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केरल लोक भवन की रसोई में सिर्फ शाकाहारी भोजन के निर्देश पर विवाद, केसी वेणुगोपाल ने राज्यपाल पर उठाए सवाल

तिरुवनंतपुरम, 24 अक्टूबर 2026: केरल के नए राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर के पद संभालने के पहले ही दिन लोक भवन की रसोई में केवल शाकाहारी भोजन तैयार करने के निर्देश को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस और CPI(M) ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं, जबकि लोक भवन की ओर से कहा गया है कि यह व्यवस्था केवल राज्यपाल और उनके निजी स्टाफ के भोजन से जुड़ी है, कर्मचारियों या अन्य लोगों की निजी भोजन पसंद पर कोई रोक नहीं है। केसी वेणुगोपाल ने क्या कहा? AICC महासचिव केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि राज्यपाल अपनी निजी भोजन पसंद को संस्थान पर लागू कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केरल की खाद्य संस्कृति विविध है और लोगों को शाकाहारी या मांसाहारी भोजन चुनने की स्वतंत्रता है। वेणुगोपाल ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा बताते हुए राज्यपाल से फैसला वापस लेने की मांग की। CPI(M) ने भी जताया विरोध CPI(M) के राज्य सचिव एम वी गोविंदन ने कहा कि राज्यपाल स्वयं शाकाहारी भोजन कर सकते हैं, लेकिन दूसरों पर अपनी पसंद लागू करना उचित नहीं है। उन्होंने भी इस फैसले को वैचारिक एजेंडे से जोड़कर आलोचना की। लोक भवन ने क्या सफाई दी? लोक भवन के सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर सख्त शाकाहारी हैं और उन्होंने केवल उस रसोई के लिए निर्देश दिया है जहां उनका और उनके कुछ निजी स्टाफ का भोजन तैयार होता है। कर्मचारियों के लिए अलग व्यवस्था है और वे अपनी पसंद का भोजन कर सकते हैं। क्या सभी के लिए मांसाहारी भोजन पर रोक है? नहीं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह कहना सही नहीं होगा कि पूरे लोक भवन परिसर में मांसाहारी भोजन प्रतिबंधित कर दिया गया है। विवाद मुख्य रसोई में मांस या मछली न पकाए जाने के निर्देश को लेकर है। कर्मचारियों के निजी भोजन पर रोक की पुष्टि नहीं हुई है। पहले लोक भवन में बनता था मांसाहारी भोजन रिपोर्टों के मुताबिक पूर्व राज्यपालों के कार्यकाल में लोक भवन की रसोई में शाकाहारी के साथ मछली और मांसाहारी व्यंजन भी तैयार किए जाते थे। इसी वजह से नई व्यवस्था राजनीतिक बहस का विषय बन गई है। पहले दिन ही शुरू हुआ विवाद ओम प्रकाश माथुर ने शुक्रवार को केरल के 29वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली। शपथ ग्रहण के दिन ही भोजन व्यवस्था से जुड़ा यह मुद्दा सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में चर्चा तेज हो गई। जय राष्ट्र न्यूज़

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चीन सीमा की सुरक्षा करने वाली ITBP दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के सामने क्यों तैनात? अमित शाह से अभिजीत दिपके का सवाल

