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संसद परिसर में गृहमंत्री अमित शाह का बदला अंदाज़, स्वतंत्रता दिवस से पहले दिखा अलग रंग

नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र समाप्त होने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एक बार फिर चर्चा में हैं। संसद परिसर से सामने आई उनकी तस्वीरों और वीडियो में उनका अंदाज सामान्य राजनीतिक बैठकों से कुछ अलग नजर आया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर भी इसकी चर्चा तेज हो गई। हालांकि, उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में उनके इस बदले अंदाज को लेकर किसी खास राजनीतिक फैसले या आधिकारिक कारण की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे दावों को तथ्य मानने से पहले सावधानी जरूरी है। मानसून सत्र के दौरान अमित शाह रहे सुर्खियों में संसद के हालिया मानसून सत्र में अमित शाह कई राजनीतिक मुद्दों को लेकर विपक्ष के निशाने पर रहे। खासतौर पर छात्रों से जुड़े मुद्दे पर विपक्ष लगातार गृह मंत्री से सदन में बयान देने की मांग कर रहा था। अमित शाह ने अंततः सदन में चर्चा और जवाब देने की इच्छा जताई थी। भाजपा की ओर से भी कहा गया कि गृह मंत्री संसद में विपक्ष के सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं। सत्र खत्म होने के बाद भी राजनीतिक चर्चा जारी 13 अगस्त को मानसून सत्र समाप्त होने के बाद भी अमित शाह के बयान को लेकर राजनीतिक बहस जारी रही। विपक्ष ने सवाल उठाया कि गृह मंत्री ने सत्र के अंतिम चरण में चर्चा की पेशकश क्यों की, जबकि इससे पहले भी उनसे बयान की मांग की जा रही थी। वहीं सरकार और भाजपा ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। संसद परिसर में बदला अंदाज क्यों चर्चा में आया? अमित शाह की संसद परिसर में सामने आई तस्वीरों को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ यूजर्स इसे 15 अगस्त और स्वतंत्रता दिवस से जुड़े माहौल से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे सिर्फ सामान्य सार्वजनिक उपस्थिति मान रहे हैं। फिलहाल किसी आधिकारिक बयान से यह पुष्टि नहीं हुई है कि उनके पहनावे या अंदाज में बदलाव के पीछे कोई विशेष राजनीतिक संदेश था। 15 अगस्त से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल देश 15 अगस्त को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। ऐसे समय में केंद्र सरकार के शीर्ष नेताओं की गतिविधियों पर स्वाभाविक रूप से लोगों की नजर बनी हुई है। अमित शाह गृह मंत्री के साथ-साथ केंद्र सरकार के प्रमुख रणनीतिक नेताओं में शामिल हैं। गृह मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट भी उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में सूचीबद्ध करती है। निष्कर्ष संसद परिसर में अमित शाह का अलग अंदाज सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय जरूर बना है, लेकिन इसके पीछे कोई विशेष राजनीतिक कारण या आधिकारिक संदेश होने की पुष्टि अभी नहीं हुई है। वहीं मानसून सत्र के दौरान छात्रों के मुद्दे और विपक्ष की मांगों को लेकर अमित शाह पहले ही राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रहे हैं। Source: संसद से जुड़े ताजा समाचार, NDTV, Jansatta, गृह मंत्रालय जय राष्ट्र न्यूज़

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राष्ट्रीय | छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में हंगामा, अमित शाह के बयान की मांग पर लोकसभा फिर स्थगित

