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राष्ट्रीय | छात्र आंदोलन, NEET और सरकार पर विशाल ददलानी का व्यंग्यात्मक वीडियो; सोशल मीडिया पर तेज़ बहस

मशहूर गायक और संगीतकार विशाल ददलानी का एक व्यंग्यात्मक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में उन्होंने छात्र आंदोलन, NEET पेपर लीक और सरकार की भूमिका पर अपनी टिप्पणी की है। विशाल ददलानी ने कहा कि छात्रों पर कथित लाठीचार्ज, आंसू गैस के इस्तेमाल और कार्रवाई से ज्यादा चर्चा छात्रों द्वारा इस्तेमाल किए गए अपशब्दों पर हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि NEET पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर अधिक गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए, क्योंकि इससे हजारों छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है। इसके साथ ही उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज़ में कहा, “अहंकार कम कीजिए, पीआर कम कीजिए और खराब रील्स बनाना बंद कीजिए।” इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोगों ने छात्रों के मुद्दों पर आवाज़ उठाने क�

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AI और डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की समीक्षा बैठकें तेज़, नई निवेश परियोजनाओं पर फोकस

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल गवर्नेंस से जुड़ी नई परियोजनाओं एवं निवेश प्रस्तावों की समीक्षा तेज़ कर दी है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) विभिन्न मंत्रालयों और सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर AI आधारित डिजिटल सेवाओं, स्मार्ट प्रशासन और तकनीकी अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में कई प्रस्तावों का मूल्यांकन कर रहा है। सरकार का उद्देश्य AI के माध्यम से नागरिक सेवाओं को अधिक तेज़, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। स्वदेशी AI मॉडल और नए निवेश को मिली गति हाल ही में सरकार ने 20 स्वदेशी AI फाउंडेशन मॉडल विकसित करने के प्रस्तावों को समर्थन देने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही AI अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए 58 Centres of Excellence को भी मंजूरी दी गई है। सरकार ने इन परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर कंप्यूटिंग संसाधन उपलब्ध कराने का भी फैसला किया है, ताकि भारतीय स्टार्टअप, शोध संस्थान और उद्योग वैश्विक स्तर की AI तकनीक विकसित कर सकें। डिजिटल गवर्नेंस पर विशेष जोर MeitY के नेतृत्व में विभिन्न मंत्रालयों से प्राप्त 700 से अधिक AI उपयोग मामलों और 760 से अधिक प्रस्तावों का मूल्यांकन किया जा रहा है। इनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, न्याय, परिवहन, शहरी विकास और प्रशासनिक सेवाओं में AI के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार चाहती है कि डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से सरकारी सेवाएँ अधिक नागरिक-केंद्रित और डेटा-आधारित बनें। डेटा सेंटर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश AI के बढ़ते उपयोग को देखते हुए देश में डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश भी तेज़ हुआ है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार जून तिमाही में संस्थागत निवेश का बड़ा हिस्सा डेटा सेंटर परियोजनाओं में गया, जिससे स्पष्ट है कि AI आधारित डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक अवसंरचना तेजी से विकसित की जा रही है। AI गवर्नेंस और सुरक्षा पर भी ध्यान सरकार केवल तकनीकी निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि जिम्मेदार AI उपयोग के लिए AI Governance Framework और सुरक्षा मानकों पर भी काम कर रही है। विशेषज्ञ समितियाँ AI से जुड़े नैतिक, गोपनीयता और पारदर्शिता संबंधी मुद्दों की समीक्षा कर रही हैं ताकि नई तकनीकों का उपयोग सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से किया जा सके। निष्कर्ष भारत AI और डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश और नीतिगत सुधारों के माध्यम से वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सरकार का मानना है कि स्वदेशी AI मॉडल, मजबूत डिजिटल अवसंरचना और जिम्मेदार AI गवर्नेंस के संयोजन से देश की प्रशासनिक क्षमता और डिजिटल अर्थव्यवस्था दोनों को नई गति मिलेगी। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | IndiaAI Mission जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत सरकार ने Meta की ग्लोबल टीम को तलब किया, PM मोदी की पोस्ट और ऑनलाइन चाइल्ड सेफ्टी पर होगी जवाबदेही तय

