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जंतर-मंतर मामले में स्वतंत्र भारद्वाज तिहाड़ जेल से रिहा; 3 हफ्ते की अंतरिम जमानत

नई दिल्ली, 18 सितंबर 2026: Delhi के Jantar Mantar पर प्रदर्शन के दौरान कथित मारपीट के मामले में गिरफ्तार social media influencer Swatantra Bhardwaj को Tihar Jail से रिहा कर दिया गया है। Delhi court ने उन्हें तीन सप्ताह की interim bail दी थी, जिसके बाद कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने पर 17 सितंबर की देर रात वह जेल से बाहर आए। 15 September को मिली थी Interim Bail Patiala House Court के Additional Sessions Judge Saurabh Pratap Singh Laler ने 15 September को Bhardwaj को तीन सप्ताह की interim bail दी थी। Court ने ₹50,000 के personal bond और इतनी ही राशि की surety पर उन्हें राहत दी। Regular bail पर आगे विचार करने से पहले court इस अवधि के दौरान उनके conduct को भी देखेगा। Media से दूरी बनाकर निकले Jail से रिहाई के समय Swatantra Bhardwaj media से दूरी बनाते नजर आए। Viral video में वह mask लगाए तेजी से बाहर खड़ी car की ओर जाते दिखाई दिए। Reports के मुताबिक उनके associates उन्हें तुरंत वहां से लेकर चले गए और उन्होंने journalists से कोई बातचीत नहीं की। Court ने लगाईं कई सख्त Conditions Interim bail देते हुए court ने Bhardwaj को case से जुड़े complainant, उनकी बेटी या किसी witness से संपर्क नहीं करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा उन्हें social media, print या electronic media पर इस case, अपने defence या complainant के परिवार से जुड़ी comments या posts करने से भी रोका गया है। Court ने evidence से छेड़छाड़ नहीं करने की शर्त भी लगाई है। क्या है Jantar Mantar Case? मामला 23 June 2026 को Jantar Mantar पर Cockroach Janta Party (CJP) के protest के दौरान हुई कथित मारपीट से जुड़ा है। Bhardwaj पर एक student activist के पिता से कथित assault और caste-related remarks के आरोप लगाए गए हैं। Delhi Police ने मामला दर्ज कर उन्हें 4 September को Bulandshahr से हिरासत में लिया था और बाद में judicial custody में Tihar Jail भेजा गया। आरोपों पर अंतिम फैसला court में trial के बाद होगा। ‘Bail Trophy नहीं’—Court की टिप्पणी Bail देते हुए court ने Bhardwaj को public celebration से बचने की चेतावनी दी और कहा कि bail court के trust की expression है, इसे उपलब्धि की तरह प्रदर्शित नहीं किया जाना चाहिए। मामले की अगली proceedings 6 October को होने की जानकारी reports में दी गई है। source – PTI / Aaj Tak / NDTV / Dainik Jagran जय राष्ट्र न्यूज़

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जमानत बनाम लंबा ट्रायल: न्यायिक प्रक्रिया पर अभिजीत दिपके ने उठाए सवाल

