNews #FamilyMurder #ShockingCrime #FatherSonDuo #ViolentCrime #CrimeInvestigation #JusticeForVictims #MurderMystery #BreakingNews #CrimeAlert

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OrhanAwatramaniCase

सेलिब्रिटी ओरी के खिलाफ कटरा पुलिस ने क्यों किया केस दर्ज? 

हमेशा अपने अंदाज से मीडिया और सोशल मीडिया में ट्रेंड करने वाले सेलिब्रिटी ओरी (Celebrity Orry) के खिलाफ कटरा पुलिस (Katra Police) ने केस दर्ज किया है। उनके साथ 8 और लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। होटल कटरा मैरियट रिजॉर्ट एंड स्पा में ठहरे इन सभी लोगों के खिलाफ होटल प्रशासन ने शिकायत दर्ज कराई। मामले को संज्ञान में लेते हुए पी/एस कटरा ने एफआईआर संख्या 72/25 दर्ज की है। चलिए अब पूरा मामला क्या है इसे समझ लेते हैं। दरअसल 15 मार्च को एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, जिसमें एक निजी होटल में ओरी आपने कुछ दोस्तों के साथ पार्टी करते नजर आये। इस कमरे की तस्वीर में शराब की बोतल टेबल रखी नजर आई थी।  पहले ही किया गया था सूचित होटल कटरा मैरियट रिजॉर्ट एंड स्पा (Hotel Katra Marriott Resort and Spa) में ठहरे ओरी यानी ओरहान अवत्रामणि के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। होटल के प्रबंधक के अनुसार 15 मार्च को गेस्ट में ओरहान अवत्रामणि (ओरी), दर्शन सिंह, पार्थ रैना, रितिक सिंह, राशि दत्ता, रक्षिता भोगल, शगुन कोहली और अनास्तासिला अर्जामास्कीना शामिल थे, जिन्होंने होटल परिसर में शराब पी, जबकि उन्हें बताया गया था कि कॉटेज सुइट के अंदर शराब और मांसाहारी भोजन की इजाजत नहीं है, क्योंकि माता वैष्णोदेवी तीर्थ स्थान पर यह सख्त वर्जित है। कार्रवाई के लिए गठित की गई टीम मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी रियासी द्वारा सख्त निर्देश पारित किए गए। परमवीर सिंह (जेकेपीएस) को दोषियों को पकड़ने के लिए एक टीम गठित की गई है, ताकि धार्मिक स्थलों पर नशीली दवाओं या शराब के ऐसे किसी भी कृत्य को बर्दाश्त न करने का उदाहरण पेश किया जा सके, जिससे आम जनता की भावनाओं को ठेस न पहुंचे। पुलिस अधीक्षक कटरा, उप पुलिस अधीक्षक कटरा और थानेदार कटरा की देखरेख में टीम का गठन किया गया था, ताकि उन अपराधियों पर नजर रखी जा सके, जिन्होंने नियमों का उल्लंघन किया और आस्था से जुड़े लोगों की भावनाओं का अनादर किया।  इसे भी पढ़ें:- वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के खिलाफ AIMPLB का विरोध प्रदर्शन एसएसपी का बयान एसएसपी रियासी ने दोषियों को सख्त संदेश देते हुए कहा कि उन लोगों के लिए कोई जगह नहीं है जो कानून का पालन नहीं करते हैं और किसी भी तरह से विशेष रूप से ड्रग्स/शराब का सहारा लेकर शांति को बाधित करने की कोशिश करते हैं और उनसे सख्ती से निपटा जाएगा। Latest News in Hindi Today Hindi news  #OrhanAwatramaniCase #KatraPoliceAction #VaishnoDeviControversy #CelebrityLegalTrouble #KatraHotelIncident #AlcoholBanViolation #ReligiousSiteRespect #OrryLegalIssues #VaishnoDeviSanctity #KatraFIR

