वैश्विक व्यापार और टैरिफ को लेकर प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच नई चर्चा तेज, भारत समेत कई देशों की नजर आगामी फैसलों पर

नई दिल्ली/जिनेवा: वैश्विक व्यापार व्यवस्था एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। अमेरिका, यूरोपीय संघ (EU), चीन और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच आयात शुल्क (Tariffs), व्यापार नीतियों और सप्लाई चेन सुरक्षा को लेकर नई बातचीत तेज हो गई है। विश्व व्यापार संगठन (WTO) के मंच सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बैठकों में व्यापार बाधाओं को कम करने, निवेश बढ़ाने और वैश्विक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में टैरिफ नीति और व्यापारिक समझौते आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार की दिशा तय करेंगे। भारत भी इन चर्चाओं पर करीबी नजर बनाए हुए है क्योंकि इसका सीधा असर निर्यात, आयात और घरेलू उद्योगों पर पड़ सकता है। किन मुद्दों पर हो रही है चर्चा? विभिन्न देशों के बीच बातचीत में मुख्य रूप से इन विषयों पर फोकस है— भारत पर क्या होगा असर? व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार यदि प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं नए व्यापार समझौतों या टैरिफ में बदलाव करती हैं, तो इसका असर भारत के कई क्षेत्रों पर पड़ सकता है— भारत सरकार लगातार नए बाजारों तक पहुंच बढ़ाने और भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। निवेशकों की नजर भी वैश्विक घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े फैसलों का प्रभाव शेयर बाजार, मुद्रा बाजार और कमोडिटी कीमतों पर भी पड़ सकता है। निवेशक इस समय प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की व्यापार नीति, केंद्रीय बैंकों के रुख और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर नजर बनाए हुए हैं। WTO की भूमिका विश्व व्यापार संगठन (WTO) लगातार सदस्य देशों के बीच संवाद को बढ़ावा देने और नियम-आधारित वैश्विक व्यापार व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। संगठन का उद्देश्य व्यापारिक विवादों को बातचीत के माध्यम से सुलझाना और वैश्विक आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है। निष्कर्ष वैश्विक व्यापार और टैरिफ को लेकर तेज हुई नई चर्चाएं आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय बाजारों और व्यापारिक संबंधों को प्रभावित कर सकती हैं। भारत जैसे तेजी से उभरते व्यापारिक साझेदार के लिए ये घटनाक्रम निर्यात, निवेश और आर्थिक विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। Source: World Trade Organization (WTO) | Ministry of Commerce & Industry | Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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WTO समीक्षा में भारत की व्यापार नीति और पारंपरिक उद्योगों पर वैश्विक चर्चा, निर्यात क्षमता को मिली नई पहचान

नई दिल्ली: विश्व व्यापार संगठन (WTO) की हालिया ट्रेड पॉलिसी रिव्यू (Trade Policy Review) के दौरान भारत की व्यापार नीति, निर्यात रणनीति और पारंपरिक उद्योगों को लेकर वैश्विक स्तर पर व्यापक चर्चा हुई। समीक्षा में भारत की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, विनिर्माण क्षमता, डिजिटल व्यापार और पारंपरिक हस्तशिल्प एवं सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया। बैठक के दौरान कई सदस्य देशों ने भारत की व्यापार नीतियों, निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रमों पर चर्चा की। भारत ने स्पष्ट किया कि उसकी व्यापार नीति का उद्देश्य वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के साथ-साथ पारंपरिक उद्योगों और छोटे उद्यमों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच दिलाना है। पारंपरिक उद्योगों पर विशेष जोर भारत ने WTO मंच पर बताया कि हस्तकरघा, हस्तशिल्प, आयुर्वेदिक उत्पाद, मसाले, चाय, कॉफी, चमड़ा, वस्त्र और अन्य पारंपरिक उद्योग लाखों लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। सरकार इन क्षेत्रों को आधुनिक तकनीक, गुणवत्ता सुधार और निर्यात सहायता के माध्यम से मजबूत बनाने पर काम कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘मेक इन इंडिया’, ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘ODOP (One District One Product)’ जैसी पहलें पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक बाजार में नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। भारत का पक्ष भारत ने समीक्षा के दौरान कहा कि— वैश्विक व्यापार में भारत की बढ़ती भूमिका WTO समीक्षा में भारत की बढ़ती निर्यात क्षमता, विदेशी निवेश आकर्षित करने के प्रयास और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) जैसी योजनाओं का भी उल्लेख किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार भारत वैश्विक विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला में अपनी भूमिका लगातार मजबूत कर रहा है। निर्यातकों को मिलेगा लाभ व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि WTO स्तर पर भारत की सकारात्मक छवि से— निष्कर्ष WTO की ट्रेड पॉलिसी रिव्यू में भारत की व्यापार नीति और पारंपरिक उद्योगों पर हुई चर्चा देश की बढ़ती आर्थिक और व्यापारिक भूमिका को दर्शाती है। सरकार का मानना है कि आधुनिक व्यापार नीति और पारंपरिक उद्योगों के संरक्षण के संतुलित मॉडल से भारत वैश्विक व्यापार में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है। Source: World Trade Organization (WTO) | Ministry of Commerce & Industry | PIB जय राष्ट्र न्यूज़

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