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भारत की 7.8% GDP Growth पर छिड़ी बड़ी बहस, दो पूर्व Chief Economic Advisers आमने-सामने

नई दिल्ली, 5 सितंबर 2026: भारत की पहली तिमाही की 7.8% वास्तविक GDP growth को लेकर आर्थिक बहस तेज हो गई है। पूर्व Chief Economic Adviser Arvind Subramanian ने सरकारी आंकड़ों की transparency और credibility पर सवाल उठाए हैं, जबकि एक अन्य पूर्व CEA K.V. Subramanian ने आंकड़ों का बचाव करते हुए वैकल्पिक 2.6% growth estimate को गलत बताया है। Q1 में 7.8% बढ़ी भारत की अर्थव्यवस्था Ministry of Statistics and Programme Implementation के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक FY 2026-27 की April-June quarter में real GDP बढ़कर ₹81.36 लाख करोड़ रही, जो पिछले साल की समान अवधि के ₹75.46 लाख करोड़ से 7.8% अधिक है। Nominal GDP growth 10.3% दर्ज की गई। Arvind Subramanian ने उठाए transparency पर सवाल Arvind Subramanian ने माना कि भारतीय अर्थव्यवस्था में activity बेहतर हुई है, लेकिन उन्होंने कहा कि 7.8% growth की magnitude को लेकर सरकार को ज्यादा स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। उन्होंने GDP methodology और पुराने आंकड़ों में हुए revisions पर अधिक transparency की मांग की। ‘2.6% वाला calculation technically flawed’ हालांकि Arvind Subramanian ने पूर्व Finance Secretary Subhash Chandra Garg के उस calculation से भी असहमति जताई जिसमें growth को करीब 2.6% बताया गया था। उनके अनुसार इसमें old और new GDP series की तुलना की गई, जो technically सही comparison नहीं है। K.V. Subramanian ने 7.8% आंकड़े का किया बचाव पूर्व CEA K.V. Subramanian ने 2.6% growth वाले दावे को “absolutely bogus” बताते हुए कहा कि अलग-अलग GDP series के आंकड़ों की तुलना करना गलत है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध economic indicators broadly मजबूत growth को support करते हैं। Investment, credit और construction के आंकड़ों का दिया हवाला K.V. Subramanian ने capital expenditure, bank credit, capital goods production और construction activity में मजबूत growth का हवाला देते हुए कहा कि ये indicators 2.6% जैसी कमजोर GDP growth से मेल नहीं खाते। सरकार के official factsheet के मुताबिक Q1 में investment 11.9%, household consumption 7.1% और exports 12% बढ़े। GDP series बदलने से क्यों बढ़ी बहस? भारत ने GDP calculation के लिए नया 2022-23 base year अपनाया है। नई methodology के तहत पुराने GDP estimates में revisions हुए हैं। आलोचकों का कहना है कि इन revisions की वजह और methodology ज्यादा साफ तरीके से समझाई जानी चाहिए, जबकि सरकार का कहना है कि revised system economy की मौजूदा structure को बेहतर तरीके से capture करता है। एक बात पर दोनों economists सहमत तेज मतभेद के बावजूद Arvind Subramanian और K.V. Subramanian दोनों ने GDP calculation की methodology, underlying data और revisions को लेकर अधिक स्पष्टता और transparency की जरूरत पर सहमति जताई। source – India Today / Ministry of Statistics & Programme Implementationजय राष्ट्र न्यूज़

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SpiceJet को बड़ी राहत! Creditor से समझौते के बाद Insolvency केस में मिली अस्थायी राहत

