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नेपाल बाढ़ में फंसे महाराष्ट्र के 106 तीर्थयात्री सुरक्षित लौटे; बिहार सरकार ने भोजन, इलाज और ट्रेन की व्यवस्था कर पहुंचाया घर

पटना/नागपुर: नेपाल में आई विनाशकारी flash floods के बीच फंसे महाराष्ट्र के 106 तीर्थयात्री सुरक्षित भारत लौट आए हैं। बिहार सरकार और सीतामढ़ी जिला प्रशासन ने नेपाल सीमा से यात्रियों को निकालने के बाद उनके लिए भोजन, medical check-up, ठहरने और आगे की रेल यात्रा की व्यवस्था की। यात्रियों का दल नेपाल से सीतामढ़ी होते हुए पटना पहुंचा, जहां से उन्हें नागपुर के लिए रवाना किया गया। यह समूह 19 अगस्त को धार्मिक यात्रा के लिए नेपाल गया था। 26 अगस्त को flash floods और लगातार बारिश के कारण वापसी के रास्ते प्रभावित होने लगे, जिसके बाद यात्रियों को सुरक्षित निकालने के लिए महाराष्ट्र, बिहार और नेपाल के अधिकारियों के बीच coordination शुरू हुआ। 28 अगस्त को सीतामढ़ी पहुंचा दल बिहार सरकार के Disaster Management Department के मुताबिक 28 अगस्त को सीतामढ़ी जिला प्रशासन ने नेपाल सीमा पर यात्रियों को receive किया। Administration की teams ने उन्हें border से सुरक्षित escort किया और भोजन, drinking water तथा दूसरी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराईं। जिन यात्रियों को कमजोरी या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी थी, उनका medical check-up भी कराया गया। इसके बाद सभी यात्रियों को buses के जरिए पटना भेजा गया। ट्रेन में लगाए गए दो Extra AC Coaches यात्रियों की बड़ी संख्या को देखते हुए बिहार सरकार ने Railways से coordination किया। मुख्य सचिव की Railway Board के Chairman से बातचीत के बाद संबंधित train में दो अतिरिक्त 3-tier AC coaches लगाए गए, ताकि यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक तरीके से महाराष्ट्र पहुंचाया जा सके। Hindustan Times की 31 अगस्त की report के मुताबिक 102 यात्री रविवार को Patna-Nanded Express से Nagpur पहुंचे, जबकि group के चार अन्य सदस्य एक दिन पहले ही वापस पहुंच चुके थे। इस तरह 106 सदस्यीय पूरा group सुरक्षित भारत लौट आया। यात्रियों ने सुनाई बाढ़ की भयावह कहानी नेपाल से लौटे यात्रियों ने बताया कि कई जगह roads और bridges floodwater से घिर चुके थे और उन्हें अपनी जान को लेकर गंभीर डर था। कुछ यात्रियों के मुताबिक वापसी के दौरान उन्होंने तेज पानी में दूसरी vehicles को बहते देखा। भारी बारिश और routes बंद होने के कारण कई लोगों को यह आशंका होने लगी थी कि वे सुरक्षित घर लौट पाएंगे या नहीं। यात्रियों का कहना है कि Bihar पहुंचने के बाद food, shelter और medical assistance मिलने से उन्हें बड़ी राहत मिली। महाराष्ट्र और बिहार सरकार के बीच Coordination तीर्थयात्रियों ने संकट के दौरान Maharashtra government से संपर्क किया था, जिसके बाद Bihar government और local administration से coordination किया गया। DD News के मुताबिक Bihar government के निर्देश पर Sitamarhi administration ने border से evacuation और onward journey की व्यवस्था की। बाद में Patna से Nagpur तक rail transport सुनिश्चित किया गया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis के office ने भी Nepal side पर यात्रियों की safe return के लिए coordination किया था। Raksha Bandhan पर भावुक हुआ माहौल सीतामढ़ी में यात्रियों का पहुंचना Raksha Bandhan के आसपास हुआ, जिससे वहां भावुक माहौल बन गया। कुछ महिला यात्रियों ने उनकी मदद करने वाले Bihar के अधिकारियों और स्थानीय लोगों को राखी बांधी। यात्रियों ने कहा कि संकट के समय मिले सहयोग ने उन्हें यह महसूस कराया कि वे अपने घर से दूर होते हुए भी अकेले नहीं थे। 