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Tata Sons में बड़ा नेतृत्व बदलाव, एन. चंद्रशेखरन फरवरी 2027 में पद छोड़ेंगे; नए चेयरमैन की तलाश शुरू

मुंबई: टाटा समूह में नेतृत्व को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। Tata Sons के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने अपने मौजूदा कार्यकाल के बाद दोबारा नियुक्ति नहीं लेने का फैसला किया है। उनका वर्तमान कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होगा। यानी यह तत्काल प्रभाव से पद छोड़ना नहीं है; चंद्रशेखरन अपने मौजूदा कार्यकाल के अंत तक चेयरमैन बने रहेंगे। चंद्रशेखरन ने क्यों लिया यह फैसला? एन. चंद्रशेखरन ने Tata Sons के बोर्ड को बताया कि उनकी दोबारा नियुक्ति को लेकर लंबे समय से निर्णय लंबित था। उनके अनुसार, फरवरी 2026 में उनके पांच साल के अगले कार्यकाल का प्रस्ताव बोर्ड के सामने रखा गया था, लेकिन इस पर सर्वसम्मति नहीं बन सकी। छह महीने तक स्थिति स्पष्ट नहीं होने के बाद चंद्रशेखरन ने खुद दोबारा नियुक्ति के लिए अपनी उम्मीदवारी वापस लेने का फैसला किया। उन्होंने बोर्ड से जल्द उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा, ताकि नेतृत्व परिवर्तन व्यवस्थित तरीके से हो सके। Tata Trusts ने शुरू की नए चेयरमैन की तलाश चंद्रशेखरन के फैसले के बाद Tata Trusts ने अगले Tata Sons चेयरमैन के चयन के लिए एक समिति बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। Tata Trusts के अंतर्गत आने वाले प्रमुख ट्रस्ट Tata Sons में 50% से अधिक हिस्सेदारी रखते हैं। नए चेयरमैन का चयन टाटा समूह के भविष्य की दिशा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Noel Tata की भूमिका भी चर्चा में चंद्रशेखरन के कार्यकाल को लेकर पिछले कई महीनों से Noel Tata, जो Tata Trusts के चेयरमैन हैं, के साथ मतभेदों की खबरें सामने आती रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, चंद्रशेखरन के अगले कार्यकाल को लेकर Tata Sons बोर्ड में सहमति नहीं बन पाई थी। इसी वजह से उनके उत्तराधिकारी की तलाश अब टाटा समूह के लिए बड़ा मुद्दा बन गई है। टाटा समूह के लिए क्यों अहम है यह बदलाव? Tata Sons टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है और इसके तहत TCS, Tata Motors, Tata Steel, Tata Power, Air India समेत कई बड़े कारोबार आते हैं। चंद्रशेखरन के नेतृत्व में समूह ने टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एविएशन और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश और विस्तार की योजनाएं आगे बढ़ाईं। अब नए चेयरमैन के सामने इन योजनाओं को आगे बढ़ाने के साथ समूह की रणनीतिक दिशा को बनाए रखने की चुनौती होगी। ₹120 अरब डॉलर की निवेश योजना पर भी नजर चंद्रशेखरन के जाने की घोषणा ऐसे समय हुई है जब टाटा समूह की कई बड़ी निवेश योजनाएं आगे बढ़ रही हैं। रिपोर्टों में समूह की लगभग 120 अरब डॉलर की पांच वर्षीय निवेश योजना को लेकर भी उत्तराधिकार बदलाव के संभावित प्रभावों पर चर्चा की गई है। हालांकि, टाटा समूह की अलग-अलग कंपनियां स्वतंत्र बोर्ड और प्रबंधन के तहत काम करती हैं, इसलिए चेयरमैन परिवर्तन का प्रत्येक कंपनी पर प्रभाव अलग-अलग हो सकता है। बाजार में भी हलचल चंद्रशेखरन के फैसले की खबर सामने आने के बाद टाटा समूह से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। बाजार में इस बात को लेकर चिंता है कि नेतृत्व परिवर्तन से समूह की भविष्य की रणनीति और बड़े निवेश फैसलों पर क्या असर पड़ेगा। हालांकि, विशेषज्ञों के बीच यह भी राय है कि टाटा समूह की कंपनियों की स्वतंत्र संचालन व्यवस्था के कारण तत्काल कारोबारी असर सीमित रह सकता है। नए चेयरमैन के सामने होंगी बड़ी चुनौतियां अगले Tata Sons चेयरमैन के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियां रहेंगी। इनमें टाटा समूह के बड़े निवेशों को आगे बढ़ाना, अलग-अलग कंपनियों के बीच तालमेल बनाए रखना और समूह के दीर्घकालिक कारोबारी विजन को जारी रखना प्रमुख होगा। इसके अलावा उत्तराधिकार को लेकर Tata Trusts और Tata Sons के बीच संतुलन बनाए रखना भी नए नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण होगा। चंद्रशेखरन का कार्यकाल कब तक रहेगा? महत्वपूर्ण बात यह है कि एन. चंद्रशेखरन तुरंत Tata Sons से अलग नहीं हो रहे हैं। उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 तक जारी रहेगा। इसके बाद वे नए कार्यकाल के लिए अपना नाम नहीं देंगे। इससे Tata Sons को नए चेयरमैन की नियुक्ति और नेतृत्व परिवर्तन के लिए कई महीने का समय मिल गया है। निष्कर्ष Tata Sons में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। एन. चंद्रशेखरन ने अपने मौजूदा कार्यकाल के बाद दोबारा चेयरमैन बनने से इनकार कर दिया है। वे फरवरी 2027 तक पद पर बने रहेंगे, जबकि Tata Trusts ने अगले चेयरमैन के चयन के लिए समिति बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। टाटा समूह के लिए यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नए चेयरमैन को समूह की बड़ी निवेश योजनाओं, रणनीतिक विस्तार और विभिन्न कंपनियों के बीच तालमेल को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभालनी होगी। Source: Reuters, Moneycontrol, Mint, India Today जय राष्ट्र न्यूज़

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Zepto और Blinkit पर खाद्य सुरक्षा को लेकर बड़ी कार्रवाई, बेंगलुरु में वेयरहाउस सील और मुंबई में लाइसेंस निलंबित

