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SIR में हटाए गए voters के लिए Maharashtra ने EC से Form 6 बदलने की मांग, “new voter” declaration पर आपत्ति

मुंबई, 18 अक्टूबर 2026: Maharashtra सरकार ने Election Commission से मांग की है कि Special Intensive Revision (SIR) के दौरान voter list से हटाए गए लोगों को दोबारा नाम जुड़वाने के लिए Form 6 में खुद को “new voter” घोषित न करना पड़े। राज्य का कहना है कि जो व्यक्ति पहले से registered voter था, उसे technical deletion के बाद फिर से “new elector” मानना उचित नहीं है। Maharashtra ने क्या बदलाव मांगा? राज्य ने EC से Form 6 में ऐसा विकल्प जोड़ने को कहा है जिससे पहले से registered लेकिन SIR में हटाए गए voter यह बता सकें कि वे re-enrolment या restoration के लिए आवेदन कर रहे हैं, न कि पहली बार voter बन रहे हैं। “New voter” declaration पर क्यों आपत्ति? Maharashtra का तर्क है कि अगर किसी व्यक्ति का नाम पहले electoral roll में था और बाद में SIR के दौरान हट गया, तो Form 6 में उसे “new voter” बताना तथ्यात्मक रूप से गलत हो सकता है। इससे affidavit/declaration से जुड़े legal complications भी पैदा हो सकते हैं। SIR के बाद बढ़ी re-enrolment की जरूरत Special Intensive Revision के बाद कई ऐसे voters सामने आए जिनके नाम electoral rolls से हट गए थे और अब उन्हें दोबारा inclusion के लिए application देना पड़ रहा है। इसी background में Form 6 की wording को लेकर सवाल उठे हैं। EC के सामने practical issue Election Commission को अब यह तय करना है कि existing Form 6 format को बदला जाए, अलग category बनाई जाए या deleted voters के लिए अलग restoration mechanism दिया जाए। इससे verification process भी ज्यादा clear हो सकता है। विपक्ष भी उठा रहा है voter deletion का मुद्दा SIR को लेकर opposition parties पहले से ही large-scale voter deletions पर सवाल उठा रही हैं। उनका आरोप है कि genuine voters को list से बाहर किया जा रहा है, जबकि Election Commission ऐसी राजनीतिक bias वाली शिकायतों को खारिज करता रहा है। आगे क्या? अगर EC Maharashtra का सुझाव मानता है, तो SIR में हटाए गए voters के लिए re-registration आसान हो सकता है और उन्हें गलत तरीके से “first-time voter” declaration नहीं देना पड़ेगा। source – The Indian Express, Election Commission developments जय राष्ट्र न्यूज़

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बल्लारी में 7,561 वोटरों के नाम हटाने की कथित कोशिश, BJP BLA के खिलाफ FIR; कोर्ट ने search warrant भी जारी किया

बल्लारी: कर्नाटक के बल्लारी में Special Intensive Revision (SIR) के दौरान 7,561 मतदाताओं के नाम electoral roll से हटवाने की कथित कोशिश को लेकर BJP के Booth Level Agent (BLA) और चुनाव अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। मामला BJP corporator और BLA-1 T. Srinivas Mothkur से जुड़ा है। ताजा घटनाक्रम में बल्लारी की एक अदालत ने पुलिस को उनके दफ्तर की तलाशी के लिए search warrant भी जारी किया है। 1 अक्टूबर को दर्ज हुई FIR Brucepet Police Station में यह FIR 1 अक्टूबर को Congress BLA Goutham S की शिकायत पर दर्ज की गई थी। FIR में T. Srinivas Mothkur के अलावा Ballari City Corporation के Assistant Commissioner Nandish, BLO Sumalatha और case worker Sharanabasava के नाम भी शामिल हैं। 7,561 वोटरों की re-verification की मांग मामले की शुरुआत 21 सितंबर को हुई, जब Srinivas ने Ballari City Assembly constituency के 7,561 मतदाताओं की दोबारा जांच की मांग की। उन्होंने दावा किया कि इनमें कुछ मतदाता क्षेत्र छोड़ चुके हैं, अनुपस्थित हैं या दूसरे स्थान पर भी registered हैं। अधिकारियों ने पहले खारिज किया था अनुरोध चुनाव अधिकारियों ने शुरुआती request को पर्याप्त दस्तावेज या supporting information न होने के कारण स्वीकार नहीं किया। इसके बाद Srinivas ने इन मतदाताओं के खिलाफ Form 7 objections दाखिल करने की कोशिश की। Form 7 का इस्तेमाल electoral roll में किसी नाम के inclusion पर objection या deletion