नई दिल्ली, 15 सितंबर 2026: Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक Abhijeet Dipke ने Jantar Mantar assault case में आरोपी Swatantra Bhardwaj को तीन हफ्ते की interim bail मिलने के बाद criminal justice system में bail और लंबे pre-trial detention को लेकर सवाल उठाए हैं। Dipke ने Bhardwaj के मामले की तुलना 2020 Delhi riots conspiracy case में आरोपी Umar Khalid की लगभग छह साल की incarceration से की। ‘Same Justice System, Very Different Approach’ Dipke ने social media पर लिखा कि एक व्यक्ति कथित घटना से जुड़े video के बावजूद कुछ दिनों में bail पा जाता है, जबकि दूसरा छह साल से जेल में है और substantive trial शुरू नहीं हुआ। उन्होंने इसे “Same justice system. Very different approach” बताते हुए न्यायिक प्रक्रिया में अलग-अलग मामलों के treatment पर सवाल उठाया। यह Dipke का अपना आकलन है। Swatantra Bhardwaj को 3 Weeks की Interim Bail Delhi की Patiala House Court के Additional Sessions Judge Saurabh Pratap Singh Laler ने Swatantra Bhardwaj को तीन सप्ताह की interim bail दी। Bhardwaj पर CJP protest के दौरान एक student activist के पिता के साथ कथित assault का आरोप है। उनके खिलाफ SC/ST Act से जुड़ी provisions भी जोड़ी गई थीं। आरोपों पर अंतिम निर्णय trial के बाद ही होगा। Court ने Bail के साथ दी सख्त चेतावनी Court ने bail देते हुए Bhardwaj के conduct पर भी टिप्पणी की और कहा कि bail को उपलब्धि की तरह प्रदर्शित नहीं किया जाना चाहिए। Court ने यह भी संकेत दिया कि interim bail के दौरान उनका व्यवहार आगे regular bail plea पर विचार करते समय महत्वपूर्ण होगा। उनकी regular bail application पर आगे सुनवाई होनी है। Umar Khalid के 6 साल पूरे Former JNU student Umar Khalid को 13 September 2020 को 2020 northeast Delhi riots से जुड़े larger conspiracy case में UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया था। September 2026 में उनकी custody को छह साल पूरे हो गए हैं। Charges और bail को लेकर कई judicial proceedings हुई हैं, लेकिन prosecution evidence वाला substantive trial अभी शुरू नहीं हुआ है। Delhi Police ने उनके खिलाफ conspiracy के गंभीर आरोप लगाए हैं, जिन्हें Khalid ने contest किया है। ‘बिना Hearing’ वाली बात पूरी तरह सही नहीं Dipke के statement में “छह साल बिना trial या hearing” का जिक्र किया गया, लेकिन उपलब्ध court records के मुताबिक Umar Khalid की कई bail applications पर hearings और judicial orders हो चुके हैं। इसलिए ज्यादा accurate स्थिति यह है कि वह लगभग छह साल से undertrial custody में हैं और मामले का substantive trial अभी लंबित है। Long Incarceration पर Courts भी कर चुके हैं टिप्पणी हाल के एक अलग मामले में Delhi High Court ने कहा है कि किसी offence की seriousness अपने आप bail रोकने का absolute ground नहीं हो सकती, खासकर जब trial reasonable pace से आगे नहीं बढ़ रहा हो। यह ruling Dipke या Khalid के मामले का फैसला नहीं है, लेकिन लंबी undertrial detention को लेकर broader judicial debate को दिखाती है। source – The Indian Express / LiveLaw / Hindustan / ABP Live जय राष्ट्र न्यूज़

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स्वतंत्र भारद्वाज को Delhi High Court से राहत नहीं, गिरफ्तारी के खिलाफ याचिका खारिज; Trial Court जाने को कहा

