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Private-Sector Push पर ISRO की सफाई—‘हमारी भूमिका कम नहीं होगी, यह Privatisation नहीं Ecosystem Expansion है’

नई दिल्ली, 7 सितंबर 2026: भारत के space sector में private companies की बढ़ती भागीदारी को लेकर कर्मचारियों की चिंताओं के बीच Indian Space Research Organisation (ISRO) ने स्पष्ट किया है कि agency का निजीकरण करने या उसकी भूमिका कम करने की कोई योजना नहीं है। ISRO ने कहा कि space-sector reforms का उद्देश्य एक बड़ा और ज्यादा competitive national space ecosystem तैयार करना है, जिसमें private industry ISRO की capabilities को complement करेगी। ‘ISRO का न तो Privatisation होगा, न Importance कम होगी’ ISRO ने अपने official statement में कहा कि ऐसी अटकलें पूरी तरह गलत हैं कि agency को privatise किया जा रहा है या उसकी जिम्मेदारियां सीमित की जाएंगी। Agency ने स्पष्ट किया कि वह advanced space research, technology development, national और strategic missions, space science, exploration तथा critical frontier capabilities में भारत की प्रमुख संस्था बनी रहेगी। Private Sector का काम ISRO को Replace करना नहीं ISRO के मुताबिक private-sector participation का उद्देश्य उसकी भूमिका कम करना नहीं, बल्कि mature technologies को industry के जरिए बड़े पैमाने पर manufacture और commercialise करना है। इससे ISRO के वैज्ञानिक और technical teams को next-generation technologies, advanced research और complex national missions पर ज्यादा ध्यान देने का अवसर मिलेगा। ‘Ecosystem Expansion and Capability Multiplication’ ISRO ने साफ कहा कि reforms को privatisation नहीं, बल्कि ecosystem expansion और capability multiplication के रूप में देखा जाना चाहिए। 2020 से शुरू हुए space-sector reforms और Indian Space Policy 2023 के तहत startups, private industry और academia को launch vehicles, satellites, propulsion, communication और space applications जैसे क्षेत्रों में ज्यादा भागीदारी दी जा रही है। कर्मचारियों के Letter के बाद आई सफाई यह clarification तब आया जब ISRO के विभिन्न centres से जुड़े नौ employee associations ने Chairman V. Narayanan को पत्र लिखकर private-sector shift पर written clarity मांगी थी। कर्मचारियों ने सवाल उठाया था कि अगर rockets और satellites की mature manufacturing private industry को transfer होती है, तो भविष्य में ISRO की core role, recruitment और workforce पर क्या असर पड़ेगा। IN-SPACe Chief ने भी दिया भरोसा IN-SPACe Chairman Pawan Goenka ने भी कर्मचारियों की चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ISRO भारत के space sector का “bedrock” बना रहेगा। उन्होंने कहा कि ISRO frontier research, next-generation missions, strategic capabilities और advanced technology development में central role निभाता रहेगा, जबकि private industry mature systems की manufacturing और scaling में बड़ी भूमिका निभाएगी। 2030 तक 50 Launches सालाना का लक्ष्य Pawan Goenka के मुताबिक भारत का लक्ष्य 2030 तक सालाना 50 space launches करने का है। इतने बड़े scale को सिर्फ एक organisation के जरिए हासिल करना मुश्किल होगा, इसलिए government agencies और private companies दोनों को मिलकर काम करना होगा। Gaganyaan और Bharatiya Antariksh Station पर रहेगा ISRO का Focus ISRO का कहना है कि उसका focus आने वाले वर्षों में human spaceflight, next-generation launch systems, deep-space और planetary missions जैसी advanced capabilities पर और मजबूत होगा। इनमें Gaganyaan, 2035 तक प्रस्तावित Bharatiya Antariksh Station, 2040 तक Indian crewed Moon mission और sustained lunar तथा planetary exploration जैसे बड़े programmes शामिल हैं। Critical Space Infrastructure सरकार के Control में रहेगा ISRO ने यह भी स्पष्ट किया कि strategic और nationally critical space infrastructure का ownership और control सरकार के पास ही रहेगा। Private companies को जहां उपयुक्त होगा वहां operations और services में भागीदारी दी जाएगी, लेकिन national security और safety requirements लागू रहेंगी। 450 से ज्यादा Space Startups ISRO के मुताबिक 2020 में भारत में केवल कुछ ही space startups थे, लेकिन अब इनकी संख्या 450 से ज्यादा हो चुकी है। ये कंपनियां launch vehicles, satellites, propulsion, Earth observation और communication जैसे क्षेत्रों में काम कर रही हैं। ISRO का संदेश साफ है कि आने वाले वर्षों में private sector की भूमिका बढ़ेगी, लेकिन इसका मतलब agency को छोटा करना नहीं है। नई व्यवस्था में ISRO advanced science और frontier missions को lead करेगा, जबकि industry mature technologies को बड़े scale पर आगे बढ़ाएगी। source – ISRO / The Indian Expressजय राष्ट्र न्यूज़

