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महिलाओं की आजीविका योजना के फंड पर केंद्र से राज्यों की मांग, BJP शासित राज्य भी हुए शामिल

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026: महिलाओं की आजीविका और शहरी गरीबों से जुड़ी योजनाओं के लिए फंडिंग को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ रहा है। तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और त्रिपुरा ने दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (DAY-NULM) के तहत वित्तीय सहायता और योजना के भविष्य को लेकर स्पष्टता की मांग की है। इन राज्यों में भाजपा, कांग्रेस और तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) से जुड़ी सरकारें शामिल हैं। एक करोड़ से अधिक महिलाओं की आजीविका पर चिंता DAY-NULM के तहत पिछले एक दशक में एक करोड़ से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जोड़ा गया और 10 लाख से ज्यादा समूह बनाए गए। राज्यों की चिंता है कि फंडिंग को लेकर अनिश्चितता बनी रहने से इन समूहों की गतिविधियां, बैंकिंग सुविधाओं तक पहुंच और संस्थागत ऋण प्राप्त करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। भाजपा शासित राज्यों ने भी उठाई फंडिंग की मांग महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और त्रिपुरा सहित भाजपा शासित राज्यों ने भी केंद्र से वित्तीय सहायता जारी करने और योजना के भविष्य की रूपरेखा स्पष्ट करने का आग्रह किया है। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार और तमिलनाडु की TVK सरकार ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है। इससे स्पष्ट है कि शहरी आजीविका योजनाओं की निरंतरता का मुद्दा अलग-अलग राजनीतिक दलों की राज्य सरकारों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। तमिलनाडु ने मांगे 350 करोड़ रुपये मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तमिलनाडु ने लगभग 350 करोड़ रुपये, जबकि महाराष्ट्र ने करीब 81 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मांगी है। अन्य राज्यों ने भी कर्मचारियों के वेतन, रिवॉल्विंग फंड, ब्याज सब्सिडी और स्वयं सहायता समूहों को सहयोग देने के लिए धन की जरूरत बताई है। NULM 2.0 को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं DAY-NULM वर्ष 2024 में समाप्त हो गया था। इसके बाद उत्तराधिकारी कार्यक्रम के रूप में एक पायलट पहल शुरू की गई, लेकिन पूर्ण स्तर पर NULM 2.0 या नई राष्ट्रीय शहरी आजीविका योजना को लेकर अब तक स्पष्टता नहीं है। राज्यों का कहना है कि नई योजना की समयसीमा और वित्तीय प्रावधानों की जानकारी जरूरी है, ताकि महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों और उनसे जुड़ी आजीविका गतिविधियों को बिना रुकावट जारी रखा जा सके। केंद्र सरकार का क्या कहना है? रिपोर्टों के मुताबिक, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय का कहना है कि उसके पास फंड जारी करने से संबंधित कोई लंबित मांग नहीं है। मंत्रालय ने प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi) और अन्य योजनाओं के माध्यम से शहरी गरीबों को मिल रहे सहयोग का भी उल्लेख किया है। हालांकि, राज्यों की चिंता है कि महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों के लिए समर्पित आजीविका सहायता और फंडिंग की व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। आने वाले समय में इस मुद्दे पर केंद्र और राज्यों के बीच बातचीत योजना की निरंतरता के लिहाज से अहम होगी। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस, द फाइनेंशियल एक्सप्रेस, जनसत्ता जय राष्ट्र न्यूज़

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सतना में BJP महिला मोर्चा का प्रदर्शन, राहुल गांधी का पुतला दहन; JNU मामले पर कांग्रेस से मांगा जवाब