की मांग के लिए किया जाता है। Bulk Form 7 submissions पर सवाल Election authorities ने Srinivas को बताया था कि BLA एक दिन में एक BLO के पास सीमित संख्या में applications दे सकता है। अगर claims-and-objections period में किसी BLA की applications 30 से अधिक होती हैं, तो ERO या Assistant ERO द्वारा व्यक्तिगत cross-verification जरूरी हो जाता है। शिकायत में 98.08% minority voters का दावा Congress BLA की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जिन 7,561 voters को target किया गया, उनमें लगभग 98.08% minority communities से थे। यह शिकायतकर्ता का आरोप है और पुलिस जांच में इसकी सत्यता की जांच की जानी है। चुनाव अधिकारियों पर भी मिलीभगत का आरोप शिकायत में आरोप है कि कुछ election officials ने पहले objection reject होने के बावजूद बाद में इन voters की re-verification शुरू की। इसी आधार पर election officials को भी FIR में आरोपी बनाया गया है। कोर्ट ने BJP BLA के दफ्तर की तलाशी की अनुमति दी मामले में अब एक नया development सामने आया है। Ballari court ने पुलिस को Srinivas Mothkur के Talur Road स्थित office की तलाशी लेने की अनुमति दी है। जांच टीम Form 7 applications की तैयारी और submission से जुड़े records और अन्य material की जांच करना चाहती है। Karnataka CEO ने bulk deletion complaints पर जांच का भरोसा दिया Karnataka के Chief Electoral Officer V. Anbukumar ने bulk Form 7 applications से जुड़ी शिकायतों की जांच और कानून के मुताबिक कार्रवाई का भरोसा दिया है। राज्य के दूसरे हिस्सों से भी कथित mass voter-deletion applications की शिकायतें सामने आई हैं। BJP ने FIRs पर उठाए सवाल BJP और JD(S) नेताओं ने इन FIRs का विरोध किया है। उनका कहना है कि genuine Form 7 objections दाखिल करने वाले party workers को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। BJP ने यह भी तर्क दिया है कि bulk objections दाखिल करना अपने आप में गैरकानूनी नहीं है। Congress ने लगाया voter suppression का आरोप दूसरी ओर Congress नेताओं का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान eligible voters, विशेषकर minorities, के नाम हटाने की सुनियोजित कोशिश की जा रही है। इन आरोपों को BJP ने खारिज किया है और कहा है कि voter list verification का उद्देश्य केवल गलत, duplicate या ineligible entries की पहचान करना है। जांच के बाद ही साफ होगी वास्तविकता फिलहाल 7,561 voters के नाम वास्तव में हटाए गए थे, इसका दावा स्थापित नहीं हुआ है। मामला कथित deletion attempt और Form 7 submissions से जुड़ा है। पुलिस जांच, electoral records और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदारी स्पष्ट होगी। source – The News Minute / Hindustan Times / The Indian Express / IANS / Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मुंबई में CJP का प्रदर्शन, SIR विवाद फिर केंद्र में

मुंबई: Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर जारी विवाद के बीच Cockroach Janta Party (CJP) ने मुंबई में Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया है। शिवाजी पार्क में प्रस्तावित इस प्रदर्शन से पहले सुरक्षा बढ़ा दी गई, हालांकि मुंबई पुलिस ने कार्यक्रम को अनुमति नहीं दी। CJP ने कहा है कि उसका आंदोलन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक जारी रहेगा। शिवाजी पार्क में प्रदर्शन का ऐलान CJP ने 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क से अपने विरोध अभियान की शुरुआत करने की घोषणा की। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि यह आंदोलन केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहेगा और आगे गोवा, बेंगलुरु, कोलकाता समेत अन्य शहरों में भी प्रदर्शन किए जाएंगे। