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Private-Sector Push पर ISRO की सफाई—‘हमारी भूमिका कम नहीं होगी, यह Privatisation नहीं Ecosystem Expansion है’

नई दिल्ली, 7 सितंबर 2026: भारत के space sector में private companies की बढ़ती भागीदारी को लेकर कर्मचारियों की चिंताओं के बीच Indian Space Research Organisation (ISRO) ने स्पष्ट किया है कि agency का निजीकरण करने या उसकी भूमिका कम करने की कोई योजना नहीं है। ISRO ने कहा कि space-sector reforms का उद्देश्य एक बड़ा और ज्यादा competitive national space ecosystem तैयार करना है, जिसमें private industry ISRO की capabilities को complement करेगी। ‘ISRO का न तो Privatisation होगा, न Importance कम होगी’ ISRO ने अपने official statement में कहा कि ऐसी अटकलें पूरी तरह गलत हैं कि agency को privatise किया जा रहा है या उसकी जिम्मेदारियां सीमित की जाएंगी। Agency ने स्पष्ट किया कि वह advanced space research, technology development, national और strategic missions, space science, exploration तथा critical frontier capabilities में भारत की प्रमुख संस्था बनी रहेगी। Private Sector का काम ISRO को Replace करना नहीं ISRO के मुताबिक private-sector participation का उद्देश्य उसकी भूमिका कम करना नहीं, बल्कि mature technologies को industry के जरिए बड़े पैमाने पर manufacture और commercialise करना है। इससे ISRO के वैज्ञानिक और technical teams को next-generation technologies, advanced research और complex national missions पर ज्यादा ध्यान देने का अवसर मिलेगा। ‘Ecosystem Expansion and Capability Multiplication’ ISRO ने साफ कहा कि reforms को privatisation नहीं, बल्कि ecosystem expansion और capability multiplication के रूप में देखा जाना चाहिए। 2020 से शुरू हुए space-sector reforms और Indian Space Policy 2023 के तहत startups, private industry और academia को launch vehicles, satellites, propulsion, communication और space applications जैसे क्षेत्रों में ज्यादा भागीदारी दी जा रही है। कर्मचारियों के Letter के बाद आई सफाई यह clarification तब आया जब ISRO के विभिन्न centres से जुड़े नौ employee associations ने Chairman V. Narayanan को पत्र लिखकर private-sector shift पर written clarity मांगी थी। कर्मचारियों ने सवाल उठाया था कि अगर rockets और satellites की mature manufacturing private industry को transfer होती है, तो भविष्य में ISRO की core role, recruitment और workforce पर क्या असर पड़ेगा। IN-SPACe Chief ने भी दिया भरोसा IN-SPACe Chairman Pawan Goenka ने भी कर्मचारियों की चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ISRO भारत के space sector का “bedrock” बना रहेगा। उन्होंने कहा कि ISRO frontier research, next-generation missions, strategic capabilities और advanced technology development में central role निभाता रहेगा, जबकि private industry mature systems की manufacturing और scaling में बड़ी भूमिका निभाएगी। 2030 तक 50 Launches सालाना का लक्ष्य Pawan Goenka के मुताबिक भारत का लक्ष्य 2030 तक सालाना 50 space launches करने का है। इतने बड़े scale को सिर्फ एक organisation के जरिए हासिल करना मुश्किल होगा, इसलिए government agencies और private companies दोनों को मिलकर काम करना होगा। Gaganyaan और Bharatiya Antariksh Station पर रहेगा ISRO का Focus ISRO का कहना है कि उसका focus आने वाले वर्षों में human spaceflight, next-generation launch systems, deep-space और planetary missions जैसी advanced capabilities पर और मजबूत होगा। इनमें Gaganyaan, 2035 तक प्रस्तावित Bharatiya Antariksh Station, 2040 तक Indian crewed Moon mission और sustained lunar तथा planetary exploration जैसे बड़े programmes शामिल हैं। Critical Space Infrastructure सरकार के Control में रहेगा ISRO ने यह भी स्पष्ट किया कि strategic और nationally critical space infrastructure का ownership और control सरकार के पास ही रहेगा। Private companies को जहां उपयुक्त होगा वहां operations और services में भागीदारी दी जाएगी, लेकिन national security और safety requirements लागू रहेंगी। 450 से ज्यादा Space Startups ISRO के मुताबिक 2020 में भारत में केवल कुछ ही space startups थे, लेकिन अब इनकी संख्या 450 से ज्यादा हो चुकी है। ये कंपनियां launch vehicles, satellites, propulsion, Earth observation और communication जैसे क्षेत्रों में काम कर रही हैं। ISRO का संदेश साफ है कि आने वाले वर्षों में private sector की भूमिका बढ़ेगी, लेकिन इसका मतलब agency को छोटा करना नहीं है। नई व्यवस्था में ISRO advanced science और frontier missions को lead करेगा, जबकि industry mature technologies को बड़े scale पर आगे बढ़ाएगी। source – ISRO / The Indian Expressजय राष्ट्र न्यूज़

