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Trump बोले—ईरान में अमेरिकी जमीनी सैनिक भेजने की संभावना कम, परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से भी किया इनकार

वॉशिंगटन, 16 अक्टूबर 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि ईरान के खिलाफ जारी संघर्ष में अमेरिकी जमीनी सैनिकों को तैनात करने की संभावना बेहद कम है। Newsmax को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि वह ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास समुद्री सुरक्षा को लेकर तनाव बना हुआ है। Trump ने क्या कहा? ट्रंप ने कहा कि उन्हें ईरान में अमेरिकी सैनिकों को जमीन पर उतारने की जरूरत नजर नहीं आती। उन्होंने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की संभावना को भी खारिज कर दिया। इन टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि फिलहाल अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान में सीधे जमीनी सैन्य अभियान और परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से दूरी बनाए रखने की बात कर रहे हैं। हालांकि, इससे संघर्ष के अन्य सैन्य विकल्पों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती। बयान क्यों अहम है? ट्रंप का बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के संभावित अगले कदमों को लेकर चर्चा जारी है। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अमेरिकी सैन्य योजनाकार ईरान के खिलाफ GBU-43/B ‘Mother of All Bombs’ (MOAB) जैसे शक्तिशाली गैर-परमाणु हथियार के संभावित इस्तेमाल पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, इस रिपोर्ट की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई थी। MOAB एक पारंपरिक गैर-परमाणु बम है। इसके संभावित इस्तेमाल की चर्चा परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से अलग मुद्दा है। Strait of Hormuz में समुद्री खतरा बरकरार ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना ने क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरे को गंभीर बताया है। जहाजों पर संभावित हमलों और समुद्री परिवहन में व्यवधान ने वैश्विक व्यापार तथा ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल परिवहन के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां लंबे समय तक व्यवधान रहने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार प्रभावित हो सकते हैं। तेल की कीमतों पर भी असर मध्य पूर्व में तनाव और तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच कच्चे तेल की कीमतों पर बाजार की नजर बनी हुई है। 16 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 105.45 डॉलर प्रति बैरल था। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही सामान्य स्तर से नीचे रहने की खबरों ने आपूर्ति संबंधी चिंताओं को बढ़ाया है। हालांकि, तेल की कीमतें केवल भू-राजनीतिक तनाव से नहीं, बल्कि वैश्विक मांग, उत्पादन और अन्य बाजार परिस्थितियों से भी प्रभावित होती हैं। ईरान से जुड़े लोगों और संस्थाओं पर नई पाबंदियां अमेरिकी प्रशासन ने 15 अक्टूबर को ईरान से जुड़े 16 व्यक्तियों और 10 संस्थाओं पर नई प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखना है। इससे संकेत मिलता है कि जमीनी सैन्य कार्रवाई और परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से इनकार के बावजूद वॉशिंगटन ईरान के खिलाफ आर्थिक तथा अन्य रणनीतिक दबाव के विकल्पों का इस्तेमाल जारी रखे हुए है। संघर्ष खत्म होने के संकेत अभी स्पष्ट नहीं ट्रंप की टिप्पणियों से ईरान में अमेरिकी जमीनी सैनिकों की तैनाती और परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को लेकर उनकी मौजूदा स्थिति सामने आई है। हालांकि, इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि संघर्ष जल्द समाप्त हो जाएगा। हवाई हमले, आर्थिक प्रतिबंध और समुद्री सुरक्षा से जुड़े कदम आगे की अमेरिकी रणनीति का हिस्सा बने रह सकते हैं। क्षेत्र में हालात किस दिशा में जाएंगे, यह दोनों देशों के अगले फैसलों और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा स्थिति पर निर्भर करेगा। स्रोत – The Indian Express, Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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US-Iran War: ट्रंप बोले—ईरानी नेतृत्व को निशाना बनाने में अमेरिका शायद “बहुत आगे” निकल गया, Gulf में उड़ानें प्रभावित

