History of idli

Idli Origin Story: दक्षिण भारत से नहीं बल्कि इस देश जुड़ा है आपकी फेवरेट डिश ‘इडली’ का इतिहास

इडली को न सिर्फ दक्षिण भारत बल्कि समूचा भारत बड़े चाव से खाता है। यह फ़ूड इतना टेस्टी है कि गरमा-गरम इडली सांभर और नारियल की चटनी का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है। दक्षिण भारत में तो यह वहां का पारंपरिक फ़ूड है। सुबह का नास्ता इससे बेहतर क्या ही हो सकता है। खाते तो हम सभी हैं इसे, लेकिन क्या अपने कभी सोचा है कि इडली कहाँ का व्यंजन है? अगर आपको ऐसा लगता है कि इसका संबंध दक्षिण भारत से है तो आप गलत (Idli Origin Story) हैं। जी, हाँ आपने सही पढ़ा। इडली दक्षिण भारत का व्यंजन नहीं है। हम सभी को यही लगता था कि इडली साउथ की देन है। लेकिन सच्चाई तो यह है कि आपकी पसंदीदा, नरम-मुलायम इडली दक्षिण भारत से है ही नहीं। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि इडली यदि दक्षिण भारत की नहीं तो फिर कहाँ की है? इस पर इतिहासकारों का मानना है कि इडली की शुरुआत इंडोनेशिया में हुई थी।  इंडोनेशिया में केडली नामका एक डिश बड़ी मशहूर (Idli Origin Story) थी दरअसल, ऐसा माना जाता है कि 800 से 1200 ईस्वी के दौरान, इंडोनेशिया में केडली नामका एक डिश बड़ी मशहूर (Idli Origin Story) थी। जो काफी हद तक इडली की ही तरह थी। उस दौर में इंडोनेशिया में चावल और फर्मेंटेशन के प्रोसेस का इस्तेमाल खाने में काफी होता था। कुछका तो यह भी मानना है कि इडली अरब देशों से आई है। और दौर में अरब व्यापारी भारत आया-जाया करते थे। और वो वहां से अपने साथ खमीर उठाने की विधि लाए थे, जो कालांतर में चलकर इडली के रूप में परिवर्तित हुई। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि जब इडली इंडोनेशिया में मश्हूर थी तो भारत कैसे पहुंची? और भारत में पहुंची भी तो दक्षिण भारत में ही क्यों और कैसे मशहूर हुई? इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक इडली का जिक्र 920 ईस्वी में कन्नड़ साहित्य में (Idli Origin Story) मिलता है इतिहासकारों का मानना है कि इंडोनेशिया से जो लोग भारत आए, वे अपने साथ इस डिश को बनाने की विधि भी लेकर आये। भारत आकर इसमें थोड़े बहुत बदलाव किये और इसे स्थानीय मसालों और तरीकों के जरिये बनाना शुरू किया। आपको जानकर बड़ी हैरानी होगी कि सबसे पहले इडली का जिक्र 920 ईस्वी में कन्नड़ साहित्य (Idli Origin Story) में मिलता है। वहां इसे इड्डलिगे कहकर संबोधित किया गया था। ध्यान देने वाली बात यह कि उस दौरान उड़द दाल को छाछ में भिगोकर और कुछ मसालों के साथ बनाया जाता था। उस समय इसमें खमीर नहीं उठाया जाता था और न ही चावल का ही इस्तेमाल होता था। इस बीच समय बीतता गया और 17वीं शताब्दी तक इडली ने अपने आपको पूरी तरह बदल लिया। आज के दौर में इसमें चावल को शामिल किया गया और खमीर उठाने की प्रक्रिया भी जोड़ी गई। इसके चलते इडली और भी मुलायम और स्वादिष्ट बन गई। दक्षिण भारत की गर्म और नम जलवायु खमीर उठाने के लिए एकदम सही थी। कारण यही जो यह यहां बड़ी तेजी से मशहुर हुई। Latest News in Hindi Today Hindi  Idli Origin Story #IdliOrigin #SouthIndianFood #IndianCuisine #FoodHistory #SurprisingFacts #Idli #BreakfastLove

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retirement planning in India

Private Sector Lacks Retirement Planning: इसलिए प्राइवेट सेक्टर के आधे से अधिक कर्मचारियों के पास नहीं है रिटायरमेंट की कोई प्लानिंग

