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INS Kolkata–Pakistan Vessel Collision पर India ने Pakistan के आरोप खारिज किए; MEA ने PNS Hunain के Conduct को ‘Unacceptable’ बताया

नई दिल्ली, 19 सितंबर 2026: India ने Arabian Sea में Indian Navy के destroyer INS Kolkata और Pakistan Navy के PNS Hunain के बीच हुई collision को लेकर Islamabad के आरोपों को खारिज कर दिया है। Ministry of External Affairs (MEA) ने कहा कि INS Kolkata routine deployment पर था और Pakistani vessel ने समुद्र में “unacceptable and unprofessional manner” में manoeuvre किया, जिसके कारण दोनों ships की टक्कर हुई। 15 September को हुई थी Collision दोनों naval vessels के बीच collision 15 September को North Arabian Sea में हुई थी। India के मुताबिक INS Kolkata international waters में routine deployment पर था, जबकि Pakistan का कहना है कि घटना उसके Exclusive Economic Zone के भीतर SEASPARK-26 naval exercise के दौरान हुई। दोनों देशों ने घटना को लेकर अलग-अलग versions सामने रखे हैं। MEA ने Pakistan के आरोप किए Reject MEA spokesperson Randhir Jaiswal ने कहा कि India ने Pakistan की ओर से लगाए गए allegations और insinuations को पूरी तरह reject किया है। उन्होंने कहा कि PNS Hunain ने dangerous overtaking manoeuvre किया और उसका conduct established maritime practices के अनुरूप नहीं था। 1991 Agreement के उल्लंघन का आरोप India ने आरोप लगाया कि PNS Hunain का manoeuvre April 1991 के India-Pakistan Agreement on Advance Notice on Military Exercises, Manoeuvres and Troops Movements के Article 10 का उल्लंघन था। इस provision के मुताबिक दोनों देशों की naval units को समुद्र में एक-दूसरे से कम से कम 3 nautical miles की दूरी बनाए रखनी होती है। MEA ने International Regulations for Preventing Collisions at Sea के उल्लंघन का भी आरोप लगाया। Pakistan ने India पर लगाया था Aggressive Manoeuvre का आरोप Pakistan ने इससे पहले आरोप लगाया था कि Indian vessel ने उसके naval ship के बेहद करीब aggressive manoeuvres किए, जिसके बाद दोनों vessels के बीच contact हुआ। Islamabad ने इस मुद्दे पर Indian diplomat को बुलाकर protest भी दर्ज कराया था। India ने Pakistan के इस version को खारिज किया है। INS Kolkata को Major Damage नहीं MEA के मुताबिक collision में INS Kolkata को कोई बड़ा structural damage नहीं हुआ और warship समुद्र में operational बनी हुई है। Reports के मुताबिक PNS Hunain को collision के बाद repair के लिए वापस harbour जाना पड़ा, हालांकि damage की extent को लेकर दोनों देशों की ओर से अलग-अलग जानकारी सामने आई है। दोनों देशों ने दर्ज कराया Diplomatic Protest घटना के बाद India और Pakistan दोनों ने diplomatic channels के जरिए एक-दूसरे के सामने protest दर्ज कराया है। India ने Pakistan से कहा है कि उसके military units bilateral agreements और maritime safety protocols का पालन करें ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो। source – Ministry of External Affairs / The Indian Express / Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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मनीला में QUAD और ASEAN बैठकों में शामिल हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर, इंडो-पैसिफिक सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग पर भारत का फोकस

नई दिल्ली/मनीला: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित QUAD Foreign Ministers’ Meeting और ASEAN से जुड़ी उच्चस्तरीय बैठकों में शामिल हुए। इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान भारत ने एक बार फिर मुक्त, समावेशी और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। बैठकों में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain), उभरती प्रौद्योगिकियों, साइबर सुरक्षा और आर्थिक सहयोग जैसे प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। भारत ने ASEAN देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया। बैठक के प्रमुख मुद्दे QUAD और ASEAN बैठकों में जिन विषयों पर प्रमुख रूप से चर्चा हुई, उनमें शामिल हैं— द्विपक्षीय बैठकों पर भी रहा फोकस मनीला दौरे के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कई देशों के विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। इन बैठकों में भारत-अमेरिका संबंध, रक्षा सहयोग, निवेश, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि इन बैठकों से भारत की कूटनीतिक स्थिति और मजबूत होगी। भारत के लिए क्यों है महत्वपूर्ण? विशेषज्ञों के अनुसार यह बैठक कई मायनों में अहम है— भारत का संदेश विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत मुक्त, सुरक्षित और समावेशी इंडो-पैसिफिक के लिए प्रतिबद्ध है और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना भारत की विदेश नीति की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए साझेदारी और संवाद को आवश्यक बताया। निष्कर्ष मनीला में आयोजित QUAD और ASEAN बैठकों के माध्यम से भारत ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी सक्रिय कूटनीतिक भूमिका को और मजबूत किया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की यह यात्रा क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। Source: Ministry of External Affairs (MEA) | Reuters | ASEAN Secretariat जय राष्ट्र न्यूज़