वॉशिंगटन, 13 अक्टूबर 2026: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के नेतृत्व को निशाना बनाने की अमेरिकी रणनीति शायद जरूरत से ज्यादा आगे बढ़ गई। उनके मुताबिक, कई वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों के मारे जाने के बाद संभावित शांति वार्ता के लिए यह तय करना मुश्किल हो रहा है कि तेहरान में किससे बातचीत की जाए और किसके पास फैसले लेने का अधिकार है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के बीच कूटनीतिक प्रयास अनिश्चित बने हुए हैं। वहीं, खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं के कारण हवाई और समुद्री परिवहन पर भी असर पड़ रहा है। ट्रंप बोले—ईरान में किससे बातचीत करें, यह स्पष्ट नहीं ओहायो के यंग्सटाउन में एक चुनावी रैली के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरानी नेतृत्व को निशाना बनाने के मामले में अमेरिका शायद “बहुत आगे” चला गया है। उन्होंने संकेत दिया कि वरिष्ठ अधिकारियों के मारे जाने से संभावित वार्ता के लिए उपयुक्त प्रतिनिधियों की पहचान करना कठिन हो सकता है। ट्रंप की टिप्पणी से संकेत मिलता है कि सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ बातचीत के लिए ईरान में प्रभावी नेतृत्व और निर्णय लेने वाले अधिकारियों की पहचान भी अमेरिकी प्रशासन के सामने एक चुनौती हो सकती है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन जुलाई 2024 से पद पर हैं। हालांकि, ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व की मौजूदा स्थिति और संभावित वार्ताकारों को लेकर अनिश्चितता जताई। ईरान की सैन्य क्षमता को लेकर ट्रंप के दावे ट्रंप ने रैली के दौरान दावा किया कि युद्ध में ईरान की वायुसेना और नौसैनिक क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने ईरान के सभी 159 नौसैनिक जहाजों के नष्ट होने का भी दावा किया। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। इसलिए इन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। खाड़ी क्षेत्र में विमान सेवाओं पर असर ईरान युद्ध और क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों का असर खाड़ी क्षेत्र की हवाई सेवाओं पर भी पड़ रहा है। सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास हमलों की खबरों के बाद कई एयरलाइंस ने सऊदी अरब जाने वाली उड़ानें रद्द या अस्थायी रूप से निलंबित की हैं। रिपोर्टों के अनुसार, एयर इंडिया, इंडिगो, अकासा एयर, एतिहाद और कतर एयरवेज समेत कई विमानन कंपनियों की सेवाएं प्रभावित हुई हैं। यात्रियों को उड़ानों की स्थिति और संभावित बदलावों के लिए संबंधित एयरलाइन की आधिकारिक सूचना देखने की सलाह दी जाती है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ी समुद्री सुरक्षा की चिंता फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास वाणिज्यिक जहाजों से जुड़ी सुरक्षा घटनाओं ने समुद्री परिवहन को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इस क्षेत्र से वैश्विक ऊर्जा व्यापार का महत्वपूर्ण हिस्सा गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी तरह का व्यवधान तेल आपूर्ति, माल ढुलाई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित कर सकता है। समुद्री सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं और जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंधों या जोखिमों का असर केवल क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी पड़ सकता है। शांति वार्ता पर अनिश्चितता बरकरार अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे कूटनीतिक प्रयासों के केंद्र में बने हुए हैं। ट्रंप की ताजा टिप्पणी सैन्य कार्रवाई और कूटनीति के बीच संतुलन को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत है। हालांकि, इससे किसी औपचारिक वार्ता की शुरुआत या समझौते की संभावना की पुष्टि नहीं होती। फिलहाल, संघर्ष का आगे का रुख दोनों देशों के फैसलों, क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति और कूटनीतिक संपर्कों पर निर्भर करेगा। खाड़ी क्षेत्र में उड़ानों और समुद्री परिवहन पर पड़ रहे असर के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर हालात पर बनी हुई है। Source: Reuters / Al Jazeera / The Indian Express / The Business Standard जय राष्ट्र न्यूज़

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US-Iran तनाव से कच्चा तेल फिर चढ़ा, Brent $106 के करीब; वैश्विक बाजारों की बढ़ी चिंता

