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UPI लेनदेन पर शुल्क लगेगा? संजय सिंह का मोदी सरकार पर हमला, बिल वापस लेने की मांग

नई दिल्ली: UPI भुगतान को लेकर संसद में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित व्यवस्था से UPI के जरिए होने वाले भुगतान पर कारोबारियों पर टैक्स का बोझ बढ़ सकता है, जिसका असर आगे चलकर आम लोगों पर पड़ सकता है। आम आदमी पार्टी ने सरकार से इस प्रावधान को वापस लेने की मांग की है। संजय सिंह ने संसद में उठाया UPI का मुद्दा राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान संजय सिंह ने UPI लेनदेन से जुड़े प्रस्ताव पर सवाल उठाए। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि एक तरफ डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया जा रहा है और दूसरी तरफ ऐसे प्रावधान लाए जा रहे हैं जिनसे छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। संजय सिंह ने इस मुद्दे को आम आदमी और छोटे कारोबारियों से जोड़ते हुए सरकार से बिल वापस लेने की मांग की। “व्यापारियों से टैक्स लिया तो जनता पर पड़ेगा बोझ” AAP की ओर से जारी बयान के मुताबिक संजय सिंह का कहना है कि अगर UPI से होने वाले भुगतान पर कारोबारियों से अतिरिक्त शुल्क या टैक्स लिया जाता है, तो उसका बोझ अंततः ग्राहकों तक पहुंच सकता है। उनका तर्क है कि छोटे दुकानदार और कारोबारी अपनी अतिरिक्त लागत को वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में शामिल कर सकते हैं। ऐसे में डिजिटल भुगतान करने वाले ग्राहकों पर अप्रत्यक्ष रूप से असर पड़ने की आशंका जताई गई है। सरकार का जवाब—आम यूजर से UPI चार्ज नहीं लिया जाएगा हालांकि इस मामले में सरकार की ओर से महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण भी सामने आया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में कहा कि आम UPI यूजर्स से किसी तरह का UPI चार्ज नहीं लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि छोटे व्यापारियों पर MDR (Merchant Discount Rate) लगाने की बात नहीं है। संसद ने Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 को मंजूरी भी दे दी है। तो क्या UPI से पैसे भेजने पर लगेगा चार्ज? इस विवाद में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि आम लोगों के UPI भुगतान पर सीधे कोई नया शुल्क लगाए जाने की घोषणा नहीं हुई है। यानी अगर कोई व्यक्ति दुकान पर QR Code स्कैन करके ₹500 या ₹1,000 का भुगतान करता है, तो सरकार के मौजूदा स्पष्टीकरण के अनुसार ग्राहक से अलग से UPI चार्ज वसूलने की व्यवस्था नहीं है। संजय सिंह का विरोध मुख्य रूप से विधेयक में टैक्स से जुड़े प्रावधानों और उनके संभावित प्रभाव को लेकर है। छोटे कारोबारियों को लेकर AAP की चिंता AAP का कहना है कि छोटे व्यापारियों पर किसी भी अतिरिक्त लागत का प्रभाव व्यापक हो सकता है। पार्टी ने इसे छोटे कारोबारियों और आम जनता के हित से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी का दावा है कि डिजिटल इंडिया और कैशलेस भुगतान को बढ़ावा देने के बाद UPI से जुड़े लेनदेन पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना विरोधाभासी होगा। मोदी सरकार पर संजय सिंह का राजनीतिक हमला संजय सिंह ने इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर भी राजनीतिक हमला बोला। AAP के मुताबिक उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों का फायदा बड़े और विदेशी निवेशकों को मिल रहा है, जबकि छोटे कारोबारियों पर बोझ बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने सरकार से इस प्रावधान को वापस लेने की मांग की है। Taxation Bill 2026 को संसद की मंजूरी इस पूरे विवाद के बीच Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 संसद से पारित हो चुका है। रिपोर्ट के अनुसार राज्यसभा ने चर्चा के बाद Money Bill को लोकसभा को लौटाया और बाद में विधेयक को संसद की मंजूरी मिल गई। वित्त मंत्री ने इस दौरान UPI यूजर्स और छोटे व्यापारियों को लेकर आश्वासन दिया कि उन पर सीधे UPI/MDR चार्ज नहीं लगाया जाएगा। UPI भुगतान करने वालों के लिए क्या बदलेगा? फिलहाल आम UPI यूजर्स के लिए सबसे अहम बात यह है कि UPI से पैसे भेजने या QR Code के जरिए भुगतान करने पर कोई नया सीधा शुल्क लागू होने की घोषणा नहीं की गई है। हालांकि टैक्स व्यवस्था में बदलाव और उसके कारोबारी प्रभाव को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। इसलिए भविष्य में नियमों में कोई बदलाव होता है तो उसके आधिकारिक विवरण को देखना जरूरी होगा। निष्कर्ष UPI को लेकर संसद में जारी बहस के बीच संजय सिंह ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए Taxation Bill 2026 के प्रावधानों का विरोध किया है और इसे वापस लेने की मांग की है। AAP का दावा है कि व्यापारियों पर टैक्स या अतिरिक्त लागत बढ़ने से इसका असर आम उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है। वहीं, सरकार की ओर से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि आम UPI यूजर्स और छोटे व्यापारियों से नया UPI/MDR चार्ज नहीं लिया जाएगा। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि UPI से भुगतान करने वाले आम लोगों पर नया शुल्क लगा दिया गया है। Source: Aam Aadmi Party / Indian Express / The Statesman / Live Hindustan जय राष्ट्र न्यूज़

