Israel bombings Gaza

Israel Gaza Conflict: इजरायल ने गाजा को किया तबाह, दिन-रात हो रही बमबारी, पलायन या मौत दो ही विकल्प

बीते कई दिनों से गाजा में हर दिन हमला तीव्र होता जा (Israel Gaza Conflict) रहा है। गाजा में आये दिन औसतन 200 से अधिक लोगों की मौत हो रही है। हालांकि इजराइल-हमास में जारी संघर्ष के बीच नेतन्याहू ने गाजा पर नियंत्रण का ऐलान कर दिया है। लेकिन, एक तरफ जहाँ इजराइल ने गाजा पर नियंत्रण की घोषणा की है तो वहीं दूसरी तरफ हमास आम नागरिकों को ढाल बना रहा है। इजराइली सेना और हमास के बीच जारी संघर्ष अब इस स्थिति में पहुँच गया जहाँ सिर्फ मौत ही मौत है। इजरायल आये दिन गाजा पर बमबारी कर रहा है। इस बमबारी के बीच हमास आम लोगों को शील्ड बनाकर इजराइली हमले रोकना चाहता है। इसके चलते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ गया है। बढ़ते दबाव के चलते डोनाल्ड ट्रंप ने दोहरी नीति अपना ली है। उनकी इस नीति की वजह से यूरोपीय देशों के बीच मतभेद होने लगे हैं। होने वाले अगले एक्शन को लेकर सभी ने चिंता जाहिर की है। खैर, इजरायल द्वारा किये जा रहे हमलों की वजह से गाजा में खाद्य संकट का खतरा गहरा गया है। हालाँकि बढ़ते संकट के बीच इजराइल कुछ सहायता पहुंचाने की बात कर रहा है। ऐसे में लोग अपनी जान बचाकर पलायन कर रहे हैं।  फिलिस्तीनियों के पलायन तक जिंदा रहने की आखिरी उम्मीद वाला एक ही शहर (Israel Gaza Conflict) है राफा  बता दें कि गाजा का अंतिम दक्षिणी सिरा राफा है, जो फिलिस्तीनियों के पलायन तक जिंदा रहने की आखिरी उम्मीद वाला शहर (Israel Gaza Conflict) है, लेकिन ये शहर अब जमींदोज होने के कगार पर है। गाजा पर ये कार्रवाई इजराइली सेना ऑपरेशन गिडियंस चैरियट के तहत कर रही है और हैरानी की बात ये है कि, न तो इजराइल के इस ऑपरेशन पर ट्रंप कुछ बोल रहे हैं, न ही उन्हें इस संहार कार्यक्रम से कोई फर्क पड़ रहा है। ऐसे में बहुत मुमकिन है कि ऑपरेशन गिडियंस चैरियट को ट्रंप का मूक समर्थन है। इसे देखकर तो यही कहा जा सकता है कि गाजा में जारी संहार ट्रंप के प्लान के तहत ही हो रहा है। और तो और कहना यह भी गलत नहीं होगा कि गाजा के विनाश की योजना भी पेंटागन में ही तैयार की गई थी? खैर, बीच वैश्विक समुदाय की नज़र गाजा की तरफ घूम चुकी है। जिसके चलते ट्रंप खुद को इस कार्रवाई से अलग करने ढोंग करने लगे हैं।  अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद हम गाजा पर नियंत्रण (Israel Gaza Conflict) रखेंगे- पीएम बेंजामिन नेतन्याहू इस बीच इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि “अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद हम गाजा पर नियंत्रण (Israel Gaza Conflict) रखेंगे। इस स्थिति में गाजा पर खाद्यान्न का संकट मंडरा सकता है। इसलिए हम सहायता आपूर्ति पर लगी रोक हटा रहे हैं।” हालाँकि इस बयान के अनुरूप इजराइली कार्रवाई भी दिख रही है। ये रोकी गई सहायता है, जिसे शुरू किया जाना है, तो दूसरी तरफ इजराइली सेना ने गाजा पर विध्वंसक हमले भी जारी रखे हैं। बता दें कि राफा,खान यूनिस, बेत लाहिया और नुसीरत शिविर में इतने भयावह हमले हुए हैं कि इसे रोकने के लिए फिलिस्तीन हाथ जोड़ गुजारिश कर रहा है। राफा शहर जमींदोज होने के कगार पर है। हालांकि इस कार्रवाई के बीच इजराइल ने गाजा से बाहर निकलने की ढील भी दी है जिसमें चुनिंदा फिलिस्तीनी ही बाहर जा सकते हैं और ये सख्ती इसलिए बरती गई है, ताकि हमास के लड़ाके गाजा से बाहर न निकल सकें। कारण यही जो, इस सख्ती ने यूरोप के कई देशों को भी इजराइल के खिलाफ खड़ा कर दिया है।  इसे भी पढ़ें:- अमृतसर में जहरीली शराब ने ली 14 लोगों की जान, मचा हड़कंप, प्रशासन पर उठे सवाल गाजा तक पहुंचने वाली सहायता पर प्रतिबंध नहीं हटाता है तो इजराइल के खिलाफ हमें कोई करनी (Israel Gaza Conflict) पड़ेगी ठोस कार्रवाई  इस पूरे बवाल पर फ्रांस, ब्रिटेन और कनाडा ने संयुक्त बयान जारी करके कहा है कि “अगर इजराइल गाजा पर नए हमले नहीं रोकता है, गाजा तक पहुंचने वाली सहायता पर प्रतिबंध नहीं हटाता है तो इजराइल के खिलाफ हमें कोई ठोस कार्रवाई करनी (Israel Gaza Conflict) पड़ेगी।” यह तो ठीक, लेकिन नेतन्याहू ने गाजा पर नियंत्रण के लिए कदम आगे बढ़ा दिया है। बेशक नेतन्याहू को रोक पाना सबके बस की बात नहीं है। हालांकि ट्रंप टाल सकते हैं, लेकिन ट्रंप ने कुछ और ही सोच रखा है। कुछ भी ही इजरायल गाजा को वीरान कर के ही मानेगा। और बड़ी बात यह कि ट्रंप खुद भी यही चाहते हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news #IsraelGazaConflict #GazaUnderAttack #IsraelAirstrikes #MiddleEastCrisis #PalestineConflict #GazaWar #BreakingNews #HumanitarianCrisis #GazaNews #PrayForGaza

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Did Rajiv Gandhi know about his assassination

Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death?: क्या सच में हो गया था पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी को अपनी मौत का आभास?