भारत में निजी यानी प्राइवेट सेक्टर (Private Sector) में काम करने वालों की तादाद करोड़ों में है। ऐसे में एक बात तो तय है कि प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों को पेंशन की सुविधा तो नहीं ही मिलने वाली। प्राइवेट सेक्टर में तनख्वाह तो मोटी मिलती है लेकिन लोग अपने भविष्य हेतु बचत पर अधिक ध्यान नहीं देते, जो कि चिंता का सबब है। दरअसल, ग्रांट थॉर्नटन भारत की एक सर्वे में आई रिपोर्ट के मुताबिक भारत में प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लगभग आधे से अधिक वेतनभोगी कर्मचारी अपनी रिटायरमेंट के लिए बहुत ही कम बचत कर (Private Sector Lacks Retirement Planning) रहे हैं। बाकी बचे आधे सिर्फ अपनी तनख्वाह का 1% से 10% हिस्सा ही पेंशन फंड में निवेश कर रहे हैं। कहने की जरूरत नहीं, यह रुझान बताता है कि लोगों में बचत को लेकर सतर्कता तो है, लेकिन या तो उनकी आय सीमित है या फिर उनकी प्राथमिकताएं अलग हैं, जिससे रिटायरमेंट प्लानिंग को अधिक महत्व नहीं दिया जा रहा है। हालांकि अधिक आमदनी वाले लोग रिटायरमेंट से जुड़ी योजनाओं में थोड़ा अधिक योगदान करते हैं। लेकिन कुल मिलाकर ज़्यादातर लोगों की बचत अपेक्षाकृत बहुत ही कम है। यह दर्शाता है कि अधिकतर भारतीय अपने रिटायरमेंट के लिए पर्याप्त धन नहीं जुटा पा रहे हैं।  सिर्फ 11 प्रतिशत ऐसे हैं जिन्हें लगता है उनकी मौजूदा बचत इतनी पेंशन के लिए पर्याप्त है रिपोर्ट के मुताबिक, तकरीबन 55 प्रतिशत प्रतिभागी रिटायरमेंट के बाद हर महीने ₹1 लाख से ज्यादा पेंशन की उम्मीद रखते हैं। सिर्फ 11 प्रतिशत ऐसे हैं जिन्हें लगता है उनकी मौजूदा बचत इतनी पेंशन के लिए पर्याप्त है। यह अंतर इस बात की ओर साफ़ इशारा करता है कि भारत में रिटायरमेंट की योजना और उसकी तैयारी के बीच बहुत बड़ा गैप है और इसे जिसे बेहतर योजना के ज़रिए भरने की ज़रूरत (Private Sector Lacks Retirement Planning) है। गौरतलब हो कि मोटा-मोटी 83% कर्मचारी अपनी रिटायरमेंट जरूरतों के लिए ईपीएफ, ग्रैच्युटी और एनपीएस जैसे पारंपरिक स्कीम्स पर ही निर्भर हैं। इससे यह भी स्पष्ट होता है लोगों का झुकाव नए विकल्पों की ओर जरा भी नहीं है। इसका सबसे बड़ा कारण है आर्थिक जागरूकता की कमी हो सकती है।  इसे भी पढ़ें:- विदेश से सोना-चांदी लाना अब नहीं रहा आसान: क्या है सरकार के नए नियम? अधिकतर युवाओं को लगता है कि अभी वक़्त रिटायरमेंट की चिंता करने का (Private Sector Lacks Retirement Planning) नहीं है दरअसल, बहुत से ऐसे लोग हैं जो यह मानते हैं कि पीएफ (प्रोविडेंट फंड) या कंपनी की ओर से मिलने वाला ग्रैच्युटी फंड ही काफी (Private Sector Lacks Retirement Planning) होगा, जबकि वास्तविकता में स्वास्थ्य खर्च, बढ़ती महंगाई और लंबी उम्र के चलते ये रकम अक्सर काफी नहीं ही होती। कुछ लोग निवेश की प्रक्रिया को बड़ा जटिल मानते हैं। कुछ तो ऐसे भी हैं जिन्हें अपनी मौजूदा सैलरी से बचत निकालना ही पहाड़ लगता है। इस मामले में युवा जरा भी चिंतित नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि अधिकतर युवाओं को लगता है कि अभी वक़्त रिटायरमेंट की चिंता करने का नहीं है। यह एक खतरनाक भ्रम है। फाइनेंसियल एक्सपर्टों का कहना है कि रिटायरमेंट की योजना जितनी जल्दी शुरू की जाए, उतना बेहतर होता है। 25-30 की उम्र में अगर सही दिशा में निवेश शुरू किया जाए तो 60 की उम्र तक अच्छा फंड तैयार किया जा सकता है। अच्छे फंड के लिए नेशनल पेंशन स्कीम, म्यूचुअल फंड एसआईपी और पब्लिक प्रोविडेंट फंड जैसे विकल्प प्रभावशाली हो सकते हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news  Private Sector Lacks Retirement Planning #RetirementPlanning #PrivateSectorIndia #FinancialFreedom #EmployeeBenefits #FutureSecurity

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Benefits of Sarvangasana

सर्वांगासन के बेनेफिट्स: थायरॉइड और स्ट्रेस को कहें अलविदा इस सरल और प्रभावी आसन के साथ

हेल्दी रहने के लिए सही आहार का सेवन करना और एक्सरसाइज करना बेहद जरूरी है। आजकल लोग योगा को भी प्राथमिकता दे रहे हैं, क्योंकि यह स्वस्थ रहने का आसान और प्रभावी तरीका है। ऐसे कई योगासन (Yogasana) हैं, जिन्हें करना शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहतरीन माना गया है। ऐसा ही एक आसन है सर्वांगासन (Sarvangasana)। ऐसा माना गया है कि यह आसन (Aasan) थायरॉइड को कंट्रोल करने के साथ ही स्ट्रेस को भी कम करता है। इस आसन को “शोल्डर स्टैंड” के नाम से भी जाना जाता है। यही नहीं, अपने फायदों की वजह से इस योगासन (Yogasana) को “आसनों की रानी” भी कहा जाता है। आइए जानें क्या हैं सर्वांगासन के बेनेफिट्स (Benefits of Sarvangasana) और कैसे किया जा सकता है इसे? सर्वांगासन के बेनेफिट्स (Benefits of Sarvangasana): पाएं जानकारी आर्ट ऑफ लिविंग (Art of Living) के अनुसार यह एक ऐसा आसन है जिसमें पूरे शरीर को कंधे पर बैलेंस किया जाता है। इस शब्द में सर्व का अर्थ है सभी अंग और आसन यानी पोस्चर। सर्वांगासन के बेनेफिट्स (Benefits of Sarvangasana) इस प्रकार हैं:  कैसे करें सर्वांगासन (Sarvangasana) योगा के इस लाभदायक आसन (Aasan) को इस प्रकार किया जा सकता है: नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। #Sarvangasana #BenefitsofSarvangasana #Yogasana #Aasan

