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प्रकाश राज ने सौरव दास और आशुतोष रांका की तत्काल रिहाई की मांग की, कहा—विरोध की आवाज दबाना ठीक नहीं

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर 2026: अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज ने CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की तत्काल रिहाई की मांग दोहराई है। दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ाए जाने के बीच प्रकाश राज ने शांतिपूर्ण राजनीतिक असहमति और विरोध प्रदर्शनों को अपराध की तरह देखे जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध की आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए। प्रेस क्लब में उठी थी रिहाई की मांग 15 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रकाश राज, CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण और छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने सौरव दास और आशुतोष रांका की तत्काल रिहाई की मांग की थी। ‘पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा’ प्रकाश राज ने एक वीडियो संदेश में दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि यदि असहमति की आवाज को रोकने की कोशिश की गई, तो “पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा।” उनका संदेश शांतिपूर्ण विरोध और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा पर केंद्रित था। दो दिन और बढ़ी न्यायिक हिरासत 19 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत ने सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो और दिनों के लिए बढ़ा दी। दिल्ली पुलिस ने सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया, जबकि दोनों नेताओं के वकीलों ने हिरासत के आधारों को अस्पष्ट बताते हुए कार्रवाई पर सवाल उठाए। किस विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है मामला? दोनों नेताओं को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने बैरिकेड पार किए और पहले दिए गए शांति बनाए रखने संबंधी बांड की शर्तों का उल्लंघन किया। वहीं, CJP इस कार्रवाई को शांतिपूर्ण विरोध और राजनीतिक असहमति से जुड़ा मामला बता रही है। ममता बनर्जी ने भी की रिहाई की मांग 20 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी सौरव दास और आशुतोष रांका की तत्काल रिहाई की मांग की। उन्होंने केंद्र सरकार और पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की। इस घटनाक्रम के बाद दोनों नेताओं की हिरासत का मुद्दा राजनीतिक चर्चा में और प्रमुखता से सामने आया है। रिहाई में देरी पर आरोप-प्रत्यारोप CJP ने आरोप लगाया है कि दोनों नेताओं की रिहाई की प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की गई। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने कहा कि जमानतदारों के दस्तावेजों से जुड़ी समस्याओं और आवश्यक प्रक्रियाओं के कारण देरी हुई। फिलहाल, दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है; देरी को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। स्रोत: Reuters, Reuters Connect, ABP Live और Hindustan Times जय राष्ट्र न्यूज़

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लॉरेंस बिश्नोई को ‘साहब’ कहने पर अभिजीत दीपके ने उठाए सवाल, दिल्ली पुलिस बोली—पुराना वीडियो, जुबान फिसली थी

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर 2026: CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस की एक पुरानी प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो साझा कर सवाल उठाए हैं। इस क्लिप में एक DCP गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को कथित तौर पर “साहब” कहते सुनाई देते हैं। दीपके ने इस टिप्पणी को कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार से जोड़ते हुए कथित दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाए हैं। अभिजीत दीपके ने क्या सवाल उठाए? अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए सवाल किया कि एक कुख्यात गैंगस्टर के लिए सम्मानसूचक शब्द का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि छात्रों और प्रदर्शनकारियों के साथ कथित तौर पर सख्ती बरती जाती है। उन्होंने पुलिस की भाषा और