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग CJP की मुख्य मांग Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। संगठन का आरोप है कि SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल हैं। ये आरोप CJP और अन्य प्रदर्शनकारी समूहों के राजनीतिक दावे हैं और चुनाव आयोग का इस पर अलग आधिकारिक रुख रहा है। SIR प्रक्रिया को रोकने की भी मांग CJP ने Special Intensive Revision प्रक्रिया को रोकने की मांग भी उठाई है। संगठन चाहता है कि पिछली मतदाता सूची को बहाल किया जाए और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली तथा नियुक्ति प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता लाई जाए। मुंबई पुलिस ने नहीं दी अनुमति मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी। पुलिस ने सार्वजनिक व्यवस्था, ट्रैफिक और आपातकालीन वाहनों की आवाजाही से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया। इसके बावजूद प्रदर्शन की घोषणा के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी गई। दादर स्टेशन पर भी सुरक्षा बढ़ी प्रदर्शन को देखते हुए दादर रेलवे स्टेशन पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए। Railway Protection Force और अन्य स्टाफ की संख्या बढ़ाई गई ताकि बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की स्थिति में भीड़ और आवाजाही को नियंत्रित किया जा सके। दिल्ली में भी हुआ विरोध मुंबई के साथ-साथ दिल्ली में भी CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन हुआ। जंतर-मंतर के आसपास भारी सुरक्षा तैनात की गई और पुलिस ने बिना अनुमति प्रदर्शन करने पहुंचे कई लोगों को हिरासत में लिया। इससे SIR और चुनाव आयोग से जुड़ा विवाद राष्ट्रीय स्तर पर फिर चर्चा में आ गया। विपक्षी दल भी उठा रहे SIR का मुद्दा SIR विवाद केवल CJP तक सीमित नहीं है। INDIA Bloc समेत कई विपक्षी दल और छात्र संगठन भी मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष ने अलग-अलग शहरों में विरोध कार्यक्रमों की घोषणा की है। दूसरे शहरों में भी आंदोलन की तैयारी CJP ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में आंदोलन का दायरा बढ़ाया जाएगा। गोवा, बेंगलुरु और कोलकाता समेत कई शहरों में मार्च और प्रदर्शन की योजना बनाई गई है। संगठन का कहना है कि CEC के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रहेगा। SIR विवाद पर राजनीतिक टकराव तेज SIR को लेकर चुनाव आयोग और विरोधी दलों के बीच राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ रहा है। प्रदर्शनकारी जहां मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, वहीं आरोपों और कानूनी मांगों की अंतिम स्थिति संबंधित संस्थाओं और न्यायिक प्रक्रियाओं से तय होगी। source – The Indian Express / The New Indian Express / India Today / The Times of India / PTI जय राष्ट्र न्यूज़

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CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ फिर Removal Notice की तैयारी, SIR विवाद पर विपक्ष का विरोध तेज

नई दिल्ली: Special Intensive Revision (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए संसद में नया Removal Notice लाने की तैयारी कर रहे हैं। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक प्रस्ताव का मसौदा कानूनी विशेषज्ञों की मदद से तैयार किया जा रहा है और विपक्ष इसे लोकसभा तथा राज्यसभा दोनों में उठाने की योजना बना रहा है। इस मुद्दे पर INDIA bloc के नेताओं के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। संसद में नया Notice लाने की तैयारी विपक्षी दलों की योजना मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में प्रस्ताव का नोटिस देने की है। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है और इसे संयुक्त विपक्ष की ओर से पेश करने पर बातचीत चल रही है। हालांकि अभी संसद में नया नोटिस औपचारिक रूप से स्वीकार या विचार के लिए सूचीबद्ध नहीं हुआ है। SIR विवाद के बाद बढ़ा राजनीतिक दबाव यह पूरा विवाद मतदाता सूचियों के Special Intensive Revision को लेकर बढ़ा है। विपक्ष का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम हटाने और verification के नियमों को लेकर गंभीर सवाल हैं। कांग्रेस, TMC, समाजवादी पार्टी, AAP, DMK और वाम दलों समेत कई विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने या उनके इस्तीफे की मांग की है। आयोग के भीतर आपत्तियों