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Yogi government crime control

UP law and order: योगी सरकार के आठ साल में सुधरी यूपी की कानून व्यवस्था, 222 अपराधी ढेर, 130 आतंकी गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के आठ साल पूरे हो रहे हैं। इस बीच पिछली सरकारों में गुंडाराज के लिए मशहूर यूपी के बदमाशों पर योगी सरकार (UP law and order) काल बनकर टूटी है। कारण यही जो योगी सरकार की पुलिस न सिर्फ यूपी, बल्कि पूरे देश में एक मॉडल के रूप में उभर रही है। नतीजतन विगत आठ वर्षों में प्रदेश की कानून व्यवस्था में हुए सुधारों से अपराध दर में भारी गिरावट आई है। बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में यूपी सरकार ने न सिर्फ संगठित अपराधियों और माफिया पर शिकंजा कसा है, बल्कि आम नागरिकों के मन में सुरक्षा का भाव को भी जागृत किया है। कानून-व्यवस्था के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ज़ीरो टॉलरेंस की नीति का असर देखने को मिला। गौर करने वाली बात यह कि प्रदेश में अपराधियों पर शिकंजा कसने के साथ-साथ अपराध से अर्जित करोड़ों की संपत्ति भी जब्त की गई।  अकूत संपत्ति बनाने वाले अपराधियों पर भी योगी की पुलिस ने सख्त (UP law and order) की कार्रवाई  पिछली सरकारों में अपराध के बल पर अकूत संपत्ति बनाने वाले अपराधियों पर भी योगी की पुलिस ने सख्त कार्रवाई (UP law and order) की है। बता दें कि यूपी पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत तकरीबन 142 अरब से अधिक की संपत्ति को जब्त किया गया। यही नहीं, योगी सरकार के आठ साल में अपराधियों को सजा दिलवाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। यूपी पुलिस ने हरसंभव प्रयास किया कि अपराधी किसी भी हाल में कानूनी शिकंजे से छूटने न पाएं। योगी की पुलिस ने अपराधियों पर इस कदर शिंकजा कसा कि जुलाई 2023 से दिसंबर 2024 तक ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत 51 दोषियों को मृत्युदंड की सजा मिली। इसके अलावा 6,287 दोषियों को उम्रकैद तो वहीं, 1,091 अपराधियों को 20 वर्ष से अधिक की सजा हुई। प्राप्त जानकारी के मुताबिक योगी सरकार के आठ सालों में पुलिस और एसटीएफ के साथ हुए एनकाउंटर में कुल 222 अपराधी मारे गए। इतना ही नहीं आठ साल में 130 आतंकवादी गिरफ्तार किये गए। न सिर्फ आतंकवादी बल्कि 171 अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशी भी गिरफ्तार किए गए। इसके अलावा पिछले आठ वर्षों में 20,221 इनामी बदमाश गिरफ्तार किए गए तो वहीं 79,984 अपराधियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई की गई। प्रदेश को भयमुक्त बनाने हेतु 930 के खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई हुई। मुठभेड़ में 20 हज़ार से अधिक इनामी अपराधी को पुलिस ने गिरफ्तार कर हवालात भेज दिया।  इसे भी पढ़ें:- वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के खिलाफ AIMPLB का विरोध प्रदर्शन योगी सरकार (UP law and order) ने तकरीबन 66 हज़ार हेक्टेयर से अधिक भूमि को अवैध कब्जे से कराया मुक्त  डीजीपी प्रशांत कुमार ने बताया कि “योगी सरकार द्वारा गठित एंटी भू माफिया टास्क फोर्स (UP law and order) ने तकरीबन 66 हज़ार हेक्टेयर से अधिक भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया। इस दौरान एटीएस ने 130 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया।” हालांकि डीजीपी ने यह भी दावा किया कि पिछले आठ सालों में प्रदेश को भयमुक्त बनाने में सफलता हासिल हुई है। उन्होंने यूपी पुलिस की पीठ थपथपाते हुए कहा कि “अपराधियों के खिलाफ इस तरह की सख्त कार्रवाई ने राज्य को सुरक्षित बनाने में मदद की है और राज्यवासियों को कानून के प्रति विश्वास दिलाया है।” Latest News in Hindi Today Hindi news UP law and order #YogiAdityanath #UPLawAndOrder #CrimeFreeUP #YogiGovernment #UPPolice #UPCrimeControl #UPSafety #UPDevelopment #TerrorismArrest #CrimeDown

