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अखिलेश यादव का BJP पर तीखा हमला; बोले—UP ने इतनी भ्रष्ट सरकार कभी नहीं देखी, 2027 के लिए SP का अभियान शुरू

लखनऊ: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की BJP सरकार पर भ्रष्टाचार, सरकारी संस्थानों की स्थिति और PDA वर्गों के कथित उत्पीड़न को लेकर तीखा हमला बोला है। इसी के साथ समाजवादी पार्टी ने आज, 1 सितंबर 2026 से 2027 विधानसभा चुनाव के लिए अपना booth-level campaign शुरू कर दिया है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश ने मौजूदा BJP सरकार जैसी भ्रष्ट सरकार पहले कभी नहीं देखी। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में SP कार्यकर्ता जिलों और बूथ स्तर पर जाकर सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार और दूसरे मुद्दों को जनता के बीच उठाएंगे। ‘इतनी भ्रष्ट सरकार पहले कभी नहीं देखी’ Lucknow में पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक के बाद अखिलेश यादव ने BJP सरकार पर बड़ा हमला करते हुए उसे राज्य के इतिहास की “सबसे भ्रष्ट सरकार” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी संस्थानों और संपत्तियों को कमजोर किया जा रहा है और कई महत्वपूर्ण सरकारी assets निजी हाथों में दिए जा रहे हैं। ये आरोप समाजवादी पार्टी की ओर से लगाए गए हैं; BJP सरकार ने इन्हें स्वीकार नहीं किया है। JPNIC को लेकर CM Yogi पर पलटवार अखिलेश यादव ने Jayaprakash Narayan International Centre (JPNIC) को लेकर भी मुख्यमंत्री Yogi Adityanath पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP सरकार सरकारी institutions को बेचने की दिशा में काम कर रही है। यह बयान उस समय आया जब मुख्यमंत्री ने JPNIC के निर्माण और पिछली SP सरकार के दौरान हुई कथित अनियमितताओं को लेकर अखिलेश यादव पर हमला किया था। 26 हजार Schools बंद करने का आरोप SP प्रमुख ने दावा किया कि BJP सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश में करीब 26,000 सरकारी स्कूल बंद किए गए हैं। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी 5 सितंबर यानी Teachers’ Day पर इन बंद बताए जा रहे schools के बाहर कार्यक्रम आयोजित करेगी और शिक्षा के मुद्दे को जनता के बीच उठाएगी। 26,000 schools वाला आंकड़ा अखिलेश यादव का दावा है। Voter List को लेकर भी उठाए सवाल 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव ने electoral rolls के proposed revision पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP और Election Commission की मिलीभगत से voter lists में बदलाव करने की कोशिश हो सकती है। इस आरोप के समर्थन में उन्होंने कोई स्वतंत्र प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया है और Election Commission एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है। SP ने अपने कार्यकर्ताओं से voter lists पर विशेष नजर रखने और booth-level organisation मजबूत करने को कहा है। PDA के उत्पीड़न का लगाया आरोप अखिलेश यादव ने PDA—Pichhda, Dalit और Alpsankhyak समुदायों के लोगों को निशाना बनाए जाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने Uttar Pradesh STF को लेकर भी विवादित टिप्पणी की और उस पर caste bias का आरोप लगाया। उन्होंने Badaun में एक Dalit युवक की police custody में हुई मौत का उदाहरण देते हुए सरकार से जवाब मांगा। ये अखिलेश यादव के राजनीतिक आरोप हैं और संबंधित authorities की जांच या judicial findings से इन्हें स्थापित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। 2027 के लिए SP ने शुरू की तैयारी अखिलेश यादव ने SP के district presidents और organisational office-bearers को अगले दो हफ्तों में ground-level campaign तेज करने का निर्देश दिया है। Party का focus BJP सरकार के खिलाफ alleged corruption, PDA issues, education, employment और voter-list related concerns को जनता तक पहुंचाने पर रहेगा। 2024 Lok Sabha election में Uttar Pradesh में 37 seats जीतने के बाद SP अब उसी political momentum को 2027 Assembly election तक ले जाने की कोशिश कर रही है। इसलिए सबसे accurate headline होगी: अखिलेश यादव का BJP पर तीखा हमला; बोले—UP ने इतनी भ्रष्ट सरकार कभी नहीं देखी, 2027 के लिए SP का अभियान शुरू स्रोत – PTI, India Today, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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‘गोरखपुर स्पेन’ बयान पर काजल निषाद का पलटवार; सड़कों, स्वास्थ्य और स्कूलों को लेकर रवि किशन को घेरा