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा मध्य पूर्व से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं ने वैश्विक बाजारों की चिंता फिर बढ़ा दी है। 29 सितंबर 2026 को Brent crude लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूत होकर करीब 106 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। वहीं WTI crude भी 93 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार करता दिखा। लगातार दूसरे दिन महंगा हुआ कच्चा तेल मंगलवार के शुरुआती कारोबार में Brent crude करीब 105.91 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि बाद के कारोबार में यह 106 डॉलर से ऊपर चला गया। US West Texas Intermediate यानी WTI crude भी बढ़कर करीब 93.32 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। बाजार में तेल की आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता कीमतों को सहारा दे रही है। US-Iran तनाव से बढ़ी चिंता अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव तेल बाजार के लिए सबसे बड़ा जोखिम बना हुआ है। दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए बातचीत की कोशिशें जारी हैं, लेकिन अभी तक किसी स्थायी समाधान पर सहमति नहीं बन पाई है। हालिया घटनाक्रम के बाद निवेशकों को आशंका है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो मध्य पूर्व से कच्चे तेल की आपूर्ति फिर प्रभावित हो सकती है। Strait of Hormuz पर टिकी दुनिया की नजर वैश्विक ऊर्जा बाजार की नजर Strait of Hormuz पर बनी हुई है। यह समुद्री मार्ग मध्य पूर्व से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक तेल पहुंचाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। क्षेत्र में किसी भी तरह की बाधा या सैन्य तनाव से shipping costs बढ़ सकती हैं और crude oil supply पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि इस इलाके से जुड़ी हर नई खबर का असर तेल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। Middle East से निर्यात में सुधार सितंबर में मध्य पूर्व के प्रमुख तेल उत्पादकों से crude exports बढ़कर करीब 12.8 million barrels per day पहुंचने के शुरुआती आंकड़े सामने आए हैं। सऊदी अरब और UAE से बढ़ी सप्लाई ने बाजार को कुछ राहत दी है, लेकिन वैकल्पिक shipping arrangements की ऊंची लागत के कारण स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। वैश्विक बाजारों में बढ़ी बेचैनी महंगा तेल केवल energy market तक सीमित नहीं है। इससे दुनिया भर के शेयर बाजारों, currencies और bond markets पर भी दबाव बढ़ रहा है। अमेरिकी 10-year Treasury yield करीब 5.24% तक पहुंच गई है। तेल की बढ़ती कीमतों से inflation फिर तेज होने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। डॉलर हुआ मजबूत मध्य पूर्व में तनाव और अमेरिकी bond yields में तेजी के बीच डॉलर भी मजबूत बना हुआ है। Dollar Index करीब दो महीने के उच्च स्तर के आसपास पहुंच गया है। निवेशक अब अमेरिका के आने वाले inflation और employment data पर नजर रख रहे हैं, क्योंकि इनके आधार पर Federal Reserve की आगे की ब्याज दर नीति का संकेत मिल सकता है। भारत पर भी पड़ सकता है असर भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल विदेश से आयात करता है। ऐसे में crude oil की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने पर देश के import bill, inflation और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। तेल महंगा होने से transport, aviation, logistics और manufacturing कंपनियों की लागत भी बढ़ सकती है। ₹96 प्रति डॉलर के करीब रुपया कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बीच भारतीय रुपया भी दबाव में है। सोमवार को रुपया करीब ₹95.98 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था और बाजार की नजर अब ₹96 के महत्वपूर्ण स्तर पर है। रुपये में तेज गिरावट रोकने के लिए RBI की संभावित दखल पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। महंगाई बढ़ने का भी खतरा अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं तो इसका असर ईंधन से लेकर परिवहन और उत्पादन लागत तक दिखाई दे सकता है। इससे कई देशों में inflation पर दबाव बढ़ सकता है और केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है। अब बातचीत के नतीजों पर नजर तेल बाजार की आगे की दिशा काफी हद तक अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत तथा Strait of Hormuz की स्थिति पर निर्भर करेगी। अगर तनाव कम होता है और तेल की सप्लाई सामान्य होती है तो कीमतों में नरमी आ सकती है। वहीं किसी नए टकराव की स्थिति में crude oil में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिल सकता है। source – Reuters Investing.com Australia जय राष्ट्र न्यूज़

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Middle East Conflict में युद्ध के लिए सेना नहीं भेजेगा South Korea; President Lee ने Maritime Security पर रखा Focus

सियोल: South Korea के राष्ट्रपति Lee Jae Myung ने साफ किया है कि उनका देश Middle East में ऐसा कोई military deployment नहीं करेगा, जिससे South Korea सीधे किसी युद्ध या सैन्य संघर्ष में शामिल हो। हालांकि, Seoul सरकार Strait of Hormuz और आसपास के समुद्री मार्गों में commercial shipping, crude oil shipments और South Korean नागरिकों की सुरक्षा के लिए अपनी भूमिका बढ़ाने के विकल्पों की समीक्षा कर रही है। युद्ध में शामिल नहीं होगा South Korea 18 September को एक press conference में President Lee ने कहा कि ऐसी troop deployment नहीं की जाएगी जो South Korea को किसी overseas conflict या युद्ध में खींचे। उन्होंने कहा कि युद्ध में प्रत्यक्ष भागीदारी से दूर रहने की नीति आगे भी जारी रहेगी। Lee ने यह भी स्पष्ट किया कि South Korean troops या military assets को ऐसे उद्देश्य से deploy नहीं किया जाएगा जिससे देश ongoing Iran conflict में प्रत्यक्ष रूप से शामिल हो जाए। Maritime Security पर हो सकता है बड़ा Role हालांकि South Korea ने combat involvement से इनकार किया है, लेकिन सरकार maritime security से जुड़े सीमित विकल्पों पर विचार कर रही है। President Lee के मुताबिक South Korea को अपने commercial vessels, crude oil shipments और Middle East क्षेत्र में मौजूद नागरिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे। खासतौर पर Strait of Hormuz की सुरक्षा Seoul के लिए अहम है क्योंकि यह global energy transportation का महत्वपूर्ण maritime route है। Strait of Hormuz पर बनी हुई है नजर South Korean government पिछले कुछ समय से Strait of Hormuz में संभावित security contribution पर विचार कर रही है। Seoul ने हाल ही में क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति का आकलन करने के लिए एक team भी भेजी थी, हालांकि उस समय किसी military deployment पर final decision नहीं लिया गया था। South Korea पहले से Somalia के तट के पास anti-piracy naval mission के तहत naval presence बनाए हुए है। इसी existing capability के जरिए maritime protection बढ़ाने के विकल्पों पर भी चर्चा हो रही है। Iran War को लेकर US और South Korea के बीच चर्चा Reuters के मुताबिक, US President Donald Trump ने allies से Iran conflict और Strait of Hormuz की security में ज्यादा योगदान की मांग की है। South Korea पर भी अधिक सक्रिय भूमिका को लेकर दबाव रहा है, लेकिन Seoul ने combat deployment से दूरी बनाए रखने का फैसला स्पष्ट किया है। South Korean Foreign Minister Cho Hyun की US Secretary of State Marco Rubio के साथ बातचीत में भी Strait of Hormuz में संभावित South Korean contribution प्रमुख मुद्दों में शामिल है। नागरिकों और Oil Supply की सुरक्षा प्राथमिकता President Lee ने कहा कि South Korea के लिए अपने नागरिकों और economic interests की सुरक्षा भी जरूरी है। इसलिए Seoul का संभावित योगदान युद्ध में भागीदारी के बजाय shipping routes और energy supplies की सुरक्षा जैसे क्षेत्रों तक सीमित रह सकता है। फिलहाल South Korean government maritime security के लिए संभावित measures की समीक्षा कर रही है और किसी व्यापक military deployment की घोषणा नहीं की गई है। Source – Reuters / Yonhap News Agency / The Korea Times जय राष्ट्र न्यूज़