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ISRO कर्मचारियों ने Private-Sector Push पर मांगी सफाई, Rocket और Satellite Manufacturing के भविष्य पर उठाए सवाल

नई दिल्ली, 6 सितंबर 2026: भारत के space sector में private companies की बढ़ती भूमिका के बीच ISRO के कई कर्मचारी संगठनों ने agency के भविष्य को लेकर सवाल उठाए हैं। नौ employee associations ने ISRO Chairman और Department of Space Secretary V. Narayanan को संयुक्त पत्र लिखकर यह स्पष्ट करने की मांग की है कि rockets, satellites और launch infrastructure से जुड़ी ISRO की मौजूदा जिम्मेदारियों का भविष्य क्या होगा। करीब 5,000 कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व पांच पन्नों के इस joint representation पर ISRO के अलग-अलग centres से जुड़े नौ employee associations के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए हैं। इनमें VSSC, SDSC, URSC, LPSC, SAC, NRSC और IPRC जैसे महत्वपूर्ण centres शामिल हैं। ये संगठन करीब 5,000 कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो ISRO की कुल workforce का लगभग 27% है। Private Companies से नहीं, ISRO की भूमिका घटने से चिंता कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट किया है कि वे private companies की भागीदारी या space sector के commercialisation के खिलाफ नहीं हैं। उनकी मुख्य चिंता यह है कि कहीं ISRO की अपनी rocket manufacturing, satellite production, testing और launch operations capabilities धीरे-धीरे private sector या PSUs को transfer न हो जाएं। PSLV, LVM3 और SSLV को लेकर सवाल कर्मचारियों ने खास तौर पर PSLV, LVM3 और SSLV जैसे launch vehicles का जिक्र किया है। SSLV technology और production capability HAL को transfer की जा चुकी है, जबकि LVM3 और PSLV से जुड़ी technology transfer तथा private production की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। Associations ने पूछा है कि भविष्य में इन rockets के design, development और manufacturing में ISRO की भूमिका कितनी रहेगी। Satellite Manufacturing पर भी चिंता पत्र में routine satellite manufacturing के भविष्य को लेकर भी clarification मांगी गई है। कर्मचारियों को आशंका है कि यदि satellites और launch vehicles की actual production बड़े स्तर पर बाहर चली गई तो ISRO मुख्य रूप से research और advanced technology development तक सीमित हो सकता है। Recruitment और Promotions पर पड़ सकता है असर Employee associations ने चेतावनी दी है कि core activities के outsourcing से ISRO के भीतर उपलब्ध technical work कम हो सकता है। इससे भविष्य में recruitment, promotions, skill development और career opportunities प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। ISRO में पहले से हजारों पद खाली इस चिंता के बीच government data के मुताबिक फरवरी 2026 तक ISRO में 18,142 sanctioned posts के मुकाबले 15,529 कर्मचारी कार्यरत थे। यानी करीब 14.4% पद खाली थे। Employee groups का कहना है कि outsourcing बढ़ने से regular recruitment और कम हो सकती है। ‘Residual R&D Boutique’ बनने की आशंका Joint representation में कर्मचारी संगठनों ने चिंता जताई कि ISRO को केवल एक सीमित research-and-development organisation में बदलना उचित नहीं होगा, जबकि launch vehicles की actual manufacturing और launch infrastructure का operation दूसरे entities के पास चला जाए। उन्होंने policy changes से पहले कर्मचारियों के साथ structured consultation की मांग की है। V. Narayanan से Written Clarification की मांग Employee associations ने ISRO Chairman V. Narayanan से launch vehicles, satellites, infrastructure, staffing और recruitment से जुड़े भविष्य के roadmap पर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। फिलहाल ISRO या Department of Space की ओर से इस joint representation पर कोई विस्तृत public response सामने नहीं आया है। source – India Today / The Indian Express / Times of Indiaजय राष्ट्र न्यूज़

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ISRO ने EOS-05 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया, भारत का पहला Geosynchronous Imaging Satellite अंतरिक्ष में पहुंचा

