प्रमुख खबरें

‘बालाकोट से ऑपरेशन सिंदूर तक आतंक को मिला करारा जवाब’—PM मोदी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 138वें एपिसोड में आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक भारत ने यह संदेश दिया है कि देश के खिलाफ आतंकी कार्रवाई होने पर उसका जवाब दिया जाएगा। प्रधानमंत्री ने यह टिप्पणी 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक के 10 वर्ष पूरे होने के अवसर पर की। सर्जिकल स्ट्राइक के 10 साल पूरे प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 28-29 सितंबर 2016 की रात भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा पार कर आतंकवादी लॉन्च पैड्स पर सर्जिकल स्ट्राइक की थी। उन्होंने इसे भारत की आतंकवाद विरोधी नीति में महत्वपूर्ण बदलाव बताते हुए कहा कि उस कार्रवाई ने दुनिया के सामने भारत की नई counter-terrorism approach का उदाहरण पेश किया। बालाकोट से ऑपरेशन सिंदूर तक का किया जिक्र प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि बीते एक दशक में बालाकोट एयर स्ट्राइक से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक भारत ने आतंकवाद के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की नीति को सामने रखा है। उन्होंने कहा कि अगर आतंकवादी भारत की तरफ आंख उठाते हैं तो उन्हें “करारा जवाब” दिया जाएगा। यह बयान भारत की मौजूदा आतंकवाद विरोधी नीति के संदर्भ में दिया गया। 2019 में हुई थी बालाकोट एयर स्ट्राइक फरवरी 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में कार्रवाई की थी। भारत ने उस समय कहा था कि इस कार्रवाई में आतंकी प्रशिक्षण केंद्रों को निशाना बनाया गया। प्रधानमंत्री ने अपने हालिया संबोधन में बालाकोट का उल्लेख सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर के साथ किया। ऑपरेशन सिंदूर को बताया नई नीति का हिस्सा प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले भी ऑपरेशन सिंदूर को आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति में एक नया मानक बता चुके हैं। उनके मुताबिक भारत पर आतंकी हमला होने की स्थिति में जवाब भारत अपनी शर्तों और अपने समय के अनुसार देगा। उन्होंने आतंकवाद और उसे समर्थन देने वाले ढांचे के खिलाफ सख्त रुख की बात भी दोहराई। आतंकवाद पर Zero-Tolerance Policy की बात ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान भारत आतंकवाद के खिलाफ Zero-Tolerance Policy के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति को अधिक स्पष्ट और जवाबी कार्रवाई केंद्रित बनाया है। दिल्ली और मुंबई आतंकी हमलों को भी किया याद प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में 13 सितंबर 2008 के दिल्ली सीरियल ब्लास्ट और उसी वर्ष हुए 26/11 मुंबई आतंकी हमले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय तक आतंकवादी हमलों का सामना करता रहा है और इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने पिछले वर्षों में आतंकवाद के खिलाफ अपनी रणनीति मजबूत की है। सेना के साहस की की सराहना प्रधानमंत्री ने 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक को याद करते हुए भारतीय सेना के जवानों के साहस की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिकों ने नियंत्रण रेखा पार कर आतंकवादी ठिकानों पर कार्रवाई की और मिशन के बाद सुरक्षित वापस लौटे। ऑपरेशन सिंदूर पर पहले भी दे चुके हैं बयान ऑपरेशन सिंदूर को लेकर प्रधानमंत्री मोदी पहले भी कई बार बयान दे चुके हैं। उन्होंने इसे आतंकवाद के खिलाफ भारत की निर्णायक कार्रवाई और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता से जोड़ा है। उन्होंने पहलगाम हमले के बाद की कार्रवाई के संदर्भ में भी कहा था कि आतंकवाद से जुड़े ठिकानों के खिलाफ भारत सख्त कार्रवाई करेगा। राष्ट्रीय सुरक्षा पर सरकार का संदेश प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक के दस वर्ष पूरे हो रहे हैं। उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर को जोड़ते हुए सरकार की आतंकवाद विरोधी नीति को दोहराया और कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ Zero-Tolerance के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। source – Prime Minister of India / Press Information Bureau जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

