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दशहरे पर कानपुर के रावण मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, साल में सिर्फ एक दिन होते हैं दशानन के दर्शन

कानपुर, 21 अक्टूबर 2026: देशभर में जहां विजयादशमी के अवसर पर रावण दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है, वहीं उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक अनोखी परंपरा देखने को मिलती है। यहां शिवाला क्षेत्र स्थित कैलाश मंदिर परिसर का करीब 200 साल पुराना रावण मंदिर साल में केवल एक बार, विजयादशमी के दिन श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। इस दिन बड़ी संख्या में लोग रावण के दर्शन करने और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।

साल में सिर्फ एक दिन खुलते हैं मंदिर के कपाट

कानपुर के इस अनोखे मंदिर के कपाट विजयादशमी की सुबह खोले जाते हैं और श्रद्धालु शाम तक दर्शन कर सकते हैं। इसके बाद मंदिर को फिर अगले वर्ष दशहरे तक बंद कर दिया जाता है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। दशहरे के दिन मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है और लोग विशेष पूजा में शामिल होकर अपनी आस्था व्यक्त करते हैं।

पीले फूल और तेल का दीपक चढ़ाते हैं श्रद्धालु

मंदिर में पूजा के दौरान श्रद्धालु रावण को पीले फूल, कड़वे तेल का दीपक, जनेऊ और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, रावण की पूजा करने से विद्या, बुद्धि और बल की प्राप्ति होती है। दर्शन के दौरान श्रद्धालु धार्मिक जयकारे लगाते हैं और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा करते हैं।

रावण को क्यों माना जाता है पूजनीय?

रामायण में रावण को भगवान राम का प्रतिद्वंद्वी और लंका का राजा बताया गया है। हालांकि, धार्मिक और स्थानीय परंपराओं में उन्हें एक महान विद्वान, प्रकांड पंडित और भगवान शिव का अनन्य भक्त भी माना जाता है।

कानपुर के इस मंदिर में विजयादशमी पर रावण की पूजा किए जाने के पीछे उनकी विद्वता और शिवभक्ति से जुड़ी स्थानीय मान्यताओं को प्रमुख कारण माना जाता है।

करीब 200 साल पुरानी है मंदिर की परंपरा

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, कैलाश मंदिर परिसर में स्थित रावण मंदिर की परंपरा लगभग दो शताब्दियों पुरानी मानी जाती है। स्थानीय पुजारी और सेवादार मंदिर की देखरेख करते हैं।

साल में केवल एक दिन खुलने की वजह से यह मंदिर विजयादशमी के अवसर पर कानपुर की धार्मिक पहचान का एक खास हिस्सा बन जाता है।

रावण दहन से अलग है कानपुर की परंपरा

दशहरा देश के अधिकांश हिस्सों में रावण दहन के साथ मनाया जाता है। यह परंपरा बुराई पर अच्छाई की जीत और भगवान राम की विजय का प्रतीक मानी जाती है।

इसके विपरीत, भारत के कुछ क्षेत्रों में रावण को उनकी विद्वता, शिवभक्ति या स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के कारण सम्मान दिया जाता है। कानपुर का यह मंदिर ऐसी ही विशिष्ट परंपरा का उदाहरण है, जहां विजयादशमी के दिन रावण के दर्शन और पूजा के लिए श्रद्धालु जुटते हैं।

कानपुर का रावण मंदिर इस बात को दर्शाता है कि भारत में धार्मिक परंपराएं और लोकमान्यताएं अलग-अलग क्षेत्रों में विविध रूपों में प्रचलित हैं।

Source: Amar Ujala, Hindustan Times, The Times of India

जय राष्ट्र न्यूज़

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