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ICU में पद्मश्री डॉ. टीके लहरी से कथित मारपीट का आरोप, BHU Medical Board ने आरोपों को बताया बेबुनियाद

वाराणसी, 8 सितंबर 2026: Banaras Hindu University (BHU) के Sir Sunderlal Hospital में भर्ती 85 वर्षीय पद्मश्री सम्मानित और Professor Emeritus डॉ. टीके लहरी के साथ कथित मारपीट का मामला चर्चा में है। परिवार की ओर से भेजी गई शिकायत में अस्पताल के एक डॉक्टर पर डॉ. लहरी के साथ कथित दुर्व्यवहार और मारपीट का आरोप लगाया गया था। हालांकि BHU द्वारा गठित Medical Board ने अपनी जांच के बाद इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है। 29 अगस्त की घटना का लगाया गया था आरोप शिकायत में दावा किया गया था कि 29 अगस्त को Sir Sunderlal Hospital के super-speciality block में इलाज के दौरान डॉ. लहरी के साथ कथित तौर पर मारपीट और दुर्व्यवहार हुआ। बाद में उनकी आंख में blood clot और चेहरे पर निशान वाली तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं। 1 सितंबर को परिवार ने भेजी शिकायत डॉ. लहरी के परिवार की ओर से BHU Vice-Chancellor, IMS-BHU Director और Medical Superintendent सहित अधिकारियों को email के जरिए शिकायत भेजी गई। इसमें घटना की निष्पक्ष जांच, medical examination और डॉ. लहरी की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई। BHU ने गठित किया Medical Board शिकायत मिलने के बाद BHU प्रशासन ने मामले की जांच के लिए specialists का Medical Board गठित किया। इसमें cardiology, general medicine, psychiatry, geriatrics, neurology, critical care और chest diseases से जुड़े विशेषज्ञ शामिल किए गए। Board ने डॉ. लहरी की health condition और उपलब्ध medical evidence की जांच की। जांच के बाद Sir Sunderlal Hospital के Medical Superintendent ने assault या misconduct के आरोपों को baseless बताया। डॉ. लहरी ने भी घटना से किया इनकार मामले में सबसे महत्वपूर्ण नया अपडेट यह है कि Uttar Pradesh के मंत्री Ravindra Jaiswal जब डॉ. लहरी से मिलने अस्पताल पहुंचे, तो बातचीत के दौरान डॉ. लहरी ने कथित तौर पर कहा कि उनके साथ कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। इसके बाद मामला और जटिल हो गया, क्योंकि परिवार की शिकायत और वायरल तस्वीरों में लगाए गए आरोप तथा डॉ. लहरी के बयान में अंतर सामने आया है। निष्पक्ष जांच के लिए Joint Team का निर्देश Ravindra Jaiswal ने BHU officials के साथ district administration और police representatives को शामिल करते हुए एक joint investigation team बनाने का निर्देश दिया है, ताकि आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से जांच की जा सके। परिवार ने जताया BHU की देखभाल पर संतोष सोमवार को डॉ. लहरी की उनकी बहन और परिवार से video call पर बातचीत भी कराई गई। इसके बाद परिवार की ओर से भेजे गए नए email में BHU administration द्वारा उनकी देखभाल पर संतोष जताया गया। हालांकि परिवार ने साथ ही मांग की कि पूरे घटनाक्रम की impartial inquiry, नियमित health updates और भविष्य में ऐसी किसी भी घटना की तत्काल जानकारी परिवार को दी जाए। जनवरी से अस्पताल में भर्ती हैं डॉ. लहरी डॉ. टीके लहरी को 27 जनवरी 2026 को chest-related health problems के बाद Sir Sunderlal Hospital में भर्ती कराया गया था। वह लंबे समय से अस्पताल में treatment और medical supervision में हैं। कौन हैं डॉ. टीके लहरी? डॉ. टीके लहरी BHU के Institute of Medical Sciences से जुड़े वरिष्ठ cardiothoracic surgeon और Professor Emeritus हैं। वह 2003 में retire हुए थे, लेकिन इसके बाद भी लंबे समय तक मरीजों को मुफ्त medical consultation देते रहे। चिकित्सा और समाज सेवा में योगदान के लिए उन्हें 2016 में Padma Shri से सम्मानित किया गया था। मामले की अंतिम तस्वीर अभी बाकी फिलहाल BHU Medical Board ने मारपीट के आरोपों को खारिज किया है और डॉ. लहरी ने भी किसी अप्रिय घटना से इनकार किया है। दूसरी ओर परिवार ने वायरल तस्वीरों और अपनी शुरुआती शिकायत के आधार पर निष्पक्ष जांच जारी रखने की मांग की है। ऐसे में allegations की अंतिम स्थिति joint inquiry और आगे उपलब्ध होने वाले evidence के बाद ही स्पष्ट होगी। source – Times of India / The New Indian Expressजय राष्ट्र न्यूज़