व्यवहार में इस अंतर को लेकर सवाल उठाए। दिल्ली पुलिस ने क्या सफाई दी? दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा वीडियो एक साल से भी अधिक पुराना है। पुलिस के मुताबिक, DCP के मुंह से लॉरेंस बिश्नोई के नाम के साथ “साहब” शब्द निकलना केवल जुबान फिसलने का मामला था। पुलिस ने इस टिप्पणी को किसी विशेष सम्मान या तरजीही व्यवहार के तौर पर देखे जाने से इनकार किया। पुराना वीडियो अब क्यों चर्चा में है? टाइगर श्रॉफ के वाहन पर कथित गोलीबारी के मामले के बाद लॉरेंस बिश्नोई के नेटवर्क को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हुई है। इसी बीच दीपके द्वारा पुराना वीडियो साझा किए जाने के बाद पुलिस की भाषा और उसके व्यवहार को लेकर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। साबरमती जेल में बंद है लॉरेंस बिश्नोई लॉरेंस बिश्नोई गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल में बंद है। उसके खिलाफ कई आपराधिक मामलों में आरोप हैं। उसके कथित गिरोह के नेटवर्क को लेकर विभिन्न राज्यों की जांच एजेंसियां भी जांच करती रही हैं। पुलिस के व्यवहार को लेकर फिर उठी बहस यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब CJP और दिल्ली पुलिस के बीच हालिया विरोध प्रदर्शनों को लेकर भी तनाव की खबरें सामने आई हैं। अभिजीत दीपके को हाल ही में कनॉट प्लेस में तिरंगा मार्च के दौरान हिरासत में लिए जाने की खबर भी सामने आई थी। फिलहाल, इस मामले में दीपके की आलोचना और दिल्ली पुलिस की सफाई दोनों चर्चा में हैं। वीडियो में इस्तेमाल किए गए शब्द को लेकर उठे सवालों के बीच पुलिस ने इसे पुरानी रिकॉर्डिंग और जुबान फिसलने की घटना बताया है। स्रोत: द टाइम्स ऑफ इंडिया, द इंडियन एक्सप्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP ने Ashutosh Ranka और Saurav Das की रिहाई में जानबूझकर देरी का लगाया आरोप, दिल्ली पुलिस ने किया इनकार

नई दिल्ली, 19 अक्टूबर 2026: Cockroach Janta Party (CJP) ने अपने नेताओं Ashutosh Ranka और Saurav Das की रिहाई में जानबूझकर प्रक्रियात्मक देरी किए जाने का आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि कई जमानतदारों के दस्तावेज और श्योरिटी बॉन्ड जमा करने के बावजूद दोनों की रिहाई की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। वहीं, दिल्ली पुलिस ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है। CJP ने क्या आरोप लगाए? CJP की कानूनी टीम के मुताबिक, रिहाई की प्रक्रिया के दौरान बार-बार नई प्रक्रियात्मक आपत्तियां उठाई गईं। पार्टी ने आरोप लगाया कि कई श्योरिटी को बिना स्पष्ट कारण स्वीकार नहीं किया गया और जरूरी दस्तावेजों को आगे बढ़ाने में भी देरी हुई। पार्टी का कहना है कि सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद दोनों नेताओं की रिहाई में बाधाएं बनी रहीं। दिल्ली पुलिस ने क्या सफाई दी? दिल्ली पुलिस ने जानबूझकर देरी किए जाने के आरोपों से इनकार किया है। पुलिस के मुताबिक, जमा किए गए श्योरिटी बॉन्ड में कुछ समस्याएं थीं और संबंधित स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रक्रिया पूरी करना आवश्यक था। इस तरह, रिहाई में देरी को लेकर CJP और पुलिस के दावों में विरोधाभास बना हुआ है। मजिस्ट्रेट को कथित धमकियों का मामला मामले में उस समय एक और घटनाक्रम सामने आया, जब स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने कथित तौर पर जान से मारने की धमकियां मिलने की शिकायत की। इस शिकायत के आधार पर अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। हालांकि, धमकियों के पीछे कौन लोग हैं और उनका इस मामले से क्या संबंध है, यह जांच का विषय है। जमानत और रिहाई की सुनवाई भी टली रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार को दोनों नेताओं की जमानत या रिहाई से संबंधित सुनवाई टल गई। इसके बाद संबंधित मजिस्ट्रेट के मामले से अलग होने की खबर सामने आई। बताया गया कि उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। इन घटनाक्रमों के कारण रिहाई की प्रक्रिया और लंबी हो गई। जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ा है मामला Ashutosh Ranka और Saurav Das को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में हिरासत में लिया गया था। पुलिस का आरोप है कि दोनों ने पहले दिए गए शांति बनाए रखने संबंधी बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया। दूसरी ओर, CJP इस कार्रवाई को शांतिपूर्ण विरोध और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा मामला बता रही है। 