श्रीहरिकोटा, 4 सितंबर 2026: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शुक्रवार तड़के GSLV-F17 के जरिए EOS-05 Earth Observation Satellite का सफल प्रक्षेपण किया। मिशन के बाद ISRO ने पुष्टि की कि EOS-05 को निर्धारित Sub-Geosynchronous Transfer Orbit में स्थापित कर दिया गया है। GSLV-F17 से हुआ प्रक्षेपण मिशन का प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित Satish Dhawan Space Centre के Second Launch Pad से किया गया। लॉन्च का निर्धारित समय सुबह 2:55 बजे IST था। GSLV-F17 भारत के Geosynchronous Satellite Launch Vehicle की 19वीं उड़ान है। निर्धारित कक्षा में पहुंचा EOS-05 ISRO के अनुसार GSLV-F17 ने EOS-05 को सफलतापूर्वक Sub-Geosynchronous Transfer Orbit में स्थापित किया। एजेंसी ने मिशन को सफल घोषित करते हुए कहा कि लॉन्च व्हीकल ने अपने निर्धारित उद्देश्य को पूरा किया। भारत के लिए क्यों खास है EOS-05 EOS-05 एक advanced Earth Observation spacecraft है। ISRO के मुताबिक यह भारत का पहला imaging satellite है जिसे Geosynchronous orbit से Earth observation के लिए विकसित किया गया है। Earth Observation क्षमता को मिलेगा बढ़ावा EOS-05 का मुख्य उद्देश्य पृथ्वी का अवलोकन करना है। Geosynchronous orbit आधारित imaging capability भारत की Earth observation infrastructure में एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि मानी जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने ISRO को दी बधाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिशन की सफलता पर ISRO की टीम को बधाई दी और इसे देश के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने EOS-05 मिशन को भारत के space sector की बढ़ती तकनीकी क्षमता और innovation का उदाहरण बताया। source – ISROजय राष्ट्र न्यूज़

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National Space Day पर PM Modi ने Space Startups के CEOs से संवाद किया साझा, मजबूत ecosystem बनाने पर जोर

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 23 अगस्त 2026 को National Space Day के मौके पर देशवासियों और वैज्ञानिकों को शुभकामनाएं देते हुए भारत के तेजी से बढ़ते अंतरिक्ष क्षेत्र को भविष्य की अर्थव्यवस्था और विकसित भारत के लिए महत्वपूर्ण बताया। प्रधानमंत्री ने Space Startups के CEOs और founders के साथ अपने हालिया संवाद को भी साझा किया और देश में ऐसा मजबूत space ecosystem तैयार करने पर जोर दिया, जो दुनिया भर की प्रतिभा, कंपनियों और निवेश को भारत की ओर आकर्षित कर सके। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के पास कम लागत में काम करने की क्षमता, गुणवत्तापूर्ण talent और जोखिम लेने की मजबूत क्षमता का ऐसा संयोजन है जो देश को वैश्विक space sector में तेजी से अग्रणी स्थान दिला सकता है। 21 अगस्त को 20 Space Startups के साथ हुई थी बैठक प्रधानमंत्री मोदी ने Space Startup CEOs और founders के साथ यह बैठक 21 अगस्त 2026 को Seva Teerth में की थी। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक बैठक में देश के 20 space startups के CEOs और founders शामिल हुए थे। ये कंपनियां rockets, reusable launch vehicles, satellites, advanced propulsion systems, space intelligence, space debris removal, weather और climate intelligence जैसी अलग-अलग technologies पर काम कर रही हैं। National Space Day पर इस interaction को फिर सामने लाते हुए प्रधानमंत्री ने भारत की private space industry की ambition और innovation की तारीफ की। PM Modi बोले—दुनिया Space के लिए भारत की ओर देखे Space Startup leaders के साथ बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश को ऐसा ecosystem बनाना चाहिए कि जब दुनिया अंतरिक्ष क्षेत्र के बारे में सोचे तो उसकी नजर भारत की ओर जाए। उन्होंने startups से अपने प्रयासों में consistency बनाए रखने की अपील की और कहा कि सरकार की policies में निरंतरता होने से entrepreneurs को जोखिम लेने का भरोसा मिलता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ऐसा environment तैयार कर सकता है जहां दुनिया भर के talented professionals अपने career और भविष्य के लिए Indian space sector को पसंद करें। Global Talent और Investment को आकर्षित करने पर जोर PM Modi ने कहा कि भारत के space sector में global talent, companies और investment को आकर्षित