प्रमुख खबरें

Jeffrey Epstein से मुलाकात विवाद पर Hardeep Singh Puri की सफाई, बोले—संपर्क पूरी तरह professional था

Jeffrey Epstein से मुलाकात विवाद पर Hardeep Singh Puri की सफाई, बोले—संपर्क पूरी तरह professional था नई दिल्ली, 22 अक्टूबर 2026: Jeffrey Epstein से मुलाकातों को लेकर दोबारा उठे विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री Hardeep Singh Puri ने अपने पुराने संपर्कों पर सफाई दी है। Puri का कहना है कि Epstein के साथ उनकी मुलाकातें सीमित और पूरी तरह professional context में हुई थीं तथा उनका Epstein के आपराधिक मामलों से कोई संबंध नहीं था। हाल में सामने आई तस्वीरों के बाद विपक्ष ने उनसे दोबारा जवाब मांगा है। विवाद फिर क्यों उठा? हाल में एक तस्वीर सामने आई जिसमें Puri और Epstein एक private meeting में दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद Congress, TMC और NCP (SP) नेताओं ने सवाल उठाया कि क्या यह Puri के उस पुराने बयान से मेल खाता है जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी मुलाकातें delegation और professional engagements का हिस्सा थीं। Puri ने पहले क्या कहा था? फरवरी 2026 में Puri ने कहा था कि उन्होंने Epstein से “तीन या अधिकतम चार बार” मुलाकात की और सभी interactions Independent Commission on Multilateralism तथा अन्य international work से जुड़े थे। उन्होंने किसी wrongdoing से साफ इनकार किया था। Opposition ने 62 emails और 14 meetings का मुद्दा उठाया Congress ने फरवरी में आरोप लगाया था कि 2014 से 2017 के बीच Puri और Epstein के बीच 62 email exchanges और 14 meetings के records मौजूद हैं। Puri ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि विपक्ष public records को context से बाहर पेश कर रहा है। “धोखे में रखकर मिलवाया गया” दावे पर सावधानी सोशल मीडिया और कुछ posts में Puri के नाम से यह दावा चल रहा है कि उन्हें “धोखे में रखकर Epstein से मिलवाया गया”। लेकिन उपलब्ध विश्वसनीय reports में मुझे इस exact wording की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिली। Verified position फिलहाल यही है कि Puri अपने contacts को professional बताते हैं और किसी criminal association से इनकार करते हैं। Epstein कौन था? Jeffrey Epstein एक अमेरिकी financier था जिसे 2008 में prostitution-related offence में दोषी ठहराया गया था और 2019 में उस पर minors की sex trafficking के federal charges लगे। 2019 में जेल में उसकी मौत हुई, जिसे suicide बताया गया। किसी व्यक्ति का Epstein के emails या records में नाम होना अपने आप में criminal wrongdoing का प्रमाण नहीं है। राजनीतिक विवाद जारी नई तस्वीरों के बाद विपक्ष Puri से मुलाकातों की संख्या, context और correspondence पर विस्तृत स्पष्टीकरण मांग रहा है। Puri पहले ही सभी आरोपों को “baseless” बताते हुए अपनी भूमिका को professional engagements तक सीमित बता चुके हैं। Source – The Indian Express, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़नई दिल्ली, 22 अक्टूबर 2026: Jeffrey Epstein से मुलाकातों को लेकर दोबारा उठे विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री Hardeep Singh Puri ने अपने पुराने संपर्कों पर सफाई दी है। Puri का कहना है कि Epstein के साथ उनकी मुलाकातें सीमित और पूरी तरह professional context में हुई थीं तथा उनका Epstein के आपराधिक मामलों से कोई संबंध नहीं था। हाल में सामने आई तस्वीरों के बाद विपक्ष ने उनसे दोबारा जवाब मांगा है। विवाद फिर क्यों उठा? हाल में एक तस्वीर सामने आई जिसमें Puri और Epstein एक private meeting में दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद Congress, TMC और NCP (SP) नेताओं ने सवाल उठाया कि क्या यह Puri के उस पुराने बयान से मेल खाता है जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी मुलाकातें delegation और professional engagements का हिस्सा थीं। Puri ने पहले क्या कहा था? फरवरी 2026 में Puri ने कहा था कि उन्होंने Epstein से “तीन या अधिकतम चार बार” मुलाकात की और सभी interactions Independent Commission on Multilateralism तथा अन्य international work से जुड़े थे। उन्होंने किसी wrongdoing से साफ इनकार किया था। Opposition ने 62 emails और 14 meetings का मुद्दा उठाया Congress ने फरवरी में आरोप लगाया था कि 2014 से 2017 के बीच Puri और Epstein के बीच 62 email exchanges और 14 meetings के records मौजूद हैं। Puri ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि विपक्ष public records को context से बाहर पेश कर रहा है। “धोखे में रखकर मिलवाया गया” दावे पर सावधानी सोशल मीडिया और कुछ posts में Puri के नाम से यह दावा चल रहा है कि उन्हें “धोखे में रखकर Epstein से मिलवाया गया”। लेकिन उपलब्ध विश्वसनीय reports में मुझे इस exact wording की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिली। Verified position फिलहाल यही है कि Puri अपने contacts को professional बताते हैं और किसी criminal association से इनकार करते हैं। Epstein कौन था? Jeffrey Epstein एक अमेरिकी financier था जिसे 2008 में prostitution-related offence में दोषी ठहराया गया था और 2019 में उस पर minors की sex trafficking के federal charges लगे। 2019 में जेल में उसकी मौत हुई, जिसे suicide बताया गया। किसी व्यक्ति का Epstein के emails या records में नाम होना अपने आप में criminal wrongdoing का प्रमाण नहीं है। राजनीतिक विवाद जारी नई तस्वीरों के बाद विपक्ष Puri से मुलाकातों की संख्या, context और correspondence पर विस्तृत स्पष्टीकरण मांग रहा है। Puri पहले ही सभी आरोपों को “baseless” बताते हुए अपनी भूमिका को professional engagements तक सीमित बता चुके हैं। Source – The Indian Express, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