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Strait of Hormuz में Shipping Activity बेहद धीमी; Houthi Attacks और Saudi Arabia पर नए Strikes से Gulf Tension बढ़ी

दुबई/रियाद, 15 सितंबर 2026: Middle East में बढ़ते military tensions के बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण energy routes में से एक Strait of Hormuz से shipping traffic बेहद कम हो गया है। Ship-tracking data के मुताबिक सोमवार को केवल 4 commodity vessels ने Strait को पार किया, जबकि एक दिन पहले यह संख्या 10 थी। War से पहले यहां औसतन करीब 125 vessels प्रतिदिन transit करती थीं। Hormuz से सिर्फ 4 Commodity Vessels गुजरे Kpler के shipping data के मुताबिक Strait of Hormuz में commercial vessel movement युद्ध-पूर्व स्तर के मुकाबले बेहद कम रह गया है। Hormuz route global energy market के लिए critical है क्योंकि सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के करीब 20% crude oil और LNG trade का बड़ा हिस्सा इसी waterway से गुजरता है। Traffic में इतनी बड़ी गिरावट ने oil supply और freight costs को लेकर चिंता बढ़ा दी है। Houthi Rebels ने Saudi Military Base पर किया हमला Yemen के Iran-aligned Houthi rebels ने Saudi Arabia के Khamis Mushait स्थित military airbase पर missiles और drones से नया हमला करने का दावा किया है। Reuters के मुताबिक attack में aircraft hangars, radar systems, runways और ammunition facilities को target करने की बात कही गई। इस escalation के बीच 13 civilians के घायल होने की जानकारी भी सामने आई है। Saudi Cities में Emergency Alerts Saudi Arabia के Jeddah, Abha, Jazan, AlUla, Taif और strategic Red Sea oil port Yanbu समेत कई cities में emergency alerts जारी किए गए थे। Saudi Civil Defence ने बाद में कहा कि इन छह शहरों में immediate danger फिलहाल टल गया है, लेकिन Houthi attacks और regional tensions को देखते हुए security alert बना हुआ है। Saudi East-West Pipeline भी बुरी तरह प्रभावित Saudi Arabia की महत्वपूर्ण East-West oil pipeline भी हालिया drone attack में damage हुई है। यह pipeline Persian Gulf से crude को Red Sea coast तक ले जाकर Hormuz Strait को bypass करने का प्रमुख alternative route है। Associated Press के मुताबिक pipeline के बड़े हिस्से को operational होने में 3 से 5 सप्ताह लग सकते हैं। यह route करीब 2.6 से 4 million barrels oil per day transport करने में सक्षम रहा है। Bab el-Mandeb में भी Vessel Traffic गिरा सिर्फ Hormuz ही नहीं, Red Sea के दूसरे strategic chokepoint Bab el-Mandeb Strait में भी shipping activity कम हुई है। Latest tracking data में vessel transits एक दिन में 28 से घटकर 21 रह गए। Houthi forces की Yemen के western coast और strategic islands पर बढ़ती पकड़ ने इस route पर भी shipping risks बढ़ा दिए हैं। Gulf-Iran Talks टलने से बढ़ी चिंता Gulf Arab states और Iran के बीच Strait of Hormuz की security को लेकर प्रस्तावित talks भी postpone हो गई हैं। Diplomatic efforts में रुकावट से market में यह आशंका बढ़ी है कि Gulf conflict और फैल सकता है और global oil supplies लंबे समय तक बाधित रह सकती हैं। Global Oil Supply पर बड़ा खतरा Saudi pipeline disruption, Hormuz में restricted traffic और Bab el-Mandeb पर Houthi pressure—तीनों developments एक साथ global energy supply chains पर दबाव डाल रहे हैं। अगर दोनों maritime chokepoints पर disruption लंबे समय तक जारी रहता है तो tanker freight, insurance costs और crude oil prices में और तेजी देखने को मिल सकती है। source – Reuters / Associated Press / Kpler जय राष्ट्र न्यूज़

