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रातभर हिरासत के बाद AISA अध्यक्ष Neha Bora रिहा, दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल

नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2026: All India Students’ Association (AISA) की अध्यक्ष Neha Bora को CJP के ‘Lehra Do Tiranga’ विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने के बाद शनिवार तड़के रिहा कर दिया गया। दिल्ली पुलिस के अनुसार, Delhi Police Act की धारा 65 के तहत आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्हें छोड़ा गया। रिहाई के बाद Bora ने प्रदर्शनकारियों, खासकर महिलाओं को रातभर हिरासत में रखने की आवश्यकता और पुलिस की कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। Neha Bora ने हिरासत पर क्या सवाल उठाए? रिहाई के बाद Neha Bora ने पूछा कि प्रदर्शनकारियों को पूरी रात हिरासत में रखने की कानूनी जरूरत क्या थी। उन्होंने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उन्हें कई घंटों तक वकील तक पहुंच नहीं दी गई। उनके बयानों ने पुलिस हिरासत की प्रक्रिया, कानूनी सहायता तक पहुंच और नागरिक स्वतंत्रता से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। महिलाओं को रातभर हिरासत में रखने पर सवाल Bora ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाओं को सूर्यास्त के बाद हिरासत में रखने की प्रक्रिया पर स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए। उनकी आपत्ति हिरासत की अवधि और उसके दौरान अपनाई गई प्रक्रिया को लेकर थी। हालांकि, हिरासत की वैधता और कानूनी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा। ‘Lehra Do Tiranga’ प्रदर्शन के दौरान हुई थी हिरासत Neha Bora को 16 अक्टूबर को CJP के ‘Lehra Do Tiranga’ विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में निषेधाज्ञा तथा भीड़ नियंत्रण से जुड़े प्रतिबंध लागू किए थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई घटनाओं के बाद कई लोगों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शन से जुड़े मामलों में तीन FIR दर्ज दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन से जुड़ी घटनाओं के संबंध में कम से कम तीन प्राथमिकी (FIR) दर्ज की हैं। इनमें निषेधाज्ञा के उल्लंघन और सरकारी कर्मचारियों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन से रोकने जैसे आरोप शामिल हैं। इन मामलों में दर्ज आरोपों की जांच जारी है। आरोप दर्ज होना अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है। Abhijeet Dipke भी रिहा CJP के संस्थापक Abhijeet Dipke को भी निवारक हिरासत के बाद विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, शांति बनाए रखने से संबंधित बॉन्ड भरने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। यह कार्रवाई प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से उठाए गए कदमों का हिस्सा थी। दिल्ली पुलिस का पक्ष दिल्ली पुलिस का कहना है कि कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई थी। दूसरी ओर, Neha Bora और अन्य प्रदर्शनकारियों ने हिरासत की अवधि, वकील तक पहुंच और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। इस घटनाक्रम ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी और हिरासत के दौरान कानूनी सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बहस को फिर तेज कर दिया है। स्रोत: The Indian Express, The Times of India, Hindustan Times जय राष्ट्र न्यूज़

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Rajnath Singh का CJP-Opposition protest पर हमला, बोले—“Gandhis ने Gandhi नाम इस्तेमाल करने का नैतिक अधिकार खो दिया”

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2026: Defence Minister Rajnath Singh ने CJP और Opposition के हालिया protests पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व और Gandhi परिवार ने ऐसा राजनीतिक रास्ता चुना है, जिससे उन्होंने “Gandhi नाम इस्तेमाल करने का नैतिक अधिकार खो दिया है।” उनका बयान CJP-led anti-CEC protests और Opposition के समर्थन के बीच आया है। Rajnath Singh ने क्या कहा? Rajnath Singh ने Opposition पर आरोप लगाया कि वह लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसा करने के बजाय सड़क के protests को political pressure के tool की तरह इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने Gandhi परिवार को निशाने पर लेते हुए कहा कि Mahatma Gandhi के नाम से जुड़ी राजनीति करने वालों को पहले अपने conduct पर विचार करना चाहिए। Bangladesh का भी किया जिक्र अपने बयान में Rajnath Singh ने Opposition और CJP के protest model की तुलना Bangladesh जैसे street-mobilisation scenarios से की और संकेत दिया कि इस तरह की राजनीति India के democratic framework के लिए सही नहीं है। CJP protest को मिला Opposition का समर्थन पिछले कुछ दिनों से CJP Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar, SIR process और police action के खिलाफ लगातार protests कर रही है। Rahul Gandhi समेत कई Opposition leaders ने इन protests को समर्थन दिया है, जिससे मामला अब बड़ा political flashpoint बन गया है। BJP बनाम Opposition narrative तेज BJP का कहना है कि Election Commission और constitutional institutions पर pressure बनाने की कोशिश की जा रही है, जबकि Opposition का आरोप है कि electoral process और voter-list revision में गंभीर irregularities हैं और peaceful protest उनका democratic right है। बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रिया की संभावना Rajnath Singh की “Gandhi नाम” वाली टिप्पणी के बाद Congress की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आने की संभावना है। इससे CJP protest, voter-list controversy और Opposition unity पर चल रही political battle और तेज हो सकती है। source – The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP के ‘Lehra Do Tiranga’ march से पहले Connaught Place में कड़ी सुरक्षा, Central Park बंद; traffic curbs लागू