नई दिल्ली, 8 सितंबर 2026: जंतर-मंतर पर एक छात्र कार्यकर्ता के पिता से कथित मारपीट के मामले में गिरफ्तार सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज को Delhi High Court से राहत नहीं मिली है। High Court ने उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली habeas corpus petition खारिज करते हुए कहा कि वह इस समय judicial orders के तहत custody में हैं और अपनी गिरफ्तारी या remand को appropriate trial court के सामने चुनौती दे सकते हैं। 7 सितंबर को High Court ने खारिज की Plea Justice Navin Chawla और Justice Ravinder Dudeja की division bench ने 7 सितंबर को भारद्वाज की याचिका पर सुनवाई की। Petition में दावा किया गया था कि Delhi Police द्वारा की गई गिरफ्तारी illegal थी और उन्हें custody से release किया जाना चाहिए। हालांकि High Court ने habeas corpus के जरिए राहत देने से इनकार कर दिया। Court ने क्यों नहीं दी राहत? Delhi Police की ओर से court को बताया गया कि भारद्वाज को पहले एक दिन की police custody मिली थी, उसके बाद magistrate ने judicial custody का आदेश दिया। Court ने कहा कि जब किसी व्यक्ति की custody सक्षम अदालत के judicial order के तहत जारी है, तो उसे habeas corpus के जरिए सीधे चुनौती देने के बजाय उस remand order के खिलाफ उपलब्ध कानूनी remedy अपनानी होगी। अब Trial Court में Challenge कर सकते हैं Arrest High Court ने भारद्वाज को यह liberty दी कि वह अपनी गिरफ्तारी या judicial remand को appropriate trial court में challenge कर सकते हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि High Court ने गिरफ्तारी को merits पर पूरी तरह सही ठहरा दिया है; court ने मुख्य रूप से habeas corpus petition को इस stage पर maintainable relief नहीं माना। 14 दिन की Judicial Custody मामले की सुनवाई के दौरान prosecution ने High Court को बताया कि संबंधित अदालत ने भारद्वाज को 14 दिन की judicial custody में भेज दिया है। इसलिए फिलहाल वह judicial custody में रहेंगे, जब तक lower court से कोई अलग relief नहीं मिलती। Bulandshahr से हुई थी गिरफ्तारी Delhi Police ने स्वतंत्र भारद्वाज को Uttar Pradesh के Bulandshahr से हिरासत में लिया था। इसके बाद उन्हें Delhi लाया गया और court के सामने पेश किया गया। उनकी गिरफ्तारी जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े उस मामले में हुई जिसमें उन पर एक छात्र कार्यकर्ता के पिता के साथ कथित मारपीट का आरोप है। Podcast Video के बाद बढ़ा था मामला मामला उस समय फिर सुर्खियों में आया जब भारद्वाज का एक podcast clip वायरल हुआ। उसमें उन्होंने कथित हमले को लेकर विवादित दावे किए थे। इसके बाद CJP नेताओं और समर्थकों ने Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन कर गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। SC/ST Act की धाराएं भी जोड़ी गईं Delhi Police ने संबंधित FIR में SC/ST (Prevention of Atrocities) Act और criminal intimidation से जुड़े provisions भी जोड़े हैं। इसके अलावा छात्र कार्यकर्ता की ओर से कथित धमकियों और morphed images से जुड़े आरोपों पर अलग POCSO case भी दर्ज किया गया है। ये सभी आरोप अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। अब Lower Court की प्रक्रिया अहम High Court से habeas corpus relief नहीं मिलने के बाद स्वतंत्र भारद्वाज की legal strategy अब trial court पर केंद्रित होगी। वह arrest, remand या bail से जुड़ी appropriate applications वहां दाखिल कर सकते हैं। फिलहाल मामले में आरोपों की अंतिम सत्यता तय नहीं हुई है और आगे की स्थिति judicial proceedings पर निर्भर करेगी। source – Delhi High Court / LiveLaw / India Todayजय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर विवाद पर CJP प्रवक्ता सौरव दास ने दिल्ली पुलिस से कार्रवाई की मांग की

नई दिल्ली, 6 सितंबर 2026: जंतर-मंतर पर हुए कथित मारपीट मामले को लेकर Cockroach Janta Party (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने Delhi Police की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। मामला CJP के प्रदर्शन से जुड़े संजय कुमार पर कथित हमले से संबंधित है। सौरव दास ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल सौरव दास ने आरोप लगाया कि संजय कुमार को गंभीर चोट लगने के बावजूद शुरुआत में मामले में पर्याप्त सख्त धाराएं नहीं लगाई गईं। उन्होंने पुलिस से मामले की दोबारा गंभीरता से जांच करने और सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की। स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग लेकर पहुंची CJP 4 सितंबर को सौरव दास, CJP के co-convenor Ashutosh Ranka और अन्य समर्थक Patel Chowk से Parliament Street Police Station पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी और FIR में गंभीर धाराएं जोड़ने की मांग की। Viral Video के बाद बढ़ा विवाद मामला उस समय फिर चर्चा में आया जब स्वतंत्र भारद्वाज का एक कथित podcast/video clip सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। CJP का आरोप था कि वीडियो में कथित हमले को लेकर किए गए दावों के बाद पुलिस को आरोपी के खिलाफ अधिक कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। Delhi Police ने आरोपों को किया था खारिज Delhi Police ने CJP के कुछ आरोपों से असहमति जताई। पुलिस के मुताबिक RML Hospital की medical examination में संजय कुमार की चोट को simple injury बताया गया और skull fracture के दावे को MLC से मेल न खाने वाला बताया गया। पुलिस ने यह भी कहा कि किसी राजनीतिक दबाव या अनुचित हस्तक्षेप का आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत है। बाद में FIR में जोड़ा गया SC/ST Act CJP के विरोध और पुलिस अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद संबंधित FIR में Scheduled Castes and Scheduled Tribes (Prevention of Atrocities) Act की धाराएं जोड़ी गईं। इसके अलावा नाबालिग को कथित धमकियों से जुड़े मामले में अलग POCSO case दर्ज किया गया। निष्पक्ष जांच की मांग सौरव दास और CJP नेताओं का कहना है कि मामले में केवल एक व्यक्ति ही नहीं, बल्कि घटना में कथित रूप से शामिल अन्य लोगों और उसके बाद सोशल मीडिया पर दी गई धमकियों की भी जांच होनी चाहिए। मामला अब पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। source – The Indian Express / NDTVजय राष्ट्र न्यूज़