सतना: मध्य प्रदेश के सतना में 12 अक्टूबर की शाम भारतीय जनता पार्टी (BJP) महिला मोर्चा ने महिला सुरक्षा, सम्मान और न्याय के मुद्दे पर कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन किया। जयस्तंभ चौक स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय के सामने कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी का पुतला दहन किया और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न मामले पर कांग्रेस नेतृत्व से जवाब मांगा। जिला कांग्रेस कार्यालय के सामने प्रदर्शन BJP महिला मोर्चा का प्रदर्शन जयस्तंभ चौक स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय के सामने आयोजित किया गया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए कांग्रेस पर महिला सुरक्षा के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि कांग्रेस सार्वजनिक रूप से महिलाओं की सुरक्षा की बात करती है, लेकिन अपने नेताओं से जुड़े मामलों में उसे स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। राहुल गांधी का पुतला जलाकर जताया विरोध प्रदर्शन के दौरान BJP महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी का पुतला जलाकर विरोध दर्ज कराया। इस कार्रवाई का वीडियो स्थानीय स्तर पर चर्चा में रहा और मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई। JNU के मामले को लेकर विरोध यह प्रदर्शन कांग्रेस सांसद और JNU के प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजाम से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर किया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, विश्वविद्यालय ने आंतरिक जांच के बाद 9 अक्टूबर को अकोइजाम की सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी किया था। हालांकि, अकोइजाम ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है। ऐसे में आरोपों, जांच और विश्वविद्यालय की कार्रवाई को अलग-अलग तथ्यों के रूप में देखना जरूरी है। 11 छात्राओं की शिकायतों का दावा BJP की ओर से दावा किया गया है कि कम से कम 11 छात्राओं ने अकोइजाम के खिलाफ शिकायतें की थीं। इसी मुद्दे को लेकर BJP महिला मोर्चा ने दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन किए और कांग्रेस नेतृत्व से अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की। इन शिकायतों और आरोपों से संबंधित दावों को अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। सुष्मिता सिंह परिहार के नेतृत्व में प्रदर्शन सतना में हुए प्रदर्शन का नेतृत्व BJP महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष सुष्मिता सिंह परिहार ने किया। प्रदर्शन में पूर्व महापौर विमला पांडेय, ममता पांडेय, पूर्व विधायक ऊषा चौधरी और जिला BJP अध्यक्ष भगवती पांडेय सहित कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। कांग्रेस नेतृत्व से जवाब मांगने की मांग प्रदर्शनकारी नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से मामले पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की। BJP महिला मोर्चा का आरोप है कि कांग्रेस नेतृत्व ने इस प्रकरण पर पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं दी है। यह आरोप BJP नेताओं की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा है। कांग्रेस का आधिकारिक पक्ष इस रिपोर्ट में उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्पष्ट नहीं है। कई राज्यों में हुए प्रदर्शन रिपोर्टों के मुताबिक, 12 और 13 अक्टूबर को दिल्ली, हिमाचल प्रदेश के मंडी, हमीरपुर, कुल्लू और नाहन तथा उत्तर प्रदेश के ललितपुर समेत कई स्थानों पर BJP महिला मोर्चा ने इसी मुद्दे पर प्रदर्शन किए। कुछ स्थानों पर राहुल गांधी और अकोइजाम के पुतले भी जलाए गए। दिल्ली में BJP महिला मोर्चा ने अपने विरोध अभियान को “नारी शक्ति हुंकार आंदोलन” नाम दिया। संगठन ने मामले में जवाबदेही तय करने और कांग्रेस नेतृत्व से अपना पक्ष स्पष्ट करने की मांग की। राजनीतिक विवाद ने पकड़ा जोर JNU से जुड़े इस मामले को लेकर BJP और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ गया है। BJP इसे महिला सुरक्षा और राजनीतिक जवाबदेही से जोड़ रही है। वहीं, अकोइजाम आरोपों से इनकार कर चुके हैं। मामले में शिकायतों, आंतरिक जांच और विश्वविद्यालय की कार्रवाई से जुड़े तथ्यों को राजनीतिक आरोपों से अलग रखते हुए देखना महत्वपूर्ण है। Source: Indian News Trust / The Indian Express / India Today / Amar Ujala जय राष्ट्र न्यूज़

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CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ फिर Removal Notice की तैयारी, SIR विवाद पर विपक्ष का विरोध तेज

