नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026: नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर के जरिए मेडिकल रिकॉर्ड प्रमाणित करने वाले डॉक्टरों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। इसके तहत किसी मेडिकल रिपोर्ट, डिस्चार्ज समरी, पैथोलॉजी रिजल्ट या अन्य क्लिनिकल दस्तावेज को डिजिटल रूप से प्रमाणित करने से पहले डॉक्टरों को सभी संबंधित क्लिनिकल जानकारियों, जांच रिपोर्टों और मेडिकल रिकॉर्ड की समीक्षा करनी होगी। इस कदम का उद्देश्य मरीजों की सुरक्षा और डॉक्टरों की पेशेवर जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
केवल डिजिटल हस्ताक्षर करना पर्याप्त नहीं
NMC ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल हस्ताक्षर मेडिकल रिकॉर्ड के प्रमाणीकरण का माध्यम है, लेकिन इससे डॉक्टर की पेशेवर, नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी कम नहीं होती। किसी दस्तावेज को प्रमाणित करने से पहले डॉक्टर को उपलब्ध जानकारी का आकलन करना और अपने स्वतंत्र चिकित्सकीय विवेक का इस्तेमाल करना होगा।
अधूरी जानकारी होने पर रिकॉर्ड प्रमाणित करने से बचना होगा
एडवाइजरी के मुताबिक, यदि उपलब्ध क्लिनिकल जानकारी किसी पेशेवर चिकित्सकीय राय तक पहुंचने के लिए पर्याप्त नहीं है, तो डॉक्टर को रिकॉर्ड प्रमाणित नहीं करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त दस्तावेज, जांच या सत्यापन कराया जाना चाहिए। पर्याप्त जानकारी मिलने के बाद ही प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए।
डिजिटल हस्ताक्षर और लॉगिन क्रेडेंशियल डॉक्टर के नियंत्रण में रहेंगे
NMC ने डिजिटल हस्ताक्षर, इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर, एक्सेस टोकन और अन्य प्रमाणीकरण संबंधी क्रेडेंशियल की सुरक्षा पर भी जोर दिया है। ये केवल संबंधित डॉक्टर के नियंत्रण में रहने चाहिए। इन्हें किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा करना, सौंपना या हस्तांतरित करना स्वीकार्य नहीं होगा।
केवल संबंधित स्वास्थ्य संस्थान के रिकॉर्ड प्रमाणित कर सकेंगे डॉक्टर
एडवाइजरी के अनुसार, पंजीकृत चिकित्सक दूरस्थ रूप से उन्हीं स्वास्थ्य संस्थानों में तैयार मेडिकल रिकॉर्ड प्रमाणित कर सकेंगे, जिनसे वे नियुक्ति, पैनल में शामिल होने, अनुबंध या अन्य पेशेवर संबंध के जरिए जुड़े हुए हैं। इस प्रावधान का उद्देश्य प्रमाणीकरण की जिम्मेदारी और डॉक्टर के संबंधित संस्थान से जुड़ाव को स्पष्ट करना है।
अस्पतालों को सुरक्षा व्यवस्था और ऑडिट ट्रेल बनाए रखना होगा
स्वास्थ्य संस्थानों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रमाणित मेडिकल रिकॉर्ड के लिए उचित सुरक्षा उपाय, ऑडिट ट्रेल, प्रमाणीकरण लॉग, तारीख और समय की जानकारी तथा मरीजों की निजता की सुरक्षा से जुड़े प्रावधान बनाए रखने होंगे। इससे रिकॉर्ड में किए गए बदलावों और प्रमाणीकरण की प्रक्रिया का पता लगाया जा सकेगा तथा दस्तावेजों की विश्वसनीयता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
डिजिटल हेल्थकेयर के विस्तार के बीच आया फैसला
टेलीमेडिसिन और डिजिटल हेल्थकेयर सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ मेडिकल रिकॉर्ड को दूरस्थ रूप से प्रमाणित करने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण हो गई है। NMC की नई एडवाइजरी का उद्देश्य इस प्रक्रिया में एकरूपता लाना, मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और डॉक्टरों की पेशेवर जवाबदेही स्पष्ट करना है।
स्रोत: नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC), द इंडियन एक्सप्रेस, मेडिकल डायलॉग्स
जय राष्ट्र न्यूज़