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AI और डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की समीक्षा बैठकें तेज़, नई निवेश परियोजनाओं पर फोकस

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल गवर्नेंस से जुड़ी नई परियोजनाओं एवं निवेश प्रस्तावों की समीक्षा तेज़ कर दी है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) विभिन्न मंत्रालयों और सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर AI आधारित डिजिटल सेवाओं, स्मार्ट प्रशासन और तकनीकी अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में कई प्रस्तावों का मूल्यांकन कर रहा है। सरकार का उद्देश्य AI के माध्यम से नागरिक सेवाओं को अधिक तेज़, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। स्वदेशी AI मॉडल और नए निवेश को मिली गति हाल ही में सरकार ने 20 स्वदेशी AI फाउंडेशन मॉडल विकसित करने के प्रस्तावों को समर्थन देने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही AI अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए 58 Centres of Excellence को भी मंजूरी दी गई है। सरकार ने इन परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर कंप्यूटिंग संसाधन उपलब्ध कराने का भी फैसला किया है, ताकि भारतीय स्टार्टअप, शोध संस्थान और उद्योग वैश्विक स्तर की AI तकनीक विकसित कर सकें। डिजिटल गवर्नेंस पर विशेष जोर MeitY के नेतृत्व में विभिन्न मंत्रालयों से प्राप्त 700 से अधिक AI उपयोग मामलों और 760 से अधिक प्रस्तावों का मूल्यांकन किया जा रहा है। इनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, न्याय, परिवहन, शहरी विकास और प्रशासनिक सेवाओं में AI के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार चाहती है कि डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से सरकारी सेवाएँ अधिक नागरिक-केंद्रित और डेटा-आधारित बनें। डेटा सेंटर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश AI के बढ़ते उपयोग को देखते हुए देश में डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश भी तेज़ हुआ है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार जून तिमाही में संस्थागत निवेश का बड़ा हिस्सा डेटा सेंटर परियोजनाओं में गया, जिससे स्पष्ट है कि AI आधारित डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक अवसंरचना तेजी से विकसित की जा रही है। AI गवर्नेंस और सुरक्षा पर भी ध्यान सरकार केवल तकनीकी निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि जिम्मेदार AI उपयोग के लिए AI Governance Framework और सुरक्षा मानकों पर भी काम कर रही है। विशेषज्ञ समितियाँ AI से जुड़े नैतिक, गोपनीयता और पारदर्शिता संबंधी मुद्दों की समीक्षा कर रही हैं ताकि नई तकनीकों का उपयोग सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से किया जा सके। निष्कर्ष भारत AI और डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश और नीतिगत सुधारों के माध्यम से वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सरकार का मानना है कि स्वदेशी AI मॉडल, मजबूत डिजिटल अवसंरचना और जिम्मेदार AI गवर्नेंस के संयोजन से देश की प्रशासनिक क्षमता और डिजिटल अर्थव्यवस्था दोनों को नई गति मिलेगी। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | IndiaAI Mission जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और डिजिटल टेक्नोलॉजी सेक्टर को मिलेगा बड़ा बढ़ावा, नई सरकारी योजनाओं और निवेश प्रस्तावों पर काम तेज़