31 August की Latest Situation आज 31 अगस्त 2026 तक स्थिति यह है: इसलिए सबसे accurate headline होगी: नेपाल बाढ़ में फंसे महाराष्ट्र के 106 तीर्थयात्री सुरक्षित लौटे; बिहार सरकार ने भोजन, इलाज और ट्रेन की व्यवस्था कर पहुंचाया घर स्रोत – बिहार आपदा प्रबंधन विभाग, DD News, Hindustan Times, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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Nepal Floods: Rescue Operation के बीच 2,465 लोग Evacuate; Death Toll 626 पहुंचा, करीब 2,000 से ज्यादा अब भी लापता

काठमांडू: Nepal में विनाशकारी flash floods के बाद आज, 29 अगस्त 2026 को rescue और relief operations बड़े स्तर पर जारी हैं। Nepal Army की शनिवार सुबह की update के मुताबिक अब तक 2,465 stranded लोगों को सुरक्षित निकाला गया, जिनमें 163 foreign nationals भी शामिल हैं। हालांकि दिन बढ़ने के साथ disaster का scale और गंभीर हो गया और Nepal में confirmed death toll 626 तक पहुंच गया। Rasuwa और आसपास के central Nepal districts में बुधवार को आई flash flood ने settlements, highways, bridges और hydropower projects को भारी नुकसान पहुंचाया है। हजारों security personnel search, evacuation और relief operations में लगे हुए हैं। सुबह तक 2,465 लोगों को किया गया Evacuate Nepal Army के Public Relations Directorate के मुताबिक शनिवार सुबह तक कुल 2,465 लोगों को flood-affected areas से evacuate किया गया। इनमें 163 foreign nationals शामिल हैं: कुल evacuees में से 2,265 लोगों को helicopters की मदद से निकाला गया, जबकि करीब 200 लोगों को land routes से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया। Hydropower Tunnels से 191 Workers निकाले गए Flood के कारण Rasuwa और Trishuli क्षेत्र में कई hydropower projects भी प्रभावित हुए हैं। Nepal Army के मुताबिक अलग-अलग hydropower project tunnels में फंसे 191 workers को सुरक्षित evacuate किया गया है। हालांकि कुछ hydropower sites पर अभी भी गंभीर challenges बने हुए हैं और rescue teams mud, debris तथा damaged access routes के बीच लोगों की तलाश कर रही हैं। 1,706 लोगों को Medical Assistance Flood-affected लोगों के इलाज के लिए Dhunche और Trishuli में emergency health centres बनाए गए हैं। शनिवार सुबह तक इन centres में अलग-अलग प्रभावित इलाकों से निकाले गए 1,706 लोगों को medical assistance दी जा चुकी थी। Rescue teams के साथ doctors और emergency medical personnel को भी affected areas में deploy किया गया है। Death Toll बढ़कर 626 पहुंचा शनिवार को सामने आई बाद की update में Nepal में flood से मरने वालों की संख्या 626 तक पहुंच गई। Nepal की National Disaster Risk Reduction and Management Authority (NDRRMA) के मुताबिक bodies देश के आठ प्रभावित districts से recover की गई हैं। इससे साफ है कि शनिवार सुबह आई “500 से ज्यादा deaths” वाली शुरुआती संख्या दिन के दौरान तेजी से बढ़ी। इसलिए latest available figure के आधार पर 626 deaths लिखना ज्यादा accurate है। हजारों लोग अभी भी Missing Missing persons की संख्या को लेकर अलग-अलग agencies और updates में अंतर बना हुआ है। दिन की शुरुआती reports में करीब 2,000 लोगों के missing होने की जानकारी दी गई थी। बाद की Reuters update में Nepal और Tibet को मिलाकर करीब 3,000 लोगों के missing होने की बात सामने आई, जिनमें 540 से ज्यादा foreign nationals भी शामिल बताए गए हैं। इसलिए missing figures अभी final नहीं हैं और rescue तथा identification operations आगे बढ़ने के साथ इनमें बदलाव हो सकता है। 