नई दिल्ली: Special Intensive Revision (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए संसद में नया Removal Notice लाने की तैयारी कर रहे हैं। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक प्रस्ताव का मसौदा कानूनी विशेषज्ञों की मदद से तैयार किया जा रहा है और विपक्ष इसे लोकसभा तथा राज्यसभा दोनों में उठाने की योजना बना रहा है। इस मुद्दे पर INDIA bloc के नेताओं के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। संसद में नया Notice लाने की तैयारी विपक्षी दलों की योजना मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में प्रस्ताव का नोटिस देने की है। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है और इसे संयुक्त विपक्ष की ओर से पेश करने पर बातचीत चल रही है। हालांकि अभी संसद में नया नोटिस औपचारिक रूप से स्वीकार या विचार के लिए सूचीबद्ध नहीं हुआ है। SIR विवाद के बाद बढ़ा राजनीतिक दबाव यह पूरा विवाद मतदाता सूचियों के Special Intensive Revision को लेकर बढ़ा है। विपक्ष का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम हटाने और verification के नियमों को लेकर गंभीर सवाल हैं। कांग्रेस, TMC, समाजवादी पार्टी, AAP, DMK और वाम दलों समेत कई विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने या उनके इस्तीफे की मांग की है। आयोग के भीतर आपत्तियों की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद हालिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में मतदाता सूची, Form-6, डेटा प्रबंधन और SIR से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर कई औपचारिक आपत्तियां या टिप्पणियां दर्ज की थीं। इन रिपोर्ट्स के सामने आने के बाद विपक्ष ने सवाल उठाया कि क्या चुनाव आयोग में महत्वपूर्ण फैसले पूरी सहमति से लिए जा रहे थे। Election Commission ने मतभेद के दावे को किया खारिज चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेद को लेकर उठ रहे सवालों पर कहा है कि किसी multi-member constitutional body में अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा और आपत्तियां सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के मुताबिक SIR समेत अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए और दोनों चुनाव आयुक्त अंतिम फैसलों का हिस्सा थे। Voter Roll Software की समीक्षा भी शुरू विवाद के बीच चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से जुड़े अपने software system की समीक्षा शुरू करने का फैसला किया है। आयोग ने तकनीकी और कानूनी प्रक्रियाओं की समीक्षा तथा discrepancies वाले मतदाताओं तक स्थानीय अधिकारियों की पहुंच बेहतर करने जैसे कदमों पर काम शुरू किया है। Congress ने देशभर में तेज किए प्रदर्शन ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस ने कई राज्यों और जिलों में विरोध प्रदर्शन किए हैं। प्रदर्शनकारियों ने SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाते हुए CEC को हटाने की मांग की। कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प तथा हिरासत की घटनाएं भी सामने आई हैं। BJP और NDA ने किया Election Commission का बचाव BJP और NDA के कई नेताओं ने चुनाव आयोग के पक्ष में बयान दिए हैं। उनका कहना है कि आयोग के भीतर अलग-अलग विचार सामने आना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। NDA नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। CEC को हटाने की प्रक्रिया आसान नहीं संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरह और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जैसे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है। इस प्रक्रिया के लिए संसद के दोनों सदनों में निर्धारित विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होना जरूरी है। इसके बाद ही राष्ट्रपति द्वारा पद से हटाने की कार्रवाई की जा सकती है। विपक्षी बैठक पर नजर INDIA bloc के नेताओं की बैठक में SIR, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और CEC को हटाने के प्रस्ताव पर संयुक्त रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। विपक्षी नेताओं ने संकेत दिया है कि ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग आने वाले दिनों में उनके अभियान का प्रमुख मुद्दा बनी रह सकती है। SIR विवाद बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा SIR को लेकर विवाद अब केवल मतदाता सूची संशोधन तक सीमित नहीं है। यह चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया, पारदर्शिता और संस्थागत स्वतंत्रता को लेकर बड़े राजनीतिक टकराव में बदल चुका है। एक ओर विपक्ष CEC को हटाने की तैयारी कर रहा है, वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि उसकी प्रक्रियाएं कानून के अनुसार हैं और अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। फिलहाल नए Removal Notice पर संसद की औपचारिक कार्रवाई सामने आने का इंतजार है। source – The Indian Express / Reuters / India Today / Election Commission of India जय राष्ट्र न्यूज़