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2026: CJP के ‘Lehra Do Tiranga’ march को देखते हुए Delhi Police ने Connaught Place और आसपास के इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी है। Central Park को बंद किया गया है और बड़ी संख्या में police तथा paramilitary personnel तैनात किए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक पूरे New Delhi district में लगभग 25,000 security personnel deployment का हिस्सा हैं। Central Park क्यों किया गया बंद? CJP ने Connaught Place के Central Park में gathering और march का call दिया था। इसी के मद्देनजर police ने area को secure कर दिया और entry पर restrictions लगाईं, ताकि crowd control और law-and-order situation को manage किया जा सके। करीब 25,000 personnel की deployment Reuters की report के मुताबिक Delhi में करीब 25,000 police और paramilitary personnel तैनात किए गए हैं। Connaught Place, Parliament Street, Jantar Mantar और आसपास के sensitive zones में अतिरिक्त barricading और checking की गई है। Traffic पर भी असर Security arrangements की वजह से Connaught Place के आसपास traffic diversions और restrictions लागू किए गए हैं। कई roads पर checking बढ़ाई गई है और commuters को alternate routes लेने की सलाह दी गई है। Protest का मुद्दा क्या है? CJP और उससे जुड़े groups Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar, voter-list revision और हाल के police action के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। Protesters ने ‘Lehra Do Tiranga’ कार्यक्रम को peaceful democratic protest बताया है, जबकि police law-and-order concerns का हवाला दे रही है। Delhi High Court ने protest को रोकने से किया था इनकार एक दिन पहले Delhi High Court ने Connaught Place में proposed protest को पूरी तरह restrain करने से इनकार किया था और police को gathering regulate करने की अनुमति दी थी। इससे आज के security arrangements और भी महत्वपूर्ण हो गए हैं। source – Reuters, The New Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP प्रदर्शन की आलोचना के बाद रणवीर शौरी को जान से मारने की धमकी, मुंबई पुलिस में शिकायत दर्ज

मुंबई, 14 अक्टूबर 2026: अभिनेता रणवीर शौरी ने दावा किया है कि दिल्ली में हुए कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन की आलोचना करने के बाद उन्हें ईमेल के जरिए जान से मारने की धमकियां मिलीं। अभिनेता ने कथित धमकी भरे संदेशों के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर साझा किए और बाद में मुंबई पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की जानकारी दी। CJP प्रदर्शन पर रणवीर शौरी ने क्या कहा था? रणवीर शौरी ने 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए CJP प्रदर्शन की आलोचना करते हुए कहा था कि राजनीतिक असहमति को सड़कों पर टकराव में बदलने के बजाय संसद, चुनाव और अदालतों जैसे लोकतांत्रिक संस्थानों के माध्यम से उठाया जाना चाहिए। उनकी टिप्पणियों के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। इसके बाद अभिनेता ने दावा किया कि उन्हें धमकी भरे ईमेल मिलने लगे। ईमेल में लोकेशन ट्रैक करने और हमले की धमकी का दावा अभिनेता द्वारा साझा किए गए स्क्रीनशॉट में कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के साथ उनकी लोकेशन ट्रैक करने और उन पर हमला करने की धमकियां दिखाई गईं। शौरी ने सोशल मीडिया पर साइबर सुरक्षा से जुड़े आधिकारिक मंच साइबर दोस्त और महाराष्ट्र साइबर सेल को भी टैग करते हुए अधिकारियों से मदद मांगी। मुंबई पुलिस में दर्ज कराई औपचारिक शिकायत रणवीर शौरी ने बाद में बताया कि उन्होंने इस मामले में पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज करा दी है। इससे पहले मुंबई पुलिस ने उनके सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए उनसे संपर्क संबंधी जानकारी सीधे संदेश के जरिए साझा करने को कहा था। फिलहाल, धमकी भरे ईमेल भेजने वाले व्यक्ति या समूह की पहचान की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। CJP प्रदर्शन को लेकर पहले से जारी है विवाद CJP हाल के दिनों में चुनाव आयोग और मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी राजनीतिक विवाद जारी है। रिपोर्टों के मुताबिक, CJP के दो नेताओं को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। इसी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच रणवीर शौरी की टिप्पणियों और उन्हें कथित तौर पर मिली धमकियों का मामला सामने आया है। धमकी भरे ईमेल की जांच अहम मामले में अधिकारियों के सामने ईमेल भेजने वाले की पहचान, डिजिटल रिकॉर्ड और संदेशों की प्रामाणिकता की जांच अहम होगी। हालांकि, धमकियों के पीछे किसका हाथ है, इस बारे में अभी कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस, द टाइम्स ऑफ इंडिया, रॉयटर्स जय राष्ट्र न्यूज़

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Jantar Mantar को लेकर टकराव जारी, CJP बोली—“Protest site Jantar Mantar ही रहेगा”; police restrictions के बावजूद प्रदर्शन