नई दिल्ली: भारत सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण (Electronics Manufacturing) और डिजिटल टेक्नोलॉजी सेक्टर को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कई नई योजनाओं और निवेश प्रस्तावों पर तेजी से काम कर रही है। सरकार का उद्देश्य भारत को सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स, मोबाइल निर्माण और डिजिटल हार्डवेयर के क्षेत्र में वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है। हाल के महीनों में विभिन्न नीतिगत सुधारों और प्रोत्साहन योजनाओं के बाद घरेलू और विदेशी निवेशकों की रुचि इस क्षेत्र में लगातार बढ़ रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अनुसार सरकार सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट निर्माण, चिप डिजाइन, डेटा सेंटर और उन्नत डिजिटल टेक्नोलॉजी से जुड़े कई नए निवेश प्रस्तावों पर राज्यों और उद्योग जगत के साथ मिलकर कार्य कर रही है। इन पहलों का उद्देश्य घरेलू उत्पादन बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना और उच्च तकनीक आधारित रोजगार के अवसर पैदा करना है। स्टार्टअप और नवाचार को मिलेगा समर्थन सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (EDF), स्टार्टअप इकोसिस्टम और अनुसंधान एवं विकास (R&D) परियोजनाओं के माध्यम से उभरती तकनीकी कंपनियों को भी प्रोत्साहन दे रही है। इससे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), एम्बेडेड सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन और अगली पीढ़ी की डिजिटल तकनीकों पर काम करने वाले स्टार्टअप्स को नई गति मिलने की उम्मीद है। घरेलू विनिर्माण पर विशेष जोर नई योजनाओं के तहत सरकार स्थानीय स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स, डिस्प्ले, बैटरी, सेमीकंडक्टर पैकेजिंग और अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा दे रही है। इससे भारत वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी भागीदारी मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मोबाइल, ऑटोमोबाइल, रक्षा और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों को भी लाभ मिलेगा। रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा नई सरकारी योजनाओं और प्रस्तावित निवेशों के माध्यम से आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल टेक्नोलॉजी क्षेत्र में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है। सरकार का लक्ष्य भारत को उच्च तकनीक आधारित विनिर्माण अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित करना और वैश्विक कंपनियों के लिए आकर्षक निवेश गंतव्य बनाना है। निष्कर्ष इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और डिजिटल टेक्नोलॉजी क्षेत्र में नई सरकारी योजनाएँ भारत की औद्योगिक और तकनीकी क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं। सरकार का मानना है कि इन पहलों से निवेश, रोजगार, निर्यात और तकनीकी आत्मनिर्भरता को नई गति मिलेगी। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली नई परियोजनाओं पर काम तेज़, सरकार की कई निवेश योजनाएँ चर्चा में