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Strait of Hormuz से Shipping Traffic फिर Single Digit में, सिर्फ 7 Vessels ने किया Transit

सिंगापुर, 10 सितंबर 2026: Middle East में बढ़ते तनाव के बीच Strait of Hormuz से shipping traffic एक बार फिर single digit में पहुंच गया है। गुरुवार को जारी preliminary ship-tracking data के मुताबिक बुधवार को केवल 7 commodity vessels ने इस strategic waterway से transit किया, जबकि एक दिन पहले यह संख्या 12 थी। 10-Day Average से आधा रहा Traffic Ship-tracking data के मुताबिक Strait of Hormuz का 10-day average 14 vessels है। इसके मुकाबले बुधवार को सिर्फ 7 vessels का गुजरना traffic में बड़ी गिरावट दिखाता है। इन सात vessels में 4 Strait से बाहर निकले और 3 अंदर गए। करीब 2 Million Barrels Crude लेकर निकला Tanker Strait से बाहर निकलने वाले vessels में Finland Prosperity नाम का Very Large Crude Carrier भी शामिल था, जो करीब 2 million barrels crude oil लेकर जा रहा था। हालांकि बुधवार को कोई LNG tanker Strait से बाहर नहीं निकला। Middle East Conflict से बढ़ा Shipping Risk US-Iran conflict और Strait के आसपास हालिया attacks के कारण commercial shipping पर risk बढ़ा है। Iran ने बुधवार को Strait of Hormuz के पास 10 ships पर हमला करने का दावा किया था। इस escalation के बीच Brent crude भी $100 प्रति barrel से ऊपर बना हुआ है। Global Oil Supply के लिए अहम है Hormuz Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण energy routes में शामिल है। Conflict से पहले global oil और gas trade का करीब 20% हिस्सा इस route से गुजरता था। Traffic में लंबे समय तक गिरावट crude और LNG supply, freight rates और global energy prices पर दबाव बढ़ा सकती है। Data पूरी तस्वीर नहीं दिखा सकता Kpler का data preliminary है। कुछ vessels अपने tracking transponders बंद करके भी Strait से गुजर सकते हैं, इसलिए actual traffic reported figures से थोड़ा अलग हो सकता है। Bab el-Mandeb में Traffic सामान्य के करीब दूसरी ओर Bab el-Mandeb Strait से बुधवार को 28 commodity ships गुजरे, जो वहां के 10-day average 27 के करीब है। इससे फिलहाल Hormuz route पर disruption ज्यादा गंभीर दिखाई दे रहा है। source – Reuters / Kpler जय राष्ट्र न्यूज़

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Brent Crude $100 के ऊपर, Middle East Tension से Indian Market पर दबाव

मुंबई, 10 सितंबर 2026: Middle East में बढ़ते तनाव और oil shipping पर हमलों के बीच Brent crude लगातार दूसरे दिन $100 प्रति barrel के ऊपर बना हुआ है। गुरुवार को Brent करीब 0.7% नीचे $100.50 प्रति barrel पर कारोबार कर रहा था, जबकि WTI crude करीब $95.58 पर था। Sensex-Nifty में सतर्क कारोबार ऊंचे crude prices के कारण Indian equity market में investor sentiment कमजोर बना हुआ है। सुबह करीब 9:36 बजे Nifty 50 0.01% गिरकर 23,429.25 और Sensex 0.01% नीचे 74,759.54 पर था। दोनों indices पिछले session में तीन महीने के निचले स्तर पर बंद हुए थे और पिछले आठ sessions में से सात में गिरावट दर्ज कर चुके हैं। Middle East Conflict ने बढ़ाई Oil Supply की चिंता Oil market में tension तब और बढ़ी जब Iran ने Strait of Hormuz के पास 10 ships पर हमले का दावा किया। यह कार्रवाई US द्वारा पांच Iranian oil tankers को निशाना बनाए जाने के बाद हुई। इस escalation ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण oil shipping routes में supply disruption का risk बढ़ा दिया है। Strait of Hormuz पर नजर Conflict से पहले Strait of Hormuz से दुनिया के oil और gas trade का करीब 20% हिस्सा गुजरता था। मौजूदा तनाव के कारण इस route से traffic काफी कम हुआ है। Red Sea route पर Houthi attacks ने alternative shipping routes को लेकर भी चिंता बढ़ाई है। India के लिए महंगा Crude क्यों चिंता? India दुनिया के सबसे बड़े crude oil importers में शामिल है। लंबे समय तक oil prices $100 के ऊपर रहने से: Reuters के मुताबिक यही वजह है कि high crude prices Indian market sentiment के लिए बड़ा risk बने हुए हैं। Rupee भी ₹95.30/$ तक कमजोर ऊंचे oil prices का असर rupee पर भी दिखाई दिया। आज Indian rupee करीब 0.2% गिरकर ₹95.30 प्रति dollar तक पहुंचा, जो करीब 10 दिनों का सबसे कमजोर स्तर है। Traders के मुताबिक RBI की ओर से संभावित dollar selling ने currency पर दबाव को कुछ हद तक सीमित किया। ONGC और Oil India में तेजी जहां high crude prices broader market के लिए चिंता हैं, वहीं upstream oil companies को इसका फायदा मिला। ONGC करीब 2% और Oil India करीब 2.4% ऊपर रहे, क्योंकि higher crude prices इनके revenue और margins को support कर सकते हैं। आगे Middle East Developments पर नजर Market की दिशा अब Middle East conflict, Strait of Hormuz shipping, crude oil prices और global inflation data पर निर्भर रहेगी। अगर oil supply disruption और बढ़ता है तो Brent पर फिर upward pressure आ सकता है और इसका असर Indian rupee, inflation और equities पर भी पड़ सकता है। source – Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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Strait of Hormuz से Shipping Traffic आज भी 10-Day Average से काफी नीचे, Global Oil Supply को लेकर चिंता बढ़ी