नई दिल्ली: भारत सरकार ने सोशल मीडिया कंपनी Meta (Facebook और Instagram) की वैश्विक टीम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की Facebook पोस्ट के अस्थायी रूप से हटाए जाने और ऑनलाइन चाइल्ड सेफ्टी (Child Safety) से जुड़े मामलों पर स्पष्टीकरण देने के लिए नई दिल्ली तलब किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों के साथ होने वाली इस बैठक में कंटेंट मॉडरेशन, बच्चों की सुरक्षा, AI आधारित निगरानी और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। PM मोदी की पोस्ट पर उठा विवाद हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक Facebook पोस्ट कुछ समय के लिए प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं रही थी। Meta ने बाद में इसे तकनीकी त्रुटि बताते हुए पोस्ट को बहाल कर दिया और खेद भी व्यक्त किया। हालांकि, सरकार का मानना है कि इस तरह की घटनाएँ सार्वजनिक संवाद और डिजिटल प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता से जुड़ी हैं, इसलिए कंपनी से विस्तृत स्पष्टीकरण लिया जाना आवश्यक है। ऑनलाइन चाइल्ड सेफ्टी पर सरकार सख्त बैठक का दूसरा प्रमुख मुद्दा प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा है। सरकार Meta से यह जानना चाहती है कि बच्चों के खिलाफ यौन शोषण संबंधी सामग्री (CSAM), फर्जी अकाउंट, ऑनलाइन ग्रूमिंग और आपत्तिजनक कंटेंट को रोकने के लिए कंपनी कौन-कौन से तकनीकी और प्रशासनिक कदम उठा रही है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय उपयोगकर्ताओं, विशेषकर बच्चों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म सुरक्षित बने रहें। AI और कंटेंट मॉडरेशन पर भी चर्चा सूत्रों के अनुसार बैठक में AI आधारित कंटेंट मॉडरेशन, डीपफेक सामग्री, फर्जी सूचनाओं की रोकथाम और Verified Accounts की सुरक्षा व्यवस्था पर भी चर्चा होगी। सरकार चाहती है कि Meta भारतीय कानूनों और आईटी नियमों के अनुरूप अपनी नीतियों को और अधिक पारदर्शी बनाए तथा शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करे। डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर जोर भारत सरकार लगातार यह स्पष्ट कर रही है कि देश में कार्यरत सभी डिजिटल प्लेटफॉर्मों को स्थानीय कानूनों का पालन करना होगा। सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी केवल कंटेंट होस्ट करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उपयोगकर्ता सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उनकी जिम्मेदारी है। निष्कर्ष Meta की वैश्विक टीम के साथ होने वाली यह बैठक भारत सरकार और बड़ी टेक कंपनियों के बीच डिजिटल सुरक्षा और जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकार का लक्ष्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भारतीय कानूनों के अनुरूप बनाना है, ताकि उपयोगकर्ताओं का भरोसा मजबूत हो सके। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | Meta जय राष्ट्र न्यूज़

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Meta की ग्लोबल टीम को भारत सरकार का समन, PM मोदी की Facebook पोस्ट और चाइल्ड सेफ्टी पर होगी जवाबदेही तय