की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद हालिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में मतदाता सूची, Form-6, डेटा प्रबंधन और SIR से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर कई औपचारिक आपत्तियां या टिप्पणियां दर्ज की थीं। इन रिपोर्ट्स के सामने आने के बाद विपक्ष ने सवाल उठाया कि क्या चुनाव आयोग में महत्वपूर्ण फैसले पूरी सहमति से लिए जा रहे थे। Election Commission ने मतभेद के दावे को किया खारिज चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेद को लेकर उठ रहे सवालों पर कहा है कि किसी multi-member constitutional body में अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा और आपत्तियां सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के मुताबिक SIR समेत अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए और दोनों चुनाव आयुक्त अंतिम फैसलों का हिस्सा थे। Voter Roll Software की समीक्षा भी शुरू विवाद के बीच चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से जुड़े अपने software system की समीक्षा शुरू करने का फैसला किया है। आयोग ने तकनीकी और कानूनी प्रक्रियाओं की समीक्षा तथा discrepancies वाले मतदाताओं तक स्थानीय अधिकारियों की पहुंच बेहतर करने जैसे कदमों पर काम शुरू किया है। Congress ने देशभर में तेज किए प्रदर्शन ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस ने कई राज्यों और जिलों में विरोध प्रदर्शन किए हैं। प्रदर्शनकारियों ने SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाते हुए CEC को हटाने की मांग की। कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प तथा हिरासत की घटनाएं भी सामने आई हैं। BJP और NDA ने किया Election Commission का बचाव BJP और NDA के कई नेताओं ने चुनाव आयोग के पक्ष में बयान दिए हैं। उनका कहना है कि आयोग के भीतर अलग-अलग विचार सामने आना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। NDA नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। CEC को हटाने की प्रक्रिया आसान नहीं संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरह और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जैसे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है। इस प्रक्रिया के लिए संसद के दोनों सदनों में निर्धारित विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होना जरूरी है। इसके बाद ही राष्ट्रपति द्वारा पद से हटाने की कार्रवाई की जा सकती है। विपक्षी बैठक पर नजर INDIA bloc के नेताओं की बैठक में SIR, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और CEC को हटाने के प्रस्ताव पर संयुक्त रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। विपक्षी नेताओं ने संकेत दिया है कि ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग आने वाले दिनों में उनके अभियान का प्रमुख मुद्दा बनी रह सकती है। SIR विवाद बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा SIR को लेकर विवाद अब केवल मतदाता सूची संशोधन तक सीमित नहीं है। यह चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया, पारदर्शिता और संस्थागत स्वतंत्रता को लेकर बड़े राजनीतिक टकराव में बदल चुका है। एक ओर विपक्ष CEC को हटाने की तैयारी कर रहा है, वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि उसकी प्रक्रियाएं कानून के अनुसार हैं और अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। फिलहाल नए Removal Notice पर संसद की औपचारिक कार्रवाई सामने आने का इंतजार है। source – The Indian Express / Reuters / India Today / Election Commission of India जय राष्ट्र न्यूज़

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SIR के खिलाफ प्रकाश राज ने जताया विरोध, बोले- ‘हर योग्य मतदाता का नाम सूची में रहना चाहिए’