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मनीला में QUAD और ASEAN बैठकों में शामिल होंगे विदेश मंत्री एस. जयशंकर, इंडो-पैसिफिक सहयोग पर भारत का फोकस

नई दिल्ली/मनीला: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर आज फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित QUAD विदेश मंत्रियों की बैठक (Quad Foreign Ministers’ Meeting) और ASEAN से जुड़ी उच्चस्तरीय बैठकों में हिस्सा लेंगे। इस दौरे को भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति और क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठकों के दौरान भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री सहयोग, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain), उभरती प्रौद्योगिकियों और आर्थिक साझेदारी जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसके साथ ही ASEAN सदस्य देशों के साथ भारत के संबंधों को और मजबूत बनाने पर भी विशेष फोकस रहेगा। बैठक का प्रमुख एजेंडा मनीला में आयोजित इन बैठकों में कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श होने की संभावना है— भारत के लिए क्यों है महत्वपूर्ण? विशेषज्ञों के अनुसार यह दौरा भारत की विदेश नीति के लिए अहम माना जा रहा है क्योंकि— द्विपक्षीय बैठकें भी संभव विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और ASEAN देशों के कई विदेश मंत्रियों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी प्रस्तावित हैं। इनमें व्यापार, रक्षा सहयोग, निवेश और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इंडो-पैसिफिक में भारत की भूमिका भारत लगातार मुक्त, समावेशी और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का समर्थन करता रहा है। सरकार का मानना है कि क्षेत्र में शांति, स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान वैश्विक आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है। निष्कर्ष मनीला में होने वाली QUAD और ASEAN बैठकों के माध्यम से भारत एक बार फिर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी सक्रिय भूमिका को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की यह यात्रा क्षेत्रीय सहयोग, सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। Source: Ministry of External Affairs (MEA) | Reuters | The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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यूक्रेन तट के पास 4 भारतीयों की मौत पर भारत सख्त, रूस के राजनयिक को किया तलब

नई दिल्ली: यूक्रेन के ओडेसा (Odesa) तट के पास एक व्यापारी जहाज MV Golden Leo पर हुए मिसाइल हमले में चार भारतीय नागरिकों की मौत के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने रूस के वरिष्ठ राजनयिक (Chargé d’Affaires) को तलब कर इस घटना पर गंभीर चिंता और कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि व्यापारिक जहाजों पर हमले और निर्दोष नागरिकों की मौत अस्वीकार्य है। भारत ने इस घटना की स्पष्ट शब्दों में निंदा करते हुए समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। क्या हुआ था? रिपोर्टों के अनुसार, गिनी-बिसाउ (Guinea-Bissau) के ध्वज वाले मालवाहक जहाज MV Golden Leo पर यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से रवाना होने के दौरान मिसाइल हमला हुआ। इस हमले में जहाज पर मौजूद चार भारतीय नाविकों की मौत हो गई, जबकि अन्य चालक दल के सदस्य भी हताहत हुए। यूक्रेन ने आरोप लगाया है कि हमला रूसी मिसाइलों से किया गया। भारत ने क्या कहा? विदेश मंत्रालय ने कहा कि— रूस की प्रतिक्रिया क्रेमलिन ने कहा कि वह इस घटना के बाद भारत के साथ लगातार संपर्क में है। रूस ने अपने सैन्य अभियानों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उसका अभियान जारी रहेगा, जबकि भारत ने नागरिकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के सम्मान पर जोर दिया है। भारत के लिए क्यों है महत्वपूर्ण? विशेषज्ञों के अनुसार यह मामला केवल चार भारतीय नागरिकों की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि— से भी जुड़ा हुआ है। भारत दुनिया के सबसे बड़े समुद्री मानव संसाधन प्रदाताओं में शामिल है और बड़ी संख्या में भारतीय नाविक अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर कार्यरत हैं। आगे क्या? विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और मृतकों के परिजनों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही, भारत ने सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करने और नागरिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। निष्कर्ष यूक्रेन तट के पास हुए इस हमले में चार भारतीयों की मौत के बाद भारत ने रूस के वरिष्ठ राजनयिक को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वाणिज्यिक जहाजों और नागरिकों पर हमले अस्वीकार्य हैं तथा समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना वैश्विक समुदाय की साझा जिम्मेदारी है। जय राष्ट्र न्यूज़