नई दिल्ली, 24 अक्टूबर 2026: CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया है कि भारत-चीन सीमा की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाने वाली ITBP की 39 कंपनियां दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए क्यों तैनात हैं। उनका बयान ऐसे समय आया है जब गृह मंत्रालय ने दिल्ली में 273 केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) कंपनियों की तैनाती 31 अक्टूबर तक बढ़ा दी है। दिल्ली में कितनी केंद्रीय फोर्स तैनात है? आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक दिल्ली में 273 CAPF कंपनियां तैनात हैं। इनमें 125 CRPF, 46 BSF, 39 ITBP, 31 SSB, 20 RAF और 12 CISF कंपनियां शामिल हैं। दिल्ली पुलिस ने अचानक होने वाले संभावित प्रदर्शनों और संवेदनशील स्थानों पर कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते हुए तैनाती बढ़ाने का अनुरोध किया था। अभिजीत दिपके ने क्या सवाल उठाया? दिपके ने कहा कि जब चीन सीमा से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियां लगातार चर्चा में हैं, तब सीमा सुरक्षा बलों की इतनी बड़ी संख्या को दिल्ली में राजनीतिक और युवा प्रदर्शनों के सामने लगाने की प्राथमिकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने केंद्र पर आरोप लगाया कि सरकार प्रदर्शन रोकने को राष्ट्रीय सुरक्षा से ज्यादा प्राथमिकता दे रही है। यह उनका राजनीतिक आरोप है। ITBP सिर्फ चीन सीमा पर ही तैनात नहीं होती यहां एक जरूरी तथ्य यह है कि ITBP का काम केवल भारत-चीन सीमा की रक्षा तक सीमित नहीं है। ITBP की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक बल को आंतरिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था बनाए रखने, संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और अशांति की स्थिति में व्यवस्था बहाल करने का भी अधिकार और दायित्व है। इसलिए दिल्ली में उसकी तैनाती अपने-आप में नियमों के बाहर नहीं है। ITBP की मुख्य जिम्मेदारी क्या है? ITBP की स्थापना 1962 में हुई थी और यह वर्तमान में 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा की सुरक्षा करती है। इसके साथ ही केंद्र सरकार जरूरत पड़ने पर इसे चुनाव, आंतरिक सुरक्षा और विशेष कानून-व्यवस्था ड्यूटी में भी तैनात कर सकती है। दिल्ली में तैनाती क्यों बढ़ाई गई? गृह मंत्रालय ने 22 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस के अनुरोध पर CAPF deployment को दूसरी बार बढ़ाया। अधिकारियों के मुताबिक CJP और अन्य राजनीतिक संगठनों द्वारा “flash protests” की संभावना को देखते हुए अतिरिक्त बल की जरूरत बताई गई है। अक्टूबर में CJP ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कई प्रदर्शन किए हैं। सवाल राजनीतिक है, तैनाती कानूनी दायरे में दिपके का सवाल मुख्यतः सरकार की priority और force deployment को लेकर है। लेकिन यह कहना कि ITBP को दिल्ली में लगाया ही नहीं जा सकता, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा क्योंकि बल के आधिकारिक mandate में internal security और law-and-order duties भी शामिल हैं। जय राष्ट्र न्यूज़

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धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ देने पर विवाद, सरकारी प्रोटोकॉल पर उठे सवाल

मैहर, 24 अक्टूबर 2026: मध्य प्रदेश के मैहर में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को कथित तौर पर ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि किसी संवैधानिक या सरकारी पद पर न होने के बावजूद उन्हें इस तरह का औपचारिक सम्मान किस आधार पर दिया गया। मैहर में हुआ था भव्य स्वागत धीरेंद्र शास्त्री गुरुवार देर रात मैहर पहुंचे थे। केजेएस सीमेंट परिसर में उनका स्वागत किया गया और स्थानीय रिपोर्टों में कहा गया कि उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ देकर सम्मानित किया गया। इसके बाद उन्होंने नवनिर्मित स्पोर्ट्स एरीना का उद्घाटन किया और मैहर के पुलिस अधीक्षक अवधेश प्रताप सिंह के साथ क्रिकेट भी खेला। सबसे बड़ा सवाल—गार्ड ऑफ ऑनर किसने दिया? यहीं पर विवाद की सबसे महत्वपूर्ण बात सामने आती है। कुछ रिपोर्टों में इसे सामान्य रूप से ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ कहा गया, लेकिन अन्य स्थानीय रिपोर्टों में साफ लिखा है कि यह सम्मान केजेएस परिसर के सुरक्षा गार्डों ने दिया था। यानी अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह आधिकारिक पुलिस गार्ड ऑफ ऑनर था या निजी सुरक्षा कर्मियों द्वारा दिया गया ceremonial welcome। प्रोटोकॉल को लेकर क्यों उठे सवाल? भारत में औपचारिक पुलिस या राज्य स्तर का Guard of Honour आमतौर पर तय प्रोटोकॉल और पात्रता के तहत दिया जाता है। पूर्व में ऐसे मामलों में, जहां किसी गैर-पात्र राजनीतिक व्यक्ति को पुलिस ने Guard of Honour दिया, अधिकारियों से जवाब मांगा गया है। इसलिए अगर मैहर में यह वास्तव में आधिकारिक police honour था, तो इसकी अनुमति और आधार को लेकर सवाल जायज हैं। सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया वीडियो वायरल होने के बाद कई लोगों ने पूछा कि क्या किसी धार्मिक कथावाचक को सरकारी वर्दीधारी बलों से ऐसा सम्मान दिया जा सकता है। वहीं कुछ users ने दावा किया कि वीडियो में दिख रहे लोग सरकारी पुलिसकर्मी नहीं बल्कि private security personnel थे। इसलिए वायरल दावों को आधिकारिक पुष्टि के बिना अंतिम तथ्य मानना सही नहीं होगा। SP के साथ क्रिकेट भी बना चर्चा का विषय मैहर पुलिस अधीक्षक अवधेश प्रताप सिंह ने पहले धीरेंद्र शास्त्री से आशीर्वाद लिया और फिर दोनों ने साथ क्रिकेट खेला। यह दृश्य भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ और सरकारी अधिकारियों तथा धार्मिक व्यक्तित्वों के बीच सार्वजनिक आचरण को लेकर बहस बढ़ी। आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार फिलहाल उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों में मैहर पुलिस या मध्य प्रदेश पुलिस की ओर से ऐसा स्पष्ट आधिकारिक बयान नहीं मिला है कि यह Guard of Honour राज्य पुलिस ने दिया था। इसलिए खबर को ‘प्रोटोकॉल पर उठे सवाल’ के रूप में प्रकाशित करना ज्यादा तथ्यात्मक होगा, न कि सीधे इसे सरकारी प्रोटोकॉल उल्लंघन घोषित करना। जय राष्ट्र न्यूज़