नई दिल्ली: आर्थिक दबाव से जूझ रही एयरलाइन SpiceJet को insolvency मामले में फिलहाल बड़ी राहत मिली है। National Company Law Tribunal (NCLT) ने aircraft lessor Aviator ML 29641 Ltd के साथ हुए समझौते के बाद उसकी insolvency petition वापस लेने की अनुमति दे दी। हालांकि, एयरलाइन के खिलाफ बाकी insolvency मामलों का समाधान अभी नहीं हुआ है। ₹58.64 करोड़ के डिफॉल्ट से जुड़ा था मामला Aviator ML ने SpiceJet पर करीब ₹58.64 करोड़ के कथित डिफॉल्ट को लेकर Insolvency and Bankruptcy Code के तहत याचिका दायर की थी। मामला NCLT में लंबे समय से चल रहा था और सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित रखा जा चुका था। अंतिम चरण में SpiceJet और Aviator ML के बीच समझौता हुआ, जिसके बाद lessor ने अपनी insolvency petition वापस लेने की मांग की। NCLT ने दी राहत, लेकिन लगाई ₹15 लाख की लागत NCLT ने बुधवार को Aviator ML को याचिका वापस लेने की अनुमति दी, लेकिन SpiceJet और Aviator ML दोनों पर ₹15-15 लाख की लागत भी लगाई। दोनों पक्षों को यह राशि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में जमा करने का निर्देश दिया गया। ट्रिब्यूनल ने आखिरी समय में settlement की जानकारी देने के तरीके पर नाराजगी जताई। अदालत के सामने मामला आदेश के लिए सुरक्षित था और settlement की सूचना बाद में दी गई थी। सात और Insolvency मामलों की चुनौती बरकरार यह राहत SpiceJet के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे एयरलाइन की पूरी insolvency समस्या खत्म नहीं हुई है। कंपनी के खिलाफ अन्य aircraft lessors की सात insolvency petitions अभी भी लंबित हैं। NCLT के नए बेंच के सामने इन मामलों की fresh hearing होगी। इसका मतलब है कि SpiceJet को तत्काल insolvency प्रक्रिया में जाने से समय मिल गया है, लेकिन वित्तीय संकट अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। मौजूदा मैनेजमेंट के पास रहेगा नियंत्रण इस घटनाक्रम का एक बड़ा फायदा यह है कि फिलहाल SpiceJet का मौजूदा management एयरलाइन का संचालन जारी रख सकेगा। Reuters के मुताबिक fresh hearing का फैसला SpiceJet के लिए राहत है, जबकि creditors के लिए यह उनके debt-recovery प्रयासों में एक झटका माना जा रहा है। SpiceJet पर वित्तीय दबाव अभी कायम SpiceJet पिछले कुछ समय से गंभीर वित्तीय चुनौतियों से गुजर रही है। एयरलाइन की market share जून 2026 में घटकर करीब 1.9% रह गई, जबकि 2019 में यह करीब 15% थी। कंपनी को aircraft grounding, creditor disputes और अन्य वित्तीय दबावों का सामना करना पड़ रहा है। यानी एक creditor के साथ settlement ने SpiceJet को अस्थायी राहत जरूर दी है, लेकिन आगे की राह अभी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। अब आगे क्या होगा? अब SpiceJet के खिलाफ बाकी insolvency petitions की सुनवाई नए NCLT bench के सामने होगी। कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बाकी creditors के साथ भी समझौते करना और अपने वित्तीय हालात को स्थिर करना होगी। फिलहाल Aviator ML मामले में राहत SpiceJet के लिए एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसे insolvency संकट का स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। स्रोत: Reuters, NCLT, Economic Times, Moneycontrol, Free Press Journal Jai Rashtra News

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शेयर बाजार में जोरदार वापसी! Sensex 592 अंक चढ़ा, Nifty ने 24,200 का स्तर फिर हासिल किया

नई दिल्ली: लगातार कई कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार ने 20 अगस्त 2026 को जोरदार वापसी की। शुरुआती कारोबार में Sensex 592.55 अंक चढ़कर 77,504.80 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि Nifty 50 करीब 147 अंक बढ़कर 24,200 के ऊपर पहुंच गया। बाद में तेजी और मजबूत हुई और Sensex करीब 700 अंक तथा Nifty 24,265 के आसपास तक पहुंच गया। सात दिन की गिरावट पर लगा ब्रेक बाजार में यह तेजी खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि Nifty इससे पहले लगातार सात कारोबारी सत्रों में गिरावट दर्ज कर चुका था। 19 अगस्त को Nifty 24,078.30 और Sensex 76,909.68 पर बंद हुए थे। आज की तेजी ने निवेशकों को राहत दी और बाजार में फिर से खरीदारी का माहौल देखने को मिला। IT और बैंकिंग शेयरों में जोरदार खरीदारी आज की तेजी में IT और वित्तीय शेयर प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। शुरुआती कारोबार में IT इंडेक्स करीब 1.4% चढ़ा, जबकि वित्तीय शेयरों में भी मजबूती रही। व्यापक बाजार में भी Midcap और Smallcap इंडेक्स हरे निशान में रहे। इससे संकेत मिला कि निवेशक हालिया गिरावट के बाद चुनिंदा शेयरों में दोबारा खरीदारी कर रहे हैं। US Bond Yields में गिरावट से बाजार को सहारा आज की तेजी का एक बड़ा कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी रहा। अमेरिका के Treasury Department ने लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड की buyback operations का आकार बढ़ाने की घोषणा की, जिससे वैश्विक बॉन्ड बाजार में sentiment बेहतर हुआ। US 10-year और 30-year Treasury yields में गिरावट ने emerging markets समेत जोखिम वाली परिसंपत्तियों के प्रति निवेशकों का रुझान बेहतर किया। Global Markets से भी मिले सकारात्मक संकेत भारतीय बाजार को एशियाई और अमेरिकी बाजारों से भी सकारात्मक संकेत मिले। वैश्विक बाजारों में sentiment सुधरने के बाद घरेलू निवेशकों ने भी खरीदारी बढ़ाई। Reuters के अनुसार आज Sensex करीब 0.66% और Nifty करीब 0.50% ऊपर खुला। Crude Oil और Iran तनाव पर नजर हालांकि बाजार की पूरी तस्वीर अभी भी जोखिम से मुक्त नहीं है। Iran-US तनाव और ऊंचे crude oil prices भारतीय बाजार के लिए बड़ी चिंता बने हुए हैं। पिछले दिनों Brent crude करीब $92 प्रति बैरल तक पहुंच गया था, जिससे inflation और भारत के import bill को लेकर चिंता बढ़ी थी। इसलिए आज की तेजी को फिलहाल strong rebound के रूप में देखा जा रहा है, न कि लंबी अवधि की तेजी की पक्की शुरुआत के रूप में। निवेशकों के लिए राहत, लेकिन सावधानी जरूरी आज की तेजी ने बाजार में भरोसा जरूर लौटाया है, लेकिन लगातार ऊंचे तेल दाम, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और Middle East geopolitical tensions अभी भी बाजार की दिशा प्रभावित कर सकते हैं। अगर Nifty 24,200 के ऊपर मजबूती बनाए रखता है, तो बाजार में recovery का momentum आगे बढ़ सकता है। वहीं इस स्तर से नीचे फिसलने पर हालिया volatility दोबारा बढ़ सकती है। स्रोत: Reuters, Business Standard, Amar Ujala Jai Rashtra News