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Jyeshtha Purnima

ज्येष्ठ पूर्णिमा 2025: जानिए तिथि, व्रत विधि और धार्मिक महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि को ज्येष्ठ पूर्णिमा (Jyeshtha Purnima) के रूप में मनाया जाता है। यह दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसमें व्रत, पूजन, दान और स्नान का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष, ज्येष्ठ पूर्णिमा 11 जून 2025, बुधवार को मनाई जाएगी।  ज्येष्ठ पूर्णिमा 2025: तिथि और समय इस बार ज्येष्ठ पूर्णिमा (Jyeshtha Purnima) का पावन पर्व 11 जून 2025, दिन बुधवार को मनाया जाएगा। पंचांग के मुताबिक, पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 10 जून को सुबह 11:35 बजे होगी और इसका समापन 11 जून को दोपहर 1:13 बजे होगा। ऐसे में व्रत और पूजन कार्य 11 जून को करना श्रेष्ठ रहेगा।  ज्येष्ठ पूर्णिमा का धार्मिक महत्व ऐसा माना जाता है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा (Jyeshtha Purnima) के दिन व्रत रखकर चंद्रमा की आराधना करने से चंद्र दोष शांत होता है। जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा अशुभ स्थिति में होता है या चंद्र की दशा चल रही होती है, उनके लिए इस दिन की गई पूजा विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की भक्ति करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। इसके अलावा, इस दिन गंगा स्नान का भी विशेष महत्व होता है, जो न केवल पापों से मुक्ति दिलाता है, बल्कि व्यक्ति के भीतर आध्यात्मिक ऊर्जा को भी जाग्रत करता है। पूजन विधि और व्रत के नियम ज्येष्ठ पूर्णिमा (Jyeshtha Purnima) के दिन श्रद्धालु सूर्योदय से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और भगवान विष्णु का ध्यान कर व्रत का संकल्प लेते हैं। पूजा में फूल, धूप, दीप, नैवेद्य और तुलसी पत्र अर्पित कर भगवान विष्णु (Lord Vishnu) व माता लक्ष्मी (Mata Laxmi)  की आराधना की जाती है। इस दिन परिवार सहित सत्यानारायण कथा का पाठ भी किया जाता है। रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देकर चंद्र दोष शांति की प्रार्थना की जाती है। यह व्रत आत्मशुद्धि और मानसिक शांति का माध्यम माना जाता है। यदि पूर्णिमा तिथि चतुर्दशी से प्रारंभ हो, तो उपवास एक दिन पहले से भी रखा जा सकता है। साथ ही, इस दिन जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या धन दान करना विशेष पुण्यकारी होता है, जो समाज में सहयोग और करुणा की भावना को भी बढ़ाता है। विशेष भोग  ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर भगवान विष्णु (Lord Vishnu) और माता लक्ष्मी (Mata Laxmi) को विशेष भोग अर्पित करने की परंपरा है। इस दिन खीर का भोग चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा फल, मिठाई और पंचामृत भी भगवान को अर्पित किए जा सकते हैं। ध्यान रहे कि भोग में तुलसी के पत्तों का समावेश अवश्य हो, क्योंकि भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है। कुछ स्थानों पर इस दिन वट सावित्री व्रत भी मनाया जाता है, जिसमें महिलाएं वट वृक्ष (बरगद के पेड़) की पूजा करती हैं और सावित्री-सत्यवान की कथा का श्रवण करती हैं। इस अवसर पर भी विशेष भोग तैयार किए जाते हैं, जिनमें फल और मिठाई का विशेष स्थान होता है। इसे भी पढ़ें:- महाभारत के युद्ध में गूंजे थे दिव्य अस्त्रों के नाम, जानिए उनकी अद्भुत शक्तियां  दान और पुण्य ज्येष्ठ पूर्णिमा (Jyeshtha Purnima) के दिन दान का विशेष महत्व होता है। इस दिन जल से भरे घड़े, छाता, वस्त्र, चप्पल, पंखा, शक्कर, अनाज आदि का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। यह दान ब्राह्मणों, जरूरतमंदों और गरीबों को करना चाहिए। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news Jyeshtha Purnima #JyeshthaPurnima2025 #PurnimaVrat #HinduFestival #VratVidhi #PurnimaKatha #FullMoonRituals #HinduReligion #ReligiousSignificance

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Things to keep in mind while choosing a school for your child

बच्चे के भविष्य की नींव रखें मजबूत: उनके लिए सही स्कूल चुनते हुए इन 5 बातों का रखें ध्यान

