प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से की बातचीत, पश्चिम एशिया में शांति और होर्मुज जलडमरूमध्य में निर्बाध नौवहन पर दिया जोर
नई दिल्ली, 1 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से टेलीफोन पर बातचीत कर पश्चिम एशिया की मौजूदा सुरक्षा स्थिति, क्षेत्रीय स्थिरता और भारत-ईरान संबंधों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में तनाव कम करने, कूटनीतिक संवाद को बढ़ावा देने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में निर्बाध समुद्री नौवहन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। क्षेत्रीय शांति पर भारत का स्पष्ट संदेश वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता केवल क्षेत्र के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी पक्षों से संवाद और कूटनीति के माध्यम से मतभेदों का समाधान निकालने की अपील की। होर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक महत्व प्रधानमंत्री ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध नौवहन के महत्व को रेखांकित किया। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का वैश्विक परिवहन होता है। किसी भी प्रकार की बाधा का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है। भारत-ईरान संबंधों पर चर्चा दोनों नेताओं ने भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने, व्यापार, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी विचार-विमर्श किया। दोनों देशों ने आपसी सहयोग को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। कूटनीतिक समाधान पर जोर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा क्षेत्रीय चुनौतियों का समाधान सैन्य टकराव नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण संवाद और कूटनीतिक प्रयासों से ही संभव है। उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी संबंधित देशों के सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। वैश्विक ऊर्जा बाजारों की नजर पश्चिम एशिया की स्थिति पर वैश्विक ऊर्जा बाजारों की करीबी नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में स्थिरता कायम रहने से अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। भारत की संतुलित विदेश नीति विश्लेषकों का कहना है कि भारत लगातार सभी प्रमुख देशों के साथ संतुलित और रचनात्मक संबंध बनाए रखने की नीति पर आगे बढ़ रहा है। पश्चिम एशिया में शांति, ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री मार्गों की सुरक्षा भारत की विदेश नीति की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हैं। आगे क्या? भारत आने वाले समय में भी पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और संवाद को बढ़ावा देने के लिए अपने कूटनीतिक प्रयास जारी रखेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में तनाव कम होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सकारात्मक समर्थन मिलेगा। स्रोत:प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), विदेश मंत्रालय (MEA) मूल रिपोर्ट:1 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

