तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत और अमेरिका के बीच बढ़ा कूटनीतिक तनाव

भारत ने अमेरिकी कार्रवाई पर जताया कड़ा विरोध, तीन भारतीय नाविकों की मौत पर बढ़ा कूटनीतिक तनाव

जय राष्ट्र न्यूज़ पर ताजा अंतरराष्ट्रीय अपडेट दिनांक: 13 जून 2026 मुख्य समाचार नई दिल्ली: समुद्री क्षेत्र में हुई एक सैन्य कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक स्तर पर तनाव बढ़ गया है। भारत सरकार ने घटना पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए अमेरिकी प्रशासन के समक्ष आधिकारिक विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय ने मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच की मांग की है। भारत ने स्पष्ट किया है कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और घटना से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। सरकार ने मृतक नाविकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें हरसंभव सहायता देने का भरोसा भी दिलाया है। विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने अमेरिकी पक्ष के समक्ष भारत की चिंताओं को औपचारिक रूप से रखा है। मंत्रालय का कहना है कि ऐसी घटनाओं में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का हिस्सा है और जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। भारत ने घटना से संबंधित विस्तृत जानकारी और परिस्थितियों की पूरी रिपोर्ट साझा करने का भी आग्रह किया है। जांच की मांग हुई तेज सरकार ने मामले की व्यापक जांच की मांग करते हुए कहा है कि यह पता लगाया जाना आवश्यक है कि किन परिस्थितियों में भारतीय नागरिक इस कार्रवाई की चपेट में आए। विशेषज्ञों का मानना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही घटना के वास्तविक कारणों और जिम्मेदार पक्षों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। भारत-अमेरिका संबंधों पर असर की चर्चा भारत और अमेरिका के बीच रक्षा, व्यापार, तकनीक और रणनीतिक सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। हालांकि इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद तेज हो गया है। विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देश इस संवेदनशील मुद्दे को बातचीत और सहयोग के माध्यम से सुलझाने का प्रयास करेंगे ताकि द्विपक्षीय संबंधों पर दीर्घकालिक प्रभाव न पड़े। समुद्री सुरक्षा पर उठे सवाल घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर नागरिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक समुद्री व्यापार में कार्यरत नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है। निष्कर्ष तीन भारतीय नाविकों की मौत ने भारत और अमेरिका के बीच एक संवेदनशील कूटनीतिक मुद्दा खड़ा कर दिया है। भारत ने निष्पक्ष जांच, जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया है। अब दोनों देशों की आगामी प्रतिक्रिया और जांच के निष्कर्षों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है। जय राष्ट्र न्यूज़ के साथ जुड़े रहें देश-दुनिया की हर बड़ी खबर के लिए।

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CJP का बड़ा ऐलान: 7 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो पूरे देश में होगा आंदोलन

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP (Cockroach Janta Party) के विशाल प्रदर्शन के बाद संगठन ने सरकार को 7 दिन का अल्टीमेटम देते हुए बड़ा ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर निर्धारित समय के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाया जाएगा। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र, युवा और नौकरी अभ्यर्थी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी आवाज बुलंद की। क्या हैं CJP की मुख्य मांगें? CJP नेताओं ने कहा कि देशभर में लाखों युवा प्रतियोगी परीक्षाओं, भर्ती प्रक्रियाओं और रोजगार के अवसरों को लेकर परेशान हैं। संगठन ने मांग की है कि शिक्षा और भर्ती से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय की जाए और युवाओं की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। अभिजीत दिपके का बयान CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि युवाओं के भविष्य के लिए है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते कदम नहीं उठाए तो आंदोलन को देशभर में विस्तार दिया जाएगा। सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा CJP प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X, Instagram और YouTube पर CJP से जुड़े हैशटैग तेजी से ट्रेंड करने लगे। लाखों लोगों ने आंदोलन से संबंधित वीडियो और पोस्ट साझा किए। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया ने इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। देशभर में बढ़ सकता है आंदोलन संगठन के नेताओं का दावा है कि कई राज्यों से समर्थन मिल रहा है और आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक इस अल्टीमेटम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। युवाओं के बीच बढ़ती लोकप्रियता हाल के दिनों में CJP युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हुआ है। शिक्षा, रोजगार और परीक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर चल रहे अभियान को सोशल मीडिया पर व्यापक समर्थन मिला है।

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RBI ने रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखा, EMI पर क्या होगा असर?