11,000 से ज्यादा Security Personnel किए गए Deploy शनिवार सुबह तक Nepal में 11,000 से ज्यादा security personnel search-and-rescue operation में लगाए गए थे। इनमें अकेले Nepal Army के 5,000 से ज्यादा personnel शामिल हैं। Army के अलावा Nepal Police, Armed Police Force और local disaster-response teams भी affected areas में काम कर रही हैं। Helicopters का इस्तेमाल उन remote locations तक पहुंचने में किया जा रहा है जहां roads और bridges टूटने के कारण ground access मुश्किल है। खराब मौसम से Rescue Operation पर असर दिन के दौरान खराब मौसम ने rescue operation को नई चुनौती दी। Reuters की latest report के मुताबिक inclement weather के कारण Nepal ने कुछ search-and-rescue operations temporarily suspend किए। इसलिए यह कहना कि पूरे दिन rescue operation लगातार “तेज” होता रहा, पूरी तस्वीर नहीं होगी। Accurate स्थिति यह है कि सुबह large-scale evacuations और rescue जारी थे, लेकिन बाद में खराब मौसम ने कुछ operations को temporarily प्रभावित किया। Mugling-Kathmandu Highway फिर खुला Disaster के बीच शनिवार को एक राहत की खबर भी आई। Nepal Police के मुताबिक महत्वपूर्ण Mugling-Kathmandu highway शनिवार को दोबारा खोल दिया गया। यह highway बुधवार से flood और landslide के खतरे के कारण बंद था। Situation assess करने के बाद vehicles को धीरे-धीरे आगे बढ़ने की अनुमति दी गई। Highway खुलने से कई दिनों से फंसे यात्रियों और relief supplies की movement में मदद मिलने की उम्मीद है। कई Roads और Bridges तबाह Flash flood ने central Nepal के transport infrastructure को बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचाया है। Roads, bridges और hydropower infrastructure के destroyed होने के कारण कई remote areas तक relief teams की पहुंच मुश्किल बनी हुई है। इस वजह से helicopters rescue operation का महत्वपूर्ण हिस्सा बने हुए हैं। Nepal ने Technical International Help मांगी Nepal ने शुरुआत में कहा था कि उसकी domestic security agencies search-and-rescue operation संभाल सकती हैं। लेकिन disaster का scale बढ़ने के बाद Nepal ने specialised technical assistance की जरूरत बताई है। Foreign Minister के मुताबिक Nepal को tunnel rescue, communications restoration, forensic services और DNA identification जैसी specialised capabilities में international technical support की जरूरत है। India ने relief flights भेजने के साथ tunnel और medical rescue specialists भेजने की पेशकश भी की है। Reconstruction पर $4-5 Billion खर्च का अनुमान Flood ने केवल human lives ही नहीं बल्कि Nepal के infrastructure को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। Reuters के मुताबिक Nepal का शुरुआती अनुमान है कि reconstruction में करीब $4 billion से $5 billion तक की जरूरत पड़ सकती है। Buildings, bridges, roads, power facilities और communication infrastructure को हुए नुकसान का पूरा assessment अभी जारी है। इसलिए final economic damage figure आगे और बदल सकता है। Disaster Relief Fund में बड़ी मदद Nepal सरकार के Prime Minister’s Disaster Relief Fund के लिए भी donations तेजी से बढ़ रहे हैं। शनिवार सुबह की report के मुताबिक शुक्रवार रात तक 2.295 billion Nepali rupees से ज्यादा नई सहायता जमा की गई थी। Government ने Ministry of Finance को relief contributions coordinate करने की जिम्मेदारी दी है। Flood-hit areas को disaster zones घोषित किए जाने के बाद organisations और individuals द्वारा donations दिए जा रहे हैं। दूसरी Flood का खतरा अभी खत्म नहीं Flood के बाद Himalayan region में नई glacial और barrier lakes…