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“हरदीप सिंह पुरी को गिरफ्तार कर पूछताछ हो”: Subramanian Swamy ने Epstein विवाद पर उठाई जांच की मांग

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026: Jeffrey Epstein से केंद्रीय मंत्री Hardeep Singh Puri की मुलाकातों और हाल में सामने आई तस्वीरों को लेकर राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है। BJP नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री Subramanian Swamy ने मामले में Puri की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि उनके Epstein से संबंधों और बैठकों की गहराई से जांच होनी चाहिए। Swamy ने प्रधानमंत्री Narendra Modi से भी सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। Swamy ने क्या कहा? Swamy ने social media और हालिया interview में Puri-Epstein connection पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि Puri किन परिस्थितियों में Epstein से मिले और उन बैठकों का उद्देश्य क्या था। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि जवाब नहीं मिला तो वह अदालत का रुख कर सकते हैं। “गिरफ्तार कर पूछताछ” वाले दावे पर क्या स्थिति है? कुछ social-media clips और reports में Swamy के बयान को “Puri को गिरफ्तार कर पूछताछ हो” के रूप में पेश किया जा रहा है। हालांकि उपलब्ध विश्वसनीय text reports में उनका स्पष्ट verified quote यह है कि PM Modi को Puri के साथ अपने संबंध/भूमिका पर सफाई देनी चाहिए और वह court जा सकते हैं। इसलिए “arrest” वाली line को direct verified quote के बजाय उनकी जांच की मांग के रूप में लिखना ज्यादा सुरक्षित है। नई तस्वीरों से क्यों भड़का विवाद? US Department of Justice के Epstein records में सामने आई तस्वीरों में Puri को Epstein के साथ एक कमरे में बैठा दिखाया गया है। Opposition leaders ने पूछा है कि क्या ये तस्वीरें Puri के उस पुराने बयान से मेल खाती हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी Epstein से मुलाकातें delegation और professional context में हुई थीं। Puri का पक्ष क्या है? Puri ने फरवरी में कहा था कि उन्होंने Epstein से तीन या अधिकतम चार बार मुलाकात की और सभी interactions International Peace Institute/Independent Commission on Multilateralism से जुड़े professional engagements थे। उन्होंने Epstein के crimes से किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया था। Emails और meetings पर भी सवाल US Justice Department से जारी records में Puri और Epstein के बीच emails तथा Manhattan townhouse में meetings के references सामने आए हैं। Opposition इन्हीं documents और photos के आधार पर विस्तृत जांच की मांग कर रहा है। हालांकि सिर्फ meetings, emails या photographs का होना अपने आप किसी criminal wrongdoing को साबित नहीं करता। सरकार की internal verification क्या कहती है? फरवरी 2026 में government sources ने कहा था कि internal verification में Puri के खिलाफ कोई criminal या objectionable involvement सामने नहीं आया। यह government-side assessment था; मौजूदा political controversy नई तस्वीरों और records के बाद फिर तेज हुई है। जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली के Race Course इलाके में बेदखली कार्रवाई पर विवाद, 700 से अधिक परिवारों पर असर; मस्जिद को भी 6 दिन में खाली करने का नोटिस