नई दिल्ली: भारत सरकार ने सोशल मीडिया कंपनी Meta (Facebook और Instagram) की वैश्विक टीम को 5 और 6 अगस्त को नई दिल्ली में होने वाली उच्चस्तरीय बैठक के लिए तलब किया है। सरकार इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की Facebook पोस्ट को अस्थायी रूप से ब्लॉक किए जाने, प्लेटफॉर्म पर Child Sexual Abuse Material (CSAM) से जुड़े मामलों, AI आधारित कंटेंट मॉडरेशन और सत्यापित (Verified) अकाउंट्स की सुरक्षा व्यवस्था पर जवाब मांगेगी। PM मोदी की पोस्ट पर उठे सवाल सरकार की नाराज़गी उस समय सामने आई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक Facebook पोस्ट कुछ समय के लिए प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंधित हो गई थी। Meta ने बाद में इसे तकनीकी त्रुटि (Technical Error) बताते हुए पोस्ट को बहाल कर दिया और खेद भी जताया। हालांकि, सरकार का कहना है कि केवल “तकनीकी गलती” का स्पष्टीकरण पर्याप्त नहीं है और इस मामले में विस्तृत जवाबदेही तय की जाएगी। चाइल्ड सेफ्टी और CSAM पर सख्त रुख बैठक में सरकार Meta से यह भी पूछेगी कि उसके प्लेटफॉर्म पर Child Sexual Exploitative and Abuse Material (CSAM) से जुड़े कंटेंट और विज्ञापनों को रोकने के लिए कौन-सी सुरक्षा व्यवस्थाएँ लागू हैं। हाल ही में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने भी Meta के प्लेटफॉर्म पर कथित CSAM विज्ञापनों को लेकर जांच शुरू की है। सरकार चाहती है कि कंपनी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर अधिक प्रभावी तकनीकी उपाय अपनाए। AI कंटेंट और Verified Accounts पर भी चर्चा सूत्रों के अनुसार बैठक में AI द्वारा तैयार किए गए कंटेंट, डीपफेक सामग्री, Verified Accounts की सुरक्षा और कंटेंट मॉडरेशन की पारदर्शिता जैसे मुद्दे भी प्रमुख रहेंगे। सरकार का कहना है कि बड़ी डिजिटल कंपनियों को भारत के कानूनों और उपयोगकर्ता सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन करना होगा। डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर सरकार का जोर आईटी मंत्रालय का मानना है कि करोड़ों भारतीय उपयोगकर्ताओं वाले डिजिटल प्लेटफॉर्मों की जिम्मेदारी केवल कंटेंट होस्ट करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें उपयोगकर्ता सुरक्षा, बाल संरक्षण और निष्पक्ष कंटेंट मॉडरेशन भी सुनिश्चित करना होगा। इसी उद्देश्य से Meta के वरिष्ठ वैश्विक अधिकारियों को सीधे नई दिल्ली बुलाकर विस्तृत चर्चा की जा रही है। निष्कर्ष Meta की वैश्विक टीम के साथ होने वाली यह बैठक भारत सरकार और बड़ी टेक कंपनियों के बीच डिजिटल सुरक्षा, कंटेंट मॉडरेशन और जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकार स्पष्ट संदेश देना चाहती है कि भारत में संचालन करने वाले सभी डिजिटल प्लेटफॉर्मों को स्थानीय कानूनों, उपयोगकर्ता सुरक्षा और बच्चों के संरक्षण से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | Meta जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत में AI, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर निवेश को नई गति, कई परियोजनाओं पर तेजी से काम

नई दिल्ली: भारत सरकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कई नई परियोजनाओं और निवेश योजनाओं पर तेजी से काम कर रही है। सरकार का उद्देश्य भारत को हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, चिप डिजाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और AI नवाचार का प्रमुख वैश्विक केंद्र बनाना है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारें निजी कंपनियों तथा वैश्विक निवेशकों के साथ मिलकर नई उत्पादन इकाइयों और अनुसंधान परियोजनाओं को आगे बढ़ा रही हैं। AI मिशन को मिल रही नई गति सरकार के IndiaAI Mission के तहत देश में AI कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप्स, अनुसंधान, स्किल डेवलपमेंट और डेटा प्लेटफॉर्म को मजबूत किया जा रहा है। विभिन्न संस्थानों और उद्योगों के सहयोग से स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, रक्षा और प्रशासनिक सेवाओं में AI आधारित समाधान विकसित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सेमीकंडक्टर उद्योग में निवेश बढ़ा Semicon India Programme के अंतर्गत सेमीकंडक्टर निर्माण, चिप पैकेजिंग और डिस्प्ले निर्माण से जुड़ी परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इन निवेशों से भारत वैश्विक चिप सप्लाई चेन में अपनी भूमिका मजबूत करेगा और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को नई दिशा मिलेगी। कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियाँ भारत में नई इकाइयाँ स्थापित करने की प्रक्रिया में हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, सर्वर, डेटा सेंटर उपकरण और अन्य डिजिटल हार्डवेयर के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं और नई नीतियों का विस्तार किया जा रहा है। इससे भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य रखा गया है। रोजगार और स्टार्टअप्स को लाभ विशेषज्ञों के अनुसार इन परियोजनाओं से आने वाले वर्षों में हजारों उच्च कौशल वाले रोजगार सृजित होंगे। साथ ही AI, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन और चिप टेक्नोलॉजी से जुड़े भारतीय स्टार्टअप्स को भी नए अवसर मिलेंगे। सरकार उद्योग, शिक्षा संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दे रही है। निष्कर्ष AI, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में तेजी से बढ़ते निवेश भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे ले जा रहे हैं। सरकार की नई पहलें देश को वैश्विक तकनीकी और विनिर्माण हब बनाने के लक्ष्य को मजबूत आधार प्रदान कर रही हैं। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | IndiaAI Mission | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और डिजिटल टेक्नोलॉजी सेक्टर को मिलेगा बड़ा बढ़ावा, नई सरकारी योजनाओं और निवेश प्रस्तावों पर काम तेज़

