PM मोदी और ऑस्ट्रेलियाई PM एंथनी अल्बनीज़ की बैठक, रक्षा, व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर कई अहम समझौते

मेलबर्न, 9 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने मेलबर्न में आयोजित भारत–ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन में व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की। बैठक में रक्षा सहयोग, व्यापार एवं निवेश, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), स्वच्छ ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को नई गति देने पर सहमति बनी। रक्षा सहयोग को मिलेगा नया विस्तार दोनों नेताओं ने समुद्री सुरक्षा, संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा उद्योग सहयोग और रक्षा तकनीक के आदान-प्रदान को और मजबूत करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही Maritime Security Collaboration Roadmap पर भी सहमति बनी, जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों का रणनीतिक समन्वय और मजबूत होगा। व्यापार और निवेश पर बड़ा फोकस बैठक के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया ने द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने तथा व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। ऑस्ट्रेलिया ने भारत में 500 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के नए निवेश की घोषणा की, जिसका उपयोग बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में किया जाएगा। साथ ही दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिज, डिजिटल अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) सहयोग को भी प्राथमिकता देने पर सहमति जताई। यूरेनियम और स्वच्छ ऊर्जा में नई साझेदारी शिखर वार्ता की प्रमुख उपलब्धियों में शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के लिए ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम आपूर्ति समझौता शामिल रहा। इसके अलावा हरित हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा और कम-कार्बन तकनीकों में संयुक्त निवेश एवं अनुसंधान बढ़ाने पर भी सहमति बनी। AI और उन्नत तकनीकों पर सहयोग दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, क्वांटम तकनीक और उभरती डिजिटल तकनीकों में संयुक्त अनुसंधान तथा औद्योगिक सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की तेज़ी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों के लिए दीर्घकालिक निवेश के बड़े अवसर प्रदान करती है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा दृष्टिकोण दोनों नेताओं ने स्वतंत्र, सुरक्षित और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के समर्थन को दोहराया। उन्होंने समुद्री मार्गों की सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया। व्यापारिक समुदाय से भी संवाद शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों ने Australia–India CEOs Forum को भी संबोधित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने विनिर्माण, अवसंरचना, स्वच्छ ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, AI, फिनटेक, खाद्य प्रसंस्करण और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में निवेश के व्यापक अवसरों को रेखांकित किया। रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा विशेषज्ञों का मानना है कि इस वार्षिक शिखर सम्मेलन से भारत और ऑस्ट्रेलिया की Comprehensive Strategic Partnership को नई मजबूती मिलेगी। रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, तकनीक और निवेश जैसे क्षेत्रों में हुए समझौते आने वाले वर्षों में दोनों देशों के आर्थिक और सामरिक संबंधों को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. स्रोत:भारत सरकार, ऑस्ट्रेलिया सरकार एवं दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के आधिकारिक कार्यालय। मूल रिपोर्ट:9 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी, प्रेस विज्ञप्तियों तथा विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय समाचार स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत-यूके व्यापार समझौते पर उद्योग जगत की नजर