नई दिल्ली: भारत सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल विनिर्माण क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कई नई परियोजनाओं और निवेश योजनाओं पर तेजी से काम शुरू किया है। हाल ही में मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) और सेमिकॉन इंडिया 2.0 जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं को मंजूरी मिलने के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में निवेश का माहौल और मजबूत हुआ है। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर हब के रूप में विकसित करना है। केंद्र सरकार के अनुसार नई योजनाओं के माध्यम से घरेलू मूल्य संवर्धन (Value Addition), सप्लाई चेन को मजबूत करने, भारतीय ब्रांड विकसित करने और अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देने पर विशेष फोकस किया जा रहा है। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन, निर्यात और रोजगार के नए अवसर बढ़ने की उम्मीद है। इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड से स्टार्टअप्स को मिला बढ़ावा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने जानकारी दी है कि इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (EDF) के माध्यम से अब तक 128 कंपनियों और स्टार्टअप्स में ₹1,335 करोड़ से अधिक का निवेश किया जा चुका है। यह निवेश आठ वेंचर कैपिटल फंडों के जरिए किया गया है, जिससे डीप-टेक, इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन और उन्नत विनिर्माण क्षेत्र में नवाचार को गति मिली है। मोबाइल और सेमीकंडक्टर सेक्टर पर बड़ा दांव सरकार ने हाल ही में ₹62,500 करोड़ की मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) और ₹1,27,500 करोड़ की Semicon India 2.0 योजना को मंजूरी दी है। इन योजनाओं का उद्देश्य भारत में मोबाइल निर्माण, चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन, पैकेजिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन को मजबूत करना है। रोजगार और निवेश को मिलेगा लाभ विशेषज्ञों का मानना है कि इन योजनाओं से आने वाले वर्षों में अरबों रुपये का निवेश आकर्षित होगा और हजारों प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। सरकार का लक्ष्य इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को अगले कुछ वर्षों में कई गुना बढ़ाना और भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करना है। आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को बढ़ावा देने वाली ये परियोजनाएँ Make in India, Digital India और Atmanirbhar Bharat अभियान को नई गति देंगी। सरकार का मानना है कि मजबूत घरेलू विनिर्माण क्षमता से आयात पर निर्भरता कम होगी और भारत वैश्विक सप्लाई चेन में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। निष्कर्ष नई इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल विनिर्माण परियोजनाएँ भारत के तकनीकी और औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। सरकार की निवेश योजनाएँ, स्टार्टअप समर्थन और सेमीकंडक्टर मिशन मिलकर भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (EDF) के माध्यम से 128 टेक स्टार्टअप्स में ₹1,335 करोड़ से अधिक निवेश, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को बढ़ावा

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी कि इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (Electronics Development Fund – EDF) के माध्यम से देश के 128 टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स और नवाचार आधारित उद्यमों में ₹1,335.77 करोड़ से अधिक का निवेश किया गया है। सरकार का कहना है कि यह पहल भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स डिज़ाइन, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उन्नत तकनीकी निर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा संचालित EDF एक Fund of Funds मॉडल पर कार्य करता है। यह सीधे स्टार्टअप्स में निवेश नहीं करता, बल्कि पेशेवर वेंचर कैपिटल और एंजेल फंड्स (Daughter Funds) के माध्यम से उभरती तकनीकी कंपनियों को पूंजी उपलब्ध कराता है। अब तक EDF ने आठ Daughter Funds में ₹257.77 करोड़ का निवेश किया है, जिन्होंने आगे 128 स्टार्टअप्स में ₹1,335.77 करोड़ का निवेश किया। उन्नत तकनीकी क्षेत्रों को मिला बढ़ावा सरकार के अनुसार EDF से समर्थित स्टार्टअप्स कई अत्याधुनिक क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं, जिनमें— शामिल हैं। इन क्षेत्रों में घरेलू नवाचार को बढ़ावा देकर भारत को वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में मजबूत बनाने का लक्ष्य रखा गया है। रोजगार और नवाचार को बढ़ावा सरकार ने बताया कि EDF से समर्थित स्टार्टअप्स ने अब तक 23,600 से अधिक रोजगार सृजित किए हैं। इसके अलावा इन कंपनियों द्वारा 368 बौद्धिक संपदाएँ (Intellectual Properties – IPs) विकसित या अधिग्रहित की गई हैं। इससे भारत में घरेलू अनुसंधान, उत्पाद विकास और तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूती मिली है। कर्नाटक सबसे बड़ा लाभार्थी ताज़ा जानकारी के अनुसार EDF से समर्थित 128 कंपनियों में से 90 स्टार्टअप कर्नाटक में स्थित हैं। इससे स्पष्ट होता है कि बेंगलुरु और आसपास का क्षेत्र देश के प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स और डीप-टेक इनोवेशन हब के रूप में उभर रहा है। सरकार का उद्देश्य अन्य राज्यों में भी इसी तरह का स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित करना है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ को मिलेगी मजबूती विशेषज्ञों का मानना है कि EDF के माध्यम से हो रहा निवेश Make in India, Digital India और Atmanirbhar Bharat अभियानों को नई गति देगा। इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में बढ़ते निवेश से आयात पर निर्भरता कम होगी, घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और वैश्विक कंपनियों के लिए भारत एक आकर्षक विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरेगा। सरकार का लक्ष्य सरकार ने कहा कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और उभरती तकनीकों में निवेश को और बढ़ाया जाएगा। इसका उद्देश्य भारत को केवल उपभोक्ता बाजार नहीं बल्कि वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स नवाचार और निर्माण केंद्र बनाना है। इसके लिए निजी निवेश, अनुसंधान संस्थानों और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। निष्कर्ष इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड के माध्यम से 128 स्टार्टअप्स में ₹1,335 करोड़ से अधिक का निवेश भारत की तकनीकी और औद्योगिक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से देश में नवाचार, रोजगार और उच्च तकनीक आधारित विनिर्माण को नई गति मिलेगी तथा भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा. Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड के तहत 128 टेक स्टार्टअप्स में ₹1,335 करोड़ से अधिक निवेश की जानकारी दी