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Nepal Floods: मृतकों की संख्या 469 पहुंची; Tibet में नई बाढ़ का खतरा, Rescue Teams को पीछे हटाया गया

काठमांडू/तिब्बत: Nepal-Tibet border पर आई विनाशकारी flash flood में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 28 अगस्त 2026 की ताजा जानकारी के मुताबिक Nepal में 469 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि China के Tibet क्षेत्र में अब तक 3 मौतें दर्ज हैं। दोनों क्षेत्रों को मिलाकर confirmed death toll कम से कम 472 हो गया है। सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं और disaster zone में नई बाढ़ का खतरा rescue operation के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। सबसे गंभीर development Nepal-China border पर debris से बनी एक बड़ी barrier lake का overflow होना है। इसके कारण Chinese authorities ने Tibet में rescue personnel और vehicles को temporarily सुरक्षित स्थानों पर पीछे हटने का आदेश दिया, जबकि Nepal में भी कुछ समय के लिए search-and-rescue operation रोकना पड़ा। 469 मौतें केवल Nepal में Nepal Police ने शुक्रवार सुबह बताया कि देश में confirmed death toll एक दिन पहले के करीब 390 से बढ़कर 469 हो गया है। China की तरफ Tibet में अभी तक 3 deaths confirm की गई हैं। इसलिए अगर Nepal और Tibet दोनों को जोड़ा जाए तो कुल confirmed deaths कम से कम 472 हैं। यह संख्या आगे बढ़ सकती है क्योंकि बड़ी संख्या में लोग अभी तक लापता हैं और कई remote areas तक rescue teams पूरी तरह नहीं पहुंच पाई हैं। 1,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता Associated Press की latest update के मुताबिक Nepal और Tibet को मिलाकर 1,500 से ज्यादा लोगों के missing होने की reports हैं। Reuters के अनुसार Nepal और Tibet में लगभग 1,000 से अधिक लोग missing बताए जा रहे थे, जबकि अलग-अलग official updates में संख्या लगातार बदल रही है। Foreign tourists और pilgrims भी missing लोगों में बड़ी संख्या में शामिल हैं। Disaster के scale और communication breakdown के कारण missing-person figures में लगातार revision हो रहा है। Tibet के Gyirong में 558 लोग लापता China के Tibet Autonomous Region में सबसे ज्यादा नुकसान Gyirong County और border crossing area में हुआ है। Chinese state broadcaster CCTV के मुताबिक वहां 558 लोग missing हैं, जिनमें करीब 260 foreign nationals भी शामिल हैं। Gyirong Nepal और Tibet के बीच महत्वपूर्ण border route है और Mount Kailash तथा दूसरे Himalayan destinations जाने वाले tourists और pilgrims भी इस corridor का इस्तेमाल करते हैं। नई Barrier Lake बनी सबसे बड़ा खतरा 26 अगस्त की devastating flood के बाद पहाड़ों से आए rock, ice और mud ने river system के कुछ हिस्सों को block कर दिया। इस blockage से एक बड़ी barrier lake बन गई। Reuters के मुताबिक गुरुवार को इसमें करीब 1.5 से 2 million cubic metres पानी था, लेकिन शुक्रवार तक reservoir बढ़कर 2.5 million cubic metres से ज्यादा हो गया। पानी बढ़ने के बाद lake overflow करने लगी। Authorities को डर है कि अगर natural debris dam अचानक