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स्कूल की छत गिरने के बाद छात्रों का आंदोलन, आशुतोष रांका और पुलिस के बीच तीखी बहस का वीडियो वायरल

अलवर: राजस्थान के थानागाजी क्षेत्र के जोधावास स्थित सरकारी स्कूल की जर्जर इमारत की छत का एक हिस्सा गिरने के बाद छात्रों और स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई। स्कूल की खराब हालत और सड़क की समस्या को लेकर छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया, जिसमें CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका भी शामिल हुए। छत गिरने के बाद शुरू हुआ आंदोलन रिपोर्टों के मुताबिक, स्कूल की इमारत पिछले कई वर्षों से जर्जर हालत में थी। छत का हिस्सा गिरने के बाद छात्रों ने स्कूल की सुरक्षा और बेहतर सुविधाओं की मांग को लेकर विरोध शुरू किया। आशुतोष रांका भी छात्रों के समर्थन में स्कूल परिसर पहुंचे और धरने पर बैठ गए। उन्होंने प्रशासन से जर्जर कमरों की मरम्मत के साथ-साथ स्कूल तक सड़क की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की। पुलिस से हुई तीखी बहस प्रदर्शन के दौरान पुलिस और आशुतोष रांका के बीच तीखी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में रांका पुलिस अधिकारी से सवाल-जवाब करते नजर आ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, रांका ने पुलिसकर्मी से कहा कि उनके साथ राजनीतिक तरीके से पेश न आया जाए और पहले स्कूल परिसर में मौजूद लोगों को हटाया जाए। रांका ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानीय लोग प्रदर्शन के दौरान माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने पुलिस से छात्रों और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का आधिकारिक विस्तृत जवाब उपलब्ध नहीं है। पांच घंटे चला धरना रिपोर्टों के मुताबिक, करीब पांच घंटे तक चले धरने के बाद प्रशासन की ओर से छात्रों की मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। रांका ने दावा किया कि सरकार ने उनकी प्रमुख मांगें स्वीकार कर ली हैं। बताया गया कि मौजूदा जर्जर क्लासरूम को एक सप्ताह के भीतर दुरुस्त करने, नए कमरों का निर्माण कराने और स्कूल तक आने-जाने के रास्ते को सुधारने का आश्वासन दिया गया है। सड़क और नए कमरों की भी मांग स्कूल की इमारत के अलावा छात्रों की एक बड़ी समस्या स्कूल तक पहुंचने का रास्ता भी है। रिपोर्टों के अनुसार, बारिश के दौरान बच्चों को रास्ते की खराब स्थिति के कारण काफी परेशानी होती है। आंदोलन के दौरान स्कूल में सात नए कमरों के निर्माण और छात्रों के लिए खेल मैदान उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल पुलिस और आशुतोष रांका के बीच हुई बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। वीडियो के बाद स्कूल की जर्जर स्थिति, छात्रों की सुरक्षा और सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर बहस फिर तेज हो गई है। निष्कर्ष जोधावास के सरकारी स्कूल की छत का हिस्सा गिरने के बाद शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा में है। आशुतोष रांका और पुलिस के बीच तीखी बहस का वीडियो वायरल होने के साथ स्कूल की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया है। प्रशासन की ओर से मरम्मत और निर्माण कार्य को लेकर दिए गए आश्वासन पर अब नजर रहेगी। Source: नवभारत टाइम्स, पत्रिका, लाइव हिंदुस्तान जय राष्ट्र न्यूज़

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ध्वजारोहण के लिए जाते समय पुलिस ने रोका? देवेंद्रनाथ महतो ने लगाया धक्कामुक्की का आरोप