19 अक्टूबर को रिहाई पर नजर 19 अक्टूबर को दोनों नेताओं की हिरासत की अवधि समाप्त होने के करीब होने के बीच उनकी रिहाई को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली पुलिस हिरासत बढ़ाने की मांग कर सकती है, जबकि CJP दोनों नेताओं की तत्काल रिहाई पर जोर दे रही है। फिलहाल, रिहाई में देरी को लेकर पार्टी और पुलिस के अलग-अलग दावे सामने हैं। मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों के निर्णय से स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। Source: The Indian Express, Hindustan Times, India Today, The New Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP founder Abhijeet Dipke गिरफ्तार, ‘Lehra Do Tiranga’ rally से पहले preventive action; Neha Bora detention के बाद रिहा

नई दिल्ली, 17 अक्टूबर 2026: CJP founder Abhijeet Dipke को Delhi Police ने ‘Lehra Do Tiranga’ rally से पहले preventive action के तहत हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया। Police का कहना है कि यह कदम law-and-order situation और संभावित breach of peace को देखते हुए उठाया गया। वहीं student activist Neha Bora को भी कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया, लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। Rally से पहले बढ़ी police कार्रवाई Connaught Place और Central Delhi में CJP की rally को लेकर पहले से heavy security deployment किया गया था। Police ने organisers को बिना permission gathering या march न करने की चेतावनी दी थी। इसी backdrop में Dipke के खिलाफ preventive action लिया गया। Abhijeet Dipke की गिरफ्तारी क्यों हुई? Police sources के मुताबिक Dipke को breach of peace रोकने के मकसद से पकड़ा गया। CJP ने इसे political suppression बताया है और कहा कि उनका programme peaceful था। Neha Bora को भी लिया गया detention में AISA president Neha Bora को भी police ने rally से जुड़े security arrangements के दौरान detention में लिया था। हालांकि कुछ समय बाद उन्हें release कर दिया गया। Connaught Place बना security zone Central Park, Rajiv Chowk, Parliament Street और आसपास के इलाकों में barricading, checking और police deployment बढ़ाई गई। ‘Lehra Do Tiranga’ programme के चलते Central Delhi में traffic restrictions भी लागू रहे। CJP की मुख्य मांगें क्या हैं? CJP Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar के इस्तीफे, voter-list revision पर जवाबदेही और हाल के police action के खिलाफ protest कर रही है। Group ने Jantar Mantar और Connaught Place पर लगातार demonstrations की कोशिश की है। राजनीतिक विवाद और तेज Dipke की गिरफ्तारी के बाद opposition leaders ने police action पर सवाल उठाए हैं, जबकि Delhi Police का कहना है कि उसका focus public order और safety बनाए रखना है। source – Reuters, Delhi Police जय राष्ट्र न्यूज़

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अभिजीत दिपके आणि दिल्ली पोलिसांमध्ये घरातच शाब्दिक वाद? VIDEO व्हायरल

नवी दिल्ली, 17 ऑक्टोबर 2026: कॉकroach जनता पार्टी (CJP) चे संस्थापक अभिजीत दिपके यांच्या घरी दिल्ली पोलीस पोहोचल्यानंतर झालेल्या शाब्दिक वादाचा व्हिडिओ सोशल मीडियावर व्हायरल झाला आहे. CJP च्या ‘Lehra Do Tiranga’ कार्यक्रमापूर्वी हा प्रकार घडला. पोलिसांनी दिपके यांना कनॉट प्लेस येथे परवानगीशिवाय मोर्चा किंवा मोठा जमाव आयोजित न करण्याबाबत नोटीस दिली होती. “माझ्या घरी कोण येईल, हे तुम्ही ठरवणार नाही” व्हायरल व्हिडिओमध्ये अभिजीत दिपके आणि पोलीस अधिकाऱ्यांमध्ये तीव्र शाब्दिक वाद होताना दिसत आहे. दिपके पोलिसांच्या उपस्थितीवर आणि त्यांच्या कारवाईवर प्रश्न उपस्थित करताना दिसतात. दुसऱ्या व्हिडिओमध्ये दिपके यांनी “मी एकटाच आहे” असे सांगत ताब्यात घेण्याच्या कारवाईवर आक्षेप घेतल्याचे दिसते. या व्हिडिओंमुळे सोशल मीडियावर या प्रकरणाची चर्चा सुरू झाली आहे. दिल्ली पोलिसांनी दिली