RBI के फैसले से होम लोन, कार लोन और FD निवेशकों को क्या फायदा होगा? नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अपनी ताजा बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला किया है। इस निर्णय के बाद आम लोगों, गृह ऋण धारकों, निवेशकों और बैंकिंग क्षेत्र की नजरें इस बात पर हैं कि इसका उनके वित्तीय जीवन पर क्या असर पड़ेगा। रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण उपलब्ध कराता है। जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंकों के लिए पैसा महंगा हो जाता है, जिसका असर लोन की ब्याज दरों पर पड़ता है। वहीं रेपो रेट कम होने पर ऋण सस्ता हो सकता है। इस बार RBI ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का निर्णय लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला महंगाई को नियंत्रित रखने और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। EMI पर क्या असर होगा? यदि आपका होम लोन या कार लोन फ्लोटिंग ब्याज दर पर आधारित है, तो फिलहाल आपकी EMI में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। रेपो रेट स्थिर रहने का मतलब है कि बैंकों के लिए फंड की लागत में तत्काल कोई परिवर्तन नहीं होगा। हालांकि अलग-अलग बैंक अपनी आंतरिक नीतियों और बाजार स्थितियों के अनुसार ब्याज दरों में मामूली बदलाव कर सकते हैं। होम लोन लेने वालों के लिए क्या मतलब? जो लोग नया होम लोन लेने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए यह सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। ब्याज दरों में स्थिरता के कारण बैंक ग्राहकों को आकर्षक लोन योजनाएं दे सकते हैं। इससे रियल एस्टेट क्षेत्र को भी समर्थन मिल सकता है। FD निवेशकों पर प्रभाव फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश करने वाले लोगों के लिए भी यह फैसला महत्वपूर्ण है। रेपो रेट स्थिर रहने पर बैंक आमतौर पर FD दरों में तुरंत कोई बड़ा बदलाव नहीं करते। इसलिए मौजूदा निवेशकों को फिलहाल स्थिर रिटर्न मिलने की संभावना है। अर्थव्यवस्था पर असर आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि RBI का यह फैसला देश की आर्थिक गतिविधियों को संतुलित बनाए रखने में मदद कर सकता है। बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की कीमतों और महंगाई के दबाव को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने सतर्क रुख अपनाया है। भारत की अर्थव्यवस्था हाल के वर्षों में मजबूत प्रदर्शन कर रही है और निवेश, विनिर्माण तथा सेवा क्षेत्र में सकारात्मक संकेत देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में ब्याज दरों को स्थिर रखना आर्थिक गतिविधियों को गति देने में सहायक हो सकता है। मुख्य बिंदु • RBI ने रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखा • EMI में तत्काल बड़े बदलाव की संभावना नहीं • होम लोन लेने वालों को राहत • FD निवेशकों के लिए स्थिर रिटर्न की उम्मीद • महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन पर जोर निष्कर्ष RBI का रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला आम लोगों, निवेशकों और बैंकिंग क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। इससे फिलहाल EMI और लोन की ब्याज दरों में स्थिरता बनी रह सकती है। आने वाले महीनों में महंगाई और आर्थिक संकेतकों के आधार पर RBI आगे के फैसले ले सकता है। (जय राष्ट्र न्यूज़)

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महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026: बीएमसी चुनाव की ताजा अपडेट्स, उम्मीदवार और मतदान की पूरी जानकारी

महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026: बीएमसी चुनाव की ताजा अपडेट्स, उम्मीदवार और मतदान की पूरी जानकारी

