महिलाओं की आजीविका योजना के फंड पर केंद्र से राज्यों की मांग, BJP शासित राज्य भी हुए शामिल
नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026: महिलाओं की आजीविका और शहरी गरीबों से जुड़ी योजनाओं के लिए फंडिंग को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ रहा है। तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और त्रिपुरा ने दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (DAY-NULM) के तहत वित्तीय सहायता और योजना के भविष्य को लेकर स्पष्टता की मांग की है। इन राज्यों में भाजपा, कांग्रेस और तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) से जुड़ी सरकारें शामिल हैं। एक करोड़ से अधिक महिलाओं की आजीविका पर चिंता DAY-NULM के तहत पिछले एक दशक में एक करोड़ से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जोड़ा गया और 10 लाख से ज्यादा समूह बनाए गए। राज्यों की चिंता है कि फंडिंग को लेकर अनिश्चितता बनी रहने से इन समूहों की गतिविधियां, बैंकिंग सुविधाओं तक पहुंच और संस्थागत ऋण प्राप्त करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। भाजपा शासित राज्यों ने भी उठाई फंडिंग की मांग महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और त्रिपुरा सहित भाजपा शासित राज्यों ने भी केंद्र से वित्तीय सहायता जारी करने और योजना के भविष्य की रूपरेखा स्पष्ट करने का आग्रह किया है। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार और तमिलनाडु की TVK सरकार ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है। इससे स्पष्ट है कि शहरी आजीविका योजनाओं की निरंतरता का मुद्दा अलग-अलग राजनीतिक दलों की राज्य सरकारों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। तमिलनाडु ने मांगे 350 करोड़ रुपये मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तमिलनाडु ने लगभग 350 करोड़ रुपये, जबकि महाराष्ट्र ने करीब 81 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मांगी है। अन्य राज्यों ने भी कर्मचारियों के वेतन, रिवॉल्विंग फंड, ब्याज सब्सिडी और स्वयं सहायता समूहों को सहयोग देने के लिए धन की जरूरत बताई है। NULM 2.0 को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं DAY-NULM वर्ष 2024 में समाप्त हो गया था। इसके बाद उत्तराधिकारी कार्यक्रम के रूप में एक पायलट पहल शुरू की गई, लेकिन पूर्ण स्तर पर NULM 2.0 या नई राष्ट्रीय शहरी आजीविका योजना को लेकर अब तक स्पष्टता नहीं है। राज्यों का कहना है कि नई योजना की समयसीमा और वित्तीय प्रावधानों की जानकारी जरूरी है, ताकि महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों और उनसे जुड़ी आजीविका गतिविधियों को बिना रुकावट जारी रखा जा सके। केंद्र सरकार का क्या कहना है? रिपोर्टों के मुताबिक, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय का कहना है कि उसके पास फंड जारी करने से संबंधित कोई लंबित मांग नहीं है। मंत्रालय ने प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi) और अन्य योजनाओं के माध्यम से शहरी गरीबों को मिल रहे सहयोग का भी उल्लेख किया है। हालांकि, राज्यों की चिंता है कि महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों के लिए समर्पित आजीविका सहायता और फंडिंग की व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। आने वाले समय में इस मुद्दे पर केंद्र और राज्यों के बीच बातचीत योजना की निरंतरता के लिहाज से अहम होगी। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस, द फाइनेंशियल एक्सप्रेस, जनसत्ता जय राष्ट्र न्यूज़