Category: राजनीति / टेक्नोलॉजी / बिज़नेस यह खबर आज सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से प्रमुखता से सामने आई और देश में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण एवं तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सरकार ने बताया कि Electronics Development Fund (EDF) के माध्यम से अब तक 128 टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स में ₹1,335 करोड़ से अधिक का निवेश किया जा चुका है। इसका उद्देश्य भारत को सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स डिज़ाइन, डीप टेक, AI और हार्डवेयर इनोवेशन का वैश्विक केंद्र बनाना है। सरकार के अनुसार यह निवेश केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि स्टार्टअप्स को अनुसंधान, नवाचार, प्रोटोटाइप विकास और वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने में भी मदद करेगा। इससे देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को गति मिलेगी। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा कि भारत में चिप डिज़ाइन, एम्बेडेड सिस्टम, मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा तकनीक और AI आधारित उत्पादों पर तेजी से काम हो रहा है। EDF के जरिए इन क्षेत्रों में कार्यरत स्टार्टअप्स को पूंजी उपलब्ध कराई जा रही है ताकि वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों को मजबूत करेगी। भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण लगातार बढ़ रहा है और सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में देश को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन का प्रमुख केंद्र बनाना है। उद्योग जगत ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि शुरुआती चरण के टेक स्टार्टअप्स के लिए पूंजी जुटाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में EDF जैसी योजनाएं नवाचार को प्रोत्साहित करेंगी और भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएंगी। सरकार ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में उभरती प्रौद्योगिकियों पर केंद्रित निवेश को और बढ़ाया जाएगा ताकि भारत हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल इनोवेशन के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा सके। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत में AI और डिजिटल गवर्नेंस को लेकर नई सरकारी परियोजनाओं पर काम तेज, तकनीक आधारित सेवाओं को मिलेगा बढ़ावा