नई दिल्ली: देश के तेजी से बढ़ते क्विक-कॉमर्स सेक्टर में खाद्य सुरक्षा को लेकर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। कर्नाटक में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने बेंगलुरु के होस्कोटे स्थित Zepto के एक वेयरहाउस को सील कर दिया, जबकि महाराष्ट्र FDA ने मुंबई के मलाड वेस्ट स्थित Blinkit के एक डार्क स्टोर का खाद्य लाइसेंस निलंबित कर दिया। दोनों मामलों में अधिकारियों ने स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी गंभीर कमियां पाए जाने की जानकारी दी है। बेंगलुरु में Zepto वेयरहाउस पर कार्रवाई कर्नाटक खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने बेंगलुरु के होस्कोटे तालुक में Zepto के एक वेयरहाउस का निरीक्षण किया। अधिकारियों के मुताबिक, वहां खाद्य पदार्थों के रखरखाव और स्वच्छता से जुड़ी कई गंभीर कमियां सामने आईं। निरीक्षण के दौरान परिसर में गंदगी, फर्श पर जमा कचरा और खाद्य सामग्री के भंडारण से जुड़ी समस्याएं पाए जाने की बात सामने आई है। अधिकारियों ने परिस्थितियों को बेहद अस्वच्छ बताया और इसके बाद वेयरहाउस को सील कर दिया। लेबलिंग और स्टोरेज को लेकर भी सवाल जांच में केवल साफ-सफाई ही नहीं, बल्कि खाद्य उत्पादों की लेबलिंग और मैन्युफैक्चरिंग संबंधी जानकारी को लेकर भी आपत्तियां सामने आईं। रिपोर्टों के मुताबिक, अधिकारियों ने कुछ उत्पादों में अनुचित लेबलिंग और मिसब्रांडिंग से जुड़े उल्लंघन पाए। खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत ऐसी कमियां उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं क्योंकि पैकेज पर सही जानकारी उपलब्ध होना जरूरी है। मुंबई में Blinkit के डार्क स्टोर पर FDA की कार्रवाई दूसरी ओर, महाराष्ट्र के Food and Drug Administration (FDA) ने मुंबई के मलाड वेस्ट स्थित Blinkit के एक डार्क स्टोर का खाद्य लाइसेंस निलंबित कर दिया। अधिकारियों के निरीक्षण में परिसर में कॉकरोच की मौजूदगी और अस्वच्छ परिस्थितियां पाए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा कुछ खाद्य उत्पादों की वैधता और स्टोरेज को लेकर भी गंभीर सवाल उठे। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने क्या पाया? मुंबई के मामले में अधिकारियों ने डार्क स्टोर की स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर आपत्ति जताई। रिपोर्टों के अनुसार, निरीक्षण के दौरान कॉकरोच का संक्रमण और खाद्य सामग्री के आसपास अस्वच्छ स्थिति पाई गई। ऐसी परिस्थितियां खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं। इसी वजह से FDA ने संबंधित खाद्य लाइसेंस को निलंबित करने की कार्रवाई की। क्विक-कॉमर्स कंपनियों पर बढ़ी निगरानी Zepto और Blinkit पर हुई ताजा कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब देश में क्विक-कॉमर्स कंपनियों के डार्क स्टोर्स और वेयरहाउस में खाद्य सुरक्षा मानकों को लेकर नियामक निगरानी बढ़ रही है। इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए किराना, पैकेज्ड फूड, डेयरी और अन्य खाद्य उत्पाद कुछ ही मिनटों में ग्राहकों तक पहुंचाए जाते हैं। ऐसे में स्टोरेज, तापमान, एक्सपायरी और स्वच्छता का पालन बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। ग्राहकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मामला? ऑनलाइन ऑर्डर करते समय ग्राहक अक्सर केवल पैकेज और डिलीवरी पर ध्यान देते हैं, लेकिन खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता इस बात पर भी निर्भर करती है कि उसे वेयरहाउस या डार्क स्टोर में किस तरह रखा गया था। अगर खाद्य उत्पाद गलत तापमान पर रखे जाएं, एक्सपायरी के बाद भी स्टॉक में मौजूद हों या अस्वच्छ वातावरण में रखे जाएं, तो उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से खाद्य सुरक्षा विभागों की ऐसी जांच को क्विक-कॉमर्स इंडस्ट्री के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Zepto और Blinkit पर कार्रवाई से क्या संदेश? ताजा कार्रवाई से साफ है कि तेज डिलीवरी के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा और नियामकीय अनुपालन भी कंपनियों के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है। वेयरहाउस और डार्क स्टोर में नियमों का पालन नहीं होने पर कंपनियों को लाइसेंस निलंबन या परिसर सील किए जाने जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। निष्कर्ष बेंगलुरु में Zepto के वेयरहाउस को खाद्य सुरक्षा उल्लंघनों के चलते सील किए जाने और मुंबई में Blinkit के डार्क स्टोर का खाद्य लाइसेंस निलंबित किए जाने से क्विक-कॉमर्स कंपनियों में खाद्य सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक तरफ ग्राहक कुछ ही मिनटों में सामान पाने की सुविधा चाहते हैं, वहीं दूसरी तरफ खाद्य उत्पादों की स्वच्छता, सही स्टोरेज और एक्सपायरी की जांच भी उतनी ही जरूरी है। अब देखना होगा कि संबंधित कंपनियां इन कमियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाती हैं। Source: Karnataka Food Safety Department / Maharashtra FDA / Latest Reports जय राष्ट्र न्यूज़

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HCL के सह-संस्थापक का बड़ा खुलासा, सिर्फ ₹1.87 लाख और 6 लोगों से शुरू हुआ था भारत का बड़ा टेक सफर