आज ही के दिन 34 वर्ष पूर्व लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम के आत्मघाती हमले में राजीव गांधी की मौत हो गई (Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death?) थी। हैरत की बात यह कि इस घटना से कुछ घंटे पहले ही नीना गोपाल ने राजीव गांधी का इंटरव्यू लिया था। इस दौरान उन्होंने राजीव से पूछा कि “क्या उन्हें लगता है कि उनकी जिंदगी खतरे में है?” इस सवाल के जवाब पर राजीव गांधी ने उल्टा पूछा कि “क्या आपने कभी गौर किया है कि दक्षिण एशिया में जब भी कोई महत्वपूर्ण नेता सत्ता पर काबिज होता है या अपने देश के लिए कुछ हासिल करने के करीब होता है, तब उसे कैसे नीचे गिराया जाता है, उस पर हमला किया जाता है, उसे मार दिया जाता है, श्रीमती इंदिरा गांधी को देखिए, शेख मुजीब, जुल्फिकार अली भुट्टो, भंडारनायके को देखिए।” नीना के मुताबिक इस इंटरव्यू के कुछ देर बाद राजीव गाँधी की हत्या कर दी गई थी।  रजीव गाँधी को भी अपनी हत्या का हो गया (Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death?) था आभास? ऐसे में बड़ा सवाल यह कि क्या जिस तरह इंदिरा गांधी ने अपनी हत्या की आशंका जता दी थी ठीक उसी तरह क्या रजीव गाँधी को भी अपनी हत्या का आभास हो गया (Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death?) था? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लिट्‌टे के इंटरसेप्ट किए गए कई मैसजों में राजीव गांधी को खत्म करने की बात कही गई थी। ये खुफिया इनपुट अप्रैल 1990 से मई 1991 के बीच इंटरसेप्ट किए गए थे। बता दें कि नीना गोपाल ने कर्नल हरिहरन के हवाले से अपनी किताब में लिखा है कि जब उनकी टीम ने राजीव गांधी की हत्या की साजिश रचने का संकेत देने वाला लिट्‌टे का एक कैसेट उन्हें सुनाया, तो वे सन्न रह गए थे। यहाँ ध्यान देने वाली महत्वपूर्ण बात यह कि अनहोनी होने की आशंका के बावजूद पूर्व प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर भयावह लापरवाही बरती गई।  लिट्टे के खिलाफ सशस्त्र बलों को भेजना राजीव गाँधी को पड़ा (Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death?) भारी दरअसल, श्रीलंका में फैले उग्रवादी विद्रोह को समाप्त करने हेतु राजीव गाँधी ने भारतीय सशस्त्र बलों को भेजा था। उनका यही कदम उनके जान की आफत (Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death?) बना। जानकारी के मुताबिक यह कदम उठाने की सलाह कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग, सैन्य कमांडरों और खुफिया एजेंसियों ने दी थी। खैर, इस दौरान कई भारतीय सैनिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इन सब के बावजूद लिट्टे पर काबू नहीं पाया जा सका। इसके बाद भारतीय सैनिकों को वापस बुला लिया गया। भले ही सैनिकों को वापस बुला लिया लेकिन तब तक राजीव गांधी लिट्टे का सबसे बड़ा दुश्मन बन चुके थे।  नहीं थे, सुरक्षा के पुख्ता (Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death?) इंतजाम  गौरतलब हो कि साल 1991 में केंद्र में चंद्रशेखर सरकार के पतन के बाद मध्यावधि चुनावों की घोषणा कर दी गई (Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death?) थी। चुनाव प्रचार जोरों पर थे। उन दिनों राजीव गांधी तमिलनाडु के चुनावी दौर पर थे। इस बीच 21 मई की रात चेन्नई से तकरीबन 40 किमी दूर श्रीपेरंबुदुर पहुंचे। हैरत की बात यह कि सुरक्षा के इन्तेजामत उस  तरह के नहीं थे जिस तरह के होने चाहिए थे। खैर, उन्हें पहुँचते-पहुँचते 10 बज गए थे। रात काफी हो चुकी थी, सो वो तेजी से कदम बढ़ाते हुए रेड कार्पेट से होते हुए स्टेज की तरफ बढ़ रहे थे। इस दौरान वो सभी से फूलमालाएं स्वीकार करते जा रहे थे। तभी उनकी नजर एक छोटी-सी लड़की कोकिला पर गई, जो कविता सुना रही थी। उसे देख वो रुक गए तभी आत्मघाती दस्ते में शामिल धनु हाथ में चंदन की माला लेकर आगे बढ़ी।  इसे भी पढ़ें:- पाकिस्तानी जासूस ज्योति के समर्थन में उतरी पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर हीरा बतूल, जानें क्या है रिश्ता  धमाके के बाद उनकी पहचान उनके जूते से हो हुई (Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death?) थी खैर, इस बीच उन्होंने कांस्टेबल अनुसूया को भीड़ को नियंत्रित करने का इशारा किया, लेकिन तब तक धनु राजीव के चरण स्पर्श करने का बहाना करते हुए झुकी और तभी उसने अपने शरीर से लिपटे आरडीएक्स विस्फोट से लदे डिवाइस के बटन को दबा दिया। धमाका इतना तीव्र था कि राजीव गाँधी के चिथड़े उड़  (Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death?) गए। धमाके की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि उनकी पहचान उनके जूते से हो हुई थी। कहते हैं बम विस्फोट में 46 साल के राजीव का शव इस कदर क्षत-विक्षत हो गया था कि डॉक्टरों ने बमुश्किल उसे रुई और पट्टियों की मदद से आकार दिया था।  Latest News in Hindi Today Hindi news Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death? #RajivGandhi #DeathMystery #IndianPolitics #RajivAssassination #LTTE #IndiaHistory #PoliticalTruth #GandhiFamily #RajivLegacy #HistoricalFacts

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RR vs CSK full match report

CSK’s 10th Loss, RR Wins by 6 Wickets: चेन्नई सुपर किंग्स की दसवीं हार, राजस्थान रॉयल्स ने दी 6 विकेट से मात, वैभव सूर्यवंशी ने जीता दिल

आईपीएल सीजन 2025 (IPL2025) का 62वां मुकाबला राजस्थान रॉयल्स (Rajasthan Royals) और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच खेला गया। 20 मई को दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए इस मैच में राजस्थान रॉयल्स ने चेन्नई सुपर किंग्स को 6 विकेट से हरा (CSK’s 10th Loss, RR Wins by 6 Wickets) दिया। इस सीजन में राजस्थान की यह चौथी जीत है तो वहीं चेन्नई सुपर किंग्स की दसवीं हार। राजस्थान का ये आखिरी लीग स्टेज का मैच था। इस हार जीत से दोनों ही टीमों को विशेष फर्क नहीं पड़ता क्योंकि दोनों ही टीमें प्लेऑफ की रेस से बाहर हो चुकीं हैं और पॉइंट्स टेबल पर नीचे से टॉप पर हैं। वैभव सूर्यवंशी राजस्थान की जीत के हीरो रहे। दरअसल, इस मुकाबले में टॉस जीतकर राजस्थान रॉयल्स ने पहले गेंदबाजी का फैसला किया। उनका यह फैसला सही साबित हुआ।  188 रनों का पीछा करने उतरी राजस्थान रॉयल्स की शुरुआत बड़ी शानदार (CSK’s 10th Loss, RR Wins by 6 Wickets) रही टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी चेन्नई सुपर किंग्स की शुरुआत अच्छी नहीं रही। महज 12 रनों पर ही उसके दो विकेट गिर गए। इसके बाद बल्लेबाजी करने ए आयुष म्हात्रे ने तूफानी पारी खेलते हुए टीम को संभाला। उन्होंने 20 गेंदों पर 43 रन बनाए, जिसमें 8 चौके और 1 छक्का भी शामिल था। इसके अलावा शिवम् दुबे ने भी अपने बल्ले का जौहर दिखाते हुए 39 रन बनाए। जिसके चलते सीएसके की टीम 20 ओवर में 8 विकेट के नुकसान पर 187 रन बनाने में कामयाब रही। 188 रनों का पीछा करने उतरी राजस्थान रॉयल्स की शुरुआत बड़ी शानदार रही। यशस्वी जायसवाल ने 19 गेंदों पर 5 चौके और 2 छक्के की मदद से 36 रन बनाए तो वहीं, वैभव सूर्यवंशी ने 33 गेंदों पर 57 रन बनाकर मैच को का रुख ही बदल (CSK’s 10th Loss, RR Wins by 6 Wickets) दिया। इस पारी में उन्होंने 4 चौके और 4 छक्के जड़े। वैभव के अलावा कप्तान संजू सैमसन ने 41 तो ध्रुव जुरेल ने 12 गेंदों पर नाबाद 31 रन बनाए। इस तरह राजस्थान रॉयल्स ने चेन्नई सुपरकिंग्स को 6 विकेट से हरा दिया।  इसे भी पढ़ें:-  सनराइजर्स हैदराबाद की जीत ने किया लखनऊ सुपरजायंट्स को प्लेऑफ की रेस से बाहर, भिड़े खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी ने छुए धोनी के पैर (CSK’s 10th Loss, RR Wins by 6 Wickets) ध्यान देने वाली बात यह कि इस वर्ष रवींद्र जडेजा ने 13 मुकाबले में सिर्फ 280 रन ही बनाए हैं। रही बात उनके औसत की तो उन्होंने 31.11 के औसत से रन बनाएं हैं। कहने की जरूरत नहीं दोनों टीमों के लिए आईपीएल का 18वां सीजन काफी खराब रहा (CSK’s 10th Loss, RR Wins by 6 Wickets) है। खैर, राजस्थान के इस आखिरी लीग मैच में एक जबरदस्त नजारा देखने मिला। हुआ यह कि मैच खत्म होने के बाद जब सभी खिलाड़ी एक-दूसरे से हाथ मिला रहे थे। तब सीएसके के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और वैभव आमने-सामने आ गए। वैभव ने हाथ मिलाने की जगह धोनी के पैर छुए। इसके बाद धोनी ने वैभव को बड़े प्यार से देखा और वैभव ने भी अपनी मासूम मुस्कान दी। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इस वीडियो को देखकर वैभव की जमकर तारीफ कर रहे हैं। Latest News in Hindi Today Hindi news CSK’s 10th Loss, RR Wins by 6 Wickets #IPL2025 #CSKvsRR #VaibhavSuryavanshi #ChennaiSuperKings #RajasthanRoyals #IPLHighlights #CSK10thLoss #RRVictory #T20Cricket #CricketNews