होती नोटीस दिल्ली पोलिसांनी दिपके यांना कनॉट प्लेस येथील सेंट्रल पार्कमध्ये प्रस्तावित तिरंगा कार्यक्रम आयोजित न करण्याबाबत नोटीस दिली होती. संबंधित परिसरात भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) च्या कलम 163 अंतर्गत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू असल्याचे पोलिसांनी स्पष्ट केले होते. तिरंगा फडकवण्यावर बंदी नाही, मात्र मोर्चाला आक्षेप पोलिसांच्या नोटीसमध्ये तिरंगा फडकवण्यावर बंदी नसल्याचे स्पष्ट करण्यात आले होते. मात्र, आवश्यक परवानगीशिवाय मोठा जमाव किंवा मोर्चा आयोजित केल्यास कायदेशीर कारवाई होऊ शकते, असा इशाराही देण्यात आला होता. दिपके यांना प्रतिबंधात्मक कारवाईअंतर्गत ताब्यात घेतले 16 ऑक्टोबर रोजी कार्यक्रमासाठी घरातून बाहेर पडताना दिल्ली पोलिसांनी अभिजीत दिपके यांना प्रतिबंधात्मक कारवाईअंतर्गत ताब्यात घेतले. या कारवाईचा व्हिडिओही सोशल मीडियावर मोठ्या प्रमाणावर शेअर झाला. व्हिडिओमुळे राजकीय वादाला पुन्हा हवा CJP समर्थकांनी पोलिसांच्या कारवाईवर प्रश्न उपस्थित केले आहेत. दुसरीकडे, दिल्ली पोलिसांनी कायदा-सुव्यवस्था राखणे, वाहतूक सुरळीत ठेवणे आणि गर्दीवर नियंत्रण ठेवणे या कारणांचा हवाला दिला आहे. ‘Lehra Do Tiranga’ कार्यक्रमाच्या पार्श्वभूमीवर घडलेल्या या घटनांमुळे अभिजीत दिपके आणि दिल्ली पोलिसांमधील वाद पुन्हा चर्चेत आला आहे. स्रोत – Times of India, Aaj Tak जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP की ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली से पहले दिल्ली में कड़ी सुरक्षा, 28 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात

नई दिल्ली, 17 अक्टूबर 2026: कॉकroach जनता पार्टी (CJP) की ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली को लेकर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कनॉट प्लेस और आसपास के नई दिल्ली जिले में 28,000 से अधिक पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों के जवानों की तैनाती की गई। प्रशासन ने सेंट्रल पार्क को बंद रखा, जबकि संवेदनशील इलाकों में निषेधाज्ञा लागू रही। 28 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती सुरक्षा व्यवस्था के तहत दिल्ली पुलिस के करीब 6,000 जवानों के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की लगभग 220 कंपनियां तैनात की गईं। एक कंपनी में औसतन करीब 100 जवान होते हैं। इस तैनाती के चलते कुल सुरक्षाकर्मियों की संख्या 28,000 से अधिक बताई गई। सेंट्रल पार्क बंद, धारा 163 के तहत प्रतिबंध कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क को प्रशासनिक कारणों से बंद रखा गया। इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू रहे। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य बिना अनुमति बड़ी सभाओं और जुलूसों को रोकना तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। पुलिस ने रैली की अनुमति नहीं दी दिल्ली पुलिस ने CJP के संस्थापक अभिजीत दीप्ते को नोटिस जारी कर कनॉट प्लेस में रैली या प्रदर्शन आयोजित नहीं करने की हिदायत दी थी। पुलिस ने संभावित यातायात बाधा, भगदड़ के खतरे और आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही प्रभावित होने जैसी चिंताओं का हवाला दिया। कनॉट प्लेस में CCTV निगरानी और बैरिकेडिंग सुरक्षा व्यवस्था के तहत सेंट्रल पार्क, राजीव चौक मेट्रो स्टेशन और आसपास के संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त CCTV निगरानी और बैरिकेडिंग की गई। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए हिरासत में लिए गए लोगों को ले जाने हेतु बसों की भी व्यवस्था की गई। CJP संस्थापक अभिजीत दीप्ते गिरफ्तार रैली से पहले दिल्ली पुलिस ने CJP संस्थापक अभिजीत दीप्ते को गिरफ्तार कर लिया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह कार्रवाई शांति भंग होने की आशंका को रोकने के उद्देश्य से की गई। छात्र कार्यकर्ता नेहा बोरा को भी हिरासत में लिया गया था, हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। क्यों बुलाई गई थी ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली? CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े आरोपों और पार्टी के गिरफ्तार नेताओं के समर्थन में रैली का आह्वान किया