दुबई, 9 सितंबर 2026: Middle East में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण energy shipping routes में शामिल Strait of Hormuz से गुजरने वाले commodity vessels की संख्या सामान्य स्तर से काफी नीचे बनी हुई है। Ship-tracking firm Kpler के preliminary data के मुताबिक मंगलवार को केवल 6 commodity vessels ने Strait पार किया, जबकि पिछले 10 दिनों का average करीब 12 vessels per day था। एक दिन पहले 9 Vessels ने किया था Transit Kpler data के अनुसार सोमवार को 9 commodity vessels ने Strait of Hormuz पार किया था, लेकिन मंगलवार को यह संख्या घटकर केवल 6 रह गई। इनमें 5 vessels inbound और केवल 1 outbound था। हालांकि कुछ ships अपने AIS transponders बंद करके भी transit कर सकती हैं, इसलिए final numbers preliminary data से अलग हो सकते हैं। US-Iran Conflict से बढ़ा Shipping Risk Shipping traffic में गिरावट ऐसे समय आई है जब US-Iran conflict एक बार फिर तेजी से escalate हुआ है। Reuters के मुताबिक US forces ने Iranian oil tankers को निशाना बनाया, जबकि Iran ने Jordan में स्थित एक अमेरिकी military base पर ballistic missiles दागे और Strait of Hormuz के पास कई ships पर हमले किए। इन घटनाओं ने commercial shipping के लिए risk काफी बढ़ा दिया है। Oil Prices $100 के करीब Strait of Hormuz में disruption और Middle East escalation का सीधा असर crude oil prices पर भी दिखाई दे रहा है। Brent crude बुधवार को बढ़कर करीब $99.49 per barrel तक पहुंच गया, जबकि WTI करीब $94.63 per barrel रहा। Market में अब $100 per barrel का psychological level बेहद करीब है। Global Oil Supply के लिए क्यों अहम है Hormuz? Strait of Hormuz Persian Gulf को Arabian Sea से जोड़ता है और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण crude oil और LNG transit routes में शामिल है। Saudi Arabia, UAE, Kuwait, Iraq और Qatar जैसे बड़े energy exporters की significant supply इस route से international markets तक पहुंचती है। इसी वजह से यहां shipping में prolonged disruption global oil prices और energy security दोनों पर असर डाल सकता है। पिछले कुछ दिनों से लगातार कम है Traffic Hormuz में shipping traffic पिछले कई दिनों से दबाव में है। 6 सितंबर को Reuters ने बताया था कि 10-day average daily commodity traffic घटकर करीब 10 ships रह गया था, जो May के बाद सबसे निचला स्तर था। एक दिन ऐसा भी रहा जब केवल 2 commodity ships ने Strait पार किया। Bab el-Mandeb पर भी Traffic कमजोर Middle East का एक और महत्वपूर्ण maritime chokepoint Bab el-Mandeb Strait भी सामान्य से कमजोर traffic देख रहा है। मंगलवार को यहां करीब 25 vessels गुजरे, जबकि 10-day average लगभग 27 था। इससे Red Sea और Gulf दोनों major maritime routes पर बढ़ते geopolitical pressure की तस्वीर सामने आती है। Iran ने Ships पर कार्रवाई तेज की Iranian Revolutionary Guard ने बुधवार को Strait of Hormuz के पास 10 ships पर attacks का दावा किया, जिनमें दो अमेरिकी vessels शामिल बताई गईं। यह कार्रवाई US द्वारा पांच Iranian oil tankers को नष्ट किए जाने के बाद हुई। Escalation के कारण commercial shipping companies के लिए insurance, routing और operational costs बढ़ने का खतरा है। Crude Supply अभी पूरी तरह बंद नहीं हालांकि traffic काफी कम हुआ है, लेकिन Strait of Hormuz से oil flow पूरी तरह रुका नहीं है। Reuters analysis के मुताबिक Gulf producers alternative export routes का इस्तेमाल कर रहे हैं और US, Canada तथा Guyana जैसे non-OPEC producers की बढ़ी output भी global supply को कुछ support दे रही है। इसी वजह से Brent अभी तक decisively $100 से ऊपर नहीं गया है। आगे भी बना रह सकता है दबाव अगर US-Iran conflict और shipping attacks जारी रहते हैं तो Strait of Hormuz से traffic और कम हो सकता है। इसका असर crude oil prices, shipping insurance, freight costs और global inflation पर पड़ सकता है। फिलहाल market की नजर इस बात पर है कि अगले कुछ दिनों में vessel traffic recover करता है या regional conflict इसे और प्रभावित करता है। source – Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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Brent Crude आज $99.5 के करीब, Sensex-Nifty में गिरावट; Middle East Tension से Indian Market पर दबाव