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Waqf Amendment Bill 2024

वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के खिलाफ AIMPLB का विरोध प्रदर्शन

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने साल 2024 के वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ आज दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में बोर्ड ने इस विधेयक को तत्काल वापस लेने की मांग की है। AIMPLB के सदस्य और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता इस विधेयक को असंवैधानिक और मुस्लिम समुदाय के अधिकारों के खिलाफ मानते हैं। वहीं, केंद्रीय सरकार का कहना है कि देश कानून के हिसाब से चलेगा, और वक्फ संशोधन विधेयक संसद में जल्द पेश किया जा सकता है। विरोध प्रदर्शन का कारण ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड  (AIMPLB) के उपाध्यक्ष उबैदुल्ला आज़मी ने इस विधेयक का विरोध करते हुए कहा, “हमारे सभी धार्मिक मामलों की सुरक्षा का अधिकार भारतीय संविधान देता है। जैसे नमाज और रोज़ा हमारे लिए जरूरी हैं, वैसे ही वक्फ की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। सरकार को चाहिए था कि वह वक्फ की जमीनों पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करती, लेकिन इस विधेयक के माध्यम से वह खुद वक्फ की संपत्तियों पर कब्जा करना चाहती है।” उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस विधेयक को वापस नहीं लिया जाता है, तो ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड  (AIMPLB) के नेतृत्व में देश भर के मुसलमान किसी भी तरह की कुर्बानी देने को तैयार हैं, जो देश उनसे मांगेगा। विपक्षी दलों का विरोध विरोध में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (SP), तृणमूल कांग्रेस (TMC), और अन्य विपक्षी दल भी शामिल हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि उनका पार्टी इस विधेयक का विरोध करती है और वे इसे संसद में भी मुद्दा बनाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने इस विधेयक को लाकर मुस्लिम समुदाय के अधिकारों का उल्लंघन किया है। कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने यह भी कहा कि जब वक्फ पर ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमिटी (JPC) बनाई गई थी, तब उन्होंने अपने विचार स्पष्ट किए थे। अब, इस विधेयक को संसद में पेश करने पर भी उनका विरोध जारी रहेगा। भारी पुलिस बल की तैनाती विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। AIMIM के सांसद असदुद्दीन ओवैसी भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए और विधेयक को असंवैधानिक बताया। उन्होंने कहा कि यह बिल मुस्लिम समुदाय के धर्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। इसे भी पढ़ें:- पीएम मोदी ने पॉडकास्ट में दिया करारा जवाब, पाकिस्तान ने हमेशा धोखा दिया, दुनिया जानती है कि आतंक की जड़ें कहां हैं भाजपा का रुख भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने AIMPLB द्वारा विरोध प्रदर्शन करने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वक्फ एक बहाना है, असल में इन संगठनों का उद्देश्य देश में अशांति फैलाना है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि AIMPLB और इसके समर्थक राजनीतिक दल वक्फ के नाम पर मुस्लिम नागरिकों को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने कहा, “यह देश कानून से चलता है। अगर इस विधेयक में सुधार की जरूरत है, तो उसे संसद में पेश होने के बाद देखा जाएगा।” विधेयक के उद्देश्य और संशोधन वक्फ संशोधन विधेयक 2024 (Waqf Amendment Bill 2024) का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों की बेवजह बिक्री पर रोक लगाना और उनका सही उपयोग सुनिश्चित करना है। इसके तहत, वक्फ संपत्तियों की बिक्री की अनुमति सिर्फ वक्फ बोर्ड के माध्यम से होगी और गरीबों के कल्याण के लिए इन संपत्तियों का इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि, विपक्षी दल और कई मुस्लिम संगठन इसे गलत मानते हैं और इसका विरोध कर रहे हैं। वक्फ संशोधन विधेयक 2024 (Waqf Amendment Bill 2024) पर चल रही बहस और विरोध प्रदर्शन यह दर्शाते हैं कि इस विधेयक को लेकर मुस्लिम समुदाय और विपक्षी दलों में गहरी चिंता है। वहीं, सरकार इसे समाज के विकास के लिए जरूरी कदम मानती है। यह मुद्दा अब संसद में आने की संभावना है, जहां इस पर व्यापक बहस होनी तय है। देश के विभिन्न समुदायों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस विधेयक को अंतिम रूप दिया जाएगा। Latest News in Hindi Today Hindi news AIMPLB #AIMPLBProtest #WaqfAmendment2024 #WaqfBillDebate #MuslimRights #WaqfProperties #AIMPLBStand #IndiaPolitics #WaqfAct #LegalDebate #MinorityRights