Kharge PM Modi के सामने उठाएंगे SIR, Delimitation और Women’s Reservation के मुद्दे

नई दिल्ली, 21 अक्टूबर 2026: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने कहा है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के साथ प्रस्तावित बैठक में Special Intensive Revision (SIR), परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे उठाएंगे। खड़गे के मुताबिक, वह इन विषयों पर विपक्ष की चिंताओं को सीधे प्रधानमंत्री के सामने रखेंगे। SIR को लेकर विपक्ष की चिंताएं Special Intensive Revision यानी SIR मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने, दस्तावेजों के सत्यापन और पात्र मतदाताओं के सूची से बाहर होने की आशंकाओं पर सवाल उठा रहे हैं। खड़गे ने संकेत दिया है कि वह बैठक में इन चिंताओं को विस्तार से रखेंगे। विपक्ष की मांग है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पारदर्शी हो और किसी भी पात्र मतदाता का नाम अनुचित तरीके से न हटे। Delimitation क्यों है अहम मुद्दा? परिसीमन का अर्थ निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं और संसदीय प्रतिनिधित्व का पुनर्निर्धारण है। इस मुद्दे पर कई विपक्षी दलों, विशेषकर दक्षिण भारत के कुछ राजनीतिक दलों ने चिंता जताई है। उनकी आशंका है कि भविष्य में जनसंख्या के आधार पर सीटों के पुनर्वितरण से राज्यों के बीच संसद में प्रतिनिधित्व का संतुलन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में विपक्ष इस प्रक्रिया को लेकर व्यापक राजनीतिक सहमति और राज्यों के साथ परामर्श की मांग कर रहा है। Women’s Reservation के क्रियान्वयन पर भी चर्चा महिला आरक्षण भी प्रस्तावित बातचीत के प्रमुख मुद्दों में शामिल है। कांग्रेस महिला आरक्षण कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और इसकी समय-सीमा को लेकर सवाल उठाती रही है। कानून के तहत आरक्षण के क्रियान्वयन को जनगणना के बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया है। विपक्ष इस विषय पर सरकार से स्पष्टता और जल्द क्रियान्वयन की मांग कर रहा है। PM Modi के सामने सीधे रखेंगे अपनी बात खड़गे ने कहा है कि वह इन मुद्दों पर अपनी चिंताओं को प्रधानमंत्री के सामने स्पष्ट रूप से रखेंगे। SIR, परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे विषयों पर सरकार और विपक्ष के बीच चर्चा को राजनीतिक और संवैधानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जहां विपक्ष इन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और व्यापक परामर्श पर जोर दे रहा है, वहीं संबंधित सरकारी कदम संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के तहत आगे बढ़ाए जाने हैं। प्रस्तावित बैठक में इन मुद्दों पर क्या चर्चा होती है, इस पर नजर रहेगी। Source: Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

Maharashtra MLC चुनाव से पहले Mahayuti में बढ़ी खींचतान, BJP उम्मीदवारों के खिलाफ Shinde Sena के नेताओं ने खोला मोर्चा

