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यमुना नदी में फिर दिखी जहरीले झाग की मोटी परत, बढ़ते प्रदूषण ने बढ़ाई चिंता

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026: दिल्ली में यमुना नदी की सतह पर एक बार फिर मोटी झाग की परत दिखाई देने से नदी के बढ़ते प्रदूषण को लेकर चिंता गहरा गई है। हालिया निगरानी रिपोर्टों में भी नदी के कई हिस्सों में पानी की गुणवत्ता खराब रहने के संकेत मिले हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बिना उपचार वाला सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और ठोस कचरा यमुना के प्रदूषण के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। नदी में बार-बार झाग दिखाई देना सीवेज प्रबंधन, अपशिष्ट निस्तारण और सफाई योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करता है। सितंबर में भी कई हिस्सों में बढ़ा प्रदूषण दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में यमुना के कई निगरानी बिंदुओं पर प्रदूषण का स्तर पिछले वर्ष की तुलना में अधिक दर्ज किया गया। मानसून की बारिश के बावजूद नदी की जल गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार नहीं देखा गया। यह स्थिति संकेत देती है कि बारिश से पानी की मात्रा बढ़ने के बावजूद प्रदूषण के मूल कारणों पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी है। बिना उपचार वाला सीवेज बना बड़ी समस्या केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की निगरानी में यमुना में गिरने वाले कई नालों में बिना उपचार वाले सीवेज और ठोस कचरे की समस्या सामने आई है। सीवेज को नदी तक पहुंचने से पहले रोकने और उसका उपचार करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं में कमियां होने पर प्रदूषक सीधे नदी में पहुंच सकते हैं। नालों में कचरा फेंकना और अपशिष्ट जल का उचित उपचार न होना यमुना की सफाई के प्रयासों के सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं। यमुना में जहरीला झाग क्यों बनता है? विशेषज्ञों के अनुसार, सीवेज और कुछ औद्योगिक अपशिष्टों में मौजूद डिटर्जेंट, फॉस्फेट और सर्फेक्टेंट जैसे पदार्थ पानी में झाग बनने की प्रक्रिया को बढ़ावा दे सकते हैं। जब ऐसा प्रदूषित पानी तेज बहाव या हलचल के संपर्क में आता है, तो उसकी सतह पर मोटी झागदार परत बन सकती है। इस तरह का झाग प्रदूषण की समस्या का दिखाई देने वाला संकेत हो सकता है। हालांकि, झाग की मौजूदगी मात्र से उसके सभी रासायनिक घटकों या विषाक्तता के स्तर का निर्धारण नहीं किया जा सकता। इसके लिए पानी के नमूनों की वैज्ञानिक जांच आवश्यक है। कई हिस्सों में पानी की गुणवत्ता गंभीर चिंता का विषय 2026 की प्रदूषण संबंधी रिपोर्टों में दिल्ली के यमुना क्षेत्र के कुछ हिस्सों में घुलित ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen) का स्तर बेहद कम, यहां तक कि शून्य तक दर्ज होने की बात सामने आई थी। इसके साथ ही फीकल प्रदूषण भी अधिक पाया गया। पानी में ऑक्सीजन की कमी जलीय जीवों के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। वहीं, सीवेज से होने वाला मलजनित प्रदूषण मानव स्वास्थ्य और नदी के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी चिंता का विषय है। यमुना की सफाई योजनाओं पर फिर उठे सवाल सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, नालों की सफाई और नदी पुनर्जीवन से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के बावजूद झाग का बार-बार दिखाई देना उनके प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता को रेखांकित करता है। प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए नालों में कचरा डालने पर रोक, सीवेज का समुचित उपचार, औद्योगिक अपशिष्ट की निगरानी और प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई जरूरी है। साथ ही, नदी के विभिन्न हिस्सों में नियमित जल गुणवत्ता परीक्षण और निगरानी के निष्कर्षों को सार्वजनिक करना भी महत्वपूर्ण है। स्थायी समाधान के लिए जरूरी प्रभावी कार्रवाई यमुना में प्रदूषण की समस्या केवल नदी की सतह पर दिखाई देने वाले झाग तक सीमित नहीं है। इसके पीछे अपशिष्ट जल प्रबंधन, सीवेज उपचार और नियमों के पालन से जुड़ी व्यापक चुनौतियां हैं। जब तक प्रदूषित नालों के पानी का उचित उपचार सुनिश्चित नहीं किया जाता और ठोस कचरे को नदी में पहुंचने से नहीं रोका जाता, तब तक सफाई के प्रयासों के स्थायी परिणाम हासिल करना मुश्किल बना रहेगा। Source – केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC), The Times of India, The Indian Express और India Today जय राष्ट्र न्यूज़

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