नई दिल्ली: केंद्र सरकार देश में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) और डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए कई नई परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रही है। इन पहलों का उद्देश्य सरकारी सेवाओं को अधिक तेज, पारदर्शी और नागरिकों के लिए सुलभ बनाना है। विभिन्न मंत्रालय और सरकारी एजेंसियां AI आधारित तकनीकों का उपयोग प्रशासन, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और नागरिक सेवाओं में बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रही हैं। सरकार का मानना है कि AI और डिजिटल तकनीकों के व्यापक उपयोग से सरकारी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन, निर्णय प्रक्रिया में सुधार और नागरिकों तक सेवाओं की तेज़ पहुंच सुनिश्चित की जा सकती है। किन क्षेत्रों में होगा AI का उपयोग? सरकारी परियोजनाओं के तहत AI का उपयोग कई प्रमुख क्षेत्रों में किया जा रहा है— डिजिटल गवर्नेंस को मिलेगा नया आयाम सरकार विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्मों को आपस में जोड़कर नागरिकों को अधिक प्रभावी सेवाएं उपलब्ध कराने पर काम कर रही है। ऑनलाइन प्रमाणपत्र, डिजिटल पहचान, ई-ऑफिस, डिजिटल भुगतान और AI आधारित शिकायत निवारण जैसी सेवाओं को और मजबूत बनाने की दिशा में प्रयास जारी हैं। स्टार्टअप और उद्योग को भी मिलेगा लाभ AI परियोजनाओं के विस्तार से भारतीय स्टार्टअप, आईटी कंपनियों और टेक उद्योग के लिए नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। सरकार अनुसंधान, नवाचार और स्वदेशी AI समाधान विकसित करने के लिए उद्योग एवं शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ा रही है। विशेषज्ञों की राय तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि AI का जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ उपयोग किया जाए, तो इससे सरकारी कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी बन सकती है। हालांकि इसके साथ डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और नैतिक उपयोग जैसे मुद्दों पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक होगा। निष्कर्ष AI और डिजिटल गवर्नेंस पर सरकार का बढ़ता फोकस भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था को नई दिशा देने की कोशिश है। आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं से नागरिक सेवाओं में सुधार, प्रशासनिक दक्षता और तकनीकी नवाचार को नई गति मिलने की उम्मीद है। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | IndiaAI Mission | PIB जय राष्ट्र न्यूज़

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MeitY ने स्वदेशी तकनीक और डिजिटल नवाचार को बढ़ावा देने के लिए नए अपडेट जारी, AI और सेमीकंडक्टर मिशन पर जोर

नई दिल्ली: इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने आज देश में स्वदेशी तकनीक, डिजिटल नवाचार और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को गति देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण अपडेट जारी किए। मंत्रालय ने कहा कि भारत को डिजिटल प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा और उभरती तकनीकों में वैश्विक नेतृत्व दिलाने के लिए नई पहलों पर तेजी से काम किया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य देश को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाना और घरेलू उद्योगों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। AI और डिजिटल इंडिया मिशन पर विशेष फोकस MeitY ने बताया कि IndiaAI Mission के तहत देशभर में AI आधारित अनुसंधान, स्टार्टअप, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और कौशल विकास को मजबूत किया जा रहा है। मंत्रालय का लक्ष्य सरकारी सेवाओं, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और उद्योगों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के व्यापक उपयोग को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही डिजिटल इंडिया अभियान के अंतर्गत नागरिक सेवाओं को और अधिक सुरक्षित, तेज और पारदर्शी बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। स्वदेशी चिप और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को मिलेगा बढ़ावा मंत्रालय ने कहा कि भारत में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न परियोजनाओं पर काम जारी है। स्वदेशी प्रोसेसर, एम्बेडेड सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर के विकास को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो और घरेलू उद्योग को नई गति मिले। स्टार्टअप और इनोवेशन इकोसिस्टम को समर्थन MeitY ने नवाचार आधारित स्टार्टअप, डीप-टेक कंपनियों और अनुसंधान संस्थानों के लिए सहयोग बढ़ाने की बात कही है। मंत्रालय के अनुसार, नई तकनीकों के विकास, परीक्षण और व्यावसायीकरण के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से वित्तीय एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इससे रोजगार सृजन और तकनीकी उद्यमिता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साइबर सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने पर भी मंत्रालय ने जोर दिया है। सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म, डिजिटल भुगतान प्रणाली और महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना (Critical Information Infrastructure) की सुरक्षा के लिए उन्नत सुरक्षा उपाय लागू किए जा रहे हैं। साथ ही नागरिकों को साइबर धोखाधड़ी से बचाने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का विस्तार MeitY ने कहा कि भारत की Digital Public Infrastructure (DPI) को और मजबूत बनाने के लिए कई नई परियोजनाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं। डिजिटल पहचान, ऑनलाइन सेवाएं, क्लाउड प्लेटफॉर्म और सुरक्षित डेटा प्रबंधन के क्षेत्र में भी नई तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों की राय तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि AI, सेमीकंडक्टर और डिजिटल अवसंरचना में निवेश से भारत वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है। इससे घरेलू उद्योग, स्टार्टअप और अनुसंधान संस्थानों को भी दीर्घकालिक लाभ मिलने की संभावना है। निष्कर्ष MeitY की नई पहलें भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं। AI, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा और डिजिटल नवाचार पर बढ़ते निवेश से आने वाले वर्षों में देश के डिजिटल इकोसिस्टम, रोजगार और आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। Source: इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार। Original Report: MeitY द्वारा जारी आधिकारिक अपडेट और डिजिटल प्रौद्योगिकी संबंधी घोषणाओं के आधार पर तैयार। जय राष्ट्र न्यूज़