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Mother & Minor Lover Involved in Shocking Child Abuse Case

Mother & Minor Lover Involved in Child Abuse Case: पहले 19 साल के प्रेमी से करवाया अपनी ढाई साल की बेटी दुष्कर्म, फिर घोंटा बच्ची का गला

सरकार लाख चाहे बेटी बचाओ की मुहीम क्यों न चला ले, समाज में बैठे दरिंदे मंसूबों पर पानी फेरने के लिए तैयार बैठे हैं। देश के हर कोने में हर दिन कोई न कोई मासूम किसी न किसी की हवस का शिकार बनती रहती है। ताजा मामला है देश की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुंबई की है, जहाँ एक कलयुगी डायन ने अपनी ढाई साल की नन्हीं मसूम का गला घोंट (Mother & Minor Lover Involved in Child Abuse Case) दिया। आगे की बात जानकर हो सकता है आपका कलेजा कांप उठे। नन्हीं सी जान को मारने से पहले उसने अपने 19 साल के प्रेमी से दुष्कर्म भी करवाया। सोचनीय बात यह कि दुष्कर्म वो भी अपनी ही ढाई साल की बच्ची का। आपने जो पढ़ा, वो सच है। दिल दहला देने वाली यह घटना मलाड के मालवणी स्थित एक झोपड़पट्टी में हुई है। फ़िलहाल पुलिस ने हत्यारन महिला और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया है। 30 वर्षीय हत्यारन माँ की शादी दो साल पहले टूट गई (Mother & Minor Lover Involved in Child Abuse Case) थी जाँच में मुंबई पुलिस को पता चला कि 30 वर्षीय हत्यारन माँ की शादी दो साल पहले टूट गई थी। इस दौरान वो पेट से थी। बच्चे को जन्म देने के बाद से वह अपनी मां के घर पर रहा करती थी। इस दरम्यान उसकी पहचान पड़ोस में रह रहे 19 साल के लड़के से होती है। पहली बार में ही दोनों एक दूसरे के करीब आ जाते हैं और दोनों के बीच संबंध स्थापित हो जाते (Mother & Minor Lover Involved in Child Abuse Case) हैं। पुलिस के मुताबिक, “महिला और 19 साल का उसका प्रेमी दोनों रिलेशनशिप में थे।” दोनों के रिश्तों की भनक किसी को नहीं थी। इस बीच एक दिन हत्यारन की माँ यानी बच्ची की नानी घर पर नहीं थी। मौका देख 19 साल प्रेमी घर आया और बच्ची के साथ दुष्कर्म करने की जिद करने लगा। पूछताछ में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि आरोपी ने इससे पहले भी यह जिद की थी। पहले तो वह अपनी बेटी का उत्पीड़न कराने के लिए तैयार नहीं हुई, लेकिन बार-बार जिद करने के बाद वह तैयार हो गई। अपनी आँखों के सामने अपनी ही फूल सी बच्ची का (Mother & Minor Lover Involved in Child Abuse Case) करवाया दुष्कर्म चूँकि घर पर कोई था नहीं, सो उसने अपनी आँखों के सामने ही अपनी फूल सी बच्ची का दुष्कर्म (Mother & Minor Lover Involved in Child Abuse Case) करवाया। इस बीच वह मासूम दर्द के मारे चीखती रही, लेकिन उस हैवान को जरा भी तरस नहीं आया। उसकी चीख ऐसी की कान के पर्दे फट जाएँ। अपनी हवस मिटाने के बाद फिर दोनों ने मिलकर उसका गला घोंट दिया। पुलिस के मुताबिक हत्यारन महिला ने कबूल किया कि वो अपनी बेटी को किसी भी हाल में अपने साथ नहीं रखना चाहती थी। उसकी बूढ़ी माँ ही उसका ध्यान रखती थी, जो बतौर सहायिक के रूप में काम करती है और 3000 महीना कमाती है। खैर, मामला सामने आता भी नही, वो तो गला घोंटने के बाद दोनों रविवार देर रात मालवणी के एक अस्पताल में लेकर गए। आरोपियों ने मौजूद डॉक्टरों से कहा कि “बच्ची को मिर्गी का दौरा पड़ा है। जिसके कारण वह बेहोश हो गई है।” इसे भी पढ़ें:- लालू की पार्टी आरजेडी के नेता शंभू गुप्ता 2 करोड़ रुपये की अफीम के साथ गिरफ्तार आरोपियों ने अपराध को छिपाने की (Mother & Minor Lover Involved in Child Abuse Case) की कोशिश इस बीच डॉक्टर ने चेक करना शुरू किया। जांच करने पर पता चला कि बच्ची की मौत दम घुटने से हुई है, न कि मिर्गी की वजह से आई बेहोशी है। फ़िलहाल, ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने जांच के दौरान बच्ची को मृत घोषित कर दिया। तभी डॉक्टर की नजर बच्ची के प्राइवेट पार्ट्स पर ताजे चोट के निशान पड़ी, जो कि यौन उत्पीड़न की तरफ इशारा कर रहे थे। शक होने पर डॉक्टरों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस ने पहुंचकर दोनों को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने बताया कि दोनों ने आरोपियों ने अपराध को छिपाने की कोशिश (Mother & Minor Lover Involved in Child Abuse Case) की। उन्होंने दावा किया कि बच्ची को मिर्गी का दौरा पड़ा था लेकिन, डॉक्टर ने देखा कि बच्ची की मौत दम घुटने से हुई है।” पुलिस ने आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की सुसंगत धाराओं जिनमें, 70,64,65 (2), 66,103,238,3 (5) शामिल है के साथ-साथ पॉक्सो अधिनियम की धारा 6,10.21 के तहत मामला दर्ज किया है। Latest News in Hindi Today Hindi news Mother & Minor Lover Involved in Child Abuse Case #ChildAbuse #ChildSafety #StopChildAbuse #JusticeForChildren #ProtectKids #CrimeNews #ChildProtection #BreakingNews #ChildRights #LawAndOrder