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MV Golden Leo जहाज पर हमले की भारत ने की कड़ी निंदा, समुद्री सुरक्षा पर विदेश मंत्रालय का सख्त बयान

MV Golden Leo पर हमले की भारत ने की निंदा, समुद्री सुरक्षा पर MEA का सख्त बयान नई दिल्ली: भारत सरकार ने MV Golden Leo नामक व्यापारी जहाज पर हुए हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर इस तरह के हमले वैश्विक व्यापार, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा हैं। विदेश मंत्रालय (MEA) ने अपने आधिकारिक बयान में दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर देते हुए सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का सम्मान करने की अपील की। सरकार ने कहा कि हिंद महासागर और पश्चिम एशिया के समुद्री क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इन मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पूरी वैश्विक समुदाय की साझा जिम्मेदारी है। क्या हुआ था? रिपोर्टों के अनुसार, MV Golden Leo पर समुद्री मार्ग से गुजरते समय हमला किया गया। घटना के बाद जहाज और उसके चालक दल की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई। संबंधित समुद्री एजेंसियों ने तुरंत स्थिति की निगरानी शुरू की और जहाज को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई। हमले की परिस्थितियों और जिम्मेदार पक्षों की जांच संबंधित अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा की जा रही है। भारत का आधिकारिक बयान विदेश मंत्रालय ने कहा कि— क्यों है यह घटना महत्वपूर्ण? विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया और आसपास के समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे व्यस्त व्यापारिक मार्गों में शामिल हैं। भारत का बड़ा हिस्सा तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं का आयात इन्हीं समुद्री रास्तों से होता है। यदि इन मार्गों पर सुरक्षा खतरे बढ़ते हैं, तो— भारत की चिंता भारत लंबे समय से हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षित और स्वतंत्र समुद्री आवागमन का समर्थन करता रहा है। विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि समुद्री सुरक्षा केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता का भी महत्वपूर्ण आधार है। सरकार ने कहा कि वह स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ संपर्क में है। आगे क्या? घटना की जांच जारी है और संबंधित अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां हमले के कारणों तथा जिम्मेदार लोगों की पहचान करने में जुटी हैं। भारत ने उम्मीद जताई है कि दोषियों को जल्द न्याय के दायरे में लाया जाएगा और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ेगा। निष्कर्ष MV Golden Leo पर हमला एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ती चुनौतियों को सामने लाता है। भारत ने इस घटना की स्पष्ट शब्दों में निंदा करते हुए सुरक्षित समुद्री मार्गों, अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान और वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया है। Source: विदेश मंत्रालय (MEA), आधिकारिक सरकारी बयान एवं विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट। जय राष्ट्र न्यूज़

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सिंधु जल संधि पर भारत का सख्त रुख, पाकिस्तान को दिया स्पष्ट संदेश