रांची: झारखंड में छात्र नेता और JLKM नेता देवेंद्रनाथ महतो को लेकर पुलिस कार्रवाई का मामला एक बार फिर चर्चा में है। महतो ने आरोप लगाया है कि उन्हें ध्वजारोहण कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जाते समय पुलिस ने रोक दिया और इस दौरान उनके साथ धक्कामुक्की की गई। हालांकि, इस दावे की 14 अगस्त 2026 की स्वतंत्र और विश्वसनीय रिपोर्ट से पुष्टि नहीं हो सकी है। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में देवेंद्रनाथ महतो का नाम झारखंड के छात्र आंदोलन और JPSC/JSSC से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में सामने आया है। छात्र आंदोलनों से जुड़े रहे हैं देवेंद्रनाथ महतो देवेंद्रनाथ महतो झारखंड में छात्र और युवा आंदोलनों से जुड़े प्रमुख चेहरों में रहे हैं। हाल के दिनों में उन्होंने JPSC और JSSC परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार के सामने अपनी मांगें रखी हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपील करते हुए कहा था कि छात्रों के आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से चलने दिया जाए और ऐसा कोई कदम न उठाया जाए जिससे छात्रों का नुकसान हो। पुलिस कार्रवाई को लेकर पहले भी विवाद देवेंद्रनाथ महतो का पुलिस के साथ टकराव का मामला नया नहीं है। दिसंबर 2024 में JSSC-CGL परीक्षा को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बल प्रयोग किया था और महतो समेत कई लोगों को हिरासत में लिया गया था। उस घटना में महतो के घायल होने के आरोप भी सामने आए थे। बाद में छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़े वीडियो और अन्य सबूत सौंपने का दावा किया था। ताजा दावे की पुष्टि जरूरी ध्वजारोहण के लिए जाते समय पुलिस द्वारा रोके जाने और धक्कामुक्की किए जाने का दावा सोशल मीडिया पर चर्चा में हो सकता है, लेकिन इसे तथ्य के रूप में प्रकाशित करने से पहले पुलिस या प्रशासन का आधिकारिक पक्ष लेना जरूरी होगा। यदि घटना का वीडियो सामने आता है, तो उसमें स्थान, समय और घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि भी महत्वपूर्ण होगी। निष्कर्ष देवेंद्रनाथ महतो झारखंड के छात्र आंदोलनों में सक्रिय रहे हैं और उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं। लेकिन ध्वजारोहण कार्यक्रम के लिए जाते समय रोके जाने और धक्कामुक्की की ताजा घटना की अभी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस दावे को फिलहाल आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। Source: उपलब्ध ताजा मीडिया रिपोर्ट्स जय राष्ट्र न्यूज़

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छात्राओं का आक्रोश! स्कूल 15 किलोमीटर दूर किया तो छात्राओं ने घेरा कलेक्टर कार्यालय

[स्थान]: स्कूल को करीब 15 किलोमीटर दूर स्थानांतरित किए जाने के विरोध में छात्राओं ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। छात्राओं ने प्रशासन से स्कूल को पहले की तरह नजदीक रखने या उनके लिए सुविधाजनक वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की। स्कूल दूर होने से बढ़ी परेशानी छात्राओं का कहना है कि स्कूल को 15 किलोमीटर दूर किए जाने से रोजाना आने-जाने में काफी परेशानी होगी। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं के लिए लंबी दूरी तय करना सुरक्षा, समय और परिवहन से जुड़े सवाल खड़े करता है। प्रदर्शनकारी छात्राओं ने कहा कि स्कूल की दूरी बढ़ने से कई विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है और कुछ छात्राओं को शिक्षा छोड़ने जैसी स्थिति का भी सामना करना पड़ सकता है। कलेक्टर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन अपनी मांगों को लेकर छात्राएं कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं और प्रशासन के सामने अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने स्कूल को दूर किए जाने के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की। छात्राओं ने अधिकारियों से कहा कि शिक्षा तक पहुंच आसान होना चाहिए, न कि विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त मुश्किलें पैदा करने वाला। परिवहन सुविधा की मांग प्रदर्शन के दौरान छात्राओं और उनके परिवारों की ओर से उचित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई। उनका कहना है कि यदि स्कूल को दूर रखना प्रशासनिक रूप से जरूरी है, तो विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित और नियमित बस या अन्य परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। सुरक्षा को लेकर भी चिंता 15 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी को लेकर छात्राओं ने सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि रोजाना लंबी दूरी तय करने के दौरान विशेष रूप से सुबह और शाम के समय सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी। अभिभावकों ने भी प्रशासन से छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने की अपील की। शिक्षा पर पड़ सकता है असर प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्कूल की दूरी बढ़ने का असर केवल आने-जाने की सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा। यात्रा में अधिक समय लगने से छात्राओं के पढ़ाई, आराम और परिवार के साथ समय पर भी प्रभाव पड़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन की सीमित उपलब्धता इस समस्या को और गंभीर बना सकती है। प्रशासन से फैसले पर पुनर्विचार की मांग छात्राओं ने प्रशासन से स्कूल को पहले के स्थान पर संचालित करने या ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की जिससे किसी विद्यार्थी को लंबी दूरी के कारण पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर न होना पड़े। उन्होंने अधिकारियों से मामले की समीक्षा कर जल्द समाधान निकालने की अपील की। छात्राओं की मांग पर अब प्रशासन की नजर कलेक्टर कार्यालय के घेराव के बाद यह मामला प्रशासन के सामने प्रमुखता से पहुंच गया है। अब देखना होगा कि अधिकारियों की ओर से स्कूल की दूरी, परिवहन और छात्राओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर क्या निर्णय लिया जाता है। छात्राओं का कहना है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि शिक्षा को सुलभ और सुरक्षित बनाए रखने की मांग को लेकर है। Source: छात्राओं, अभिभावकों और स्थानीय प्रशासन से संबंधित जानकारी। Original Report: स्कूल को 15 किलोमीटर दूर किए जाने के विरोध में छात्राओं ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और फैसले पर पुनर्विचार की मांग की। Jai Rashtra News