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International Masters League

सचिन तेंदुलकर की टीम ने वेस्टइंडीज को 6 विकेट से मात देकर जीती International Masters League

16 मार्च को रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह इंटरनेशनल स्टेडियम में इंटरनेशनल मास्टर्स लीग (International Masters League) के पहले संस्करण का फाइनल मुकाबला इंडिया मास्टर्स और वेस्टइंडीज मास्टर्स के बीच खेला गया। जिसमें वेस्टइंडीज मास्टर्स  ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करते हुए वेस्टइंडीज मास्टर्स की टीम ने इंडिया मास्टर्स को 149 रनों का लक्ष्य दिया था। गौर करने वाली बात यह कि उसकी आधी टीम 85 के स्कोर पर ही आउट हो गई थी। ब्रायन लारा मात्र 6 रन बनाकर आउट हो गए। उसके बाद विलियम पर्किन्स 6 के स्कोर पर पवेलियन लौट गए। इस बीच लड़खड़ाती पारी को संभालने क्रीज पर आये लेंडल सिमंस ने अकेले अपने दम पर 57 रनों की आतिशी पारी खेल वेस्टइंडीज मास्टर्स को एक सम्मानजनक स्कोर तक पहुँचाया। बता दें कि ड्वेन स्मिथ ने 35 गेंद पर 45 का स्कोर करके पारी का अंत किया। टीम के लिए स्मिथ और सिमंस के अलावा कोई और बड़ी पारी नहीं खेल पाया। शाहबाज नदीम टीम इंडिया के सबसे सफल गेंदबाज रहे। उन्होंने ओवर में 14 रन देकर 2 विकेट झटके।  सचिन तेंदुलकर की टीम ने इंटरनेशनल मास्टर्स लीग (International Masters League) के रोमांचक मुकाबले में दी वेस्टइंडीज मास्टर्स को मात इस बीच सचिन तेंदुलकर की टीम ने इंटरनेशनल मास्टर्स लीग (International Masters League) के रोमांचक मुकाबले में वेस्टइंडीज मास्टर्स की टीम को कड़ी पटखनी देते हुए और ट्रॉफी अपने नाम कर ली। मास्टर ब्लास्टर तेंदुलकर (25) और अंबाती रायुडू (74) की 67 रनों की साझेदारी ने लक्ष्य को आसान बना दिया। मजे की बात यह कि इंडिया मास्टर्स ने अपनी बल्लेबाजी से सबको चौंका दिया, इस दौरान क्योंकि तेंदुलकर और रायुडू ने पुराने स्ट्रोक्स खेले। तेंदुलकर ने जहां शानदार खेल दिखाया और अपने खास कवर ड्राइव तथा फ्लिक से दर्शकों से खचाखच भरे मैदान को हिला दिया। बता दें कि टीम इंडिया ने महज 4 विकेट खोकर इस आसान से लक्ष्य को हासिल किया। बेशक सचिन तेंदुलकर और ब्रायन लारा जैसे दिग्गज क्रिकेटरों के बीच फाइनल मुकाबला हर क्रिकेट प्रेमी के लिए एक सपने जैसा ही है। बता दें कि इंटरनेशनल मास्टर्स लीग टी20 2025 में कुल 5 देशों की टीम ने हिस्सा लिया था। जिसमें इंडिया मास्टर्स ऑस्ट्रेलिया को हराकर फाइनल में पहुंची थी तो वहीं वेस्टइंडीज मास्टर्स ने लीग के दूसरे सेमीफाइनल में श्रीलंका को हराकर मैच जीता था। दोनों टीमों के बीच फाइनल मुकाबला 16 मार्च को रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला गया। मैच के दौरान फैंस को कांटे की टक्कर देखने को मिली। फाइनल मुकाबला काफी रोमांचक रहा। स्टेडियम में मौजूद दर्शकों ने इस मैच का भरपूर लुत्फ़ उठाया।  इसे भी पढ़ें:- WPL 2025 का फाइनल: दिल्ली कैपिटल्स और मुंबई इंडियंस के बीच महामुकाबला आज बात करें इंटरनेशनल मास्टर्स लीग (International Masters League) के फाइनल मुकाबले में दोनों टीमों के प्लेइंग 11 की तो  वेस्टइंडीज मास्टर्स: ब्रायन लारा, ड्वेन स्मिथ, विलियम पर्किन्स, दिनेश रामदीन, एश्ले नर्स, टिनो बेस्ट, लेंडल सिमंस, चैडविक वाल्टन, जेरोम टेलर, सुलेमान बेन, रवि रामपॉल इंडिया मास्टर्स: सचिन तेंदुलकर, अंबाती रायडू, यूसुफ पठान, इरफान पठान, पवन नेगी, युवराज सिंह, स्टुअर्ट बिन्नी, गुरकीरत सिंह मान, धवल कुलकर्णी, विनय कुमार, शाहबाज नदीम  Latest News in Hindi Today Hindi news International Masters League

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Venezuela gang members

Venezuela gang members: अवैध प्रवासियों पर सख्त ट्रंप प्रशासन, वेनेजुएला के गिरोह के 200 से अधिक सदस्यों को भेजा अल-सल्वाडोर,