जयराष्ट्र न्यूज रिपोर्टरदिनांक: 12 जनवरी 2026 महाराष्ट्र में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं क्योंकि राज्य की 29 नगर निगमों के चुनाव नजदीक आ गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा ध्यान मुंबई की ब्रिहनमुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव पर है, जो 15 जनवरी 2026 को होने वाला है। यह चुनाव न केवल मुंबई की सत्ता तय करेगा बल्कि पूरे महाराष्ट्र की राजनीति पर असर डालेगा। महायुति गठबंधन, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना शामिल हैं, ने मुंबई को फिर से ‘सफरन’ बनाने का दावा किया है। वहीं, उद्धव ठाकरे वाली शिवसेना और कांग्रेस जैसी पार्टियां मजबूत चुनौती दे रही हैं। इस लेख में हम महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026 की पूरी जानकारी, ताजा अपडेट्स, उम्मीदवारों की सूची, मतदान प्रक्रिया और चुनाव के महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे। यह लेख एसईओ फ्रेंडली है और सरल भाषा में लिखा गया है ताकि आम जनता आसानी से समझ सके। महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026 का महत्व क्यों है? महाराष्ट्र भारत का आर्थिक केंद्र है, और मुंबई जैसे शहर की नगर निगम सत्ता पर कब्जा करना हर राजनीतिक दल के लिए सपना होता है। बीएमसी का बजट हजारों करोड़ रुपये का है, जो सड़कें, सफाई, पानी, स्वास्थ्य और परिवहन जैसी सेवाओं को संभालता है। 2026 के चुनाव में करीब 1 करोड़ से ज्यादा मतदाता हिस्सा लेंगे, जो इसे देश का सबसे बड़ा स्थानीय चुनाव बनाता है। राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) ने घोषणा की है कि 29 नगर निगमों में से धुले, अहमदनगर, जलगांव, सांगली जैसे शहर शामिल हैं। लेकिन मुंबई का बीएमसी चुनाव सबसे हॉट टॉपिक है क्योंकि यहां ठाकरे भाइयों की एकता की अपील सुर्खियां बटोर रही है। पिछले कुछ सालों में महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलाव हुए हैं। 2019 में शिवसेना टूट गई थी, जिसके बाद एकनाथ शिंदे ने बीजेपी के साथ सरकार बनाई। अब 2026 के चुनाव में ‘मराठी मानूस’ का मुद्दा फिर से उभरा है। राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) भी मैदान में है, जो स्थानीय मुद्दों पर जोर दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुनाव 2029 के लोकसभा चुनावों की दिशा तय कर सकता है। अगर महायुति जीतती है, तो मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की स्थिति मजबूत होगी। वहीं, विपक्ष की जीत से उद्धव ठाकरे का राजनीतिक करियर नई ऊंचाई छू सकता है। बीएमसी चुनाव 2026 की तारीख और शेड्यूल राज्य चुनाव आयोग ने चुनाव की पूरी समय-सारणी जारी कर दी है। मतदान 15 जनवरी 2026 को सुबह 7:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक होगा। परिणाम 18 जनवरी 2026 को घोषित किए जाएंगे। मुंबई में 227 वार्ड हैं, जहां से पार्षद चुने जाएंगे। कुल 1700 से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में हैं। नामांकन की प्रक्रिया दिसंबर 2025 में पूरी हो चुकी है, और अब प्रचार अभियान जोरों पर है। चुनाव आयोग ने कोविड-19 जैसी महामारी से सबक लेते हुए सख्त नियम बनाए हैं। मतदान केंद्रों पर मास्क, सैनिटाइजर और सोशल डिस्टेंसिंग अनिवार्य है। बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं के लिए घर से वोटिंग की सुविधा भी उपलब्ध है। प्रमुख पार्टियां और उनके वादे इस चुनाव में मुख्य मुकाबला महायुति गठबंधन और महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के बीच है। महायुति में बीजेपी, शिंदे शिवसेना और अजीत पवार वाली एनसीपी शामिल हैं। उन्होंने मुंबई को ‘विश्व स्तरीय शहर’ बनाने का वादा किया है। उनके मुख्य वादे हैं: वहीं, एमवीए में उद्धव ठाकरे वाली शिवसेना, कांग्रेस और शरद पवार वाली एनसीपी हैं। वे ‘मराठी अस्मिता’ पर जोर दे रहे हैं। उनके वादे: राज ठाकरे की एमएनएस ‘मराठी मानूस’ को केंद्र में रखकर चुनाव लड़ रही है। उन्होंने कहा है कि गैर-मराठी लोगों को शहर से बाहर करने की नीति अपनाएंगे। ठाकरे भाइयों (उद्धव और राज) ने हाल ही में एक संयुक्त रैली में एकता की अपील की, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। ताजा अपडेट्स: क्या हो रहा है मैदान में? 12 जनवरी 2026 तक की ताजा खबरों के अनुसार, ठाकरे भाइयों की संयुक्त रैली ने राजनीतिक माहौल गर्मा दिया है। रैली में उन्होंने कहा, “मुंबई हमारी है, और इसे बचाने के लिए एकजुट हों।” बीजेपी ने इसका जवाब देते हुए कहा कि मुंबई और ठाणे ‘सफरन’ रहेंगे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “हम विकास पर चुनाव लड़ रहे हैं, न कि परिवारवाद पर।” एक और अपडेट: शिवसेना (शिंदे) ने अजीत पवार पर आरोप लगाया कि वे अपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को टिकट दे रहे हैं। वहीं, एनडीटीवी की पावर प्ले में चुनावी विश्लेषण में कहा गया कि मतदान प्रतिशत 50% से ऊपर जा सकता है। विकिपीडिया के अनुसार, यह चुनाव मुंबई की सिविक सेवाओं को नियंत्रित करेगा। मिड-डे रिपोर्ट के मुताबिक,नागरिक तैयार हैं वोट डालने के लिए। फाइनेंशियल एक्सप्रेस ने लाइव अपडेट्स में बताया कि प्रचार में ‘मराठी बनाम बाहरी’ का मुद्दा छाया हुआ है। हिंदुस्तान टाइम्स ने कहा कि महायुति मुंबई की पुरानी गरिमा वापस लाएगी। मतदाता सूची कैसे चेक करें? अगर आप मुंबई या अन्य नगर निगम क्षेत्र में रहते हैं, तो अपनी मतदाता सूची चेक करना जरूरी है। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, आप ऑनलाइन चेक कर सकते हैं: करीब 1 करोड़ मतदाता हैं, इसलिए पहले से तैयारी करें। चुनाव के प्रभाव और भविष्य यह चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति का टर्निंग पॉइंट हो सकता है। अगर बीजेपी जीतती है, तो केंद्र सरकार के प्रोजेक्ट जैसे बुलेट ट्रेन और मेट्रो तेज होंगे। वहीं, विपक्ष की जीत से स्थानीय मुद्दों पर फोकस बढ़ेगा। पर्यावरण विशेषज्ञ कहते हैं कि चुनाव में ग्रीन इश्यूज जैसे प्रदूषण नियंत्रण को महत्व मिलना चाहिए। आम जनता के लिए यह चुनाव मौका है अपनी समस्याएं उठाने का। सड़कें खराब हैं? पानी की कमी है? वोट से बदलाव लाएं। जयराष्ट्र न्यूज रिपोर्टर वेबसाइट आपको लगातार अपडेट्स देती रहेगी। निष्कर्ष: वोट दें, बदलाव लाएं महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026 लोकतंत्र का बड़ा उत्सव है। 15 जनवरी को मतदान करें और अपने शहर को बेहतर बनाएं। सरल शब्दों में कहें तो यह चुनाव विकास, एकता और अस्मिता का है। अधिक जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट पर विजिट करें।