करने की क्षमता है। उनके मुताबिक भारत cost के मामले में highly competitive है और यहां quality talent के साथ risk-taking क्षमता भी मौजूद है। यही combination भारत को international space market में तेजी से मजबूत स्थिति दिला सकता है। Private companies के लिए space sector खोलने के बाद पिछले कुछ वर्षों में भारतीय startups की संख्या और गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। कई कंपनियां satellite manufacturing से लेकर launch systems और earth observation तक अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही हैं। Agriculture से Environment तक Space Technology का इस्तेमाल प्रधानमंत्री ने startups से space technology को केवल rockets और satellites तक सीमित न रखने की बात कही। उन्होंने कंपनियों से विचार करने को कहा कि उनकी technology का इस्तेमाल: में कैसे किया जा सकता है। PM Modi ने उदाहरण दिया कि agriculture से जुड़ी space technology कंपनियां agricultural universities और departments के साथ मिलकर किसानों को बेहतर data और decision-making tools उपलब्ध करा सकती हैं। Atal Tinkering Labs से जुड़ने की सलाह प्रधानमंत्री ने Space Startups को Atal Tinkering Labs के साथ अधिक सहयोग करने की सलाह भी दी। उनका कहना है कि इससे school level पर ही बच्चों में space science, technology और innovation को लेकर curiosity पैदा की जा सकती है। प्रधानमंत्री ने युवा पीढ़ी को भारत के भविष्य के space missions और technologies से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया। इससे आने वाले वर्षों में scientists, engineers, designers और entrepreneurs की नई पीढ़ी तैयार करने में मदद मिल सकती है। National Space Day पर PM Modi का संदेश 23 अगस्त को National Space Day के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के जरिए देशवासियों और वैज्ञानिक समुदाय को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारत नई global व्यवस्था में लगातार अपने space sector का विस्तार कर रहा है और नई पीढ़ी के engineers, designers, coders और scientists नई technologies विकसित कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का संकल्प लिया है और इस लक्ष्य को हासिल करने में space sector की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने देश से अंतरिक्ष क्षेत्र में और बड़े सपने देखने, अधिक innovation करने और नई सीमाओं को पार करने का आह्वान किया। 23 अगस्त को ही क्यों मनाया जाता है National Space Day? भारत में हर साल 23 अगस्त को National Space Day मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 2023 में Chandrayaan-3 के Vikram Lander ने चंद्रमा की सतह पर सफल soft landing की थी। इसके बाद Pragyan Rover को चंद्रमा पर deploy किया गया था। भारत इस उपलब्धि के साथ चंद्रमा पर सफल soft landing करने वाला चौथा देश बना और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के पास उतरने वाला पहला देश बना। Chandrayaan-3 की सफलता के बाद 23 अगस्त को National Space Day के रूप में मनाने की घोषणा की गई थी। Private Space Sector में तेजी से बढ़ रहा भारत भारत सरकार ने वर्ष 2020 के बाद space sector को private participation के लिए बड़े स्तर पर खोलना शुरू किया। इसके बाद Skyroot Aerospace, Agnikul Cosmos, Pixxel, Dhruva Space, Bellatrix Aerospace, Digantara और कई अन्य startups ने launch vehicles, satellites और space technologies में तेजी से काम शुरू किया। 21 अगस्त की बैठक में इन कंपनियों समेत कुल 20 startups के representatives शामिल हुए थे। Startups ने प्रधानमंत्री को बताया कि Indian technologies को अपनाने में international companies की दिलचस्पी भी बढ़ रही है। Space में Pharmaceuticals Manufacturing तक की तैयारी प्रधानमंत्री के साथ interaction के दौरान कुछ startups ने अपनी futuristic technologies की जानकारी भी साझा की। एक startup representative ने ऐसी satellites विकसित करने की योजना का जिक्र किया जो space में जाकर pharmaceutical products manufacture कर सकें और उन्हें वापस पृथ्वी पर लाया जा सके। एक अन्य startup ने बताया कि उसे हालिया launch के बाद केवल एक महीने में आठ launch contracts मिले, जिनमें ज्यादातर international contracts हैं। ये developments दिखाती हैं कि Indian private space companies traditional satellite…