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अवैध प्रवासियों पर जरा भी नरमी बरतने के मूड में नहीं हैं। राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद से ही वो अमेरिका में रह रहे अवैध प्रवासियों को खदेड़ने में लगे हुए हैं। सख्त रुख जारी है। इसी कड़ी में वेनेजुएला के एक गिरोह (Venezuela gang members) के तकरीबन 200 से अधिक कथित लोगों को ट्रंप प्रशासन ने निर्वासित कर अल साल्वाडोर भेज दिया है। जहां उन्हें उच्च सुरक्षा वाली जेल में ले जाया गया है। अल सल्वाडोर के राष्ट्रपति ने खुद इस बात की जानकारी दी है। दरअसल, यह ट्रैन डे अरागुआ गिरोह है, जिसका ट्रंप ने शनिवार को जारी की गई अपनी असामान्य घोषणा में जिक्र किया था। हालांकि, अदालत ने अपने फैसले में इनका निर्वासन रोकने का आदेश सुनाया था, लेकिन इससे पहले ही विमान इन्हें लेकर उड़ गया। बता दें कि यूएस डिस्ट्रिक्ट जज जेम्स ई. बोसबर्ग ने शनिवार को निर्वासन को अस्थायी रूप से रोकने का आदेश जारी किया। लेकिन वकीलों ने उन्हें बताया कि पहले से ही दो विमान अप्रवासियों के साथ हवा में हैं- एक अल साल्वाडोर जा रहा है, दूसरा होंडुरास जा रहा है।”  वेनेजुएला के आपराधिक संगठन, ट्रेन डी अरागुआ के पहले बैच के 238 सदस्य को (Venezuela gang members) भेजा गया अल साल्वाडोर गौर करने वाली बात यह कि बोसबर्ग ने मौखिक रूप से विमानों को वापस करने का आदेश दिया, लेकिन जाहिर तौर पर उन्हें वापस नहीं किया गया और उन्होंने अपने लिखित आदेश में निर्देश शामिल नहीं किया। इस बीच ट्रंप प्रशासन पर अदालती आदेश का उल्लंघन करने का भी आरोप लगा। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने एक बयान में इस बारे में अटकलों का जवाब देते हुए कहा कि “क्या प्रशासन अदालती आदेशों का उल्लंघन कर रहा है? कैरोलिन ने कहा कि “प्रशासन ने अदालती आदेश का पालन करने से इनकार नहीं किया। इस आदेश का कोई वैधानिक आधार नहीं था। इन्हें अमेरिकी क्षेत्र से पहले ही हटा दिए जाने के बाद आदेश जारी किया गया था।” इस संबंध में जानकारी देते हुए अल सल्वाडोर के राष्ट्रपति नायब बुकेले ने कहा कि “वेनेजुएला के आपराधिक संगठन, ट्रेन डी अरागुआ के पहले बैच के 238 सदस्य (Venezuela gang members) अल साल्वाडोर आ गए हैं। इन सभी को एक साल के समय के लिए आतंकवाद कारावास केंद्र, सीईसीओटी में ट्रांसफर कर दिया गया है।” नायब बुकेले ने इसपर आगे कहा कि “अमेरिका इसके लिए काफी कम पैसे का भुगतान करेगा, लेकिन हमारे लिए यह