नई दिल्ली: भारत की दिग्गज टेक कंपनियों में शामिल HCL की शुरुआत कितने छोटे स्तर से हुई थी, इसका दिलचस्प खुलासा कंपनी के सह-संस्थापक अजय चौधरी ने किया है। HCL के 50 साल पूरे होने के मौके पर चौधरी ने 1976 के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि महज 6 लोगों और ₹1.87 लाख की पूंजी से एक ऐसा सपना शुरू हुआ था, जिसने आगे चलकर भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर की तस्वीर बदल दी। छह लोगों ने छोड़ी नौकरी और शुरू किया अपना सफर अजय चौधरी के मुताबिक, साल 1976 में छह युवा इंजीनियरों ने अपनी नौकरियां छोड़कर खुद की कंपनी शुरू करने का फैसला किया। इन छह संस्थापकों में शिव नाडर, अर्जुन मल्होत्रा, योगेश वैद्य, सुभाष अरोड़ा, डीएस पुरी और अजय चौधरी शामिल थे। उस समय भारत में आज की तरह स्टार्टअप संस्कृति, वेंचर कैपिटल या टेक कंपनियों का बड़ा नेटवर्क नहीं था। इसके बावजूद इन लोगों को भरोसा था कि माइक्रोप्रोसेसर और कंप्यूटर आने वाले समय में दुनिया बदल देंगे। ₹1.87 लाख जुटाकर शुरू किया कारोबार चौधरी ने बताया कि छह संस्थापकों ने मिलकर शुरुआती पूंजी के तौर पर ₹1.87 लाख जुटाए थे। इस रकम को बचत, उधार और दूसरे निजी संसाधनों से जुटाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूंजी को इकट्ठा करने के लिए एक संस्थापक ने अपनी कार तक बेच दी थी। आज के हजारों करोड़ रुपये के टेक कारोबार को देखते हुए यह शुरुआती रकम बेहद छोटी लग सकती है, लेकिन उस समय इसी सीमित पूंजी से छह लोगों ने भारत में कंप्यूटर बनाने का सपना देखा था। दिल्ली के छोटे से ऑफिस से शुरू हुआ सपना HCL का शुरुआती सफर दिल्ली के गोल्फ लिंक इलाके में एक छोटे से बरसाती कमरे से शुरू हुआ। उस समय कंपनी का नाम Microcomp रखा गया था। इन छह लोगों का लक्ष्य भारत में अपना कंप्यूटर तैयार करना था। लेकिन शुरुआत में उनके सामने कई बड़ी चुनौतियां थीं। सबसे बड़ी समस्या यह थी कि उनके पास कंप्यूटर बनाने के लिए आवश्यक मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस तक नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने अपने प्रयास जारी रखे। उस दौर में कंप्यूटर भारत के लिए नई चीज था 1970 के दशक में कंप्यूटर आज की तरह आम लोगों की जिंदगी का हिस्सा नहीं था। भारत में कंप्यूटर तकनीक अभी शुरुआती दौर में थी और बहुत कम लोगों को इसकी वास्तविक संभावनाओं का अंदाजा था। छह संस्थापकों ने इसी दौर में यह समझ लिया था कि माइक्रोप्रोसेसर आधारित तकनीक भविष्य में बड़ा बदलाव ला सकती है। उनका लक्ष्य केवल कंप्यूटर बेचने का नहीं था, बल्कि भारत में कंप्यूटर तकनीक विकसित करने का था। HCL ने आगे चलकर रचा टेक इतिहास छोटी शुरुआत के बाद HCL ने भारतीय कंप्यूटर उद्योग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कंपनी के आधिकारिक इतिहास के मुताबिक, 1978 में HCL ने भारत में स्वदेशी कंप्यूटर HCL 8C तैयार किया, जिसे कंपनी अपने शुरुआती तकनीकी मील के पत्थरों में गिनती है। इसके बाद HCL ने कंप्यूटर शिक्षा, UNIX आधारित सिस्टम, डेटाबेस तकनीक और अन्य क्षेत्रों में भी काम किया। धीरे-धीरे कंपनी का कारोबार भारत से निकलकर वैश्विक टेक बाजार तक पहुंचा। 50 साल बाद संस्थापक ने याद की शुरुआत HCL के पांच दशक पूरे होने के मौके पर अजय चौधरी ने अपनी पुरानी यादें साझा कीं। उन्होंने इस सफर की शुरुआत को केवल एक कंपनी बनाने की कहानी नहीं, बल्कि जोखिम उठाने और बड़े सपने देखने की कहानी बताया। उनके मुताबिक, उस समय छह लोगों के पास सीमित संसाधन थे, लेकिन भविष्य को लेकर विश्वास और कुछ नया करने की इच्छा थी। छोटी पूंजी, बड़ा सपना HCL की शुरुआती कहानी इस बात का उदाहरण भी है कि किसी बड़े कारोबार की शुरुआत हमेशा बड़ी पूंजी से नहीं होती। छह लोगों ने सीमित संसाधनों के साथ शुरुआत की और आगे चलकर भारतीय टेक उद्योग में अपनी पहचान बनाई। अजय चौधरी ने अपनी पोस्ट के अंत में युवाओं को बड़े सपने देखने, जोखिम लेने और लगातार आगे बढ़ने का संदेश भी दिया। निष्कर्ष ₹1.87 लाख, छह लोग और एक बड़ा सपना—यही HCL की शुरुआती कहानी थी। 1976 में एक छोटे से दिल्ली ऑफिस से शुरू हुआ यह सफर आज भारत की टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री की महत्वपूर्ण कहानियों में शामिल है। HCL के सह-संस्थापक अजय चौधरी द्वारा साझा की गई पुरानी यादों ने एक बार फिर दिखाया है कि बड़े बदलाव की शुरुआत कभी-कभी बेहद छोटे संसाधनों से होती है। छह संस्थापकों का वह प्रयोग आगे चलकर भारतीय तकनीकी क्षेत्र की एक बड़ी कहानी बन गया। Source: India Today / HCL Group जय राष्ट्र न्यूज़

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₹167 लीटर पेट्रोल! आखिर आम आदमी को कितना और निचोड़ा जाएगा? महंगे प्रीमियम ईंधन पर बढ़ी बहस