नई दिल्ली, 13 अक्टूबर 2026: Delhi के Jantar Mantar को protest site के रूप में इस्तेमाल करने को लेकर Cockroach Janta Party (CJP) और Delhi Police के बीच टकराव जारी है। Delhi Police द्वारा Jantar Mantar को designated protest venue की सूची से हटाए जाने के बावजूद CJP नेताओं ने साफ कहा है कि उनका protest site Jantar Mantar ही रहेगा। मंगलवार को कई activists ने restrictions के बीच वहां पहुंचने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने कई नेताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। CJP leaders Jantar Mantar पहुंचे, police ने हिरासत में लिया CJP के वरिष्ठ नेता Ashutosh Ranka, Saurav Das और Ajinkya Shinde मंगलवार को Jantar Mantar परिसर में पहुंचने की कोशिश करते हुए हिरासत में लिए गए। प्रदर्शनकारी Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग को लेकर नारे लगा रहे थे। Jantar Mantar का protest-site status हटाया गया Delhi Police ने हाल ही में Jantar Mantar को designated protest venue के तौर पर de-notify कर दिया है। इसके स्थान पर Ramlila Maidan, Burari Ground और CBD Ground को protests के लिए विकल्प के तौर पर चिन्हित किया गया है। यह बदलाव CJP के लगातार Jantar Mantar पर प्रदर्शन करने के प्रयासों के बीच हुआ है। CJP ने कहा—जगह बदलने को तैयार नहीं CJP ने 12 अक्टूबर को Delhi Police को पत्र देकर Jantar Mantar पर protest के लिए तारीख तय करने की मांग की थी। संगठन ने पुलिस को जवाब देने के लिए 24 घंटे का समय दिया था। CJP leadership का कहना है कि वह प्रशासन द्वारा सुझाए गए दूसरे venues पर अपना आंदोलन shift नहीं करना चाहती। पांच या उससे ज्यादा लोगों के जुटने पर detention की चेतावनी Delhi Police ने New Delhi district में protest-related restrictions जारी रखी हैं। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ संवेदनशील इलाकों में पांच या उससे ज्यादा लोगों के समूह में इकट्ठा होने पर detention की कार्रवाई की जा सकती है। Police का कहना है कि restrictions public order बनाए रखने के लिए जरूरी हैं। 10 अक्टूबर को Jantar Mantar बना था fortress CJP ने इससे पहले 10 अक्टूबर को Jantar Mantar पर बड़े protest का ऐलान किया था, लेकिन heavy barricading, security deployment और mass detentions के कारण प्रदर्शनकारी वहां नहीं पहुंच सके। इसके बाद छोटे समूहों ने Dilli Haat, Connaught Place, Raj Ghat और अन्य इलाकों में flash demonstrations किए थे। CEC के इस्तीफे और voter-roll revision को लेकर विरोध CJP का आंदोलन Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar के इस्तीफे और electoral rolls की Special Intensive Revision को लेकर है। विपक्षी दलों और activists ने voter deletions पर सवाल उठाए हैं, जबकि Election Commission और BJP ने राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। source – Reuters, The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल सील, CJP कार्यकर्ताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन के बीच 13 अक्टूबर को कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के कई कार्यकर्ता भारी बैरिकेडिंग के बावजूद जंतर-मंतर के प्रदर्शन क्षेत्र तक पहुंच गए। दिल्ली पुलिस ने CJP नेताओं सौरव दास, आशुतोष रंका और अजिंक्य शिंदे समेत करीब 20 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस की ओर से जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने और वहां प्रवेश पर प्रतिबंध कड़े किए जाने के एक दिन बाद हुई। इस घटनाक्रम ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने को लेकर बहस तेज कर दी है। बैरिकेडिंग पार कर प्रदर्शन क्षेत्र में पहुंचे कार्यकर्ता 13 अक्टूबर की सुबह CJP के कुछ कार्यकर्ता बैरिकेडिंग और प्रतिबंधित प्रवेश व्यवस्था के बावजूद जंतर-मंतर के प्रदर्शन क्षेत्र तक पहुंचने में सफल रहे। वहां उन्होंने तिरंगा लहराया और “भारत माता की जय” तथा “इंकलाब जिंदाबाद” जैसे नारे लगाए। इसके बाद पुलिस ने कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। घटना के दौरान इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। सौरव दास और आशुतोष रंका समेत करीब 20 लोग हिरासत में पुलिस ने CJP के प्रमुख नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका को हिरासत में लिया। अजिंक्य शिंदे समेत अन्य कार्यकर्ताओं को भी पुलिस वाहनों में ले जाया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, इस कार्रवाई में करीब 20 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ जब CJP पहले से ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति और स्थल पर लागू प्रतिबंधों का विरोध कर रही थी। हिरासत में पुलिस बस से सौरव दास ने साझा किया वीडियो हिरासत में लिए जाने के बाद सौरव दास ने पुलिस बस के अंदर से