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026: दिल्ली के Race Course Road इलाके में चल रही eviction/demolition drive को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अधिकारियों के मुताबिक करीब 700 परिवारों को इलाके से हटाकर वैकल्पिक आवास में shift करने की प्रक्रिया चल रही है। इसी बीच 100 साल से अधिक पुरानी Race Course Masjid को भी Land & Development Office (L&DO) ने परिसर खाली करने का notice दिया है। 700 से ज्यादा परिवार क्यों प्रभावित हैं? Delhi High Court ने अगस्त में Race Course Road के पास स्थित तीन settlements के लगभग 700 परिवारों को छह सप्ताह में क्षेत्र खाली करने का निर्देश दिया था। Court ने rehabilitation process की निगरानी के लिए एक committee भी बनाई थी। प्रभावित लोगों को Savda Ghevra में alternative housing दिए जाने की बात कही गई है। मस्जिद को भी मिला eviction notice Race Course Masjid management को करीब 19 अक्टूबर को छह दिन में परिसर खाली करने का notice मिला। L&DO का कहना है कि जमीन केंद्र सरकार की है और यहां unauthorized occupation/construction हुआ है। दूसरी ओर mosque representatives इसे Waqf property और NDMC की Grade-II heritage listing का हिस्सा बताते हैं। बिजली-पानी पहले ही काटा गया NDMC officials के मुताबिक mosque की electricity और water supply 7 अक्टूबर को disconnect कर दी गई थी। आसपास की कुछ properties की utilities भी clearance drive के तहत काटी गई हैं। क्या मस्जिद पर बुलडोजर चल चुका है? इस बिंदु पर reports में अंतर है। कुछ local reports ने आसपास के houses के demolition का दावा किया है, लेकिन Delhi Police ने कहा कि mosque या nearby temple पर demolition नहीं हुआ। इसलिए यह कहना कि मस्जिद को already bulldoze कर दिया गया है, अभी verified नहीं है। Delhi High Court ने utilities restore करने से किया इनकार Delhi High Court ने 15 अक्टूबर को mosque की electricity और water connections restore करने की plea खारिज कर दी। Court ने कहा कि property rights पर factual disputes हैं और L&DO को petition में party भी नहीं बनाया गया था। मामला अब legal और political दोनों Jamiat Ulema-e-Hind और AIMIM ने मामले में intervention की मांग की है। Mosque पक्ष heritage और Waqf status का हवाला दे रहा है, जबकि authorities court-backed eviction और government land claim पर जोर दे रही हैं। जय राष्ट्र न्यूज़

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Jeffrey Epstein विवाद पर Hardeep Singh Puri की सफाई, बोले—मुलाकातें professional थीं; “धोखे में रखकर मिलवाया गया” quote की पुष्टि नहीं

