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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम! प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए हाई-पावर पैनल की तैयारी

नई दिल्ली: संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प तथा कथित पुलिस ज्यादती के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार, 19 अगस्त 2026 को मामले की जांच के लिए हाई-पावर कमेटी गठित करने की तैयारी की है। इस पैनल की अगुवाई सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे। रिटायर्ड SC जज करेंगे कमेटी की अगुवाई प्रस्तावित कमेटी में एक सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज के अलावा पूर्व हाई कोर्ट मुख्य न्यायाधीश और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को शामिल किया जाएगा। कोर्ट का उद्देश्य 20 जुलाई को हुए संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर सामने आए आरोपों और पुलिस की ओर से लगाए गए जवाबी आरोपों की निष्पक्ष जांच कराना है। पुलिस कार्रवाई पर उठे थे गंभीर सवाल 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद की ओर निकले प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर कई गंभीर आरोप सामने आए थे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग, लाठीचार्ज और अन्य कार्रवाई के आरोप लगाए थे। वहीं, दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपने जवाब में इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसने “maximum restraint” बरता और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केवल आवश्यक बल का इस्तेमाल किया। पुलिस ने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान उसके 240 से अधिक जवान घायल हुए। पैनल तय करेगा क्या हुआ था? सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित होने वाली कमेटी प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं की तथ्यात्मक जांच करेगी। उपलब्ध वीडियो फुटेज, CCTV रिकॉर्डिंग और अन्य सामग्री को भी जांच का हिस्सा बनाए जाने की संभावना है। अदालत ने पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हुए कथित हमलों को भी जांच के दायरे में रखने के संकेत दिए हैं। शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर कोर्ट का जोर सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन संविधान के तहत संरक्षित अधिकार है। अदालत ने यह भी कहा है कि केवल प्रदर्शन होने के कारण पुलिस अत्यधिक बल का इस्तेमाल नहीं कर सकती और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संतुलित प्रक्रिया जरूरी है। FIR पर भी सुप्रीम कोर्ट की नजर मामले में प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR भी सुप्रीम कोर्ट के सामने हैं। अदालत ने संकेत दिया है कि जिन मामलों में विवाद या गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं है, उनमें FIR खत्म करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों के इस्तेमाल पर विचार किया जा सकता है। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के औपचारिक आदेश और हाई-पावर कमेटी के गठन पर है। जांच के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों की ओर से क्या-क्या हुआ और क्या कहीं तय नियमों से अधिक बल का इस्तेमाल किया गया। स्रोत: Supreme Court proceedings, Times of India, Indian Express, PTI Jai Rashtra News

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संसद मार्च पर दिल्ली पुलिस का सुप्रीम कोर्ट में बड़ा बयान, कहा- हालात बिगड़ने पर किया गया बल प्रयोग

नई दिल्ली: 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद की ओर निकाले गए मार्च को लेकर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है। पुलिस ने अदालत में कहा कि मार्च की अनुमति नहीं दी गई थी और प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ने के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बल का इस्तेमाल किया गया। दिल्ली पुलिस ने अत्यधिक बल के आरोपों को नकारा सुप्रीम कोर्ट में दिए गए अपने जवाब में दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों से इनकार किया। पुलिस का कहना है कि अधिकारियों ने “maximum restraint” बरता और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केवल आवश्यक न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया गया। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग शामिल थे और स्थिति बिगड़ने के बाद भीड़ को नियंत्रित करना जरूरी हो गया था। दिल्ली पुलिस ने यह भी दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान उसके 240 से अधिक जवान घायल हुए। ‘मार्च की अनुमति नहीं थी’ दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि संसद की ओर जाने वाले इस मार्च को अनुमति नहीं दी गई थी। इससे पहले भी पुलिस ने स्पष्ट किया था कि नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू थे और बिना अनुमति मार्च या सभा की इजाजत नहीं थी। पुलिस ने यह भी कहा कि प्रदर्शन में कुछ असामाजिक तत्वों और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के शामिल होने के बाद हालात और बिगड़े। इसी आधार पर पुलिस ने अपने बल प्रयोग को उचित ठहराया है। सुप्रीम कोर्ट बनाएगा हाई-पावर कमेटी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच के लिए हाई-पावर कमेटी बनाने का फैसला किया है। कमेटी में सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज, पूर्व हाई कोर्ट चीफ जस्टिस और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल किए जा सकते हैं। कमेटी पुलिस कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों की भूमिका और कथित पैलेट गन के इस्तेमाल जैसे आरोपों की भी जांच करेगी। अदालत के सामने उपलब्ध वीडियो फुटेज, CCTV और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं। अब जांच से तय होगी जिम्मेदारी संसद मार्च को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के दावों में बड़ा अंतर सामने आया है। दिल्ली पुलिस अपने बल प्रयोग को कानून-व्यवस्था की स्थिति से जोड़ रही है, जबकि प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित होने वाली कमेटी की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि 20 जुलाई को हुई कार्रवाई में किस पक्ष की क्या भूमिका थी और क्या पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के दौरान तय नियमों के अनुरूप बल का इस्तेमाल किया। स्रोत: Supreme Court proceedings, Times of India, Economic Times Jai Rashtra News