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इंदौर में राहुल गांधी का स्वागत, समर्थकों ने लगाए नारे; ‘छात्रों की गूंज’ में युवाओं से किया संवाद

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के इंदौर पहुंचने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उनका स्वागत किया। एयरपोर्ट से लेकर कार्यक्रम स्थल तक कई स्थानों पर समर्थक जुटे और ‘राहुल गांधी जिंदाबाद’ तथा ‘घर-घर गांधी, राहुल गांधी जिंदाबाद’ जैसे नारे लगाए। राहुल गांधी 19 सितंबर को ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल होने इंदौर पहुंचे थे, जहां उन्होंने छात्रों से शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर बातचीत की। इंदौर एयरपोर्ट पर जुटे कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता राहुल गांधी के इंदौर पहुंचने से पहले ही देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट पर बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता जुटने लगे थे। स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने उनके स्वागत के लिए एयरपोर्ट से होटल तक कई स्थानों पर व्यवस्थाएं की थीं। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार राहुल गांधी के एयरपोर्ट पहुंचने पर वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने उनकी अगवानी की। एयरपोर्ट से रेडिसन होटल जाने वाले रास्ते में लवकुश चौराहा, एमआर-10 और विजय नगर समेत कई स्थानों पर स्वागत की तैयारियां की गई थीं। समर्थकों ने लगाए राहुल गांधी के समर्थन में नारे राहुल गांधी के काफिले के रास्ते और ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने— “राहुल गांधी जिंदाबाद” और “घर-घर गांधी, राहुल गांधी जिंदाबाद” जैसे नारे लगाए। कुछ युवा ‘RAGA’ लिखा चश्मा पहनकर भी कार्यक्रम में पहुंचे। कार्यक्रम में ग्वालियर से पहुंची एक युवती अपने साथ “आपसे प्यार है इसलिए इंदौर आए हैं” लिखा पोस्टर लेकर आई थी। इस तरह के पोस्टर और नारे कार्यक्रम स्थल पर मौजूद समर्थकों के उत्साह का हिस्सा रहे। स्वागत के लिए बनाए गए थे कई मंच राहुल गांधी के दौरे से पहले कांग्रेस नेताओं ने एयरपोर्ट से होटल तक कई जगह स्वागत मंच तैयार किए थे। हालांकि राहुल गांधी का कार्यक्रम निर्धारित होने के कारण वे इन सभी मंचों पर नहीं रुके और उनका काफिला सीधे आगे बढ़ा। एयरपोर्ट और एमआर-10 इलाके में समर्थकों की भीड़ देखने को मिली। शहर में यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने विशेष ट्रैफिक प्लान भी लागू किया था। 13 मार्गों पर भारी वाहनों के प्रवेश को नियंत्रित किया गया और कुछ हिस्सों को नो-व्हीकल जोन बनाया गया था। ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल हुए राहुल गांधी इंदौर दौरे का मुख्य उद्देश्य कांग्रेस द्वारा आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल होना था। कार्यक्रम इंदौर के रीजनल पार्क के पास IDA मैदान में आयोजित किया गया। इसमें बड़ी संख्या में छात्र और युवा पहुंचे। राहुल गांधी ने मंच से छात्रों से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याएं सुनीं। यह ‘छात्रों की गूंज’ अभियान का पांचवां आयोजन था। इससे पहले इस अभियान के कार्यक्रम कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में आयोजित किए जा चुके थे। छात्रों ने उठाए रोजगार और परीक्षा से जुड़े मुद्दे कार्यक्रम में युवाओं ने बेरोजगारी, सरकारी भर्तियों में देरी, प्रतियोगी परीक्षाओं, पेपर लीक और लंबित भर्ती प्रक्रियाओं जैसे विषय उठाए। राहुल गांधी ने इन मुद्दों को लेकर केंद्र और राज्य की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए और कहा कि छात्रों को प्रश्न पूछने का अधिकार होना चाहिए। उनके ये बयान कांग्रेस नेता के राजनीतिक आरोप और दृष्टिकोण थे। राहुल गांधी ने कार्यक्रम की शुरुआत में इंदौर में मिले स्वागत के लिए मौजूद लोगों का धन्यवाद भी किया। कार्यक्रम के बाहर राजनीतिक विरोध भी राहुल गांधी के स्वागत के साथ-साथ उनके दौरे को लेकर राजनीतिक विरोध भी देखने को मिला। कार्यक्रम से पहले इंदौर में कई जगह ‘झूठ की गूंज’ लिखे पोस्टर और होर्डिंग लगाए गए थे। कांग्रेस ने इसके पीछे भाजपा का हाथ होने का आरोप लगाया, जबकि भाजपा की ओर से इसे छात्रों की प्रतिक्रिया बताया गया। इन दावों की जिम्मेदारी संबंधित राजनीतिक पक्षों की है। इस तरह राहुल गांधी का इंदौर दौरा एक तरफ कांग्रेस समर्थकों के स्वागत और नारेबाजी के कारण चर्चा में रहा, वहीं दूसरी ओर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी जारी रही। राहुल गांधी ने स्वागत के लिए जताया आभार कार्यक्रम में राहुल गांधी ने इंदौर के लोगों और युवाओं को संबोधित करते हुए स्वागत के लिए धन्यवाद दिया। इसके बाद उन्होंने छात्रों के साथ शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। कार्यक्रम में पोस्टर, नारे, संगीत और छात्रों की प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिलीं। Times of India ने कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में युवाओं, पोस्टरों और नारेबाजी का उल्लेख किया है। इंदौर कार्यक्रम के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस ने ‘छात्रों की गूंज’ अभियान को राज्य के दूसरे जिलों तक ले जाने की घोषणा भी की।