मुंबई/पुणे, 19 अक्टूबर 2026: महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों पर 23 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से पहले सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के भीतर BJP और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच मतभेद सामने आए हैं। पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र और छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में शिंदे सेना के कुछ नेताओं ने BJP समर्थित उम्मीदवारों के बजाय दूसरे प्रत्याशियों का समर्थन करने का रुख अपनाया है। इससे गठबंधन के भीतर चुनावी तालमेल को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पुणे में BJP उम्मीदवार के बजाय निर्दलीय को समर्थन पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में BJP ने Kaustubh Gawade को उम्मीदवार बनाया है। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक, शिंदे सेना ने निर्दलीय उम्मीदवार Sachin Sanap को समर्थन देने का फैसला किया है। गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच अलग-अलग उम्मीदवारों के समर्थन से महायुति की एकजुटता पर चर्चा तेज हो गई है। संभाजीनगर में Abdul Sattar का अलग रुख छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में शिंदे सेना के विधायक Abdul Sattar ने महायुति के उम्मीदवार के बजाय महाविकास अघाड़ी (MVA) के Satish Chavan का समर्थन करने की बात कही है। इस रुख के बीच पार्टी के अंतिम निर्णय को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में एकनाथ शिंदे के निर्देश को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमरावती और नागपुर में भी असंतोष गठबंधन के भीतर असंतोष की स्थिति केवल पुणे और संभाजीनगर तक सीमित नहीं है। अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भी BJP और शिंदे सेना से जुड़े बागी नेताओं को लेकर तनाव की खबरें सामने आई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, BJP ने अपने कुछ बागी नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है, जबकि शिंदे सेना का रुख अपेक्षाकृत नरम रहा। दोनों सहयोगी दलों के अलग-अलग तरीकों ने गठबंधन के भीतर मतभेदों को और चर्चा में ला दिया है। Devendra Fadnavis को मतभेद सुलझने की उम्मीद मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने भरोसा जताया है कि महायुति के भीतर के मतभेद सुलझा लिए जाएंगे। इस बीच, गठबंधन में अंतिम चुनावी दिशा को लेकर एकनाथ शिंदे की भूमिका अहम मानी जा रही है। Fadnavis का सांगली दौरा भी चुनावी अभियान के समन्वय और कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 23 अक्टूबर को पांच सीटों पर मतदान महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होना निर्धारित है। इनमें तीन स्नातक और दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। चुनाव से पहले सहयोगी दलों के नेताओं के अलग-अलग रुख ने महायुति के सामने विपक्ष से मुकाबले के साथ-साथ गठबंधन के भीतर तालमेल बनाए रखने की चुनौती भी खड़ी कर दी है। Source: The Indian Express, Jansatta, Loksatta, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

कोलकाता पंडाल हादसे के बाद अमित शाह के भव्य स्वागत पर सवाल, विपक्ष ने BJP को घेरा

कोलकाता, 19 अक्टूबर 2026: कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ में 19 लोगों की मौत के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एयरपोर्ट पर स्वागत को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि हादसे के कुछ ही समय बाद ढोल-नगाड़ों और सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ अमित शाह का स्वागत किया गया, जो संवेदनहीनता को दर्शाता है। हादसे और स्वागत के बीच करीब 35 मिनट का अंतर मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंडाल में भगदड़ की घटना शाम करीब 7:40 बजे हुई, जबकि अमित शाह लगभग 8:15 बजे कोलकाता एयरपोर्ट पहुंचे। एयरपोर्ट पर उनके स्वागत के लिए ढोल-नगाड़ों और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसके वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने इस आयोजन के समय और तरीके पर सवाल उठाए। कांग्रेस ने साधा निशाना कांग्रेस नेताओं ने सोशल मीडिया पर हादसे और एयरपोर्ट स्वागत से जुड़े वीडियो साझा करते हुए BJP नेतृत्व की आलोचना की। विपक्ष का कहना था कि जिस समय शहर में लोग हादसे का शिकार हुए थे, उसी दौरान गृह मंत्री के स्वागत में समारोह आयोजित किया जा रहा था। हालांकि, ये राजनीतिक दलों की ओर से लगाए गए आरोप हैं। TMC ने भी BJP को घेरा तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भी भगदड़ की घटना के बाद BJP और आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। पार्टी ने भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा इंतजाम और हादसे के लिए जिम्मेदार परिस्थितियों की जांच की मांग की। घटना के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। अमित शाह ने अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात की एयरपोर्ट स्वागत को लेकर उठे विवाद के बीच अमित शाह ने अगले दिन अस्पताल पहुंचकर हादसे में घायल लोगों से मुलाकात की और उनकी स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने घटना पर दुख जताया और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। भगदड़ में 19 लोगों की मौत, जांच जारी चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ में अब तक 19 लोगों की मौत की खबर है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। विशेष जांच दल (SIT) भीड़ प्रबंधन में संभावित लापरवाही, सुरक्षा व्यवस्था और उस घोषणा की भूमिका की जांच कर रहा है, जिससे कथित तौर पर लोगों में घबराहट फैल गई थी। एयरपोर्ट स्वागत बना राजनीतिक विवाद का मुद्दा कोलकाता हादसे के बाद अमित शाह के स्वागत का मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। विपक्ष इसे संवेदनशीलता और जवाबदेही से जोड़कर BJP की आलोचना कर रहा है। वहीं, हादसे से जुड़े तथ्यों, जिम्मेदारियों और प्रशासनिक चूक की जांच के निष्कर्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा। Source – Aaj Tak, Economic Times, Lagatar News, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

शत्रुघ्न सिन्हा का BJP पर बड़ा आरोप, बोले—“चुनाव आयोग और खासकर ज्ञानेश कुमार का पूरा फायदा उठाया गया”

