बैगा बच्चों की मौत पर बालाघाट में बड़ा आंदोलन, आज राष्ट्रीय महाधरना; 18 राज्यों के आदिवासी संगठनों के जुटने का दावा
बालाघाट, 5 सितंबर 2026: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैगा बहुल इलाकों में बच्चों की लगातार मौतों और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति को लेकर आदिवासी संगठनों का आंदोलन तेज हो गया है। सर्व आदिवासी समाज ने आज बालाघाट के आंबेडकर चौक पर राष्ट्रीय महाधरना आयोजित करने की घोषणा की है। आयोजकों का दावा है कि इसमें देश के करीब 18 आदिवासी बहुल राज्यों के संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। बच्चों की मौत का आंकड़ा 30 तक पहुंचा 4 सितंबर की ताज़ा रिपोर्ट में 10 वर्षीय बैगा बच्चे गजेंद्र की मौत के बाद मृत बच्चों की संख्या 30 बताई गई है। इससे पहले अलग-अलग रिपोर्टों में यह संख्या 26 से 29 के बीच बताई जा रही थी। प्रभावित इलाकों में खसरा, मलेरिया और दूसरी बीमारियों के मामलों के बीच स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं। स्वास्थ्य व्यवस्था और जवाबदेही पर सवाल आदिवासी संगठनों का आरोप है कि बैहर-बिरसा सहित दूरदराज के बैगा इलाकों में समय पर इलाज, स्वच्छ पेयजल और पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। प्रदर्शनकारी बच्चों की मौतों की विस्तृत जांच, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही और प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देने की मांग कर रहे हैं। 3 सितंबर को भी हुआ था बालाघाट बंद इससे पहले 3 सितंबर को बालाघाट बंद आयोजित किया गया था। बाजार और कई व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित रहीं, जबकि आवश्यक सेवाओं को बंद से अलग रखा गया था। प्रदर्शन के बीच तत्कालीन CMHO को पद से हटाए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई थी। 18 राज्यों के संगठनों के पहुंचने का दावा आयोजकों के अनुसार दिल्ली में राष्ट्रीय आदिवासी समन्वय समिति की बैठक में बैगा बच्चों की मौत का मुद्दा उठाया गया था। इसके बाद मामले को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने और 5 सितंबर को बालाघाट में महाधरना आयोजित करने का फैसला किया गया। संगठन ने भविष्य में इस मुद्दे को संसद के शीतकालीन सत्र तक पहुंचाने की बात भी कही है। स्वास्थ्य, पानी और बुनियादी सुविधाएं भी आंदोलन का मुद्दा महाधरना केवल बच्चों की मौत की जांच तक सीमित नहीं है। आदिवासी संगठन बैगा क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, पेयजल और दूसरी बुनियादी सुविधाओं में सुधार की भी मांग कर रहे हैं। संगठनों का कहना है कि विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह के क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ जमीन तक पहुंचना चाहिए। source – Amar Ujala / Balaghat Expressजय राष्ट्र न्यूज़