नई दिल्ली: देश में पेट्रोल की कीमतों को लेकर बहस के बीच अब ₹167 प्रति लीटर वाले प्रीमियम पेट्रोल की चर्चा तेज हो गई है। यह कीमत सामान्य पेट्रोल की नहीं, बल्कि Indian Oil के XP100 प्रीमियम पेट्रोल की है। 100-octane वाला यह ईंधन चुनिंदा पेट्रोल पंपों और शहरों में उपलब्ध है और सामान्य पेट्रोल की तुलना में काफी महंगा है। ₹167 वाला पेट्रोल आखिर है क्या? ₹167 प्रति लीटर का XP100 एक प्रीमियम हाई-ऑक्टेन पेट्रोल है। इसमें 100 RON ऑक्टेन रेटिंग होती है और इसे खासतौर पर ऐसे वाहनों के लिए तैयार किया गया है जिनके इंजन हाई-ऑक्टेन ईंधन से बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। रिपोर्टों के मुताबिक XP100 को लेकर हाल के दिनों में लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। इसकी कीमत करीब ₹167 प्रति लीटर होने के कारण यह सामान्य वाहन चालकों के लिए महंगा विकल्प है। क्या हर पेट्रोल पंप पर ₹167 का पेट्रोल मिलता है? नहीं। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ₹167 प्रति लीटर सामान्य पेट्रोल की कीमत नहीं है। XP100 एक प्रीमियम ईंधन है और इसकी उपलब्धता सीमित पेट्रोल पंपों पर होती है। इसलिए दिल्ली या किसी अन्य शहर में सामान्य पेट्रोल भरवाने वाले हर ग्राहक को ₹167 प्रति लीटर नहीं देना पड़ता। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर “पेट्रोल ₹167 लीटर” जैसी हेडलाइन देखने पर यह समझना जरूरी है कि बात प्रीमियम XP100 पेट्रोल की हो रही है, न कि सामान्य पेट्रोल की। E20 के बीच XP100 की मांग क्यों बढ़ी? देश में E20 पेट्रोल को लेकर चर्चा के बीच कुछ वाहन मालिक प्रीमियम और ethanol-free ईंधन की ओर भी देख रहे हैं। XP100 को E0 यानी बिना ethanol मिलाए गए पेट्रोल के रूप में पेश किया जाता है। हाल की रिपोर्टों में बताया गया है कि E20 को लेकर वाहन चालकों की चिंताओं के बीच XP100 जैसे प्रीमियम ईंधन की मांग में तेज बढ़ोतरी देखी गई है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर वाहन में XP100 डालना जरूरी है। वाहन निर्माता द्वारा सुझाए गए ईंधन और वाहन की तकनीकी जरूरतों को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण है। ₹167 का पेट्रोल आम आदमी के लिए क्यों चर्चा में है? प्रीमियम पेट्रोल की इतनी ऊंची कीमत ने ईंधन की कीमतों और आम उपभोक्ता की जेब को लेकर बहस को फिर तेज कर दिया है। अगर कोई व्यक्ति रोजाना वाहन चलाता है और सामान्य पेट्रोल की जगह ₹167 प्रति लीटर वाला ईंधन इस्तेमाल करता है, तो उसका मासिक ईंधन खर्च काफी बढ़ सकता है। उदाहरण के तौर पर 40 लीटर का टैंक भरने पर केवल ईंधन की कीमत करीब ₹6,680 बैठती है। यही कारण है कि यह ईंधन मुख्य रूप से प्रीमियम या हाई-परफॉर्मेंस वाहनों के ग्राहकों के बीच अधिक आकर्षण रखता है। क्या महंगा पेट्रोल ज्यादा माइलेज देगा? महंगा या हाई-ऑक्टेन पेट्रोल अपने आप हर वाहन में ज्यादा माइलेज की गारंटी नहीं देता। 100-octane ईंधन का फायदा मुख्य रूप से उन इंजनों में हो सकता है जिन्हें हाई-ऑक्टेन ईंधन के लिए डिजाइन या ट्यून किया गया है। सामान्य कार या बाइक में इसे इस्तेमाल करने से कीमत के अनुपात में समान फायदा मिले, यह जरूरी नहीं है। इसलिए केवल “महंगा मतलब बेहतर” मानकर XP100 इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है। प्रीमियम ईंधन और सामान्य पेट्रोल में बड़ा अंतर सामान्य पेट्रोल और XP100 जैसे प्रीमियम ईंधन में सबसे बड़ा अंतर ऑक्टेन रेटिंग और फ्यूल स्पेसिफिकेशन का है। XP100 की 100 RON रेटिंग इसे हाई-परफॉर्मेंस इंजन के लिए उपयुक्त बनाती है। वहीं सामान्य वाहन आमतौर पर निर्माता द्वारा निर्धारित नियमित पेट्रोल के अनुसार डिजाइन किए जाते हैं। इसलिए ग्राहक को अपने वाहन के मैनुअल में दी गई ईंधन संबंधी सिफारिश को जरूर देखना चाहिए। E20 को लेकर भी जारी है बहस भारत में ethanol blending को बढ़ाने की नीति के बीच E20 पेट्रोल को लेकर वाहन चालकों और विशेषज्ञों के बीच बहस जारी है। कुछ वाहन मालिकों ने माइलेज और वाहन प्रदर्शन को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। हालांकि इन व्यक्तिगत अनुभवों को सभी वाहनों पर लागू नहीं किया जा सकता। वाहन की उम्र, इंजन डिजाइन और निर्माता की compatibility भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आम ग्राहक के लिए क्या जरूरी है? अगर आपका वाहन सामान्य पेट्रोल के लिए डिजाइन किया गया है तो केवल कीमत देखकर XP100 खरीदना जरूरी नहीं है। वाहन निर्माता की सलाह के अनुसार ईंधन इस्तेमाल करना सबसे सुरक्षित विकल्प है। वहीं जिन वाहनों के लिए हाई-ऑक्टेन ईंधन की सिफारिश की गई है, उनके मालिक प्रीमियम पेट्रोल के विकल्प पर विचार कर सकते हैं। निष्कर्ष ₹167 प्रति लीटर पेट्रोल की खबर ने भले ही लोगों का ध्यान खींचा हो, लेकिन यह सामान्य पेट्रोल की कीमत नहीं है। ₹167 वाला ईंधन मुख्य रूप से Indian Oil XP100 प्रीमियम पेट्रोल है, जो 100-octane और E0 स्पेसिफिकेशन के साथ चुनिंदा जगहों पर उपलब्ध है। इसकी बढ़ती चर्चा E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस से भी जुड़ी हुई है। हालांकि आम वाहन चालकों के लिए यह जरूरी नहीं कि वे ₹167 वाला प्रीमियम ईंधन ही इस्तेमाल करें। वाहन निर्माता की सिफारिश के अनुसार ईंधन चुनना सबसे महत्वपूर्ण है। Source: Latest fuel reports / Indian Oil XP100-related reports जय राष्ट्र न्यूज़

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UPI लेनदेन पर शुल्क लगेगा? संजय सिंह का मोदी सरकार पर हमला, बिल वापस लेने की मांग