आसनसोल: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग को लेकर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि BJP ने चुनाव आयोग का “पूरा फायदा” उठाया है और खास तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में उसे लाभ मिला। सिन्हा ने कहा कि वह लंबे समय तक BJP में रहे हैं और पार्टी की कार्यशैली से अच्छी तरह परिचित हैं। हालांकि, ये उनके राजनीतिक आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। “BJP चुनाव आयोग का पर्याय बन गई” शत्रुघ्न सिन्हा ने आरोप लगाया कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में BJP और चुनाव आयोग के बीच अंतर कम होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि वह वर्षों तक BJP में रहे हैं और इस दौरान पार्टी के नेताओं तथा उनकी कार्यशैली को करीब से समझा है। ज्ञानेश कुमार का नाम लेकर लगाया आरोप TMC सांसद ने अपने बयान में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP ने चुनाव आयोग और खासकर ज्ञानेश कुमार का फायदा उठाया है। हालांकि, सिन्हा ने अपने दावे के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया। 2024 के बाद के चुनावों की वैधता पर उठाए सवाल सिन्हा ने 2024 के बाद हुए चुनावों की वैधता पर भी सवाल उठाए और उन्हें गैर-कानूनी बताया। यह उनका राजनीतिक दावा है। किसी अदालत द्वारा 2024 के बाद हुए सभी चुनावों को अवैध घोषित किए जाने की जानकारी इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है। राहुल गांधी और ममता बनर्जी के रुख का समर्थन शत्रुघ्न सिन्हा ने चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विपक्ष के अन्य नेताओं की चिंताओं का समर्थन किया। उन्होंने राहुल गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से चुनावी प्रक्रिया पर उठाए जा रहे सवालों से सहमति जताई। SIR विवाद से बढ़ा राजनीतिक टकराव यह बयान विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच आया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की प्रक्रिया से BJP को फायदा हो सकता है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने पक्षपात और हेरफेर के आरोपों से इनकार किया है। आयोग के अनुसार, मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य डुप्लिकेट, मृत और अपात्र मतदाताओं से जुड़ी प्रविष्टियों को दुरुस्त करना है। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग CJP, कांग्रेस, TMC और अन्य विपक्षी समूह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। 12 अक्टूबर को भी विपक्षी नेताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की खबरें सामने आईं। BJP ने आरोपों को खारिज किया BJP ने चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक करार दिया है। पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने एक बयान में कहा था कि BJP की मदद “ज्ञानेश जी नहीं, गणेश जी” कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष पर चुनावी हार के बाद चुनाव आयोग को निशाना बनाने का आरोप लगाया। BJP का दावा—संवैधानिक संस्थाएं स्वतंत्र BJP का कहना है कि चुनाव आयोग सहित देश की संवैधानिक संस्थाएं स्वतंत्र रूप से काम करती हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त से संबंधित याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बाद भी पार्टी ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाएं निर्धारित प्रक्रिया के तहत काम कर रही हैं। CJP आंदोलन से गरमाया विवाद ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के बाद चुनाव आयोग की निष्पक्षता का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। दिल्ली में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। विपक्ष ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए, जबकि BJP ने प्रदर्शनों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं शत्रुघ्न सिन्हा का यह दावा कि BJP ने चुनाव आयोग और खासकर ज्ञानेश कुमार का “पूरा फायदा” उठाया, एक राजनीतिक आरोप है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्थापित नहीं होता कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने BJP को अनुचित चुनावी लाभ पहुंचाया है। BJP और चुनाव आयोग पक्षपात के आरोपों से इनकार करते रहे हैं। स्रोत: पत्रिका, नवभारत टाइम्स, रॉयटर्स, NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

PM मोदी ने executive public office में 25 साल पूरे किए, BJP ने देशभर में कार्यक्रम शुरू किए