एक वीडियो साझा किया। वीडियो में उन्होंने दावा किया कि CJP के कार्यकर्ता पहले जंतर-मंतर के भीतर पहुंचने में सफल हुए और इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। यह विवरण दास के दावे पर आधारित है। घटना के पूरे क्रम की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं दी गई है। जंतर-मंतर अब निर्धारित प्रदर्शन स्थल नहीं दिल्ली पुलिस ने 12 अक्टूबर को घोषणा की थी कि जंतर-मंतर को अब आधिकारिक रूप से निर्धारित प्रदर्शन स्थल के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इसके विकल्प के रूप में रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड जैसे स्थानों का उल्लेख किया गया है। पुलिस की ओर से इस बदलाव को प्रदर्शन प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा कदम बताया गया है। हालांकि, जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण स्थान मानने वाले संगठनों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। CJP का जंतर-मंतर को दोबारा प्रदर्शन स्थल बनाने का ऐलान CJP ने पुलिस के फैसले का विरोध करते हुए जंतर-मंतर को दोबारा प्रदर्शन स्थल के रूप में स्थापित करने की बात कही है। संगठन का तर्क है कि इस ऐतिहासिक स्थान को प्रशासनिक आदेश के जरिए विरोध और असहमति के लिए बंद नहीं किया जाना चाहिए। CJP इसे नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक विरोध से जुड़ा मुद्दा बता रही है। दूसरी ओर, प्रशासन सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत पर जोर दे रहा है। अभिजीत दीपके ने सरकार की कार्रवाई की आलोचना की CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कार्यकर्ताओं की हिरासत और जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार विरोध की आवाज को रोक नहीं सकती और किसी स्थान को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने से असहमति समाप्त नहीं हो जाती। दीपके की प्रतिक्रिया CJP के राजनीतिक रुख को दर्शाती है। इस मामले में पुलिस और संगठन के बीच मुख्य मतभेद प्रदर्शन के लिए स्थान और वहां लागू प्रतिबंधों को लेकर है। भारी सुरक्षा के बीच सीमित रहा प्रवेश जंतर-मंतर और आसपास के इलाके में पुलिस बल की तैनाती, बैरिकेडिंग और निगरानी बढ़ाई गई थी। रिपोर्टों के अनुसार, मध्य दिल्ली के इस हिस्से में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहने के कारण जंतर-मंतर तक सामान्य पहुंच भी सीमित रही। पुलिस की ओर से उठाए गए कदमों का उद्देश्य प्रतिबंधित क्षेत्र में भीड़ जुटने से रोकना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना बताया गया। 10 अक्टूबर को भी प्रदर्शनकारियों को रोका गया था 10 अक्टूबर को CJP ने जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन की योजना बनाई थी, लेकिन पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां पहुंचने से रोक दिया था। इसके बाद कुछ समूहों ने INA और अन्य स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किए। 13 अक्टूबर की घटना ने इस विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। CJP का कहना है कि वह अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखेगी, जबकि पुलिस निर्धारित नियमों और प्रतिबंधों के पालन पर जोर दे रही है। CJP की मुख्य मांग क्या है? CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े आरोपों की जांच की मांग कर रही है। संगठन का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए। वहीं, निर्वाचन आयोग ने पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि पात्र मतदाता निर्धारित प्रक्रिया के जरिए अपना नाम दोबारा जुड़वा सकते हैं। मतदाता सूची से जुड़े आरोप और उनके जवाब इस राजनीतिक विवाद का प्रमुख हिस्सा बने हुए हैं। पुलिस का पक्ष: प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के पीछे प्रमुख आधार यह बताया गया कि जंतर-मंतर अब निर्धारित प्रदर्शन स्थल नहीं है और कार्यकर्ता प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश कर वहां जुटे थे। पुलिस ने मौके पर मौजूद लोगों को हटाया और कई नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। इस मामले में पुलिस की कार्रवाई और विरोध प्रदर्शन के अधिकार को लेकर अलग-अलग पक्षों के तर्क सामने आए हैं। हिरासत में लिए गए सभी लोगों के खिलाफ आगे की कानूनी स्थिति का विवरण उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है। वायरल वीडियो को लेकर भी फैक्ट-चेक आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया पर जंतर-मंतर पर हजारों लोगों की भीड़ दिखाने वाले कुछ वीडियो भी प्रसारित हुए। फैक्ट-चेक रिपोर्टों के अनुसार, कुछ वीडियो पुराने या असंबंधित घटनाक्रमों से जुड़े थे, जिनमें फिलीपींस के एक उत्सव और 2021 के किसान आंदोलन के दृश्य भी शामिल बताए गए। इसलिए सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे वीडियो को मौजूदा प्रदर्शन…