नई दिल्ली: भारत ने सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर अपना रुख और स्पष्ट करते हुए कहा है कि सीमा पार आतंकवाद और द्विपक्षीय संबंधों की वर्तमान परिस्थितियों में संधि अपने मौजूदा स्वरूप में प्रभावी नहीं रह सकती। सरकार के इस बयान के बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों और जल कूटनीति को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद पर ठोस और विश्वसनीय कार्रवाई नहीं करता, तब तक दोनों देशों के बीच सामान्य सहयोग की अपेक्षा करना कठिन है। इसी संदर्भ में सिंधु जल संधि को लेकर भारत ने अपना कड़ा रुख दोहराया है। क्या है सिंधु जल संधि? सिंधु जल संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई थी। इस समझौते के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह प्रमुख नदियों के जल के उपयोग को लेकर दोनों देशों के अधिकार और जिम्मेदारियां तय की गई थीं। भारत ने क्या कहा? सरकार ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद और वार्ता एक साथ नहीं चल सकते। भारत का कहना है कि सीमा पार आतंकवाद के लगातार जारी रहने से दोनों देशों के बीच विश्वास प्रभावित हुआ है और इसका असर द्विपक्षीय समझौतों पर भी पड़ता है। सरकार ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है और भारत अपने जल संसाधनों के वैध उपयोग के लिए उपलब्ध सभी विकल्पों पर काम करता रहेगा। इस बयान का क्या महत्व है? विशेषज्ञों के अनुसार यह बयान केवल जल प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की व्यापक कूटनीतिक नीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। इससे भविष्य में दोनों देशों के बीच जल सहयोग, परियोजनाओं और तकनीकी स्तर की बातचीत पर असर पड़ सकता है। हालांकि, अभी तक भारत ने संधि समाप्त करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। सरकार का जोर अपने अधिकारों के दायरे में जल संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर है। पाकिस्तान की प्रतिक्रिया भारत के बयान के बाद पाकिस्तान की ओर से चिंता जताई गई है और संधि को अंतरराष्ट्रीय समझौता बताते हुए इसे बनाए रखने की बात कही गई है। हालांकि दोनों देशों की आधिकारिक एजेंसियों के बीच इस विषय पर आगे की बातचीत को लेकर फिलहाल कोई नई घोषणा नहीं हुई है। आगे क्या हो सकता है? विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में— निष्कर्ष सिंधु जल संधि को लेकर भारत के ताजा बयान ने स्पष्ट संकेत दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे भारत की विदेश नीति में सर्वोच्च प्राथमिकता पर हैं। सरकार का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में पुराने ढांचे के तहत संबंधों को सामान्य मानना संभव नहीं है, जबकि भारत अपने वैध जल अधिकारों के उपयोग के लिए प्रतिबद्ध रहेगा। Source: भारत सरकार के आधिकारिक बयान, विदेश मंत्रालय (MEA) एवं विश्वसनीय मीडिया रिपोर्ट। जय राष्ट्र न्यूज़

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ईरान को लेकर भारतीय दूतावास की नई एडवाइजरी, भारतीय नागरिकों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा टालने की अपील

नई दिल्ली/तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी सुरक्षा स्थिति को देखते हुए ईरान में भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। दूतावास ने सभी भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने, स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और सुरक्षा संबंधी अपडेट पर लगातार नजर रखने की अपील की है। दूतावास ने कहा है कि क्षेत्र में हालिया घटनाक्रम के मद्देनज़र सुरक्षा स्थिति तेजी से बदल सकती है। ऐसे में भारतीय नागरिक सतर्क रहें और केवल अत्यंत आवश्यक होने पर ही यात्रा करें। दूतावास ने क्या कहा? भारतीय दूतावास की एडवाइजरी में नागरिकों से कहा गया है कि— एडवाइजरी क्यों जारी की गई? हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़े सुरक्षा तनाव और सैन्य गतिविधियों के कारण क्षेत्र की स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। इसी को देखते हुए भारत सहित कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हालात में समय-समय पर सुरक्षा सलाह जारी करना एक सामान्य एहतियाती कदम होता है। भारतीय नागरिकों के लिए सलाह दूतावास ने भारतीय नागरिकों से यह भी कहा है कि— सरकार स्थिति पर रख रही है नजर भारत सरकार ने कहा है कि वह क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास स्थानीय प्रशासन के साथ संपर्क में हैं ताकि आवश्यकता पड़ने पर भारतीय नागरिकों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा सके। आगे क्या? यदि क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति में कोई बड़ा बदलाव होता है, तो भारतीय दूतावास नई एडवाइजरी या अतिरिक्त दिशा-निर्देश जारी कर सकता है। इसलिए नागरिकों को आधिकारिक अपडेट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है। निष्कर्ष ईरान में मौजूदा सुरक्षा हालात को देखते हुए भारतीय दूतावास ने एहतियात के तौर पर नई एडवाइजरी जारी की है। भारतीय नागरिकों से अनावश्यक यात्रा टालने, सतर्क रहने और केवल आधिकारिक सूचनाओं का पालन करने की अपील की गई है। Source: भारत का विदेश मंत्रालय (MEA), ईरान स्थित भारतीय दूतावास की आधिकारिक एडवाइजरी एवं आधिकारिक बयान। जय राष्ट्र न्यूज़

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