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Gujarat को मिल सकता है नया Spaceport, Kodinar को ‘गुजरात का Sriharikota’ बनाने की तैयारी

अहमदाबाद: गुजरात के अंतरिक्ष क्षेत्र को आने वाले वर्षों में बड़ी बढ़त मिल सकती है। राज्य के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा है कि सौराष्ट्र के कोडिनार के पास एक नए स्पेस लॉन्चिंग स्टेशन यानी Spaceport को स्थापित करने की दिशा में काम चल रहा है। अगर परियोजना तकनीकी मूल्यांकन और अन्य जरूरी मंजूरियों के बाद आगे बढ़ती है तो कोडिनार अंतरिक्ष अभियानों के लिहाज से गुजरात का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। Ahmedabad के Space Festival में हुआ जिक्र अर्जुन मोढवाडिया ने अहमदाबाद के Science City में आयोजित तीन दिवसीय Space Festival के शुभारंभ के दौरान इस परियोजना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में गुजरात तेजी से आगे बढ़ रहा है और सौराष्ट्र में कोडिनार के नजदीक नया लॉन्चिंग स्टेशन स्थापित करने पर काम किया जा रहा है। गुजरात में पहले से ही Ahmedabad में IN-SPACe का मुख्यालय मौजूद है और राज्य satellite manufacturing तथा space technology से जुड़े उद्योगों को प्रोत्साहित कर रहा है। अभी शुरुआती चरण में है परियोजना हालांकि, कोडिनार में Spaceport बनने को अभी पूरी तरह अंतिम और चालू परियोजना नहीं माना जाना चाहिए। गुजरात के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार यह परियोजना अभी शुरुआती चरण में है। प्रस्तावित स्थल का तकनीकी आकलन और मूल्यांकन ISRO के सहयोग से किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में लॉन्च के लिए जरूरी भौगोलिक स्थिति, सुरक्षा, समुद्र की दिशा, बुनियादी ढांचे और अन्य तकनीकी जरूरतों का अध्ययन किया जाना शामिल है। सभी specifications तय होने के बाद ही परियोजना के अगले चरण पर काम आगे बढ़ सकेगा। Kodinar ही क्यों? कोडिनार गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में अरब सागर के तट के पास स्थित है। समुद्र तट के करीब होने के कारण यह इलाका अंतरिक्ष लॉन्चिंग गतिविधियों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रॉकेट लॉन्च साइट के चयन में कई तकनीकी पहलुओं का ध्यान रखा जाता है। समुद्र की ओर खुला क्षेत्र होने से लॉन्च के दौरान आबादी वाले क्षेत्रों पर जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। इससे पहले भी गिर और कोडिनार के बीच के तटीय इलाके को गुजरात में space-related activities के लिए संभावित क्षेत्र के रूप में देखा गया था। Sriharikota है भारत का मुख्य Spaceport फिलहाल भारत का मुख्य अंतरिक्ष लॉन्च केंद्र आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित Satish Dhawan Space Centre है। यहीं से ISRO के कई प्रमुख रॉकेट और अंतरिक्ष मिशन लॉन्च किए जाते हैं। इसके अलावा तमिलनाडु के कुलसेकरपट्टिनम में भी नया लॉन्च कॉम्प्लेक्स विकसित किया जा रहा है। ऐसे में यदि कोडिनार की परियोजना सभी जरूरी परीक्षण और मंजूरियां हासिल कर लेती है तो यह भारत के बढ़ते space-launch infrastructure में एक और महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। Gujarat में तेजी से बढ़ रहा Space Ecosystem गुजरात पहले से ही भारत के space ecosystem में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। Ahmedabad में ISRO का Space Applications Centre (SAC) मौजूद है और IN-SPACe का मुख्यालय भी इसी शहर में है। राज्य सरकार space technology, satellite manufacturing और private space startups को आकर्षित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन देने की दिशा में भी काम कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार गुजरात में 20 से अधिक startups और organisations space technology के विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। अहमदाबाद के पास Khoraj में space-tech के लिए विशेष क्षेत्र की भी घोषणा की गई है। Dholera में भी दिखी Private Space Sector की सक्रियता गुजरात में private space sector की गतिविधियां भी बढ़ रही हैं। इस साल Dholera में एक startup की ओर से sounding rocket के परीक्षण की खबर सामने आई थी। इस तरह की गतिविधियां बताती हैं कि गुजरात satellite manufacturing से आगे बढ़कर launch technology और अन्य अंतरिक्ष सेवाओं के लिए भी ecosystem तैयार करने की कोशिश कर रहा है। अगर कोडिनार परियोजना जमीन पर उतरती है तो आसपास के क्षेत्र में infrastructure, research, engineering, manufacturing और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना भी बढ़ सकती है। पहले ISRO ने दी थी अहम सफाई यहां यह भी महत्वपूर्ण है कि जुलाई 2025 में ISRO ने गुजरात में किसी launch facility की साइट फाइनल होने संबंधी मीडिया रिपोर्टों पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण जारी किया था। उस समय ISRO ने कहा था कि गुजरात में किसी अंतरिक्ष स्टेशन या launch facility के लिए confirmed site की घोषणा नहीं की गई थी। अब अगस्त 2026 में गुजरात सरकार के मंत्री ने कोडिनार के पास लॉन्च स्टेशन पर काम चलने की बात कही है, जबकि राज्य के अधिकारियों के अनुसार साइट का तकनीकी मूल्यांकन अभी जारी है। इसलिए फिलहाल इसे प्रस्तावित और मूल्यांकनाधीन Spaceport परियोजना के रूप में देखना अधिक सही होगा। आने वाले समय में तकनीकी मूल्यांकन और आधिकारिक मंजूरियों के बाद यह साफ होगा कि कोडिनार वास्तव में भारत के अगले प्रमुख अंतरिक्ष लॉन्च केंद्र के रूप में विकसित होगा या नहीं। स्रोत – टाइम्स ऑफ इंडिया, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत के निजी स्पेस सेक्टर में Vikram-1 मिशन बना सबसे बड़ा टेक्नोलॉजी अपडेट, अंतरिक्ष उद्योग को नई दिशा मिलने की उम्मीद