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सोनम वांगचुक का सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप, बोले—“तस्वीरें सार्वजनिक न करने का वादा तोड़ा”

नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार के कुछ मंत्रियों पर वादा तोड़ने और उनका भरोसा तोड़ने का आरोप लगाया है। वांगचुक के मुताबिक, 26 दिन के अनशन को खत्म करने के दौरान हुई बातचीत में यह सहमति बनी थी कि उनके अनशन समाप्त करने की तस्वीरें तब तक सार्वजनिक नहीं की जाएंगी, जब तक पूरे घटनाक्रम में विपक्ष और छात्र प्रतिनिधियों की भागीदारी को भी शामिल नहीं किया जाता। उनका आरोप है कि इसके बावजूद तस्वीरें सार्वजनिक कर दी गईं। 26 दिन के अनशन के बाद खत्म हुआ आंदोलन सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक चले अनशन के बाद अपना अनशन समाप्त किया था। रिपोर्टों के मुताबिक, यह घटनाक्रम गुरुग्राम के एक अस्पताल में हुआ, जहां केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ उनकी बातचीत हुई थी। वांगचुक का कहना है कि अनशन खत्म करने का फैसला बातचीत और सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों के बाद लिया गया था। तस्वीरें सार्वजनिक करने को लेकर विवाद वांगचुक ने दावा किया कि बैठक के दौरान इस बात पर स्पष्ट सहमति बनी थी कि उनके अनशन खत्म करने या मंत्रियों के साथ हुई बैठक की तस्वीरें तुरंत सार्वजनिक नहीं की जाएंगी। उनके अनुसार, तस्वीरें तभी जारी की जानी थीं जब इस पूरे घटनाक्रम को केवल सरकार की उपलब्धि के तौर पर पेश करने के बजाय विपक्षी नेताओं और छात्र प्रतिनिधियों की भागीदारी भी दिखाई जाए। लेकिन वांगचुक का आरोप है कि तस्वीरें इससे पहले ही जारी कर दी गईं। “भरोसा टूट गया” वांगचुक ने इस घटनाक्रम पर निराशा जताते हुए कहा कि इस तरह तस्वीरें जारी किए जाने से उनका सरकार और राजनीतिक नेतृत्व पर भरोसा प्रभावित हुआ है। उन्होंने इसे सिर्फ तस्वीरों का मामला नहीं, बल्कि आपसी सहमति और विश्वास का सवाल बताया। उनके मुताबिक, यदि किसी बातचीत में कोई शर्त तय होती है तो दोनों पक्षों को उसका सम्मान करना चाहिए। सरकार, विपक्ष और छात्रों की भागीदारी चाहते थे वांगचुक वांगचुक के अनुसार, लद्दाख में जब सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों को स्वीकार करती है, तो आमतौर पर सरकारी प्रतिनिधि प्रदर्शनकारी को जूस या सूप पिलाकर अनशन समाप्त करवाते हैं। उनका कहना है कि इस बार भी प्रक्रिया ऐसी हो सकती थी, लेकिन इसे केवल सत्तारूढ़ पक्ष की उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय सभी पक्षों की भागीदारी दिखाई जानी चाहिए थी। सरकार से लिखित आश्वासन पूरा करने की मांग वांगचुक इससे पहले भी सरकार से उन लिखित आश्वासनों को पूरा करने की मांग कर चुके हैं, जिनके बाद उन्होंने अपना आंदोलन समाप्त किया था। उन्होंने प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करने के आश्वासन को भी पूरा करने की अपील की है। साथ ही उन्होंने प्रदर्शन के दौरान जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग भी उठाई थी। मुद्दा अब राजनीतिक बहस में भी पहुंचा तस्वीरों को लेकर वांगचुक के आरोप के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा में आ गया है। जहां वांगचुक इसे भरोसे और वादे का मुद्दा बता रहे हैं, वहीं पूरे घटनाक्रम को लेकर सरकार की ओर से सामने आने वाली आधिकारिक प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में तस्वीरें जारी किए जाने और वांगचुक के आरोप का विवरण सामने आया है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत की पूरी रिकॉर्डिंग या लिखित सहमति का विस्तृत सार्वजनिक विवरण सामने नहीं आया है। निष्कर्ष सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार के मंत्रियों पर वादाखिलाफी और भरोसा तोड़ने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि 26 दिन का अनशन खत्म करने के दौरान तस्वीरें सार्वजनिक न करने पर सहमति बनी थी, लेकिन इसके बावजूद तस्वीरें जारी कर दी गईं। अब नजर इस बात पर है कि सरकार इस आरोप पर क्या आधिकारिक जवाब देती है और वांगचुक द्वारा उठाए गए अन्य आश्वासनों पर आगे क्या कार्रवाई होती है। Source: India Today / The Lallantop / Prabhat Khabar / ANI reports जय राष्ट्र न्यूज़