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वाराणसी में अखिलेश यादव को श्रीकृष्ण के स्वरूप में दिखाया गया, हाथ में संविधान; BJP ने जताई आपत्ति

वाराणसी: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के जन्मदिन पर वाराणसी में लगाया गया एक पोस्टर राजनीतिक विवाद का कारण बन गया। पोस्टर में अखिलेश यादव को भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप में दिखाया गया और उनके हाथों में भारतीय संविधान की प्रतियां नजर आईं। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने इसे संविधान और न्याय के प्रति अखिलेश यादव की प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए माफी की मांग की। यह आयोजन 1 जुलाई 2026 को अखिलेश यादव के 53वें जन्मदिन के मौके पर वाराणसी में किया गया था। जन्मदिन पर आयोजित किया गया हवन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक समाजवादी पार्टी की युवा इकाई समाजवादी युवजन सभा से जुड़े करीब 25 से 30 कार्यकर्ताओं ने वाराणसी में अखिलेश यादव के जन्मदिन पर हवन का आयोजन किया। इसी कार्यक्रम में वह पोस्टर सामने आया जिसमें अखिलेश यादव को भगवान श्रीकृष्ण की तरह प्रस्तुत किया गया था। पोस्टर में अखिलेश यादव के हाथों में संविधान दिखाया गया, जिसे लेकर आयोजनकर्ताओं ने कहा कि इसका उद्देश्य संविधान की रक्षा और सामाजिक न्याय का संदेश देना था। SP नेता Ajay Fauji ने क्या कहा? समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश महासचिव अजय फौजी ने पोस्टर का बचाव करते हुए कहा कि अखिलेश यादव को श्रीकृष्ण के स्वरूप में दिखाने के पीछे एक प्रतीकात्मक संदेश है। उनके मुताबिक अखिलेश यादव संविधान में विश्वास रखते हैं और पार्टी उन्हें न्याय तथा सामाजिक अधिकारों के पक्ष में आवाज उठाने वाले नेता के रूप में देखती है। अजय फौजी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने लोगों को धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने का संदेश दिया था और पोस्टर के जरिए इसी विचार को राजनीतिक रूप से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया। दोनों हाथों में क्यों दिखाया गया संविधान? पोस्टर की सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हुई कि अखिलेश यादव के दोनों हाथों में संविधान की प्रतियां दिखाई गईं। SP कार्यकर्ताओं का कहना था कि संविधान पिछले कुछ वर्षों में अखिलेश यादव की राजनीति का प्रमुख मुद्दा रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव से लेकर उसके बाद तक समाजवादी पार्टी और INDIA गठबंधन ने संविधान की रक्षा, आरक्षण और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को लगातार उठाया है। इसी राजनीतिक संदेश को पोस्टर में श्रीकृष्ण के स्वरूप के साथ जोड़ने की कोशिश की गई। भगवान कृष्ण से तुलना पर BJP ने जताई आपत्ति पोस्टर सामने आने के बाद BJP ने इसका विरोध किया। उत्तर प्रदेश BJP के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर भगवान की छवि का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि किसी राजनीतिक नेता को भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप में प्रस्तुत करना धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकता है। BJP ने पोस्टर बनाने और प्रदर्शित करने वाले समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं से माफी मांगने की मांग भी की। BJP ने Ram Mandir का मुद्दा भी उठाया राकेश त्रिपाठी ने समाजवादी पार्टी पर हमला करते हुए राम मंदिर और मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की राजनीति लंबे समय से धार्मिक तुष्टिकरण पर आधारित रही है और अब पार्टी कार्यकर्ता अखिलेश यादव को भगवान के रूप में दिखा रहे हैं। यह BJP का राजनीतिक आरोप है, जिस पर समाजवादी पार्टी का अलग रुख रहा है। Ram Mandir Donation मामले का भी हुआ जिक्र समाजवादी पार्टी के आयोजकों ने इस पोस्टर को अखिलेश यादव द्वारा अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाने से भी जोड़ा। अजय फौजी ने कहा कि अगर अखिलेश यादव राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े कथित गलत काम के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं तो वह दूसरे मंदिरों और समाज के अन्य मुद्दों पर भी आवाज उठाएंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं की इच्छा है कि अखिलेश यादव समाज के हर वर्ग के साथ खड़े हों और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं। Kalki Avatar का भी किया गया जिक्र कार्यक्रम के दौरान समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भगवान विष्णु के कल्कि अवतार से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं का भी उल्लेख किया। आयोजकों ने कहा कि उन्होंने हवन के माध्यम से समाज में न्याय और धर्म की स्थापना की कामना की। हालांकि अखिलेश यादव को सीधे किसी धार्मिक अवतार के रूप में मान्यता देने जैसी कोई आधिकारिक बात समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से सामने नहीं आई थी। यह पोस्टर स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा आयोजित कार्यक्रम का हिस्सा था। Akhilesh Yadav के 53वें जन्मदिन पर हुआ कार्यक्रम अखिलेश यादव का जन्म 1 जुलाई 1973 को हुआ था। 1 जुलाई 2026 को उन्होंने अपना 53वां जन्मदिन मनाया। उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनके जन्मदिन के मौके पर कार्यक्रम आयोजित किए। कहीं केक काटा गया तो कहीं पूजा, हवन और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। वाराणसी का यह आयोजन पोस्टर के कारण सबसे ज्यादा चर्चा में आया। Social Media पर भी छाया Poster अखिलेश यादव को श्रीकृष्ण के स्वरूप में दिखाने वाला पोस्टर सोशल मीडिया पर भी तेजी से शेयर किया गया। कुछ लोगों ने इसे संविधान और सामाजिक न्याय से जुड़ा राजनीतिक संदेश बताया, जबकि कई लोगों ने धार्मिक छवियों को राजनीति से जोड़ने पर आपत्ति जताई। राजनीतिक नेताओं को देवी-देवताओं के रूप में दिखाने वाले पोस्टर भारतीय राजनीति में पहले भी विवाद का कारण बनते रहे हैं। राजनीतिक प्रतीकों में संविधान की बढ़ती भूमिका पिछले कुछ वर्षों में संविधान भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण प्रतीक बनकर उभरा है। लोकसभा चुनावों के दौरान राहुल गांधी, अखिलेश यादव और विपक्ष के कई नेता सार्वजनिक सभाओं में संविधान की प्रति लेकर दिखाई दिए थे। समाजवादी पार्टी ने भी PDA—पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक—की अपनी राजनीति को संविधान, आरक्षण और सामाजिक न्याय से जोड़कर प्रस्तुत किया है। वाराणसी के पोस्टर में संविधान को शामिल करना इसी राजनीतिक messaging का हिस्सा माना गया। विवाद पर क्या है स्थिति? इस मामले में किसी कानूनी कार्रवाई की प्रमुख रिपोर्ट सामने नहीं आई थी, लेकिन BJP और SP के बीच तीखी बयानबाजी जरूर हुई। SP के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने पोस्टर को न्याय और संविधान के प्रति अखिलेश यादव की प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया, जबकि BJP ने इसे भगवान श्रीकृष्ण का अपमान…

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