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बिहार चुनाव के बीच रवि किशन को मिली जान से मारने की धमकी, जांच में जुटी पुलिस

बिहार चुनाव के बीच रवि किशन को मिली जान से मारने की धमकी, जांच में जुटी पुलिस

बिहार विधानसभा चुनाव के माहौल में भोजपुरी एक्टर और बीजेपी सांसद रवि किशन शुक्ला को जान से मारने की धमकी मिली है. बताया जा रहा है कि बिहार के आरा जिले के जवनिया गांव के रहने वाले एक शख्स ने फोन कर यह धमकी दी. आरोपी ने सांसद के निजी सचिव शिवस द्विवेदी को कॉल कर पहले अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और फिर कहा कि रवि किशन, यादवों पर टिप्पणी करते हैं, इसलिए उन्हें गोली मार दूंगा. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से शिकायत इस मामले में बीजेपी सांसद के सचिव ने गोरखपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से शिकायत की है. पुलिस ने तुरंत जांच शुरू कर दी है और आरोपी को ट्रेस करने की कोशिश की जा रही है. पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपी को पकड़ लिया जाएगा. शिकायत में क्या बताया गया? शिकायत में बताया गया है कि आरोपी ने धमकी के साथ-साथ धार्मिक टिप्पणी भी की और कहा कि उसे सांसद की हर गतिविधि की जानकारी है. उसने यह भी कहा कि जब चार दिन बाद रवि किशन बिहार आएंगे तो उन्हें जान से मार देगा. इस उम्मीदवार का किया समर्थन इतना ही नहीं, आरोपी ने छपरा से आरजेडी उम्मीदवार और भोजपुरी एक्टर खेसारी लाल यादव का समर्थन भी किया. उसने खेसारी के राम मंदिर की जगह अस्पताल बनाने वाले बयान को भी सपोर्ट किया और भगवान श्रीराम को लेकर भी अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया. बीजेपी सांसद के सचिव ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है और सुरक्षा को लेकर भी सतर्कता बरती जा रही है. चुनावी माहौल में इस तरह की धमकी ने राजनीतिक हलकों में चिंता बढ़ा दी है.