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स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद समर्थकों का प्रदर्शन, केस वापस लेने की मांग; पुलिस स्टेशन के बाहर बढ़ाई गई सुरक्षा

नई दिल्ली, 6 सितंबर 2026: जंतर-मंतर मारपीट मामले में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थकों ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया। समर्थक Parliament Street Police Station के बाहर जुटे और भारद्वाज के खिलाफ की गई पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की। पुलिस स्टेशन के बाहर बढ़ाई गई सुरक्षा समर्थकों के जुटने की सूचना के बाद Parliament Street Police Station के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। पुलिस ने कई स्थानों पर barricades लगाए और एहतियात के तौर पर paramilitary personnel भी तैनात किए। समर्थकों ने कार्रवाई को बताया एकतरफा प्रदर्शन में शामिल लोगों ने आरोप लगाया कि स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई एकतरफा तरीके से की जा रही है। समर्थकों ने दावा किया कि जंतर-मंतर पर हुई मारपीट की परिस्थितियों और भारद्वाज के self-defence के दावे को भी जांच में ध्यान में रखा जाना चाहिए। ये प्रदर्शनकारियों के दावे हैं और मामले की जांच अभी जारी है। SC/ST Act और POCSO को लेकर भी जताया विरोध भारद्वाज के समर्थकों ने मामले में जोड़ी गई SC/ST Act की धाराओं और एक अलग शिकायत पर दर्ज POCSO case को लेकर भी सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और पुलिस से भारद्वाज के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा और उन्हें वापस लेने की मांग की। जंतर-मंतर की घटना से जुड़ा है मामला स्वतंत्र भारद्वाज पर आरोप है कि जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए CJP-led protest के दौरान उन्होंने एक नाबालिग छात्र कार्यकर्ता के पिता के साथ मारपीट की थी। मामला उस समय फिर सुर्खियों में आया जब भारद्वाज का एक podcast clip वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने हमले को लेकर विवादित दावे किए थे। भारद्वाज बाद में इसे self-defence में हुई घटना बताते रहे हैं। Bulandshahr से हिरासत में लिए गए थे भारद्वाज Delhi Police ने भारद्वाज को 4 सितंबर को उत्तर प्रदेश के Bulandshahr से हिरासत में लिया था। इसके बाद 5 सितंबर को उन्हें formally arrest किया गया और अदालत ने एक दिन की police custody मंजूर की। आज Judicial Custody में भेजा गया मामले में आज 6 सितंबर को नई कानूनी कार्रवाई हुई। दिल्ली की अदालत ने स्वतंत्र भारद्वाज को एक दिन की judicial custody में भेज दिया। उन्हें video conferencing के जरिए duty magistrate के सामने पेश किया गया। मामले में जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी है। समर्थकों और शिकायतकर्ताओं के अलग-अलग दावों की अंतिम सत्यता अदालत और जांच एजेंसियों की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी। source – PTI / The Tribune / ABP Newsजय राष्ट्र न्यूज़

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चिराग पासवान की पार्टी ने स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, नाम के गलत इस्तेमाल का लगाया आरोप