टूटता है तो downstream इलाकों में एक और powerful flash flood आ सकती है। Tibet में Rescue Teams को पीछे हटाया गया नई flood warning के बाद Chinese authorities ने high-risk area में काम कर रहे सभी rescue personnel और vehicles को safe location पर stand-by रहने को कहा। Reuters के मुताबिक lake के burst होने के खतरे के कारण यह preventive action लिया गया। इसलिए “Tibet में rescue operation permanently बंद” कहना सही नहीं होगा। स्थिति यह है कि कुछ high-risk zones में rescue temporarily suspend/withdraw किया गया है, ताकि rescuers खुद दूसरी flood wave की चपेट में न आएं। Nepal में भी 90 मिनट रोका गया Operation Nepal की तरफ भी authorities ने नई flood warning मिलने के बाद rescue operations को करीब 90 minutes के लिए रोकने की जानकारी दी। Rasuwa district में residents को hills और ऊंचे स्थानों की ओर जाते देखा गया, क्योंकि river level फिर बढ़ने लगा था। हालांकि Associated Press की बाद की update में Nepal Police spokesperson ने कहा कि rescue operation पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और teams high alert पर काम कर रही हैं। इसलिए situation तेजी से बदल रही है। River Level फिर बढ़ा Rasuwa district के वरिष्ठ अधिकारी Narendra Pariyar ने Reuters को बताया कि authorities को upstream lake के bank टूटने की warning मिली थी। उन्होंने कहा कि नदी में पानी का level बढ़ता दिखाई दे रहा है, हालांकि उस समय exact rise का आंकड़ा उपलब्ध नहीं था। इस warning ने पहले से devastated downstream settlements में panic बढ़ा दिया। 26 अगस्त को कैसे आई थी इतनी भयानक Flood? Initial scientific assessments के मुताबिक disaster की शुरुआत Himalayan region में बड़े glacier/ice-rock collapse से हुई। एक विशाल rock और ice mass नीचे गिरा, जिससे river temporarily block हो गई। बाद में trapped water ने debris barrier को तोड़ा और विशाल मात्रा में: तेजी से downstream areas की ओर बढ़ा। इस surge ने Nepal और Tibet के कई settlements को कुछ ही मिनटों में तबाह कर दिया। USGS ने दर्ज किया Glacier Collapse U.S. Geological Survey यानी USGS ने घटना के दौरान seismic signals का analysis किया। AP के मुताबिक agency ने इसे magnitude 5.2 के बराबर glacier collapse event के रूप में identify किया, जिसमें satellite imagery और nearby seismic stations के data का इस्तेमाल किया गया। Scientists अभी भी exact sequence की जांच कर रहे हैं। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि पहले earthquake आया और उसी ने glacier तोड़ा। मौजूदा evidence glacier collapse को primary disaster mechanism की ओर इशारा करता है। Roads और Bridges पूरी तरह तबाह Flood ने Kathmandu और Tibet के Lhasa region को जोड़ने वाले important Himalayan route को भी गंभीर नुकसान पहुंचाया है। Power stations, bridges, roads और entire settlements flood और debris की चपेट में आए। कुछ areas में road connectivity पूरी तरह खत्म होने के कारण rescuers को helicopters, sniffer dogs और heavy machinery पर निर्भर रहना पड़ रहा है। Remote valleys तक पहुंच अभी भी बड़ी चुनौती है। Foreign Tourists भी बड़ी संख्या में Missing Disaster के समय Nepal-Tibet region में बड़ी संख्या में foreign trekkers, tourists और pilgrims मौजूद थे। Reuters के मुताबिक missing लोगों में कम से कम 540 foreigners शामिल हैं। अलग-अलग nationality lists में…

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