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AI क्रांति में मानव-केंद्रित दृष्टिकोण पर केंद्र सरकार का जोर

नई दिल्ली, 26 जून। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत का AI विकास मॉडल मानव-केंद्रित, सुरक्षित और जिम्मेदार होगा। सरकार का कहना है कि AI का उपयोग केवल तकनीकी प्रगति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाना, सार्वजनिक सेवाओं को सशक्त करना और समावेशी विकास को बढ़ावा देना है। मानव हितों को प्राथमिकता देने पर जोर सरकार ने कहा कि AI आधारित तकनीकों का विकास इस प्रकार किया जाना चाहिए कि वे मानव अधिकारों, गोपनीयता, पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों के अनुरूप हों। नीति निर्माताओं का मानना है कि तकनीक तभी सफल मानी जाएगी जब उसका लाभ समाज के हर वर्ग तक समान रूप से पहुंचे। डिजिटल इंडिया मिशन को मिलेगी मजबूती विशेषज्ञों का मानना है कि AI का प्रभावी उपयोग डिजिटल इंडिया, स्मार्ट गवर्नेंस और डिजिटल सार्वजनिक सेवाओं को नई दिशा देगा। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, परिवहन और न्यायिक व्यवस्था जैसे क्षेत्रों में AI आधारित समाधान विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे सेवाओं की गुणवत्ता और दक्षता में सुधार हो सके। AI नवाचार और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन सरकार AI अनुसंधान, नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में भी लगातार काम कर रही है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से अनुसंधान संस्थानों, उद्योगों और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे भारत को वैश्विक AI नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। जिम्मेदार AI के लिए नीति निर्माण विशेषज्ञों का कहना है कि AI के बढ़ते उपयोग के साथ डेटा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, एल्गोरिद्मिक पारदर्शिता और नैतिक मानकों का पालन बेहद आवश्यक है। सरकार इन पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जिम्मेदार AI के लिए आवश्यक नीति और नियामक ढांचे को मजबूत करने पर भी काम कर रही है। रोजगार और कौशल विकास पर फोकस AI तकनीक के विस्तार के साथ नए रोजगार अवसर भी तेजी से उभर रहे हैं। सरकार ने युवाओं के लिए AI, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था में कुशल मानव संसाधन सबसे बड़ी ताकत होंगे। वैश्विक AI नेतृत्व की दिशा में भारत तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार भारत तेजी से AI क्षेत्र में अपनी वैश्विक पहचान मजबूत कर रहा है। मजबूत डिजिटल अवसंरचना, विशाल प्रतिभा आधार और सरकारी पहलों के कारण भारत AI आधारित नवाचार का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। सरकार का लक्ष्य ऐसी AI व्यवस्था विकसित करना है जो आर्थिक विकास के साथ-साथ सामाजिक कल्याण को भी समान महत्व दे। AI के क्षेत्र में भारत की रणनीति का मुख्य उद्देश्य तकनीक और मानव मूल्यों के बीच संतुलन बनाए रखना है। सरकार का मानना है कि जिम्मेदार और मानव-केंद्रित AI ही भविष्य के डिजिटल भारत की मजबूत नींव साबित होगा। स्रोत:इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार एवं सार्वजनिक नीति संबंधी जानकारी मूल रिपोर्ट:केंद्र सरकार के सार्वजनिक वक्तव्यों, AI नीति दस्तावेजों तथा विभिन्न राष्ट्रीय समाचार स्रोतों के आधार पर जय राष्ट्र न्यूज़

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Bharat Innovates 2026 में AI, डीप-टेक और भारतीय स्टार्टअप्स की नवाचार क्षमता का प्रदर्शन