काफी ज्यादा है।” उन्होंने आगे बताया कि “सरकार जीरो आइडलनेस कार्यक्रम चला रही है। इसके तहत 40,000 से अधिक कैदियों की मदद से देश की जेलों को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। अमेरिका से भेजे गए कैदियों को भी इनके साथ ही प्रोडक्शन में लगाया जाएगा।” यही नहीं, अमेरिका ने अल साल्वाडोर द्वारा वांछित एमएस-13 के 23 सदस्यों को भी भेजा है। बता दें कि इसमें दो सरगना शामिल हैं जो कि आपराधिक संगठन के हाई लेवल का सदस्य है। अल सल्वाडोर के राष्ट्रपति नायब बुकेले ने कहा कि इसकी मदद से खुफिया जानकारी जुटाने में मदद मिलेगी।  इसे भी पढ़ें:- पाकिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी का हमला: जाफर एक्सप्रेस हाईजैक, 400 से ज्यादा यात्री बंधक 1798 के एलियन एनिमीज एक्ट की घोषणा के बाद अप्रवासियों को (Venezuela gang members) किया गया निर्वासित  बता दें कि राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा 1798 के एलियन एनिमीज एक्ट की घोषणा के बाद अप्रवासियों को निर्वासित (Venezuela gang members) किया गया था। इसका उपयोग अमेरिकी इतिहास में सिर्फ तीन ही बार किया गया है। पहला साल 1812 के युद्ध दूसरा, प्रथम और तीसरा द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान। दरअसल, इस कानून के तहत राष्ट्रपति को सिर्फ यह घोषणा करनी पड़ती है कि संयुक्त राज्य अमेरिका युद्ध में है। फिर क्या यह घोषणा करते ही उसे विदेशियों को हिरासत में लेने या हटाने के लिए असाधारण शक्तियां मिलती हैं। जिन्हें आव्रजन या आपराधिक कानूनों के तहत सुरक्षा प्राप्त होती। ध्यान देने वाली बात यह कि आखिरी बार इसका इस्तेमाल द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी-अमेरिकी नागरिकों की हिरासत को सही ठहराने के लिए किया गया था। खैर, चाहे कुछ भी हो, अमेरिका में अवैध प्रवासियों को बाहर निकालने का काम बड़े स्तर पर जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लगातार इस मुद्दे को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर रखा है कि वह सभी अवैध प्रवासियों को अमेरिका से बाहर निकालकर ही दम लेंगे। बेशक ट्रंप के इस कदम चर्चा की पूरी दुनिया में हो रही है। Latest News in Hindi Today Hindi news Venezuela gang members #TrumpImmigrationPolicy #VenezuelaGangs #IllegalMigration #USBorderSecurity #ElSalvadorDeportation #MigrantCrisis #USImmigration #CrimeControl #BidenVsTrump #GangDeportation