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026: Jeffrey Epstein से मुलाकातों को लेकर फिर उठे विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री Hardeep Singh Puri ने अपनी पुरानी सफाई दोहराई है कि Epstein के साथ उनकी मुलाकातें सीमित और पूरी तरह professional context में हुई थीं। हाल में सामने आई तस्वीरों के बाद विपक्ष ने उनसे पूछा है कि क्या ये मुलाकातें private थीं और उनके पहले दिए गए बयान से मेल खाती हैं। Puri ने पहले क्या कहा था? Puri ने फरवरी 2026 में कहा था कि उन्होंने Epstein से “तीन या अधिकतम चार बार” मुलाकात की और ये interactions Independent Commission on Multilateralism तथा अन्य international work से जुड़े थे। उन्होंने किसी wrongdoing से इनकार किया था। नई तस्वीरों से क्यों बढ़ा विवाद? 21 अक्टूबर को सामने आई एक तस्वीर में Puri और Epstein एक meeting में दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद Congress, TMC और NCP (SP) नेताओं ने सवाल उठाया कि क्या यह Puri के उस दावे से मेल खाता है कि meetings delegation/professional setting में हुई थीं। Opposition ने emails और meetings का भी मुद्दा उठाया Congress ने फरवरी में दावा किया था कि 2014 से 2017 के बीच Puri और Epstein के बीच 62 email exchanges और 14 meetings के records हैं। Puri ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि उनकी interactions का Epstein के crimes से कोई लेना-देना नहीं था। “मुझे धोखे में रखकर मिलवाया गया” वाली line पर सावधानी अभी उपलब्ध विश्वसनीय reports में मुझे Puri का यह exact verified statement नहीं मिला कि “मुझे धोखे में रखकर मिलवाया गया।” इसलिए इस line को direct quote के रूप में publish करना safe नहीं होगा। Verified position यही है कि Puri contacts को professional बताते हैं और किसी criminal association से इनकार करते हैं। Epstein कौन था? Jeffrey Epstein एक अमेरिकी financier था जिसे 2008 में prostitution-related offence में दोषी ठहराया गया था और 2019 में minors की sex trafficking के federal charges का सामना करना पड़ा। 2019 में जेल में उसकी मौत हुई। किसी व्यक्ति का Epstein के records या emails में नाम होना अपने आप criminal wrongdoing साबित नहीं करता। जय राष्ट्र न्यूज़

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तिहाड़ से रिहाई के अगले ही दिन Saurav Das और Ashutosh Ranka को Crime Branch का summons, Ajinkya Shinde भी बुलाए गए

नई दिल्ली, 22 अक्टूबर 2026: CJP leaders Saurav Das और Ashutosh Ranka को Tihar Jail से रिहा हुए अभी एक दिन ही हुआ था कि Delhi Police Crime Branch ने उन्हें फिर पूछताछ के लिए बुला लिया। Ajinkya Shinde को भी summons जारी किया गया है। तीनों को आज Rajouri Garden स्थित Crime Branch office में पेश होने को कहा गया है। किस मामले में बुलाया गया? Summons उस Jantar Mantar trespassing case से जुड़ा है, जिसकी investigation हाल ही में Delhi Police ने Crime Branch के Inter State Cell को transfer की थी। Police का आरोप है कि protest के दौरान restricted/de-notified area में unlawful entry हुई थी। रिहाई के अगले ही दिन questioning Saurav Das और Ashutosh Ranka को बुधवार को Special Executive Magistrate Court के आदेश के बाद judicial custody से release किया गया था। इसके लिए दोनों ने ₹50,000 के personal और surety bonds दिए और written undertaking भी दी। अगले ही दिन Crime Branch summons आने से मामला फिर चर्चा में आ गया। क्या थी release की condition? Court के सामने दोनों ने undertaking दी कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखेंगे और Jantar Mantar को दोबारा legally notified protest site बनाए जाने तक वहां protest का call नहीं देंगे। मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और enquiry जारी है। Ajinkya Shinde को भी क्यों बुलाया? Indian Express के मुताबिक CJP के Ajinkya Shinde भी उस investigation के दायरे में हैं, जिसे Crime Branch ने take over किया है। Police ने तीनों को questioning के लिए बुलाया है ताकि alleged trespass और protest-related events की sequence स्पष्ट की जा सके। CJP और Police के बीच विवाद जारी CJP पहले ही detention और release process को लेकर Delhi Police पर सवाल उठा चुकी है, जबकि police का कहना है कि कार्रवाई public order और legal procedure के तहत की गई। फिलहाल summons का मतलब नया arrest नहीं है; यह ongoing investigation में questioning के लिए बुलावा है। जय राष्ट्र न्यूज़

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Jeffrey Epstein से मुलाकात विवाद पर Hardeep Singh Puri की सफाई, बोले—संपर्क पूरी तरह professional था