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One Nation One Election

One Nation One Election: इतना भी आसान नहीं है वन नेशन-वन इलेक्शन करवाना, कुल इतने हजार करोड़ होंगे खर्च

देश में हर साल कहीं न कहीं, कोई न कोई चुनाव होता ही रहता है। कभी इस राज्य में चुनाव तो कभी उस राज्य में। इस बीच बीते वर्षों में वन नेशन वन इलेक्शन (One Nation One Election) की चर्चा जोरों पर है। कुछ राजनीतिक पार्टियां हैं जो इसके पक्ष में हैं, तो कुछ विपक्ष में। खैर, ऐसे में बड़ा सवाल कि क्या देश में वन नेशन वन इलेक्शन यानी एक साथ लोकसभा और विधानसभ चुनाव संपन्न करा पाना आसान है? और उससे भी बड़ा सवाल यह कि इसे कराने में आखिर खर्च कितना आएगा? कहने की जरूरत नहीं इसे कराने में कई हजार करोड़ खर्च होंगे। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यदि साल 2029 में सरकार वन नेशन वन इलेक्शन कराती है तो चुनाव आयोग को काम से काम 1 करोड़ ईवीएम मशीन, 34 लाख वीवीपैट मशीन, 48 लाख बैलेटिंग यूनिट और 35 लाख कंट्रोल यूनिट की जरूरत होगी। इसे खरीदने में कुल 5,300 करोड़ रुपये से भी अधिक खर्च होगा।  ज्वाइंट पार्लियामेंटरी कमेटी वन नेशन-वन इलेक्शन (One Nation One Election) के मुद्दे पर कर रही है विचार  दरअसल, इकोनॉमिक्स टाइम्स की मानें तो इस पर चुनाव आयोग ने एक असिसमेंट किया है, जिसमें एक साथ चुनाव कराने में 5,300 करोड़ रुपये से ज्यादा आने आने का अनुमान लगाया गया है। फिलहाल अभी वन नेशन वन इलेक्शन (One Nation One Election) बिल ज्वाइंट पार्लियामेंटरी कमेटी के पास है, जिस पर सुझाव लिए जा रहे हैं। इस बीच चुनाव आयोग संसदीय समिति के सवालों का जवाब तैयार कर रहा है। यह समिति वन नेशन-वन इलेक्शन (एक देश, एक चुनाव) के मुद्दे पर विचार कर रही है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक समिति ने चुनाव आयोग से पूछा है कि “एक साथ चुनाव कराने में कितना खर्च आएगा और क्या इससे खर्च कम हो सकता है? जाहिर सी बात है, चुनाव आयोग का जवाब ईवीएम और वीवीपैट मशीनों पर ही आधारित होगा।  एक साथ चुनाव कराने हेतु चुनाव (One Nation One Election) आयोग को लॉजिस्टिक्स से जुड़ी कई चुनौतियों का भी करना पड़ेगा सामना  वर्तमान में चुनाव आयोग के पास 30 लाख से अधिक बीयू, 22 लाख सीएयू (बीयू और सीयू मिलकर ईवीएम बनाते हैं) और लगभग 24 लाख वीवीपैट हैं। यह तो ठीक, लेकिन ध्यान देने वाली महत्वपूर्ण बात यह कि साल इनमें कई मशीने 15 साल पुरानी हैं। कई मशीनें 2013-14 में खरीदी गई थीं। जाहिर सी बात है ऐसे में साल 2029 में होने वाले इलेक्शन के लिए तकरीबन 20 लाख बीयू, 13.6 लाख सीयू और 10 लाख से ज्यादा वीवीपैट की कमी हो सकती है। यही नहीं, एक साथ चुनाव कराने हेतु चुनाव (One Nation One Election) आयोग को लॉजिस्टिक्स से जुड़ी कई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ेगा। वजह यह कि चुनाव आयोग को ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को रखने के लिए अधिक से अधिक गोदामों की ज़रूरत होगी। आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम जैसे राज्यों के पास अपने खुद के गोदाम ही नहीं हैं। इसे भी पढ़ें:- लालू की पार्टी आरजेडी के नेता शंभू गुप्ता 2 करोड़ रुपये की अफीम के साथ गिरफ्तार वन नेशन-वन इलेक्शन (One Nation One Election) के लिए बड़ी तादात में कर्मचारियों को तैयार करना और उन्हें ट्रेनिंग देना नहीं है आसान  इसके अलावा एक साथ चुनाव कराने (One Nation One Election) के लिए बड़ी तादात में कर्मचारियों को तैयार करना और उन्हें ट्रेनिंग देना आसान नहीं है। यही नहीं, इसके अलावा मशीनों की जांच के लिए मैन्युफैक्चरर के इंजीनियरों को बुलाना होगा। गौरतलब हो कि यह काम लोकसभा चुनाव से छह महीने पहले और विधानसभा चुनाव से चार महीने पहले शुरू हो जाता है। 12 लाख से ज़्यादा पोलिंग स्टेशनों और गोदामों की सुरक्षा के लिए भी बड़ी संख्या में कर्मचारियों की ज़रूरत होगी। ऐसा इसलिए कि साल 2024 के लोकसभा इलेक्शन में 10.53 लाख पोलिंग स्टेशन थे। चुनाव आयोग का अनुमान है कि साल 2029 में पोलिंग स्टेशन्स की संख्या में  15% इजाफा हो सकता है। 15% इजाफा होने का अर्थ है वन नेशन वन इलेक्शन के लिए 12.1 लाख से ज्यादा पोलिंग स्टेशन्स की आवश्यकता होगी। बता दें कि हर पोलिंग स्टेशन पर दो सेट ईवीएम की ज़रूरत होती है। पोलिंग स्टेशन्स की संख्या बढ़ने का अर्थ है ईवीएम के साथ सब की संख्या बढ़ जाएगी।  Latest News in Hindi Today Hindi news One Nation One Election #OneNationOneElection #ElectionReformIndia #SimultaneousPolls #ModiGovernment #IndianPolitics #LokSabha2024 #ElectionCost #OnePollIndia #LawCommission #DemocracyIndia

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Shambhu Gupta opium case

RJD Leader Caught with ₹2 Cr Worth of Opium: लालू की पार्टी आरजेडी के नेता शंभू गुप्ता 2 करोड़ रुपये की अफीम के साथ गिरफ्तार