था। पार्टी ने मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया में राजनीतिक पक्षपात किए जाने के आरोपों से इनकार किया है। रैली को लेकर सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक प्रतिबंधों के बीच दिल्ली पुलिस की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखने, यातायात सुचारु रखने और आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही सुनिश्चित करने की रही। स्रोत – Reuters, The New Indian Express, The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली में Neha Bora, Abhijeet Dipke और Prakash Raj की प्रेस कॉन्फ्रेंस, CEC और SIR प्रक्रिया पर उठाए सवाल

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2026: दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में CJP के सह-संस्थापक Abhijeet Dipke, AISA अध्यक्ष Neha Bora, अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता Prakash Raj तथा वरिष्ठ अधिवक्ता Prashant Bhushan समेत कई लोगों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए। Abhijeet Dipke ने केंद्र सरकार पर लगाए आरोप Abhijeet Dipke ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar को बचाने के लिए सरकारी तंत्र का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों और विपक्षी नेताओं की हिरासत, मेट्रो प्रतिबंधों तथा भारी सुरक्षा तैनाती की जरूरत पर भी सवाल उठाए। ये आरोप Dipke के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं और स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं हैं। Neha Bora ने पत्रकारों के साथ व्यवहार पर उठाए सवाल AISA अध्यक्ष Neha Bora ने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों को परेशान किया गया और कुछ के कैमरे तक छीन लिए गए। उन्होंने हाल ही में एक महिला पत्रकार द्वारा दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी पर लगाए गए उत्पीड़न के आरोपों का भी मुद्दा उठाया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का जवाब मामले के तथ्यों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। Prakash Raj ने मतदाता सूची से नाम हटाने का आरोप लगाया अभिनेता Prakash Raj ने दावा किया कि मतदाता सूची में नाम हटाने के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 7 का उपयोग कुछ मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कर्नाटक के 23 जिलों का भी उल्लेख किया। यह दावा SIR प्रक्रिया को लेकर चल रहे व्यापक विवाद का हिस्सा है। आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित मतदाता सूचियों, शिकायतों और निर्वाचन अधिकारियों के रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है। CEC के इस्तीफे और प्रदर्शनकारियों की रिहाई की मांग प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई प्रमुख मांगें रखी गईं। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar का इस्तीफा, हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की रिहाई, कथित पुलिस ज्यादती रोकने और जंतर-मंतर को फिर से विरोध प्रदर्शनों के लिए उपलब्ध कराने की मांग शामिल थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हुआ हंगामा कार्यक्रम के दौरान कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Neha Bora के बोलने के दौरान कुछ लोगों ने “बंद करो” और “बाहर जाओ” जैसे नारे लगाए, जिससे प्रेस कॉन्फ्रेंस में हंगामे की स्थिति बन गई। Connaught Place में ‘Lehra Do Tiranga’ कार्यक्रम CJP ने 16 अक्टूबर को शाम 5 बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘Lehra Do Tiranga’ कार्यक्रम आयोजित करने का आह्वान किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली पुलिस की अनुमति से जुड़े सवालों के बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने कार्यक्रम पर रोक लगाने से इनकार किया और पुलिस को सभा को नियंत्रित करने के निर्देश दिए। कार्यक्रम के संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। स्रोत – The New Indian Express, ThePrint, ANI जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP को लेकर कांग्रेस के रुख में बदलाव के संकेत? राहुल गांधी की हाई टी के लिए अभिजीत दिपके को मिला न्योता