नई दिल्ली, 25 जून 2026। भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर उद्योग जगत में उत्सुकता बढ़ गई है। दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत बनाने के उद्देश्य से चल रही प्रक्रिया अब क्रियान्वयन के चरण की ओर बढ़ रही है। व्यापार और निवेश क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ इस समझौते को भारत के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक अवसर के रूप में देख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापार समझौते के लागू होने से भारतीय उत्पादों को ब्रिटिश बाजार में बेहतर पहुंच मिल सकती है। इससे वस्त्र, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि उत्पाद, आईटी सेवाएं और विनिर्माण क्षेत्र को विशेष लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही भारतीय निर्यातकों के लिए नए व्यापारिक अवसर खुल सकते हैं। उद्योग संगठनों का कहना है कि समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापारिक प्रक्रियाएं अधिक सरल और प्रभावी हो सकती हैं। शुल्क संबंधी बाधाओं में कमी आने से व्यापार की लागत घट सकती है और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ सकती है। इससे छोटे और मध्यम उद्योगों को भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में सहायता मिल सकती है। आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, जबकि यूके वैश्विक वित्तीय और व्यापारिक केंद्रों में से एक है। ऐसे में दोनों देशों के बीच मजबूत व्यापारिक संबंध वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में नई संभावनाएं पैदा कर सकते हैं। निवेश के क्षेत्र में भी इस समझौते को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को बढ़ावा मिल सकता है। भारतीय कंपनियों के लिए ब्रिटेन में विस्तार के अवसर बढ़ेंगे, वहीं ब्रिटिश निवेशकों के लिए भारत का बाजार और अधिक आकर्षक बन सकता है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में उद्योग जगत अभी भी समझौते के अंतिम प्रावधानों पर नजर बनाए हुए है। विभिन्न उद्योगों की अपेक्षाएं हैं कि समझौते में उनके हितों का उचित ध्यान रखा जाएगा और व्यापार संतुलन बनाए रखने के लिए प्रभावी व्यवस्था की जाएगी। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही रोजगार सृजन, निवेश वृद्धि और निर्यात विस्तार जैसे क्षेत्रों में भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है। स्रोत:वाणिज्य एवं उद्योग क्षेत्र से संबंधित सार्वजनिक जानकारी मूल रिपोर्ट:आर्थिक विश्लेषण, व्यापार रिपोर्टों और विभिन्न समाचार एजेंसियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत-यूके व्यापार समझौते के क्रियान्वयन से पहले पीयूष गोयल ब्रिटेन दौरे पर

नई दिल्ली, 25 जून 2026। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal भारत और United Kingdom के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते के क्रियान्वयन से पहले महत्वपूर्ण ब्रिटेन दौरे पर पहुंचे हैं। इस दौरे को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार मंत्री का यह दौरा 25 से 27 जून तक निर्धारित है। इस दौरान वे ब्रिटेन सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, व्यापारिक संगठनों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। बैठक में व्यापार, निवेश, आपूर्ति श्रृंखला सहयोग और आर्थिक साझेदारी से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। भारत और ब्रिटेन के बीच लंबे समय से व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है। दोनों देशों का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना, निवेश के नए अवसर विकसित करना और व्यवसायों के लिए अधिक अनुकूल वातावरण तैयार करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि समझौते के लागू होने से दोनों अर्थव्यवस्थाओं को लाभ मिल सकता है। व्यापार जगत की नजर इस दौरे पर टिकी हुई है क्योंकि समझौते के प्रभाव से भारतीय निर्यातकों को ब्रिटिश बाजार में बेहतर अवसर मिलने की संभावना जताई जा रही है। वहीं ब्रिटिश कंपनियों को भी भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार तक पहुंच मजबूत करने का अवसर मिल सकता है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ने से रोजगार, निवेश और औद्योगिक विकास को नई गति मिल सकती है। विशेष रूप से विनिर्माण, सेवा क्षेत्र, प्रौद्योगिकी और वित्तीय सेवाओं में सहयोग बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए विभिन्न स्तरों पर लगातार संवाद जारी है। व्यापार समझौते के सफल क्रियान्वयन से भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक संबंध और अधिक मजबूत हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच इस प्रकार के समझौते अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में पीयूष गोयल का यह दौरा दोनों देशों के लिए अहम माना जा रहा है। स्रोत:भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय से संबंधित सार्वजनिक जानकारी मूल रिपोर्ट:अंतरराष्ट्रीय व्यापार रिपोर्ट, सरकारी सूत्रों और विभिन्न समाचार एजेंसियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता निर्णायक चरण में, अंतरिम समझौते पर बढ़ी उम्मीदें