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CJP को प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं मिली? दिल्ली पुलिस ने बताईं ये वजहें

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में कॉकroach जनता पार्टी (CJP) ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने आवेदन खारिज कर दिया। पुलिस के अनुसार, अनुमति नहीं देने के पीछे देर से आवेदन करना, पिछले प्रदर्शनों में निर्देशों का कथित उल्लंघन, सार्वजनिक सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताएं शामिल थीं। निर्धारित समय से देर से दिया गया आवेदन दिल्ली पुलिस के मुताबिक, CJP ने प्रदर्शन की अनुमति के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत पर्याप्त समय पहले आवेदन नहीं किया था। आवेदन कार्यक्रम की तारीख के काफी करीब जमा किया गया, जिससे आयोजन की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था के आकलन के लिए समय सीमित रह गया। पुलिस ने समय पर आवेदन न मिलने को अनुमति अस्वीकार करने के प्रमुख कारणों में शामिल किया। पिछले प्रदर्शनों में निर्देशों के उल्लंघन का आरोप पुलिस ने CJP के पहले के प्रदर्शनों का रिकॉर्ड भी अपने फैसले का आधार बताया। अधिकारियों के अनुसार, पिछले आयोजनों के दौरान प्रदर्शन के लिए निर्धारित कुछ कानूनी निर्देशों और आयोजकों की ओर से दिए गए आश्वासनों का कथित रूप से पालन नहीं किया गया था। पुलिस ने इस कथित गैर-अनुपालन को भविष्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ी चिंताओं के आकलन में शामिल किया। सार्वजनिक सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की चिंता दिल्ली पुलिस ने बड़े स्तर पर लोगों के जुटने से सार्वजनिक सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के सामने आने वाली चुनौतियों का भी हवाला दिया। जंतर-मंतर मध्य दिल्ली में स्थित है और महत्वपूर्ण सरकारी तथा सुरक्षा प्रतिष्ठानों के निकट होने के कारण यहां बड़ी सभाओं के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जाती है। अधिकारियों का तर्क था कि संभावित भीड़ को नियंत्रित करने और किसी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पहले से पर्याप्त इंतजाम जरूरी हैं। यातायात पर पड़ने वाले असर का हवाला पुलिस ने यातायात व्यवस्था को भी अनुमति न देने के कारणों में शामिल किया। अधिकारियों के अनुसार, बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के पहुंचने से मध्य दिल्ली की सड़कों, कार्यालयों तक आने-जाने वाले मार्गों और सार्वजनिक परिवहन पर असर पड़ सकता था। पुलिस का कहना था कि विरोध प्रदर्शन के दौरान आम नागरिकों की आवाजाही और यातायात प्रबंधन को ध्यान में रखना आवश्यक है। गृह मंत्रालय ने भी जताई थी कानून-व्यवस्था की चिंता प्रदर्शन से पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को संभावित कानून-व्यवस्था संबंधी प्रभावों को लेकर सतर्क किया था। रिपोर्टों के अनुसार, मंत्रालय ने बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना को देखते हुए दिल्ली पुलिस के साथ वास्तविक समय में खुफिया जानकारी साझा करने और एहतियाती समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया था। खुफिया सूचनाओं के आधार पर निगरानी अधिकारियों के अनुसार, खुफिया सूचनाओं में बड़ी संख्या में समर्थकों के दिल्ली पहुंचने और प्रतिबंधों के बावजूद जुटान होने की आशंका जताई गई थी। इसके बाद दिल्ली आने वाले प्रमुख मार्गों, परिवहन केंद्रों और अन्य स्थानों पर निगरानी बढ़ाने जैसे एहतियाती कदम उठाए गए। हालांकि, ये चिंताएं प्रशासन की ओर से बताए गए आकलन का हिस्सा थीं; इन्हें किसी संभावित उल्लंघन का स्वतः प्रमाण नहीं माना जा सकता। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की व्यवस्था में बदलाव रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल के रूप में जारी रखने की व्यवस्था में बदलाव का फैसला किया है। इसके विकल्प के तौर पर रामलीला मैदान, बुराड़ी और CBD ग्राउंड जैसे स्थानों का उल्लेख किया गया है। यह कदम प्रदर्शन स्थलों के निर्धारण और प्रबंधन से जुड़ी समिति की सिफारिशों से संबंधित बताया गया है। इस बदलाव का उद्देश्य प्रदर्शनों को निर्धारित स्थानों पर आयोजित कराने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का भी हवाला प्रदर्शन की अनुमति और उसके नियमन के संबंध में अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों तथा प्रक्रियात्मक नियमों का भी हवाला दिया। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन इस पर उचित शर्तें लागू कर सकता है। हालांकि, किसी भी प्रतिबंध की वैधता और उचित सीमा का आकलन उसके आधार, प्रभाव और संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार किया जाना चाहिए। CJP ने फैसले को लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक बताया CJP ने अनुमति नहीं दिए जाने का विरोध करते हुए इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर अनुचित प्रतिबंध बताया। पार्टी नेताओं अभिजीत दीपके और अन्य सदस्यों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की कार्रवाई असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास है। इस तरह मामले में पुलिस का पक्ष सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर केंद्रित है, जबकि CJP इसे लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार से जोड़कर देख रही है। 13 अक्टूबर को फिर हिरासत में लिए गए CJP नेता 13 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका ने जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश की, जिसके बाद उन्हें फिर हिरासत में ले लिया गया। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने कहा कि वहां प्रतिबंध लागू थे और दोनों नेताओं पर हाल में रिहाई के दौरान शांति बनाए रखने से संबंधित शर्तें भी लागू थीं। इस घटनाक्रम ने प्रदर्शन की अनुमति, प्रशासनिक प्रतिबंधों और असहमति जताने के अधिकार को लेकर विवाद को और बढ़ा दिया। मामला न्यायालयों तक पहुंचा प्रदर्शन संबंधी प्रतिबंधों, आवाजाही पर असर और अनुमति नहीं दिए जाने के मुद्दों को लेकर न्यायालयों में भी याचिकाएं पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। इस संदर्भ में मुख्य सवाल यह है कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगाए गए प्रतिबंध कितने आवश्यक और आनुपातिक हैं। प्रदर्शन को नियंत्रित करने का अधिकार और शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार—दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना इस विवाद का प्रमुख कानूनी और लोकतांत्रिक पहलू है। CJP को अनुमति नहीं मिलने की मुख्य वजहें दिल्ली पुलिस के अनुसार, CJP के प्रदर्शन को अनुमति नहीं देने के प्रमुख कारण थे—देर से आवेदन, पिछले प्रदर्शनों में निर्देशों के कथित उल्लंघन, सार्वजनिक सुरक्षा संबंधी चिंताएं, यातायात पर संभावित असर और खुफिया सूचनाओं के आधार पर कानून-व्यवस्था का आकलन। दूसरी ओर, CJP इन कारणों को चुनौती देते हुए कार्रवाई को शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर अनुचित रोक बता रही है। मामले में प्रशासनिक सुरक्षा चिंताओं और लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर बहस जारी है। Source: The Indian Express…

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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुंबई में ठाकरे परिवार का जोरदार प्रदर्शन, आदित्य-अमित ने संभाला मोर्चा