बेंगलुरु: अभिनेता प्रकाश राज ने कर्नाटक में मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) का विरोध करते हुए प्रक्रिया को वापस लेने की मांग की है। 1 सितंबर 2026 को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में आयोजित ‘Election Commission Chalo’ मार्च में प्रकाश राज समेत कई नागरिक संगठनों के सदस्य शामिल हुए। मार्च के दौरान बेंगलुरु पुलिस ने प्रकाश राज और कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया। ‘SIR वापस लिया जाए’- प्रकाश राज प्रदर्शन के दौरान प्रकाश राज ने कहा कि SIR प्रक्रिया को समाप्त किया जाना चाहिए और इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी। उन्होंने कहा कि नागरिक संगठनों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी योग्य मतदाता का मतदान का अधिकार प्रभावित न हो। अभिनेता किशोर भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए और उन्होंने मतदाता सूची की प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की। ‘Election Commission Chalo’ अभियान का किया था ऐलान प्रकाश राज ने 25 अगस्त को ही घोषणा कर दी थी कि नागरिक संगठनों के साथ 1 सितंबर को बेंगलुरु में Election Commission Chalo अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया था कि जब कर्नाटक में विधानसभा चुनाव में अभी समय है तो इतनी बड़ी मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया को कम समय में पूरा करने की जरूरत क्यों है। उन्होंने दावा किया कि इससे आम मतदाताओं को दस्तावेज और सत्यापन के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। प्रकाश राज का नाम भी ‘Shifted’ कैटेगरी में आया था इस विवाद से पहले प्रकाश राज ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि SIR के दौरान उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है। हालांकि कर्नाटक चुनाव अधिकारियों ने इस दावे का खंडन किया। अधिकारियों के अनुसार उनका नाम ‘permanently shifted’ कैटेगरी में इसलिए रखा गया क्योंकि Booth Level Officer की जांच में वह पिछले चार वर्षों से अपने पुराने पंजीकृत पते पर नहीं रह रहे थे। चुनाव अधिकारी ने कहा कि प्रकाश राज का नाम पहले शांतिनगर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में सक्रिय था और वह अपने वर्तमान पते पर Form 6 के जरिए पंजीकरण करा सकते हैं। एक करोड़ से ज्यादा नाम ASDDO कैटेगरी में कर्नाटक में SIR के दौरान चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार करीब 1.08 करोड़ मतदाता ASDDO यानी Absent, Shifted, Dead, Duplicate and Others श्रेणी में चिन्हित किए गए थे। SIR के बाद जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 4.46 करोड़ मतदाता शामिल रहे। आयोग के अनुसार जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां हैं, उन्हें नोटिस और दावा-आपत्ति प्रक्रिया के जरिए अपनी पात्रता साबित करने का अवसर दिया जा रहा है। चुनाव आयोग ने प्रक्रिया का किया बचाव मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने SIR का बचाव करते हुए कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण जैसी प्रक्रिया के लिए चुनाव आयोग के साथ मतदाताओं का सहयोग भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश में चुनाव संविधान, कानून और चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत आयोजित किए जाते हैं और राजनीतिक दलों तथा उम्मीदवारों के प्रतिनिधि विभिन्न चरणों में प्रक्रिया की निगरानी करते हैं। BJP और JD(S) भी उठा चुके हैं सवाल कर्नाटक में SIR को लेकर केवल प्रकाश राज या कांग्रेस से जुड़े नेताओं ने ही सवाल नहीं उठाए हैं। BJP और JD(S) ने भी जुलाई में चुनाव आयोग के सामने प्रक्रिया से संबंधित कथित अनियमितताओं की शिकायत की थी। दोनों दलों ने कुछ क्षेत्रों में घर-घर सत्यापन की प्रक्रिया के पालन को लेकर सवाल उठाए थे। कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जवाब में कहा था कि SIR चुनाव आयोग के निर्देशों और कानून के अनुसार किया जा रहा है। SIR को लेकर जारी है राजनीतिक और कानूनी बहस कर्नाटक में SIR को लेकर मतदाता सूची से संभावित नाम हटने, दस्तावेज सत्यापन और प्रक्रिया की समयसीमा जैसे विषयों पर लगातार बहस चल रही है। प्रकाश राज और प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि किसी भी योग्य नागरिक को मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को सटीक बनाने के लिए तय कानूनी प्रक्रिया के तहत सत्यापन किया जा रहा है। source – The Indian Express / Hindustan Times / Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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SIR पर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त का गंभीर सवाल; चुनाव आयोग से जवाब की मांग