कहने के लिए तो बिहार में पूर्णतया शराब बंदी है, लेकिन सूबे में नशे का कारोबार है कि थमने का नाम नहीं ले रहा है। आये दिन पुलिस कार्रवाई करती रहती है। ऐसी ही एक कार्रवाई के तहत पुलिस ने मोतिहारी जिले में नशे की एक बड़ी खेप पकड़ी है। जानकारी के मुताबिक यह कार्रवाई कोटवा थाना क्षेत्र में बिहार एसटीएफ और जिला पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा की गई है। इस कार्रवाई में तेजस्वी यादव के सबसे करीबी माने जाने वाले आरजेडी नेता को पुलिस ने अफीम के साथ (RJD Leader Caught with ₹2 Cr Worth of Opium) पकड़ा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मोतीहारी जिले में पुलिस ने राष्ट्रीय जनता दल के अति पिछड़ा प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष शंभू गुप्ता को तकरीबन दो करोड़ रुपये की अफीम के साथ गिरफ्तार किया है। इसके साथ उनके दो अन्य सहयोगियों को भी हिरासत में लिया गया है। गिरफ्तार किये गए आरोपियों की पहचा बांका निवासी नरेश साह और यूपी के सहारनपुर निवासी सोमपाल कुमार के रूप में हुई है। दोनों का आपराधिक इतिहास रहा है।  शंभू गुप्ता (RJD Leader Caught with ₹2 Cr Worth of Opium) नेपाल से भारी मात्रा में अफीम लाकर बिहार और उत्तर प्रदेश में इसकी करता था सप्लाई  खबर के मुताबिक पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि शंभू गुप्ता (RJD Leader Caught with ₹2 Cr Worth of Opium) एक ऐसे अफीम तस्करी रैकेट का सरगना है जो नेपाल से भारी मात्रा में अफीम लाकर बिहार और उत्तर प्रदेश में इसकी सप्लाई करता था। फिर क्या था, इस जानकारी के आधार पर पुलिस ने अपना जाल बिछाया और शंभू गुप्ता को 4.074 किलोग्राम अफीम के साथ धर दबोचा। अफीम के साथ-साथ उसके पास से 55,000 रुपये नकद और चार मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं। पुलिस की माने तो “शंभू गुप्ता के खिलाफ पहले से ही मोतीहारी के छतौनी थाना और झारखंड के जमशेदपुर में हत्या, अपहरण और एनडीपीएस जैसे गंभीर मामलों में तीन मुकदमे दर्ज हैं।” खैर, वर्तमान में पुलिस इस तस्करी रैकेट की गहराई तक जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस अवैध कारोबार में और कौन-कौन शामिल है और अफीम की यह खेप किन-किन स्थानों पर पहुंचाई जानी थी। इसके अलावा पुलिस जब्त किये मोबाइल की कॉल हिस्ट्री खंगाल रही है, ताकि अन्य तस्करों की पहचान की जा सके।  शंभू गुप्ता (RJD Leader Caught with ₹2 Cr Worth of Opium) व उसके सहयोगियों की गिरफ्तारी के लिए की गई थी विशेष टीम गठित इस कार्रवाई के बाद पुलिस अब गहनता से जाँच में जुटी हुई है कि आखिर तकरीबन 2 करोड़ की अफीम उसने कहाँ से ली और आगे चलकर वो किन किन को इसे डिलीवर करना चाहता था। इसके साथ ही पुलिस इस रैकेट में शामिल अन्य लोगों की भी तलाश में जुटी है। इस पूरे मामले पर सदर एसडीपीओ जितेश पांडे ने बताया कि “शंभू गुप्ता (RJD Leader Caught with ₹2 Cr Worth of Opium) व उसके सहयोगियों की गिरफ्तारी के लिए एक विशेष टीम गठित की गई थी।” उन्होंने विस्तारपूर्वक बताया कि “हम इस रैकेट के पूरे नेटवर्क को उजागर करने में जुटे हैं। शंभू गुप्ता की आपराधिक पृष्ठभूमि को देखते हुए उनकी गतिविधियों की गहन जांच की जा रही है।” गौरतलब हो कि यह गिरफ्तारी बिहार में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चल रहे अभियान का हिस्सा है। बिहार पुलिस ने ट्वीट कर इस कार्रवाई की जानकारी दी और इसे मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता बताया। बता दें कि शंभू गुप्ता पर पहले से हत्या और अपहरण के मामले दर्ज हैं।  इसे भी पढ़ें:- अमृतसर में जहरीली शराब ने ली 14 लोगों की जान, मचा हड़कंप, प्रशासन पर उठे सवाल शंभू गुप्ता (RJD Leader Caught with ₹2 Cr Worth of Opium) आरजेडी मधुबन संगठन जिला के अति पिछड़ा प्रकोष्ठ का अध्यक्ष भी है इस पूरे मामले पर जितेश पांडेय ने बताया कि “एसपी के निर्देश पर शराब एवं ड्रग्स माफिया के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में इन लोगों को पकड़ा गया है।” बता दें कि तस्कर शंभू गुप्ता (RJD Leader Caught with ₹2 Cr Worth of Opium) आरजेडी मधुबन संगठन जिला के अति पिछड़ा प्रकोष्ठ का अध्यक्ष है। इसके अलावा वह दुलमा पंचायत से मुखिया भी रह चुका है। इसके अलावा वो मधुबन विधानसभा से प्रत्याशी के रूप में अपना प्रचार-प्रसार करने का भी काम किया है। इसके साथ ही वह आरजेडी के कई कार्यक्रम में हिस्सा लेता रहा है।  Latest News in Hindi Today Hindi news RJD Leader Caught with ₹2 Cr Worth of Opium #RJDLeaderArrested #ShambhuGupta #OpiumSmuggling #₹2CroreDrugs #BiharNews #DrugBust #LaluYadav #RJDScandal #PoliticalCrime #NarcoticsIndia

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Sunrisers Hyderabad vs Lucknow

Sunrisers Hyderabad defeat Lucknow Super Giants: सनराइजर्स हैदराबाद की जीत ने किया लखनऊ सुपरजायंट्स को प्लेऑफ की रेस से बाहर, भिड़े खिलाड़ी