नई दिल्ली: UPI भुगतान को लेकर संसद में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित व्यवस्था से UPI के जरिए होने वाले भुगतान पर कारोबारियों पर टैक्स का बोझ बढ़ सकता है, जिसका असर आगे चलकर आम लोगों पर पड़ सकता है। आम आदमी पार्टी ने सरकार से इस प्रावधान को वापस लेने की मांग की है। संजय सिंह ने संसद में उठाया UPI का मुद्दा राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान संजय सिंह ने UPI लेनदेन से जुड़े प्रस्ताव पर सवाल उठाए। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि एक तरफ डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया जा रहा है और दूसरी तरफ ऐसे प्रावधान लाए जा रहे हैं जिनसे छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। संजय सिंह ने इस मुद्दे को आम आदमी और छोटे कारोबारियों से जोड़ते हुए सरकार से बिल वापस लेने की मांग की। “व्यापारियों से टैक्स लिया तो जनता पर पड़ेगा बोझ” AAP की ओर से जारी बयान के मुताबिक संजय सिंह का कहना है कि अगर UPI से होने वाले भुगतान पर कारोबारियों से अतिरिक्त शुल्क या टैक्स लिया जाता है, तो उसका बोझ अंततः ग्राहकों तक पहुंच सकता है। उनका तर्क है कि छोटे दुकानदार और कारोबारी अपनी अतिरिक्त लागत को वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में शामिल कर सकते हैं। ऐसे में डिजिटल भुगतान करने वाले ग्राहकों पर अप्रत्यक्ष रूप से असर पड़ने की आशंका जताई गई है। सरकार का जवाब—आम यूजर से UPI चार्ज नहीं लिया जाएगा हालांकि इस मामले में सरकार की ओर से महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण भी सामने आया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में कहा कि आम UPI यूजर्स से किसी तरह का UPI चार्ज नहीं लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि छोटे व्यापारियों पर MDR (Merchant Discount Rate) लगाने की बात नहीं है। संसद ने Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 को मंजूरी भी दे दी है। तो क्या UPI से पैसे भेजने पर लगेगा चार्ज? इस विवाद में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि आम लोगों के UPI भुगतान पर सीधे कोई नया शुल्क लगाए जाने की घोषणा नहीं हुई है। यानी अगर कोई व्यक्ति दुकान पर QR Code स्कैन करके ₹500 या ₹1,000 का भुगतान करता है, तो सरकार के मौजूदा स्पष्टीकरण के अनुसार ग्राहक से अलग से UPI चार्ज वसूलने की व्यवस्था नहीं है। संजय सिंह का विरोध मुख्य रूप से विधेयक में टैक्स से जुड़े प्रावधानों और उनके संभावित प्रभाव को लेकर है। छोटे कारोबारियों को लेकर AAP की चिंता AAP का कहना है कि छोटे व्यापारियों पर किसी भी अतिरिक्त लागत का प्रभाव व्यापक हो सकता है। पार्टी ने इसे छोटे कारोबारियों और आम जनता के हित से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी का दावा है कि डिजिटल इंडिया और कैशलेस भुगतान को बढ़ावा देने के बाद UPI से जुड़े लेनदेन पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना विरोधाभासी होगा। मोदी सरकार पर संजय सिंह का राजनीतिक हमला संजय सिंह ने इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर भी राजनीतिक हमला बोला। AAP के मुताबिक उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों का फायदा बड़े और विदेशी निवेशकों को मिल रहा है, जबकि छोटे कारोबारियों पर बोझ बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने सरकार से इस प्रावधान को वापस लेने की मांग की है। Taxation Bill 2026 को संसद की मंजूरी इस पूरे विवाद के बीच Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 संसद से पारित हो चुका है। रिपोर्ट के अनुसार राज्यसभा ने चर्चा के बाद Money Bill को लोकसभा को लौटाया और बाद में विधेयक को संसद की मंजूरी मिल गई। वित्त मंत्री ने इस दौरान UPI यूजर्स और छोटे व्यापारियों को लेकर आश्वासन दिया कि उन पर सीधे UPI/MDR चार्ज नहीं लगाया जाएगा। UPI भुगतान करने वालों के लिए क्या बदलेगा? फिलहाल आम UPI यूजर्स के लिए सबसे अहम बात यह है कि UPI से पैसे भेजने या QR Code के जरिए भुगतान करने पर कोई नया सीधा शुल्क लागू होने की घोषणा नहीं की गई है। हालांकि टैक्स व्यवस्था में बदलाव और उसके कारोबारी प्रभाव को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। इसलिए भविष्य में नियमों में कोई बदलाव होता है तो उसके आधिकारिक विवरण को देखना जरूरी होगा। निष्कर्ष UPI को लेकर संसद में जारी बहस के बीच संजय सिंह ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए Taxation Bill 2026 के प्रावधानों का विरोध किया है और इसे वापस लेने की मांग की है। AAP का दावा है कि व्यापारियों पर टैक्स या अतिरिक्त लागत बढ़ने से इसका असर आम उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है। वहीं, सरकार की ओर से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि आम UPI यूजर्स और छोटे व्यापारियों से नया UPI/MDR चार्ज नहीं लिया जाएगा। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि UPI से भुगतान करने वाले आम लोगों पर नया शुल्क लगा दिया गया है। Source: Aam Aadmi Party / Indian Express / The Statesman / Live Hindustan जय राष्ट्र न्यूज़

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आज भी ₹100 के पार पेट्रोल, दिल्ली में ₹102.12 और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर

नई दिल्ली: देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर आज, 11 अगस्त 2026 को भी लोगों की नजर बनी हुई है। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल की कीमत ₹95.20 प्रति लीटर बनी हुई है। मंगलवार को प्रमुख शहरों में ईंधन की कीमतों में बड़ा बदलाव नहीं हुआ। दिल्ली में पेट्रोल ₹102 के पार राष्ट्रीय राजधानी में पेट्रोल लगातार ₹100 प्रति लीटर से ऊपर बना हुआ है। आज दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर पर बिक रहा है, जबकि डीजल की कीमत ₹95.20 प्रति लीटर है। उपलब्ध ताजा आंकड़ों के अनुसार दोनों दरों में आज कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹100 के पार पहुंचने के बाद वाहन चालकों पर ईंधन खर्च का दबाव बढ़ा है। रोजाना वाहन इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए पेट्रोल की कीमत में मामूली बदलाव भी मासिक बजट पर असर डाल सकता है। मुंबई में पेट्रोल ₹111 के पार मुंबई में ईंधन की कीमत दिल्ली की तुलना में और ज्यादा है। मंगलवार को मुंबई में पेट्रोल ₹111.18 प्रति लीटर और डीजल करीब ₹99.82 प्रति लीटर पर रहा। महानगरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में अंतर मुख्य रूप से स्थानीय टैक्स और अन्य शुल्कों के कारण देखने को मिलता है। अन्य बड़े शहरों में भी ईंधन के दाम ऊंचे 11 अगस्त को देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अलग-अलग स्तर पर बनी हुई हैं। दिल्ली के अलावा मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और अन्य बड़े शहरों में भी वाहन चालकों की नजर रोजाना के ईंधन रेट पर है। शहरों के बीच कीमतों में अंतर राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले VAT और स्थानीय करों के कारण होता है। कच्चे तेल की कीमतों पर भी नजर ईंधन कीमतों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी चर्चा में है। मंगलवार की रिपोर्टों के मुताबिक Brent crude करीब 5% बढ़कर $87.72 प्रति बैरल तक पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में लगातार तेजी रहने पर आगे ईंधन बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। आज पेट्रोल-डीजल के दाम क्यों नहीं बदले? अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद 11 अगस्त को प्रमुख भारतीय शहरों में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें स्थिर रहीं। इसका मतलब यह है कि आज कच्चे तेल की तेजी का सीधा असर घरेलू पेट्रोल-डीजल के दामों में दिखाई नहीं दिया है। सुबह 6 बजे जारी होते हैं नए रेट भारत में सरकारी तेल कंपनियां आम तौर पर पेट्रोल और डीजल के दैनिक रेट सुबह 6 बजे अपडेट करती हैं। इसलिए वाहन चालकों के लिए रोजाना नए रेट की जांच करना महत्वपूर्ण है। अगर किसी शहर में टैक्स या अन्य स्थानीय स्तर पर बदलाव होता है तो संबंधित क्षेत्र में पेट्रोल-डीजल की कीमत अलग हो सकती है। आम आदमी की जेब पर असर पेट्रोल की कीमत ₹100 से ऊपर बने रहने का सीधा असर निजी वाहन इस्तेमाल करने वाले लोगों के बजट पर पड़ता है। लंबी दूरी की यात्रा, रोजाना ऑफिस आने-जाने और व्यावसायिक वाहनों के खर्च में भी ईंधन की कीमत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। डीजल की कीमतें भी परिवहन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि माल ढुलाई और कई व्यावसायिक वाहनों में डीजल का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। आगे क्या रहेगा नजर में? आने वाले दिनों में बाजार की नजर कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों, भू-राजनीतिक तनाव, रुपये की डॉलर के मुकाबले स्थिति और तेल की वैश्विक आपूर्ति पर रहेगी। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है तो भारतीय ईंधन बाजार पर भी दबाव बना रह सकता है। हालांकि घरेलू पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों का अगला बदलाव तेल कंपनियों के दैनिक मूल्य निर्धारण पर निर्भर करेगा। निष्कर्ष 11 अगस्त 2026 को दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर पर स्थिर है। मुंबई में पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹99.82 प्रति लीटर के आसपास है। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent crude की कीमतों में तेजी के बीच घरेलू ईंधन दरों में आज बड़ा बदलाव नहीं हुआ। आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक घटनाक्रमों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। Source: Business Today / NDTV Profit / Indian fuel price data जय राष्ट्र न्यूज़