भुवनेश्वर, 6 सितंबर 2026: पूर्व Chief Election Commissioner S.Y. Quraishi ने Election Commission की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि इस exercise के दौरान देशभर में करीब 14–15 करोड़ मतदाताओं के नाम electoral rolls से बाहर हुए और Election Commission से पूछा कि SIR के जरिए आखिर कितने illegal immigrants की पहचान की गई। ‘कितने Illegal Immigrants मिले, आंकड़ा बताए EC’ Quraishi ने कहा कि SIR के उद्देश्यों में electoral rolls को साफ करना और ineligible voters की पहचान करना शामिल था। उन्होंने Election Commission से मांग की कि वह publicly बताए कि इस प्रक्रिया में कितने कथित illegal immigrants पाए गए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आयोग को इस आंकड़े को सामने लाना चाहिए, ताकि देश को SIR की वास्तविक सफलता का पता चल सके। 14–15 करोड़ नाम हटने का किया दावा पूर्व CEC ने दावा किया कि SIR के बाद अलग-अलग राज्यों की draft electoral rolls में कुल मिलाकर करीब 14 से 15 करोड़ नाम कम हुए हैं। उन्होंने इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि किसी genuine voter का नाम गलत तरीके से हटना भी Election Commission की accountability पर सवाल खड़ा करता है। Voting को बताया Constitutional Right Quraishi ने कहा कि voter list में eligible नागरिक का नाम होना कोई “charity” नहीं बल्कि संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि केवल procedural या bureaucratic कारणों के आधार पर किसी eligible citizen को voting rights से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। SIR को बताया ‘Illogical और Arbitrary’ Quraishi ने voter deletions की प्रक्रिया को “illogical, unreasonable, arbitrary and mischievous” बताया। उन्होंने large-scale deletions को लेकर independent scrutiny और Election Commission की जवाबदेही की जरूरत पर जोर दिया। Election Commission का क्या कहना है? Election Commission का कहना रहा है कि draft voter list से नाम बाहर होना final deletion नहीं होता और eligible citizens claims तथा objections process के जरिए अपना नाम दोबारा शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। वहीं Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar ने हालिया SIR criticism के बीच कहा है कि आयोग की impartiality और integrity बरकरार है और सभी eligible Indian citizens का नाम electoral rolls में होना चाहिए। हालांकि Quraishi के illegal immigrants वाले सवाल पर कोई specific आंकड़ा सार्वजनिक किए जाने की पुष्टि नहीं मिली है। source – ANI / PTI / Hindustan Times / ThePrint जय राष्ट्र न्यूज़

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मतदाता सूची से मेरा नाम गायब!” प्रकाश राज का दावा, चुनाव अधिकारियों ने दिया स्पष्टीकरण

बेंगलुरु: अभिनेता और पूर्व लोकसभा उम्मीदवार प्रकाश राज ने दावा किया है कि कर्नाटक में चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के दौरान बेंगलुरु की मतदाता सूची से उनका नाम गायब हो गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर इसे लेकर सवाल उठाए और कहा कि वह उन मतदाताओं में शामिल हैं जिनका नाम सूची से हट गया है। हालांकि, चुनाव अधिकारियों की ओर से इस मामले में स्पष्टीकरण सामने आया है। बेंगलुरु सेंट्रल सिटी कॉरपोरेशन के मुताबिक प्रकाश राज का नाम मतदाता सूची से डिलीट नहीं किया गया है, बल्कि सत्यापन के दौरान उन्हें उनके पुराने पते से “Shifted” के रूप में दर्ज किया गया है। प्रकाश राज ने वीडियो जारी कर उठाए सवाल प्रकाश राज ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि SIR प्रक्रिया के बाद बेंगलुरु की मतदाता सूची में उनका नाम नहीं दिख रहा है। उन्होंने कहा कि उनका