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छत्तीसगढ़ में 21 माओवादियों के सरेंडर के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की सराहना

छत्तीसगढ़ में 21 माओवादियों के सरेंडर के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की सराहना

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में 21 माओवादियों के सरेंडर के बाद उनकी प्रशंसा की. उन्होंने अभी भी हथियार थामने वाले माओवादियों से जल्द से जल्द आत्मसमर्पण करने की अपील भी की. हथियारों के साथ किया आत्मसमर्पणकेंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में 21 माओवादियों ने अपने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है. इनमें से 13 वरिष्ठ कार्यकर्ता थे.” उन्होंने कहा, “मोदी सरकार के आह्वान पर हिंसा का त्याग कर मुख्यधारा में शामिल होने के लिए मैं उनकी सराहना करता हूं. मैं उन बाकी लोगों से, जो अभी भी बंदूक थामे हुए हैं, अपनी अपील दोहराता हूं कि वे जल्द से जल्द आत्मसमर्पण कर दें.” अमित शाह ने केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा, “हम 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद का सफाया करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.” पूना मार्गम: पुनर्वास से पुनर्जीवनकांकेर जिले में रविवार को 21 माओवादी कैडरों ने अपने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया और समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया. यह कदम “पूना मार्गम: पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल के तहत किया गया. इन 21 कैडरों में 4 डीवीसीएम (डिवीजन वाइस कमेटी मेंबर), 9 एसीएम (एरिया कमेटी मेंबर) और 8 पार्टी सदस्य शामिल हैं. आत्मसमर्पण करने वालों में 13 महिला और 8 पुरुष कैडर हैं. इस समूह में डिवीजन कमेटी सेक्रेटरी मुकेश भी शामिल हैं. 400 से अधिक माओवादियों ने किया सरेंडरइन कैडरों के पास से 18 हथियार भी बरामद किए गए, जिनमें तीन एके-47 रायफलें, चार एसएलआर रायफलें, दो इंसास रायफलें, छह .303 रायफलें, दो सिंगल शॉट रायफलें और एक बीजीएल हथियार शामिल हैं. करीब दो हफ्तों में छत्तीसगढ़ में 400 से अधिक माओवादियों ने पुलिस के सामने हथियार डाले हैं. सबसे बड़ी उपलब्धि उस समय मिली, जब माओवादी गढ़ माने जाने वाले माड़ क्षेत्र के 208 नक्सलियों ने बस्तर जिले के रिजर्व पुलिस लाइन्स में आयोजित एक कार्यक्रम में आत्मसमर्पण किया. इससे पहले, 16 अक्टूबर को 170 और 15 अक्टूबर को 27 माओवादियों ने सरेंडर किया था.

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समस्तीपुर से होगा PM मोदी का चुनावी शंखनाद, 24 अक्टूबर को शाह भी करेंगे महागठबंधन पर वार

समस्तीपुर से होगा प्रधानमंत्री मोदी का चुनावी शंखनाद, 24 अक्टूबर को शाह भी करेंगे महागठबंधन पर वार