मुंबई: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और Special Intensive Revision (SIR) के विरोध में मुंबई में प्रदर्शन तेज हो गया है। 11 अक्टूबर को शिवाजी पार्क और दादर इलाके में हुए विरोध प्रदर्शन में आदित्य ठाकरे, तेजस ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नेता अमित ठाकरे समर्थकों के साथ नजर आए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान करीब 300 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। इसके बाद ठाकरे परिवार के नेताओं ने आंदोलन और तेज करने की चेतावनी दी। शिवाजी पार्क में बड़ा प्रदर्शन 11 अक्टूबर को शिवाजी पार्क के आसपास CJP समर्थकों और विपक्षी कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया। इस कार्रवाई के बाद विरोध प्रदर्शन ने राजनीतिक रूप ले लिया और ठाकरे परिवार के नेताओं की सक्रियता बढ़ गई। आदित्य और अमित ठाकरे ने संभाला मोर्चा पुलिस की कार्रवाई के बाद शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे और MNS नेता अमित ठाकरे प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। दोनों नेताओं ने समर्थकों के साथ विरोध जताया और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराई। उनके प्रदर्शन में शामिल होने के बाद मामला महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया। तेजस ठाकरे भी प्रदर्शन में शामिल आदित्य ठाकरे के भाई तेजस ठाकरे भी विरोध प्रदर्शन में मौजूद रहे। परिवार के अलग-अलग सदस्यों की भागीदारी के कारण सोशल मीडिया पर इसे ‘ठाकरे परिवार का प्रदर्शन’ कहा गया। हालांकि, सभी सदस्यों की मौजूदगी और उनकी गतिविधियों को एक ही समय की घटना मानने के बजाय संबंधित रिपोर्टों के संदर्भ में देखना जरूरी है। अमित ठाकरे गाड़ी की छत पर चढ़े मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान अमित ठाकरे एक वाहन की छत पर चढ़कर समर्थकों को संबोधित करते दिखाई दिए। उन्होंने पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शन पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर नाराजगी जताई। इस घटना के दृश्य भी सोशल मीडिया पर चर्चा में रहे। आदित्य ठाकरे ने दी महाराष्ट्र बंद की चेतावनी आदित्य ठाकरे ने पुलिस कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ इसी तरह कार्रवाई जारी रही, तो महाराष्ट्र में आंदोलन का दायरा बढ़ाया जा सकता है। रिपोर्टों में उनके हवाले से यह बयान भी सामने आया कि प्रदर्शनकारियों को हाथ लगाया गया तो महाराष्ट्र बंद कराया जा सकता है। करीब 300 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया रिपोर्टों के अनुसार, मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क और आसपास के इलाकों से करीब 300 लोगों को एहतियातन हिरासत में लिया। बाद में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को रिहा कर दिया गया। पुलिस की कार्रवाई को लेकर विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए, जबकि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी का हिस्सा रहा। आदित्य और अमित ठाकरे समेत 25 लोगों पर मामला दर्ज 12 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे समेत 25 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। यह मामला शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन के बाहर हुए प्रदर्शन और पुलिस आदेशों के कथित उल्लंघन से संबंधित बताया गया है। आरोप दर्ज होना अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी साबित होने का प्रमाण नहीं है। 4 अक्टूबर को राज और उद्धव ठाकरे भी साथ आए थे इस आंदोलन से पहले 4 अक्टूबर को राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने मुंबई में संयुक्त मार्च का नेतृत्व किया था। दोनों नेताओं ने समर्थकों से पार्टी के झंडों के बजाय केवल तिरंगा लेकर आने की अपील की थी। मार्च के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों को उठाया गया। राज ठाकरे ने दिल्ली में पुलिस कार्रवाई की आलोचना की 10 अक्टूबर को राज ठाकरे ने दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई की आलोचना की थी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर विरोध की आवाज दबाने का आरोप लगाया और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को लेकर सवाल उठाए। ये उनके राजनीतिक आरोप और बयान थे। SIR के मुद्दे पर एकजुट दिखे ठाकरे गुट शिवसेना (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य सूची को अधिक सटीक बनाना और मृत, डुप्लिकेट तथा अपात्र प्रविष्टियों को हटाना है। इसलिए दोनों पक्षों के दावों को राजनीतिक आरोपों और आधिकारिक पक्ष के रूप में अलग-अलग समझना जरूरी है। पार्टी झंडों के बजाय तिरंगा लाने की अपील 4 अक्टूबर के संयुक्त मार्च में राज और उद्धव ठाकरे ने पार्टी के झंडों के बजाय तिरंगा लेकर आने की अपील की थी। उनका कहना था कि यह मुद्दा किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ा है। आंदोलन का दायरा बढ़ाने की चेतावनी आदित्य और अमित ठाकरे की सक्रियता तथा प्रदर्शनकारियों की हिरासत के बाद महाराष्ट्र में आंदोलन को और व्यापक बनाने की चेतावनी सामने आई। ठाकरे नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और SIR से जुड़े सवालों पर जवाब मांगे हैं। हालांकि, आगे आंदोलन किस रूप में होगा, यह संबंधित नेताओं की आगामी घोषणाओं पर निर्भर करेगा। आरोपों पर राजनीतिक विवाद जारी विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग पर पक्षपात के आरोप लगा रहे हैं। चुनाव आयोग इन आरोपों से असहमति जताता है। उपलब्ध विवरणों के आधार पर इन आरोपों को राजनीतिक विवाद के हिस्से के रूप में प्रस्तुत करना उचित है; इन्हें न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। स्रोत: The Indian Express / Reuters / The Times of India / Navbharat Times जय राष्ट्र न्यूज़

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राहुल गांधी बने ‘ढाल’! प्रियंका गांधी और नेहा बोरा के साथ मार्च का वीडियो चर्चा में