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दिल्ली पुलिस ने 54 लाख रुपये की लूट का मामला सुलझाया, छह आरोपी गिरफ्ता

500 से अधिक CCTV फुटेज और कई राज्यों में छापेमारी के बाद पुलिस आरोपियों तक पहुंची नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने 54 लाख रुपये की लूट के एक चर्चित मामले को सुलझाते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। अधिकारियों के अनुसार इस मामले की जांच के दौरान पुलिस ने 500 से अधिक CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली और कई राज्यों में अभियान चलाकर आरोपियों तक पहुंच बनाई। पुलिस के मुताबिक घटना कुछ दिन पहले हुई थी, जब बदमाशों ने बड़ी रकम लेकर जा रहे व्यक्तियों को निशाना बनाते हुए लाखों रुपये की लूट को अंजाम दिया था। घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया। जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के क्षेत्रों में लगे CCTV कैमरों की फुटेज एकत्र की। अधिकारियों ने बताया कि 500 से अधिक कैमरों की रिकॉर्डिंग का विश्लेषण किया गया, जिसके आधार पर संदिग्ध वाहनों और आरोपियों की गतिविधियों का पता लगाया गया। तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन और CCTV फुटेज की मदद से पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले। इसके बाद दिल्ली पुलिस की विशेष टीमों ने विभिन्न राज्यों में छापेमारी शुरू की। लगातार निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपी लंबे समय से आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहे हैं और उनके आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं, जिनके आधार पर मामले से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि लूट की योजना कब और कैसे बनाई गई थी तथा क्या इस गिरोह के तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हुए हैं। पुलिस को उम्मीद है कि आगे की जांच में और भी खुलासे हो सकते हैं। दिल्ली पुलिस ने बताया कि अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। CCTV नेटवर्क, डिजिटल निगरानी और डेटा विश्लेषण की मदद से गंभीर अपराधों की जांच पहले की तुलना में अधिक प्रभावी ढंग से की जा रही है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि महानगरों में बढ़ते CCTV नेटवर्क ने अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी को आसान बनाया है। ऐसे मामलों में तकनीकी साक्ष्य अक्सर जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुख्य बिंदु • 54 लाख रुपये की लूट का मामला सुलझाया गया • छह आरोपी गिरफ्तार • 500 से अधिक CCTV फुटेज की जांच • कई राज्यों में पुलिस की छापेमारी • तकनीकी साक्ष्यों से मिली सफलता • अन्य आरोपियों की तलाश जारी पुलिस की अपील पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या हेल्पलाइन पर दें। साथ ही व्यापारियों और नकदी का लेन-देन करने वाले लोगों को सुरक्षा संबंधी सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है। निष्कर्ष दिल्ली पुलिस द्वारा 54 लाख रुपये की लूट के मामले का खुलासा कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। तकनीकी जांच, CCTV विश्लेषण और कई राज्यों में चलाए गए अभियान के जरिए पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही। मामले की आगे की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। (जय राष्ट्र न्यूज़

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