Jeffrey Epstein से मुलाकात विवाद पर Hardeep Singh Puri की सफाई, बोले—संपर्क पूरी तरह professional था नई दिल्ली, 22 अक्टूबर 2026: Jeffrey Epstein से मुलाकातों को लेकर दोबारा उठे विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री Hardeep Singh Puri ने अपने पुराने संपर्कों पर सफाई दी है। Puri का कहना है कि Epstein के साथ उनकी मुलाकातें सीमित और पूरी तरह professional context में हुई थीं तथा उनका Epstein के आपराधिक मामलों से कोई संबंध नहीं था। हाल में सामने आई तस्वीरों के बाद विपक्ष ने उनसे दोबारा जवाब मांगा है। विवाद फिर क्यों उठा? हाल में एक तस्वीर सामने आई जिसमें Puri और Epstein एक private meeting में दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद Congress, TMC और NCP (SP) नेताओं ने सवाल उठाया कि क्या यह Puri के उस पुराने बयान से मेल खाता है जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी मुलाकातें delegation और professional engagements का हिस्सा थीं। Puri ने पहले क्या कहा था? फरवरी 2026 में Puri ने कहा था कि उन्होंने Epstein से “तीन या अधिकतम चार बार” मुलाकात की और सभी interactions Independent Commission on Multilateralism तथा अन्य international work से जुड़े थे। उन्होंने किसी wrongdoing से साफ इनकार किया था। Opposition ने 62 emails और 14 meetings का मुद्दा उठाया Congress ने फरवरी में आरोप लगाया था कि 2014 से 2017 के बीच Puri और Epstein के बीच 62 email exchanges और 14 meetings के records मौजूद हैं। Puri ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि विपक्ष public records को context से बाहर पेश कर रहा है। “धोखे में रखकर मिलवाया गया” दावे पर सावधानी सोशल मीडिया और कुछ posts में Puri के नाम से यह दावा चल रहा है कि उन्हें “धोखे में रखकर Epstein से मिलवाया गया”। लेकिन उपलब्ध विश्वसनीय reports में मुझे इस exact wording की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिली। Verified position फिलहाल यही है कि Puri अपने contacts को professional बताते हैं और किसी criminal association से इनकार करते हैं। Epstein कौन था? Jeffrey Epstein एक अमेरिकी financier था जिसे 2008 में prostitution-related offence में दोषी ठहराया गया था और 2019 में उस पर minors की sex trafficking के federal charges लगे। 2019 में जेल में उसकी मौत हुई, जिसे suicide बताया गया। किसी व्यक्ति का Epstein के emails या records में नाम होना अपने आप में criminal wrongdoing का प्रमाण नहीं है। राजनीतिक विवाद जारी नई तस्वीरों के बाद विपक्ष Puri से मुलाकातों की संख्या, context और correspondence पर विस्तृत स्पष्टीकरण मांग रहा है। Puri पहले ही सभी आरोपों को “baseless” बताते हुए अपनी भूमिका को professional engagements तक सीमित बता चुके हैं। Source – The Indian Express, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़नई दिल्ली, 22 अक्टूबर 2026: Jeffrey Epstein से मुलाकातों को लेकर दोबारा उठे विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री Hardeep Singh Puri ने अपने पुराने संपर्कों पर सफाई दी है। Puri का कहना है कि Epstein के साथ उनकी मुलाकातें सीमित और पूरी तरह professional context में हुई थीं तथा उनका Epstein के आपराधिक मामलों से कोई संबंध नहीं था। हाल में सामने आई तस्वीरों के बाद विपक्ष ने उनसे दोबारा जवाब मांगा है। विवाद फिर क्यों उठा? हाल में एक तस्वीर सामने आई जिसमें Puri और Epstein एक private meeting में दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद Congress, TMC और NCP (SP) नेताओं ने सवाल उठाया कि क्या यह Puri के उस पुराने बयान से मेल खाता है जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी मुलाकातें delegation और professional engagements का हिस्सा थीं। Puri ने पहले क्या कहा था? फरवरी 2026 में Puri ने कहा था कि उन्होंने Epstein से “तीन या अधिकतम चार बार” मुलाकात की और सभी interactions Independent Commission on Multilateralism तथा अन्य international work से जुड़े थे। उन्होंने किसी wrongdoing से साफ इनकार किया था। Opposition ने 62 emails और 14 meetings का मुद्दा उठाया Congress ने फरवरी में आरोप लगाया था कि 2014 से 2017 के बीच Puri और Epstein के बीच 62 email exchanges और 14 meetings के records मौजूद हैं। Puri ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि विपक्ष public records को context से बाहर पेश कर रहा है। “धोखे में रखकर मिलवाया गया” दावे पर सावधानी सोशल मीडिया और कुछ posts में Puri के नाम से यह दावा चल रहा है कि उन्हें “धोखे में रखकर Epstein से मिलवाया गया”। लेकिन उपलब्ध विश्वसनीय reports में मुझे इस exact wording की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिली। Verified position फिलहाल यही है कि Puri अपने contacts को professional बताते हैं और किसी criminal association से इनकार करते हैं। Epstein कौन था? Jeffrey Epstein एक अमेरिकी financier था जिसे 2008 में prostitution-related offence में दोषी ठहराया गया था और 2019 में उस पर minors की sex trafficking के federal charges लगे। 2019 में जेल में उसकी मौत हुई, जिसे suicide बताया गया। किसी व्यक्ति का Epstein के emails या records में नाम होना अपने आप में criminal wrongdoing का प्रमाण नहीं है। राजनीतिक विवाद जारी नई तस्वीरों के बाद विपक्ष Puri से मुलाकातों की संख्या, context और correspondence पर विस्तृत स्पष्टीकरण मांग रहा है। Puri पहले ही सभी आरोपों को “baseless” बताते हुए अपनी भूमिका को professional engagements तक सीमित बता चुके हैं। Source – The Indian Express, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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“मैं सैनिक की पत्नी हूं… तकलीफ होती है इन्हें देखकर”, जंतर-मंतर पर भावुक हुई महिला का वीडियो फिर चर्चा में