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ईरान के साथ कारोबार पर Trump की चेतावनी! भारत के एक्सपोर्ट और तेल कारोबार पर बढ़ सकती है मुश्किल

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ आर्थिक संबंध रखने वाले देशों, कंपनियों और वित्तीय संस्थानों को कड़ी चेतावनी दी है। Trump ने ईरान के खिलाफ नए अभियान को “Economic D-Day” बताते हुए कहा कि जो भी देश Tehran को आर्थिक मदद या किसी तरह की “lifeline” देगा, उसे गंभीर आर्थिक परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। भारत के लिए क्यों अहम है Trump की चेतावनी? भारत और ईरान के बीच व्यापार पिछले कुछ वर्षों में काफी कम हुआ है, लेकिन दोनों देशों के बीच अभी भी महत्वपूर्ण कारोबारी संबंध हैं। 2025-26 में भारत का ईरान को निर्यात करीब $1.25 बिलियन रहा, जबकि भारत ने ईरान से करीब $370 मिलियन का आयात किया। यानी भारत का ईरान के साथ लगभग $880 मिलियन का व्यापार अधिशेष रहा। Trump की नई चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिका ईरान की अर्थव्यवस्था और तेल कारोबार पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। यदि भविष्य में secondary sanctions या अन्य प्रतिबंधों का दायरा बढ़ता है, तो ईरान के साथ कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए भुगतान और लॉजिस्टिक्स मुश्किल हो सकते हैं। भारत ईरान को क्या-क्या भेजता है? भारत का ईरान को निर्यात केवल तेल से जुड़ा नहीं है। भारतीय कंपनियां ईरान को बासमती चावल, चाय, चीनी, फल, मसाले, अनाज और दवाइयां समेत कई उत्पाद भेजती हैं। ऐसे में अमेरिकी दबाव बढ़ने पर कृषि उत्पादों और फार्मास्यूटिकल्स से जुड़े निर्यातकों पर भी असर पड़ने की आशंका है। सबसे बड़ी चिंता भुगतान व्यवस्था और शिपिंग को लेकर है। यदि अमेरिकी प्रतिबंधों का enforcement और कड़ा होता है, तो भारतीय कारोबारियों को ईरानी खरीदारों से भुगतान प्राप्त करने और माल भेजने में अतिरिक्त मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। तेल कारोबार पर भी नजर ईरान से जुड़ा संकट भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि Strait of Hormuz वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। वहां जारी तनाव और समुद्री यातायात में व्यवधान के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। 19 अगस्त को Brent crude करीब $92 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया था। भारत दुनिया के बड़े तेल आयातकों में शामिल है। इसलिए लंबे समय तक ऊंची crude prices रहने पर देश के import bill, पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। भारत के लिए एक राहत भी हालांकि, भारतीय निर्यातकों के लिए पूरी तस्वीर नकारात्मक नहीं है। वैश्विक सप्लाई में व्यवधान के बीच भारतीय रिफाइनरियां और ईंधन निर्यातक बढ़ी हुई मांग का फायदा भी उठा रहे हैं। Reuters के अनुसार भारतीय रिफाइनरियां वैश्विक तेल आपूर्ति में व्यवधान के बीच उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं और एशियाई बाजारों में ईंधन की आपूर्ति बढ़ा रही हैं। इसके अलावा, भारत का ईरान के साथ मौजूदा व्यापार आकार देश की कुल अर्थव्यवस्था की तुलना में सीमित है। इसलिए तत्काल बड़ा झटका तय नहीं है, लेकिन तेल कीमतों और शिपिंग लागत में लगातार बढ़ोतरी भारत के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण जोखिम बन सकती है। Trump ने क्या कहा? Trump ने कहा है कि जो देश या संस्थाएं ईरान को वित्तीय या कारोबारी मदद उपलब्ध कराती हैं, उन्हें “TREMENDOUS Economic Consequences” का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने ईरानी तेल की कथित तस्करी, cash transfers, currency swaps, exchange houses, ship registries और front companies पर भी कार्रवाई की बात कही है। अभी Trump ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि भारत समेत किन देशों पर किस तरह की नई कार्रवाई होगी। इसलिए फिलहाल भारत के लिए संभावित जोखिम को लेकर चिंता है, लेकिन किसी तत्काल भारतीय व्यापार पर नए अमेरिकी प्रतिबंध की घोषणा नहीं हुई है। आगे क्या होगा? अमेरिका के अगले कदम और Strait of Hormuz की स्थिति भारत के लिए सबसे अहम फैक्टर होंगे। अगर तनाव लंबा चलता है और crude oil लगातार महंगा रहता है, तो भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं अमेरिकी प्रतिबंधों का दायरा बढ़ने पर ईरान के साथ व्यापार करने वाले भारतीय निर्यातकों को भी नई compliance और payment चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती तेल की कीमत, शिपिंग सुरक्षा और ईरान के साथ व्यापार को अमेरिकी प्रतिबंधों से अलग बनाए रखना होगी। स्रोत: Reuters, NDTV, Times of India, AP Jai Rashtra News