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राहुल गांधी पर महिला की तीखी टिप्पणी, बोलीं- ‘राहुल गांधी का दिमाग खराब हो गया है’

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लेकर एक महिला की तीखी टिप्पणी चर्चा में है। सोशल मीडिया पर प्रसारित प्रतिक्रिया में महिला को यह कहते हुए बताया जा रहा है कि “राहुल गांधी का दिमाग खराब हो गया है।” यह टिप्पणी ऐसे समय सामने आई है जब इंदौर में कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। हालांकि महिला की उक्त टिप्पणी एक व्यक्तिगत राजनीतिक प्रतिक्रिया है और इसे राहुल गांधी की मानसिक स्थिति के बारे में किसी चिकित्सकीय तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। राहुल गांधी के हालिया ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब अलग-अलग राज्यों तक पहुंच गया है। कार्यक्रम में स्टैंड-अप कॉमेडियन पुलकित मणि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बोलने की शैली की मिमिक्री की थी और राहुल गांधी भी उस दौरान मंच पर मौजूद थे। इस प्रस्तुति के कुछ हिस्सों को लेकर भाजपा नेताओं ने आपत्ति जताई, जबकि कांग्रेस नेताओं ने इसे राजनीतिक व्यंग्य के रूप में बचाव किया। महिला की टिप्पणी क्यों हुई चर्चा में? इस पूरे विवाद के बीच राहुल गांधी को लेकर आम लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक प्रतिक्रिया में उत्तर प्रदेश की एक महिला को राहुल गांधी की आलोचना करते हुए “राहुल गांधी का दिमाग खराब हो गया है” कहते हुए बताया जा रहा है। महिला की यह टिप्पणी राजनीतिक नाराजगी की अभिव्यक्ति है। इस तरह की भाषा किसी व्यक्ति की वास्तविक मानसिक या चिकित्सकीय स्थिति साबित नहीं करती। उपलब्ध विश्वसनीय मीडिया रिपोर्ट्स में इस exact टिप्पणी करने वाली महिला की पहचान और वीडियो के मूल स्रोत की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिली है। हालांकि राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम को लेकर महिलाओं की ओर से आलोचनात्मक प्रतिक्रियाएं आने की रिपोर्ट जरूर सामने आई है। Times Now Navbharat की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली, देहरादून और बरेली समेत अलग-अलग जगहों पर महिलाओं ने कार्यक्रम की आलोचना की और राहुल गांधी की राजनीतिक परिपक्वता पर सवाल उठाए। किस घटना को लेकर शुरू हुआ विवाद? 19 सितंबर को मध्य प्रदेश के इंदौर में कांग्रेस का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का उद्देश्य पेपर लीक, परीक्षा में कथित अनियमितताओं, फीस और युवाओं से जुड़े दूसरे मुद्दों को उठाना था। राहुल गांधी कार्यक्रम में मौजूद थे। इसी दौरान कॉमेडियन पुलकित मणि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री की। प्रस्तुति में प्रधानमंत्री द्वारा एक बुजुर्ग महिला को कुर्सी दिए जाने से जुड़े प्रसंग का भी संदर्भ आया। इसके बाद भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रस्तुति के जरिये प्रधानमंत्री और उनकी दिवंगत मां का अपमान किया गया। कांग्रेस और उसके समर्थकों ने इस व्याख्या से असहमति जताई है और कहा कि इसे राजनीतिक व्यंग्य तथा हास्य के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी साधा निशाना उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इंदौर कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं और बुजुर्गों का सम्मान भारतीय संस्कृति का हिस्सा है और कांग्रेस नेता के व्यवहार की आलोचना की। यह भाजपा का राजनीतिक पक्ष है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत अन्य भाजपा नेताओं ने भी राहुल गांधी और कांग्रेस की आलोचना की। भाजपा ने पूरे विवाद को महिला सम्मान से जोड़ते हुए कांग्रेस से जवाब मांगा। कांग्रेस ने क्या कहा? दूसरी ओर कांग्रेस ने भाजपा की आलोचना का विरोध किया है। कर्नाटक सरकार में मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे ने सवाल किया कि राजनीतिक व्यंग्य और हास्य को लेकर भाजपा इतनी आपत्ति क्यों जता रही है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा नेताओं ने अतीत में कांग्रेस नेताओं को लेकर तीखी टिप्पणियां की हैं। हालांकि Hindustan Times की रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस के अंदर भी कुछ नेताओं ने माना कि मिमिक्री का यह हिस्सा टाला जा सकता था, क्योंकि इससे छात्रों के मूल मुद्दों से ध्यान हट गया। रिपोर्ट में तीन कांग्रेस नेताओं के हवाले से ऐसी राय सामने आई। महिलाओं की प्रतिक्रियाएं भी आईं सामने विवाद के बाद कई महिलाओं की प्रतिक्रियाओं में यह कहा गया कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन किसी नेता की मां या परिवार को राजनीतिक मजाक में शामिल करने से बचना चाहिए। Times Now Navbharat की रिपोर्ट के अनुसार कुछ महिलाओं ने राहुल गांधी की राजनीतिक परिपक्वता पर सवाल उठाए और कहा कि सार्वजनिक मंच पर भाषा तथा व्यवहार की मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए। इसी माहौल में राहुल गांधी के खिलाफ कथित तौर पर उत्तर प्रदेश की महिला की तीखी टिप्पणी सोशल मीडिया पर चर्चा में आई है। वायरल बयान को लेकर क्या सावधानी जरूरी? सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति का छोटा वीडियो तेजी से वायरल होने पर उसका पूरा संदर्भ कई बार सामने नहीं आता। इसलिए महिला के कथित “राहुल गांधी का दिमाग खराब हो गया है” बयान को एक व्यक्तिगत राजनीतिक टिप्पणी के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इस बयान के आधार पर राहुल गांधी की मानसिक स्थिति के बारे में कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। साथ ही वीडियो के मूल स्रोत, महिला की पहचान और पूरी बातचीत की स्वतंत्र पुष्टि के बिना इसे व्यापक जनमत का प्रतिनिधित्व मानना भी सही नहीं होगा। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि इंदौर के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में हुई मिमिक्री ने भाजपा और कांग्रेस के बीच नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। भाजपा इसे महिला सम्मान और राजनीतिक मर्यादा से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस पक्ष इसे राजनीतिक व्यंग्य और छात्रों के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश के रूप में पेश कर रहा है।

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बंगाल उपचुनाव में बड़ा ट्विस्ट! नंदीग्राम से रेजीनगर तक बदले समीकरण