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की जुबानी जंग तेज हो गई है. एनडीए ने अपना ‘मिशन बिहार’ चरम पर पहुंचा दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 24 अक्टूबर को बिहार के दौरे पर पहुंचेंगे और समस्तीपुर जिले के कर्पूरी ग्राम से प्रधानमंत्री मोदी चुनावी शंखनाद करेंगे. यह उनका चुनाव घोषणा के बाद पहला दौरा होगा, जो एनडीए के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है. उसी दिन वे बेगूसराय में भी एक चुनावी सभा को संबोधित करेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी बिहार में सक्रिय रहेंगे, जो सीवान और बक्सर में रैलियां करेंगे. दोनों नेताओं का यह समन्वित प्रयास एनडीए की मजबूत पकड़ को दर्शाता है. समस्तीपुर: हारी हुई सीटों पर पीएम का फोकस समस्तीपुर का चयन सोच-समझकर किया गया है. 2020 के चुनाव में इस जिले की 10 विधानसभा सीटों पर एनडीए और महागठबंधन ने 5-5 सीटें जीती थीं. एनडीए के रणनीतिकार अब उन 5 हारी हुई सीटों – हसनपुर, मोरवा, उजियारपुर, समस्तीपुर और विभूतिपुर – पर नजरें गड़ाए हैं. कर्पूरी ग्राम में रैली का आयोजन सामाजिक न्याय के प्रतीक कर्पूरी ठाकुर से जुड़ाव को मजबूत करेगा. उम्मीदवारों में जेडीयू के राजकुमार राय (हसनपुर) से लेकर रवीना कुशवाहा (विभूतिपुर) तक एनडीए मजबूत दावेदार उतार चुका है. पीएम मोदी की उपस्थिति से इन सीटों पर बहुजन वोटों को एकजुट करने की उम्मीद है. बेगूसराय में रैली पूर्वी बिहार के मतदाताओं को लुभाने का प्रयास होगा. शाह की रणनीति: सीवान-बक्सर में पकड़ मजबूत अमित शाह का यह दूसरा दौरा होगा. हाल ही में वे छपरा के तारैया में रैली कर चुके हैं. 24 अक्टूबर को सीवान और बक्सर की सभाओं के बाद 25 अक्टूबर को वे नालंदा, मुंगेर और खगड़िया जाएंगे. भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने महागठबंधन को ‘महालठबंधन’ कहकर तंज कसा, दावा किया कि माहौल एनडीए के पक्ष में है. एनडीए ने सीट बंटवारा पूरा कर लिया है, हालांकि हम और आरएलएसपी के साथ शुरुआती खींचतान हुई. दूसरी ओर, 30 अक्टूबर को पीएम मोदी मुजफ्फरपुर और छपरा में रैलियां करेंगे. विपक्ष (India) में हलचल: डैमेज कंट्रोल की कोशिश महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस और आरजेडी के बीच तनाव चरम पर है. दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार उतारे हैं. 23 अक्टूबर को पटना में अशोक गहलोत और तेजस्वी यादव की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी, जो डैमेज कंट्रोल का प्रयास है. जन सुराज के प्रशांत किशोर ने भाजपा पर तीन नेताओं के पर्चे वापस कराने का आरोप लगाया. एनडीए का स्लोगन ‘2025 में एनडीए 225’ जोर पकड़ रहा है, जबकि विपक्ष को एकजुट होने की चुनौती है. बिहार की 243 सीटों पर यह जंग दिलचस्प मोड़ ले रही है. कुल मिलाकर, 24 अक्टूबर एनडीए के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है.

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कोलकाता से श्रीनगर जा रही इंडिगो की फ्लाइट में फ्यूल लीक, वाराणसी एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग

कोलकाता से श्रीनगर जाने वाली इंडिगो की एक नियमित विमान बुधवार को अचानक इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी. उड़ान के दौरान जब चालक दल को फ्यूल लीक का पता चलने के बाद, विमान को वाराणसी हवाई अड्डे पर आपातकालीन लैंडिंग करानी पड़ी. अधिकारियों ने बताया कि विमान, 6E-6961, जिसमें 166 यात्री और चालक दल के सदस्य सवार थे, शाम 4.10 बजे लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतरा. सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालकर आगमन हॉल में ले जाया गया. किसी के घायल होने की सूचना नहीं है. वाराणसी पुलिस और एयरपोर्ट के अधिकारियों के अनुसार, फ्यूल लीक का पता चलने पर पायलट ने तुरंत एयर ट्रैफिक कंट्रोल को सूचित किया. एलबीएसआई एयरपोर्ट के निदेशक पुनीत गुप्ता ने मीडिया को बताया, “कोलकाता से श्रीनगर जा रही इंडिगो एयरलाइंस की उड़ान संख्या 6961 के पायलट को फ्यूल लीक का पता चला, जिसके बाद उन्होंने तुरंत एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) वाराणसी से संपर्क किया और इमरजेंसी लैंडिंग का अनुरोध किया.” निरीक्षण के बाद फिर से भरेगी उड़ान मंज़ूरी मिलने के बाद, विमान शाम लगभग 4:10 बजे रनवे पर सुरक्षित उतर गया. अधिकारियों ने बताया कि संबंधित एयरलाइंस आवश्यक कार्रवाई कर रही हैं. एयरपोर्ट के अधिकारी और तकनीकी दल घटना की जांच कर रहे हैं. स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और एयरपोर्ट पर सामान्य ऑपरेशन फिर से शुरू हो गया है. उतरने के बाद तकनीकी टीम ने ज़रूरी मरम्मत के लिए विमान का निरीक्षण किया. इस बीच, सभी यात्री मरम्मत पूरी होने और उड़ान के लिए तैयार होने तक आगमन हॉल में बैठे रहे. आवश्यक निरीक्षण और मरम्मत के बाद विमान श्रीनगर के लिए अपनी यात्रा के लिए फिर से उड़ान भरेगी.