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रांची में छात्रों के प्रदर्शन पर वाटर कैनन का इस्तेमाल, पुलिस कार्रवाई का वीडियो वायरल

रांची: झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा वाटर कैनन के इस्तेमाल का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी, जिसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। घटना के वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। छात्रों के प्रदर्शन के दौरान बढ़ा तनाव रांची में बड़ी संख्या में छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार और प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखी गईं। प्रदर्शन के दौरान भीड़ बढ़ने और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस ने बैरिकेडिंग की थी। स्थिति बिगड़ने के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की प्रदर्शन स्थल पर पुलिस की ओर से सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी। प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेड लगाए गए थे। जब प्रदर्शनकारी बैरिकेड के करीब पहुंचे तो पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन चलाया। वायरल वीडियो में प्रदर्शनकारियों पर पानी की तेज धार छोड़े जाने का दृश्य दिखाई दे रहा है। पुलिस कार्रवाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से शेयर किए जा रहे हैं। वीडियो में पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल करते हुए देखा जा सकता है। हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो के संदर्भ और पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। इसलिए किसी वीडियो के आधार पर पूरे घटनाक्रम का निष्कर्ष निकालने से पहले आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी है। छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन पर अड़े प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि उनकी मांगों को सरकार और प्रशासन को गंभीरता से सुनना चाहिए। छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रखने की बात कही है। प्रदर्शनकारियों की ओर से प्रशासन से बातचीत और उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई की मांग की जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था के बीच पुलिस की कार्रवाई प्रदर्शन को देखते हुए रांची में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई। पुलिस और प्रशासन की ओर से भीड़ को नियंत्रित रखने के लिए बैरिकेडिंग समेत अन्य व्यवस्थाएं की गईं। वाटर कैनन का इस्तेमाल पुलिस की ओर से भीड़ को तितर-बितर करने और स्थिति को नियंत्रण में रखने की कार्रवाई के तौर पर किया गया। वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर बहस वाटर कैनन की कार्रवाई का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कुछ लोग पुलिस की कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी बता रहे हैं, जबकि कुछ यूजर्स छात्रों पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आगे की कार्रवाई पर नजर घटना के बाद अब छात्रों और प्रशासन के बीच बातचीत तथा प्रदर्शन की आगे की स्थिति पर नजर बनी हुई है। यदि छात्रों की मांगों को लेकर कोई बातचीत या प्रशासन की ओर से कोई निर्णय सामने आता है, तो उससे आंदोलन की दिशा स्पष्ट हो सकती है। निष्कर्ष रांची में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा वाटर कैनन के इस्तेमाल का वीडियो वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने पानी की बौछार की, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे हैं। फिलहाल मामले में प्रदर्शनकारियों की मांगों, पुलिस कार्रवाई और प्रशासन के आधिकारिक पक्ष पर नजर बनी हुई है। वायरल वीडियो के आधार पर किए जा रहे दावों की स्वतंत्र पुष्टि किए बिना उन्हें अंतिम तथ्य मानना उचित नहीं होगा। Source: स्थानीय रिपोर्ट्स / वायरल वीडियो / पुलिस-प्रशासन से संबंधित जानकारी जय राष्ट्र न्यूज़

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“राहुल गांधी किसी भी जन्म में प्रधानमंत्री नहीं बन सकते!”—साक्षी महाराज का विवादित बयान, सियासत गरमाई