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026: कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से आयोजित हाई टी बैठक के लिए कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के नेता अभिजीत दिपके को आमंत्रित किए जाने से राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। इसे कांग्रेस और CJP के बीच संवाद बढ़ने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इस निमंत्रण से दोनों के बीच किसी औपचारिक राजनीतिक गठबंधन या रणनीतिक समझौते की पुष्टि नहीं होती। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह बैठक विपक्षी गठबंधन INDIA के नेताओं के साथ-साथ नागरिक समाज और छात्र संगठनों से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। राहुल गांधी की हाई टी बैठक का क्या था उद्देश्य? यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision—SIR) को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इन मुद्दों पर अलग-अलग छात्र संगठनों, नागरिक समूहों और विपक्षी दलों ने अपनी आपत्तियां उठाई हैं। ऐसे में हाई टी बैठक को विभिन्न समूहों के बीच संवाद और संभावित समन्वय बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। कांग्रेस और CJP के बीच पहले क्यों थी दूरी? मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कांग्रेस के भीतर CJP को लेकर पहले कुछ आरक्षण थे। पार्टी के एक वर्ग में इस संगठन के आम आदमी पार्टी (AAP) से संभावित संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। हालांकि, हाल के विरोध प्रदर्शनों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने के बीच कांग्रेस की ओर से अभिजीत दिपके तक पहुंचने की खबर सामने आई है। यह घटनाक्रम दोनों पक्षों के बीच संवाद की संभावना दिखाता है, लेकिन कांग्रेस की आधिकारिक नीति में व्यापक बदलाव हुआ है या नहीं, यह स्पष्ट होने के लिए पार्टी की ओर से औपचारिक बयान जरूरी होगा। CJP के प्रदर्शनों पर राहुल गांधी का रुख राहुल गांधी हाल के दिनों में विरोध प्रदर्शन कर रहे युवा नेताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपों को भी उठाया है। विपक्षी दलों और विभिन्न नागरिक समूहों की ओर से चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण और विरोध प्रदर्शन के अधिकार जैसे मुद्दों पर आवाज उठाई जा रही है। इन घटनाक्रमों के बीच CJP के नेता को आमंत्रित किया जाना विपक्षी नेताओं और स्वतंत्र रूप से सक्रिय युवा समूहों के बीच संपर्क बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है। अभिजीत दिपके ने क्या संकेत दिया? रिपोर्टों के अनुसार, अभिजीत दिपके ने कांग्रेस की ओर से संपर्क किए जाने पर आभार जताया। साथ ही, CJP की स्वतंत्र पहचान बनाए रखने पर भी जोर दिया। CJP खुद को किसी राजनीतिक दल के विस्तार के बजाय एक स्वतंत्र दबाव समूह के रूप में पेश करना चाहता है। ऐसे में कांग्रेस के साथ संवाद बढ़ने के बावजूद संगठन की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान और भविष्य की रणनीति महत्वपूर्ण बनी रहेगी। विपक्षी एकजुटता के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम? CJP ने हाल के मुख्य निर्वाचन आयुक्त और SIR विरोधी प्रदर्शनों के दौरान युवा कार्यकर्ताओं की भागीदारी के जरिए सार्वजनिक चर्चा में जगह बनाई है। कांग्रेस की ओर से दिपके को आमंत्रित किया जाना इस संभावना की ओर संकेत करता है कि विपक्षी दल पारंपरिक राजनीतिक संगठनों के साथ-साथ छात्र समूहों और नागरिक समाज की आवाजों से भी संवाद बढ़ाना चाहते हैं। हालांकि, किसी बैठक का निमंत्रण अपने आप में साझा राजनीतिक कार्यक्रम, चुनावी गठबंधन या भविष्य के संयुक्त आंदोलन का प्रमाण नहीं है। इसके वास्तविक राजनीतिक महत्व का आकलन आगे होने वाली बातचीत और दोनों पक्षों के आधिकारिक रुख से किया जा सकेगा। आगे क्या होगा? फिलहाल, कांग्रेस और CJP के बीच संपर्क बढ़ने की खबर ने राजनीतिक बहस को नया विषय दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह संवाद केवल एक बैठक तक सीमित रहता है या दोनों पक्ष चुनावी प्रक्रिया और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर आगे भी साथ काम करते हैं। Source – The Indian Express, Jansatta और The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन की तैयारी, नेहा बोरा और सौरव दास ने दी जानकारी