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भारत के निजी स्पेस सेक्टर में Vikram-1 मिशन बना सबसे बड़ा टेक्नोलॉजी अपडेट, अंतरिक्ष उद्योग को नई दिशा मिलने की उम्मीद

नई दिल्ली: भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से वैश्विक पहचान बना रहा है और इसी कड़ी में Skyroot Aerospace का Vikram-1 मिशन सबसे बड़े तकनीकी अपडेट के रूप में चर्चा में है। यह मिशन केवल एक रॉकेट लॉन्च तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के निजी स्पेस इकोसिस्टम, स्वदेशी तकनीक, स्टार्टअप इनोवेशन और अंतरराष्ट्रीय स्पेस मार्केट में देश की बढ़ती भागीदारी का प्रतीक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि Vikram-1 मिशन अपने निर्धारित उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा करता है, तो भारत निजी ऑर्बिटल लॉन्च सेवाओं के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है। इससे देश की स्पेस इकोनॉमी को भी महत्वपूर्ण गति मिलने की उम्मीद है। क्या है Vikram-1 मिशन? Vikram-1, हैदराबाद स्थित निजी स्पेस स्टार्टअप Skyroot Aerospace द्वारा विकसित एक ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है। इसे छोटे और मध्यम आकार के उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में स्थापित करने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है। इस रॉकेट में आधुनिक कंपोजिट सामग्री, उन्नत प्रणोदन (Propulsion) तकनीक और कई स्वदेशी इंजीनियरिंग समाधान शामिल किए गए हैं। कंपनी का उद्देश्य वैश्विक ग्राहकों को कम लागत और तेज़ लॉन्च सेवाएं उपलब्ध कराना है। भारत के लिए क्यों है ऐतिहासिक? भारत लंबे समय से ISRO की उपलब्धियों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। लेकिन अब निजी कंपनियां भी अंतरिक्ष क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। Vikram-1 मिशन की सफलता से— ISRO और निजी क्षेत्र का सहयोग भारत सरकार द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के बाद ISRO, IN-SPACe और NSIL जैसी संस्थाएं निजी कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रही हैं। इस नीति का उद्देश्य अनुसंधान, नवाचार, तकनीकी विकास और व्यावसायिक स्पेस सेवाओं को बढ़ावा देना है। Skyroot Aerospace इसी बदलते स्पेस इकोसिस्टम का प्रमुख उदाहरण बनकर उभरा है। निजी स्पेस सेक्टर को कैसे मिलेगा लाभ? विशेषज्ञों का कहना है कि Vikram-1 मिशन की सफलता से— वैश्विक स्पेस मार्केट में भारत की बढ़ती भूमिका दुनिया भर में छोटे उपग्रहों की मांग लगातार बढ़ रही है। संचार, मौसम पूर्वानुमान, पृथ्वी अवलोकन, कृषि, रक्षा और इंटरनेट सेवाओं के लिए बड़ी संख्या में छोटे सैटेलाइट लॉन्च किए जा रहे हैं। ऐसे में कम लागत और विश्वसनीय लॉन्च सेवाएं देने वाले देशों की मांग भी बढ़ रही है। यदि भारत इस क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित करता है, तो वैश्विक स्पेस मार्केट में उसकी प्रतिस्पर्धा और मजबूत हो सकती है। स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिलेगा बढ़ावा Vikram-1 मिशन केवल एक कंपनी की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए प्रेरणा माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार इस मिशन से— आगे की राह Skyroot Aerospace भविष्य में अधिक क्षमता वाले लॉन्च व्हीकल विकसित करने और नियमित व्यावसायिक लॉन्च सेवाएं शुरू करने की दिशा में भी काम कर रही है। यदि यह मिशन सफल रहता है, तो भारत के निजी स्पेस सेक्टर के लिए नए अवसर खुल सकते हैं और वैश्विक स्पेस उद्योग में देश की भूमिका और मजबूत हो सकती है। निष्कर्ष Vikram-1 मिशन भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। यह मिशन केवल एक रॉकेट कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक क्षमता, स्टार्टअप नवाचार और वैश्विक स्पेस इकोनॉमी में बढ़ती भागीदारी का प्रतीक है। आने वाले वर्षों में ऐसे मिशन देश को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। Source: Skyroot Aerospace, ISRO, IN-SPACe की सार्वजनिक जानकारी एवं आधिकारिक घोषणाएं। Original Report: उपलब्ध सार्वजनिक और आधिकारिक सूचनाओं के आधार पर तैयार। जय राष्ट्र न्यूज़

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Vikram-1 क्या है? जानिए भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट और Skyroot Aerospace मिशन का महत्व