Bharat Innovates 2026 में AI, डीप-टेक और स्टार्टअप्स की ताकत दिखाएगा भारत

जय राष्ट्र न्यूज़ पर ताजा टेक्नोलॉजी अपडेट दिनांक: 14 जून 2026 मुख्य समाचार नीस (फ्रांस): Bharat Innovates 2026 के मंच पर भारत अपनी तकनीकी क्षमता, नवाचार शक्ति और तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम का वैश्विक प्रदर्शन करने जा रहा है। इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डीप-टेक, क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और उभरती तकनीकों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। कार्यक्रम में दुनिया भर के निवेशक, उद्योगपति, तकनीकी विशेषज्ञ, नीति निर्माता और स्टार्टअप संस्थापक शामिल हो रहे हैं। भारत इस मंच के जरिए वैश्विक तकनीकी नेतृत्व में अपनी बढ़ती भूमिका को प्रदर्शित करेगा। AI सेक्टर में भारत की बढ़ती ताकत नीस: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भारत के सबसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में शामिल है। देश में AI आधारित स्टार्टअप्स, अनुसंधान संस्थानों और तकनीकी कंपनियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, वित्त और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में AI तकनीक भारत की उत्पादकता और आर्थिक विकास को नई दिशा दे सकती है। डीप-टेक स्टार्टअप्स पर दुनिया की नजर नीस: Bharat Innovates 2026 में डीप-टेक स्टार्टअप्स विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे। क्वांटम कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर डिजाइन, अंतरिक्ष तकनीक और एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में भारतीय कंपनियां अपने नवाचार प्रस्तुत करेंगी। विश्लेषकों का कहना है कि भारत का डीप-टेक इकोसिस्टम तेजी से वैश्विक निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। स्टार्टअप इंडिया को मिलेगा वैश्विक मंच नई दिल्ली: भारत दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में शामिल हो चुका है। Bharat Innovates 2026 भारतीय उद्यमियों को वैश्विक निवेशकों और तकनीकी कंपनियों के साथ जुड़ने का अवसर प्रदान करेगा। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस आयोजन से नए निवेश, साझेदारी और तकनीकी सहयोग के अवसर बढ़ सकते हैं। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगा आकर्षण नीस: भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल भी कार्यक्रम में प्रमुख विषयों में शामिल रहेगा। डिजिटल भुगतान, पहचान प्रणाली और डिजिटल सेवाओं में भारत के अनुभव को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का डिजिटल मॉडल कई देशों के लिए अध्ययन का विषय बन चुका है। रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा नई दिल्ली: AI और डीप-टेक क्षेत्र में बढ़ते निवेश से रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इन क्षेत्रों में लाखों उच्च-कौशल वाली नौकरियां सृजित हो सकती हैं। इसके साथ ही विदेशी निवेश और तकनीकी सहयोग से भारतीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलने की संभावना है। वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की ओर भारत नीस: Bharat Innovates 2026 को भारत की तकनीकी और नवाचार यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। कार्यक्रम के माध्यम से भारत यह संदेश देने की कोशिश करेगा कि वह केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक नवाचार का एक प्रमुख केंद्र बन रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI, डीप-टेक और स्टार्टअप क्षेत्र में भारत की उपलब्धियां आने वाले वर्षों में वैश्विक तकनीकी परिदृश्य को प्रभावित कर सकती हैं। निष्कर्ष नीस: Bharat Innovates 2026 भारत के लिए अपनी तकनीकी शक्ति, नवाचार क्षमता और स्टार्टअप इकोसिस्टम को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का बड़ा अवसर है। AI, डीप-टेक और डिजिटल नवाचार पर केंद्रित यह आयोजन भारत को तकनीकी नेतृत्व की दिशा में और मजबूती प्रदान कर सकता है। दुनिया भर के निवेशकों और विशेषज्ञों की नजर अब इस महत्वपूर्ण आयोजन पर टिकी हुई है। जय राष्ट्र न्यूज़ के साथ जुड़े रहें टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप और डिजिटल दुनिया की हर बड़ी खबर के लिए।

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