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रुपया शुरुआती कारोबार में 8 पैसे कमजोर होकर ₹95.38 प्रति डॉलर पर पहुंचा, कच्चे तेल की कीमतों से दबाव

मुंबई: भारतीय रुपया मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 8 पैसे कमजोर होकर ₹95.38 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। वैश्विक बाजारों में जारी अनिश्चितता और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच रुपये पर दबाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में रुपये पर दबाव इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया कमजोर स्तर पर खुला और शुरुआती कारोबार में ₹95.38 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्र में रुपया करीब ₹95.30 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। मंगलवार की शुरुआत में रुपये की कमजोरी के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारक बताए जा रहे हैं। West Asia संकट का बाजार पर असर West Asia में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक निवेशकों की चिंता बनी हुई है। क्षेत्र में शांति वार्ता को लेकर स्पष्ट प्रगति नहीं होने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इससे देश का आयात बिल बढ़ने और डॉलर की मांग बढ़ने की संभावना रहती है, जिसका दबाव रुपये पर पड़ता है। महंगा कच्चा तेल बना बड़ी चिंता अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भारतीय मुद्रा पर दबाव बढ़ाया है। रिपोर्टों के मुताबिक Brent crude में भी तेजी देखने को मिली है और बाजार की नजर West Asia से जुड़े घटनाक्रम पर बनी हुई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने पर देश को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। शेयर बाजार में कमजोरी का भी असर रुपये पर दबाव का एक कारण घरेलू शेयर बाजार में शुरुआती कमजोरी भी रही। मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक शुरुआती कारोबार में दबाव में नजर आए। Reuters के अनुसार शुरुआती कारोबार में Nifty करीब 0.43% और Sensex करीब 0.48% नीचे थे। वित्तीय और बैंकिंग शेयरों में कमजोरी ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया। RBI की भूमिका से बड़ी गिरावट पर रोक रुपये में कमजोरी के बावजूद बाजार में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की संभावित दखलंदाजी पर भी नजर बनी हुई है। बाजार सूत्रों के मुताबिक सरकारी बैंकों के जरिए डॉलर की बिक्री से रुपये को कुछ समर्थन मिला, जिससे शुरुआती गिरावट सीमित रही। विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी रुपये की दिशा के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। महंगाई पर भी पड़ सकता है असर रुपये में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर आने वाले समय में महंगाई पर भी पड़ सकता है। अगर आयातित तेल महंगा होता है, तो परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ सकती है। इसका असर पेट्रोलियम उत्पादों के अलावा कई अन्य वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से पड़ सकता है। निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों पर अब बाजार की नजर कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों पर है। खासतौर पर West Asia संकट, कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां रुपये की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। इसके अलावा अमेरिकी महंगाई के आंकड़े और भारत के आगामी आर्थिक आंकड़े भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। रुपये के लिए आगे की चुनौती रुपया पिछले कुछ समय से डॉलर के मुकाबले कमजोर स्तरों के आसपास कारोबार कर रहा है। सोमवार को भी शुरुआती कारोबार में रुपया 8 पैसे कमजोर होकर ₹95.25 प्रति डॉलर पर पहुंचा था। ऐसे में अगर कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आती है या वैश्विक तनाव बढ़ता है, तो रुपये पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल सकता है। वहीं RBI की कार्रवाई और विदेशी पूंजी प्रवाह रुपये को समर्थन दे सकते हैं। निष्कर्ष 11 अगस्त 2026 को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया 8 पैसे कमजोर होकर ₹95.38 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। West Asia संकट के बीच कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और घरेलू शेयर बाजार में कमजोरी ने रुपये पर दबाव बढ़ाया। हालांकि RBI की संभावित दखलंदाजी और विदेशी पूंजी प्रवाह से गिरावट को सीमित करने में मदद मिल रही है। आने वाले कारोबार में कच्चे तेल, डॉलर इंडेक्स, विदेशी निवेश और West Asia से जुड़ी खबरें रुपये की दिशा के लिए सबसे अहम संकेतक रहेंगे। Source: PTI / Reuters / Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

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ASIRT Synergy Biz Conclave 2026 में टेक्नोलॉजी सहयोग और चैनल ग्रोथ पर जोर, इंडस्ट्री लीडर्स ने इनोवेशन पर की चर्चा

