रुपया ₹96.39 प्रति डॉलर तक गिरा, crude oil और FII selling का बढ़ा दबाव
मुंबई: भारतीय रुपया मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को शुरुआती कारोबार में कमजोर होकर ₹96.39 प्रति अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। घरेलू मुद्रा पर ऊंची crude oil prices, foreign institutional investors (FII) की बिकवाली और मजबूत dollar का दबाव देखने को मिला। शुरुआती सत्र में रुपया अपने पिछले बंद स्तर के मुकाबले कमजोर खुला और डॉलर के मुकाबले और नीचे फिसल गया। शुरुआती कारोबार में ₹96.39 तक पहुंचा रुपया Interbank foreign exchange market में रुपया कमजोरी के साथ खुला। कारोबार के शुरुआती हिस्से में भारतीय मुद्रा गिरकर ₹96.39 प्रति डॉलर तक पहुंच गई, जो हाल के महीनों में रुपये के सबसे कमजोर स्तरों में से एक है। Crude oil की तेजी बनी बड़ी वजह भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा crude oil imports के जरिए पूरा करता है। जब international crude prices बढ़ती हैं तो तेल कंपनियों की dollar demand भी बढ़ती है। इससे foreign exchange market में रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। FII selling ने भी बढ़ाया दबाव Foreign institutional investors की भारतीय equities से निकासी भी रुपये की कमजोरी की बड़ी वजह मानी जा रही है। FII selling बढ़ने पर विदेशी निवेशक भारतीय assets बेचकर dollars में funds convert करते हैं, जिससे dollar demand बढ़ सकती है और रुपये पर दबाव आता है। मजबूत Dollar का असर Global markets में अमेरिकी dollar की मजबूती ने भी emerging-market currencies को प्रभावित किया। US Treasury yields ऊंचे रहने और Federal Reserve की आगे की monetary policy को लेकर uncertainty से dollar को support मिला है। RBI की intervention पर भी नजर Forex traders की नजर Reserve Bank of India की गतिविधियों पर भी बनी हुई है। आमतौर पर रुपये में तेज volatility होने पर RBI state-run banks के जरिए dollar selling करके बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव सीमित करने की कोशिश कर सकता है। Importers के लिए बढ़ सकती है लागत रुपये की कमजोरी का सीधा असर import-dependent sectors पर पड़ सकता है। Crude oil, electronics, machinery और अन्य dollar-denominated imports महंगे होने से कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। महंगाई पर भी पड़ सकता है असर अगर रुपया लंबे समय तक कमजोर रहता है और crude oil prices भी ऊंची बनी रहती हैं, तो imported inflation का खतरा बढ़ सकता है। Fuel और transportation costs में बढ़ोतरी का असर दूसरी वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। Exporters को मिल सकता है कुछ फायदा कमजोर रुपया exporters के लिए कुछ हद तक फायदेमंद हो सकता है। IT services, pharmaceuticals और अन्य export-oriented businesses को dollar में होने वाली कमाई को रुपये में बदलने पर ज्यादा revenue मिल सकता है, हालांकि इसका प्रभाव sector और hedging strategy पर निर्भर करता है। RBI policy पर बाजार की नजर Currency market की नजर RBI की Monetary Policy Committee की बैठक पर भी है। बाजार यह देख रहा है कि inflation, rupee weakness और crude oil prices को देखते हुए RBI interest rates पर क्या रुख अपनाता है। आगे भी volatility की आशंका आने वाले दिनों में रुपये की दिशा crude oil prices, FII flows, dollar index, US bond yields और RBI policy संकेतों पर निर्भर करेगी। Global uncertainty बनी रहने पर forex market में volatility जारी रह सकती है। source – The Times of India / Reuters / PTI जय राष्ट्र न्यूज़