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 7 अक्टूबर 2026 को executive public office में लगातार 25 साल पूरे कर लिए। 7 अक्टूबर 2001 को उन्होंने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभाला था और इसके बाद मुख्यमंत्री तथा प्रधानमंत्री के रूप में लगातार सत्ता के शीर्ष कार्यकारी पदों पर बने रहे। इस अवसर पर BJP ने देशभर में विशेष कार्यक्रम, exhibitions और outreach campaigns शुरू किए। 7 अक्टूबर 2001 से शुरू हुआ सफर नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। यहीं से उनके executive public office का सफर शुरू हुआ, जो बाद में गुजरात की राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचा। गुजरात के तीन बार मुख्यमंत्री रहे मोदी ने गुजरात में लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीते और कई वर्षों तक मुख्यमंत्री के रूप में काम किया। उनका Gujarat tenure infrastructure, industrial investment, governance reforms और political centralisation को लेकर लगातार चर्चा में रहा। 2014 में बने प्रधानमंत्री 2014 के लोकसभा चुनाव में BJP ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्पष्ट बहुमत हासिल किया। इसके बाद मोदी ने 26 मई 2014 को भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली और राष्ट्रीय राजनीति में उनका नया दौर शुरू हुआ। 2019 और 2024 में भी सत्ता बरकरार 2019 में BJP ने और बड़े बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की। 2024 में BJP अपने दम पर बहुमत से पीछे रही, लेकिन NDA गठबंधन ने सरकार बनाई और नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। Cabinet ने पास किया विशेष resolution 25 साल पूरे होने के अवसर पर Union Cabinet ने नरेंद्र मोदी के राजनीतिक और प्रशासनिक सफर पर एक विशेष resolution पास किया। Resolution में उनके governance model, policy initiatives और public service tenure का उल्लेख किया गया। BJP ने देशभर में शुरू किए कार्यक्रम BJP ने इस milestone को लेकर देशभर में कई कार्यक्रम शुरू किए हैं। इनमें exhibitions, public meetings, service activities, digital campaigns और मोदी सरकार की योजनाओं से जुड़ी outreach शामिल है। ‘25 Years of Public Service’ campaign BJP ने इस अवसर को “25 Years of Public Service” के तौर पर project किया है। पार्टी मोदी के Gujarat model से लेकर केंद्र सरकार की योजनाओं तक के सफर को लोगों के सामने रखने की कोशिश कर रही है। विकास और welfare schemes पर जोर BJP के कार्यक्रमों में infrastructure, digital governance, DBT, UPI, housing, sanitation और welfare schemes को प्रमुख उपलब्धियों के रूप में पेश किया जा रहा है। सरकार इन योजनाओं को governance continuity और policy execution से जोड़ रही है। विपक्ष ने भी उठाए सवाल विपक्षी दलों ने इस milestone पर अलग रुख अपनाया है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल Modi सरकार की economic policies, unemployment, institutional independence और federal relations को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। BJP के लिए बड़ा political milestone नरेंद्र मोदी का 25 साल का लगातार executive tenure BJP के लिए बड़ा राजनीतिक milestone माना जा रहा है। भारत की contemporary politics में इतने लंबे समय तक मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री जैसे कार्यकारी पदों पर बने रहना बेहद असाधारण माना जाता है। 2029 से पहले political positioning पर नजर यह milestone ऐसे समय आया है जब 2029 Lok Sabha election की राजनीतिक positioning भी धीरे-धीरे तेज हो रही है। BJP मोदी के लंबे governance record को continuity और stability के narrative से जोड़ रही है, जबकि विपक्ष accountability और performance को लेकर चुनौती देने की तैयारी में है। source – India Today / The Indian Express / Hindustan Times / BJP जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

2029 से पहले 21 NDA शासित राज्यों में लागू होगा UCC: अमित शाह

मुंबई: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले BJP-led NDA शासित सभी 21 राज्यों में Uniform Civil Code (UCC) लागू करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में UCC पहले ही लागू किया जा चुका है और बाकी NDA शासित राज्यों में भी इसे आगे बढ़ाया जाएगा। मुंबई की प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया ऐलान अमित शाह ने यह बयान 13 सितंबर को मुंबई में आयोजित एक press conference में दिया था। उन्होंने कहा कि सरकार सामाजिक और कानूनी समानता के एजेंडे के तहत UCC को आगे बढ़ा रही है। 21 NDA शासित राज्यों का किया जिक्र शाह ने कहा कि BJP-led NDA की सरकार वाले 21 राज्यों में 2029 से पहले UCC लागू किए जाने को लेकर उन्हें भरोसा है। उन्होंने इसे अगले लोकसभा चुनाव से पहले पूरा किए जाने वाले बड़े policy goals में शामिल किया। क्या है Uniform Civil Code? Uniform Civil Code का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और पारिवारिक कानूनों जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान civil laws लागू करना है। फिलहाल इन मुद्दों पर अलग-अलग धार्मिक personal laws भी लागू होते हैं। Uttarakhand पहले ही लागू कर चुका UCC उत्तराखंड Uniform Civil Code लागू करने वाले शुरुआती राज्यों में शामिल है। राज्य में विवाह, divorce, inheritance और live-in relationships समेत कई civil matters के लिए common legal framework तैयार किया गया है। Gujarat भी UCC की दिशा में आगे हाल में Gujarat ने भी Uniform Civil Code से जुड़े कानून को आगे बढ़ाया है। इससे BJP शासित राज्यों में UCC implementation को लेकर राजनीतिक और कानूनी चर्चा और तेज हुई है। Triple Talaq का भी किया जिक्र अमित शाह ने अपने बयान में triple talaq खत्म किए जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार देने की दिशा में सरकार का बड़ा कदम बताया। BJP के core agenda में शामिल UCC Uniform Civil Code लंबे समय से BJP के प्रमुख ideological और political commitments में शामिल रहा है। पार्टी का तर्क है कि समान civil laws से gender equality और legal uniformity को बढ़ावा मिलेगा। विपक्ष लगातार उठाता रहा सवाल विपक्षी दल UCC के स्वरूप, implementation और राज्यों की विविध सामाजिक-सांस्कृतिक परिस्थितियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। कुछ दलों का कहना है कि किसी भी बड़े बदलाव से पहले सभी communities और stakeholders से व्यापक consultation जरूरी है। NRC पर अभी चर्चा जारी उसी press conference में अमित शाह ने NRC को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि nationwide NRC पर allies और अन्य stakeholders के साथ चर्चा जारी है, लेकिन इसकी कोई तय timeline नहीं बताई गई। 2029 से पहले बड़ा राजनीतिक लक्ष्य 2029 लोकसभा चुनाव से पहले सभी NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने का बयान BJP के बड़े policy roadmap के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि अलग-अलग राज्यों में कानून बनाने, legislative approval और judicial scrutiny जैसी प्रक्रियाओं के कारण implementation की timeline हर राज्य में अलग हो सकती है। source – The Indian Express / India Today / NDTV / Hindustan Times / The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