नई दिल्ली: ASIRT Synergy Biz Conclave 2026 में IT और technology ecosystem से जुड़े industry leaders ने technology collaboration, innovation, strategic partnerships और channel growth को लेकर विचार साझा किए। सम्मेलन का मुख्य फोकस बदलते technology landscape में businesses के लिए collaboration और मजबूत partner ecosystem की भूमिका पर रहा। कार्यक्रम में industry experts और technology partners ने इस बात पर जोर दिया कि तेजी से बदलते बाजार में केवल बेहतर products और services पर्याप्त नहीं हैं। कंपनियों को customers तक पहुंच बढ़ाने, नए business opportunities तैयार करने और technology adoption को तेज करने के लिए मजबूत partnerships की जरूरत है। Technology Collaboration बना सम्मेलन का प्रमुख मुद्दा Synergy Biz Conclave 2026 में technology collaboration को business growth के महत्वपूर्ण आधार के रूप में पेश किया गया। चर्चा में इस बात पर जोर रहा कि technology companies, solution providers, distributors और channel partners के बीच बेहतर coordination से नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। Industry leaders के मुताबिक, technology ecosystem में collaboration कंपनियों को नई capabilities तक पहुंच दिलाने के साथ-साथ customers की बदलती जरूरतों को तेजी से पूरा करने में मदद करता है। Channel Partners की भूमिका पर विशेष जोर कार्यक्रम में channel ecosystem को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। Technology products और solutions को बड़े customer base तक पहुंचाने में channel partners की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। Experts ने कहा कि manufacturers और technology providers के साथ channel partners का मजबूत relationship business expansion में अहम योगदान दे सकता है। बेहतर training, communication और joint go-to-market strategies से partners को नए markets तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है। Innovation को Growth से जोड़ने की जरूरत Conclave में innovation को केवल नई technology विकसित करने तक सीमित न रखने पर जोर दिया गया। Industry leaders ने कहा कि innovation का वास्तविक प्रभाव तब दिखाई देता है जब उसे business requirements और customer problems के समाधान से जोड़ा जाए। AI, cloud, cybersecurity, automation और digital transformation जैसी technologies के बढ़ते इस्तेमाल के बीच businesses के लिए जरूरी हो गया है कि वे technology investments को measurable business outcomes से जोड़ें। Strategic Partnerships पर चर्चा कार्यक्रम में strategic partnerships को भी business growth की महत्वपूर्ण strategy बताया गया। अलग-अलग technology companies और ecosystem players के बीच partnerships से expertise, resources और market reach को एक साथ लाया जा सकता है। Experts के अनुसार, ऐसे collaborations विशेष रूप से छोटे और मध्यम technology businesses के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं, क्योंकि partnerships के जरिए वे बड़े customer segments और नए markets तक पहुंच बना सकते हैं। Technology Ecosystem में बदल रही है Competition आज technology sector में competition केवल individual companies के बीच नहीं रह गया है। कई क्षेत्रों में पूरा ecosystem और partner network competitive advantage तय करता है। इसी वजह से companies अब distributors, resellers, system integrators और अन्य technology partners के साथ लंबे समय के relationships बनाने पर अधिक ध्यान दे रही हैं। Business Growth के लिए नई रणनीतियों की जरूरत Synergy Biz Conclave में यह संदेश भी सामने आया कि technology industry में आने वाले समय में growth के लिए companies को traditional business models से आगे बढ़ना होगा। Customer expectations में बदलाव, rapid digitalisation और emerging technologies के कारण businesses को लगातार अपनी strategies को update करना होगा। इसमें innovation, collaboration और channel expansion महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। Industry Leaders ने साझा किए अनुभव कार्यक्रम में शामिल industry leaders ने technology market में अपने अनुभव और business growth से जुड़े perspectives साझा किए। Discussions में partnership models, technology adoption और channel development जैसे मुद्दों को प्रमुखता मिली। इन चर्चाओं का उद्देश्य technology ecosystem के अलग-अलग stakeholders के बीच बेहतर coordination और business opportunities को बढ़ावा देना रहा। छोटे और मध्यम IT Businesses के लिए अवसर ASIRT जैसे industry platforms छोटे और मध्यम IT businesses के लिए भी networking और collaboration का अवसर उपलब्ध कराते हैं। ऐसे events में technology providers और channel partners के बीच नए business relationships बनने की संभावना रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में SMEs और channel-driven technology businesses के लिए partnerships growth का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती हैं। निष्कर्ष ASIRT Synergy Biz Conclave 2026 में technology collaboration, innovation, strategic partnerships और channel growth को business expansion के प्रमुख drivers के रूप में रेखांकित किया गया। Industry leaders ने इस बात पर जोर दिया कि तेजी से बदलते technology environment में businesses को केवल अपने products पर निर्भर रहने के बजाय मजबूत ecosystem और partnerships तैयार करनी होंगी। AI, cloud, cybersecurity और digital transformation जैसी technologies के विस्तार के बीच collaboration और channel ecosystem आने वाले समय में technology sector की growth strategy का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं। Source: ASIRT / Synergy Biz Conclave 2026-related industry reports जय राष्ट्र न्यूज़

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बिजनेस | Gold Rate Today: 8 अगस्त को सोने के भाव में तेजी, 18K, 22K और 24K गोल्ड के रेट पर निवेशकों की नजर

नई दिल्ली: सोने की कीमतों में शनिवार, 8 अगस्त 2026 को तेजी देखने को मिली। देश में 24 कैरेट सोने का औसत भाव करीब ₹14,970 प्रति ग्राम, 22 कैरेट सोना करीब ₹13,712 प्रति ग्राम और 18 कैरेट सोना करीब ₹11,227 प्रति ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, शहर और स्थानीय बाजार के अनुसार कीमतों में मामूली अंतर देखने को मिल सकता है। सोने की कीमतों में हालिया तेजी के बीच निवेशकों और ज्वेलरी खरीदारों की नजर घरेलू बुलियन मार्केट के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतों और रुपये-डॉलर की चाल पर बनी हुई है। आज 18K, 22K और 24K सोने का भाव क्या है? 8 अगस्त को राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध रिटेल गोल्ड रेट के अनुसार 24K सोना लगभग ₹14,970 प्रति ग्राम, 22K सोना ₹13,712 प्रति ग्राम और 18K सोना करीब ₹11,227 प्रति ग्राम रहा। ये दरें प्रति ग्राम हैं और ज्वेलरी खरीदते समय अंतिम कीमत इससे अलग हो सकती है। 24 कैरेट सोना सबसे अधिक शुद्धता वाला होता है, जबकि 22 कैरेट का इस्तेमाल पारंपरिक भारतीय आभूषणों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। 18 कैरेट सोना आमतौर पर डायमंड, व्हाइट गोल्ड और रोज गोल्ड जैसे आभूषणों में इस्तेमाल होता है। देश के अलग-अलग शहरों में क्यों बदलता है सोने का भाव? सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमत लगभग समान आधार देती है, लेकिन भारत के अलग-अलग शहरों में अंतिम भाव अलग हो सकता है। इसके पीछे स्थानीय मांग, परिवहन और इंश्योरेंस लागत, ज्वेलर्स के मार्जिन और स्थानीय बाजार की परिस्थितियां प्रमुख कारण हैं। उदाहरण के तौर पर 8 अगस्त को अमरावती में 24K सोने का भाव ₹15,235 प्रति ग्राम, 22K ₹13,965 प्रति ग्राम और 18K ₹11,426 प्रति ग्राम दर्ज किया गया। इससे साफ है कि शहर के हिसाब से सोने की कीमत में अंतर हो सकता है। दिल्ली में आज का गोल्ड रेट दिल्ली में 8 अगस्त के लिए 22K और 24K सोने की कीमतों को लेकर ताजा बाजार आंकड़े उपलब्ध हैं। Forbes Advisor के अनुसार दिल्ली के रेट को दिन के दौरान अपडेट किया गया और शहर में 22K तथा 24K सोने के भाव की अलग-अलग निगरानी की जा रही है। दिल्ली जैसे बड़े बुलियन बाजार में अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमत, रुपये की चाल और स्थानीय मांग का असर रिटेल कीमतों पर पड़ता है। सोने की कीमतों में तेजी के पीछे क्या कारण हैं? सोने की कीमत कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारकों से प्रभावित होती है। इनमें अंतरराष्ट्रीय बुलियन कीमतें, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, ब्याज दरों की उम्मीदें, महंगाई, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और निवेशकों की सुरक्षित निवेश की मांग शामिल हैं। जब वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक अक्सर सोने को अपेक्षाकृत सुरक्षित परिसंपत्ति के रूप में देखते हैं। इससे मांग बढ़ने पर कीमतों को समर्थन मिल सकता है। अगस्त में सोने ने पकड़ी तेजी NDTV के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक अगस्त की शुरुआत से सोने के भाव में बढ़त दर्ज की गई है। 1 अगस्त को 24K सोना करीब ₹14,306 प्रति ग्राम था, जो 7 अगस्त तक बढ़कर ₹14,868 प्रति ग्राम पहुंच गया। इसी अवधि में 22K सोना ₹13,106 से बढ़कर ₹13,617 और 18K सोना ₹10,730 से बढ़कर ₹11,148 प्रति ग्राम हुआ। इससे अगस्त के शुरुआती दिनों में सोने के बाजार में सकारात्मक रुझान दिखाई देता है। ज्वेलरी खरीदते समय सिर्फ गोल्ड रेट न देखें ज्वेलरी खरीदते समय केवल 18K, 22K या 24K के प्रति ग्राम भाव को देखना पर्याप्त नहीं है। अंतिम बिल में मेकिंग चार्ज, वेस्टेज/डिजाइन चार्ज और GST जैसी लागतें भी शामिल हो सकती हैं। इसी वजह से ऑनलाइन दिखने वाला गोल्ड रेट और ज्वेलरी दुकान पर मिलने वाली अंतिम कीमत अलग हो सकती है। खरीदारों को खरीदारी से पहले प्रति ग्राम रेट और सभी अतिरिक्त शुल्क की जानकारी लेनी चाहिए। हॉलमार्क और HUID जरूर जांचें सोने की ज्वेलरी खरीदते समय BIS हॉलमार्क, शुद्धता का निशान जैसे 22K 916 या 18K 750 और HUID की जांच करना महत्वपूर्ण है। इससे खरीदार को सोने की घोषित शुद्धता की पुष्टि करने में मदद मिलती है। निवेशकों की नजर बुलियन मार्केट पर सोने में हालिया तेजी के बीच निवेशकों की नजर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बुलियन मार्केट पर बनी हुई है। सोने की कीमतों में आगे की दिशा तय करने में ग्लोबल मार्केट, रुपये की चाल, ब्याज दरों और आर्थिक परिस्थितियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। हालांकि, केवल एक दिन की कीमत देखकर निवेश का फैसला करना उचित नहीं माना जाता। निवेशकों को अपने निवेश लक्ष्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए। निष्कर्ष 8 अगस्त 2026 को सोने के भाव में तेजी का रुख बना हुआ है और 18K, 22K तथा 24K गोल्ड की कीमतों पर खरीदारों और निवेशकों की नजर है। अगस्त की शुरुआत से घरेलू सोने की कीमतों में बढ़त दर्ज हुई है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार, रुपये की चाल और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां सोने की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। Source: NDTV Gold Rate, Forbes Advisor India, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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लोकसभा ने UPI लेनदेन पर संभावित MDR शुल्क का रास्ता खोलने वाला विधेयक पारित किया, डिजिटल भुगतान क्षेत्र में बड़ी बहस