उन्नाव: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उन्नाव से सांसद साक्षी महाराज ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लेकर विवादित बयान दिया है। हाल ही में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने राहुल गांधी की प्रधानमंत्री बनने की संभावना पर सवाल उठाते हुए कहा कि “राहुल गांधी किसी भी जन्म में प्रधानमंत्री नहीं बन सकते।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राहुल गांधी के PM बनने पर साक्षी महाराज का बड़ा दावा साक्षी महाराज ने राहुल गांधी के राजनीतिक भविष्य पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राहुल गांधी एक बड़े राजनीतिक परिवार से आते हैं और उन्हें बचपन से ही प्रधानमंत्री बनने की बात बताई जाती रही है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी को सत्ता की विरासत मिलने की उम्मीद रही है, लेकिन वह किसी भी जन्म में देश के प्रधानमंत्री नहीं बन सकते। यह बयान अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। राहुल गांधी की राजनीतिक विरासत पर निशाना बीजेपी सांसद ने राहुल गांधी के परिवार और उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ऐसे परिवार में पैदा हुए हैं जहां राजनीति और सत्ता लंबे समय से मौजूद रही है। साक्षी महाराज का यह हमला ऐसे समय आया है जब संसद में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों को लेकर लगातार टकराव चल रहा है। जंतर-मंतर छात्र आंदोलन पर भी बोले साक्षी महाराज साक्षी महाराज ने सिर्फ राहुल गांधी पर ही हमला नहीं किया, बल्कि जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन को लेकर भी विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन में कुछ ऐसे तत्व शामिल थे जिनकी भूमिका की जांच होनी चाहिए। उन्होंने आंदोलन में कथित विदेशी हाथ और फंडिंग की जांच की मांग भी उठाई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। पुलिस कार्रवाई और आंदोलन को लेकर भी बयान छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवालों पर साक्षी महाराज ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों पर भी पथराव और हमले हुए थे। उन्होंने आंदोलन में शामिल लोगों की भूमिका को लेकर जांच की जरूरत बताई और कहा कि पूरे मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए। सोनम वांगचुक के बयान का भी किया जिक्र साक्षी महाराज ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के एक कथित बयान का उल्लेख करते हुए दावा किया कि आंदोलन में बड़ी संख्या में ऐसे लोग शामिल थे जो वास्तविक छात्र नहीं थे। हालांकि, इस संबंध में भी साक्षी महाराज द्वारा किए गए दावों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए बिना तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बयान के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा साक्षी महाराज का राहुल गांधी को लेकर दिया गया बयान सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा में आया। उनके बयान के वीडियो और छोटे क्लिप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किए जा रहे हैं। समर्थक इसे राहुल गांधी पर राजनीतिक तंज बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे व्यक्तिगत और गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी बता रहे हैं। संसद में पहले से जारी है राजनीतिक टकराव राहुल गांधी और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक टकराव लगातार चर्चा में रहता है। संसद में छात्र प्रदर्शन, परीक्षा व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। ऐसे माहौल में साक्षी महाराज की यह टिप्पणी राजनीतिक बयानबाजी को और तेज करने वाली मानी जा रही है। निष्कर्ष बीजेपी सांसद साक्षी महाराज के “राहुल गांधी किसी भी जन्म में प्रधानमंत्री नहीं बन सकते” वाले बयान ने राजनीतिक बहस को गर्म कर दिया है। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक विरासत और प्रधानमंत्री बनने की संभावनाओं पर तीखा हमला किया है। साथ ही उन्होंने जंतर-मंतर छात्र आंदोलन में कथित विदेशी फंडिंग और अन्य लोगों की भूमिका की जांच की मांग भी की। हालांकि, विदेशी फंडिंग और आंदोलन में बाहरी तत्वों से जुड़े उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। Source: Navbharat Times / Khabargaon / Latest Political Reports जय राष्ट्र न्यूज़

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“CJP को मिली पूरी फंडिंग PM CARES Fund से!”—आशुतोष रांका का दावा, ऑडिट की मांग