प्रशांत किशोर का चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप, बोले- ‘पक्षपात से BJP को मिला अनुचित फायदा’

मुजफ्फरपुर: जन सुराज पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग के कथित “पक्षपातपूर्ण रवैये” से भारतीय जनता पार्टी को चुनावों में अनुचित लाभ मिला है। किशोर ने चुनावी खर्च, प्रशासनिक मशीनरी के इस्तेमाल और मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों को लेकर भी सवाल उठाए। ये प्रशांत किशोर के राजनीतिक आरोप हैं; चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों को संस्थागत प्रक्रिया और सर्वसम्मति से लिया गया बताया है। SIR विवाद के बीच आया प्रशांत किशोर का बयान प्रशांत किशोर ने 25 सितंबर 2026 को मुजफ्फरपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान चुनाव आयोग पर ये आरोप लगाए। उनसे हाल में सामने आई उस रिपोर्ट को लेकर सवाल किया गया था, जिसमें Special Intensive Revision यानी SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर चुनाव आयोग के भीतर अलग-अलग टिप्पणियों और आपत्तियों का दावा किया गया था। ‘2021 में ही उठाया था आयोग की निष्पक्षता का सवाल’ प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर पहली बार सवाल अब नहीं उठाया है। उन्होंने 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उस समय भी BJP को चुनाव आयोग के कथित पक्षपात का फायदा मिला था। किशोर उस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार के रूप में काम कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि यदि चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष होते तो पश्चिम बंगाल में BJP का प्रदर्शन अलग हो सकता था। यह किशोर का राजनीतिक आकलन है और इसे किसी आधिकारिक जांच ने स्थापित नहीं किया है। बांकीपुर उपचुनाव का भी दिया उदाहरण किशोर ने हाल के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का उदाहरण भी दिया, जहां उन्होंने जीत दर्ज की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान प्रशासनिक मशीनरी के कथित दुरुपयोग और BJP द्वारा बड़े पैमाने पर चुनावी खर्च की अनदेखी की गई। किशोर ने दावा किया कि ऐसी परिस्थितियां न होतीं तो उनकी जीत का अंतर और बड़ा होता। इससे पहले उन्होंने पटना के SSP की कथित “पक्षपातपूर्ण भूमिका” को लेकर बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के सामने शिकायत भी दर्ज कराई थी। पैसे, नौकरशाही और वोटर लिस्ट पर उठाए सवाल प्रशांत किशोर ने कहा कि उनके अनुसार चुनाव प्रक्रिया केवल एक स्तर पर नहीं, बल्कि कई मोर्चों पर प्रभावित हो रही है। उन्होंने चुनाव में धन के इस्तेमाल, सरकारी अधिकारियों की भूमिका और मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि करीबी मुकाबलों में आयोग का कथित पक्षपात परिणाम पर असर डाल सकता है। इन आरोपों को चुनाव आयोग या किसी अदालत ने प्रमाणित तथ्य के रूप में स्वीकार नहीं किया है। ज्ञानेश कुमार को लेकर भी दिया बयान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद पर प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनाव आयोग में कथित समस्याएं केवल मौजूदा CEC के कार्यकाल से शुरू नहीं हुई हैं। उन्होंने पूर्व चुनाव अधिकारियों की नियुक्तियों और पद छोड़ने के बाद मिली जिम्मेदारियों पर भी सवाल उठाए। हालांकि किसी व्यक्ति के खिलाफ quid pro quo का उनका आरोप प्रमाणित तथ्य नहीं है। चुनाव आयोग में कथित मतभेद की रिपोर्ट क्या है? The Indian Express की जांच में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में SIR समेत विभिन्न प्रक्रियाओं को लेकर कई लिखित टिप्पणियां या आपत्तियां दर्ज की थीं। इस रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों और कुछ NDA सहयोगियों ने भी चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने को कहा। चुनाव आयोग ने क्या सफाई दी? चुनाव आयोग ने कहा कि किसी बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग विचार, सुझाव और लिखित टिप्पणियां निर्णय लेने की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार SIR से संबंधित अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे। आयोग ने कहा कि सदस्यों द्वारा दिए गए सुझाव चुनाव प्रक्रिया को बेहतर बनाने के उद्देश्य से थे। SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी पूछ चुका है सवाल दिल्ली में SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं को “logical discrepancy” से जुड़े नोटिस जारी किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने भी चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने कुछ नोटिसों के लगभग “mechanical” तरीके से जारी होने पर चिंता जताते हुए आयोग से उनकी प्रक्रिया और आधार समझाने को कहा। चुनाव आयोग पर राजनीतिक बहस तेज प्रशांत किशोर का बयान ऐसे समय आया है जब SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज है। एक ओर प्रशांत किशोर और विपक्ष के कई नेता आयोग पर निष्पक्षता से जुड़े सवाल उठा रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि उसकी प्रक्रियाएं कानून और संस्थागत नियमों के तहत संचालित हो रही हैं। फिलहाल किशोर के आरोप राजनीतिक दावे हैं और उनकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। source – PTI / The Indian Express / Times of India / The Federal जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में जोरदार हंगामा, BJP विधायक विक्रम रंधावा को बाहर निकाला गया