नई दिल्ली: लोकसभा ने Payment and Settlement Systems (PSS) Act, 2007 में संशोधन से जुड़े प्रावधानों वाला Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 पारित कर दिया है। इस संशोधन के बाद केंद्र सरकार को भविष्य में Unified Payments Interface (UPI) सहित अधिसूचित डिजिटल भुगतान माध्यमों पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने की अनुमति देने का कानूनी अधिकार मिल जाएगा। हालांकि, विधेयक पारित होने का मतलब यह नहीं है कि UPI पर तुरंत शुल्क लग गया है। क्या बदलेगा? अब तक UPI भुगतान पर उपभोक्ताओं से कोई शुल्क नहीं लिया जाता था और व्यापारियों पर भी MDR लागू नहीं था। नए संशोधन के बाद सरकार आवश्यकता पड़ने पर अधिसूचना जारी करके बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को कुछ श्रेणियों के UPI लेनदेन पर MDR लगाने की अनुमति दे सकती है। यह कदम डिजिटल भुगतान ढांचे को वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से उठाया गया बताया जा रहा है। क्या आम उपभोक्ता को भुगतान करना होगा? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित MDR उपभोक्ताओं पर नहीं, बल्कि व्यापारियों (Merchants) पर लागू होगा। उन्होंने कहा कि आम लोग पहले की तरह बिना किसी शुल्क के UPI का उपयोग कर सकेंगे। सरकार का उद्देश्य केवल भुगतान व्यवस्था के संचालन से जुड़े खर्चों के लिए कानूनी ढांचा उपलब्ध कराना है। छोटे लेनदेन पर असर नहीं सरकारी सूत्रों और उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार ₹2,000 तक के अधिकांश छोटे UPI भुगतान पहले की तरह शुल्क-मुक्त रहने की संभावना है। यदि भविष्य में MDR लागू किया भी जाता है, तो उसका दायरा मुख्यतः बड़े व्यापारी लेनदेन तक सीमित हो सकता है। अंतिम निर्णय सरकार द्वारा अधिसूचना जारी होने के बाद ही प्रभावी होगा। डिजिटल भुगतान उद्योग की प्रतिक्रिया बैंकिंग और फिनटेक उद्योग लंबे समय से तर्क दे रहे थे कि पूरी तरह निःशुल्क UPI मॉडल के कारण भुगतान अवसंरचना (Infrastructure) को बनाए रखने की लागत लगातार बढ़ रही है। उनका कहना है कि सीमित MDR व्यवस्था से बैंक, NPCI और भुगतान सेवा प्रदाता तकनीकी निवेश, साइबर सुरक्षा और नई सेवाओं में अधिक निवेश कर सकेंगे। दूसरी ओर कई व्यापारी संगठनों ने आशंका जताई है कि यदि MDR लागू हुआ तो छोटे कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है। राजनीतिक बहस विधेयक संसद में विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच पारित हुआ। विपक्ष ने आरोप लगाया कि इस तरह का महत्वपूर्ण कानून पर्याप्त चर्चा के बिना पारित किया गया, जबकि सरकार का कहना है कि यह केवल भविष्य के लिए कानूनी प्रावधान उपलब्ध कराता है और किसी प्रकार का तत्काल शुल्क लागू नहीं करता। निष्कर्ष लोकसभा द्वारा पारित संशोधन ने UPI पर संभावित MDR लागू करने का कानूनी रास्ता अवश्य खोला है, लेकिन फिलहाल आम उपभोक्ताओं के लिए UPI भुगतान पहले की तरह मुफ्त है। भविष्य में किसी भी प्रकार का शुल्क लागू करने के लिए केंद्र सरकार को अलग से अधिसूचना जारी करनी होगी। Source: Ministry of Finance | Lok Sabha Proceedings जय राष्ट्र न्यूज़

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