गोरखपुर: भाजपा सांसद रवि किशन के गोरखपुर की तुलना स्पेन से करने वाले बयान पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी की नेता काजल निषाद ने रवि किशन पर तीखा पलटवार करते हुए शहर की सड़कों, स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी स्कूलों की स्थिति पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि विकास के दावों के बजाय शहर की जमीनी स्थिति को देखा जाना चाहिए। काजल निषाद की प्रतिक्रिया 31 अगस्त को सामने आई थी। आज 1 सितंबर को भी ‘Gorakhpur-Spain’ बयान को लेकर राजनीतिक बहस जारी है और विपक्ष के दूसरे नेता भी इसे लेकर भाजपा पर हमला कर रहे हैं। Ravi Kishan ने क्यों की थी Spain से तुलना? रवि किशन ने गोरखपुर के Basharatpur में Kalyan Mandapam के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान शहर में हुए विकास की तारीफ की थी। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath भी मंच पर मौजूद थे। अपने संबोधन में रवि किशन ने कहा कि उन्हें गोरखपुर अब Spain जैसा महसूस होता है और इसे एक शानदार Smart City बताया। उनके बयान पर मंच पर मौजूद मुख्यमंत्री समेत कई लोग हंसते दिखाई दिए थे। Kajal Nishad ने कसा तीखा तंज रवि किशन के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए काजल निषाद ने बेहद तीखे और व्यंग्यात्मक अंदाज में सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में गोरखपुर Spain कैसे हो गया। उन्होंने रवि किशन पर कटाक्ष करते हुए ‘समोसे में गांजा’ वाली टिप्पणी भी की। यह एक राजनीतिक तंज था, रवि किशन के नशीले पदार्थ के इस्तेमाल का कोई स्थापित तथ्य नहीं है। सड़कों और Health System पर उठाए सवाल काजल निषाद ने कहा कि गोरखपुर में जमीन पर जाकर देखने पर कई सड़कों पर गड्ढे दिखाई देंगे। उन्होंने शहर की healthcare व्यवस्था को भी लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने सरकारी स्कूल बंद होने को लेकर भी एक आंकड़ा पेश किया, लेकिन उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्ट्स में ‘500 सरकारी स्कूल बंद होने’ के उनके दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिली है। इसलिए इसे काजल निषाद का दावा ही माना जाना चाहिए, verified सरकारी आंकड़ा नहीं। Congress भी कर चुकी है बयान पर हमला रवि किशन के Spain वाले बयान पर सिर्फ समाजवादी पार्टी ही नहीं, Congress भी निशाना साध चुकी है। Congress ने social media पर Gorakhpur के waterlogging वाले visuals को Spain की तस्वीरों के साथ जोड़कर BJP सांसद के comparison का मजाक उड़ाया था। पार्टी ने इस बयान को शहर की वास्तविक समस्याओं से दूर बताया। अब Chandrashekhar Azad ने भी ली चुटकी आज 1 सितंबर को Azad Samaj Party के अध्यक्ष और Nagina सांसद Chandrashekhar Azad ने भी Ravi Kishan के बयान पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि वह शुक्रगुजार हैं कि Gorakhpur आने के लिए उन्हें passport या visa की जरूरत नहीं पड़ी। इसके साथ उन्होंने civic infrastructure और दूसरी स्थानीय समस्याओं को लेकर UP सरकार को घेरा। Ravi Kishan और Kajal Nishad पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रवि किशन और काजल निषाद पहले भी सीधे चुनावी मुकाबले में आमने-सामने रह चुके हैं। 2024 Lok Sabha election में Gorakhpur सीट से BJP ने Ravi Kishan और Samajwadi Party ने Kajal Nishad को मैदान में उतारा था। अब Spain वाले बयान ने दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक जुबानी जंग को एक बार फिर तेज कर दिया है। फिलहाल विवाद का केंद्र यही है कि BJP इसे Gorakhpur में हुए infrastructure development की उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है, जबकि विपक्ष roads, waterlogging, health और education जैसे स्थानीय मुद्दे उठाकर इस तुलना पर सवाल खड़े कर रहा है। स्रोत – India Today, Moneycontrol, InKhabar, TrendKia, IANS जय राष्ट्र न्यूज़