19 मई को आईपीएल 2025 (इंडियन प्रीमियर लीग) का 61वां मुकाबला लखनऊ सुपरजायंट्स और सनराइजर्स हैदराबाद बीच खेला गया। लखनऊ के इकना  (भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी क्रिकेट स्टेडियम) स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में सनराइजर्स हैदराबाद ने लखनऊ सुपरजायंट्स को आईपीएल 2025 से बाहर कर (Sunrisers Hyderabad defeat Lucknow Super Giants) दिया है। दरअसल, इस लीग की प्लेऑफ की रेस में बने रहने के लिए लखनऊ को यह मैच जीतना बेहद जरूरी था। करो या मरों की स्थिति के बावजूद लखनऊ को हार का मुंह देखना पड़ा। बता दें कि सोमवार को लखनऊ सुपरजायंट्स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच हुए मैच में  सनराइजर्स हैदराबाद के कप्तान पैट कमिंस ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने लखनऊ ने बढ़िया शुरुआत की। लखनऊ की तरफ से मिचेल मार्श ने 65 रन, एडेन मार्करम ने 61 रन तो निकलस पूरन 45 रन बनाए। इन रनों की बदौलत लखनऊ ने 7 विकेट के नुकसान पर कुल 205 रन बनाए।  हैदराबाद ने महज 18.2 ओवर में 4 के नुकसान (Sunrisers Hyderabad defeat Lucknow Super Giants) पर निर्धारित लक्ष्य को आसानी से कर लिया पूरा  205 रन देख एक पल तो ऐसा लग रहा था कि इसे चेस करना सनराइजर्स हैदराबाद के लिए मुश्किल हो सकता (Sunrisers Hyderabad defeat Lucknow Super Giants) है, लेकिन हैदराबाद ने अपने बल्लेबाजों के बलबूते महज 18.2 ओवर में 4 के नुकसान पर निर्धारित लक्ष्य को आसानी से पूरा कर लिया। हैदराबाद की तरफ से अभिषेक शर्मा ने सबसे अधिक 59 रन बनाए। उन्होंने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए 20 गेंद में 6 चौके और 4 छक्के जड़े। उनकी पारी के ही दम पर हैदराबाद यह मैच 6 विकेट से जीतने में कामयाब रही। इसके साथ ही उन्होंने कई रिकॉर्ड अपने नाम किए। अभिषेक आईपीएल इतिहास के इकलौते ऐसे भारतीय बल्लेबाज बने हैं जिनके नाम 20 गेंदों से कम में चार अर्द्धशतक लगाने का कमाल दर्ज है। उनके अलावा हेनरिक क्लासेन ने 47, ईशान किशन ने 35 तो वहीं कामिंडु मेंडिस 32 रन बनाए।  12 मैचों में यह लखनऊ सुपरजायंट्स की (Sunrisers Hyderabad defeat Lucknow Super Giants) 7वीं हार है  गौरतलब हो कि 12 मैचों में यह लखनऊ सुपरजायंट्स की 7वीं हार (Sunrisers Hyderabad defeat Lucknow Super Giants) है। इस हार के साथ ही वो प्लेऑफ से भी बाहर हो गई है। ऐसे में यदि लखनऊ चाहकर भी अपने बाकी बचे दोनों मच जीत भी ले तो भी उसके 14 पांइट्स नहीं हो पाएंगे, क्योंकि 12 मैच से 10 अंक हैं। प्लेऑफ के लिए कम से कम 15 या इससे अधिक अंक चाहिए। रही बात सनराइजर्स हैदराबाद की तो 12 मैच में यह उसकी चौथी जीत है। वह पहले ही प्लेऑफ की रेस से बाहर हो चुकी है। बात करें क्वालीफाई करने वाली टीमों की तो, गुजरात टाइटंस (18), पंजाब किंग्स (17) और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू (17) की टीमें आईपीएल प्लेऑफ के लिए क्वालीफाई कर चुकी हैं। मुंबई इंडियंस (14) और दिल्ली कैपिटल्स (13) के दो-दो मैच बाकी हैं। इनमें से एक मैच तो इन दोनों के बीच ही होना है। ऐसे में ये तो तयशुदा है कि दोनों में से कोई एक ही टीम क्वालीफाई करेगी।  इसे भी पढ़ें:- एकतरफा मुकाबले में मुंबई इंडियंस ने सनराइजर्स हैदराबाद को करारी दी शिकस्त तेरी चोटी पकड़ के मारूंगा, भिड़े अभिषेक शर्मा और दिग्वेश राठी  खैर, इस मुकाबले में एक पल ऐसा भी आया जब दोनों खिलाडियों के बीच तू-तू, मैं-मैं  भी हुई। देखते ही देखते दोनों में तकरार इस कदर बढ़ गई कि अंपायर्स से लेकर कप्तान और खिलाड़ियों तक को बीच बचाव करना पड़ा। दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मैच खत्म होने के बाद बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला को दोनों खिलाडियों से बातचीत कर सुलह करानी पड़ी। दरअसल, लखनऊ सुपरजायंट्स के 206 रन के लक्ष्य के जवाब में अभिषेक शर्मा ने सनराइजर्स हैदराबाद को धमाकेदार शुरुआत दिलाई। 20 गेंद में 59 रन की पारी खेलने वाले अभिषेक को आठवें ओवर में लेग स्पिनर दिग्वेश राठी ने आउट किया। अभिषेक के हाथों इस मैच में लगातार चार छक्के खाने वाले दिग्वेश राठी ने जब उन्हें अगले ओवर में आउट किया तो अपने खास नोटबुक स्टाइल से विकेट सेलिब्रेट किया। दिग्वेश राठी का जश्न मानना अभिषेक शर्मा को खल गया। फिर क्या था, अभिषेक सीधे दिग्वेश राठी से बहस करने लगे। ताव में आकर उन्होंने दिग्वेश से कहा कि ‘तेरी चोटी पकड़ के मारूंगा। जिसका वीडियो भी वायरल हो रहा है। बता दें कि दिग्वेश को अपने इस सेलिब्रेशन के तरीके की वजह से बीसीसीआई द्वारा दो बार फाइन भी लगाया जा चुका है।  Latest News in Hindi Today Hindi news  Sunrisers Hyderabad defeat Lucknow Super Giants #SunrisersHyderabad #SRHvsLSG #IPL2025 #IPLPlayoffRace #HyderabadWins #LucknowOut #IPLClash #CricketNews #SRHVictory #T20Cricket

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Oral health In Women

महिलाओं में माइग्रेन और बॉडी पेन का कारण बन सकती है खराब ओरल हेल्थ: स्टडी

लोग अक्सर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की बात करते है, लेकिन ओरल हेल्थ (Oral health) को अधिकतम नजरअंदाज कर दिया जाता है। ओरल हेल्थ सबके सम्पूर्ण स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है फिर वो चाहे महिला हो या पुरुष। महिलाओं की ओरल हेल्थ (Women’s oral health) उनके पूरे जीवन में हॉर्मोनल फ्लेक्च्युएशन से काफी प्रभावित होती है, खासतौर पर यौवन, मासिक धर्म, गर्भावस्था, मेनोपॉज आदि में। इस दौरान मसूड़ों से संबंधित बीमारियों और अन्य मौखिक स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का रिस्क बढ़ जाता है। हाल ही में हुई एक स्टडी में यह पता चला है कि महिलाओं में ओरल हेल्थ बोन हेल्थ, माइग्रेन से संबंधित है। आइए जानें महिलाओं की ओरल हेल्थ और बॉडी पेन व माइग्रेन में लिंक (Link between women’s oral health and body pain and migraine) के बारे में।  महिलाओं की ओरल हेल्थ और बॉडी पेन व माइग्रेन में लिंक (Link between women’s oral health and body pain and migraine): पाएं जानकारी इलिनोइस डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक हेल्थ (Illinois Department of Public Health) ले अनुसार महिलाएं अपने पूरे जीवन हॉर्मोनल बदलावों का अनुभव करती रहती हैं। कुछ खास स्टेजेज के दौरान उन्हें खास ओरल हेल्थ (Oral health) की जरूरत होती है। इसलिए अपनी ओरल हेल्थ का खास ध्यान रखना बेहद जरूरी है। एक स्टडी यह बताती है कि खराब मौखिक स्वास्थ्य से महिलाओं को माइग्रेन और बॉडी पेन का जोखिम बढ़ सकता है। आइए जानें महिलाओं की ओरल हेल्थ और बॉडी पेन व माइग्रेन में लिंक (Link between women’s oral health and body pain and migraine) के बारे में की गयी इस स्टडी के बारे में। महिलाओं की ओरल हेल्थ और बॉडी पेन व माइग्रेन में लिंक (Link between women’s oral health and body pain and migraine): क्या कहती है स्टडी? हाल ही में की एक स्टडी में यह पाया गया है कि महिलाओं की खराब ओरल हेल्थ (Oral health) उनमें माइग्रेन और बॉडी पेन का कारण बन सकती है। इस स्टडी में खास ओरल माइक्रोब्स और कई पेन कंडीशंस के बीच में संबंध पाया गया है इस स्टडी में 67 महिलाएं शामिल थी, जिनमे से कुछ महिलाओं को फाइब्रोमायल्जिया था। फाइब्रोमायल्जिया एक ऐसी क्रोनिक कंडीशन है जिसके कारण मांसपेशियों में दर्द, थकावट और नींद में समस्या जैसी परेशानियां होती है। इस स्टडी के रिजल्ट्स में यह पाया गया कि खराब ओरल हेल्थ वाली महिलाओं में माइग्रेन और बॉडी पेन की संभावना अधिक थी।  इस स्टडी के अनुसार जिन महिलाओं की ओरल हेल्थ (Women’s oral health) सही नहीं है, उनमें चार ओरल माइक्रोबियल स्पीशीज की मात्रा अधिक होती है जो उम्र के बढ़ने के साथ दर्द से जुड़ी हुई हैं। इसलिए, शोधकर्ता नियमित रूप से अपनी ओरल हेल्थ का ध्यान रखने की सलाह देते हैं। आइए जानें ओरल हेल्थ को हेल्दी कैसे रखा जा सकता है? इसे भी पढ़ें: क्यों मनाया जाता है International No Diet Day? जानिए इसकी थीम और हिस्ट्री के बारे में ओरल हेल्थ को हेल्दी कैसे रखा जा सकता है?  अगर आप समूर्ण रूप से हेल्थ रहना चाहते हैं, तो अपनी ओरल हेल्थ (Oral health) का भी ध्यान रखें। ओरल हेल्थ (Oral health) को हेल्दी बनाये रखने के कुछ तरीके इस प्रकार हैं: नोट:– यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi Mango and Milk Oral health #Oralhealth #women’soralhealth #bodypain #migraine #Linkbetweenwomen’soralhealthandbodypainandmigraine