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। उम्मीदवारों के नाम वापस लेने, फैसले पलटने और गिरफ्तारियों ने दोनों सीटों के मुकाबले को नया रूप दे दिया है। नंदीग्राम में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल खेमे ने कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन दिया है, जबकि रेजीनगर में उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने चुनाव से हटने की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद अपना फैसला बदल दिया। पश्चिम बंगाल की दो चर्चित विधानसभा सीटों नंदीग्राम और रेजीनगर में 6 अक्टूबर 2026 को मतदान होना है, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। मतदान से पहले ही दोनों सीटों पर ऐसे घटनाक्रम सामने आए हैं, जिन्होंने राजनीतिक दलों की चुनावी रणनीति को प्रभावित किया है। नंदीग्राम में उम्मीदवार हटा, कांग्रेस को मिला समर्थन नंदीग्राम में सबसे बड़ा बदलाव उस समय आया जब ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल खेमे की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की। इस फैसले के कारण नंदीग्राम में चुनावी मुकाबले की संरचना बदल गई और कांग्रेस उम्मीदवार पर राजनीतिक ध्यान बढ़ गया। लेकिन इसके तुरंत बाद एक और घटनाक्रम सामने आया। कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण आंदोलन से जुड़े पुराने मामलों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया। कांग्रेस नेताओं ने गिरफ्तारी के समय को लेकर राजनीतिक दबाव के आरोप लगाए, जबकि राज्य सरकार ने अदालत में मामलों और लंबित वारंट से जुड़ी जानकारी दी। ये आरोप राजनीतिक पक्षों के दावे हैं और इन पर कानूनी प्रक्रिया जारी है। 22 सितंबर को पश्चिम बंगाल सरकार ने कलकत्ता हाई कोर्ट को बताया कि मिलन प्रधान से संबंधित पांच मामलों को वापस लिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रधान फिलहाल अन्य मामलों में न्यायिक हिरासत में हैं। अदालत ने मामले पर आगे सुनवाई के लिए तारीख तय की है। BJP ने हसीरानी रथ को उतारा मैदान में भारतीय जनता पार्टी ने नंदीग्राम उपचुनाव के लिए हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है। हसीरानी रथ चंद्रनाथ रथ की मां हैं। वहीं वाम मोर्चे की ओर से CPI उम्मीदवार शांतिगोपाल गिरि मैदान में हैं। इस तरह नंदीग्राम में उम्मीदवारों और दलों के बीच मुकाबले की तस्वीर पिछले कुछ दिनों में लगातार बदली है। नंदीग्राम पश्चिम बंगाल की राजनीति में पहले से ही महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्र रहा है। मौजूदा उपचुनाव मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के यह सीट छोड़कर भवानीपुर सीट बरकरार रखने के बाद आवश्यक हुआ। रेजीनगर में कुछ घंटों में पलटा फैसला नंदीग्राम के बाद रेजीनगर में भी नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल खेमे के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने पहले उपचुनाव से हटने की घोषणा कर दी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रबीउल ने चुनाव चिह्न और प्रचार से जुड़ी समस्याओं सहित कई कारण बताए थे। हालांकि कुछ ही घंटों बाद उन्होंने अपना निर्णय बदल दिया और कहा कि वे रेजीनगर से चुनाव लड़ेंगे। ममता बनर्जी और पार्टी नेतृत्व से बातचीत के बाद उनका यह फैसला सामने आया। इस यू-टर्न के बाद रेजीनगर में मुकाबले की तस्वीर फिर बदल गई और रबीउल आलम चौधरी चुनावी मैदान में बने हुए हैं। रेजीनगर में उम्मीदवार की गिरफ्तारी से बढ़ी राजनीतिक हलचल रेजीनगर में एक अन्य घटनाक्रम में निर्दलीय उम्मीदवार सैफुल इस्लाम को पुलिस ने गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार गिरफ्तारी 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान दो समूहों के बीच हुई झड़प से जुड़े एक पुराने मामले में की गई। सैफुल इस्लाम का संबंध हुमायूं कबीर के नेतृत्व वाली आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) से बताया गया है। AJUP प्रमुख हुमायूं कबीर ने भी चुनाव से पहले पुलिस कार्रवाई को लेकर आरोप लगाए हैं और निर्वाचन आयोग में शिकायत की है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी से जुड़े लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। ये हुमायूं कबीर के आरोप हैं; पुलिस और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की ओर से घटनाओं की अलग-अलग व्याख्याएं सामने आई हैं। रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। BJP ने यहां शाखरव सरकार को उम्मीदवार बनाया है, जबकि वाम मोर्चे की ओर से CPI(M) के सैयद असद अली चुनाव मैदान में हैं। नंदीग्राम से रेजीनगर तक क्यों बदले समीकरण? पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम को देखें तो नंदीग्राम में तृणमूल खेमे के उम्मीदवार के हटने और कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन मिलने से पहले से घोषित मुकाबले की संरचना बदली है। दूसरी ओर कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी और उससे जुड़ी कानूनी प्रक्रिया भी चुनाव प्रचार का प्रमुख मुद्दा बन गई है। रेजीनगर में रबीउल आलम चौधरी के पहले पीछे हटने और फिर चुनाव लड़ने के फैसले ने वहां उम्मीदवारों की स्थिति को बदल दिया। इसके साथ निर्दलीय उम्मीदवार की गिरफ्तारी तथा हुमायूं कबीर के पुलिस कार्रवाई संबंधी आरोपों ने चुनावी बहस को और व्यापक बनाया है। इन घटनाओं का मतदाताओं पर क्या असर पड़ेगा, इसका स्पष्ट जवाब मतदान और मतगणना के बाद ही मिलेगा। फिलहाल दोनों सीटों पर राजनीतिक दल प्रचार, उम्मीदवारों और कानूनी घटनाक्रम के बीच अपनी-अपनी रणनीति के साथ मैदान में हैं। मुख्य बातें: नंदीग्राम और रेजीनगर में मतदान 6 अक्टूबर 2026 को होगा और नतीजे 9 अक्टूबर को आएंगे। नंदीग्राम में संचिता प्रधान डे की उम्मीदवारी वापस होने के बाद कांग्रेस के मिलन प्रधान को ममता बनर्जी खेमे का समर्थन मिला है। रेजीनगर में रबीउल आलम चौधरी ने चुनाव से हटने की घोषणा के कुछ घंटे बाद चुनाव लड़ने का फैसला बरकरार रखा। दोनों सीटों पर गिरफ्तारियों और पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी जारी हैं।

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मोहन यादव का Congress और Gandhi परिवार पर तीखा हमला; बोले—‘समुद्र बीच में न होता तो अरब देशों से चुनाव लड़ते’