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कुरनूल में पीएम मोदी बोले- 21वीं सदी 140 करोड़ हिंदुस्तानियों की होगी

कुरनूल में पीएम मोदी बोले- 21वीं सदी 140 करोड़ हिंदुस्तानियों की होगी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को आंध्र प्रदेश के कुरनूल में विकास कार्यों का शिलान्यास और उद्घाटन किया. उन्होंने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि मेरा जन्म दादा सोमनाथ की धरती गुजरात में हुआ. मुझे बाबा विश्वनाथ की धरती काशी में सेवा करने का अवसर मिला और आज श्री शैलम का आशीर्वाद मिल रहा है. पीएम मोदी ने कहा कि आंध्र प्रदेश गौरव और समृद्ध संस्कृति की भूमि है. यह विज्ञान और नवाचार का केंद्र भी है. इस राज्य में असीम संभावनाएं और अपार क्षमताएं हैं. आंध्र को सही दृष्टिकोण की आवश्यकता थी. चंद्रबाबू नायडू और पवन कल्याण के नेतृत्व में राज्य को अब वह दृष्टिकोण और केंद्र सरकार का समर्थन दोनों प्राप्त हैं. उन्होंने आगे कहा कि 2047 में आजादी के जब 100 साल होंगे, तब ‘विकसित भारत’ होकर रहेगा. मैं विश्वास से कहता हूं कि 21वीं सदी हिंदुस्तान की होने वाली है. 21वीं सदी 140 करोड़ हिंदुस्तानियों की सदी होने वाली है. प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि आंध्र प्रदेश विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है. डबल इंजन वाली सरकार की ताकत से राज्य अभूतपूर्व विकास का गवाह बन रहा है. दुनिया भारत को 21वीं सदी के नए मैन्युफैक्चरिंग सेंटर के रूप में देख रही प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि आज सड़क, बिजली, रेलवे, राजमार्ग और व्यापार से जुड़ी कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया है. इन पहलों से उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और लोगों का जीवन आसान होगा. इन परियोजनाओं से कुरनूल और आसपास के क्षेत्रों को बहुत लाभ होगा. मैं इन विकासों के लिए कुरनूल और पूरे राज्य के लोगों को बधाई देता हूं. उन्होंने कहा कि तेज विकास के बीच हमें अतीत की स्थिति को नहीं भूलना चाहिए. लगभग 11 साल पहले, जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब प्रति व्यक्ति बिजली की खपत औसतन 1000 यूनिट से भी कम थी. देश को अक्सर ब्लैकआउट जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता था, और हमारे कई गांवों में बिजली के खंभे तक नहीं थे. पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया आज भारत को 21वीं सदी के नए मैन्युफैक्चरिंग सेंटर के रूप में देख रही है. इस सफलता का सबसे बड़ा आधार है आत्मनिर्भर भारत का विजन. हमारा आंध्र प्रदेश आत्मनिर्भर भारत का प्रमुख केंद्र बन रहा है. पीएम मोदी ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को तेजी से प्राप्त करने के लिए देश भर में मल्टीमॉडल बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है. हमारा ध्यान गांवों से शहरों और शहरों से बंदरगाहों तक कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर है. पीएम मोदी ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि तकनीक के मामले में हमारा आंध्र प्रदेश और उसके युवा हमेशा आगे रहते हैं. डबल इंजन वाली सरकार के तहत हम इस क्षमता को और मजबूत कर रहे हैं. आज पूरी दुनिया भारत और आंध्र प्रदेश, दोनों की गति देख रही है. गूगल भारत का पहला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हब यहीं हमारे आंध्र प्रदेश में स्थापित कर रहा है. नए रिफॉर्म के जरिए नागरिकों के जीवन को आसान बना रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि हमारी सरकार का विजन है, नागरिक-केंद्रित विकास. हम लगातार नए रिफॉर्म के जरिए नागरिकों के जीवन को आसान बना रहे हैं. देश में 12 लाख रुपए तक की आय पूरी तरह टैक्स फ्री हो चुकी हैं. सस्ती दवाइयां, सस्ता इलाज, बुजुर्गों के लिए आयुष्मान जैसी अनगिनत सुविधाओं से इजी ऑफ लिविंग का नया अध्याय शुरू हुआ है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने आंध्र प्रदेश की क्षमता को नजरअंदाज किया, जिससे न केवल राज्य को, बल्कि पूरे देश को नुकसान हुआ. वह राज्य जो भारत के विकास को गति दे सकता था, उसे अपने विकास के लिए संघर्ष करना पड़ा. अब, एनडीए सरकार के तहत, आंध्र प्रदेश की स्थिति बेहतर हो रही है. प्रधानमंत्री ने कहा कि निम्मलुरु में उन्नत नाइट विजन उत्पादों का कारखाना रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के दृष्टिकोण को और मजबूत करेगा. इससे नाइट विजन उपकरणों में भारत की क्षमता बढ़ेगी और यहां निर्मित उत्पाद भारत के रक्षा निर्यात को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हम भारत में निर्मित उपकरणों की ताकत देख चुके हैं.