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Operation Sindoor controversy

Operation Sindoor Ad on Tickets: रेल्वे टिकट पर ऑपरेशन सिंदूर का प्रचार होने पर भड़की कांग्रेस, पीएम मोदी को लेकर कही यह बात

22 अप्रैल को जम्मूकश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला भारत सरकार ने 6-7 मई की दरम्यानी रात ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) चलाकर लिया था। इसके तहत भारतीय सेना ने 9 आतंकी ठिकानों सहित पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम और एयर बेस को बर्बाद कर दिया था। इस कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकी और 40 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे। भारतीय सेना के पराक्रम के आगे 3 दिन के भीतर ही पाकिस्तान घुटनों पर आ गया और सीजफायर की दुहाई देने लगा। जिसके बाद दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच हुई बातचीत के बाद सीजफायर का ऐलान कर दिया गया। हालाँकि देश केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कई मंचों से पाकिस्तान से दो टूक कह दिया था कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है। अभी भी जारी है। अभी सिर्फ ट्रेलर दिखाया गया है। अभी तो पिक्चर बाकी है। इस बीच सभी राजनीतिक दलों ने एक स्वर में ऑपरेशन सिंदूर का श्रेय बीजेपी सरकार को न देते हुए सेना को दिया (Operation Sindoor Ad on Tickets) था। इसके साथ सभी दलों ने यह आशंका जताई थी कि बीजेपी आज नहीं तो कल ऑपरेशन सिंदूर का क्रेडिट लेगी ही।  मध्य प्रदेश में ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor Ad on Tickets) को लेकर शुरु हो गई है राजनीति  खैर, इस बीच मध्य प्रदेश में ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor Ad on Tickets) को लेकर राजनीति शुरु हो गई है। बता दें कि ये राजनीति भारतीय रेलवे के रिजर्वेशन टिकट पर छपे ऑपरेशन सिंदूर का संदेश देती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फोटो से शुरु हुई (Operation Sindoor Ad on Tickets) है। दरअसल, रेलवे रिजर्वेशन टिकट लिखा है कि “ऑपरेशन सिंदूर ने आतंक के खिलाफ लड़ाई में एक नई लकीर खींच दी है। एक नया पैमाना, न्यू नॉर्मल तय कर दिया है। वहीं, टिकट के निचले हिस्से में बारीक से अक्षरों में लिखा है कि “पीएम मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन 12 मई 2025।” इस फोटो पर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताते हुए केंद्र सरकार को आपदा में अवसर बनाने वाला बताया है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक भारतीय रेलवे के टिकट पर ऑपरेशन सिंदूर का संदेश और उसपर प्राधनमंत्री की तस्वीर को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने एक्स पर पोस्ट करते हुए केंद्र की भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा।  अपनी राजनीति चमकाने के लिए ऑपरेशन सिंदूर को एक प्रोडक्ट के रूप में बेचा (Operation Sindoor Ad on Tickets) जा रहा है "सेना के पराक्रम को भी अपनी राजनीति चमकाने के लिए एक प्रोडक्ट की तरह बेचा जा रहा है" केंद्र सरकार कितनी विज्ञापनजीवी हो चुकी है, इसका ताज़ा उदाहरण देखिए — रेलवे टिकट पर "ऑपरेशन सिंदूर" का इस्तेमाल प्रधानमंत्री के प्रचार के तौर पर किया जा रहा है। अब तक तो सिर्फ मध्यप्रदेश के… pic.twitter.com/6oMP9IJ912 — Umang Singhar (@UmangSinghar) May 19, 2025 बीजेपी को आडे हाथों लेते हुए उन्होंने लिखा कि “सेना के पराक्रम को अपनी राजनीति चमकाने के लिए एक प्रोडक्ट के रूप में बेचा (Operation Sindoor Ad on Tickets) जा रहा है। केंद्र सरकार कितनी विज्ञापनजीवी हो चुकी है, इसका ताज़ा उदाहरण देखिए रेलवे टिकट पर। ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) का इस्तेमाल प्रधानमंत्री के प्रचार के तौर पर किया जा रहा है। अब तक तो सिर्फ मध्य प्रदेश के भाजपा नेता ही सेना का अपमान कर रहे थे, अब तो खुद प्रधानमंत्री भी उसी कतार में शामिल हो गए हैं..सोचिए।” दरअसल, कांग्रेस की आपत्ति इस बात को लेकर भी है कि केंद्र की मोदी सरकार हर मुद्दे पर राजनीतिक लाभ लेने से बाज नहीं आती। कांग्रेस के मुताबिक वो चाहे रेल के टिकट पर ऑपरेशन सिंदूर में शामिल जवानों की तस्वीरें हटाकर अपना चेहरा चमकाना हो या फिर कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट से वैज्ञानिकों की मेहनत गायब कर, अपना चेहरा छपवाना हो या पुलवामा में शहीद हुए जवानों के नाम पर वोट मांगना हो या चाहे बालाकोट एयर स्ट्राइक को चुनावी मुद्दा बनाना हो। बीजेपी हर मुद्दे को भुनाना अच्छे से जानती है। कांग्रेस का कहना है कि “वाकई, आपदा को अवसर में बदलने की कला अगर किसी को सीखनी है, तो भाजपा से सीखे!” इसे भी पढ़ें:- कांग्रेस विधायक ने ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल उठाते हुए कही यह बात पूर्व केंद्रीय मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण और उदित राज ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम को धार्मिक प्रतीकात्मकता से जोड़ते हुए जताई थी आपत्ति  'ऑपरेशन सिंदूर' के प्रचार-प्रसार को लेकर कांग्रेस को आपत्ति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि पार्टी ने इस सैन्य अभियान का समर्थन किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सांसद राहुल गांधी ने भारतीय सेना की कार्रवाई की सराहना की है। कांग्रेस कार्य समिति ने भी एकमत से इस ऑपरेशन का… — Dr.Hitesh Bajpai MBBS, MD (@drhiteshbajpai) May 19, 2025 इस दरम्यान मध्य प्रदेश नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की आपत्ति पर भाजपा ने भी तगड़ा पलटवार किया है। बीजेपी प्रवक्ता डॉ. हितेष बाजपेयी ने कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के प्रचार-प्रसार (Operation Sindoor Ad on Tickets) को लेकर कांग्रेस को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। क्योंकि, पार्टी ने इस सैन्य अभियान का समर्थन किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सांसद राहुल गांधी ने भारतीय सेना की कार्रवाई की सराहना की है। कांग्रेस कार्य समिति ने भी एकमत होकर ऑपरेशन का समर्थन किया है। हालांकि, कुछ कांग्रेस नेताओं ने अभियान के नाम को लेकर सवाल उठाए हैं।” यही नहीं, डॉ. वाजपेयी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स एक पोस्ट लिखकर कहा कि “पूर्व केंद्रीय मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण और उदित राज ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम को धार्मिक प्रतीकात्मकता से जोड़ते हुए आपत्ति जताई है। इसके बावजूद, कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने ऑपरेशन सिंदूर का समर्थन किया है, जिससे स्पष्ट है कि पार्टी राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार और सेना के साथ खड़ी है, ऐसा वो कहती है। इसके बावजूद भी अगर कांग्रेस नेता ऑपरेशन सिंदूर के प्रचार-प्रसार और गौरव से ईर्ष्या करते हैं तो उन्हें स्पष्ट करना होगा कि, उनके नेताओं के मन में क्या अभी भी पकिस्तान के प्रति प्यार जीवित है?” Latest News in Hindi Today Hindi news Operation Sindoor Ad on Tickets #OperationSindoor #RailwayTicketAd #CongressVsBJP #PMModiNews #PoliticalControversy #IndianRailways #BharatPolitics #LokSabha2025 #ElectionAds #PublicReaction