नई दिल्ली, 22 अक्टूबर 2026: जंतर-मंतर पर एक विरोध प्रदर्शन के दौरान खुद को सैनिक की पत्नी बताने वाली महिला का भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर फिर चर्चा में है। वीडियो में महिला प्रदर्शनकारियों और उनके साथ हो रहे कथित व्यवहार पर चिंता जताते हुए कहती नजर आती हैं कि उन्हें यह सब देखकर “तकलीफ होती है।” हालांकि उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्ट्स से यह साफ है कि यह clip नया नहीं, बल्कि पहले के जंतर-मंतर protest से जुड़ा वीडियो है, जिसे अब दोबारा शेयर किया जा रहा है। महिला ने क्या कहा? Viral clip में महिला खुद को एक सैनिक की पत्नी बताते हुए protesters के समर्थन में बोलती हैं। उनका कहना है कि जो लोग अपनी बात रखने के लिए जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं, उनके साथ कथित तौर पर जिस तरह का व्यवहार हो रहा है, उसे देखकर उन्हें दुख होता है। Exact viral wording अलग-अलग reposts में edit होकर circulate हो रही है, इसलिए पूरे बयान को बिना original full video के verbatim quote करना ठीक नहीं होगा। यह वीडियो आज का नहीं है महत्वपूर्ण बात यह है कि यह वीडियो 22 अक्टूबर का ताजा footage नहीं दिखता। Reddit पर यही clip जुलाई 2026 में “Fauji’s Wife” के नाम से share हुआ था। इसलिए इसे आज के जंतर-मंतर की breaking घटना बताना misleading होगा। जंतर-मंतर protests पर पहले भी उठे हैं सवाल दिल्ली में हाल के महीनों में अलग-अलग demonstrations के दौरान police action, detentions और protesters के साथ कथित बदसलूकी को लेकर कई शिकायतें सामने आई हैं। एक CRPF officer ने भी protesters के साथ कथित ज्यादती को लेकर NHRC, Delhi Police और National Commission for Women में complaint की थी। Viral video को context के साथ देखना जरूरी Social media पर पुराने protest videos अक्सर किसी नए घटनाक्रम के साथ दोबारा वायरल हो जाते हैं। इसलिए इस clip को “आज जंतर-मंतर पर सैनिक की पत्नी भावुक हुईं” लिखने के बजाय “पुराना वीडियो फिर वायरल” कहना ज्यादा तथ्यात्मक होगा। Source – Rakshak News, social-media archive जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत में प्रदर्शनों पर कथित ‘Excessive Force’ के आरोप, UN experts ने स्वतंत्र जांच की मांग की