नई दिल्ली: भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से वैश्विक पहचान बना रहा है और इसी कड़ी में Skyroot Aerospace का Vikram-1 मिशन सबसे बड़े तकनीकी अपडेट के रूप में चर्चा में है। यह मिशन केवल एक रॉकेट लॉन्च तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के निजी स्पेस इकोसिस्टम, स्वदेशी तकनीक, स्टार्टअप इनोवेशन और अंतरराष्ट्रीय स्पेस मार्केट में देश की बढ़ती भागीदारी का प्रतीक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि Vikram-1 मिशन अपने निर्धारित उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा करता है, तो भारत निजी ऑर्बिटल लॉन्च सेवाओं के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है। इससे देश की स्पेस इकोनॉमी को भी महत्वपूर्ण गति मिलने की उम्मीद है। क्या है Vikram-1 मिशन? Vikram-1, हैदराबाद स्थित निजी स्पेस स्टार्टअप Skyroot Aerospace द्वारा विकसित एक ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है। इसे छोटे और मध्यम आकार के उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में स्थापित करने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है। इस रॉकेट में आधुनिक कंपोजिट सामग्री, उन्नत प्रणोदन (Propulsion) तकनीक और कई स्वदेशी इंजीनियरिंग समाधान शामिल किए गए हैं। कंपनी का उद्देश्य वैश्विक ग्राहकों को कम लागत और तेज़ लॉन्च सेवाएं उपलब्ध कराना है। भारत के लिए क्यों है ऐतिहासिक? भारत लंबे समय से ISRO की उपलब्धियों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। लेकिन अब निजी कंपनियां भी अंतरिक्ष क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। Vikram-1 मिशन की सफलता से— ISRO और निजी क्षेत्र का सहयोग भारत सरकार द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के बाद ISRO, IN-SPACe और NSIL जैसी संस्थाएं निजी कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रही हैं। इस नीति का उद्देश्य अनुसंधान, नवाचार, तकनीकी विकास और व्यावसायिक स्पेस सेवाओं को बढ़ावा देना है। Skyroot Aerospace इसी बदलते स्पेस इकोसिस्टम का प्रमुख उदाहरण बनकर उभरा है। निजी स्पेस सेक्टर को कैसे मिलेगा लाभ? विशेषज्ञों का कहना है कि Vikram-1 मिशन की सफलता से— वैश्विक स्पेस मार्केट में भारत की बढ़ती भूमिका दुनिया भर में छोटे उपग्रहों की मांग लगातार बढ़ रही है। संचार, मौसम पूर्वानुमान, पृथ्वी अवलोकन, कृषि, रक्षा और इंटरनेट सेवाओं के लिए बड़ी संख्या में छोटे सैटेलाइट लॉन्च किए जा रहे हैं। ऐसे में कम लागत और विश्वसनीय लॉन्च सेवाएं देने वाले देशों की मांग भी बढ़ रही है। यदि भारत इस क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित करता है, तो वैश्विक स्पेस मार्केट में उसकी प्रतिस्पर्धा और मजबूत हो सकती है। स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिलेगा बढ़ावा Vikram-1 मिशन केवल एक कंपनी की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए प्रेरणा माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार इस मिशन से— आगे की राह Skyroot Aerospace भविष्य में अधिक क्षमता वाले लॉन्च व्हीकल विकसित करने और नियमित व्यावसायिक लॉन्च सेवाएं शुरू करने की दिशा में भी काम कर रही है। यदि यह मिशन सफल रहता है, तो भारत के निजी स्पेस सेक्टर के लिए नए अवसर खुल सकते हैं और वैश्विक स्पेस उद्योग में देश की भूमिका और मजबूत हो सकती है। निष्कर्ष Vikram-1 मिशन भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। यह मिशन केवल एक रॉकेट कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक क्षमता, स्टार्टअप नवाचार और वैश्विक स्पेस इकोनॉमी में बढ़ती भागीदारी का प्रतीक है। आने वाले वर्षों में ऐसे मिशन देश को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। Source: Skyroot Aerospace, ISRO, IN-SPACe की सार्वजनिक जानकारी एवं आधिकारिक घोषणाएं। Original Report: उपलब्ध सार्वजनिक और आधिकारिक सूचनाओं के आधार पर तैयार। जय राष्ट्र न्यूज़

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Vikram-1 क्या है? जानिए भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट और Skyroot Aerospace मिशन का महत्व