जय राष्ट्र न्यूज़ | बिजनेस डेस्क | 23 जून 2026 मुख्य समाचार भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ता अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। नई दिल्ली में दोनों देशों के वरिष्ठ व्यापार अधिकारियों के बीच हुई हालिया बैठकों के बाद अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं। अमेरिका और भारत दोनों ने संकेत दिए हैं कि वे एक ऐसे समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं जो दोनों देशों के लिए लाभकारी और संतुलित हो। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर और केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के बीच हुई चर्चा में बाजार पहुंच, शुल्क व्यवस्था और व्यापारिक सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। क्यों महत्वपूर्ण है यह समझौता? भारत और अमेरिका दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है, लेकिन कई क्षेत्रों में शुल्क, बाजार पहुंच और नियामकीय बाधाओं को लेकर मतभेद भी बने हुए हैं। प्रस्तावित अंतरिम समझौते का उद्देश्य इन बाधाओं को कम करना और द्विपक्षीय व्यापार को नई गति देना है। विशेषज्ञों का मानना है कि समझौता होने पर दोनों देशों के उद्योगों और निवेशकों को लाभ मिल सकता है। भारत की प्रमुख मांगें भारत अमेरिकी बाजार में अपने निर्यातकों के लिए बेहतर और वरीयता प्राप्त बाजार पहुंच चाहता है। विशेष रूप से इंजीनियरिंग उत्पादों, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों के लिए अधिक अवसरों की मांग की जा रही है। भारतीय पक्ष का मानना है कि यदि व्यापारिक बाधाएं कम होती हैं तो निर्यात और निवेश दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। अमेरिका का फोकस अमेरिका कृषि, ऊर्जा, रक्षा और औद्योगिक उत्पादों के लिए भारतीय बाजार में अधिक अवसर चाहता है। अमेरिकी प्रशासन ने कहा है कि वह ऐसा समझौता चाहता है जो दोनों देशों के लिए “निष्पक्ष और पारस्परिक लाभकारी” हो। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी आर्थिक सहयोग को भी मजबूत बना रही है। निवेशकों की नजर व्यापार वार्ता में प्रगति की खबरों पर निवेशक भी नजर बनाए हुए हैं। यदि समझौता अंतिम रूप लेता है तो कई क्षेत्रों में विदेशी निवेश और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार व्यापार समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है, जबकि अमेरिकी कंपनियों को भी भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार तक बेहतर पहुंच मिल सकती है। वैश्विक परिप्रेक्ष्य वैश्विक व्यापार व्यवस्था में जारी अनिश्चितताओं और बदलते आर्थिक समीकरणों के बीच भारत और अमेरिका दोनों अपने आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता व्यापक भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। स्रोत: Reuters मूल रिपोर्ट:https://www.reuters.com/world/india/us-focused-fair-trade-deal-with-india-that-benefits-both-countries-us-embassy-2026-06-23/ जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत में तेजी, जुलाई तक डील होने की संभावना।

जुलाई तक हो सकती है भारत-अमेरिका व्यापार डील, पीयूष गोयल का बड़ा बयान

नई दिल्ली, 8 जून 2026 — भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ताओं में महत्वपूर्ण प्रगति देखने को मिल रही है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिए हैं कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर जुलाई तक सहमति बन सकती है। यह संभावित समझौता दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा दे सकता है। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह डील अंतिम रूप लेती है तो इसका लाभ उद्योग, निवेश, निर्यात और रोजगार जैसे कई क्षेत्रों को मिल सकता है। व्यापार वार्ता में तेजी पिछले कुछ महीनों से भारत और अमेरिका के अधिकारियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई है। दोनों देश व्यापारिक बाधाओं को कम करने, निवेश बढ़ाने और बाजारों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने पर काम कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति हुई है और वार्ता अब निर्णायक चरण की ओर बढ़ रही है। पीयूष गोयल का बयान केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच एक व्यापक और संतुलित समझौता सामने आ सकता है। उनका मानना है कि यह समझौता दोनों देशों के व्यापारिक हितों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाएगा और इससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। भारत को क्या होगा फायदा? विशेषज्ञों का कहना है कि व्यापार डील से भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में अधिक अवसर मिल सकते हैं। इससे कृषि, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल, इंजीनियरिंग और आईटी जैसे क्षेत्रों को लाभ होने की संभावना है। इसके अलावा विदेशी निवेश में वृद्धि और नए रोजगार अवसर भी पैदा हो सकते हैं, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। अमेरिका को क्या मिलेगा? अमेरिकी कंपनियों को भी भारत जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार तक बेहतर पहुंच मिल सकती है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग बढ़ने से निवेश और तकनीकी साझेदारी को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत करने में भी मदद कर सकता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर ऐसे समय में जब दुनिया आर्थिक चुनौतियों और भू-राजनीतिक तनावों का सामना कर रही है, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता वैश्विक व्यापार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थिरता और निवेशकों के विश्वास को बढ़ाने में मदद कर सकती है।