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RBI की 19 अगस्त को आने वाली MPC मिनट्स पर बाजार की नजर, ब्याज दर और महंगाई के संकेतों का इंतजार

मुंबई: भारतीय शेयर और बॉन्ड बाजार की नजर अब 19 अगस्त 2026 को जारी होने वाली RBI Monetary Policy Committee (MPC) की बैठक की मिनट्स पर है। निवेशक यह समझने की कोशिश करेंगे कि केंद्रीय बैंक आने वाले महीनों में ब्याज दर, महंगाई और मौद्रिक नीति को लेकर किस दिशा में आगे बढ़ सकता है। RBI ने हालिया बैठक में रेपो रेट 5.25% पर रखा RBI की 3 से 5 अगस्त को हुई MPC बैठक में समिति ने रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला किया था। MPC ने लगातार चौथी बैठक में दरों में बदलाव नहीं किया और अपना रुख Neutral बनाए रखा। अब बाजार की नजर मिनट्स पर इसलिए है क्योंकि इसमें MPC के छह सदस्यों के विचारों और भविष्य की नीति को लेकर उनके आकलन से आगे की दिशा के संकेत मिल सकते हैं। महंगाई पर भी निवेशकों की नजर जुलाई 2026 में भारत की खुदरा महंगाई बढ़कर 4.45% हो गई, जो RBI के 4% मध्यम अवधि के लक्ष्य से ऊपर है। हालांकि यह अभी भी RBI की 2-6% सहनशीलता सीमा के भीतर है। खाद्य महंगाई में बढ़ोतरी ने कुल CPI को ऊपर खींचा है। ऐसे में निवेशक यह देखना चाहेंगे कि MPC सदस्य महंगाई में हालिया तेजी को अस्थायी मानते हैं या आने वाले महीनों के लिए इसे बड़ा जोखिम समझते हैं। अगली ब्याज दर नीति के संकेत मिल सकते हैं हालिया बैठक में RBI ने रेपो रेट में बदलाव नहीं किया था। अब MPC मिनट्स से बाजार को यह संकेत मिलने की उम्मीद है कि मौजूदा परिस्थितियों में आगे दरों में कटौती, लंबे समय तक यथास्थिति या भविष्य में दरों में बढ़ोतरी की संभावना को लेकर सदस्यों की सोच क्या है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई, कच्चे तेल की कीमत और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां आगे की नीति के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। रुपये और बॉन्ड बाजार पर भी असर MPC मिनट्स का असर केवल ब्याज दरों पर ही नहीं बल्कि रुपये और सरकारी बॉन्ड यील्ड पर भी पड़ सकता है। भारतीय रुपया हाल में डॉलर के मुकाबले दबाव में रहा है। RBI के हस्तक्षेप ने गिरावट को सीमित किया है, जबकि पश्चिम एशिया में तनाव और ऊंची तेल कीमतें रुपये के लिए चुनौती बनी हुई हैं। वहीं बॉन्ड बाजार में निवेशक यह देख रहे हैं कि RBI की नीति आगे चलकर liquidity और ब्याज दरों को किस तरह प्रभावित कर सकती है। अमेरिका-ईरान तनाव भी अहम फैक्टर बाजार के लिए RBI की नीति के साथ-साथ अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतें भी महत्वपूर्ण हैं। तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी भारत के आयात बिल और महंगाई दोनों पर दबाव डाल सकती है। इसी वजह से MPC मिनट्स में वैश्विक जोखिमों और महंगाई के बीच RBI के आकलन पर बाजार की खास नजर रहेगी। निवेशकों की नजर इन संकेतों पर 19 अगस्त को जारी होने वाली मिनट्स में बाजार मुख्य रूप से इन बातों पर ध्यान देगा: निष्कर्ष 19 अगस्त की RBI MPC मिनट्स बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत साबित हो सकती हैं। रेपो रेट फिलहाल 5.25% पर है, लेकिन जुलाई की 4.45% महंगाई और पश्चिम एशिया से जुड़े जोखिमों के बीच निवेशक यह जानना चाहते हैं कि RBI आने वाले महीनों में ब्याज दरों को लेकर कितना सतर्क रहेगा। Source: Reuters, RBI-related reports, NDTV Profit, Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

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AI और टेक सेक्टर में बड़ा बदलाव, भारतीय IT कंपनियों के AI निवेश और रणनीति पर बाजार की नजर