मुंबई, 9 सितंबर 2026: Middle East में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच international crude oil prices बुधवार को $100 प्रति barrel के बेहद करीब पहुंच गए। Brent crude futures करीब $99.50 प्रति barrel तक चढ़ गए, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty दोनों में गिरावट दर्ज की गई। Sensex करीब 620 अंक नीचे सुबह करीब 10:01 बजे BSE Sensex 0.83% गिरकर 74,954.33 पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty 50 करीब 0.67% गिरकर 23,474.40 पर पहुंच गया। Market में 16 प्रमुख sectoral indices में से 12 नुकसान में कारोबार कर रहे थे। Brent Crude $99.5 तक पहुंचा Middle East conflict बढ़ने से Brent crude futures करीब 1.5% उछलकर $99.5 प्रति barrel तक पहुंच गए। दूसरे market update में Brent ने $99.49 का level छुआ, जो late June के बाद सबसे ऊंचे स्तरों में शामिल है। US West Texas Intermediate यानी WTI crude भी बढ़कर करीब $94.63 प्रति barrel पर पहुंच गया। Middle East में नए हमलों से बढ़ी चिंता Oil prices में तेजी की बड़ी वजह Middle East में conflict का और विस्तार होना है। Iran-backed Houthis ने Saudi Arabia के कई शहरों पर हमले किए, जबकि US forces ने कई Iranian oil tankers को निशाना बनाया। इसके जवाब में Iran ने Jordan स्थित एक अमेरिकी military base पर हमला किया। इन घटनाओं ने broader regional conflict और oil supply disruption की आशंका बढ़ा दी है। Strait of Hormuz में Shipping Traffic कम Global energy market की चिंता Strait of Hormuz को लेकर भी बढ़ी है। Preliminary Kpler data के मुताबिक मंगलवार को केवल 6 commodity vessels Strait of Hormuz से गुजरे, जबकि पिछले 10 दिनों का average करीब 12 vessels था। एक दिन पहले 9 vessels ने इस strategic waterway को पार किया था। हालांकि कुछ ships tracking transponders बंद कर सकती हैं, इसलिए final traffic figures बदल सकते हैं। India के लिए महंगा Crude क्यों बड़ी चिंता? India दुनिया के सबसे बड़े crude oil importers में शामिल है और अपनी oil requirement का बड़ा हिस्सा imports से पूरा करता है। अगर crude prices लंबे समय तक $100 के आसपास बने रहते हैं तो इससे: Reuters के मुताबिक यही कारण है कि crude में तेजी Indian equities के लिए एक बड़ा negative trigger बनी हुई है। Rupee पर भी बढ़ा दबाव Crude की तेजी के कारण Indian rupee पर भी pressure बढ़ा है। Traders के मुताबिक rupee के dollar के मुकाबले 94.84–94.86 के आसपास खुलने की संभावना थी, जबकि पिछले session में यह 94.8175 पर बंद हुआ था। Market participants अब यह भी देख रहे हैं कि Reserve Bank of India currency को support करने के लिए कितनी aggressive intervention करता है। IT Sector में बड़ी गिरावट Indian market में Nifty IT index करीब 3% गिरा। Coforge के shares करीब 6% टूटे, जब Chairman Om Prakash Bhatt ने company के board evaluation process को लेकर internal audit concerns के बाद इस्तीफा दिया। Mid-cap और small-cap indices में भी करीब 0.6–0.7% की गिरावट दर्ज की गई। Adani Enterprises में तेजी कमजोर market के बीच Adani Enterprises करीब 3.6% ऊपर कारोबार कर रहा था। Company ने अपने airport business में 5.54% तक stake Temasek, BlackRock, Premji Invest और Alpha Wave जैसे investors को बेचकर लगभग $1 billion जुटाने का agreement किया है। अब $100 का Psychological Level अहम Brent crude अब $100 प्रति barrel के psychological level के बेहद करीब है। अगर Middle East conflict और Strait of Hormuz disruption बढ़ता है तो oil prices पर further upward pressure आ सकता है। फिलहाल Indian market की दिशा crude prices, Middle East developments, rupee movement और global interest-rate expectations से प्रभावित रहने की संभावना है। source – Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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Strait of Hormuz तनाव के बीच Brent Crude $97 के पार, Global Oil Supply को लेकर चिंता बढ़ी