अपने बच्चे की हर पहली खास चीज माता-पिता के लिए महत्वपूर्ण होती है जैसे उनका पहला दांत निकलना, पहली बार चलना या उनका पहली बार स्कूल (School) जाना। बच्चों का पहला स्कूल चुनना बहुत ही जरूरी निर्णय है। क्योंकि, यह वही जगह है जहां से बच्चे का शैक्षिक और व्यक्तिगत विकास होता है। इस निर्णय से बच्चे का भविष्य प्रभावित होता है। सिर्फ स्कूल (School) की बिल्डिंग को देखकर आप स्कूल के अच्छे या बुरे होने का अंदाजा नहीं लगा सकते हैं। बल्कि, इसके लिए कई अन्य चीजों का भी ध्यान रखना आवश्यक है। आइए जानिए अपने बच्चे के लिए स्कूल चुनते हुए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए (Things to keep in mind while choosing a school for your child)?  अपने बच्चे के लिए स्कूल चुनते हुए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए (Things to keep in mind while choosing a school for your child)? अगर आपका बच्चा स्कूल (School) जाने लायक हो गया है, तो आप अभी से तैयार हो जाएं और अपने एरिया के स्कूल के बारे में जानकारी लेना शुरू कर दें और बच्चे के लिए सही स्कूल (Right school for child) चुनते हुए कुछ खास बातों का ध्यान रखें।  सही लोकेशन अगर आप अपने बच्चे के लिए सही स्कूल (Right school for child) ढूंढ रहे हैं, तो सबसे जरूरी है स्कूल की सही लोकेशन। ध्यान रहे स्कूल अपने घर से अधिक दूर न हो। क्योंकि, आपका बच्चा स्कूल (School) के लिए अधिक सफर नहीं कर पायेगा और उसका अधिकतर समय स्कूल आने-जानें में निकल जाएगा। इससे वो बहुत जल्दी थक भी जाएगा। इसलिए, अपने बच्चे के लिए स्कूल चुनते हुए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए (Things to keep in mind while choosing a school for your child) में यह बहुत जरूरी है कि यह स्कूल घर के आसपास ही हो। शिक्षक विशेषज्ञता बच्चे के लिए सही स्कूल (Right school for child) को चुनते हुए यह भी ध्यान रखना चाहिए कि टीचर पूरी तरह से अपने कार्य में निपुण हों। क्योंकि शिक्षक बच्चे के ऐकडेमिक के साथ-साथ सोशल व इमोशनल डेवलपमेंट में भी मदद करते हैं। एक अच्छा टीचर वो है, जो बच्चों को सही और मजेदार तरीके से पढ़िए। इसलिए, ध्यान रखें कि टीचर एकेडेमिक रूप से योग्य हो और बच्चों के साथ भी उनका व्यवहार अच्छा हो। इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा ध्यान रहे कि आपके बच्चे के स्कूल (School) में वेंटिलेशन और लाइट पर्याप्त हो। इसके साथ ही वहां अच्छी कंप्यूटर लैब, पुस्तकालय, आधुनिक प्रयोगशालाएं, खेल का मैदान आदि हों। इससे बच्चे को हर गतिविधि में भाग लेने की प्रेरणा मिलेगी। यही नहीं बच्चों की सुरक्षा का भी इसमें सही इंतजाम होना चाहिए जैसे सीसीटीवी (CCTV) सर्विलांस, सुरक्षा गार्ड, आग बुझाने के उपकरण आदि। एक्स्ट्रा-करीकुलर एक्टिविटीज  बच्चों के पूरे विकास के लिए एक्स्ट्रा-करीकुलर एक्टिविटीज बहुत जरूरी हैं। म्यूजिक, डांस, प्ले, गेम्स आदि एक्टिविटीज बच्चों की इंटेलिजेंस और क्रिएटिविटी को बढ़ावा देती हैं। इसलिए ऐसे स्कूल (School) को चुनना चाहिए जिनमें इन एक्टिविटीज को बढ़ावा दिया जाता है और बच्चों को इनके लिए प्रेरित किया जाता है।  इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक करिकुलम और एकेडेमिक्स  स्कूल (School) के करिकुलम और एकेडेमिक्स और एजुकेशनल लेवल आदि पर भी ध्यान दें। इससे बच्चों को सही ज्ञान और स्किल्स मिलते हैं। बच्चों को पढ़ने के तरीके अच्छे होना बहुत जरूरी है। स्कूल की एजुकेशनल रेपुटेशन भी महत्वपूर्ण है, जो बच्चों के भविष्य के अवसरों को निर्धारित करती है। नोट:– यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi Things to keep in mind while choosing a school for your child #Thingstokeepinmindwhilechoosingaschoolforyourchild #school #rightschoolforchild #rightschool

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Modi Govt Launches UMEED Portal for Waqf Property Reform

Modi Govt Launches UMEED Portal for Waqf Property Reform: मोदी सरकार की अनोखी पहल, वक्फ प्रॉपर्टी के लिए लॉन्च हुआ UMEED पोर्टल 