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक आशुतोष रांका का PM CARES Fund को लेकर दिया गया एक बयान चर्चा में है। एक लाइव डिबेट के दौरान CJP आंदोलन की फंडिंग को लेकर सवाल पूछे जाने पर रांका ने दावा किया कि CJP को मिलने वाली पूरी फंडिंग PM CARES Fund से मिली है। इसके साथ ही उन्होंने PM CARES Fund के ऑडिट की मांग भी उठाई। फंडिंग के सवाल पर आशुतोष रांका का जवाब मामला उस समय चर्चा में आया जब एक पत्रकार ने आशुतोष रांका से CJP के आंदोलन के लिए फंडिंग के स्रोत को लेकर सवाल किया। रिपोर्ट के अनुसार, रांका ने जवाब में दावा किया कि आंदोलन की पूरी फंडिंग PM CARES Fund से हुई है और इसी के साथ उन्होंने फंड की जांच और ऑडिट कराने की मांग रखी। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा में आया है और इसे लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। PM CARES Fund के ऑडिट की मांग आशुतोष रांका ने अपने बयान में केवल फंडिंग का दावा ही नहीं किया, बल्कि PM CARES Fund के ऑडिट की मांग भी उठाई। CJP की ओर से पहले भी PM CARES Fund को लेकर सार्वजनिक ऑडिट और पारदर्शिता की मांग की जाती रही है। संगठन की वेबसाइट पर आंदोलन की प्रमुख मांगों में PM CARES Fund का सार्वजनिक ऑडिट शामिल है। CJP आंदोलन पहले से चर्चा में CJP का आंदोलन पिछले कुछ समय से परीक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर चर्चा में रहा है। संगठन ने NEET और अन्य परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। संगठन की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी आंदोलन का प्रमुख हिस्सा रही है। PM CARES Fund को लेकर पहले से उठते रहे हैं सवाल PM CARES Fund की स्थापना कोविड-19 महामारी के दौरान मार्च 2020 में की गई थी। इसके संचालन, पारदर्शिता और सूचना उपलब्धता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। फंड को एक public charitable trust के रूप में स्थापित किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसकी ऑडिटिंग के लिए एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म नियुक्त की गई थी। इसलिए CJP की ओर से अब जिस तरह के सार्वजनिक ऑडिट की मांग की जा रही है, वह इसी पारदर्शिता की बहस से जुड़ी हुई है। क्या वास्तव में CJP की फंडिंग PM CARES से हुई? यहां एक महत्वपूर्ण बात ध्यान देने वाली है। आशुतोष रांका का PM CARES Fund से CJP की पूरी फंडिंग होने वाला बयान एक दावा है। उपलब्ध रिपोर्टिंग में इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि या ऐसा कोई आधिकारिक दस्तावेज सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि CJP आंदोलन को वास्तव में PM CARES Fund से फंडिंग मिली। इसलिए इस दावे को तथ्य के रूप में नहीं बल्कि रांका के बयान/दावे के रूप में देखना उचित होगा। सोशल मीडिया पर भी बयान की चर्चा रांका के बयान का वीडियो और उसके अंश सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे हैं। कई यूजर्स इस बयान को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे PM CARES Fund की पारदर्शिता पर बहस से जोड़ रहे हैं। हालांकि सोशल मीडिया प्रतिक्रियाओं को किसी वित्तीय लेनदेन या फंडिंग के आधिकारिक प्रमाण के तौर पर नहीं देखा जा सकता। CJP की मुख्य मांगों में PM CARES ऑडिट भी शामिल CJP की आधिकारिक वेबसाइट पर आंदोलन से जुड़ी मांगों में PM CARES Fund के सार्वजनिक ऑडिट की मांग भी दर्ज है। संगठन ने इसके साथ बेरोजगारी, NEET जवाबदेही, प्रधानमंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस और अन्य मुद्दों को भी अपनी मांगों में शामिल किया है। निष्कर्ष CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका के PM CARES Fund से आंदोलन की पूरी फंडिंग मिलने वाले दावे ने नई चर्चा शुरू कर दी है। रांका ने इसी के साथ PM CARES Fund के ऑडिट की मांग भी उठाई है। हालांकि, CJP को PM CARES Fund से फंडिंग मिलने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसे रांका के बयान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। अब इस मुद्दे पर सबसे अहम सवाल यही है कि क्या भविष्य में इस दावे के समर्थन में कोई आधिकारिक वित्तीय दस्तावेज या प्रमाण सामने आता है। Source: Patrika / CJP official website / Latest reports जय राष्ट्र न्यूज़

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राष्ट्रीय | छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में हंगामा, अमित शाह के बयान की मांग पर लोकसभा फिर स्थगित