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच भारतीय टेक और IT सेक्टर में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि भारतीय कंपनियां AI, डेटा सेंटर, ऑटोमेशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में कितना निवेश कर रही हैं और इन निवेशों से भविष्य में कमाई कितनी बढ़ सकती है। AI अब IT कंपनियों की रणनीति का अहम हिस्सा भारतीय IT कंपनियां पारंपरिक IT सेवाओं से आगे बढ़कर AI आधारित समाधान, ऑटोमेशन और नए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोर दे रही हैं। बाजार में यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि AI कंपनियों के काम करने के तरीके और कर्मचारियों की जरूरतों को बदल रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले समय में कंपनियों के प्रदर्शन को केवल कर्मचारियों की संख्या या बिल योग्य घंटों से मापना पर्याप्त नहीं होगा। AI से होने वाली आय, AI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल और recurring revenue जैसे नए संकेतक ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकते हैं। TCS, Infosys और HCLTech पर खास नजर देश की प्रमुख IT कंपनियों TCS, Infosys और HCLTech की AI रणनीति निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच इन कंपनियों में bench strength कम करने और कर्मचारियों को अधिक specialised तथा AI-केंद्रित कामों में लगाने की दिशा में बदलाव देखने को मिल रहा है। इसका संकेत यह है कि IT कंपनियां अब केवल ज्यादा कर्मचारियों के सहारे विकास करने के बजाय AI और automation के जरिए productivity बढ़ाने पर जोर दे रही हैं। AI Data Centre बन रहे हैं अगला बड़ा निवेश क्षेत्र AI के विस्तार के साथ data centre infrastructure की मांग भी बढ़ रही है। भारतीय कंपनियां AI workloads को संभालने के लिए बड़े स्तर पर computing और data-centre क्षमता विकसित करने पर ध्यान दे रही हैं। इसी दिशा में Yotta Data Services ने AI infrastructure expansion को बढ़ावा देने के लिए करीब ₹8,000 करोड़ तक के IPO की योजना बनाई है। कंपनी इस पूंजी का इस्तेमाल AI infrastructure को मजबूत करने के लिए करना चाहती है। वहीं HCLTech की ओर से भी AI data-centre capacity में निवेश की योजनाओं ने इस क्षेत्र को बाजार की निगाह में ला दिया है। भारत में AI Infrastructure की दौड़ तेज भारत में global technology कंपनियां भी AI infrastructure पर बड़ा फोकस कर रही हैं। Microsoft ने हाल ही में भारत में अपना नया data-centre region शुरू किया है, जिससे देश में cloud और AI workloads के लिए infrastructure capacity बढ़ी है। इससे भारतीय कंपनियों के लिए AI applications, cloud services और enterprise solutions के क्षेत्र में नए अवसर बनने की उम्मीद है। निवेशकों के लिए AI Opportunity और Risk दोनों AI सेक्टर में बढ़ते निवेश के बावजूद बाजार के सामने चुनौतियां भी हैं। AI से productivity बढ़ने की संभावना है, लेकिन इससे traditional IT services के पुराने business models पर दबाव भी पड़ सकता है। Reuters की हालिया analysis के मुताबिक, AI के दौर में IT कंपनियों के लिए headcount और billable hours जैसे पुराने valuation metrics की अहमियत कम हो रही है, जबकि AI revenue और software-like recurring revenue जैसे नए मॉडल महत्वपूर्ण बन रहे हैं। भारतीय IT सेक्टर के लिए बड़ा बदलाव AI के कारण भारतीय IT industry अब केवल outsourcing और manpower-based services तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनियां AI platforms, automation, cloud, cybersecurity और enterprise AI solutions की ओर तेजी से बढ़ रही हैं। बाजार की नजर अब इस बात पर होगी कि कौन-सी कंपनी AI को सिर्फ technology investment के रूप में इस्तेमाल करती है और कौन उसे सीधे revenue और profit growth में बदलने में सफल होती है। निष्कर्ष भारत में AI और टेक सेक्टर का अगला दौर investment, infrastructure और innovation पर केंद्रित दिखाई दे रहा है। TCS, Infosys और HCLTech जैसी IT कंपनियों की AI रणनीति से लेकर Yotta जैसी कंपनियों के data-centre expansion तक, AI अब भारतीय technology ecosystem में बड़ा business driver बनता जा रहा है। Source: Reuters, India Today, Moneycontrol, Microsoft, Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

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रुपये पर दबाव जारी, ₹95-₹95.50 प्रति डॉलर के दायरे में रहने का अनुमान; RBI और पश्चिम एशिया संकट पर बाजार की नजर