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Why Abhimanyu Died in Chakravyuh

महाभारत कथा: गर्भ में ही अभिमन्यु को मिला था चक्रव्यूह भेदन का ज्ञान, फिर क्यों युद्ध में गंवानी पड़ी जान?

महाभारत (Mahabharata) एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें धर्म, नीति, वीरता और बलिदान की अद्भुत कहानियां समाहित हैं। इस महाकाव्य के नायकों में से एक अभिमन्यु, अपनी वीरता और अदम्य साहस के लिए जाने जाते हैं। अर्जुन और सुभद्रा के पुत्र अभिमन्यु (Abhimanyu) को चक्रव्यूह भेदन की कला मां के गर्भ में ही सीखने का अवसर मिला था, लेकिन युद्धभूमि में जब उन्होंने चक्रव्यूह भेदने का प्रयास किया, तो वे उसमें फंस गए और वीरगति को प्राप्त हो गए। यह कहानी केवल एक योद्धा के बलिदान की नहीं है, बल्कि यह ज्ञान और अधूरे ज्ञान के प्रभाव की भी एक महत्वपूर्ण सीख देती है। आइए जानते हैं कि अभिमन्यु ने गर्भ में कैसे सीखा चक्रव्यूह भेदन, और क्यों यह उनकी मृत्यु का कारण बन गया। गर्भ में ही सीख लिया था चक्रव्यूह भेदन का रहस्य महाभारत (Mahabharata) के अनुसार, जब सुभद्रा गर्भवती थीं, तब एक दिन अर्जुन उन्हें युद्ध कौशल और विभिन्न युद्धनीतियों की जानकारी दे रहे थे। इसी दौरान उन्होंने चक्रव्यूह भेदन की जटिल प्रक्रिया बतानी शुरू की। गर्भ में पल रहे अभिमन्यु को भी यह शिक्षा सुनाई दी और उन्होंने इसे समझ लिया। लेकिन कथा के अनुसार, जब अर्जुन चक्रव्यूह (Chakravyuh) से बाहर निकलने का रहस्य बताने वाले थे, तब सुभद्रा को नींद आ गई और उन्होंने सुनना बंद कर दिया। इसी कारण अभिमन्यु केवल चक्रव्यूह में प्रवेश करने की कला सीख पाए, लेकिन बाहर निकलने का तरीका नहीं जान सके। यही अधूरी शिक्षा आगे चलकर उनकी मृत्यु का कारण बनी। क्या होता है चक्रव्यूह? चक्रव्यूह (Chakravyuh) एक विशेष प्रकार की सैन्य रचना होती थी, जिसे शत्रु को भ्रमित करने और उसे पराजित करने के लिए बनाया जाता था। यह कई घेरों में बना होता था और प्रत्येक घेरे में योद्धाओं की एक विशेष व्यवस्था होती थी। चक्रव्यूह (Chakravyuh) एक ऐसा रणनीतिक युद्ध विन्यास था, जिसमें प्रवेश करना आसान था, लेकिन बाहर निकलना बेहद कठिन। इसे भेदने की कला केवल कुछ महान योद्धाओं को ही आती थी, जिनमें श्रीकृष्ण (Shri Krishna), अर्जुन, द्रोणाचार्य और प्रद्युम्न शामिल थे। इनके अलावा, अभिमन्यु भी इस जटिल व्यूह के बारे में जानते थे। अभिमन्यु की