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर विधानसभा के शरद सत्र में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने से जुड़ा प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद जोरदार हंगामा हुआ। प्रस्ताव में वर्ष 2000 और नवंबर 2024 में विधानसभा से पारित पुराने प्रस्तावों का संदर्भ दिए जाने पर BJP विधायकों ने विरोध किया। हंगामे के दौरान BJP विधायक विक्रम रंधावा को मार्शलों की मदद से सदन से बाहर निकाल दिया गया। उमर अब्दुल्ला ने पेश किया राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव 25 सितंबर को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में प्रस्ताव पेश करते हुए केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग की। प्रस्ताव में कहा गया कि यह मांग 26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 को विधानसभा से पारित प्रस्तावों के अतिरिक्त है और इसे केंद्र सरकार को भेजा जाए। उमर अब्दुल्ला ने सभी दलों से इसका समर्थन करने की अपील करते हुए कहा कि राज्य का दर्जा पूरे जम्मू-कश्मीर से जुड़ा मुद्दा है। 2000 के प्रस्ताव के जिक्र पर भड़की BJP BJP विधायकों की मुख्य आपत्ति प्रस्ताव में 26 जून 2000 के autonomy resolution का संदर्भ दिए जाने पर थी। उस समय फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार ने जम्मू-कश्मीर को 1953 से पहले जैसी अधिक स्वायत्त संवैधानिक स्थिति देने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया था। बाद में तत्कालीन केंद्र सरकार ने उस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था। सदन के वेल में पहुंचे BJP विधायक जैसे ही प्रस्ताव पेश किया गया, BJP विधायकों ने नारेबाजी शुरू कर दी और कई सदस्य सदन के वेल में पहुंच गए। कुछ विधायकों ने प्रस्ताव की प्रतियां भी फाड़ दीं। विरोध के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी बहस हुई। स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने विधायकों से अपनी सीटों पर लौटने को कहा, लेकिन हंगामा जारी रहने के बाद सदन की कार्यवाही करीब 30 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। विक्रम रंधावा को मार्शलों ने बाहर निकाला हंगामे के बीच BJP विधायक विक्रम रंधावा को सदन से बाहर निकालने का निर्देश दिया गया। इसके बाद विधानसभा के मार्शलों ने उन्हें सदन से बाहर कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक रंधावा और अन्य BJP विधायक प्रस्ताव के खिलाफ लगातार विरोध और नारेबाजी कर रहे थे। BJP ने लगाया ‘autonomy agenda’ वापस लाने का आरोप जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव की आड़ में वर्ष 2000 के autonomy resolution को दोबारा राजनीतिक बहस में लाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि BJP राज्य के दर्जे की बहाली के मुद्दे पर अपनी स्थिति रख सकती है, लेकिन पुराने autonomy resolution का संदर्भ स्वीकार नहीं करेगी। यह BJP का राजनीतिक पक्ष है। उमर अब्दुल्ला ने कहा- राज्य का दर्जा सभी का मुद्दा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा किसी एक पार्टी का मुद्दा नहीं है। उन्होंने केंद्र की ओर से पहले बताई गई delimitation, elections और statehood की प्रक्रिया का जिक्र करते हुए कहा कि परिसीमन और चुनाव हो चुके हैं और अब राज्य का दर्जा बहाल किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि विधानसभा के जरिए केंद्र सरकार को उसके पूर्व आश्वासनों की याद दिलाई जा रही है। PDP और सज्जाद लोन ने भी रखा अपना पक्ष PDP विधायक वहीद पारा ने राज्य के दर्जे वाले प्रस्ताव का समर्थन किया, लेकिन कहा कि इसमें Article 370 और Article 35A का भी स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए था। पीपुल्स कॉन्फ्रेंस प्रमुख सज्जाद लोन ने भी राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग का समर्थन किया और BJP के विरोध की आलोचना की। ये संबंधित दलों और नेताओं के राजनीतिक रुख हैं। नवंबर 2024 के प्रस्ताव का भी जिक्र मौजूदा प्रस्ताव में 6 नवंबर 2024 को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पारित प्रस्ताव का भी संदर्भ है। उस प्रस्ताव में विशेष दर्जे और संवैधानिक गारंटी की बहाली पर केंद्र और जम्मू-कश्मीर के निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की मांग की गई थी। 25 सितंबर की घटना के बाद राज्य के दर्जे और पुराने autonomy resolution को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस और BJP के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। फिलहाल प्रस्ताव को लेकर दोनों पक्षों की स्थिति अलग-अलग बनी हुई है। source – The Indian Express / The Tribune / Daily Excelsior / Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