मुंबई: भारतीय रुपया इस सप्ताह भी डॉलर के मुकाबले दबाव में रह सकता है। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि रुपया ₹95 से ₹95.50 प्रति डॉलर के सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है। RBI का हस्तक्षेप, कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिका-ईरान तनाव आने वाले दिनों में रुपये की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे। RBI की नजर रुपये की चाल पर भारतीय रिजर्व बैंक रुपये में तेज गिरावट को रोकने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, RBI ने पिछले सप्ताह सरकारी बैंकों के जरिए डॉलर की बिक्री की, जिससे रुपया ₹95.50 प्रति डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे बना रहा। बाजार में यह माना जा रहा है कि RBI रुपये में अचानक और तेज कमजोरी को रोकने के लिए आगे भी हस्तक्षेप कर सकता है। अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी चिंता पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान तनाव रुपये के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। तनाव बढ़ने पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है और भारत का आयात बिल बढ़ सकता है। भारत अपनी तेल जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में महंगा कच्चा तेल डॉलर की मांग बढ़ाकर रुपये पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। RBI की नीति और बाजार की नजर RBI की अगस्त मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखा गया था। अब बाजार की नजर 19 अगस्त को जारी होने वाली MPC बैठक की मिनट्स पर है। निवेशक इससे RBI की आगे की ब्याज दर नीति और महंगाई को लेकर सोच का संकेत तलाशेंगे। NRI डिपॉजिट स्कीम भी चर्चा में RBI ने FCNR(B) डिपॉजिट से जुड़े डिस्काउंटेड फॉरेक्स स्वैप सुविधा की समयसीमा को 30 सितंबर से घटाकर 31 अगस्त कर दिया है। इस योजना के जरिए 50 अरब डॉलर से अधिक का प्रवाह आने के बाद RBI ने समयसीमा पहले खत्म करने का फैसला किया। हालांकि, इस बदलाव से निकट अवधि में रुपये के लिए कुछ दबाव पैदा होने की आशंका भी बाजार विशेषज्ञ जता रहे हैं। विदेशी मुद्रा भंडार से RBI को मजबूती भारत का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 707 अरब डॉलर के चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। इससे RBI को रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव रोकने के लिए पर्याप्त गुंजाइश मिलती है। आगे क्या देखेंगे निवेशक? आने वाले दिनों में बाजार की नजर मुख्य रूप से इन संकेतकों पर रहेगी: निष्कर्ष फिलहाल रुपये के लिए तस्वीर मिश्रित है। RBI का हस्तक्षेप और मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार तेज गिरावट को रोकने में मदद कर रहे हैं, लेकिन महंगा तेल और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव रुपये पर दबाव बनाए हुए हैं। Reuters के अनुसार इस सप्ताह रुपया ₹95-₹95.50 प्रति डॉलर के दायरे में रह सकता है। Source: Reuters, Economic Times, RBI-related market reports जय राष्ट्र न्यूज़

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तमिलनाडु में विदेशी निवेशकों का बड़ा दांव, 16 परियोजनाओं के लिए ₹15,050 करोड़ के समझौते

चेन्नई: तमिलनाडु में विदेशी निवेश को लेकर बड़ा कदम सामने आया है। राज्य सरकार ने विदेशी निवेशकों के साथ 16 नई परियोजनाओं के लिए करीब ₹15,050 करोड़ के निवेश समझौते किए हैं। इन परियोजनाओं में फ्रांस की Saint-Gobain, अमेरिका की Super Micro Computer और जर्मनी की Daimler India Commercial Vehicles जैसी कंपनियां शामिल हैं। विदेशी कंपनियों से हुए 16 समझौते राज्य सरकार के अनुसार, विदेशी निवेशकों के साथ हुए 16 समझौतों की कुल अनुमानित राशि ₹150.5 अरब यानी करीब ₹15,050 करोड़ है। ये निवेश तमिलनाडु में औद्योगिक उत्पादन और मौजूदा इकाइयों के विस्तार को बढ़ावा देने के लिए किए जाएंगे। यह घोषणा राज्य में आयोजित बड़े निवेश सम्मेलन के दौरान हुई, जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों की कंपनियों ने निवेश की प्रतिबद्धता जताई। Saint-Gobain और Daimler का बड़ा निवेश फ्रांस की निर्माण क्षेत्र की कंपनी Saint-Gobain करीब ₹2,000 करोड़ का निवेश करेगी। इसमें नई फैक्ट्री स्थापित करने के साथ कांचीपुरम स्थित मौजूदा सुविधा के विस्तार की योजना शामिल है। वहीं जर्मनी की Daimler India Commercial Vehicles चेन्नई स्थित अपने कारखाने के विस्तार पर करीब ₹4,000 करोड़ खर्च करेगी। Super Micro Computer भी करेगी निवेश अमेरिका की सर्वर निर्माण कंपनी Super Micro Computer भी तमिलनाडु में निवेश करने वाली प्रमुख विदेशी कंपनियों में शामिल है। इससे राज्य के इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती मिलने की उम्मीद है। कुल 97 समझौते, ₹67,452 करोड़ से ज्यादा के निवेश विदेशी निवेश के अलावा सम्मेलन में भारतीय कंपनियों के साथ भी समझौते किए गए। राज्य सरकार ने कुल 97 निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिनकी अनुमानित कुल राशि ₹67,452 करोड़ से ज्यादा बताई गई है। इन परियोजनाओं से एक लाख से ज्यादा रोजगार पैदा होने का अनुमान है। इनमें Titan, MAS Holdings, Hinduja Group, Agnikul Cosmos और Ultraviolette जैसी कंपनियों के निवेश भी शामिल हैं। स्पेस, EV और क्वांटम टेक्नोलॉजी पर भी फोकस तमिलनाडु का निवेश अभियान केवल पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं है। राज्य में स्पेस टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक व्हीकल, क्वांटम कंप्यूटिंग, लाइफ साइंसेज, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग जैसे उभरते क्षेत्रों में भी निवेश आकर्षित करने पर जोर दिया जा रहा है। चेन्नई बना बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब चेन्नई को लंबे समय से भारत के प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग केंद्रों में गिना जाता है। यहां Hyundai, Renault, TVS Motor और Apple के सप्लायर्स Foxconn तथा Tata Electronics जैसी कंपनियों की गतिविधियां हैं। नए निवेश से तमिलनाडु की औद्योगिक स्थिति और मजबूत होने की उम्मीद है। निष्कर्ष तमिलनाडु में विदेशी कंपनियों के ₹15,050 करोड़ के 16 निवेश समझौते राज्य के औद्योगिक क्षेत्र के लिए बड़ा घटनाक्रम हैं। Saint-Gobain, Daimler और Super Micro Computer जैसी कंपनियों की भागीदारी से मैन्युफैक्चरिंग और हाई-टेक सेक्टर को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, ध्यान रहे कि ये निवेश समझौते/प्रतिबद्धताएं हैं; वास्तविक निवेश का क्रियान्वयन परियोजनाओं के आगे बढ़ने पर निर्भर करेगा। Source: Reuters, Tamil Nadu Government-related reports जय राष्ट्र न्यूज़