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BJP विधायक जय देवी कौशल का गंभीर आरोप—‘मुझे मंदिर में पूजा करने से रोका गया’, जातिगत भेदभाव का दावा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मंदिर के भूमिपूजन कार्यक्रम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मलिहाबाद विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी की विधायक जय देवी कौशल ने आरोप लगाया है कि काकोरी स्थित शीतला माता मंदिर के जीर्णोद्धार से जुड़े कार्यक्रम में उन्हें पूजा-अर्चना में शामिल नहीं होने दिया गया। विधायक ने इसे जातिगत भेदभाव से जोड़ते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं। क्या है पूरा मामला? मामला लखनऊ के काकोरी क्षेत्र स्थित शीतला माता मंदिर का है। मंदिर के जीर्णोद्धार और निर्माण कार्य को लेकर भूमिपूजन एवं शिलान्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में विधायक जय देवी कौशल के साथ भाजपा के कई स्थानीय नेता और कार्यकर्ता भी पहुंचे थे। जय देवी कौशल का आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान पूजा शुरू हो गई, लेकिन उन्हें उसमें विधिवत शामिल नहीं किया गया। उनके मुताबिक वह पूजा के दौरान खड़ी रहीं और उन्हें पूजा-अर्चना से जुड़े कई धार्मिक कार्यों में भाग लेने का अवसर नहीं मिला। विधायक का कहना है कि उन्हें ईंट छूने, रोली लगाने, अगरबत्ती जलाने और नारियल फोड़ने जैसे भूमिपूजन से जुड़े कार्यों से भी दूर रखा गया। विधायक ने लगाया जातिगत भेदभाव का आरोप जय देवी कौशल पासी समुदाय से आती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ हुआ व्यवहार उनकी जाति से जुड़ा हुआ था। विधायक ने इस घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के साथ इस तरह का व्यवहार होता है तो यह सामाजिक समानता को लेकर कई सवाल खड़े करता है। जय देवी कौशल ने यह भी संकेत दिया है कि वह मामले को भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व के सामने उठाएंगी। मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए स्वीकृत हुई थी राशि मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक शीतला माता मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए करीब ₹78 लाख की सरकारी राशि स्वीकृत कराए जाने में विधायक की भूमिका रही है। विधायक के पति और पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर ने भी घटना पर नाराजगी जाहिर की है। रिपोर्टों के अनुसार एक अन्य धार्मिक स्थल के लिए भी लगभग ₹70 लाख की राशि स्वीकृत कराई गई थी। दोनों परियोजनाओं की रकम को मिलाकर कुछ रिपोर्टों में लगभग ₹1.5 करोड़ की राशि का उल्लेख किया गया है। ऐसे में विवाद इसलिए भी अधिक चर्चा में है क्योंकि विधायक ने मंदिर के विकास के लिए सरकारी धन स्वीकृत कराने में अपनी भूमिका का दावा किया है और उसी कार्यक्रम में स्वयं के साथ भेदभाव होने का आरोप लगाया है। परिवार ने भी जताई नाराजगी मामले पर जय देवी कौशल के बेटे विकास किशोर ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने जाति के आधार पर किसी भी व्यक्ति या जनप्रतिनिधि के साथ भेदभाव को गलत बताया। उनका कहना है कि धार्मिक स्थल पूरे समाज की आस्था के केंद्र होते हैं और वहां किसी व्यक्ति के साथ उसकी जाति के आधार पर अलग व्यवहार नहीं होना चाहिए। राजनीतिक विवाद भी हुआ तेज विधायक के आरोप सामने आने के बाद मामला राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है। विपक्ष की ओर से भी घटना को लेकर भाजपा पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि पूरे मामले में यह ध्यान रखना जरूरी है कि जातिगत भेदभाव के आरोप विधायक की ओर से लगाए गए हैं। घटना को लेकर संबंधित पुजारी या मंदिर प्रबंधन का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। सामाजिक भेदभाव पर फिर उठे सवाल इस विवाद ने एक बार फिर धार्मिक स्थलों पर सामाजिक समानता और जातिगत भेदभाव के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। भारतीय संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है और धर्म, जाति तथा अन्य आधारों पर भेदभाव के खिलाफ संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करता है। ऐसे में किसी सार्वजनिक धार्मिक कार्यक्रम में जाति के आधार पर भेदभाव का आरोप सामने आना संवेदनशील मामला माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि भाजपा नेतृत्व, स्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से मामले पर आगे क्या प्रतिक्रिया आती है। नोट: यह खबर विधायक जय देवी कौशल और उनके परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों तथा उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना बाकी है।

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