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नेपाल बाढ़ के बाद अपनों की तलाश जारी; 4,200 से ज्यादा लापता, आठ दिन बाद टूटने लगी परिवारों की उम्मीद

काठमांडू: नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के आठ दिन बाद भी हजारों परिवार अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे हैं। Hospitals, morgues, rescue camps और प्रभावित इलाकों में लगातार खोज के बावजूद कई लोगों का कोई सुराग नहीं मिला है। 3 सितंबर तक कम से कम 1,204 लोगों की मौत और 4,200 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी है। समय बीतने के साथ जीवित लोगों के मिलने की उम्मीद कमजोर पड़ रही है। कई परिवार अब अपने लापता परिजनों के शव तक न मिलने पर कुश से प्रतीकात्मक पुतले बनाकर अंतिम संस्कार करने को मजबूर हो रहे हैं। आठ दिन बाद भी हजारों का सुराग नहीं Rasuwa, Nuwakot और Trishuli नदी के आसपास के इलाकों में floodwaters ने पूरे के पूरे settlements को तबाह कर दिया था। कई परिवारों के एक से अधिक सदस्य अब भी missing हैं। Kathmandu Post के मुताबिक केवल Bidur Municipality-7 के Sole इलाके में करीब 100 लोगों के लापता होने की बात स्थानीय पीड़ितों ने कही है। कई परिवार hospitals और police records में तस्वीरें देखकर अपने रिश्तेदारों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं। शव न मिलने पर प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार लंबे इंतजार के बाद कुछ परिवारों ने अपने लापता परिजनों के जीवित मिलने की उम्मीद छोड़नी शुरू कर दी है। Kathmandu के Pashupati Aryaghat में बुधवार को कई परिवारों ने कुश घास से बने प्रतीकात्मक शरीर का अंतिम संस्कार किया। Nuwakot के Nirajan Poudel ने बाढ़ में अपने माता-पिता सहित परिवार के पांच सदस्यों को खो दिया। कोई शव नहीं मिलने के बाद परिवार ने सभी के symbolic funeral rites किए। DNA Samples से पहचान की कोशिश Disaster के बाद बड़ी संख्या में मिले शवों की पहचान भी authorities के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। कई bodies की हालत ऐसी है कि visual identification संभव नहीं है। Authorities परिवारों से DNA samples लेने और recovered bodies के records तैयार करने का काम कर रही हैं। कुछ unidentified bodies को temporary graves में रखा गया है, ताकि बाद में DNA matching के जरिए उनकी पहचान की जा सके। Hydropower Tunnels में अब भी उम्मीद आम search areas में survivors मिलने की उम्मीद कम हुई है, लेकिन hydropower projects के tunnels में rescue operation अभी भी जारी है। Reuters के मुताबिक सैकड़ों workers अब भी missing हैं और rescuers को उम्मीद है कि कुछ लोग tunnel के ऐसे हिस्सों में हो सकते हैं जहां हवा, पानी या emergency supplies उपलब्ध हों। Rasuwagadhi project में 46 workers के एक सुरक्षित chamber में जीवित होने की संभावना अधिकारियों ने जताई है। India, China और दूसरे देशों की technical teams भी Nepal के rescue operations में सहायता कर रही हैं। घर भी गए, अपनों का भी पता नहीं बाढ़ में 7,000 से ज्यादा घर बह गए या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। कई survivors Kathmandu पहुंच तो गए हैं, लेकिन उनके पास न रहने की स्थायी जगह है और न ही मृत या लापता परिजनों के mourning rituals करने के लिए पर्याप्त स्थान। Kathmandu के कई Kiriyaputri Bhawan पूरी तरह भर चुके हैं। कुछ जगह अतिरिक्त tents लगाकर पीड़ित परिवारों के लिए व्यवस्था करनी पड़ी है। Rescue से Rehabilitation की ओर बढ़ रहा Nepal एक सप्ताह से ज्यादा समय बीतने के बाद Nepal government का focus धीरे-धीरे rescue के साथ relief, rehabilitation और reconstruction की तरफ बढ़ रहा है। हालांकि missing लोगों की तलाश बंद नहीं की गई है। Roads, bridges, power projects और communication infrastructure को हुए भारी नुकसान के बीच प्रभावित परिवारों को shelter, food और basic services उपलब्ध कराना अब बड़ी चुनौती है। 3 सितंबर तक सबसे दर्दनाक तस्वीर उन परिवारों की है जो अब भी किसी phone call, photograph, DNA match या rescue-team update का इंतजार कर रहे हैं। वहीं कई परिवार आठ दिनों की तलाश के बाद अपने लापता रिश्तेदारों का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार करने लगे हैं। स्रोत – Nepal Disaster Authorities, Associated Press, Reuters, The Kathmandu Post जय राष्ट्र न्यूज़

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