नई दिल्ली: भारत सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण (Electronics Manufacturing) और डिजिटल टेक्नोलॉजी सेक्टर को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कई नई योजनाओं और निवेश प्रस्तावों पर तेजी से काम कर रही है। सरकार का उद्देश्य भारत को सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स, मोबाइल निर्माण और डिजिटल हार्डवेयर के क्षेत्र में वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है। हाल के महीनों में विभिन्न नीतिगत सुधारों और प्रोत्साहन योजनाओं के बाद घरेलू और विदेशी निवेशकों की रुचि इस क्षेत्र में लगातार बढ़ रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अनुसार सरकार सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट निर्माण, चिप डिजाइन, डेटा सेंटर और उन्नत डिजिटल टेक्नोलॉजी से जुड़े कई नए निवेश प्रस्तावों पर राज्यों और उद्योग जगत के साथ मिलकर कार्य कर रही है। इन पहलों का उद्देश्य घरेलू उत्पादन बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना और उच्च तकनीक आधारित रोजगार के अवसर पैदा करना है। स्टार्टअप और नवाचार को मिलेगा समर्थन सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (EDF), स्टार्टअप इकोसिस्टम और अनुसंधान एवं विकास (R&D) परियोजनाओं के माध्यम से उभरती तकनीकी कंपनियों को भी प्रोत्साहन दे रही है। इससे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), एम्बेडेड सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन और अगली पीढ़ी की डिजिटल तकनीकों पर काम करने वाले स्टार्टअप्स को नई गति मिलने की उम्मीद है। घरेलू विनिर्माण पर विशेष जोर नई योजनाओं के तहत सरकार स्थानीय स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स, डिस्प्ले, बैटरी, सेमीकंडक्टर पैकेजिंग और अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा दे रही है। इससे भारत वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी भागीदारी मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मोबाइल, ऑटोमोबाइल, रक्षा और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों को भी लाभ मिलेगा। रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा नई सरकारी योजनाओं और प्रस्तावित निवेशों के माध्यम से आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल टेक्नोलॉजी क्षेत्र में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है। सरकार का लक्ष्य भारत को उच्च तकनीक आधारित विनिर्माण अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित करना और वैश्विक कंपनियों के लिए आकर्षक निवेश गंतव्य बनाना है। निष्कर्ष इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और डिजिटल टेक्नोलॉजी क्षेत्र में नई सरकारी योजनाएँ भारत की औद्योगिक और तकनीकी क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं। सरकार का मानना है कि इन पहलों से निवेश, रोजगार, निर्यात और तकनीकी आत्मनिर्भरता को नई गति मिलेगी। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली नई परियोजनाओं पर काम तेज़, सरकार की कई निवेश योजनाएँ चर्चा में

नई दिल्ली: भारत सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल विनिर्माण क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कई नई परियोजनाओं और निवेश योजनाओं पर तेजी से काम शुरू किया है। हाल ही में मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) और सेमिकॉन इंडिया 2.0 जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं को मंजूरी मिलने के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में निवेश का माहौल और मजबूत हुआ है। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर हब के रूप में विकसित करना है। केंद्र सरकार के अनुसार नई योजनाओं के माध्यम से घरेलू मूल्य संवर्धन (Value Addition), सप्लाई चेन को मजबूत करने, भारतीय ब्रांड विकसित करने और अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देने पर विशेष फोकस किया जा रहा है। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन, निर्यात और रोजगार के नए अवसर बढ़ने की उम्मीद है। इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड से स्टार्टअप्स को मिला बढ़ावा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने जानकारी दी है कि इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (EDF) के माध्यम से अब तक 128 कंपनियों और स्टार्टअप्स में ₹1,335 करोड़ से अधिक का निवेश किया जा चुका है। यह निवेश आठ वेंचर कैपिटल फंडों के जरिए किया गया है, जिससे डीप-टेक, इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन और उन्नत विनिर्माण क्षेत्र में नवाचार को गति मिली है। मोबाइल और सेमीकंडक्टर सेक्टर पर बड़ा दांव सरकार ने हाल ही में ₹62,500 करोड़ की मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) और ₹1,27,500 करोड़ की Semicon India 2.0 योजना को मंजूरी दी है। इन योजनाओं का उद्देश्य भारत में मोबाइल निर्माण, चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन, पैकेजिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन को मजबूत करना है। रोजगार और निवेश को मिलेगा लाभ विशेषज्ञों का मानना है कि इन योजनाओं से आने वाले वर्षों में अरबों रुपये का निवेश आकर्षित होगा और हजारों प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। सरकार का लक्ष्य इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को अगले कुछ वर्षों में कई गुना बढ़ाना और भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करना है। आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को बढ़ावा देने वाली ये परियोजनाएँ Make in India, Digital India और Atmanirbhar Bharat अभियान को नई गति देंगी। सरकार का मानना है कि मजबूत घरेलू विनिर्माण क्षमता से आयात पर निर्भरता कम होगी और भारत वैश्विक सप्लाई चेन में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। निष्कर्ष नई इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल विनिर्माण परियोजनाएँ भारत के तकनीकी और औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। सरकार की निवेश योजनाएँ, स्टार्टअप समर्थन और सेमीकंडक्टर मिशन मिलकर भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड के माध्यम से 128 टेक स्टार्टअप्स में ₹1,335 करोड़ से अधिक निवेश