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को छात्रों के प्रदर्शन पर कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया। विपक्षी सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले पर सदन में बयान देने की मांग की। लगातार नारेबाजी और हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्ष ने उठाया छात्र प्रदर्शन का मुद्दा लोकसभा की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे शुरू हुई। जैसे ही अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल शुरू करने की कोशिश की, विपक्षी सांसदों ने छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाना शुरू कर दिया। विपक्ष की मांग थी कि गृह मंत्री अमित शाह स्वयं सदन में आकर इस पूरे मामले पर जवाब दें। लगातार नारेबाजी के कारण प्रश्नकाल सामान्य तरीके से आगे नहीं बढ़ सका। अमित शाह के बयान पर अड़ा विपक्ष विपक्षी सांसदों का मुख्य जोर गृह मंत्री अमित शाह के व्यक्तिगत बयान पर है। विपक्ष का आरोप है कि छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर सरकार को सदन में स्पष्ट जवाब देना चाहिए। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, विपक्ष 20 जुलाई को परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और कथित तौर पर पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर चर्चा और शाह के बयान की मांग कर रहा है। सरकार ने कहा—गृह मंत्री जवाब देने को तैयार संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू की ओर से पहले ही कहा गया था कि सरकार इस मुद्दे पर सदन में चर्चा के लिए तैयार है और अमित शाह भी छात्रों से जुड़े पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर जवाब देने के लिए तैयार हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी सदन में विपक्षी सांसदों को यही जानकारी दी और उनसे प्रश्नकाल को चलने देने की अपील की। स्पीकर ओम बिरला ने की बार-बार अपील हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी सांसदों से सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है और सांसदों को सदन में चर्चा तथा बहस के जरिए अपनी बात रखनी चाहिए। बिरला ने सदस्यों से पोस्टर और बैनर दिखाने के बजाय संसदीय प्रक्रिया के तहत चर्चा करने की अपील की। इसके बावजूद नारेबाजी जारी रही। कुछ ही मिनट में लोकसभा स्थगित विपक्ष के लगातार विरोध के चलते लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के लगभग चार मिनट बाद ही स्थगित कर दी गई। अब सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे दोबारा शुरू होने के लिए निर्धारित की गई है। राज्यसभा में भी इसी मुद्दे को लेकर हंगामा हुआ। वहां की कार्यवाही भी बाधित हुई और सदन को दोपहर 12 बजे तक स्थगित किया गया। दो सप्ताह से जारी है संसद में गतिरोध छात्र प्रदर्शन से जुड़े इस मुद्दे को लेकर संसद में पिछले करीब दो सप्ताह से राजनीतिक गतिरोध बना हुआ है। विपक्ष लगातार पुलिस कार्रवाई पर चर्चा और गृह मंत्री के बयान की मांग कर रहा है। वहीं, सरकार का कहना है कि वह इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार है और गृह मंत्री सदन में जवाब देने को तैयार हैं। इसके बावजूद दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। 20 जुलाई के प्रदर्शन पर है विवाद विवाद का मुख्य केंद्र 20 जुलाई का छात्र प्रदर्शन है। यह प्रदर्शन परीक्षा में कथित अनियमितताओं और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हुआ था। विपक्ष का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के खिलाफ पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया। इसी कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री से संसद में जवाब मांगा जा रहा है। सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ता टकराव सोमवार को सरकार की ओर से छात्रों से जुड़े मुद्दे और पुलिस कार्रवाई पर चर्चा कराने की पेशकश की गई थी। हालांकि विपक्ष ने केवल सामान्य चर्चा के बजाय गृह मंत्री अमित शाह से सीधे जवाब की मांग पर जोर दिया। इसी मुद्दे पर मंगलवार को भी संसद की कार्यवाही प्रभावित हुई और दोनों पक्षों के बीच गतिरोध जारी रहा। मानसून सत्र पर भी असर लगातार हंगामे का असर संसद के मानसून सत्र के कामकाज पर भी पड़ रहा है। सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर पहले से मतभेद हैं और छात्र प्रदर्शन का मुद्दा अब इस राजनीतिक टकराव का प्रमुख केंद्र बन गया है। संसदीय कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने को लेकर लोकसभा अध्यक्ष लगातार दोनों पक्षों से सहयोग की अपील कर रहे हैं। निष्कर्ष छात्र प्रदर्शन पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में जारी गतिरोध मंगलवार को भी खत्म नहीं हो सका। विपक्ष अमित शाह से सदन में स्पष्ट बयान की मांग पर अड़ा रहा, जबकि सरकार का कहना है कि गृह मंत्री इस मुद्दे पर जवाब देने के लिए तैयार हैं। लगातार नारेबाजी के कारण लोकसभा को कुछ ही मिनटों में दोपहर 2 बजे तक स्थगित करना पड़ा। अब नजर इस बात पर है कि दोपहर बाद सदन की कार्यवाही सुचारु हो पाती है या छात्र प्रदर्शन का मुद्दा एक बार फिर संसद में हंगामे का कारण बनता है। Source: News On AIR / Hindustan Times / Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

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एथेनॉल विवाद पर भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा का बयान—“शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के घर से आएगा?”

मध्य प्रदेश के रीवा से भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा अपने एक बयान को लेकर चर्चा में हैं। रीवा एयरपोर्ट पर एक कार्यक्रम के दौरान एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का विरोध करने वालों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा—“आंदोलन हो रहा है एथेनॉल नहीं चलेगा, शुद्ध पेट्रोल चलेगा। शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के घर से आएगा?” सांसद मिश्रा रीवा से भोपाल और कोलकाता के लिए शुरू हुई नई उड़ानों के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने देश की आर्थिक स्थिति और एथेनॉल नीति पर भी अपनी बात रखी। #JanardanMishra#RewaNews#MadhyaPradesh#Ethanol#BJPNews BreakingNews JayRashtraNews

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INDIA गठबंधन की बैठक से पहले दिल्ली में ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल की मुलाकात।

INDIA गठबंधन बैठक से पहले ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल की अहम मुलाकात

नई दिल्ली, 8 जून 2026 — INDIA गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक से पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। दोनों नेताओं की यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब विपक्षी दल आगामी राजनीतिक चुनौतियों और चुनावी रणनीति को लेकर लगातार मंथन कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात केवल एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि विपक्षी एकता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है। विपक्षी एकता पर फोकस ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल लंबे समय से विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर विपक्षी दलों के बीच बेहतर समन्वय की वकालत करते रहे हैं। दोनों नेताओं की मुलाकात को INDIA गठबंधन के भीतर सहयोग और संवाद बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, बैठक में गठबंधन के भविष्य, राजनीतिक रणनीति और विभिन्न राज्यों में विपक्षी दलों के बीच बेहतर तालमेल पर चर्चा हुई। INDIA गठबंधन की बैठक से पहले बढ़ा महत्व इस मुलाकात का समय बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसके तुरंत बाद INDIA गठबंधन की व्यापक बैठक आयोजित की जानी है। इस बैठक में कई विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेता शामिल हो रहे हैं और आगामी राजनीतिक एजेंडा पर चर्चा होने की संभावना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बड़े नेताओं के बीच इस तरह की बैठकें गठबंधन के भीतर विश्वास और सहयोग को मजबूत करने में मदद करती हैं। चुनावी रणनीति पर चर्चा देश में आने वाले चुनावों को देखते हुए विपक्षी दल अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। ऐसे में ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल की मुलाकात को चुनावी दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में जनसंपर्क अभियान, साझा राजनीतिक मुद्दों और विपक्षी दलों के बीच बेहतर समन्वय जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक महत्व ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल दोनों ही अपने-अपने राज्यों में प्रभावशाली राजनीतिक नेता माने जाते हैं। ऐसे में उनकी मुलाकात को राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि विपक्षी दलों के बीच संवाद और सहयोग बढ़ाने के प्रयास आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।

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