नई दिल्ली: Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, Special Intensive Revision (SIR) पर रोक और Election Commission की नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर 10 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन की तैयारी तेज हो गई है। CJP के co-convener सौरव दास और AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदर्शन की जानकारी दी और देशभर के युवाओं, छात्र संगठनों तथा नागरिक समूहों से दिल्ली पहुंचने की अपील की। 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन CJP, AISA, AISF, SFI और अन्य छात्र संगठनों ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर संयुक्त प्रदर्शन का आह्वान किया है। आयोजकों का कहना है कि यह प्रदर्शन केवल CEC के इस्तीफे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें व्यापक चुनावी सुधारों की मांग भी उठाई जाएगी। Delhi Police को दी गई औपचारिक सूचना सौरव दास ने Parliament Street Police Station जाकर प्रस्तावित प्रदर्शन की औपचारिक सूचना Delhi Police को दी। उन्होंने कहा कि आयोजकों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ी आवश्यक अंडरटेकिंग भी जमा की हैं और पुलिस से सहयोग की उम्मीद है। नेहा बोरा ने युवाओं से की अपील प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेहा बोरा ने छात्रों और युवाओं से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की। उन्होंने इस आंदोलन को मतदान के अधिकार, संवैधानिक संस्थाओं और चुनावी जवाबदेही से जुड़ा मुद्दा बताया। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग प्रदर्शन की प्रमुख मांग Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। CJP और उससे जुड़े संगठनों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताएं हुई हैं। Election Commission और BJP इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं। SIR पर रोक लगाने की भी मांग आयोजक Special Intensive Revision प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक मतदाता सूची में संशोधन को लेकर उठे सवालों का समाधान नहीं होता, तब तक इस प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। ‘लंबी लड़ाई’ के लिए तैयार रहने की अपील सौरव दास ने समर्थकों से कहा कि वे केवल एक दिन के प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि लंबे आंदोलन के लिए तैयार रहें। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के बाद भी चुनावी सुधारों की मांग जारी रहेगी। कई छात्र संगठन साथ आए AISA, AISF, SFI और AAP की छात्र इकाई ASAP समेत कई संगठनों ने प्रदर्शन में भाग लेने की घोषणा की है। इससे 10 अक्टूबर का कार्यक्रम बड़े छात्र जुटाव में बदल सकता है। BKU ने भी भाग लेने का ऐलान किया 9 अक्टूबर को भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत ने भी घोषणा की कि संगठन 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन में शामिल होगा। इससे आंदोलन में किसान संगठनों की भागीदारी भी जुड़ गई है। Delhi Police ने अनुमति के नियमों का दिया हवाला Delhi Police का कहना है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक है। पुलिस ने यह भी कहा है कि निर्धारित भीड़ सीमा और कानून-व्यवस्था से जुड़े दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। भारी सुरक्षा की तैयारी 10 अक्टूबर के प्रदर्शन को देखते हुए Delhi Police और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने सुरक्षा तैयारियां बढ़ा दी हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, मेट्रो स्टेशनों, कैब की आवाजाही, हिरासत केंद्रों और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्थाओं को लेकर आकस्मिक योजनाएं तैयार की गई हैं। हिरासत में लिए जाने को लेकर आरोप 9 अक्टूबर को CJP ने दावा किया कि देश के अलग-अलग हिस्सों से प्रदर्शन में शामिल होने के लिए आने वाले कई समर्थकों और छात्रों को हिरासत में लिया गया। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, संगठन ने बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने का दावा किया है, हालांकि सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। 10 अक्टूबर के प्रदर्शन पर टिकी नजर अब सभी की नजर 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन पर है। एक तरफ आयोजक इसे राष्ट्रीय स्तर के आंदोलन का अगला चरण बता रहे हैं, वहीं Delhi Police कानून-व्यवस्था और अनुमति से जुड़ी शर्तों के पालन पर जोर दे रही है। Source – The Indian Express, Reuters, Hindustan Times, The New Indian Express, The Quint, Navbharat Times जय राष्ट्र न्यूज़