नई दिल्ली: भारत सरकार ने देश में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और डीप-टेक नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (EDF) के माध्यम से अब तक 128 टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स में ₹1,335 करोड़ से अधिक का निवेश किया जा चुका है। सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण, सेमीकंडक्टर, एम्बेडेड सिस्टम, IoT, रोबोटिक्स और उन्नत हार्डवेयर तकनीकों को बढ़ावा देना है। EDF योजना का संचालन इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत किया जा रहा है। यह फंड प्रत्यक्ष निवेश के बजाय Alternative Investment Funds (AIFs) के माध्यम से स्टार्टअप्स को पूंजी उपलब्ध कराता है, जिससे निजी निवेश भी आकर्षित हो रहा है। 128 स्टार्टअप्स को मिला लाभ सरकारी जानकारी के अनुसार EDF समर्थित स्टार्टअप्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स, ड्रोन तकनीक और चिप डिजाइन जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इन कंपनियों ने कई स्वदेशी तकनीकों का विकास किया है और रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं। आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बल विशेषज्ञों का मानना है कि EDF के माध्यम से किया गया निवेश भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स आयात पर निर्भरता कम करने और वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थान दिलाने में मदद करेगा। यह पहल Digital India, Make in India और Atmanirbhar Bharat अभियानों को भी गति दे रही है। निजी निवेश भी बढ़ा EDF मॉडल की खास बात यह है कि सरकारी निवेश के साथ-साथ निजी क्षेत्र की पूंजी भी आकर्षित हो रही है। इससे शुरुआती चरण (Early Stage) के स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता मिलने के साथ-साथ उद्योग विशेषज्ञों का मार्गदर्शन भी प्राप्त हो रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण पर फोकस सरकार ने हाल के वर्षों में सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और कंपोनेंट निर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएँ शुरू की हैं। EDF इन्हीं प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा है और भविष्य में अधिक स्टार्टअप्स को इससे जोड़ने की योजना है। निष्कर्ष 128 टेक स्टार्टअप्स में ₹1,335 करोड़ से अधिक निवेश भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और डीप-टेक इकोसिस्टम के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इससे नवाचार, रोजगार और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा मिलेगा तथा भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षेत्र में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगा. Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | Electronics Development Fund (EDF) जय राष्ट्र न्यूज़

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इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (EDF) के माध्यम से 128 टेक स्टार्टअप्स में ₹1,335 करोड़ से अधिक निवेश, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को बढ़ावा