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BJP slams Congress

BJP slams Congress over delegation: झूठ बोल रही है कांग्रेस, नहीं माँगा था कोई नाम, इसलिए युसूफ पठान कर गए प्रतिनिधिमंडल से किनारा

आतंकवाद के खिलाफ जीरो टोलेरेंस की नीति, पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारत के पक्ष को दुनिया के अन्य देशों के समक्ष रखने हेतु केंद्र सरकार द्वारा सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का एलान किया गया है। सरकार सात प्रतिनिधिमंडलों को अलग-अलग देशों के दौरे पर भेजेगी, जिसके हर प्रतिनिधिमंडल में छह से सात सांसद होंगे। बता दें कि आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को दुनिया के समक्ष बेनकाब करने के लिए अलग-अलग देशों में जा रहे सांसदों के सात प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस (Congress) के कुल चार सांसद शामिल (BJP slams Congress over delegation) हैं। महत्वपूर्ण बात यह कि सांसद शशि थरूर इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। इस बीच कांग्रेस इस बात को लेकर उखड़ी हुई है कि सरकार ने उनकी पार्टी के सदस्यों का चुनाव कैसे किया? दरअसल, केंद्र सरकार को घेरते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि सरकार ने पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर बात करने हेतु विदेश जाने वाले सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों के लिए उनसे चार सांसदों के नाम मांगे थे, लेकिन बाद में सरकार ने उनमें से तीन नाम को रिजेक्ट कर दिया।  कांग्रेस के आरोपों को ख़ारिज करते हुए बीजेपी ने बताया निराधार (BJP slams Congress over delegation) हालाँकि केंद्र की बीजेपी (BJP) सरकार ने कांग्रेस के आरोपों को ख़ारिज करते हुए निराधार करार (BJP slams Congress over delegation) दिया। इस पूरे मुद्दे पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि “लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को प्रतिनिधिमंडलों के बारे में सिर्फ जानकारी दी गई थी। यह सिर्फ एक शिष्टाचार था।” उन्होंने आगे कहा कि “कांग्रेस से सिर्फ जानकारी के लिए नाम मांगे थे। थरूर को उनकी काबिलियत के आधार पर चुना गया।” दरअसल, द टाइम्स ऑफ़ इंडिया से हुई बातचीत में रिजिजू ने कहा कि “पार्टियों से उनके उम्मीदवार का नाम पूछना पहले कभी नहीं हुआ।” उन्होंने कहा कि “हमने उन्हें सिर्फ शिष्टाचार के तौर पर बताया। हमने कांग्रेस की अंदरूनी बातों पर ध्यान नहीं दिया।” कांग्रेस के आरोपों पर रिजिजू ने कहा कि “सरकार ने यह देखा कि प्रतिनिधिमंडल के काम के लिए कौन सबसे सही रहेगा।” उन्होंने आगे कहा कि “हमें हैरानी है कि शशि थरूर और मनीष तिवारी जैसे सदस्यों के नाम पर कांग्रेस विरोध कर रही है। ये दोनों विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर हमेशा अपनी बात रखते हैं। अभी एक साल भी नहीं हुआ है जब कांग्रेस ने थरूर को विदेश मामलों की स्थायी समिति का अध्यक्ष बनाने की सिफारिश की थी।”  इसे भी पढ़ें:- कांग्रेस विधायक ने ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल उठाते हुए कही यह बात थरूर और मनीष तिवारी को इसलिए चुना गया ताकि पार्टी नेतृत्व को नीचा दिखाया (BJP slams Congress over delegation) जा सके तो वहीं इस पर कांग्रेस का कहना है कि “थरूर और मनीष तिवारी को इसलिए चुना गया ताकि पार्टी नेतृत्व को नीचा दिखाया जा सके।” इस पर रिजिजू ने कहा, “यह गलत आरोप है। हमने किसी पार्टी की अंदरूनी बातों और उससे होने वाली जलन और असुरक्षा को ध्यान में नहीं (BJP slams Congress over delegation) रखा। हमने सलमान खुर्शीद और पंजाब से उनके सांसद अमर सिंह को भी चुना है। इस बारे में आपका क्या कहना है?” गौरतलब हो कि कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने सरकार की घोर आलोचना करते हुए कहा था कि “सरकार ने राहुल गांधी की सिफारिशों को दरकिनार कर थरूर और मनीष तिवारी के नामों को चुना।” सरकार को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि “यह मोदी सरकार की पूरी तरह से बेईमानी दिखाता है। यह दिखाता है कि वह राष्ट्रीय मुद्दों पर हमेशा घटिया राजनीति करते हैं।” दरअसल, कांग्रेस का मानना है कि थरूर को इसलिए नहीं चुना गया क्योंकि पहले संयुक्त राष्ट्र में थे और विदेश राज्य मंत्री भी रह चुके हैं, बल्कि उन्हें इसलिए चुना गया क्योंकि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर पर पार्टी से अलग राय रखी थी। दरअसल, पिछले सप्ताह उन्होंने कहा था कि “उन्हें ऑपरेशन पर गर्व है।” गौर करने वाली बात यह कि उन्होंने यह बात तब कही थी जब कांग्रेस ने यह आरोप लगाने के फ़िराक में थी कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के साथ युद्धविराम कराया था।  पूर्व क्रिकेटर और सांसद यूसुफ पठान प्रतिनिधिमंडल में नहीं होंगे शामिल  कांग्रेस पार्टी से अलग-थलग राय रखने के सवाल पर थरूर ने कहा कि “वह एक गर्वित भारतीय के तौर पर बोल रहे हैं।” बता दें कि कांग्रेस पार्टी ने आनंद शर्मा, राजा वारिंग, गौरव गोगोई और सैयद नसीर हुसैन के नामों की लिस्ट से थरूर का नाम हटा दिया (BJP slams Congress over delegation) था। सरकार ने सिर्फ शर्मा को चुना, जो पहले वाणिज्य मंत्री थे। खैर, इस बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने केंद्र सरकार के आतंकवाद विरोधी प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने से इनकार करते हुए कहा है कि “पूर्व क्रिकेटर और सांसद यूसुफ पठान प्रतिनिधिमंडल में नहीं शामिल होंगे।” जानकारी के मुताबिक सांसद यूसुफ पठान का नाम सूची में शामिल था। इस मामले पर टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि “टीएमसी पहले और अभी भी केंद्र सरकार के साथ खड़ी हैं। जहाँ देश की बात होती हैं वहां राजनीति नहीं होनी चाहिए। इसे ऐसे नहीं देखना चाहिए कि हमने डेलीगेशन में जाने से मना किया हैं। लेकिन यह साफ कर देना चाहते हैं कि हमारे पार्टी से कौन जाएगा, ये हम तय करेंगे, न कि बीजेपी सरकार।” बता दें कि सरकार ने टीएमसी सांसद सुदीप बंदोपाध्याय को सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने का निमंत्रण दिया था, लेकिन टीएमसी सांसद ने इसमें शामिल होने से साफ़ इनकार कर दिया था। Latest News in Hindi Today Hindi news BJP slams Congress over delegation #BJPCongressClash #YusufPathan #PoliticalNews #IndianPolitics #CongressControversy #BJPNews #DelegationDispute #BreakingNews #BJPvsCongress #PathanExit

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