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Petrol Export Levy आज से शून्य, Diesel और ATF पर बदली दरें बरकरार

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले windfall gains tax और अन्य export levies में बदलाव किया है। 15 अगस्त 2026 से पेट्रोल के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) को ₹3.5 प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दिया गया है। वहीं, डीजल और Aviation Turbine Fuel (ATF) पर भी निर्यात संबंधी लेवी में बदलाव किया गया है। पेट्रोल पर export levy पूरी तरह खत्म सरकार के नए आदेश के अनुसार पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला SAED अब ₹0 प्रति लीटर होगा। इससे पहले 3 अगस्त से पेट्रोल पर ₹3.5 प्रति लीटर की लेवी लागू थी। यह बदलाव 15 अगस्त से शुरू होने वाले अगले पखवाड़े के लिए प्रभावी है और सरकार द्वारा पेट्रोलियम उत्पादों पर export levies की नियमित समीक्षा का हिस्सा है। Diesel पर ₹24 प्रति लीटर SAED डीजल के मामले में सरकार ने SAED को पूरी तरह खत्म नहीं किया है। डीजल निर्यात पर SAED को ₹25.5 से घटाकर ₹24 प्रति लीटर किया गया है। साथ ही diesel export से जुड़ा Road and Infrastructure Cess भी बदलकर शून्य किया गया है। इसका मतलब है कि डीजल निर्यात पर कर का बोझ पहले की तुलना में थोड़ा कम होगा, लेकिन निर्यात पूरी तरह levy-free नहीं होगा। ATF पर भी लेवी में कटौती Aviation Turbine Fuel यानी ATF के निर्यात पर भी सरकार ने राहत दी है। ATF पर SAED को ₹22 से घटाकर ₹19.5 प्रति लीटर कर दिया गया है। यह बदलाव aviation fuel exporters के लिए लागत को कुछ कम कर सकता है। नई दरें एक नजर में पेट्रोलियम उत्पाद पहले की दर 15 अगस्त से नई दर Petrol Export SAED ₹3.5/लीटर ₹0/लीटर Diesel Export SAED ₹25.5/लीटर ₹24/लीटर ATF Export SAED ₹22/लीटर ₹19.5/लीटर घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या असर? इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा excise duty rates में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसलिए केवल इस export levy revision के आधार पर पेट्रोल या डीजल की retail कीमतों में तत्काल कटौती की घोषणा नहीं हुई है। यानी निर्यातकों के लिए tax structure बदला है, लेकिन आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल-डीजल की घरेलू कीमतों पर इस आदेश का सीधा असर नहीं है। सरकार हर पखवाड़े क्यों बदलती है ये दरें? पेट्रोलियम उत्पादों पर export levy को सरकार अंतरराष्ट्रीय crude oil और refined petroleum product prices के आधार पर समय-समय पर संशोधित करती है। सरकार का उद्देश्य बदलती वैश्विक कीमतों और refining margins के बीच tax structure को adjust करना है। नई दरें भी पिछले review period के दौरान अंतरराष्ट्रीय कीमतों को ध्यान में रखकर तय की गई हैं। Windfall tax की शुरुआत क्यों हुई थी? भारत ने पेट्रोलियम उत्पादों पर windfall tax व्यवस्था 2022 में शुरू की थी, जब वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल के कारण घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के बीच price differences और refiners के export margins काफी बढ़ गए थे। 2024 में इसे हटाया गया था, लेकिन मार्च 2026 में West Asia में बढ़े तनाव और तेल बाजार में अस्थिरता के बीच इसे फिर लागू किया गया। इसके बाद सरकार ने global crude और petroleum product prices के अनुसार rates में लगातार बदलाव किए हैं। Refiners और Exporters को मिल सकती है राहत पेट्रोल पर levy पूरी तरह हटने और diesel तथा ATF पर दरें कम होने से petroleum exporters और refiners को कुछ राहत मिलने की संभावना है। खासकर ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय energy markets में volatility बनी हुई है, export tax में कमी से भारतीय refiners की international competitiveness को समर्थन मिल सकता है। हालांकि वास्तविक लाभ crude prices, refining margins, export volumes और global fuel demand पर भी निर्भर करेगा। सरकार का घरेलू बाजार पर भी फोकस Export levy व्यवस्था का एक उद्देश्य यह भी रहा है कि वैश्विक बाजार में असामान्य रूप से ऊंचे margins होने पर refiners अत्यधिक मात्रा में fuel export न करें और घरेलू बाजार में petroleum products की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे। इसलिए सरकार export duties को global market conditions के साथ-साथ domestic fuel availability को ध्यान में रखकर भी adjust करती रही है। आगे फिर बदल सकती हैं दरें यह बदलाव स्थायी tax reform नहीं है। सरकार पेट्रोलियम export levies की fortnightly review करती है। इसलिए अगले review में international crude prices और petroleum product margins के आधार पर दरें फिर बढ़ या घट सकती हैं। निष्कर्ष 15 अगस्त 2026 से भारत ने पेट्रोल के निर्यात पर SAED को शून्य कर दिया है। डीजल पर SAED ₹24 प्रति लीटर और ATF पर ₹19.5 प्रति लीटर कर दिया गया है। हालांकि, घरेलू खपत वाले पेट्रोल और डीजल पर excise duty में कोई बदलाव नहीं हुआ है, इसलिए इस फैसले का मतलब सीधे तौर पर पेट्रोल-डीजल की retail कीमतों में कटौती नहीं है। Source: वित्त मंत्रालय की अधिसूचना और 15 अगस्त 2026 की ताजा रिपोर्ट्स। Original Report: केंद्र ने 15 अगस्त से पेट्रोल export levy शून्य की और diesel तथा ATF export levies में कटौती की। Jai Rashtra News