वक्फ संपत्ति को लेकर मोदी सरकार ने क्रांतिकारी कदम उठाते हुए एक पोर्टल लांच किया (Modi Govt Launches UMEED Portal for Waqf Property Reform) है। खबर के मुताबिक वक्फ एक्ट के तहत केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक मंत्रालय ने वक्फ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन हेतु उम्मीद पोर्टल लॉन्च किया है। बता दें कि अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरण रिजिजू ने दिल्ली में इसे लॉन्च किया। इस दौरान सभी राज्यों के वक्फ बोर्ड के पदाधिकारी ऑनलाइन मौजूद रहे। लॉन्चिंग प्रोग्राम के दौरान किरण रिजिजू ने कहा कि उम्मीद पोर्टल सिर्फ एक टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन ही नहीं बल्कि अच्छे शासन प्रशासन और पारदर्शिता का भी प्रतीक है। वक्फ संपत्तियों से जुड़े सभी हिस्सेदारों को एक ही जगह पर साथ लाया गया है। जिसका मकसद वक्फ संपत्तियों का इस्तेमाल गरीब और जरूरतमंद मुसलमानों के लिए हो सके। गौरतलब हो कि इसे संसद द्वारा पास कानून के तहत बनाया गया है। पोर्टल को ईमेल और मोबाइल नंबर पर आने वाले OTP के जरिए वेरीफाई करके login किया जा सकेगा। पोर्टल के तीन लेवल के यूजर होंगे।  सभी वक्फ संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड हो सकेगा (Modi Govt Launches UMEED Portal for Waqf Property Reform) तैयार   पहला होगा मुतवल्ली या राज्य के वक्फ बोर्ड द्वारा अधिकृत कोई व्यक्ति, जो वक्फ प्रॉपर्टी को रजिस्टर करने के लिए डिटेल (Modi Govt Launches UMEED Portal for Waqf Property Reform) भरेगा। दूसरा जिला स्तर पर कोई अधिकारी होगा जो मुतवल्ली द्वारा भरी गई जानकारी को क्रॉस चेक करेगा और तीसरा होगा वक्फ बोर्ड का सीईओ या राज्य वक्फ बोर्ड द्वारा अधिकृत अधिकारी प्रॉपर्टी के वक्फ के बतौर रजिस्ट्रेशन को अप्रूव करेगा। इस पोर्टल खासियत यह कि इसमें आंकड़े सटीक और व्यवस्थित हों सके इस लिए ड्रॉपडाउन इनपुट का सिस्टम बनाया गया है। इसका अर्थ यह हुआ कि पोर्टल पूरी तरह यूजर फ्रेंडली होगा। इसके साथ यह सभी स्थानीय प्रशासन से जुड़ी हुई निर्देशिका (एलजीडी) कोड्स को पोर्टल के साथ एकीकृत किया गया है। ये एलजीडी जिला, ब्लॉक और पंचायत स्तर पर है। प्रॉपर्टी के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया सिर्फ एक चरण में हो होगी। खास बात यह कि पोर्टल हर एक वक्फ संपत्ति का 17 डिजिट यूनिक आईडी जनरेट करेगा। इससे सभी वक्फ संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार हो जाएगा।  इसे भी पढ़ें:-पीएम मोदी ने किया दुनिया के सबसे ऊंचे चिनाब रेल ब्रिज का उद्घाटन, कटरा से श्रीनगर का सफर होगा आसान  उम्मीद पोर्टल में रजिस्टर की गई प्रॉपर्टी की जियो टैगिंग भी (Modi Govt Launches UMEED Portal for Waqf Property Reform) होगी कमाल की बात यह कि इस यूनिक आईडी के जरिए वक्फ संपत्तियों का स्टेटस, मालिकाना हक और उसका इस्तेमाल पता करने में आसानी रहेगी। बड़ी बात यह कि रजिस्टर्ड प्रॉपर्टी को एक सर्टिफिकेट भी मिलेगा। यही नहीं, इस पोर्टल में वक्फ संपत्ति की जानकारी आसानी से भरी जा (Modi Govt Launches UMEED Portal for Waqf Property Reform) सके इस हेतु एक टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है। और तो और पोर्टल में भारत के सूचना एवं प्रौद्योगिकी कानून के तहत निजता के अधिकार का पूरा ध्यान रखा गया है। इसके अलावा बेहतर पारदर्शिता के लिए उम्मीद पोर्टल में रजिस्टर की गई प्रॉपर्टी की जियो टैगिंग भी होगी। जियो टैगिंग का मतलब, हर वक्फ संपत्ति की ज्योग्राफिकल लोकेशन का डेटा भी पोर्टल पर मौजूद रहेगा। और पोर्टल के जरिए ही संपत्तियों से जुड़े विवाद को सुलझाने की प्रक्रिया भी लाई गई है। अच्छी बात यह कि इससे पारदर्शिता भी आएगी। इसके अलावा मुकदमेबाजी की स्थिति में विवाद का निबटारा भी आसान होगा। यही नहीं, वक्फ के प्रकार में शिया, सुन्नी, बोहरा और आगाखानी का विकल्प पोर्टल में आएगा। इसके अलावा संपत्ति के 22 प्रकार भी रखे गए हैं। जिसके 22 कोड ड्रॉप डाउन लिस्ट में होगा। इनमें एग्रीकल्चर लैंड, खानखाना, स्कूल, दुकान, प्लॉट, हुज़रा, मकतब, मस्जिद, अशुरखाना, दरगाह, ग्रेव यार्ड, ईदगाह, इमामबाड़ा, फिशिंग पौंड, तकिया, फलों के बाग, मदरसा और मकान जैसे कई 22 विकल्प आयेंगे। जिनमें से किसी एक विकल्प को चुनना होगा। Latest News in Hindi Today Hindi news Modi Govt Launches UMEED Portal for Waqf Property Reform UMEEDPortal #WaqfProperty #ModiGovernment #DigitalIndia #MinorityWelfare #PropertyTransparency #SmartGovernance

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Russia Attacks Ukraine With 400 Drones: रूस ने 400 ड्रोन और 40 बैलिस्टिक मिसाइलों ने मचाई यूक्रेन में तबाही, सहमे यूक्रेनी राष्ट्रपति

विगत 3 वर्षों से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध बढ़ते समय के साथ-साथ और भी आक्रामक होता जा रहा है। साल 2022 से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध 2025 आते-आते चरम पर आ पहुंचा है। यूक्रेन द्वारा रूस को दहलाने के बाद रूस ने पलटवार करना शुरू कर दिया है। इस क्रम में रूस ने यूक्रेन के लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों पर 400 से अधिक ड्रोन और 40 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलों से एक के बाद एक ताबड़तोड़ भीषण हमला (Russia Attacks Ukraine With 400 Drones) किया। यकायक हुए इस हमले रूस ने यूक्रेन के वोलिन, टेरनोपिल, कीव, सुमी, लविवि, पोल्टावा, खमेलनित्सकी, चर्कासी और चेर्निहिव को निशाना बनाया है। रूस के उस पलटवार से डरे सहमें यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावनात्मक और आक्रोशित बयान जारी किया। जारी इस बयान में उन्होंने कहा कि यूक्रेनी वायुसेना ने कई मिसाइलों और ड्रोन को गिराने में सफलता पाई। तीन आपातकालीन सेवा कर्मचारियों की मौत और 49 लोगों के घायल होने की पुष्टि हो चुकी है। मलबे की सफाई और बचाव अभियान जारी है।  आम लोगों को निशाना बना रहा (Russia Attacks Ukraine With 400 Drones) है-  यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की  रूस के इस पलटवार पर यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने आगे कहा, रूस अपनी नीति नहीं बदल रहा है। वह आम लोगों को निशाना बना रहा (Russia Attacks Ukraine With 400 Drones) है। यह युद्ध अब सिर्फ यूक्रेन का नहीं, बल्कि मानवता का युद्ध बन गया है। रूस को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि रूस को अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही के तहत लाना चाहिए। अमेरिका, यूरोप और पूरी दुनिया को अब निर्णायक दबाव बनाना होगा। अगर वैश्विक नेता चुप हैं तो यह भी एक तरह की मिलीभगत है। अब निर्णायक कार्यवाही का समय है। केवल समर्थन से युद्ध रुकने वाला नहीं है। हालांकि यूक्रेन ने शुरू से ही यह स्पष्ट किया है कि वह अकेले लड़ते-लड़ते अब थक चुका है। उसने नाटो, यूरोपीय संघ, अमेरिका और अन्य सहयोगी देशों से अपेक्षा की है कि वे रूस पर आर्थिक प्रतिबंधों को और कठोर करें। इसके अलावा हथियारों और सैन्य संसाधनों की आपूर्ति तेज करें। राजनयिक स्तर पर दबाव बनाए और रूस को बातचीत के लिए मनाएं।  इसे भी पढ़ें:-एपस्टीन की बाल यौन शोषण की फाइल में ट्रंप का नाम, इसीलिए नहीं हो रही जारी-  एलन मस्क ने लगाया गंभीर आरोप  2022 से अब तक यूक्रेन के तकरीबन हजारों नागरिक मारे (Russia Attacks Ukraine With 400 Drones) गए और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं बता दें कि रूस के खिलाफ युद्ध में कई लोगों ने यूक्रेन को मदद पहुंचाई है, अन्यथा रूस से लड़ पाना यूक्रेन के बस की बात ही नहीं थी। खबर के मुताबिक इस दौरान अमेरिका की तरफ से लगातार मौकों पर सुरक्षा सहायता पैकेज दिया गया। तो वहीं, यूरोप ने एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम मुहैया कराया है और इसके अलावा नाटो की सीमाओं पर निगरानी बढ़ा दी गई। हालांकि, इसके बावजूद यूक्रेनी राष्ट्रपति को लगता है कि उन्हें मिलने वाला सहयोग इस युद्ध के लिए पर्याप्त नहीं है। ध्यान देने वाली महत्वपूर्ण बात यह कि साल 2022 से अब तक यूक्रेन के तकरीबन हजारों नागरिक मारे (Russia Attacks Ukraine With 400 Drones) गए और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। इससे यूक्रेन की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। असल मायनों में देखा जाये तो युद्ध से यूक्रेन को सिवाय नुकसान के कुछ भी हाथ नहीं लगा है। और तो और यूक्रेन भलींभाँति जनता भी है कि अंततः हार उसी की ही होनी है, बावजूद इसके वो न हार मानने के लिए तैयार हो रहा है और न ही शांति समझौते के लिए तैयार हो रहा है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Russia Attacks Ukraine With 400 Drones #RussiaUkraineWar2025 #DroneAttack #BallisticMissile #Zelensky