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झूठे आरोपों और विरोधी प्रचार से रहें सावधान

मायावती बोलीं- 2027 की करें तैयारी, झूठे आरोपों और विरोधी प्रचार से रहें सावधान

बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने गुरुवार को लखनऊ में राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक की और उन्होंने पदाधिकारियों से कहा कि सभी लोग अभी से 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट जाएं और पार्टी के खिलाफ फैलाए जा रहे झूठे आरोपों व प्रचार से हर समय सतर्क रहें. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मायावती (Mayawati) ने कहा कि बसपा संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर 9 अक्टूबर को हुए ऐतिहासिक आयोजन ने यह साबित कर दिया कि बहुजन समाज आज भी पूरी मजबूती से पार्टी के मिशन, विचारधारा और नेतृत्व के साथ खड़ा है. उन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने वाले सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और समर्थकों को हार्दिक बधाई दी. बसपा मुखिया मायावती ने कहा कि बसपा अन्य दलों की तरह पूंजीपतियों और उद्योगपतियों के सहारे नहीं चलती. यह सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति के मिशन पर चलने वाला संगठन है, जो दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों, मुस्लिमों और अन्य कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए संघर्षरत है. मायावती ने कहा कि सपा सरकार ने जातिवादी द्वेष के कारण महान संतों, गुरुओं और महापुरुषों के नाम पर बने संस्थानों, जिलों और विश्वविद्यालयों के नाम बदलकर बहुजन समाज का अपमान किया है. यही नहीं, इन वर्गों के लिए बनाई गई योजनाओं को निष्क्रिय कर दिया गया, जो राजनीतिक द्वेष और छल का प्रतीक है. बसपा कभी साम, दाम, दंड, भेद जैसी राजनीति नहीं करती मायावती ने दो टूक कहा कि बसपा कभी साम, दाम, दंड, भेद जैसी राजनीति नहीं करती. हमारी राजनीति एक खुली किताब की तरह साफ-सुथरी है. बसपा की पहचान ईमानदारी, समर्पण और सेवा से है, न कि झूठे प्रचार या साजिश से. बैठक में यह भी तय किया गया कि ‘बहुजन मिशन 2027’ के तहत पार्टी गांव-गांव जाकर जनता से संवाद करेगी. वरिष्ठ नेता अपने-अपने क्षेत्रों में जनसभाएं करेंगे और लोगों को बताएंगे कि बीएसपी ही प्रदेश में कानून-व्यवस्था और जनकल्याण की सच्ची गारंटी है. मायावती ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे विपक्षी दलों के भ्रम फैलाने वाले प्रचार से सावधान रहें और एकजुट होकर बहुजन समाज की आवाज को और बुलंद करें.

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