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“संविधान बचाने की लड़ाई में आप लोग जरूर आएं—10 अक्टूबर”: नेहा बोरा की अपील

नई दिल्ली: AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले बड़े प्रदर्शन में लोगों से शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल किसी एक व्यक्ति या पद के खिलाफ नहीं, बल्कि संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर है। 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन CJP और कई student organisations ने 10 अक्टूबर को Jantar Mantar पर संयुक्त प्रदर्शन का आह्वान किया है। Organisers ने Delhi Police को प्रदर्शन की औपचारिक सूचना भी दे दी है और nationwide mobilisation की अपील की है। नेहा बोरा ने लोगों से की अपील Press conference में Neha Bora ने छात्र संगठनों, विपक्षी दलों और नागरिक समूहों से एकजुट होकर प्रदर्शन में शामिल होने को कहा। उन्होंने इसे संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा से जुड़ी लंबी लड़ाई बताया। CEC Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar का इस्तीफा शामिल है। Organisers ने उनके खिलाफ criminal action की मांग भी उठाई है, हालांकि ये राजनीतिक और आंदोलनकारी मांगें हैं और किसी अदालत ने उनके खिलाफ अपराध सिद्ध नहीं किया है। SIR पर रोक की मांग Student groups और CJP ने Special Intensive Revision यानी SIR को रोकने की भी मांग की है। उनका आरोप है कि voter-list revision से eligible voters के नाम प्रभावित हो सकते हैं। Election Commission इन आरोपों से इनकार करता रहा है और revision को voter rolls की accuracy सुधारने की प्रक्रिया बताता है। January 2025 Voter List बहाल करने की मांग Organisers ने January 2025 की voter list को restore करने की भी मांग रखी है। उनका कहना है कि इससे voter deletion को लेकर उठे विवादों का समाधान हो सकता है। Election Commission Appointment Law पर भी सवाल प्रदर्शन से जुड़े समूह 2023 के Election Commission appointments law को भी बदलने की मांग कर रहे हैं। वे Chief Election Commissioner और Election Commissioners की नियुक्ति के लिए ज्यादा independent selection mechanism चाहते हैं। “लंबी लड़ाई” की तैयारी CJP co-convener Saurav Das ने supporters से कहा कि वे लंबे आंदोलन के लिए तैयार रहें। उन्होंने संकेत दिया कि Gyanesh Kumar के इस्तीफे के बाद भी आंदोलन खत्म नहीं होगा, क्योंकि focus wider electoral reforms पर है। कई छात्र संगठन साथ AISA के अलावा AISF, SFI और अन्य student groups ने भी 10 अक्टूबर के protest में भाग लेने की घोषणा की है। इससे प्रदर्शन के बड़े student mobilisation में बदलने की संभावना जताई जा रही है। Delhi Police के नियम भी लागू Delhi Police ने साफ किया है कि Jantar Mantar पर protest के लिए prior permission जरूरी है और gathering size पर भी limits लागू हैं। Police के अनुसार आमतौर पर 10 दिन पहले अनुमति लेनी होती है और एक समय में 1,000 से ज्यादा लोगों की gathering की अनुमति नहीं होती। हाल के प्रदर्शनों में कई लोग हिरासत में इससे पहले Jantar Mantar और Election Commission के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों में कई student leaders, activists और opposition leaders को हिरासत में लिया जा चुका है। Neha Bora भी पिछले दिनों police detention का सामना कर चुकी हैं। 10 अक्टूबर पर टिकी नजर अब सबसे ज्यादा नजर 10 अक्टूबर के Jantar Mantar protest पर रहेगी। Organisers इसे nationwide mobilisation का अगला बड़ा चरण बता रहे हैं, जबकि Delhi Police law and order और permission rules के पालन पर जोर दे रही है। Source – The Quint, The New Indian Express, The Indian Express, Times of India, Jansatta जय राष्ट्र न्यूज़

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