नई दिल्ली: Chief Election Commissioner (CEC) ज्ञानेश कुमार और Special Intensive Revision (SIR) के विरोध में 12 अक्टूबर को INDIA bloc के Supreme Court मार्च के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। कुछ मीडिया रिपोर्टों में राहुल गांधी को दोनों महिला नेताओं के आगे और आसपास चलते हुए ‘ढाल’ की तरह पेश किया गया। हालांकि, ‘ढाल’ इस दृश्य की मीडिया और सोशल मीडिया में की गई व्याख्या है, किसी आधिकारिक सुरक्षा आकलन का निष्कर्ष नहीं। Supreme Court की ओर निकला INDIA bloc का मार्च 12 अक्टूबर को INDIA bloc के कई नेताओं और छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में Supreme Court की ओर मार्च किया। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष की आपत्तियों के बीच आयोजित किया गया था। राहुल, प्रियंका और नेहा बोरा एक साथ नजर आए मार्च के दौरान सामने आए वीडियो में राहुल गांधी के साथ प्रियंका गांधी वाड्रा और AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा भी दिखाई दीं। नेहा बोरा हालिया CEC और SIR विरोधी प्रदर्शनों में सक्रिय रही हैं और विभिन्न विरोध प्रदर्शनों के दौरान उन्हें हिरासत में लिए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। क्यों कहा जा रहा है राहुल गांधी को ‘ढाल’? वायरल वीडियो में राहुल गांधी भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रियंका गांधी और नेहा बोरा के करीब चलते दिखाई देते हैं। इसी दृश्य को कुछ मीडिया रिपोर्टों ने इस अंदाज में पेश किया कि राहुल गांधी दोनों महिला नेताओं के लिए ‘शील्ड’ यानी ढाल की तरह आगे बढ़ रहे थे। हालांकि, केवल वीडियो के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि उस समय दोनों नेताओं को किसी विशेष शारीरिक खतरे का सामना करना पड़ रहा था। ‘ढाल’ शब्द इस दृश्य की प्रतीकात्मक व्याख्या के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो मार्च के दौरान सामने आए इस दृश्य को सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया। राहुल गांधी के समर्थकों ने इसे एकजुटता और साथ खड़े रहने के संकेत के रूप में देखा, जबकि राजनीतिक विरोधियों ने प्रदर्शन को विपक्ष की राजनीतिक लामबंदी से जोड़कर पेश किया। Barricades पर रोका गया मार्च मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, INDIA bloc के मार्च को Supreme Court पहुंचने से पहले भगवान दास रोड के पास लगाए गए बैरिकेड्स पर रोक दिया गया। इसके बाद वकीलों की एक टीम Supreme Court पहुंची और चुनाव से संबंधित आरोपों को लेकर याचिका दाखिल किए जाने की खबर सामने आई। राहुल गांधी ने आंदोलन जारी रखने की बात कही प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने आंदोलन जारी रखने और पीछे नहीं हटने की बात कही। उन्होंने युवाओं से लोकतांत्रिक संस्थाओं और मतदान के अधिकार से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज उठाने की अपील भी की। प्रियंका गांधी भी प्रदर्शनों में सक्रिय प्रियंका गांधी वाड्रा हाल के दिनों में CEC और SIR के विरोध में आयोजित प्रदर्शनों में सक्रिय दिखाई दी हैं। 6 अक्टूबर को हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित विपक्षी सांसदों तथा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की खबरें भी सामने आई थीं। नेहा बोरा आंदोलन का प्रमुख युवा चेहरा AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा हालिया विरोध प्रदर्शनों में लगातार सक्रिय रही हैं। 11 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस द्वारा उन्हें विजय चौक के पास हिरासत में लिए जाने की खबर आई थी। इससे पहले RK आश्रम इलाके में उनसे मिलती-जुलती दिखने वाली एक अन्य महिला को पुलिस द्वारा गलती से नेहा बोरा समझे जाने का मामला भी रिपोर्ट किया गया था। मल्लिकार्जुन खरगे भी मार्च में शामिल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी 12 अक्टूबर के मार्च में शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान उनका Batman मास्क पहने दिखाई देने वाला दृश्य भी सोशल मीडिया पर चर्चा में रहा और विरोध प्रदर्शन के प्रतीकात्मक दृश्यों में शामिल हो गया। SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद विपक्ष और कुछ संबंधित समूहों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए और इसका राजनीतिक प्रभाव पड़ सकता है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को अद्यतन करने का उद्देश्य मृत, डुप्लिकेट और अपात्र प्रविष्टियों को हटाना है। पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटने की स्थिति में निर्धारित प्रक्रिया के तहत उन्हें दोबारा शामिल कराने का रास्ता उपलब्ध है। BJP ने आरोपों को बताया राजनीतिक भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए चुनाव आयोग को एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था बताया है। BJP का आरोप है कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाकर जनता के बीच अविश्वास पैदा करने की कोशिश कर रहा है। ‘ढाल’ वाला दृश्य बना चर्चा का विषय राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और नेहा बोरा का साथ चलते हुए वीडियो INDIA bloc के प्रदर्शन से जुड़ी प्रमुख चर्चाओं में शामिल हो गया है। हालांकि, इस दृश्य को ‘राहुल गांधी बने ढाल’ कहना मीडिया और सोशल मीडिया की व्याख्या है। वीडियो से अपने आप किसी विशिष्ट खतरे या सुरक्षा घटना की पुष्टि नहीं होती। स्रोत: Reuters / The Economic Times / The Times of India / Navbharat Times / The Indian Express / Loksatta जय राष्ट्र न्यूज़

