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ओडिशा के 2,000 साल पुराने असुरगढ़ पर बड़े शोध की मांग, Dharmendra Pradhan ने ASI के साथ किया पुरातात्विक स्थल का दौरा

भुवनेश्वर, 7 सितंबर 2026: ओडिशा के बरगढ़ जिले में स्थित करीब 2,000 साल पुराने असुरगढ़ पुरातात्विक स्थल को लेकर व्यापक शोध और संरक्षण की मांग तेज हुई है। सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने बरपाली के पास स्थित इस ऐतिहासिक स्थल का Archaeological Survey of India (ASI) के अधिकारियों और Gangadhar Meher University के छात्रों के साथ दौरा किया तथा खुदाई से मिले प्राचीन अवशेषों की जानकारी ली। पश्चिमी ओडिशा का महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल असुरगढ़ को पश्चिमी ओडिशा के महत्वपूर्ण early-historic archaeological sites में माना जाता है। यहां प्राचीन fortified settlement के प्रमाण मिले हैं, जो संकेत देते हैं कि हजारों साल पहले इस क्षेत्र में व्यवस्थित बस्ती मौजूद थी। सिक्के, मिट्टी के बर्तन और Terracotta Objects मिले असुरगढ़ में हुई archaeological investigations के दौरान pottery, coins, terracotta objects, beads और iron implements सहित कई प्राचीन वस्तुएं मिली हैं। यहां मौजूद fortification और moat system से उस समय की सुरक्षा व्यवस्था और water-management capabilities के बारे में भी जानकारी मिलती है। ASI और Universities मिलकर करें व्यापक Research धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि असुरगढ़ और Sambalpur region में मौजूद अन्य archaeological remains पर ASI, Gangadhar Meher University और स्थानीय educational institutions को मिलकर व्यापक research करना चाहिए। उनके अनुसार ऐसे स्थलों का वैज्ञानिक अध्ययन Odisha की प्राचीन सभ्यता और इतिहास के कई नए पहलुओं को सामने ला सकता है। Harappa-Mohenjo-Daro का दिया उदाहरण प्रधान ने असुरगढ़ को Odisha की समृद्ध संस्कृति और सभ्यता का महत्वपूर्ण भंडार बताया। उन्होंने कहा कि Sambalpur region में ऐसे कई archaeological remains हैं, जिनका ancient civilisation के स्रोत के रूप में अध्ययन किया जाना चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने Harappa और Mohenjo-Daro जैसे प्रमुख archaeological sites का उदाहरण दिया। Heritage Tourism को मिल सकता है बढ़ावा धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि असुरगढ़ जैसे प्राचीन स्थलों को wider public discourse में लाने से छात्रों में इतिहास के प्रति रुचि बढ़ेगी। साथ ही archaeological heritage का बेहतर conservation और promotion होने से tourism तथा स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी फायदा मिल सकता है। संरक्षण को बताया सामूहिक जिम्मेदारी उन्होंने पुरातात्विक धरोहर को संरक्षित रखने और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने को सामूहिक जिम्मेदारी बताया। ASI देश में archaeological research और राष्ट्रीय महत्व के प्राचीन स्थलों व अवशेषों के संरक्षण के लिए जिम्मेदार प्रमुख संस्था है। 2022 में भी उठाया था संरक्षण का मुद्दा धर्मेंद्र प्रधान ने 2022 में तत्कालीन केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री G. Kishan Reddy को पत्र लिखकर असुरगढ़ में excavation और preservation को आगे बढ़ाने के लिए ASI की भूमिका बढ़ाने की मांग की थी। अब उनके ताजा दौरे के बाद इस ऐतिहासिक स्थल पर व्यापक archaeological research की मांग एक बार फिर चर्चा में है। source – Times of India / The Samikhsyaजय राष्ट्र न्यूज़

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