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Yoga for High BP

High Blood Pressure के लिए यह 4 योगासन, ब्लड सर्कुलेशन और हार्ट हेल्थ को बनाएंगे दुरुस्त

हाई ब्लड प्रेशर (High blood pressure) यानी हायपरटेंशन (Hypertension) वो समस्या है, जिसमें रोगी का ब्लड प्रेशर सामान्य से अधिक होता है। अगर इसे सही समय पर कंट्रोल न किया जाए, तो यह गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है जैसे हार्ट अटैक या स्ट्रोक आदि। हाई ब्लड प्रेशर  (High blood pressure) को कंट्रोल करने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल का पालन करना बहुत आवश्यक है। नियमित रूप से योगा करना न केवल हमारे बॉडी बल्कि माइंड हेल्थ के लिए भी फायदेमंद पाया गया है। ऐसा भी पाया गया है कि योगा करने से ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है। आइए हाई ब्लड प्रेशर के लिए योगासन (Yogasana for high blood pressure) के बारे में। हाई ब्लड प्रेशर के लिए योगासन (Yogasana For High Blood Pressure) आर्ट ऑफ लिविंग के अनुसार हायपरटेंशन (Hypertension) को बेहद खतरनाक माना जाता है क्योंकि अधिकतर रोगियों में इसका कोई लक्षण नजर नहीं आता। इसके निदान के लिए नियमित चेकअप बहुत जरूरी है। हाई ब्लड प्रेशर के लिए योगासन (Yogasana for high blood pressure) इस प्रकार हैं:  उत्कटासन (Utkatasana) उत्कटासन में करने वाले की पोजीशन चेयर जैसी लगती है, इसलिए इसे चेयर पोज भी कहा जाता है। इस आसन को करने से कई मसल ग्रुप्स की एक्सरसाइज होती है और हाइपरटेंशन को मैनेज करने में मदद मिलती है। इस करने से ब्लड फ्लो बढ़ता है, जिससे ब्लड प्रेशर को रेगुलर रहने में मदद मिलती है। यही नहीं, इससे हार्ट रेट बढ़ता है और स्ट्रेस भी कम होता है। यानी, उत्कटासन को करने से हाई ब्लड प्रेशर (High blood pressure) को कंट्रोल करने में आसानी होती है। भद्रासन (Bhadrasana) भद्रासन यानी बटरफ्लाई पोज करने से हाई ब्लड प्रेशर को मैनेज करने में मदद मिलती है क्योंकि इसे करने से स्ट्रेस कम होता है और शांत रहने में आसानी होती है। स्ट्रेस को हाई ब्लड प्रेशर (High blood pressure) के रिस्क फैक्टर्स में से एक माना जाता है। भद्रासन करना भी बेहद सरल है। इसके लिए आपको इस तरह से योगा मैट पर बैठना है कि आपके पैरों के तलवे साथ जुड़े हों। अब अपने पैरों को हाथों को पकड़ें और अपने घुटनों को ऊपर-नीचे करें। भद्रासन को करते हुए अपनी पीठ सीधी होनी चाहिए। ताड़ासन (Tadasana) हाइपरटेंशन का कारण कई चीजें हैं जैसे खराब लाइफस्टाइल, जेनेटिक्स और अंडरलायिंग हेल्थ कंडीशंस आदि। ताड़ासन यानी माउंटेन पोज एक आसान योगासन (Yogasana) है, जो हायपरटेंशन (Hypertension) को कम करने में मदद करता है। हालांकि यह आसन सीधे तौर पर ब्लड प्रेशर को कम नहीं करता है लेकिन ताड़ासन करने से स्ट्रेस कम होती है, शांति मिलती है और संपूर्ण कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ में सुधार होता है जिससे ब्लड प्रेशर को मैनेज करने में मदद मिलती है। इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक त्रिकोणासन (Trikonasana) त्रिकोणासन यानी ट्राइएंगल पोज करने से ब्लड सर्कुलेशन सुधरती है, स्ट्रेस कम होती है और रिलेक्स रहने में मदद मिलती है। यानी, हायपरटेंशन (Hypertension) की समस्या से राहत मिल सकती है। लेकिन, इस बात का ध्यान रखें कि इस आसन को सही से करना बेहद जरूरी है। अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर है,(High blood pressure) तो इस योगासन (Yogasana) को शुरू करने से पहले हेल्थ एक्सपर्ट और योग इंस्ट्रक्टर से बात करना न भूलें। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi  #highbloodpressure #yogasanaforhighbloodpressure #yogaasana, #hypertension #Trikonasana #Tadasana #Bhadrasana #Utkatasana