नई दिल्ली: भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है। हैदराबाद स्थित निजी स्पेस स्टार्टअप Skyroot Aerospace अपने पहले ऑर्बिटल रॉकेट Vikram-1 के साथ इतिहास रचने की तैयारी में है। यदि यह मिशन सफल रहता है, तो Skyroot भारत की पहली निजी कंपनी बन जाएगी जो स्वदेशी रूप से विकसित ऑर्बिटल रॉकेट के जरिए उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा (Orbit) में स्थापित करने का प्रयास करेगी। यह मिशन केवल एक रॉकेट लॉन्च नहीं, बल्कि भारत के तेजी से बढ़ते निजी अंतरिक्ष उद्योग की क्षमता का बड़ा प्रदर्शन भी माना जा रहा है। क्या है Vikram-1? Vikram-1 एक चार-चरण (Four-Stage) ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है जिसे छोटे और मध्यम आकार के उपग्रहों को लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित करने के लिए विकसित किया गया है। इसकी ऊंचाई लगभग सात मंजिला इमारत के बराबर है और इसे हल्के लेकिन मजबूत कार्बन-कॉम्पोजिट ढांचे से तैयार किया गया है। रॉकेट में Skyroot द्वारा विकसित स्वदेशी प्रणोदन (Propulsion) तकनीक और 3D-प्रिंटेड इंजन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है। ‘मिशन आगमन’ क्यों है खास? Skyroot ने अपने पहले ऑर्बिटल मिशन का नाम “Mission Aagaman” रखा है। यह मिशन मुख्य रूप से रॉकेट के सभी महत्वपूर्ण सिस्टम—जैसे स्टेज सेपरेशन, गाइडेंस, नेविगेशन और प्रोपल्शन—की वास्तविक अंतरिक्ष परिस्थितियों में जांच करेगा। इस परीक्षण से भविष्य के व्यावसायिक (Commercial) लॉन्च का रास्ता तैयार होगा। Skyroot Aerospace कौन है? Skyroot Aerospace की स्थापना वर्ष 2018 में ISRO के पूर्व वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने की थी। कंपनी का उद्देश्य कम लागत, तेज़ और विश्वसनीय सैटेलाइट लॉन्च सेवाएं उपलब्ध कराना है। वर्ष 2022 में Skyroot ने Vikram-S नामक भारत का पहला निजी सब-ऑर्बिटल रॉकेट सफलतापूर्वक लॉन्च किया था। अब Vikram-1 के माध्यम से कंपनी ऑर्बिटल लॉन्च क्षमता प्रदर्शित करना चाहती है। भारत के लिए यह मिशन क्यों महत्वपूर्ण है? Vikram-1 मिशन भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक है— ISRO और निजी क्षेत्र की साझेदारी हाल के वर्षों में भारत सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के बाद IN-SPACe और NSIL जैसे संस्थानों के माध्यम से सहयोग बढ़ाया है। इसी नीति का लाभ उठाकर Skyroot जैसी कंपनियां उभर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ISRO और निजी उद्योग मिलकर भारत को वैश्विक लॉन्च सेवाओं का प्रमुख केंद्र बना सकते हैं। वैश्विक स्पेस मार्केट में भारत की भूमिका दुनिया भर में छोटे उपग्रहों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में कम लागत और तेज़ लॉन्च सेवाएं देने वाली कंपनियों की मांग भी बढ़ रही है। Vikram-1 की सफलता भारत को इस वैश्विक बाजार में मजबूत स्थिति दिला सकती है और विदेशी ग्राहकों को आकर्षित कर सकती है। भविष्य की योजनाएं Skyroot केवल Vikram-1 तक सीमित नहीं है। कंपनी भविष्य में Vikram-2 और Vikram-3 जैसे अधिक क्षमता वाले लॉन्च व्हीकल विकसित करने की योजना पर भी काम कर रही है। इसके अलावा पुन: प्रयोज्य (Reusable) तकनीकों और नियमित व्यावसायिक लॉन्च सेवाओं पर भी कंपनी का फोकस है। निष्कर्ष Vikram-1 केवल एक रॉकेट नहीं, बल्कि भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग की नई उड़ान का प्रतीक है। इस मिशन की सफलता देश के स्पेस स्टार्टअप इकोसिस्टम, वैज्ञानिक नवाचार और वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में भारत की भूमिका को नई ऊंचाई दे सकती है। आने वाले वर्षों में ऐसे मिशन भारत को दुनिया के प्रमुख स्पेस लॉन्च हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। Source: Skyroot Aerospace, IN-SPACe, ISRO से संबंधित सार्वजनिक जानकारी एवं विश्वसनीय मीडिया रिपोर्ट। Original Report: आधिकारिक घोषणाओं और उपलब्ध सार्वजनिक सूचनाओं के आधार पर तैयार। जय राष्ट्र न्यूज़

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