जन्म इसी निर्वाचन क्षेत्र में हुआ, उन्होंने यहीं पढ़ाई की और थिएटर से अपने करियर की शुरुआत भी यहीं की। उन्होंने यह भी बताया कि वह 2019 में बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ चुके हैं। उन्होंने अपने वीडियो में सवाल किया कि मतदाता सूची में अपना नाम वापस दर्ज कराने के लिए उन्हें अब कौन-कौन से दस्तावेज जमा करने होंगे। चुनाव अधिकारियों ने क्या कहा? मामले में बेंगलुरु सेंट्रल सिटी कॉरपोरेशन ने स्पष्ट किया कि प्रकाश राज का नाम डिलीट नहीं किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, SIR के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) द्वारा घर-घर सत्यापन किया गया। इस प्रक्रिया में यह पाया गया कि प्रकाश राज अपने पुराने पते पर अब नहीं रह रहे हैं। इसके बाद उनके रिकॉर्ड को “Shifted” के तौर पर चिह्नित किया गया। पुराने पते पर दर्ज था नाम अधिकारियों के मुताबिक 16 जून 2026 को SIR के लिए मतदाता सूची का डेटा फ्रीज किए जाने के समय प्रकाश राज का नाम 163-शांतिनगर विधानसभा क्षेत्र के एक पते पर दर्ज था। BLO के सत्यापन में उनके पुराने पते पर स्थायी रूप से स्थानांतरित होने की जानकारी मिलने के बाद रिकॉर्ड में बदलाव किया गया। इसका मतलब यह है कि चुनाव अधिकारियों के स्पष्टीकरण के अनुसार मामला मतदाता का नाम पूरी तरह समाप्त करने का नहीं, बल्कि पते में बदलाव/स्थानांतरण की स्थिति दर्ज करने का है। SIR प्रक्रिया के बीच सामने आया मामला कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया चल रही है। इस प्रक्रिया के दौरान BLOs घर-घर जाकर मतदाताओं के विवरण का सत्यापन कर रहे हैं। राज्य में बड़ी संख्या में मतदाताओं को ASDDO—Absent, Shifted, Duplicate, Dead and Others जैसी श्रेणियों में चिह्नित किया गया है। हालांकि किसी मतदाता का ASDDO श्रेणी में होना अपने आप में अंतिम रूप से मतदाता सूची से नाम हटने के बराबर नहीं है। प्रकाश राज ने सरकार पर साधा निशाना प्रकाश राज ने अपने बयान में सरकार पर सीधे तौर पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि क्या सत्ता में बैठे लोग ऐसे नागरिकों को मतदान से रोक सकते हैं जो उन्हें दोबारा सत्ता में नहीं चुनना चाहते। उन्होंने अपने अंदाज में कहा कि वोट देने के अधिकार को प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है, लेकिन लोगों को सत्ता से हटाने से नहीं रोका जा सकता। उनके बयान के बाद यह मामला राजनीतिक बहस में भी आ गया है। 2019 में चुनाव लड़ चुके हैं प्रकाश राज प्रकाश राज का बेंगलुरु से राजनीतिक जुड़ाव पुराना है। उन्होंने 2019 लोकसभा चुनाव में बेंगलुरु सेंट्रल से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए उन्होंने मतदाता सूची में अपने नाम की स्थिति पर सवाल उठाया है। SIR की प्रक्रिया अभी जारी कर्नाटक में SIR प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार घर-घर सत्यापन का चरण 17 अगस्त तक चलेगा। इसके बाद 24 अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की जानी है। ड्राफ्ट सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर 24 अगस्त से 23 सितंबर तक रहेगा। इसके बाद प्रक्रिया पूरी होने पर 27 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जानी है। नाम को लेकर आगे क्या होगा? प्रकाश राज के मामले में चुनाव अधिकारियों के स्पष्टीकरण के बाद अब मुख्य मुद्दा उनके मतदाता रिकॉर्ड को सही पते पर अपडेट करने का है। यदि किसी मतदाता का नाम या पता गलत तरीके से दर्ज हुआ है, तो SIR की निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित व्यक्ति दावा या आपत्ति दर्ज कर सकता है और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करा सकता है। निष्कर्ष प्रकाश राज ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान बेंगलुरु की मतदाता सूची से उनका नाम गायब हो गया, जिसके बाद उन्होंने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। हालांकि, चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनका नाम डिलीट नहीं किया गया, बल्कि BLO के सत्यापन के बाद पुराने पते से “Shifted” के रूप में दर्ज किया गया है। अब SIR प्रक्रिया के अगले चरण में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रकाश राज का मतदाता रिकॉर्ड किस तरह अपडेट होता है। साथ ही, ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद वह अपने रिकॉर्ड को लेकर दावा या आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। Source: Bengaluru Central City Corporation / Election-related reports / Latest reports जय राष्ट्र न्यूज़

