गया: पितृपक्ष मेले के दौरान शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की बहू स्मिता ठाकरे 29 सितंबर 2026 को बिहार के गयाजी पहुंचीं। उन्होंने विष्णुपद मंदिर परिसर में अपने ससुर बालासाहेब ठाकरे और पिता मधुकर चितरे के लिए विधि-विधान से श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया। अनुष्ठान के दौरान उन्होंने बालासाहेब ठाकरे की तस्वीर अपने सामने रखी और पितरों की आत्मा की शांति की कामना की।
विष्णुपद मंदिर परिसर में किया पिंडदान
स्मिता ठाकरे ने गयाजी स्थित विष्णुपद मंदिर परिसर में तीर्थ पुरोहितों के मार्गदर्शन में श्राद्ध कर्म संपन्न किया।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उन्होंने पिंड अर्पित किए और पितरों के लिए तर्पण किया। इस दौरान वह भावुक भी नजर आईं।
बालासाहेब ठाकरे की तस्वीर रखकर किया श्राद्ध
पिंडदान के दौरान स्मिता ठाकरे ने अपने ससुर और शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की तस्वीर सामने रखी।
उन्होंने बालासाहेब ठाकरे के साथ अपने पिता मधुकर चितरे और अन्य पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए भी प्रार्थना की।
लंबे समय से गयाजी आने की थी इच्छा
अनुष्ठान के बाद स्मिता ठाकरे ने कहा कि वह लंबे समय से गयाजी आकर अपने पितरों के लिए श्राद्ध और पिंडदान करना चाहती थीं।
उन्होंने बताया कि गुरु के आशीर्वाद से उनकी यह इच्छा पूरी हुई और धार्मिक अनुष्ठान करने के बाद उन्हें आत्मिक संतोष महसूस हुआ।
पिंडदान के दौरान हुईं भावुक
स्मिता ठाकरे ने कहा कि पूर्वजों को याद करते समय कई पुरानी यादें सामने आ जाती हैं और यह उनके लिए बेहद भावुक क्षण था।
उन्होंने कहा कि पितृपक्ष में गयाजी की पवित्र भूमि पर अपने पूर्वजों का स्मरण करना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
महिलाओं के पिंडदान पर भी की बात
स्मिता ठाकरे ने बताया कि शुरुआत में उनके मन में भी सवाल था कि क्या महिलाएं पिंडदान कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि धार्मिक मार्गदर्शन के दौरान उन्हें माता सीता द्वारा गयाजी में राजा दशरथ के लिए पिंडदान किए जाने की कथा के बारे में बताया गया, जिसके बाद उन्होंने स्वयं अनुष्ठान करने का निर्णय लिया।
सनातन परंपरा को आगे बढ़ाने की कही बात
स्मिता ठाकरे ने सनातन धर्म और धार्मिक परंपराओं के महत्व पर भी बात की।
उन्होंने कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्कृति, कर्तव्य और समाजसेवा भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
राजनीति में आने के सवाल पर दिया जवाब
इस दौरान जब उनसे सक्रिय राजनीति में आने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि राजनीति में आना या जाना हमेशा किसी व्यक्ति के हाथ में नहीं होता, लेकिन समाजसेवा करना उसके हाथ में होता है।
उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से सामाजिक कार्यों से जुड़ी रही हैं और आगे भी लोगों की मदद से जुड़े काम करती रहेंगी।
गयाजी में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
पितृपक्ष के दौरान देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गयाजी पहुंच रहे हैं।
फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर और विभिन्न पिंडवेदियों पर लोग अपने पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान कर रहे हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार गयाजी में किए गए पिंडदान का विशेष महत्व माना जाता है।
बालासाहेब ठाकरे को किया याद
स्मिता ठाकरे ने अनुष्ठान के दौरान बालासाहेब ठाकरे को याद करते हुए उनके दिखाए रास्ते और विचारों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि वह उनके आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए सामाजिक कार्य और अपनी जिम्मेदारियों को आगे बढ़ाती रहेंगी।
source – Dainik Jagran / India TV / ABP News / Times of India / Prabhat Khabar
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