UN में भारत का बड़ा बयान! Terror Listings में राजनीतिक दखल के खिलाफ उठाई आवाज

न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आतंकवाद से जुड़े प्रतिबंधों और terror listings की प्रक्रिया को लेकर भारत ने बुधवार को बड़ा बयान दिया। भारत ने UNSC से अपील की कि आतंकवादियों की सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और नियमों पर आधारित होनी चाहिए और किसी भी देश को परिषद की सदस्यता का इस्तेमाल आतंकवादियों को राजनीतिक संरक्षण देने के लिए नहीं करना चाहिए। आतंकियों को राजनीतिक संरक्षण देने पर भारत की आपत्ति भारत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि UNSC की सदस्यता का इस्तेमाल किसी आतंकवादी को “legitimise” करने या उसे राजनीतिक कारणों से संरक्षण देने के लिए नहीं होना चाहिए। भारत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों और आतंकवाद से जुड़े निर्णयों में पारदर्शिता तथा राजनीतिक प्रभाव को लेकर बहस चल रही है। भारत ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक व्यवस्था में objectivity और transparency को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। Terror Listing प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग भारत का कहना है कि आतंकवादी संगठनों और व्यक्तियों को UNSC sanctions lists में शामिल करने की प्रक्रिया स्पष्ट और तथ्य आधारित होनी चाहिए। इसी तरह किसी नाम को सूची से हटाने का फैसला भी राजनीतिक हितों से प्रभावित नहीं होना चाहिए। UN Security Council के तहत आतंकवाद और counter-terrorism से संबंधित कई sanctions regimes पहले से लागू हैं। पाकिस्तान पर परोक्ष निशाना? भारत के बयान को पाकिस्तान के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई न करने का आरोप लगाता रहा है। हालांकि, ताजा बयान में भारत ने किसी एक देश का नाम लेकर आरोप लगाने के बजाय UN sanctions mechanism को मजबूत करने और राजनीतिक हस्तक्षेप रोकने पर जोर दिया। भारत पहले भी उठा चुका है मुद्दा आतंकवादी संगठनों की listing और delisting में राजनीतिक या धार्मिक आधार पर दोहरे मानदंडों के खिलाफ भारत पहले भी आवाज उठाता रहा है। भारत ने UN में यह रुख रखा है कि ऐसी प्रक्रिया objective होनी चाहिए और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई में किसी तरह का double standard नहीं होना चाहिए। भारत ने UNSC 1267 sanctions regime के तहत आतंकवादियों की listing को लेकर भी सक्रिय भूमिका निभाई है। संसद की विदेश मामलों की समिति के अनुसार, भारत ने कई आतंकवादियों को सूचीबद्ध कराने के लिए प्रस्ताव आगे बढ़ाए हैं। UNSC में सुधार की मांग भी तेज भारत का यह बयान व्यापक UN Security Council reforms की उसकी मांग से भी जुड़ा है। नई दिल्ली लंबे समय से UNSC को ज्यादा प्रतिनिधित्व वाला, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की मांग करती रही है। भारत का तर्क है कि वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए परिषद की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना जरूरी है। आतंकवाद के खिलाफ भारत का सख्त रुख भारत ने दोहराया है कि आतंकवाद को किसी भी राजनीतिक, वैचारिक या अन्य आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता। नई दिल्ली का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई बिना भेदभाव और बिना राजनीतिक दबाव के होनी चाहिए। आज के बयान के बाद एक बार फिर यह सवाल प्रमुख हो गया है कि UNSC की sanctions प्रक्रिया को कितना पारदर्शी बनाया जा सकता है और क्या सदस्य देश राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर आतंकवाद के खिलाफ एक समान नीति अपना पाएंगे। स्रोत: United Nations, Moneycontrol, Times of India, Indian diplomatic statements Jai Rashtra News

आगे और पढ़ें
Translate »