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मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान तेज, नए मतदाताओं के लिए Form-6 और सत्यापन प्रक्रिया पर चुनाव आयोग का विशेष फोकस

नई दिल्ली, 13 जुलाई। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने आगामी चुनावी तैयारियों के मद्देनज़र मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने के उद्देश्य से विशेष पुनरीक्षण अभियान को तेज कर दिया है। आयोग ने नए पात्र मतदाताओं से समय पर Form-6 के माध्यम से पंजीकरण कराने तथा सही दस्तावेज़ों के साथ आवेदन प्रस्तुत करने की अपील की है। साथ ही मतदाता सूची में दर्ज विवरणों के सत्यापन की प्रक्रिया पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। (voters.eci.gov.in) नए मतदाताओं के लिए Form-6 निर्वाचन आयोग के अनुसार जिन भारतीय नागरिकों ने निर्धारित आयु पूरी कर ली है और अभी तक मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज नहीं कराया है, वे Form-6 के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। यह प्रक्रिया ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से उपलब्ध है। आवेदन के साथ पहचान और निवास संबंधी आवश्यक दस्तावेज़ जमा करने होते हैं। (voters.eci.gov.in) सत्यापन प्रक्रिया पर विशेष ध्यान आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची में त्रुटियों को कम करना और पात्र मतदाताओं का सही पंजीकरण सुनिश्चित करना है। इसके लिए दस्तावेज़ों का सत्यापन, पते की पुष्टि और आवश्यक होने पर स्थानीय स्तर पर जांच की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से आवेदन निपटाने के निर्देश दिए गए हैं। (eci.gov.in) विशेष पुनरीक्षण अभियान जारी निर्वाचन आयोग समय-समय पर विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम संचालित करता है, जिसके माध्यम से नए नाम जोड़े जाते हैं, मृत अथवा स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं तथा विवरणों में आवश्यक संशोधन किए जाते हैं। इस अभियान का उद्देश्य प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदान का अवसर उपलब्ध कराना है। (eci.gov.in) डिजिटल सेवाओं का विस्तार आयोग ने मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल सेवाओं का विस्तार किया है। मतदाता अब ऑनलाइन आवेदन की स्थिति देख सकते हैं, आवश्यक संशोधन कर सकते हैं तथा अपने निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित जानकारी भी डिजिटल माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं। (voters.eci.gov.in) युवाओं से विशेष अपील निर्वाचन आयोग ने पहली बार मतदान करने वाले युवाओं से समय पर पंजीकरण कराने की अपील की है। आयोग का कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में प्रत्येक पात्र नागरिक की भागीदारी महत्वपूर्ण है और मतदाता सूची में नाम दर्ज कराना पहला आवश्यक कदम है। सही जानकारी देना आवश्यक आवेदन करते समय गलत या अधूरी जानकारी देने से आवेदन में देरी हो सकती है। आयोग ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे केवल सही और प्रमाणित जानकारी ही उपलब्ध कराएं तथा आवेदन जमा करने से पहले सभी विवरणों की जांच अवश्य करें। लोकतंत्र को मजबूत बनाने की पहल विशेषज्ञों का मानना है कि अद्यतन और त्रुटिरहित मतदाता सूची स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों की आधारशिला होती है। आयोग का यह अभियान लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। स्रोत:भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) मूल रिपोर्ट:भारत निर्वाचन आयोग के आधिकारिक मतदाता सेवा पोर्टल तथा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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