गरबा में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर उषा ठाकुर का बयान, 4.5 लाख लड़कियों को लेकर किया दावा

इंदौर: मध्य प्रदेश की पूर्व मंत्री और BJP विधायक उषा ठाकुर ने गरबा आयोजनों में गैर-हिंदुओं की एंट्री का विरोध करते हुए नया बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि पहले हर साल गरबा आयोजनों के दौरान करीब 4.5 लाख हिंदू लड़कियां गैर-हिंदू युवकों के साथ चली जाती थीं, जिससे जनसांख्यिकी में बदलाव हो रहा था। हालांकि ठाकुर ने इस आंकड़े के समर्थन में कोई आधिकारिक स्रोत या प्रमाण नहीं बताया है। उनके बयान के बाद कांग्रेस ने आपत्ति जताते हुए सार्वजनिक माफी की मांग की है। गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक का किया समर्थन इंदौर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उषा ठाकुर से गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं की एंट्री रोकने की मांग को लेकर सवाल किया गया था। ठाकुर ने इस तरह की रोक का समर्थन करते हुए कहा कि जो लोग मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखते, उन्हें गरबा आयोजनों में प्रवेश नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों की ओर से की जा रही ऐसी मांगों का भी समर्थन किया। 4.5 लाख लड़कियों को लेकर किया दावा उषा ठाकुर ने दावा किया कि पहले हर साल गरबा आयोजनों के दौरान करीब 4.5 लाख लड़कियां दूसरे समुदाय के युवकों के साथ चली जाती थीं। उन्होंने आगे इसे जनसांख्यिकीय बदलाव से भी जोड़ा। हालांकि उपलब्ध रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने इस संख्या के समर्थन में किसी सरकारी रिपोर्ट, पुलिस रिकॉर्ड या अन्य सत्यापित आंकड़े का हवाला नहीं दिया। इसलिए इसे फिलहाल उषा ठाकुर का राजनीतिक दावा ही माना जाना चाहिए। तिलक और कलावा को लेकर भी कही बात ठाकुर ने आरोप लगाया कि कुछ लोग गरबा में शामिल होने के लिए तिलक लगाने या कलावा बांधने जैसे तरीके अपनाते हैं और अपनी धार्मिक पहचान छिपाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के प्रवेश पर रोक लगनी चाहिए। यह उनका आरोप है और इसके समर्थन में उन्होंने कोई विशिष्ट मामला या आधिकारिक डेटा पेश नहीं किया। गरबा के कमर्शियल रूप पर भी जताई आपत्ति उषा ठाकुर ने केवल गैर-हिंदुओं की एंट्री ही नहीं, बल्कि गरबा के बढ़ते व्यावसायीकरण पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गरबा मूल रूप से शक्ति की उपासना और धार्मिक साधना से जुड़ा पर्व है, लेकिन अब कई जगह इसे कपड़ों, गहनों और टैटू के प्रदर्शन तक सीमित किया जा रहा है। ठाकुर के अनुसार इससे गरबा का आध्यात्मिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है। कांग्रेस ने बयान पर मांगी माफी उषा ठाकुर के बयान पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता नीलाभ शुक्ला ने कहा कि बिना प्रमाण के लाखों हिंदू महिलाओं को लेकर इस तरह का दावा करना आपत्तिजनक है और ठाकुर को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भी गरबा को लेकर दिए जा रहे बयानों की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे बयानों से सामाजिक माहौल खराब होता है। मध्य प्रदेश में गरबा को लेकर बढ़ी राजनीतिक बहस नवरात्रि से पहले मध्य प्रदेश में गरबा पंडालों में मुस्लिम और अन्य गैर-हिंदू लोगों की एंट्री को लेकर कई BJP नेताओं के बयान सामने आए हैं। भोपाल से BJP विधायक रामेश्वर शर्मा और मंत्री विश्वास सारंग ने भी इस मुद्दे पर सख्त शर्तों या प्रतिबंध का समर्थन किया है, जबकि कांग्रेस नेताओं ने इन बयानों का विरोध किया है। फिलहाल उषा ठाकुर के 4.5 लाख लड़कियों वाले दावे की कोई स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में यह मामला गरबा आयोजनों में प्रवेश के नियमों के साथ-साथ राजनीतिक बयानबाजी और सांप्रदायिक सौहार्द को लेकर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। source – The New Indian Express / Aaj Tak / Amar Ujala / ThePrint जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें
Translate »