आगर मालवा, 14 सितंबर 2026: Madhya Pradesh के Chief Minister Mohan Yadav ने Congress और Nehru-Gandhi परिवार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। Agar Malwa में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने Gandhi परिवार की चुनावी राजनीति पर तंज कसते हुए कहा कि “अगर समुद्र बीच में नहीं आता तो ये अरब देशों से भी चुनाव लड़ते।” उनका बयान Rahul Gandhi के आगामी Madhya Pradesh दौरे से पहले आया है। Rahul Gandhi के Indore कार्यक्रम पर साधा निशाना Rahul Gandhi 19 September को Indore में ‘Chhatron Ki Goonj’ कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले हैं, जहां वे students से education system और उनकी समस्याओं पर बातचीत करेंगे। Mohan Yadav ने इस programme पर तंज कसते हुए इसे “Jhooth Ki Goonj” करार दिया और आरोप लगाया कि Congress युवाओं को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है। Gandhi परिवार की Seats को लेकर किया तंज CM Yadav ने Gandhi family के अलग-अलग constituencies से चुनाव लड़ने का जिक्र करते हुए Amethi और Rae Bareli का उदाहरण दिया। इसी दौरान उन्होंने कहा कि अगर भौगोलिक सीमाएं बाधा न होतीं तो Gandhi परिवार दूसरे देशों से भी चुनाव लड़ सकता था। उनके इस बयान को Congress leadership के political constituencies बदलने पर कटाक्ष के तौर पर देखा जा रहा है। Rahul Gandhi को लेकर ‘Pappu’ टिप्पणी Mohan Yadav ने Rahul Gandhi पर व्यक्तिगत तंज भी किया और उन्हें ‘Pappu’ कहकर संबोधित किया। उन्होंने दावा किया कि Congress leadership सरकार की development policies और technological progress को स्वीकार नहीं करना चाहती। Modi Government की योजनाओं की तारीफ अपने भाषण में CM Yadav ने Centre और Madhya Pradesh की BJP सरकार की योजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने housing schemes, student laptops और महिलाओं के लिए Ladli Behna Yojana को सरकार की उपलब्धियों के रूप में पेश किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि India की welfare और technology-based governance की नीतियां अब दूसरे देशों के लिए भी उदाहरण बन रही हैं। Congress ने किया पलटवार Madhya Pradesh Congress ने Mohan Yadav की टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। Congress नेता Jitu Patwari ने मुख्यमंत्री से विपक्षी नेताओं के बारे में बोलते समय पद की गरिमा बनाए रखने को कहा। वहीं Congress नेता PC Sharma ने तंज कसते हुए कहा कि जिन्हें BJP पहले ‘Pappu’ कहती थी, अब वही Rahul Gandhi उसके लिए ‘Papa’ बन गए हैं। source – Navbharat Times / Times of India / ANI जय राष्ट्र न्यूज़

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BRICS Summit से पहले Delhi की झुग्गियों पर पर्दे, Pawan Khera ने Centre को घेरा

नई दिल्ली, 12 सितंबर 2026: 18th BRICS Summit के बीच Congress के Rajya Sabha MP Pawan Khera ने Delhi में कुछ slum clusters और low-income areas के सामने बड़े पर्दे और temporary barricades लगाए जाने को लेकर Centre पर हमला बोला है। Khera ने आरोप लगाया कि सरकार गरीबी की वास्तविकता से निपटने के बजाय उसे विदेशी मेहमानों की नजरों से छिपाने की कोशिश कर रही है। ‘Modi की नाकामियों पर पड़ा पर्दा पसंद है’ Pawan Khera ने social media platform X पर एक video share करते हुए BJP पर तंज कसा। उन्होंने ‘hijab’ का जिक्र करते हुए कहा कि BJP को हर तरह का पर्दा आपत्तिजनक नहीं लगता और सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने वाले पर्दे को पसंद करती है। प्रमुख Routes पर लगाए गए Screens Reports के मुताबिक BRICS Summit से पहले Delhi के कुछ प्रमुख transit routes के आसपास large curtains और temporary barriers लगाए गए हैं, जिनके पीछे slum clusters और low-income neighbourhoods मौजूद हैं। इस कदम को लेकर Congress और AAP दोनों ने Centre पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि international delegates के सामने Delhi की गरीबी को छिपाने की कोशिश की जा रही है। AAP भी उठा चुकी है सवाल इससे पहले Aam Aadmi Party ने भी screens लगाए जाने पर Centre की आलोचना की थी। AAP ने कहा था कि पर्दे लगाने से जमीन पर मौजूद वास्तविकता नहीं बदल सकती। Delhi में बड़े international events से पहले slum areas के सामने screens या covers लगाए जाने को लेकर पहले भी राजनीतिक विवाद होते रहे हैं। Delhi में जारी है 18th BRICS Summit India 12 और 13 सितंबर को New Delhi में 18th BRICS Summit की मेजबानी कर रहा है। Summit में expanded BRICS grouping के नेताओं की बैठकें हो रही हैं और global governance, cooperation तथा sustainability जैसे मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। Centre की प्रतिक्रिया का इंतजार Pawan Khera के आरोपों पर इस report के प्रकाशित होने तक Centre की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। विपक्ष ने मांग की है कि सरकार गरीबी को पर्दे के पीछे छिपाने के बजाय लोगों की living conditions सुधारने पर ध्यान दे। source – Times of India / Pawan Khera X Post जय राष्ट्र न्यूज़

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Parliament Prorogation में देरी पर Congress ने Centre को घेरा, Delimitation Bill को लेकर लगाए गंभीर आरोप