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को छात्रों के प्रदर्शन पर कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया। विपक्षी सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले पर सदन में बयान देने की मांग की। लगातार नारेबाजी और हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्ष ने उठाया छात्र प्रदर्शन का मुद्दा लोकसभा की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे शुरू हुई। जैसे ही अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल शुरू करने की कोशिश की, विपक्षी सांसदों ने छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाना शुरू कर दिया। विपक्ष की मांग थी कि गृह मंत्री अमित शाह स्वयं सदन में आकर इस पूरे मामले पर जवाब दें। लगातार नारेबाजी के कारण प्रश्नकाल सामान्य तरीके से आगे नहीं बढ़ सका। अमित शाह के बयान पर अड़ा विपक्ष विपक्षी सांसदों का मुख्य जोर गृह मंत्री अमित शाह के व्यक्तिगत बयान पर है। विपक्ष का आरोप है कि छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर सरकार को सदन में स्पष्ट जवाब देना चाहिए। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, विपक्ष 20 जुलाई को परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और कथित तौर पर पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर चर्चा और शाह के बयान की मांग कर रहा है। सरकार ने कहा—गृह मंत्री जवाब देने को तैयार संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू की ओर से पहले ही कहा गया था कि सरकार इस मुद्दे पर सदन में चर्चा के लिए तैयार है और अमित शाह भी छात्रों से जुड़े पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर जवाब देने के लिए तैयार हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी सदन में विपक्षी सांसदों को यही जानकारी दी और उनसे प्रश्नकाल को चलने देने की अपील की। स्पीकर ओम बिरला ने की बार-बार अपील हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी सांसदों से सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है और सांसदों को सदन में चर्चा तथा बहस के जरिए अपनी बात रखनी चाहिए। बिरला ने सदस्यों से पोस्टर और बैनर दिखाने के बजाय संसदीय प्रक्रिया के तहत चर्चा करने की अपील की। इसके बावजूद नारेबाजी जारी रही। कुछ ही मिनट में लोकसभा स्थगित विपक्ष के लगातार विरोध के चलते लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के लगभग चार मिनट बाद ही स्थगित कर दी गई। अब सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे दोबारा शुरू होने के लिए निर्धारित की गई है। राज्यसभा में भी इसी मुद्दे को लेकर हंगामा हुआ। वहां की कार्यवाही भी बाधित हुई और सदन को दोपहर 12 बजे तक स्थगित किया गया। दो सप्ताह से जारी है संसद में गतिरोध छात्र प्रदर्शन से जुड़े इस मुद्दे को लेकर संसद में पिछले करीब दो सप्ताह से राजनीतिक गतिरोध बना हुआ है। विपक्ष लगातार पुलिस कार्रवाई पर चर्चा और गृह मंत्री के बयान की मांग कर रहा है। वहीं, सरकार का कहना है कि वह इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार है और गृह मंत्री सदन में जवाब देने को तैयार हैं। इसके बावजूद दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। 20 जुलाई के प्रदर्शन पर है विवाद विवाद का मुख्य केंद्र 20 जुलाई का छात्र प्रदर्शन है। यह प्रदर्शन परीक्षा में कथित अनियमितताओं और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हुआ था। विपक्ष का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के खिलाफ पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया। इसी कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री से संसद में जवाब मांगा जा रहा है। सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ता टकराव सोमवार को सरकार की ओर से छात्रों से जुड़े मुद्दे और पुलिस कार्रवाई पर चर्चा कराने की पेशकश की गई थी। हालांकि विपक्ष ने केवल सामान्य चर्चा के बजाय गृह मंत्री अमित शाह से सीधे जवाब की मांग पर जोर दिया। इसी मुद्दे पर मंगलवार को भी संसद की कार्यवाही प्रभावित हुई और दोनों पक्षों के बीच गतिरोध जारी रहा। मानसून सत्र पर भी असर लगातार हंगामे का असर संसद के मानसून सत्र के कामकाज पर भी पड़ रहा है। सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर पहले से मतभेद हैं और छात्र प्रदर्शन का मुद्दा अब इस राजनीतिक टकराव का प्रमुख केंद्र बन गया है। संसदीय कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने को लेकर लोकसभा अध्यक्ष लगातार दोनों पक्षों से सहयोग की अपील कर रहे हैं। निष्कर्ष छात्र प्रदर्शन पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में जारी गतिरोध मंगलवार को भी खत्म नहीं हो सका। विपक्ष अमित शाह से सदन में स्पष्ट बयान की मांग पर अड़ा रहा, जबकि सरकार का कहना है कि गृह मंत्री इस मुद्दे पर जवाब देने के लिए तैयार हैं। लगातार नारेबाजी के कारण लोकसभा को कुछ ही मिनटों में दोपहर 2 बजे तक स्थगित करना पड़ा। अब नजर इस बात पर है कि दोपहर बाद सदन की कार्यवाही सुचारु हो पाती है या छात्र प्रदर्शन का मुद्दा एक बार फिर संसद में हंगामे का कारण बनता है। Source: News On AIR / Hindustan Times / Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

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छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन से पहले कांटेदार तारों की बैरिकेडिंग पर सवाल

10 जुलाई 2026 को झारखंड में छात्रों का शांतिपूर्ण आंदोलन प्रस्तावित है। अपने अधिकारों और भविष्य से जुड़े सवालों को लेकर छात्र सड़क पर उतरने की तैयारी में हैं। वहीं, प्रदर्शन स्थल पर कांटेदार तारों से की गई बैरिकेडिंग की तस्वीर सामने आने के बाद सवाल उठ रहे हैं—क्या शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन के लिए ऐसी बैरिकेडिंग जरूरी है? सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन लोकतंत्र में छात्रों के सवालों का जवाब कांटों से नहीं, संवाद से होना चाहिए। छात्र सवाल लेकर आए हैं… सामने कांटेदार तार क्यों? #Jharkhand#StudentProtest#JPSC#JSSC#StudentVoice Democracy JayRashtraNews

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झारखंड में छात्र आंदोलन उग्र, विधानसभा मार्च के दौरान पुलिस ने की पानी की बौछार और लाठीचार्ज; भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता को लेकर प्रदर्शन