नई दिल्ली, 6 सितंबर 2026: केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की Lok Janshakti Party (Ram Vilas) ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दिल्ली के Parliament Street Police Station में शिकायत दर्ज कराई है। पार्टी का आरोप है कि भारद्वाज ने जंतर-मंतर पर छात्र कार्यकर्ता के पिता से कथित मारपीट के मामले में चिराग पासवान का नाम लेकर राजनीतिक संरक्षण होने का गलत दावा किया। पार्टी के Legal Cell ने दर्ज कराई शिकायत शिकायत LJP (Ram Vilas) के legal cell की ओर से दी गई है। इसमें कहा गया है कि न तो चिराग पासवान और न ही उनकी पार्टी का स्वतंत्र भारद्वाज से कोई ऐसा संबंध है, जैसा उनके वायरल interview में दावा किया गया। पार्टी ने इन सार्वजनिक बयानों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। Viral Interview में लिया था चिराग पासवान का नाम विवाद उस समय बढ़ा जब स्वतंत्र भारद्वाज का एक interview clip सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसमें उन्होंने कई राजनीतिक नेताओं के नाम लेते हुए उनसे करीबी संबंध होने का दावा किया था और चिराग पासवान को अपना “बड़ा भाई” बताया था। हालांकि इन दावों के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है। चिराग पासवान ने दावे से बनाई दूरी चिराग पासवान ने साफ कहा कि भारद्वाज ने उनके नाम का गलत इस्तेमाल किया है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की। LJP (Ram Vilas) ने भी कहा कि पार्टी कथित हमले में घायल व्यक्ति और उसके परिवार के साथ खड़ी है। Complaint और FIR में अंतर पुलिस अधिकारियों ने 5 सितंबर तक बताया था कि पार्टी की शिकायत की जांच की जा रही है और इस specific complaint पर अलग case/FIR अभी दर्ज नहीं हुई थी। इसलिए इसे “LJP ने FIR दर्ज कराई” लिखने के बजाय “शिकायत दर्ज कराई” लिखना अधिक सही है। आज Judicial Custody में भेजे गए स्वतंत्र भारद्वाज मामले में आज, 6 सितंबर, एक नई कानूनी development सामने आई है। दिल्ली की एक अदालत ने स्वतंत्र भारद्वाज को कथित assault और अन्य आरोपों से जुड़े मामले में एक दिन की judicial custody में भेज दिया। इससे पहले पुलिस को एक दिन की custodial interrogation की अनुमति मिली थी। SC/ST Act और अन्य धाराएं भी जोड़ी गईं दिल्ली पुलिस ने संबंधित assault case में SC/ST (Prevention of Atrocities) Act और criminal intimidation से जुड़े provisions जोड़े हैं। इसके अलावा minor activist की शिकायत पर online threats और harassment से संबंधित अलग POCSO case भी दर्ज किया गया है। ये मामले अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। source – PTI / The Week / The New Indian Expressजय राष्ट्र न्यूज़

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निशु आजाद के पिता से मारपीट मामले में चिराग पासवान की सफाई, बोले- स्वतंत्र भारद्वाज ने मेरे नाम का गलत इस्तेमाल किया