वीरता और कुरुक्षेत्र युद्ध में उनका बलिदान महाभारत युद्ध के 13वें दिन, जब पांडवों के सामने चक्रव्यूह (Chakravyuh) को भेदने की चुनौती आई, तो अभिमन्यु (Abhimanyu) ने बिना किसी संकोच के इसमें प्रवेश करने का फैसला किया। अपनी अद्भुत वीरता और युद्ध कौशल के बल पर उन्होंने चक्रव्यूह के छह द्वार सफलतापूर्वक पार कर लिए, लेकिन सातवें द्वार पर आकर वे घिर गए और आगे बढ़ना कठिन हो गया। महाभारत (Mahabharata) के तेरहवें दिन, जब कौरवों ने चक्रव्यूह की रचना की, तब अर्जुन और श्रीकृष्ण (Shri Krishna) युद्ध में कहीं और व्यस्त थे। द्रोणाचार्य ने यह रणनीति बनाई थी ताकि पांडवों को भारी नुकसान पहुंचाया जा सके। जब पांडवों को पता चला कि कौरवों ने चक्रव्यूह बना लिया है, तब इस सैन्य संरचना को भेदने के लिए अर्जुन के अलावा कोई अन्य योग्य योद्धा नहीं था। तभी अभिमन्यु ने कहा कि वे इस चक्रव्यूह को तोड़ने में सक्षम हैं। हालांकि, उन्हें पता था कि उन्हें बाहर निकलने की विधि नहीं मालूम, लेकिन उन्होंने निडरता से इस चुनौती को स्वीकार किया। इसे भी पढ़ें:- कब और कहां लेंगे भगवान विष्णु कल्कि का अवतार? अभिमन्यु का चक्रव्यूह में प्रवेश और फंस जाना अभिमन्यु (Abhimanyu) ने अपने बल और साहस से चक्रव्यूह के पहले छह द्वार भेद दिए। उन्होंने कौरवों के कई महारथियों – जयद्रथ, दु:शासन, कर्ण और द्रोणाचार्य को चुनौती दी और कई योद्धाओं को पराजित किया। लेकिन जब वे सातवें द्वार पर पहुंचे, तब कौरवों ने नियमों को तोड़ते हुए उन पर एक साथ हमला कर दिया। अभिमन्यु के चक्रव्यूह में प्रवेश करने के बाद, जयद्रथ ने पांडवों को भीतर जाने से रोक दिया, जिससे वे अकेले पड़ गए। इस स्थिति का लाभ उठाकर कौरवों के महारथी—द्रोणाचार्य, कर्ण, दु:शासन, कृतवर्मा, कृपाचार्य और अश्वत्थामा—ने उन पर एक साथ आक्रमण कर दिया। युद्ध के नियमों के विपरीत जाकर, कौरवों ने निहत्थे अभिमन्यु पर निर्ममता से हथियारों से प्रहार किया। अंततः, दु:शासन के पुत्र ने उनके सिर पर गदा से प्रहार किया, जिससे अभिमन्यु वीरगति को प्राप्त हुए। अभिमन्यु की कथा से क्या सीख मिलती है? नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news Abhimanyu Mahabharata #Mahabharat #Abhimanyu #Chakravyuh #KurukshetraWar #MahabharataStory #ArjunaSon #HinduMythology #EpicBattle #MahabharatKatha #AncientIndia

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