लंदन, 8 सितंबर 2026: Middle East में बढ़ते US-Iran तनाव और Strait of Hormuz से oil shipments में संभावित disruption की चिंता के बीच international crude prices में आज फिर तेजी दर्ज की गई। Global benchmark Brent crude करीब $97.34 प्रति barrel तक पहुंच गया, जबकि US West Texas Intermediate (WTI) लगभग $92.63 प्रति barrel पर कारोबार कर रहा था। लगातार तीसरे दिन Crude Oil में तेजी Oil prices में मंगलवार को लगातार तीसरे session में बढ़त देखने को मिली। Markets में geopolitical risk premium बढ़ा है क्योंकि traders को आशंका है कि Gulf region में सैन्य तनाव और बढ़ने पर crude shipments बाधित हो सकती हैं। Strait of Hormuz में धीमा हुआ Shipping Traffic Kpler data के मुताबिक सोमवार को Strait of Hormuz से केवल 7 commodity vessels गुजरते रिकॉर्ड किए गए, जबकि इससे एक दिन पहले यह संख्या 8 थी। हालांकि कुछ ships अपने tracking transponders बंद करके भी गुजर सकती हैं, इसलिए वास्तविक traffic इससे अलग हो सकता है। फिर भी shipping activity में कमजोरी ने market की चिंता बढ़ा दी है। Iran ने Gulf Energy Infrastructure को लेकर दी चेतावनी Iran ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका उसके खिलाफ नए military attacks करता है, तो Gulf region में अमेरिकी energy infrastructure retaliation के दायरे में आ सकता है। हालिया US-Iran military actions और tankers तथा naval assets से जुड़े incidents ने crude market में uncertainty और बढ़ा दी है। Hormuz क्यों है Global Oil Market के लिए इतना अहम? Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण energy transit routes में शामिल है। Persian Gulf के कई बड़े oil exporters अपने crude और petroleum products को international markets तक पहुंचाने के लिए इसी narrow waterway पर निर्भर हैं। इसी वजह से यहां prolonged disruption का असर Asia, Europe और दूसरी प्रमुख economies की energy supply और prices पर पड़ सकता है। Supply घटी, लेकिन Oil अभी $100 से नीचे क्यों? Middle East से crude shipments में बड़ी गिरावट के बावजूद Brent अभी $100 के नीचे है। Reuters analysis के मुताबिक regional crude shipments करीब 18 million barrels per day से घटकर 11 million bpd रह गई हैं, लेकिन कुछ supply अब भी Hormuz से गुजर रही है। इसके अलावा Saudi Arabia और Iraq alternative export routes इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि US, Canada और Guyana जैसे non-OPEC producers की बढ़ती production global shortage का कुछ हिस्सा offset कर रही है। Goldman Sachs ने बढ़ाया Oil Price Forecast Middle East shipping disruptions लंबे समय तक जारी रहने की आशंका के बीच Goldman Sachs ने December 2026 के लिए Brent और WTI forecasts में $5 की बढ़ोतरी की है। Analysts का मानना है कि अगर Hormuz में disruption और geopolitical tension लंबे समय तक बने रहते हैं, तो crude prices elevated रह सकते हैं। $120 तक जाने का भी Risk Scenario Market में extreme upside scenario को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया जा रहा है। Reuters के मुताबिक कुछ forecasts में गंभीर और prolonged supply disruption की स्थिति में Brent crude के $120 प्रति barrel तक पहुंचने की संभावना बताई गई है। हालांकि यह base-case forecast नहीं है और कीमतों की आगे की दिशा military developments और shipping flows पर निर्भर करेगी। भारत पर भी बढ़ सकता है दबाव भारत अपनी crude oil जरूरतों का बड़ा हिस्सा imports से पूरा करता है, इसलिए international oil prices में sustained तेजी import bill, inflation और rupee पर दबाव बढ़ा सकती है। आज Indian markets पर भी rising crude prices का असर देखा गया, जबकि rupee पर oil importers की dollar demand और hedging pressure बढ़ने की संभावना बनी हुई है। अब Hormuz और Iran-US तनाव पर नजर Oil market की अगली दिशा इस बात पर काफी हद तक निर्भर करेगी कि Strait of Hormuz में shipping traffic सामान्य होता है या नहीं और US-Iran confrontation आगे कितना बढ़ता है। फिलहाल Brent का $97 के पार पहुंचना दिखाता है कि traders global supply disruption के risk को एक बार फिर गंभीरता से price-in कर रहे हैं। source – Reutersजय राष्ट्र न्यूज़

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