नई दिल्ली, 21 अक्टूबर 2026: संयुक्त राष्ट्र (UN) के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने भारत में हालिया विरोध प्रदर्शनों से निपटने के दौरान सुरक्षा बलों पर लगे कथित अत्यधिक बल प्रयोग और बड़े पैमाने पर हिरासत में लेने के आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। विशेषज्ञों ने अधिकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने के अधिकार का सम्मान करने और अहिंसक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अनावश्यक बल प्रयोग से बचने की अपील की है। UN experts ने क्या चिंताएं जताईं? Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने ऐसी खबरों पर चिंता जताई है जिनमें प्रदर्शनकारियों के घायल होने, कथित दुर्व्यवहार, लाठीचार्ज और प्रदर्शनों तक पहुंच सीमित किए जाने के आरोप शामिल हैं। विशेषज्ञों ने इन आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने पर जोर दिया है, ताकि घटनाओं की परिस्थितियों का पता लगाया जा सके और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया पारदर्शी हो। किन प्रदर्शनों का है जिक्र? हाल के विरोध प्रदर्शनों में विपक्षी दलों और छात्र एवं युवा संगठनों के प्रदर्शन शामिल रहे हैं। इनमें निर्वाचन आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision यानी SIR) से जुड़े मुद्दों पर विरोध भी शामिल है। अक्टूबर में दिल्ली में हुए कुछ प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या और पुलिस प्रतिबंधों को लेकर भी सवाल उठे थे। इन घटनाओं के संदर्भ में प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बीच संतुलन पर बहस तेज हुई है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर प्रतिबंधों को लेकर सवाल UN experts ने प्रदर्शन पर रोक, एहतियाती हिरासत और डिजिटल निगरानी के कथित दुरुपयोग को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण सभा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लागू अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुरूप होने चाहिए। ऐसे प्रतिबंधों का कानूनी आधार स्पष्ट होना चाहिए और वे आवश्यक तथा परिस्थितियों के अनुपात में होने चाहिए। विशेषज्ञों ने शांतिपूर्ण असहमति जताने वालों के अधिकारों की रक्षा के महत्व पर जोर दिया है। भारत सरकार और निर्वाचन आयोग का पक्ष भारतीय अधिकारियों का पक्ष है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए की जाने वाली कार्रवाई कानूनी प्रावधानों और सार्वजनिक सुरक्षा की जरूरतों के तहत होती है। वहीं, निर्वाचन आयोग मतदाता सूची के पुनरीक्षण को चुनावी रिकॉर्ड की सटीकता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया बताता रहा है। मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की चिंताओं तथा आयोग के पक्ष के बीच मतभेद बने हुए हैं। इन राजनीतिक और प्रशासनिक दावों का आकलन संबंधित तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाना जरूरी है। आरोपों और स्थापित तथ्यों में अंतर जरूरी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग, दुर्व्यवहार और अधिकारों के उल्लंघन से जुड़े आरोपों को जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इन मामलों में स्वतंत्र जांच का उद्देश्य घटनाओं की पुष्टि करना, जिम्मेदारी निर्धारित करना और यदि उल्लंघन साबित हों तो उचित कार्रवाई सुनिश्चित करना है। Protest policing पर अंतरराष्ट्रीय नजर भारत में हालिया विरोध प्रदर्शनों के बाद पुलिस की रणनीति, हिरासत में लेने की प्रक्रिया, बैरिकेडिंग और बल प्रयोग को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा हुई है। Reuters की रिपोर्टिंग में प्रदर्शन प्रबंधन से जुड़े नियमों और पुलिस की कार्रवाई के तरीकों पर सवालों का उल्लेख किया गया है। इस मामले में आगे की जांच और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। साथ ही, शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच संतुलन भी चर्चा का प्रमुख विषय बना रहेगा। Source: Reuters, UN Human Rights Office (OHCHR) जय राष्ट्र न्यूज़

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