रांची: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा छात्र आंदोलन सोमवार को और तेज हो गया। बड़ी संख्या में छात्र रांची में विधानसभा की ओर मार्च करने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने कई बैरिकेड तोड़ते हुए विधानसभा की तरफ आगे बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए पानी की बौछार और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। छात्रों का यह आंदोलन कई दिनों से जारी है। प्रदर्शनकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच, भर्ती प्रक्रिया में सुधार और अपनी अन्य मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। आंदोलनकारियों की ओर से मामले में सीबीआई जांच की मांग भी उठाई जा रही है। हजारों छात्र विधानसभा की ओर बढ़े सोमवार को रांची में बड़ी संख्या में छात्र अलग-अलग माध्यमों से पहुंचे। रिपोर्टों के अनुसार कई छात्र ट्रेन और बसों के जरिए राजधानी पहुंचे और विधानसभा मार्च में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तिरंगे और मांगों से जुड़े पोस्टर-बैनर दिखाई दिए। छात्रों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विधानसभा की ओर बढ़ने की कोशिश की। कई स्तर पर लगाए गए थे बैरिकेड छात्रों के विधानसभा मार्च को देखते हुए प्रशासन ने विधानसभा के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। रास्ते में कई स्तरों पर बैरिकेड लगाए गए थे और कुछ स्थानों पर कांटेदार तारों की भी व्यवस्था की गई थी। प्रदर्शनकारियों ने आगे बढ़ते हुए कई बैरिकेड पार कर लिए। इसके बाद पुलिस और छात्रों के बीच तनाव बढ़ गया। पुलिस ने पानी की बौछार से छात्रों को रोका जब प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। इसके बावजूद कई छात्र पीछे हटने के बजाय आगे बढ़ते रहे। स्थिति बिगड़ने के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने की कोशिश की। घटनास्थल से सामने आए वीडियो में पुलिस द्वारा पानी की बौछार और बल प्रयोग किए जाने के दृश्य दिखाई दिए हैं। भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता का आरोप छात्रों का मुख्य आरोप झारखंड में आयोजित विभिन्न भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो और जिन मामलों में गड़बड़ी के आरोप हैं, उनकी जिम्मेदारी तय की जाए। छात्रों की ओर से परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और कथित अनियमितताओं की जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग भी प्रमुखता से उठाई जा रही है। आंदोलन कई दिनों से जारी यह प्रदर्शन अचानक शुरू नहीं हुआ है। छात्र संगठन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक सोमवार को आंदोलन का 17वां दिन था। छात्रों ने सरकार पर अपनी मांगों को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाते हुए विधानसभा घेराव का आह्वान किया था। विधानसभा के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई प्रदर्शन को देखते हुए विधानसभा परिसर के आसपास भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई। प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को निर्धारित क्षेत्र से आगे बढ़ने से रोकने के लिए कई स्तरों पर सुरक्षा घेरा बनाया। प्रदर्शनकारियों के बैरिकेड पार करने के बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पानी की बौछार और लाठीचार्ज का सहारा लिया। छात्रों और सरकार के बीच बढ़ा टकराव छात्रों की मांगों और सरकार की कार्रवाई को लेकर अब टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है। आंदोलनकारी लगातार परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, विधानसभा की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन प्रदर्शनकारियों को परिसर के नजदीक पहुंचने से रोक रहा है। प्रदर्शन का राजनीतिक असर भी संभव झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर युवाओं के बीच नाराजगी का यह आंदोलन अब राजनीतिक चर्चा का विषय भी बनता जा रहा है। छात्रों की संख्या बढ़ने और राजधानी रांची में आंदोलन तेज होने के कारण सरकार पर इस मामले में जल्द समाधान निकालने का दबाव बढ़ सकता है। आगे क्या होगा? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाती है। यदि परीक्षा संबंधी शिकायतों की स्वतंत्र जांच और भर्ती प्रक्रिया में सुधार को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता है, तो आंदोलन आगे भी जारी रहने की संभावना है। वहीं, छात्रों की ओर से विधानसभा मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए जा सकते हैं। निष्कर्ष झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा छात्र आंदोलन सोमवार को उस समय और उग्र हो गया, जब हजारों प्रदर्शनकारी विधानसभा की ओर बढ़े। कई बैरिकेड पार करने के बाद पुलिस ने छात्रों को रोकने के लिए पानी की बौछार की और बाद में लाठीचार्ज किया। छात्र परीक्षा व्यवस्था में सुधार, कथित अनियमितताओं की जांच और सीबीआई जांच समेत अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। अब सरकार की अगली कार्रवाई और छात्रों की प्रतिक्रिया पर पूरे राज्य की नजर रहेगी। Source: NDTV, The Tribune, The Federal, भाषा/द प्रिंट जय राष्ट्र न्यूज़

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