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कारगिल विजय दिवस पर देशभर में वीर शहीदों को श्रद्धांजलि, सेना ने शौर्य और बलिदान को किया नमन

नई दिल्ली/द्रास: 27वाँ कारगिल विजय दिवस पूरे देश में श्रद्धा, गर्व और सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री, तीनों सेनाओं के प्रमुखों तथा देशभर के नागरिकों ने 1999 के कारगिल युद्ध में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। लद्दाख के द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक सहित देश के विभिन्न युद्ध स्मारकों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहाँ शहीदों की याद में पुष्पचक्र अर्पित किए गए और दो मिनट का मौन रखा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि कारगिल के वीरों का साहस, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने कहा कि भारत अपने सैनिकों के बलिदान को कभी नहीं भूलेगा और राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी। द्रास युद्ध स्मारक पर विशेष समारोह कारगिल युद्ध स्मारक पर भारतीय सेना द्वारा आयोजित मुख्य समारोह में सेना के वरिष्ठ अधिकारियों, शहीदों के परिजनों, पूर्व सैनिकों और बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लिया। इस दौरान— 1999 के कारगिल युद्ध की याद कारगिल युद्ध मई से जुलाई 1999 के बीच लड़ा गया था, जब भारतीय सेना ने कठिन परिस्थितियों में दुश्मन के कब्जे वाले रणनीतिक इलाकों को वापस हासिल किया था। 26 जुलाई 1999 को भारत ने ऑपरेशन विजय की सफलता की आधिकारिक घोषणा की थी। इस युद्ध में भारतीय सेना के 527 से अधिक वीर जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था। देशभर में आयोजित हुए कार्यक्रम कारगिल विजय दिवस के अवसर पर— युवाओं के लिए प्रेरणा रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कारगिल विजय दिवस केवल एक ऐतिहासिक जीत का स्मरण नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, साहस और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक भी है। यह दिवस युवाओं को देश सेवा और राष्ट्रीय एकता के प्रति प्रेरित करता है। निष्कर्ष कारगिल विजय दिवस भारत के वीर सैनिकों के अदम्य साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति का अमर प्रतीक है। देश आज भी उन वीर शहीदों का ऋणी है जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। Source: Ministry of Defence | Indian Army | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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भारतीय नौसेना को एक महीने में मिले चार स्वदेशी नौसैनिक प्लेटफॉर्म, समुद्री सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत को मिला बड़ा बल

नई दिल्ली: भारतीय नौसेना ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। पिछले एक महीने के भीतर नौसेना में चार स्वदेशी नौसैनिक प्लेटफॉर्म शामिल किए गए हैं। इनमें अत्याधुनिक युद्धपोत, एंटी-सबमरीन युद्धपोत और सर्वेक्षण पोत शामिल हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन प्लेटफॉर्म के शामिल होने से भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा, निगरानी क्षमता और हिंद महासागर क्षेत्र में परिचालन शक्ति और मजबूत होगी। साथ ही यह भारत के स्वदेशी रक्षा उत्पादन और जहाज निर्माण उद्योग की बढ़ती क्षमता का भी प्रमाण है। कौन-कौन से प्लेटफॉर्म हुए शामिल? रक्षा मंत्रालय के अनुसार, हाल ही में भारतीय नौसेना में INS Tamal, INS Arnala, INS Nistar और INS Himgiri जैसे स्वदेशी या भारत में निर्मित आधुनिक नौसैनिक प्लेटफॉर्म शामिल किए गए हैं। इन सभी जहाजों को अलग-अलग परिचालन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। इनमें पनडुब्बी रोधी अभियान, समुद्री निगरानी, बचाव अभियान और बहुउद्देश्यीय नौसैनिक संचालन जैसी क्षमताएं मौजूद हैं। आत्मनिर्भर भारत को मिली नई मजबूती रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इन प्लेटफॉर्म का निर्माण भारतीय शिपयार्ड और घरेलू रक्षा उद्योग की भागीदारी से किया गया है। इससे न केवल रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि भारतीय कंपनियों, MSME और रक्षा स्टार्टअप्स को भी नई तकनीक विकसित करने का अवसर मिलेगा। सरकार का लक्ष्य भारत को रक्षा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र बनाना है। नौसेना की परिचालन क्षमता में होगा इजाफा नए प्लेटफॉर्म के शामिल होने से भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी, तटीय सुरक्षा, पनडुब्बी रोधी अभियान और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) मिशनों की क्षमता बढ़ेगी। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती सामरिक चुनौतियों को देखते हुए यह विस्तार भारतीय नौसेना के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण पर जोर पिछले कुछ वर्षों में भारत ने युद्धपोत, पनडुब्बी, मिसाइल प्रणाली और नौसैनिक उपकरणों के स्वदेशी निर्माण पर विशेष ध्यान दिया है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि स्वदेशी जहाज निर्माण से देश की रणनीतिक क्षमता मजबूत होने के साथ-साथ रोजगार, तकनीकी नवाचार और रक्षा निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा। रक्षा मंत्री ने दी बधाई रक्षा मंत्री ने भारतीय नौसेना, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों, निजी उद्योगों और जहाज निर्माण में शामिल इंजीनियरों एवं कर्मचारियों को इस उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत लगातार आधुनिक, आत्मनिर्भर और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप रक्षा क्षमताओं का विकास कर रहा है। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ेगी रणनीतिक मौजूदगी विशेषज्ञों का मानना है कि नए नौसैनिक प्लेटफॉर्म भारतीय नौसेना की Mission-Based Deployments को और मजबूत करेंगे। इससे समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, समुद्री डकैती विरोधी अभियान, खोज एवं बचाव अभियान और क्षेत्रीय सहयोग को भी नई मजबूती मिलेगी। निष्कर्ष एक महीने के भीतर चार स्वदेशी नौसैनिक प्लेटफॉर्म का भारतीय नौसेना में शामिल होना देश के रक्षा क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि है। इससे नौसेना की परिचालन क्षमता बढ़ेगी, समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और मजबूत होगी तथा आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई गति मिलेगी। आने वाले वर्षों में ऐसे और स्वदेशी रक्षा प्लेटफॉर्म भारतीय सशस्त्र बलों की ताकत को और बढ़ाएंगे। Source: रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence), भारतीय नौसेना। Original Report: रक्षा मंत्रालय और भारतीय नौसेना द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के आधार पर तैयार। जय राष्ट्र न्यूज़

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