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी कि इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (Electronics Development Fund – EDF) के माध्यम से देश के 128 टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स और नवाचार आधारित उद्यमों में ₹1,335.77 करोड़ से अधिक का निवेश किया गया है। सरकार का कहना है कि यह पहल भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स डिज़ाइन, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उन्नत तकनीकी निर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा संचालित EDF एक Fund of Funds मॉडल पर कार्य करता है। यह सीधे स्टार्टअप्स में निवेश नहीं करता, बल्कि पेशेवर वेंचर कैपिटल और एंजेल फंड्स (Daughter Funds) के माध्यम से उभरती तकनीकी कंपनियों को पूंजी उपलब्ध कराता है। अब तक EDF ने आठ Daughter Funds में ₹257.77 करोड़ का निवेश किया है, जिन्होंने आगे 128 स्टार्टअप्स में ₹1,335.77 करोड़ का निवेश किया। उन्नत तकनीकी क्षेत्रों को मिला बढ़ावा सरकार के अनुसार EDF से समर्थित स्टार्टअप्स कई अत्याधुनिक क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं, जिनमें— शामिल हैं। इन क्षेत्रों में घरेलू नवाचार को बढ़ावा देकर भारत को वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में मजबूत बनाने का लक्ष्य रखा गया है। रोजगार और नवाचार को बढ़ावा सरकार ने बताया कि EDF से समर्थित स्टार्टअप्स ने अब तक 23,600 से अधिक रोजगार सृजित किए हैं। इसके अलावा इन कंपनियों द्वारा 368 बौद्धिक संपदाएँ (Intellectual Properties – IPs) विकसित या अधिग्रहित की गई हैं। इससे भारत में घरेलू अनुसंधान, उत्पाद विकास और तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूती मिली है। कर्नाटक सबसे बड़ा लाभार्थी ताज़ा जानकारी के अनुसार EDF से समर्थित 128 कंपनियों में से 90 स्टार्टअप कर्नाटक में स्थित हैं। इससे स्पष्ट होता है कि बेंगलुरु और आसपास का क्षेत्र देश के प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स और डीप-टेक इनोवेशन हब के रूप में उभर रहा है। सरकार का उद्देश्य अन्य राज्यों में भी इसी तरह का स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित करना है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ को मिलेगी मजबूती विशेषज्ञों का मानना है कि EDF के माध्यम से हो रहा निवेश Make in India, Digital India और Atmanirbhar Bharat अभियानों को नई गति देगा। इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में बढ़ते निवेश से आयात पर निर्भरता कम होगी, घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और वैश्विक कंपनियों के लिए भारत एक आकर्षक विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरेगा। सरकार का लक्ष्य सरकार ने कहा कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और उभरती तकनीकों में निवेश को और बढ़ाया जाएगा। इसका उद्देश्य भारत को केवल उपभोक्ता बाजार नहीं बल्कि वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स नवाचार और निर्माण केंद्र बनाना है। इसके लिए निजी निवेश, अनुसंधान संस्थानों और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। निष्कर्ष इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड के माध्यम से 128 स्टार्टअप्स में ₹1,335 करोड़ से अधिक का निवेश भारत की तकनीकी और औद्योगिक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से देश में नवाचार, रोजगार और उच्च तकनीक आधारित विनिर्माण को नई गति मिलेगी तथा भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा. Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड के तहत 128 टेक स्टार्टअप्स में ₹1,335 करोड़ से अधिक निवेश की जानकारी दी

Category: राजनीति / टेक्नोलॉजी / बिज़नेस यह खबर आज सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से प्रमुखता से सामने आई और देश में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण एवं तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सरकार ने बताया कि Electronics Development Fund (EDF) के माध्यम से अब तक 128 टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स में ₹1,335 करोड़ से अधिक का निवेश किया जा चुका है। इसका उद्देश्य भारत को सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स डिज़ाइन, डीप टेक, AI और हार्डवेयर इनोवेशन का वैश्विक केंद्र बनाना है। सरकार के अनुसार यह निवेश केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि स्टार्टअप्स को अनुसंधान, नवाचार, प्रोटोटाइप विकास और वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने में भी मदद करेगा। इससे देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को गति मिलेगी। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा कि भारत में चिप डिज़ाइन, एम्बेडेड सिस्टम, मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा तकनीक और AI आधारित उत्पादों पर तेजी से काम हो रहा है। EDF के जरिए इन क्षेत्रों में कार्यरत स्टार्टअप्स को पूंजी उपलब्ध कराई जा रही है ताकि वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों को मजबूत करेगी। भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण लगातार बढ़ रहा है और सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में देश को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन का प्रमुख केंद्र बनाना है। उद्योग जगत ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि शुरुआती चरण के टेक स्टार्टअप्स के लिए पूंजी जुटाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में EDF जैसी योजनाएं नवाचार को प्रोत्साहित करेंगी और भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएंगी। सरकार ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में उभरती प्रौद्योगिकियों पर केंद्रित निवेश को और बढ़ाया जाएगा ताकि भारत हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल इनोवेशन के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा सके। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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