नई दिल्ली, 5 सितंबर 2026: जंतर-मंतर पर CJP कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता संजय कुमार से कथित मारपीट के मामले में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज द्वारा अपने नाम का इस्तेमाल किए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उनका नाम गलत तरीके से इस विवाद से जोड़ा गया है। स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ शिकायत दर्ज चिराग पासवान ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। साथ ही दिल्ली पुलिस से निष्पक्ष जांच करने और पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाने की मांग की है। ‘ऐसी घटना बेहद गंभीर’ पासवान ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति खुले तौर पर किसी को इतनी गंभीर चोट पहुंचाने का दावा करता है और उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की हिंसा के मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। Podcast में लिया गया था चिराग पासवान का नाम विवाद उस समय बढ़ा जब स्वतंत्र भारद्वाज का एक podcast clip सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसमें वह कथित तौर पर निशु आजाद के पिता पर हमला करने की बात कहते हुए कई राजनीतिक नेताओं का नाम लेते नजर आए। इसी दौरान उन्होंने चिराग पासवान को भी अपना ‘बड़ा भाई’ बताया था। LJP ने किसी संबंध से किया इनकार Lok Janshakti Party (Ram Vilas) ने भी भारद्वाज के साथ किसी तरह के संबंध से इनकार किया है। पार्टी की शिकायत में कहा गया कि केंद्रीय मंत्री के नाम का इस्तेमाल कथित राजनीतिक प्रभाव दिखाने के लिए किया गया, जिसे पार्टी ने गलत और भ्रामक बताया है। दिल्ली पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग चिराग पासवान ने स्पष्ट किया कि वह चाहते हैं कि पुलिस बिना किसी दबाव के मामले की जांच करे। उन्होंने कहा कि उनके या अन्य नेताओं के नाम का सहारा लेकर किसी कानूनी कार्रवाई से बचने का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता। हिरासत में लिया जा चुका है स्वतंत्र भारद्वाज विवाद बढ़ने और प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश से हिरासत में लिया। मामले में जांच जारी है और पुलिस पहले ही राजनीतिक हस्तक्षेप से जुड़े आरोपों को खारिज कर चुकी है। source – Times of India / Moneycontrolजय राष्ट्र न्यूज़

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स्वतंत्र भारद्वाज के इंटरव्यू में गंभीर दावे, वायरल वीडियो के बाद उठे नए सवाल; पुलिस ने राजनीतिक दबाव के आरोप नकारे

नई दिल्ली, 5 सितंबर 2026: सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज के एक पॉडकास्ट इंटरव्यू के वीडियो सामने आने के बाद जंतर-मंतर पर हुई मारपीट का मामला फिर चर्चा में आ गया है। इंटरव्यू में भारद्वाज ने एक प्रदर्शनकारी के पिता पर हमला करने और राजनीतिक संपर्कों को लेकर कई गंभीर दावे किए। इसके बाद विपक्षी नेताओं और Cockroach Janta Party (CJP) ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारी के पिता पर हमले को लेकर दावा वायरल पॉडकास्ट में भारद्वाज ने दावा किया कि जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान उन्होंने छात्र कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता संजय कुमार को मारा था। उन्होंने चोट की गंभीरता को लेकर भी बड़ा दावा किया, जिसके बाद वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। राजनीतिक संरक्षण को लेकर भी कही बातें इंटरव्यू में भारद्वाज ने कुछ राजनीतिक नेताओं के साथ अपने संबंधों का दावा किया और कथित तौर पर कहा कि इन संपर्कों के कारण उन्हें जेल नहीं जाना पड़ा। इन्हीं बयानों के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ा और कई नेताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। दिल्ली पुलिस ने दावों को बताया बेबुनियाद दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों से साफ इनकार किया है। पुलिस के मुताबिक जांच कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की गई और किसी नेता के दबाव में कार्रवाई रोकने का दावा तथ्यों पर आधारित नहीं है। पुलिस ने यह भी कहा कि medical reports में संजय कुमार की skull fracture की पुष्टि नहीं हुई और चोट को simple injury बताया गया। भारद्वाज ने बाद में कहा—Self Defence में किया था हमला विवाद बढ़ने के बाद भारद्वाज ने NDTV को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि वह भीड़ से घिर गए थे और उन्होंने जो किया, वह self-defence में किया था। उन्होंने अपने ऊपर लगाए जा रहे कई आरोपों से भी इनकार किया। गिरफ्तारी की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन शुक्रवार को CJP समर्थकों और अन्य प्रदर्शनकारियों ने Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन कर भारद्वाज के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। इसके बाद पुलिस ने उन्हें उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया। आरोप और पुलिस के बयान में बड़ा अंतर मामले में सबसे बड़ा सवाल भारद्वाज के वायरल इंटरव्यू में किए गए दावों और दिल्ली पुलिस के आधिकारिक version के बीच अंतर को लेकर है। जहां भारद्वाज ने गंभीर चोट और राजनीतिक संरक्षण जैसी बातें कहीं, वहीं पुलिस ने skull fracture और political interference—दोनों दावों को नकार दिया है। अब आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया से ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। source – The Indian Express / Delhi Police / NDTVजय राष्ट्र न्यूज़

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