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PM Modi Inaugurates World’s Highest Chenab Rail Bridge: पीएम मोदी ने किया दुनिया के सबसे ऊंचे चिनाब रेल ब्रिज का उद्घाटन, कटरा से श्रीनगर का सफर होगा आसान 

दुनिया के सबसे ऊंचे चिनाब रेल ब्रिज का उद्घाटन (PM Modi Inaugurates World’s Highest Chenab Rail Bridge) करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कटरा में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि यह ब्रिज भारत की इच्छाशक्ति का विराट उत्सव और कश्मीर के नए सामर्थ्य की पहचान है। पीएम ने कहा कि आज जम्मू-कश्मीर के लोगों का सपना साकार हुआ है। अंजी ब्रिज भी भारत की शक्ति का प्रतीक है। ये दोनों ब्रिज भारत की उभरती शक्ति की गर्जना हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि लोग फ्रांस में एफिल टावर देखने जाते हैं लेकिन यह ब्रिज उस टावर से भी ऊंचा है। कटरा से श्रीनगर पहली वंदे भारत ट्रेन को झंडी दिखाने के बाद पीएम ने यहां रैली को संबोधित किया। इस दौरान चिनाब ब्रिज की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि चिनाब ब्रिज दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज है। लोग फ्रांस में एफिल टावर देखने जाते हैं लेकिन यह ब्रिज उस टावर से भी ऊंचा है। अब लोग चिनाब ब्रिज के जरिए कश्मीर देखने तो जाएंगे। यह ब्रिज भी अपने आप में एक आकर्षक पर्यटक केंद्र बनेगा। हमारा अंजी ब्रिज भी इंजीनियरिंग का अनूठा नमूना है। ये ब्रिज विकसित भारत की सीधी गर्जना हैं। यह हमारा सामर्थ्य है। चिनाब ब्रिज हो या अंजी ब्रिज ये जम्मू-कश्मीर दोनों क्षेत्रों के समृद्धि का जरिया बनेंगे। प्रोजेक्ट पूरा करना मुश्किल और चुनौतीपूर्ण (PM Modi Inaugurates World’s Highest Chenab Rail Bridge) था पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के लिए पीएम ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए कहा, पाकिस्तान ने कश्मीर के लोगों, कश्मीरियत पर हमला किया। वह मानवता विरोधी देश है। उसने यहां की रोजी-रोटी को निशाना बनाया। वह पर्यटन विरोधी देश भी है। पीएम ने आगे कहा कि जम्मू कश्मीर को आज दो वंदेभारत ट्रेनें मिली हैं। रास्ते में आने-जाने की मुश्किलें, मौसम की परेशानी ये प्रोजेक्ट पूरा करना मुश्किल और चुनौतीपूर्ण ( PM Modi Inaugurates World’s Highest Chenab Rail Bridge) था। हमारी सरकार ने चुनौती को ही चुनौती देने का रास्ता चुना है। आज जम्मू कश्मीर में बन रहे अनेक ऑल वेदर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट इसके उदाहरण हैं। कुछ दिनों पहले सोनमर्ग टनल शुरू हुआ है। इन पुलों पर चलते हुए मैंने भारत के बुलंद इरादों को, हमारे श्रमिकों, इंजीनियरों के हौसले को महसूस किया है। उन्होंने कहा, ‘इससे पर्यटन तो बढ़ेगा ही अर्थव्यवस्था के दूसरे क्षेत्रों को भी लाभ होगा। अब कश्मीर के सेब देश के बड़े बाजारों तक समय पर पहुंच पाएंगे। सूखे मेवे हों या पशमीना शॉल यहां का हस्तशिल्प आसानी से देश के हिस्सों तक पहुंच पाएगा। यहां के लोगों का आना-जाना भी बहुत आसान है। यह ट्रेन सेवा हर मौसम में लोगों की मदद करेगी।  इसे भी पढ़ें:-‘दोगले पाकिस्तान से देश में आतंकी हमले का खतरा बना रहेगा’, RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कह दी बड़ी बात इसके जरिए सेना को जल्द ही सीमा तक रसद पहुंचाने में भी मिलेगी (PM Modi Inaugurates World’s Highest Chenab Rail Bridge) मदद  मोदी ने कहा कि यह ब्रिज वह राष्ट्र को समर्पित करते हैं। इस पुल के निर्माण से यात्रियों का सफर आसान होगा और उनका समय भी ( PM Modi Inaugurates World’s Highest Chenab Rail Bridge) बचेगा। चिनाब पुल के उद्घाटन के दौरान उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, सीएम उमर अब्दुल्ला और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी मौजूद थे। बता दें कि ये रेल ब्रिज कटरा से श्रीनगर को जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा। इस ब्रिज की एक बड़ी खासियत यह कि इसके जरिए सेना को जल्द ही सीमा तक रसद पहुंचाने में भी मदद मिलेगी। यह ब्रिज इस प्रकार से डिजाइन किया गया है कि 260 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल रही हवा से भी प्रभावित नहीं होगा। खास बात यह कि यह रेल ब्रिज भारतीय इंजीनियर का अनोखा उदाहरण है। यह ब्रिज दो पहाड़ों के बीच बना है। इसे इस प्रकार से बनाया गया है कि यदि इसके कोई पिलर क्षतिग्रस्त भी हो जाएं तो यह गिरेगा नहीं। इस दौरान वंदेभारत ट्रेन को रवाना करने से पहले पीएम ने प्लेटफॉर्म पर घूम-घूम कर तिरंगा लहराया। Latest News in Hindi Today Hindi news PM Modi Inaugurates World’s Highest Chenab Rail Bridge #ChenabRailBridge #PMModi #IndianRailways #KashmirDevelopment