नई दिल्ली, 11 सितंबर 2026: Parliament के Monsoon Session को adjourned sine die किए जाने के 29 दिन बाद भी prorogue नहीं किए जाने को लेकर Congress ने Centre पर निशाना साधा है। Congress महासचिव Jairam Ramesh ने आरोप लगाया कि सरकार Delimitation से जुड़े Constitution Amendment Bill को पास कराने के लिए Lok Sabha में जरूरी two-thirds majority जुटाने की कोशिश कर रही है। Prorogation में 29 दिन की देरी Jairam Ramesh के मुताबिक Parliament को 13 अगस्त को adjourned sine die किया गया था, लेकिन 11 सितंबर तक formal prorogation नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर adjournment और prorogation के बीच केवल तीन से चार दिन का अंतर रहता है। उन्होंने 2015 के Monsoon Session का भी जिक्र किया, जब यह अंतर 28 दिन था। इस बार यह अवधि बढ़कर 29 दिन हो गई है। Delimitation Bill से जोड़ा मामला Congress ने आरोप लगाया कि Home Minister Lok Sabha में Delimitation से जुड़े Constitution Amendment Bill के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। Jairam Ramesh ने दावा किया कि 17 अप्रैल को Bill के खिलाफ वोट करने वाली तीन पार्टियों में विभाजन हुआ है और कुछ अन्य सांसदों का रुख बदलवाने की कोशिश की जा रही है। ये आरोप Congress की ओर से लगाए गए हैं। April में Bill को नहीं मिला था जरूरी बहुमत 17 अप्रैल 2026 को Delimitation से जुड़े Constitution Amendment Bill पर Lok Sabha में हुए मतदान में 528 MPs ने वोट किया था। इनमें 298 ने समर्थन और 230 ने विरोध किया था। Bill को दो-तिहाई बहुमत के लिए 352 वोटों की जरूरत थी, इसलिए प्रस्ताव पास नहीं हो सका। All-Party Meeting की मांग Congress ने Centre से Delimitation के मुद्दे पर All-Party Meeting बुलाने की मांग दोहराई है। पार्टी का कहना है कि देश के प्रतिनिधित्व से जुड़े इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक सहमति बनाई जानी चाहिए। source – Times of India / PTI जय राष्ट्र न्यूज़

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Mallikarjun Kharge ‘Shuddhikaran’ विवाद में Uttarakhand Police की कार्रवाई, अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज

देहरादून, 9 सितंबर 2026: Congress President Mallikarjun Kharge की Haldwani rally के बाद Ramlila Maidan में कथित “shuddhikaran” को लेकर चल रहे विवाद में Uttarakhand Police ने करीब एक महीने बाद FIR दर्ज की है। Haldwani Kotwali में मामला अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया है और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। करीब 80 शिकायतें मिलीं Nainital SSP Manjunath TC के मुताबिक इस मामले को लेकर पूरे Uttarakhand से करीब 80 complaints और petitions मिली थीं। इनमें अकेले Nainital district से 19 शिकायतें थीं। Police ने legal scrutiny के बाद Haldwani की social activist और lawyer Anju की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की। उन्होंने police को घटना से जुड़े videos भी उपलब्ध कराए थे। SC/ST Act समेत इन धाराओं में Case FIR में Bharatiya Nyaya Sanhita की Sections 196 और 299 तथा SC/ST (Prevention of Atrocities) Act की Section 3(1)(r) लगाई गई है। ये provisions groups के बीच कथित वैमनस्य फैलाने, धार्मिक भावनाएं आहत करने और caste-based insult या humiliation से संबंधित हैं। FIR में फिलहाल किसी व्यक्ति को नामजद नहीं किया गया है। क्या है पूरा ‘Shuddhikaran’ विवाद? Mallikarjun Kharge ने 8 अगस्त को Haldwani के Ramlila Maidan में Congress rally को संबोधित किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि इसके बाद venue पर cleaning और कथित “shuddhikaran” ritual किया गया और इसके videos तथा photographs social media पर circulate किए गए। Congress ने इसे Kharge की Dalit identity से जोड़ते हुए caste discrimination और untouchability का मामला बताया है। आयोजकों ने Caste Motive से किया इनकार “Shuddhi Yagya” आयोजित करने वाले Shri Ram Sena Dharmarth Seva Nyas ने आरोपों से इनकार किया है। संगठन का कहना है कि कार्यक्रम का Mallikarjun Kharge की caste से कोई संबंध नहीं था और उसका उद्देश्य venue की सफाई तथा धार्मिक-सांस्कृतिक पवित्रता बहाल करना था। BJP ने भी इस आयोजन को करने वाले संगठन से दूरी बनाई है। Kharge ने Rajya Sabha में भी उठाया था मुद्दा Mallikarjun Kharge ने इस विवाद को Rajya Sabha में उठाते हुए कहा था कि इस घटना से उन्हें untouchability और humiliation का अहसास हुआ। उन्होंने BJP President J. P. Nadda को भी पत्र लिखकर मामले में कार्रवाई की मांग की थी। Senior Officer करेंगे Investigation मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच SP Crime Jagdish Chandra को सौंपी गई है। Police अब complaints, उपलब्ध videos और अन्य material की जांच कर यह पता लगाएगी कि कथित ritual के पीछे कौन लोग थे और क्या इसमें caste-based offence बनता है। source – The Indian Express / Uttarakhand Police जय राष्ट्र न्यूज़

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