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हल्द्वानी के ‘शुद्धिकरण’ विवाद पर सियासी घमासान; खड़गे ने लगाया जातीय भेदभाव का आरोप

नई दिल्ली: उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद रामलीला मैदान के मंच पर कथित ‘शुद्धिकरण’ कराए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने इसे जातीय भेदभाव और दलितों के अपमान से जोड़ते हुए भाजपा और उससे जुड़े संगठनों पर निशाना साधा है। वहीं, जिस संगठन ने यह अनुष्ठान कराया, उसका कहना है कि इसका संबंध जाति से नहीं बल्कि धार्मिक और वैचारिक कारणों से था।

क्या है पूरा मामला?

मामला 8 अगस्त 2026 को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुई कांग्रेस की रैली से जुड़ा है। इस रैली को मल्लिकार्जुन खड़गे ने संबोधित किया था। इसके बाद वहां श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास से जुड़े लोगों द्वारा हवन और गंगाजल के जरिए कथित शुद्धिकरण किए जाने की खबर सामने आई।

घटना की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस ने इसे गंभीर मुद्दा बना दिया।

खड़गे ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा

मल्लिकार्जुन खड़गे ने 13 अगस्त को राज्यसभा में इस मामले का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वह अनुसूचित जाति से आते हैं और इस घटना से उन्हें अपमानित महसूस हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उनके साथ अछूत जैसा व्यवहार किया जा रहा है।

खड़गे ने कहा कि उन्होंने अपनी रैली में किसी समाज या धर्म के खिलाफ बात नहीं की थी, फिर भी उनके भाषण के बाद मंच का शुद्धिकरण किया गया।

कांग्रेस ने भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप

उत्तराखंड कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मंच का शुद्धिकरण भाजपा से जुड़े लोगों द्वारा कराया गया और इसे जातिगत भेदभाव तथा संकीर्ण मानसिकता का उदाहरण बताया।

कांग्रेस नेताओं ने मामले की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है।

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी खड़गे के समर्थन में प्रतिक्रिया दी और इस घटना को सामाजिक भेदभाव से जोड़ते हुए भाजपा पर निशाना साधा।

भाजपा ने क्या कहा?

भाजपा की ओर से इस घटना से पार्टी का सीधा संबंध होने से इनकार किया गया है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि अगर ऐसा कोई कृत्य हुआ है तो यह केवल खड़गे का नहीं, बल्कि सभी का अपमान है और मामले की जांच कराई जाएगी।

यानी भाजपा ने कांग्रेस के इस आरोप को स्वीकार नहीं किया कि यह पार्टी की आधिकारिक कार्रवाई थी।

शुद्धिकरण कराने वाले संगठन का अलग तर्क

श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास से जुड़े लोगों ने कांग्रेस के जातिगत भेदभाव के आरोपों को खारिज किया है। संगठन का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी जाति या समुदाय का अपमान करना नहीं था।

उनका दावा है कि खड़गे के कुछ पुराने बयानों को वे सनातन और हिंदू संगठनों के विरोध से जोड़कर देखते हैं और इसी कारण धार्मिक स्थल से जुड़े मैदान पर शुद्धिकरण अनुष्ठान किया गया।

मायावती ने भी जताई आपत्ति

इस विवाद पर मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने घटना को दलित विरोधी मानसिकता से जोड़ते हुए आपत्ति जताई और सामाजिक समानता के सवाल को उठाया।

इस तरह मामला अब कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर देश में जाति, सामाजिक सम्मान और धार्मिक आस्था को लेकर बड़ी राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है।

संसद से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा

हल्द्वानी की घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस चल रही है। एक पक्ष इसे जातिगत भेदभाव का उदाहरण बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे धार्मिक आस्था और वैचारिक विरोध से जुड़ा मामला बता रहा है।

फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शुद्धिकरण कराने वाले संगठन और कांग्रेस द्वारा बताए गए कारण अलग-अलग हैं। इसलिए घटना को लेकर लगाए जा रहे राजनीतिक आरोपों को उनके संबंधित पक्षों के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

निष्कर्ष

हल्द्वानी के रामलीला मैदान में खड़गे की रैली के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ ने उत्तराखंड से लेकर संसद तक राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। खड़गे ने इसे अपमान और जातीय भेदभाव से जोड़कर सवाल उठाया, जबकि शुद्धिकरण कराने वाले संगठन ने जातिगत मकसद से इनकार करते हुए इसे धार्मिक और वैचारिक कारणों से जुड़ा बताया है। भाजपा ने भी संगठन की कार्रवाई से अपना संबंध होने से इनकार किया है और जांच की बात कही है।

Source: ThePrint, Aaj Tak, Dainik Tribune और अन्य ताजा रिपोर्ट्स

जय राष्ट्र न्यूज़

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