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महिला प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल, हिरासत में कथित दुर्व्यवहार की जांच की मांग

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। 10 और 11 अक्टूबर को मध्य दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के बाद सामने आए वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों में महिला प्रदर्शनकारियों को पुलिस द्वारा पकड़कर वाहनों में ले जाते हुए देखा गया। विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग और कथित दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं। हालांकि, सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित बदसलूकी के आरोप CPI(M) के नेताओं ने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस ने सख्ती से पेश आते हुए उन्हें लंबे समय तक पुलिस वाहनों में रखा। पार्टी के महासचिव एम.ए. बेबी ने यह भी दावा किया कि कुछ प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस वाहनों के भीतर मारपीट हुई। इन आरोपों की स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है। हिरासत के दौरान सांसद जॉन ब्रिटास के घायल होने का दावा इसी प्रदर्शन के दौरान CPI(M) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास के घायल होने की खबर भी सामने आई। पार्टी के अनुसार, हिरासत में लिए जाने के दौरान हुई धक्का-मुक्की में उन्हें चोट लगी, जिसके बाद उन्हें राम मनोहर लोहिया अस्पताल में चिकित्सकीय जांच के लिए ले जाया गया। बंगला साहिब के पास पुलिस कार्रवाई पर भी विवाद गुरुद्वारा बंगला साहिब के आसपास हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। नॉर्थ अमेरिकन पंजाबी एसोसिएशन (NAPA) ने दावा किया कि वहां महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार हुआ और मदद की अपील पर ध्यान नहीं दिया गया। संगठन ने मामले की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। वायरल वीडियो पर दिल्ली पुलिस का स्पष्टीकरण बंगला साहिब से जुड़े वायरल वीडियो पर दिल्ली पुलिस ने कहा कि पुलिसकर्मी उस सामान्य रास्ते से गुजर रहे थे, जिसका इस्तेमाल श्रद्धालु जूते उतारने वाले स्थान तक पहुंचने के लिए करते हैं। हालांकि, एसोसिएशन ने पूरे घटनाक्रम की स्पष्टता के लिए बिना संपादन वाले वीडियो और अन्य संबंधित साक्ष्यों की जांच कराने की मांग की है। आरोपों और पुलिस के स्पष्टीकरण की निष्पक्ष जांच से ही घटनाओं की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पहले भी महिला प्रदर्शनकारी को लेकर उठा था विवाद 7 अक्टूबर को INDIA गठबंधन के विरोध प्रदर्शन के दौरान भी एक महिला पुलिस अधिकारी और प्रदर्शनकारियों के बीच कथित टकराव को लेकर विवाद हुआ था। उस घटना पर भाजपा ने राहुल गांधी पर महिला पुलिस अधिकारी को धक्का देने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। यह भाजपा का आरोप था, जिसे घटना के स्वतंत्र रूप से स्थापित निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। 3,500 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की रिपोर्ट 10 अक्टूबर को CJP के प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने बड़े पैमाने पर एहतियाती हिरासत की कार्रवाई की। रिपोर्ट के अनुसार, 3,500 से अधिक प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग हिरासत केंद्रों में ले जाया गया था। हिरासत केंद्रों के भीतर भी जारी रहे नारे रिपोर्टों के अनुसार, हिरासत में लिए गए कई प्रदर्शनकारियों ने केंद्रों के भीतर भी नारेबाजी और विरोध जारी रखा। कुछ प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि उन्हें जंतर-मंतर तक नहीं पहुंचने दिया गया, तो वे हिरासत केंद्रों को ही विरोध स्थल बना देंगे। महिला सुरक्षा और पुलिस प्रक्रिया पर बहस महिला प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के तरीके, उन्हें पुलिस वाहनों में ले जाने और कथित सख्ती ने पुलिस की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं। महिला पुलिसकर्मियों की पर्याप्त मौजूदगी, बल का उचित इस्तेमाल और जरूरत पड़ने पर चिकित्सा सहायता जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देने की मांग की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के स्वतः संज्ञान को लेकर सवाल 12 अक्टूबर को प्रकाशित एक कानूनी विश्लेषण में यह सवाल उठाया गया कि बड़े पैमाने पर हिरासत और पुलिस की कथित ज्यादती के आरोपों के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान क्यों नहीं लिया। विश्लेषण में पहले के मामलों का हवाला देते हुए अदालत के हस्तक्षेप की भूमिका पर चर्चा की गई। यह न्यायिक कार्रवाई को लेकर उठाया गया सवाल है, न कि अदालत की ओर से किसी उल्लंघन की पुष्टि। आरोपों की स्वतंत्र जांच जरूरी सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और राजनीतिक आरोपों के आधार पर किसी विशिष्ट पुलिसकर्मी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। हालांकि, महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और हिरासत के दौरान बल प्रयोग से जुड़े आरोप गंभीर हैं। इनकी निष्पक्ष जांच, संबंधित पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। विरोध प्रदर्शनों के बीच पुलिस की भूमिका पर बढ़ती चर्चा दिल्ली में लगातार विरोध प्रदर्शन, हिरासत और पुलिस-प्रदर्शनकारी टकराव की खबरों के बीच बहस अब केवल मुख्य चुनाव आयुक्त और SIR प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। प्रदर्शन करने के अधिकार, पुलिस की शक्तियों और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्रोत: द प्रिंट, PTI, द टाइम्स ऑफ इंडिया जय राष्ट्र न्यूज़

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