नई दिल्ली: भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है। हैदराबाद स्थित निजी स्पेस स्टार्टअप Skyroot Aerospace अपने पहले ऑर्बिटल रॉकेट Vikram-1 के साथ इतिहास रचने की तैयारी में है। यदि यह मिशन सफल रहता है, तो Skyroot भारत की पहली निजी कंपनी बन जाएगी जो स्वदेशी रूप से विकसित ऑर्बिटल रॉकेट के जरिए उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा (Orbit) में स्थापित करने का प्रयास करेगी। यह मिशन केवल एक रॉकेट लॉन्च नहीं, बल्कि भारत के तेजी से बढ़ते निजी अंतरिक्ष उद्योग की क्षमता का बड़ा प्रदर्शन भी माना जा रहा है। क्या है Vikram-1? Vikram-1 एक चार-चरण (Four-Stage) ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है जिसे छोटे और मध्यम आकार के उपग्रहों को लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित करने के लिए विकसित किया गया है। इसकी ऊंचाई लगभग सात मंजिला इमारत के बराबर है और इसे हल्के लेकिन मजबूत कार्बन-कॉम्पोजिट ढांचे से तैयार किया गया है। रॉकेट में Skyroot द्वारा विकसित स्वदेशी प्रणोदन (Propulsion) तकनीक और 3D-प्रिंटेड इंजन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है। ‘मिशन आगमन’ क्यों है खास? Skyroot ने अपने पहले ऑर्बिटल मिशन का नाम “Mission Aagaman” रखा है। यह मिशन मुख्य रूप से रॉकेट के सभी महत्वपूर्ण सिस्टम—जैसे स्टेज सेपरेशन, गाइडेंस, नेविगेशन और प्रोपल्शन—की वास्तविक अंतरिक्ष परिस्थितियों में जांच करेगा। इस परीक्षण से भविष्य के व्यावसायिक (Commercial) लॉन्च का रास्ता तैयार होगा। Skyroot Aerospace कौन है? Skyroot Aerospace की स्थापना वर्ष 2018 में ISRO के पूर्व वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने की थी। कंपनी का उद्देश्य कम लागत, तेज़ और विश्वसनीय सैटेलाइट लॉन्च सेवाएं उपलब्ध कराना है। वर्ष 2022 में Skyroot ने Vikram-S नामक भारत का पहला निजी सब-ऑर्बिटल रॉकेट सफलतापूर्वक लॉन्च किया था। अब Vikram-1 के माध्यम से कंपनी ऑर्बिटल लॉन्च क्षमता प्रदर्शित करना चाहती है। भारत के लिए यह मिशन क्यों महत्वपूर्ण है? Vikram-1 मिशन भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक है— ISRO और निजी क्षेत्र की साझेदारी हाल के वर्षों में भारत सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के बाद IN-SPACe और NSIL जैसे संस्थानों के माध्यम से सहयोग बढ़ाया है। इसी नीति का लाभ उठाकर Skyroot जैसी कंपनियां उभर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ISRO और निजी उद्योग मिलकर भारत को वैश्विक लॉन्च सेवाओं का प्रमुख केंद्र बना सकते हैं। वैश्विक स्पेस मार्केट में भारत की भूमिका दुनिया भर में छोटे उपग्रहों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में कम लागत और तेज़ लॉन्च सेवाएं देने वाली कंपनियों की मांग भी बढ़ रही है। Vikram-1 की सफलता भारत को इस वैश्विक बाजार में मजबूत स्थिति दिला सकती है और विदेशी ग्राहकों को आकर्षित कर सकती है। भविष्य की योजनाएं Skyroot केवल Vikram-1 तक सीमित नहीं है। कंपनी भविष्य में Vikram-2 और Vikram-3 जैसे अधिक क्षमता वाले लॉन्च व्हीकल विकसित करने की योजना पर भी काम कर रही है। इसके अलावा पुन: प्रयोज्य (Reusable) तकनीकों और नियमित व्यावसायिक लॉन्च सेवाओं पर भी कंपनी का फोकस है। निष्कर्ष Vikram-1 केवल एक रॉकेट नहीं, बल्कि भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग की नई उड़ान का प्रतीक है। इस मिशन की सफलता देश के स्पेस स्टार्टअप इकोसिस्टम, वैज्ञानिक नवाचार और वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में भारत की भूमिका को नई ऊंचाई दे सकती है। आने वाले वर्षों में ऐसे मिशन भारत को दुनिया के प्रमुख स्पेस लॉन्च हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। Source: Skyroot Aerospace, IN-SPACe, ISRO से संबंधित सार्वजनिक जानकारी एवं विश्वसनीय मीडिया रिपोर्ट। Original Report: आधिकारिक घोषणाओं और उपलब्ध सार्वजनिक सूचनाओं के आधार पर तैयार। जय राष्ट्र न्यूज़

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गगनयान मिशन की तैयारियों को मिली रफ्तार, उन्नत अंतरिक्ष तकनीकों पर भारत का बढ़ता फोकस