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भारत-रूस के बीच बड़ा आर्थिक समझौता: ऊर्जा, IT और व्यापार में खुलेगा नए अवसरों का द्वार

नई दिल्ली/सेंट पीटर्सबर्ग: वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत और रूस ने अपने आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी (IT), विज्ञान, शिक्षा और परिवहन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी आने वाले वर्षों में भारत और रूस दोनों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीकी विकास, निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकता है। व्यापार को नई ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी भारत और रूस लंबे समय से रणनीतिक साझेदार रहे हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार में तेजी आई है। अब दोनों देशों का लक्ष्य व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करना और द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मौजूदा गति बरकरार रहती है तो आने वाले वर्षों में व्यापार का स्तर रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंच सकता है। ऊर्जा क्षेत्र रहेगा सबसे बड़ा आधार ऊर्जा क्षेत्र भारत-रूस संबंधों की सबसे मजबूत कड़ी माना जाता है। भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है, जबकि रूस दुनिया के प्रमुख ऊर्जा उत्पादकों में शामिल है। दोनों देशों के बीच तेल, गैस और परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में पहले से सहयोग चल रहा है। नए समझौते के बाद इस सहयोग के और विस्तार की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और उद्योगों को स्थिर ऊर्जा आपूर्ति मिल सकेगी। IT सेक्टर में नए अवसर सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और डिजिटल नवाचार भी इस साझेदारी का अहम हिस्सा बनकर उभरे हैं। भारत की IT कंपनियां वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी हैं। वहीं रूस तकनीकी अनुसंधान और इंजीनियरिंग क्षमताओं के लिए जाना जाता है। दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग बढ़ने से: शिक्षा और विज्ञान में सहयोग भारत और रूस ने शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान को भी प्राथमिकता दी है। दोनों देशों के विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई है। छात्र आदान-प्रदान कार्यक्रम और संयुक्त रिसर्च प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है। इससे छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीखने और शोध करने के अवसर मिल सकते हैं। भारतीय उद्योगों को क्या होगा फायदा? व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि इस आर्थिक सहयोग का लाभ कई भारतीय उद्योगों को मिल सकता है। संभावित फायदे: ✔ ऊर्जा लागत में स्थिरता✔ निर्यात के नए अवसर✔ निवेश में वृद्धि✔ रोजगार सृजन✔ तकनीकी सहयोग में विस्तार✔ औद्योगिक विकास को गति विशेष रूप से विनिर्माण, ऊर्जा, IT और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को इससे बड़ा लाभ मिल सकता है। वैश्विक चुनौतियों के बीच मजबूत साझेदारी दुनिया इस समय कई आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में भारत और रूस का सहयोग दोनों देशों के लिए रणनीतिक महत्व रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि वैश्विक मंच पर दोनों देशों की स्थिति को भी मजबूत कर सकती है। निवेशकों की बढ़ी उम्मीदें इस समझौते के बाद निवेशकों की नजर भारत और रूस के बीच होने वाली भविष्य की परियोजनाओं पर टिकी हुई है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि प्रस्तावित योजनाएं सफलतापूर्वक लागू होती हैं तो इससे निवेश माहौल को सकारात्मक संकेत मिलेगा। jairashtranews

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