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RBI Repo Rate

RBI ने रेपो रेट में 0.50% की कटौती, होम लोन और EMI होंगे सस्ते

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 6 जून 2025 को अपनी मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए बैंकों से लोन लेने वालों को बड़ी राहत दी है। RBI ने रेपो रेट (Repo Rate) में 50 बेसिस पॉइंट यानी 0.50% की कटौती का ऐलान किया है। इस घोषणा के साथ ही रेपो रेट अब घटकर 5.50% पर आ गया है। यह 2025 की पहली छमाही में तीसरी बार रेपो रेट में कटौती है और अब तक की सबसे बड़ी। इससे पहले फरवरी और अप्रैल में 25-25 बेसिस पॉइंट की कटौतियां की गई थीं। कुल मिलाकर इस साल अब तक 100 बेसिस पॉइंट की कटौती हो चुकी है। क्या है रेपो रेट? रेपो रेट (Repo Rate) वह दर होती है जिस पर आरबीआई (RBI) वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक कर्ज देता है। जब रेपो रेट घटती है तो बैंकों को कम ब्याज पर कर्ज मिलता है, जिससे वे भी उपभोक्ताओं को सस्ते लोन दे सकते हैं। इससे बाजार में लिक्विडिटी बढ़ती है और निवेश तथा उपभोग को प्रोत्साहन मिलता है। कैश रिजर्व रेशियो (CRR) में भी कटौती RBI ने कैश रिजर्व रेशियो यानी CRR में भी 1% की कटौती कर इसे 3% कर दिया है। इसका मतलब है कि अब बैंक अपनी जमा राशि का छोटा हिस्सा ही आरबीआई के पास रिजर्व में रखेंगे और उनके पास लोन देने के लिए ज्यादा पूंजी उपलब्ध होगी। इसका सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं को मिलेगा, खासकर होम लोन (Home Loan) और पर्सनल लोन (Personal Loan) की दरों में गिरावट के रूप में। EMI में राहत: आम आदमी को सीधा फायदा रेपो रेट (Repo Rate) में कटौती का सबसे बड़ा फायदा होम लोन लेने वालों को मिलेगा। उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति ने 50 लाख रुपये का होम लोन 8.5% ब्याज दर पर 20 साल के लिए लिया है, तो उसकी मौजूदा EMI 43,391 रुपये बनती है। नई दर के अनुसार अगर ब्याज 7.5% हो जाता है, तो EMI घटकर 40,280 रुपये हो जाएगी। यानी हर महीने करीब 3,111 रुपये और सालभर में लगभग 37,000 रुपये की बचत होगी। टेन्योर घटाएं या EMI? विशेषज्ञों की मानें तो अगर ग्राहक EMI को जस का तस बनाए रखते हैं और टेन्योर घटा लेते हैं, तो उन्हें ब्याज पर अधिक बचत मिलेगी। ऊपर दिए उदाहरण में लोन की अवधि लगभग 3 साल कम हो सकती है और कुल ब्याज में 15.44 लाख रुपये तक की बचत संभव है। यह लंबे समय में बेहतर वित्तीय निर्णय साबित हो सकता है। क्या करें लोन धारक? अगर आपका होम लोन EBLR (External Benchmark Lending Rate) से जुड़ा है — जो कि अधिकतर बैंकों में रेपो रेट (Repo Rate) होता है — तो आपको इस कटौती का सीधा लाभ मिलेगा। आने वाले महीनों में बैंक आपकी EMI या टेन्योर को फिर से निर्धारित कर सकते हैं। हालांकि, यदि आपका लोन अभी भी MCLR या बेस रेट से जुड़ा है, तो विशेषज्ञों की सलाह है कि आप उसे EBLR आधारित लोन में कन्वर्ट करवा लें, ताकि ब्याज दरों में गिरावट का फायदा तुरंत मिल सके। कुछ बैंक इस प्रक्रिया के लिए मामूली शुल्क लेते हैं, लेकिन दीर्घकालिक बचत के लिए यह एक समझदारी भरा कदम है। RBI का यह फैसला क्यों? RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि यह फैसला देश की आर्थिक स्थिति को देखते हुए लिया गया है। अप्रैल 2025 में खुदरा महंगाई घटकर 3.16% पर आ गई है, जो पिछले 6 वर्षों में सबसे कम है। इसके अलावा, मानसून की अच्छी शुरुआत और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच घरेलू मांग को प्रोत्साहित करने की जरूरत महसूस की गई। इन कारकों को ध्यान में रखते हुए रेपो रेट और CRR में कटौती की गई है। इसे भी पढ़ें: World Environment Day 2025: प्रकृति से जुड़ने के लिए प्लास्टिक की जगह रिसाइकिल प्रोडक्ट का करें इस्तेमाल किन क्षेत्रों को मिलेगा लाभ? इस मौद्रिक नीति (Credit Policy) बदलाव से खासकर हाउसिंग, ऑटोमोबाइल, इंफ्रास्ट्रक्चर, बैंकिंग और MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) क्षेत्रों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे कारोबारियों को सस्ता कर्ज मिलने की संभावना है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। RBI की यह नीतिगत घोषणा आम आदमी, उद्योगों और पूरी अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है। सस्ती दरों पर कर्ज की उपलब्धता उपभोग और निवेश को बढ़ावा देगी, जिससे देश की आर्थिक विकास दर को मजबूती मिल सकती है। आने वाले दिनों में इस राहत का असर आम लोगों की जेब से लेकर देश की वित्तीय प्रणाली तक साफ दिखेगा। Latest News in Hindi Today Hindi  #CreditPolicy #RBI #EMI #MSME #CRR

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