नई दिल्ली, 6 जुलाई। भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ की तैयारियां लगातार आगे बढ़ रही हैं। मिशन से जुड़े विभिन्न तकनीकी परीक्षण, सुरक्षा प्रणालियों का सत्यापन और अंतरिक्ष उड़ान से संबंधित महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं पर काम जारी है। इसके साथ ही भारत के तेजी से विकसित हो रहे स्पेस सेक्टर पर उद्योग जगत और निवेशकों की भी विशेष नजर बनी हुई है। गगनयान मिशन की तैयारियां जारी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) गगनयान मिशन के लिए आवश्यक प्रणालियों के परीक्षण और मिशन से जुड़े विभिन्न चरणों की तैयारी कर रहा है। मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए सुरक्षा, विश्वसनीयता और तकनीकी दक्षता सुनिश्चित करना इस मिशन की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्नत अंतरिक्ष तकनीकों पर बढ़ा जोर मानव अंतरिक्ष मिशन के साथ-साथ पुनःप्रवेश (Re-entry) तकनीक, जीवन समर्थन प्रणाली (Life Support System), अंतरिक्ष यान सुरक्षा, संचार नेटवर्क और मिशन नियंत्रण जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के विकास पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। निजी स्पेस सेक्टर को मिल रहा बढ़ावा भारत में निजी अंतरिक्ष कंपनियों की बढ़ती भागीदारी से स्पेस इकोसिस्टम को नई गति मिली है। सैटेलाइट निर्माण, लॉन्च सेवाएं, अंतरिक्ष डेटा, पृथ्वी अवलोकन और स्पेस टेक स्टार्टअप्स में निवेश लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे नवाचार और रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे। निवेशकों की बढ़ी रुचि स्पेस टेक्नोलॉजी को भविष्य के सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में माना जा रहा है। उद्योग विश्लेषकों के अनुसार अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ते सरकारी और निजी निवेश से भारतीय एयरोस्पेस एवं स्पेस उद्योग को दीर्घकालिक लाभ मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों की राय तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि गगनयान मिशन केवल मानव अंतरिक्ष उड़ान तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे भारत की अनुसंधान क्षमता, उच्च प्रौद्योगिकी निर्माण, रक्षा, संचार और औद्योगिक विकास को भी नई दिशा मिलेगी। यह मिशन भारत को वैश्विक अंतरिक्ष शक्तियों की अग्रिम पंक्ति में और मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भविष्य की राह आने वाले महीनों में गगनयान मिशन से जुड़े कई महत्वपूर्ण परीक्षण और तकनीकी गतिविधियां होने की संभावना है। यदि सभी चरण सफलतापूर्वक पूरे होते हैं, तो भारत अपने पहले मानव अंतरिक्ष मिशन की दिशा में एक और बड़ा कदम आगे बढ़ाएगा। साथ ही देश का स्पेस सेक्टर वैश्विक निवेश और तकनीकी सहयोग का प्रमुख केंद्र बन सकता है। स्रोत:भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO), भारत सरकार की सार्वजनिक अंतरिक्ष संबंधी जानकारी एवं आधिकारिक अपडेट। मूल रिपोर्ट:6 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और विश्वसनीय अंतरिक्ष क्षेत्र से संबंधित सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट Vikram-1 के लॉन्च की तैयारियां तेज, निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ा उत्साह

नई दिल्ली, 3 जुलाई। भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट Vikram-1 के लॉन्च की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस मिशन को देश के तेजी से उभरते निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस लॉन्च से भारतीय स्पेस स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई गति मिलेगी और वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग में भारत की भागीदारी और मजबूत होगी। निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए बड़ा कदम Vikram-1 भारत का पहला निजी रूप से विकसित ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है। इसके सफल प्रक्षेपण से निजी कंपनियों की उपग्रह प्रक्षेपण क्षमता में वृद्धि होगी और भारत का वाणिज्यिक अंतरिक्ष बाजार अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेगा। आधुनिक तकनीक से लैस रॉकेट Vikram-1 को आधुनिक प्रणोदन प्रणाली, उन्नत एवियोनिक्स और हल्के कंपोजिट ढांचे के साथ विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य छोटे और मध्यम आकार के उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में स्थापित करना है। स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिलेगा बढ़ावा विशेषज्ञों के अनुसार इस मिशन की सफलता से भारत के स्पेस स्टार्टअप्स, अनुसंधान संस्थानों और निजी उद्योग को नई संभावनाएं मिलेंगी। इससे नवाचार, निवेश और उच्च तकनीकी रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होने की उम्मीद है। वैश्विक लॉन्च बाजार में बढ़ेगी भागीदारी भारत पहले से ही किफायती उपग्रह प्रक्षेपण सेवाओं के लिए जाना जाता है। Vikram-1 के संचालन से निजी क्षेत्र भी वैश्विक लॉन्च सेवाओं में सक्रिय भूमिका निभा सकेगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी। अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों का असर हाल के वर्षों में भारत सरकार द्वारा निजी कंपनियों के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र को खोलने और नियामकीय सुधार लागू करने के बाद कई स्पेस टेक स्टार्टअप्स तेजी से उभरे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि Vikram-1 मिशन इन सुधारों का एक महत्वपूर्ण परिणाम है। विशेषज्ञों की राय अंतरिक्ष विशेषज्ञों का कहना है कि यदि Vikram-1 मिशन सफल रहता है, तो भारत का निजी अंतरिक्ष उद्योग वैश्विक स्तर पर नई पहचान बना सकता है। इससे भविष्य में अधिक व्यावसायिक लॉन्च, तकनीकी सहयोग और विदेशी निवेश की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। आगे की राह लॉन्च की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और मिशन से जुड़ी तकनीकी प्रक्रियाओं पर लगातार काम किया जा रहा है। सफल प्रक्षेपण के बाद भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ सकता है तथा वैश्विक स्पेस इकोनॉमी में देश की भूमिका और मजबूत हो सकती है। स्रोत:Skyroot Aerospace, भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र से संबंधित आधिकारिक सार्वजनिक जानकारी। मूल रिपोर्ट:3 जुलाई 2026 तक उपलब्ध Vikram-1 मिशन और भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र से संबंधित आधिकारिक जानकारी के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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