प्रमुख खबरें

गुजरात में फिल्म सब्सिडी को लेकर उठे गंभीर सवाल! ₹4 करोड़ से ज्यादा भुगतान पर विवाद

अहमदाबाद: गुजरात में गुजराती फिल्मों को दी जाने वाली सरकारी सब्सिडी एक बार फिर चर्चा में है। फिल्म निर्माता मनोज पटेल की ओर से गुजरात हाई कोर्ट में उठाए गए सवालों में आरोप लगाया गया है कि कई फिल्मों को उस समय लागू नीति के बजाय बाद में आई अधिक लाभकारी 2019 की subsidy policy के तहत सहायता दी गई। RTI से प्राप्त जानकारी के आधार पर अतिरिक्त भुगतान की राशि ₹4 करोड़ से अधिक होने का दावा किया गया है। हालांकि ये आरोप अभी न्यायिक जांच और विवाद का विषय हैं, इन्हें अंतिम रूप से साबित तथ्य नहीं माना गया है।

2016 और 2019 की Policy को लेकर विवाद

गुजरात सरकार ने 2016 में गुजराती फिल्मों के लिए performance-based subsidy system लागू किया था।

इसके तहत फिल्मों को उनकी quality, technical standards और अन्य तय मानकों के आधार पर अलग-अलग grades दिए जाते थे। Grade के अनुसार ही निर्माताओं को आर्थिक सहायता मिलती थी।

बाद में 2019 में नई नीति लागू की गई, जिसमें कुछ श्रेणियों में मिलने वाली सहायता बढ़ा दी गई।

पुरानी फिल्मों को नई Policy का लाभ देने का आरोप

विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि कुछ ऐसी फिल्मों को भी 2019 की नई subsidy policy का लाभ देने का आरोप है, जो नई नीति लागू होने से पहले ही रिलीज हो चुकी थीं।

याचिकाकर्ता का दावा है कि इन फिल्मों का मूल्यांकन उस नीति के तहत किया जाना चाहिए था जो उनकी रिलीज के समय लागू थी।

अगर पुराने मामलों में नई नीति लागू की गई, तो इससे कुछ निर्माताओं को पहले की तुलना में अधिक आर्थिक सहायता मिली हो सकती है।

₹4 करोड़ से ज्यादा अतिरिक्त भुगतान का दावा

RTI से मिली जानकारी के आधार पर याचिका में दावा किया गया कि subsidy distribution में कथित अनियमितताओं के कारण ₹4 करोड़ से अधिक का अतिरिक्त भुगतान हुआ।

याचिकाकर्ता ने मांग की कि जिन फिल्मों को सहायता दी गई, उनके eligibility और grading process की दोबारा जांच की जाए।

यह राशि याचिकाकर्ता का अनुमान है और किसी अंतिम सरकारी audit या अदालत के फैसले से इसे अभी प्रमाणित नहीं किया गया है।

फिल्म की Grading पर भी उठे सवाल

Gujarati film subsidy system में फिल्मों की grading बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी से तय होता है कि किसी फिल्म को कितनी आर्थिक सहायता मिलेगी।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुछ फिल्मों के मूल्यांकन में निर्धारित criteria का समान रूप से पालन नहीं किया गया और कुछ projects को अपेक्षाकृत अधिक लाभ मिला।

इस विवाद का प्रमुख मुद्दा यह है कि सभी फिल्मों के लिए एक समान grading standards लागू किए गए या नहीं।

Eligibility Rules को लेकर भी आपत्ति

कुछ फिल्मों की eligibility को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

आरोप है कि Gujarati language के इस्तेमाल, cultural content, remake status और आवेदन की समयसीमा जैसे नियमों के अनुपालन में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं रही।

इन दावों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत या संबंधित सरकारी जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।

आवेदन की समयसीमा भी विवाद में

पुरानी subsidy policy में फिल्म की रिलीज के बाद तय समय के भीतर आर्थिक सहायता के लिए आवेदन करना जरूरी था।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि कुछ मामलों में निर्धारित समयसीमा पूरी नहीं होने के बावजूद फिल्मों को बाद की नीति के तहत लाभ दिया गया।

इसी आधार पर subsidy approval process में समानता और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

Screening Committee की प्रक्रिया पर सवाल

फिल्मों को subsidy देने से पहले screening committee उनका मूल्यांकन करती है।

लेकिन विवाद में committee की बैठकों, grading decisions और evaluation records की transparency को लेकर भी सवाल सामने आए हैं।

याचिकाकर्ता ने मांग की है कि subsidy देने के कारण और grading के पूरे रिकॉर्ड को ज्यादा स्पष्ट और सार्वजनिक बनाया जाए।

सितंबर में Industry ने फिर उठाया Subsidy Implementation का मुद्दा

इस बीच सितंबर 2026 में Gujarat Chamber of Commerce & Industry ने Films Taskforce 2026-27 का गठन किया और National Award-winning filmmaker अभिषेक जैन को इसका chairman बनाया।

26 सितंबर को हुई taskforce की पहली बैठक में Gujarati film industry से जुड़ी कई समस्याओं पर चर्चा हुई। इसमें राज्य की film subsidy व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया।

Shooting Permission और Theatre Screens भी बने मुद्दा

बैठक में केवल subsidy ही नहीं, बल्कि shooting permissions को आसान बनाने, single-window system को मजबूत करने, production पर लगने वाले service charges और theatre infrastructure जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

Gujarati filmmakers लंबे समय से राज्य में regional cinema के लिए बेहतर distribution और पर्याप्त screens उपलब्ध कराने की मांग करते रहे हैं।

Court से जांच और Re-evaluation की मांग

फिल्म निर्माता की याचिका में subsidy allocation की जांच, संबंधित फिल्मों के दोबारा मूल्यांकन और गलत तरीके से भुगतान साबित होने पर रकम वापस लेने जैसी मांगें उठाई गई हैं।

मामले का मुख्य सवाल यह है कि क्या अलग-अलग वर्षों में लागू subsidy policies को सभी निर्माताओं पर समान तरीके से लागू किया गया था।

आरोप साबित होना अभी बाकी

फिल्म सब्सिडी मामले में उठाए गए ₹4 करोड़ से अधिक के कथित अतिरिक्त भुगतान सहित कई दावे याचिकाकर्ता के आरोपों पर आधारित हैं।

अभी इन्हें किसी अंतिम न्यायिक फैसले में साबित अनियमितता या घोटाला घोषित नहीं किया गया है। ऐसे में पूरे मामले में सरकारी रिकॉर्ड, अदालत की कार्यवाही और भविष्य में होने वाली जांच महत्वपूर्ण रहेगी।

Gujarati Film Industry में Transparency की मांग

Gujarati cinema हाल के वर्षों में तेजी से आगे बढ़ा है और कई फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल की है।

ऐसे समय में filmmakers और industry representatives चाहते हैं कि सरकारी subsidy, certification, shooting permission और distribution से जुड़ी प्रक्रियाएं ज्यादा पारदर्शी और समयबद्ध हों।

फिलहाल film subsidy को लेकर उठे सवालों ने सरकार की incentive policy की implementation और monitoring को फिर चर्चा में ला दिया है।

source – Gujarat High Court proceedings / The Indian Express / Times of India / Vibes of India / GCCI Vibes of India

जय राष्ट्र न्यूज़

Leave a Reply

Translate »