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Paramount Skydance के कैलिफोर्निया छोड़ने के संकेत, Warner Bros. डील को लेकर बढ़ा विवाद

लॉस एंजिलिस: हॉलीवुड की दिग्गज कंपनी Paramount Skydance ने कैलिफोर्निया से अपना मुख्यालय या कारोबार बाहर ले जाने की संभावना को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है। कंपनी के मुख्य कानूनी अधिकारी Makan Delrahim ने कहा कि CEO David Ellison की प्राथमिकता कैलिफोर्निया में बने रहने की है, लेकिन कंपनी को अपने शेयरधारकों के हितों और कारोबारी माहौल को भी ध्यान में रखना होगा। Warner Bros. डील बनी विवाद की वजह Paramount Skydance की संभावित relocation की चर्चा उसकी Warner Bros. Discovery को खरीदने की करीब $110 अरब की प्रस्तावित डील से जुड़ी है। कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल Rob Bonta समेत कई राज्यों ने इस सौदे के खिलाफ antitrust मुकदमा दायर किया है। उनका आरोप है कि यह विलय मीडिया और फिल्म उद्योग में प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचा सकता है। Paramount का पक्ष है कि यह सौदा प्रतिस्पर्धा को मजबूत कर सकता है और कंपनी को Disney तथा Netflix जैसी बड़ी कंपनियों के मुकाबले बेहतर स्थिति में ला सकता है। अक्टूबर से बाहर निकलने की योजना की चर्चा मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कंपनी के CEO David Ellison ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संभावित relocation की योजना पर चर्चा की है। रिपोर्टों में कहा गया है कि अगर कैलिफोर्निया के साथ कानूनी विवाद पर समाधान नहीं निकलता, तो अक्टूबर 2026 से California से बाहर जाने की प्रक्रिया शुरू करने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, इसे अभी तत्काल कैलिफोर्निया छोड़ने का अंतिम फैसला नहीं माना जा रहा है। कंपनी के अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि कैलिफोर्निया में बने रहना अभी भी पसंदीदा विकल्प है। कहां जा सकती है कंपनी? रिपोर्टों में Tennessee, Texas और Georgia जैसे राज्यों को संभावित विकल्पों के तौर पर बताया गया है। इनमें Texas और Tennessee को खासतौर पर संभावित विकल्प माना जा रहा है। अगर Paramount वास्तव में कैलिफोर्निया से बाहर जाती है, तो इसका असर हॉलीवुड के रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। कैलिफोर्निया सरकार का पलटवार कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल Rob Bonta ने Paramount की relocation की धमकी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे राज्य पर दबाव बनाने की रणनीति बताया और कहा कि उनकी प्राथमिकता प्रतिस्पर्धा और कैलिफोर्निया की अर्थव्यवस्था की रक्षा करना है। हॉलीवुड के लिए क्यों बड़ा मामला? Paramount का हॉलीवुड से रिश्ता दशकों पुराना है। कंपनी का कैलिफोर्निया से बाहर जाना केवल एक कॉरपोरेट relocation नहीं होगा, बल्कि यह हॉलीवुड के बदलते कारोबारी नक्शे का बड़ा संकेत माना जा सकता है। पहले भी कई मनोरंजन कंपनियां प्रोडक्शन और कारोबार के लिए दूसरे अमेरिकी राज्यों का रुख कर चुकी हैं। Paramount के संभावित कदम से यह बहस और तेज हो सकती है कि क्या हॉलीवुड का पारंपरिक केंद्र धीरे-धीरे California से बाहर फैल रहा है। निष्कर्ष Paramount Skydance ने कैलिफोर्निया छोड़ने की संभावना को पहली बार इतनी स्पष्टता से स्वीकार किया है। हालांकि कंपनी अभी California में रहना चाहती है, लेकिन Warner Bros. डील को लेकर चल रहे antitrust विवाद और कारोबारी दबाव के बीच relocation का विकल्प खुला रखा गया है। Source: Reuters, Axios, Los Angeles Times, The Hill जय राष्ट्र न्यूज़

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